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कौन है राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख?

राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख भारत देश के महान व्यक्ति में से एक थे। नाना जी को मुख्य रूप से एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है। नानाजी ने भारत देश में फैली कुप्रथाओं को खत्म करने के लिए अनेक कार्य किए हैं। नानाजी ने भारत के ग्रामीण क्षेत्र को करीब से देखा था इस विकास के लिए उन्होंने अभूतपूर्व काम किए थे। गांव में सारी सुख सुविधा मिल सके इसके लिए नाना जी हमेशा तत्पर रहे थे। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों के जीवन को नाना जी ने एक नई रहा प्रदान की थी। नाना जी को देश-विदेश में बहुत सम्मान मिले हैं लेकिन 2019 में भारत सरकार द्वारा भारत देश का सबसे बड़ा पुरस्कार भारत रत्न से नाना जी को सम्मानित किया गया। नाना जी का पूरा नाम चंडीका दास अमृत दास देशमुख है और उनका प्रसिद्ध नाम नानाजी देशमुख है। नाना जी को 1999 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। इसके 20 साल बाद 2019 में नाना जी को भारत रत्न देने का फैसला लिया गया और भारत देश के विकास में नाना जी का बहुत ही योगदान है गांव में विकास की महत्वपूर्ण था लोगों को उन्हीं ने बताई है।

राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख का विशेष योगदान?

भारत देश के प्रथम ग्रामीण विश्वविद्यालय की स्थापना चित्रकूट में नाना जी के द्वारा ही की गई थी इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी थे नानाजी देशमुख ने मंथन नाम की पत्रिका का प्रकाशन भी शुरू किया था नाना जी ने भारत देश में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बहुत से कार्य किए थे शिक्षा को देश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानते थे देश में सभी को आसानी से शिक्षा मिल सके इसके लिए उन्होंने 1950 में उत्तर प्रदेश देश का पहले स्वरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय की स्थापना की थी।

भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख जी की जन्म जयंती के पावन अवसर पर दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा आज मध्यप्रदेश स्थित चित्रकूट में राज्य एवं जिला प्रशासन के सहयोग से विराट “ग्रामोदय मेला” एवं “शरदोत्सव” का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन माननीय केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने किया। इस आयोजन के विभिन्न आयामों पर एक विशेष स्मारिका ‘ग्रामोदय से राष्ट्रोदय’ को भी प्रकाशित किया गया।

हम अपने लिए नहीं, अपनों के लिए हैं-‘राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख

ग्रामोदय से राष्ट्रोदय” के राजमार्ग के शिल्पकार युगदृष्टा भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख ने एक बार कहा था कि, “हम अपने लिए नहीं, अपनों के लिए हैं, अपने वे हैं जो सदियों से पीड़ित एवं उपेक्षित हैं।” भारतरत्न नानाजी देशमुख का दृढविश्वास था कि जब 6.5 लाख गांवों में निवासरत ग्रामवासी सक्षम एवं समृद्ध होगें तभी देश समर्थ, समृद्ध तथा ऐश्वर्यशाली होगा। श्रद्धेय नानाजी की ग्रामोदय एवं स्वावलंबन की संकल्पना इसी विश्वास की परिणति है। इस परिकल्पना को माननीय प्रधानमंत्री जी नेतृत्व में केन्द्र सरकार की अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं से ग्रामीण विकास का स्वावलंबन एवं सर्वागीण व एकीकृत विकास में देश सर्वश्रेष्ठ स्थापित कर रहा है । इसी कड़ी में आज समाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की सफाई कर्मचारी ,पिछड़ा वर्ग ,अत्यंत पिछड़ा वर्ग ,अनुसूचित जाति /जनजाति को समर्पित जनकल्याणकारी योजनाओं व वित्तीय सहयोग से संबधित योजनाओं के लाभार्थियों द्वारा संबधित योजनाओं के बारे जन जागरूकता हेतू संवाद स्थापित किया गया ।

राष्ट्रऋषि नानाजी द्वारा स्थापित “दीनदयाल शोध संस्थान,” पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी प्रणीत “एकात्म मानव-दर्शन” को प्रत्यक्ष आकार देने हेतु चित्रकूट में 9 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक 4 दिवसीय विराट “ग्रामोदय मेला (ग्रामोदय से राष्ट्रोदय)” एवं “शरदोत्सव”का आयोजन कर रहा है। इसमे देश की सांस्कृतिक विरासत, प्रगति एव्म विकास ओ प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाएगा। राज्य शासन का सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग इस मेले में भागीदारी कर ग्रामीण युवाओं को स्व-रोजगार से जोड़ कर गाँवों को आत्म-निर्भर बनाने की दिशा में सहयोग करेगा।

माननीय केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री, डॉ. वीरेन्द्र कुमार‌ ने उपलक्ष्य पर कहा कि-

आज मध्यप्रदेश स्थित चित्रकूट में राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख की जयंति अवसर पर विराट ग्रामोदय मेला (ग्रामोदय से राष्ट्रोदय )में मंत्री जी की सहभागिता मुख्य आतिथ्य के रूप में परिपूर्ण कर वह गौरवान्वित महसूस कर रहे है।

मानवदर्शन के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की स्मृति में 1968 में भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख द्वारा स्थापित दीनदयाल शोध संस्थान विकास और सेवा का सहचर बना हुआ है।

देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। इन 75 वर्षों में देश में चतुर्दिक विकास किया पर विगत एक दशक में यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में तो आर्थिक, राजनैतिक एवं सामरिक रूप से भारत की प्रति विश्व में सर्वाधिक उल्लेखनीय रही तथा आत्मविश्वास से परिपूर्ण भारत विश्व में अपनी अग्रणी भूमिका निभा रहा है ।