आज हम आपको ऐसे व्यक्ति से मिलाने वाले हैं जो 1973 के बाद से अब तक नहीं सोया! पिछले 48 साल से नहीं सोया है। एक बार तेज बुखार हुआ और फिर नींद ही उड़ गई। जी हां, सच में वह नींद को भूल सा गया है। उसे जो बीमारी हुई, उसका कोई इलाज नहीं है। डॉक्टरों ने कहा कि यह अनिद्रा (स्लीप डिसऑर्डर) की बीमारी है और इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। हां, इतना जरूर है कि न सोने के कारण लिवर का फंक्शन कमजोर हो जाता है। हैरानी की बात है कि 50 किलोग्राम का बैग रोज 4 किमी तक ढोने के बाद भी उसे नींद या झपकी भी नहीं आती है। थेरेपी और नींद की दवा का उस पर कोई असर नहीं हुआ। इंटरनेट सेंसेशन इस अजूबे इंसान का नाम गोक थाई है और वियतनाम में एक जाना पहचाना नाम है।

थाई की कहानी 1973 से शुरू होती है। उन्हें लगने लगा कि नींद नहीं आ रही है तो घर और आसपास के लोगों को बताया। किसी ने यकीन नहीं किया। लोगों को लगा कि वह झूठ बोल रहे हैं या फिर सस्ती लोकप्रियता बटोरकर पैसे कमाना चाह रहे हैं। लेकिन धीरे-धीरे पूरी दुनिया को पता चल गया कि धरती पर एक ऐसा भी शख्स है जिसे नींद ही नहीं आती है। लोगों ने देखा कि वह रातभर बैठे रहते या फिर काम करते हुए समय बिता देते। पूरे वियतनाम में यह खबर जंगल में आग की तरफ फैली और फिर दुनिया की मीडिया में उनके बारे में खबरें आईं।वह वियतनाम में खेती करते हैं। दुनियाभर के लोग उन्हें पहचानने लगे कि लेकिन इस मेहनतकश किसान ने लाइमलाइट से दूरी बनाए रखी। दुनियाभर के डॉक्टर उनके पास आए और तमाम प्रयोग और इलाज की बातें शुरू हो गईं। उन्होंने सबको मना कर दिया और अपनी खेती-किसानी में जुटे रहे। बाद में काफी मनाने के बाद वह एक चैनल पर आने के लिए राजी हुए और उनके जीवन पर डॉक्यूमेंट्री भी बनी। वियतनाम और फिर बाद में पूरी दुनिया ने देखा कि कोई शख्स बिना नींद लिए कैसे जी रहा है?

अपनी कहानी सुनाते हुए थाई ने बताया कि जब वह 31 साल के थे, तब तेज बुखार हुआ था। शरीर इतनी तेज तप रहा था कि नींद ही नहीं आई। बुखार एक हफ्ते और बाद में एक महीने तक बना रहा। कुछ समय बाद बुखार तो उतर गया लेकिन वह फिर कभी सो नहीं सके। जल्द ही उन्हें पता चल गया कि वह अनिद्रा के शिकार हैं और उन्हें नींद नहीं आ रही है।

डॉक्टरों की मानें तो अनिद्रा यानी insomnia के ज्यादातर लक्षण में सोने की खराब आदतें, डिप्रेशन, चिंता, व्यायाम न करने, पुरानी गंभीर बीमार या फिर कुछ दवा के चलते ऐसा होता है। हैरानी की बात यह है कि अगर कोई व्यक्ति सो रहा है और थोड़ी सी भी अशांति पैदा होती है तो वह गुस्सा जाता है। कई तरह से व्यवहार में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। यह स्थिति एक तरह से मतिभ्रम की ओर ले जाती है।थाई ने एक बार किस्सा सुनाया था कि उन्हें बिना सोए 1 साल बीत चुके थे। एक समय उन्हें एहसास होने लगा कि वह ठंडे पड़ चुके हैं और एक कद्दू उनसे बात कर रहा है। जबकि वह अपने ही घर में बैठे थे। मतिभ्रम की इस एक घटना के अलावा उन्हें कोई दूसरा अलग लक्षण नहीं दिखाई दिया। उनके स्वास्थ्य पर भी कोई असर नहीं हुआ।

अगस्त 2022 में उनके बारे में आखिरी रिपोर्ट सामने आई थी। वह 79 साल के हैं और अब भी फिट और स्वस्थ हैं। उनका कहना है कि दवा, घरेलू नुस्खे और शराब पीने के बाद भी उन्हें एक पल के लिए भी कभी झपकी नहीं आई। जब पूरा गांव सो जाता है तब भी थाई अपने खेतों की देखरेख करते रहते हैं। काफी मेहनत करने के बाद भी उन्हें थकान महसूस नहीं होती है। गौर करने वाली बात यह भी है कि इतनी प्रसिद्धि मिलने के बाद भी थाई ने इसका कोई फायदा नहीं उठाया। वह कहते हैं कि मैंने कभी भी अपनी बीमारी को पैसा कमाने का जरिया नहीं बनाना चाहा। कई लोगों के जोर देने के बाद भी उन्होंने इलाज से इनकार कर दिया। जब उन्हें अस्पतालों में ले जाया गया तो डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए और कहा कि उनकी बीमारी का कोई इलाज नहीं है। आज भी वह बिना सोए एक किसान के तौर पर शांतिपूर्ण तरीके से अपना जीवन जी रहे हैं।

वैसे, इससे पहले भी अमेरिका के एक शख्स के बारे में जानकारी मिलती है जो अनिद्रा के कारण कई दशकों तक सो नहीं पाए। वजह कभी पता नहीं चल पाई। 94 साल की उम्र में 1947 में उनका निधन हो गया था। लेकिन इसके बाद के वर्षों में या कहें कि पिछली दो पीढ़ियों में इस तरह का मामला नहीं देखा गया।डॉक्टर सलाह देते हैं कि 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को 6 से 8 घंटे की नींद जरूरी है। बुजुर्गों को 8 घंटे की नींद लेना जरूरी बताया जाता है। कम सोने से पूरे दिन आप एक अलग तरह की सुस्ती का अनुभव कर सकते हैं। चेहरे पर मायूसी के भाव बने रहेंगे। कम से कम 6 घंटे और अधिकतम 10 घंटे से अधिक नहीं सोना चाहिए। आजकल मोबाइल, लैपटॉप पर ज्यादा समय ऐक्टिव रहने वाले लोगों के लिए अच्छी नींद जरूरी होती है। लगातार 8-10 घंटे लैपटॉप की स्क्रीन के सामने रहने से सिर दर्द और आंखों में जलन की भी शिकायत हो सकती है। डॉक्टर इससे बचने के लिए बीच-बीच में कुर्सी से उठने और स्क्रीन टाइम कम करने की सलाह देते हैं।