हाल ही के दिनों में अखिलेश यादव से शिवपाल यादव मिलने पहुंचे! उत्तर प्रदेश में सबसे मजबूत राजनीतिक घराने में विरोध के दो ध्रुव बन गए अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव एक बार फिर से मिले हैं। मुलाकात के बाद अखिलेश ने फोटो ट्वीट कर लिखा- नेताजी और घर के बड़ों के साथ-साथ मैनपुरी की जनता का भी आशीर्वाद साथ है। मुलायम सिंह यादव के बाद उनकी विरासत को लेकर पिछले कुछ साल से चाचा और भतीजे के बीच अनबन की खबरें आती रहती हैं। कभी मनमुटाव, कभी बयानबाजी तो कभी एक साथ मिल बैठने की रस्म अदायगी के बीच एक सवाल जो मौजूं बना हुआ है, वह है कि क्या यादव परिवार में चल रही रस्साकशी क्या अब समाप्त हो गई है? क्या अखिलेश और शिवपाल के बीच डील हो गई है? अखिलेश एक बार फिर चाचा शिवपाल से मिले हैं। साथ में डिंपल यादव और आदित्य यादव भी मौजूद रहे। वजह है मुलायम की विरासत का सम्मान। सपा संस्थापक मुलायम के निधन के बाद खाली हुई मैनपुरी लोकसभा की सीट पर उपचुनाव होने जा रहा है। डिंपल यहां से सपा की प्रत्याशी हैं। अखिलेश और शिवपाल की ये मुलाकात करीब एक घंटे चली। दोनों के बीच मैनपुरी चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। मैनपुरी लोकसभा सीट को बचाने के लिए पूरा परिवार एक हो गया है। शिवपाल सपा की तरफ से स्टार प्रचारक भी बने हैं।

2012 में सपा की सरकार बनने के बाद मुलायम ने बेटे अखिलेश को आगे कर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा दिया। कुछ समय के बाद से ही अखिलेश की चाचा शिवपाल से अनबन शुरू हो गई, जो मुलायम के समय सपा में नंबर 2 की हैसियत रखा करते थे। दोनों के बीच खींचतान बढ़ती रही। यहां तक कि चाचा शिवपाल ने सपा से अलग होकर अपनी अलग पार्टी प्रसपा तक बना ली। चाचा-भतीजे में गाहे-बगाहे वार-पलटवार चलता रहा। हालांकि मुलायम आखिरी समय तक पूरे परिवार को एकसूत्र में बांधे रखने की कोशिश में लगे रहे।

इस साल हुए यूपी विधानसभा चुनाव से पहले भी अखिलेश और शिवपाल ने साथ आने की कोशिश की। दोनों साथ आए भी। लेकिन अखिलेश ने शिवपाल की तरफ से मांगे जा रहे 100 सीटों की मांग को पूरा नहीं किया। चाचा को केवल जसवंतनगर विधानसभा सीट दी गई, जहां से शिवपाल खुद मैदान में उतरे। जाहिर है शिवपाल नाराज रहे और आधे-अधूरे मन से चुनावी जिम्मेदारियों को पूरा किया। लेकिन फिर से उनकी नाराजगी की खबरें आती रहीं।

विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश ने शिवपाल से मुलाकात की और दोनों की तस्वीर भी सामने आई। लेकिन उचित सम्मान नहीं मिलने की वजह से शिवपाल नाराजगी जाहिर करते रहे। वह अपनी प्रसपा को लेकर भी सक्रिय रहे और रह-रहकर ऐसे बयान आते रहे, जिससे अखिलेश और सपा में महत्व को लेकर गुस्सा सामने आता रहा। कृष्ण जन्माष्टमी के समय शिवपाल ने लेटर जारी किया, जिसमें भगवद्गीता का उल्लेख कर यादव समाज से अनूठी अपील कर डाली। पिता को अपमानित कर पद से हटाने वाले कंस का जिक्र करते हुए मानो वह महाभारत के मूड में नजर आ रहे थे।

हालांकि इस बीच साधना गुप्ता और फिर मुलायम के निधन के वक्त परिवार में एकता नजर आई। शिवपाल और अखिलेश भी साथ-साथ नजर आए। इसके बाद बात मुलायम के निधन से खाली हुई मैनपुरी सीट को लेकर आई। शिवपाल इस फिराक में थे कि उन्हें मुलायम की सीट पर वरीयता मिलेगी। लेकिन मंथन के बाद अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को प्रत्याशी बनाया गया। चाचा का मूड एक बार फिर से खराब होता दिखा। उन्होंने सभा में बयान देते हुए अखिलेश को चापलूसों से घिरा करार दिया। लेकिन यादव बाहुल्य मैनपुरी में शिवपाल एक ऐसा फैक्टर हैं, जिसे अखिलेश अनदेखा नहीं कर सकते हैं। सैफई में बुधवार को शिवपाल सिंह की कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग हुई। बैठक संपन्न होने के बाद पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि शिवपाल सिंह यादव ने डिंपल का समर्थन करते हुए कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से कहा कि, बहू डिंपल के लिए वोट करो, वो हमारी बहू है उसके लिए लगना है।’ इससे पहले तेज प्रताप यादव ने भी मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि पूरा परिवार एकजुट है, वो स्टार प्रचारक हैं। कहीं किसी तरह की कोई बात नहीं है। बीजेपी के लोग तरह-तरह की बातों को हवा दे रहे हैं।

मैनपुरी लोकसभा में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें भोगांव, किशनी (सुरक्षित), करहल, मैनपुरी और जसवंतनगर शामिल हैं। इस साल फरवरी-मार्च में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों पर गौर करें तो मुकाबला करीब-करीब टक्कर का ही रहा। यहां करहल और किशनी सीट समाजवादी पार्टी के खाते में गई, जबकि भोगांव और मैनपुरी सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की। जसवंतनगर सीट से शिवपाल सिंह यादव विजयी हुए। लोकसभा में यहां से मुलायम और उनके परिवार के भतीजे चुनाव जीतते आ रहे हैं। लेकिन 2019 में हुए पिछले चुनाव के आंकड़े कुछ दिलचस्प हैं। यादव और शाक्य बहुलता वाले मैनपुरी में भाजपा ने मुलायम के मुकाबले प्रेम सिंह शाक्य को उम्मीदवार बनाया था। यहां मुलायम को जीत तो मिल गई लेकिन यह एकतरफा नहीं रही। कुल प्रतिशत पर वोट डालें तो मुलायम को 52% वोट हासिल हुए, जबकि प्रेम शाक्य उनसे महज 8 फीसदी पीछे 44% वोट शेयर लेकर दूसरे नंबर पर रहे।

मैनपुरी की सभी 5 विधानसभा सीटों का विश्लेषण करें तो 2019 के पिछले लोकसभा चुनाव में शाक्य ने मुलायम को लगभग सभी क्षेत्र में टक्कर दिया था। मैनपुरी विधानसभा में प्रेम सिंह शाक्य महज 5 हजार वोट से मुलायम से पीछे रहे, जबकि भोगांव में उन्होंने मुलायम से 26 हजार वोट अधिक पाए। किशनी की सुरक्षित सीट पर जहां मुलायम को 92 हजार वोट मिले। वहीं शाक्य ने 80 हजार वोट अपनी झोली में डाले। यादव बहुल करहल सीट पर शाक्य को 80 हजार वोट मिले, जबकि समाजवादी नेता के खाते में एक लाख 18 हजार वोट आए। इन चारों सीटों पर मुकाबला लगभग बराबरी का रहा। ऐसे में निर्णायक साबित हुई। शिवपाल सिंह यादव का जसवंतनगर इलाका शिवपाल के गढ़ से मुलायम को एक लाख 57 हजार वोट हासिल हुए, जबकि शाक्य 75 हजार से अधिक वोट से पीछे रहे। अखिलेश ऐसे में शिवपाल की नाराजगी मोल लेना नहीं चाहेंगे।