आज हम आपको मुरुगन के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने राजीव गांधी की हत्या में शामिल लोगों का साथ दिया था!  देश के लिए सदमे वाला दिन। वह तारीख जो हर भारतीय को झकझोरती है। तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर की चुनावी रैली में महिला आत्मघाती हमलावर ने खुद को विस्फोट से उड़ाकर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी थी। उसकी पहचान धनु के रूप में हुई। पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को आरोपी बनाया जिनमें नलिनी, मुरुगन, संथन, रॉबर्ट पायस, पेरारिवलन शामिल थे। टाडा अदालत ने 1998 में पेरारिवलन, नलिनी, मुरुगन को मौत की सजा सुनाई। कुछ साल बाद 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गांधी हत्याकांड में नलिनी श्रीहरन और पांच अन्य दोषियों को समय से पहले रिहा करने का निर्देश पिछले दिनों दिया। इनकी रिहाई के बीच राजीव गांधी के हत्यारों के सभी किरदारों की चर्चा हो रही है। राजीव गांधी के हत्यारों को पकड़ने की 90 दिनों की रोमांचक कहानी लेखक अनिरुद्ध मित्र ने अपनी किताब 90 Days में विस्तार से लिखी है।

मुरुगन श्रीहरन राजीव गांधी की हत्या के वक्त सिर्फ 21 साल का था। लिट्टे की खुफिया ब्रांच के एक सदस्य ने मुरुगन को युद्ध में प्रयोग होने वाले बम बनाने की खास ट्रेनिंग दी थी। देखते ही देखते वह अपनी टीम एक महत्वपूर्ण सदस्य बन गया और विस्फोट के लिए एक्सपर्ट के तौर पर जाना जाने लगा। LTTE के खुफिया प्रमुख पोट्टू अम्मान की नजर मुरुगन पर थी और उसे भी एक खास मिशन के लिए पोट्टू अम्मान की ओर से ही चुना गया। मिशन था राजीव गांधी की हत्या। मुरुगन को शिवरासन की मदद से भारत भेजा गया। मुरुगन शिवरासन के साथ मद्रास (चेन्नई) आया और मानव बम की तैयारी में जुट गया। खास मिशन के दौरान मुरुगन को नलिनी नाम की एक स्थानीय लड़की से प्यार हो गया, उसने उसे भी अपनी योजना में शामिल कर लिया और बाद में उससे शादी कर ली। राजीव गांधी हत्या की जांच करने वाली टीम की ओर से मुरुगन को लेकर कहा गया ‘एक आतंकवादी जो रोमियो बन गया’।

मुरुगन के संपर्क में नलिनी फरवरी 1991 में आई। मुरुगन श्रीलंकाई था और उसके प्यार में नलिनी ने अपना रास्ता बदल दिया। मुरुगन ने नलिनी को ऐसा बदला कि वह लिट्टे के संघर्ष में शामिल हो गई। नलिनी अब उस रास्‍ते पर इतनी आगे बढ़ चुकी थी जहां से उसका लौटना मुश्किल था। वह उस टीम का हिस्‍सा बन गई जिसने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्‍या की पूरी स्क्रिप्‍ट लिखी। तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में 21 मई 1991 को राजीव गांधी को एक चुनावी सभा में खत्म करने का प्लान बना था। इस प्लान में मुरुगन के साथ नलिनी भी शामिल हो गई थी। राजीव गांधी की हत्‍या के बाद अगले कई दिनों तक नलिनी मुरुगन के साथ फरार रही। 14 जून 1991 को इंवेस्‍ट‍िगेशन टीम ने नलिनी को मुरुगन के साथ पकड़ लिया लेकिन तब तक मुरुगन ने नलिनी से शादी कर ली थी।

नलिनी का साथ मुरुगन को मिला जिसकी वजह से पूरी साजिश कामयाब हुई। बताया जाता है बम बनाने में इस्तेमाल के लिए स्थानीय स्तर पर आरडीएक्स खरीदकर नलिनी ने सबको चौंका दिया था। राजीव गांधी की हत्या के बाद नलिनी और उसकी मां पद्मा को लेकर मुरुगन तिरुपति मंदिर गया जहां उसने नलिनी से शादी कर ली। राजीव गांधी की हत्या का फुलप्रूफ प्लान बनाया गया था। राजीव गांधी को मारने से पहले 2 बार इसका रिहर्सल भी किया गया। एक बार जयललिता की रैली तो दूसरी बार राजीव गांधी की हत्या से पहले वीपी सिंह की रैली में ऐसा किया गया। धनु रिहर्सल से ये देखना चाहती थी कि क्या बड़े नेता के पास कड़ी सुरक्षा के बीच पैर छुए जा सकते हैं।

मुरुगन आमतौर पर कम बोलता था। उसके साथी भी इस बात को कहते थे। मुरुगन को जब उसकी पत्नी नलिनी के साथ गिरफ्तार किया गया तब उससे कुछ भी उगलवाना मुश्किल था। मुरुगन लगभग तीन दिनों तक पूछताछ में कुछ भी नहीं बोला। पूछताछ के दौरान जब एक अधिकारी ने उसे थप्पड़ मारा तो मुरुगन ने सबके सामने उनसे कहा कि रिहा होने के बाद वह उन्हें मार डालेगा। मुरुगन एकमात्र आरोपी था जिसने मद्रास के मल्लिगाई में एसआईटी ऑफिस से भागने की कोशिश की थी। उसकी मौत की सजा को मई 1999 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था। हालांकि उसकी दया याचिका पर फैसला करने में केंद्र की ओर से ग्यारह साल की देरी का हवाला देते हुए उसकी याचिका पर फरवरी 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे उम्रकैद में बदल दिया गया था।