रेलवे ने एक बार फिर AC टिकट महंगा कर दिया है! रेलवे बोर्ड ने फैसला किया है कि एसी थ्री इकॉनमी कोच का किराया बढ़ा दिया जाए। अब इन डिब्बों में भी यात्रियों को उतना ही पैसा चुकाना होगा, जितना कि एसी थ्री के यात्रियों को पैसे देने होते हैं। एसी 3 इकॉनमी कोच में सामान्य एसी थ्री कोच के मुकाबले बर्थ तो कम चौड़ी है ही, इसमें लेग स्पेस भी कम है।रेलवे बोर्ड से जारी एक कामर्शियल सर्कुलर के मुताबिक अब एसी 3 के इकोनोमी कोच को एसी थ्री कोच में यूनिफाई कर दिया गया है। मतलब कि दोनों कोच में अब बराबर किराया लगेगा। पहले एसी 3 इकॉनोमी कोच में सामान्य एसी 3 कोच के मुकाबले करीब आठ फीसदी किराया कम लगता था। हालांकि एसी 3 इकॉनोमी कोच में पहले बेड लिनेन मतलब कंबल और चादर नहीं मिलते थे। बीते 20 सितंबर से ही इन कोचों में कंबल चादर की व्यवस्था की गई है।

अभी तक देश में जो भी एलएचबी (LHB) प्लेटफार्म के एसी कोच चल रहे हैं, उनमें अधिकतम 72 बर्थ की व्यवस्था है। लेकिन इस एसी 3 इकॉनमी कोच में 83 बर्थ की व्यवस्था है। मतलब कि सामान्य एसी थ्री कोच से 11 बर्थ ज्यादा। इतने अतिरिक्त बर्थ लग सके, इसके लिए पहले से लग रहे बर्थ की चौड़ाई कम की गई है। हर कूपे में थोड़ा लेग स्पेस भी घटाया गया है ताकि एक अतिरिक्त कूपा बनाने के लिए जगह निकल सके। इसके अलावा कोच से लिनेन स्टोर और हॉट केस भी हटा दिए गए हैं।

रेलवे बोर्ड के सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि एसी थ्री इकॉनमी कोच में अंतिम तीन बर्थ पर किसी यात्री की बुकिंग नहीं होगी। इस डिब्बे में अंतिम तीन बर्थ का नंबर 81, 82 और 83 है। इन बर्थ पर पैसेंजर की बुकिंग ब्लॉक कर दी जाएगी। उसी जगह को घेर कर लिनेन का स्टोर रूम बना दिया गया है। इसी में कंबल और चादरों के बैग स्टॉक किए जाएंगे।रेल मंत्रालय के सर्कुलर में इस बारे में कोई स्पष्ट तारीख नहीं दी गई है। हालांकि, उसमें बताया गया है कि यह बदलाव एडवांस रिजर्वेशन पीरियड से लागू हो जाएगा। मतलब कि अब आप किसी ट्रेन के एसी थ्री इकॉनमी कोच में रिजर्वेशन कराना चाहें तो नहीं होगा। आपको जबरन एसी थ्री कोच में ही रिजर्वेशन कराना होगा। भले ही आपकी बर्थ एसी 3 इकॉनमी कोच में क्यों नहीं अलॉट की जाए।

जब इस डिब्बे को जर्मन तकनीक वाले एलएचबी प्लेटफार्म पर विकसित किया गया था, तब बताया गया था कि इन डिब्बों में सामान्य एसी थ्री कोच के मुकाबले 15 फीसदी 11 Bearth सीटें ज्यादा हैं।जब इस डिब्बे को जर्मन तकनीक वाले एलएचबी प्लेटफार्म पर विकसित किया गया था, तब बताया गया था कि इन डिब्बों में सामान्य एसी थ्री कोच के मुकाबले 15 फीसदी 11 Bearth सीटें ज्यादा हैं। इसलिए इसमें सामान्य एसी थ्री कोच के मुकाबले करीब 8 फीसदी कम किराया लगेगा। यदि स्लीपर क्लास के किराए से तुलना करें तो इसका बेस फेयर सामान्य मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के स्लीपर क्लास के किराए का 2.4 गुना ज्यादा था। वहीं रिजर्वेशन फीस, सुपरफास्ट सरचार्ज और जीएसटी जैसे चार्ज 3 टीयर एसी कोच जितने ही लगते थे। इसलिए इसमें सामान्य एसी थ्री कोच के मुकाबले करीब 8 फीसदी कम किराया लगेगा। यदि स्लीपर क्लास के किराए से तुलना करें तो इसका बेस फेयर सामान्य मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के स्लीपर क्लास के किराए का 2.4 गुना ज्यादा था। वहीं रिजर्वेशन फीस, सुपरफास्ट सरचार्ज और जीएसटी जैसे चार्ज 3 टीयर एसी कोच जितने ही लगते थे।

एसी-3 इकॉनोमी के डिब्बों की बात करें, तो इस कोच के बर्थ काफ़ी हल्के लेकिन मज़बूत बनाए गए हैं। हर केपे में स्नैक्स टेबल की व्यवस्था की गई है।हर बर्थ के साथ मोबाइल या लैपटॉप चार्जिंग के लिए पोर्ट दिए गए हैं।जब इस डिब्बे को जर्मन तकनीक वाले एलएचबी प्लेटफार्म पर विकसित किया गया था, तब बताया गया था कि इन डिब्बों में सामान्य एसी थ्री कोच के मुकाबले 15 फीसदी 11 Bearth सीटें ज्यादा हैं। इसलिए इसमें सामान्य एसी थ्री कोच के मुकाबले करीब 8 फीसदी कम किराया लगेगा। यदि स्लीपर क्लास के किराए से तुलना करें तो इसका बेस फेयर सामान्य मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के स्लीपर क्लास के किराए का 2.4 गुना ज्यादा था। वहीं रिजर्वेशन फीस, सुपरफास्ट सरचार्ज और जीएसटी जैसे चार्ज 3 टीयर एसी कोच जितने ही लगते थे। हर बर्थ के साथ रिडिंग लाइट भी लगाया गया है। ऊपर के बर्थ पर चढने के लिए बेहतर सीढ़ियां बनाई गई हैं। कोच में फायर अलार्म सिस्टम की भी व्यवस्था है। दिव्यांगों के लिए चौड़े दरवाज़ रखे गए हैं ताकि व्हील चेयर को अंदर तक लाया जा सके।