कोराना महामारी से देश भर के लाखों लोग परिचित ही होंगे और अभी हम कोरोना महामारी से हुई त्रासदी से उबर भी नहीं पाए थे कि मंकीपॉक्स जैसा वायरस दोबारा अपने देश में पैर पसार रहा है। कोरोना महामारी ने व्यापक स्तर पर लोगों के जीवन की व्यवस्था को खराब कर दिया था। नौकरियां चली गई परिवार के सदस्य छूट गए। शिक्षा चरमरा गई तथा पूरी अर्थव्यवस्था चरमरा सी गई थी। क्योंकि कोरोना महामारी से बचने के लिए लॉकडाउन लगा दिया गया था जिसके चलते इन समस्याओं का सामना करना पड़ा था।अभी भी हमें इन महामारी से छुटकारा नहीं मिला है परंतु मंकीपॉक्स को अभी महामारी घोषित नहीं किया गया है। मंकीपॉक्स एक अन्य वायरस की तरह है जो कि धीरे-धीरे अपने पैर पसार रहा है।
दिल्ली में मंकीपॉक्स का खतरा बढ़ता ही जा रहा है आपको बता दें कि बीते दिनों दिल्ली में मंकीपॉक्स का एक और मरीज मिला है जिसकी उम्र 35 वर्ष की है। 35 साल का यह शख्स नाइजीरिया का है लेकिन फिलहाल दिल्ली में रहता है यह हाल ही में कोई विदेशी यात्रा पर भी नहीं गया था। आपको बता दें कि दिल्ली में मंकीपॉक्स वायरस का यह दूसरा मामला है। 35 वर्ष का यह व्यक्ति फिलहाल दिल्ली में ही रहता है।यह हाल में कहीं विदेश यात्रा पर भी नहीं गया था। देश में मंकीपॉक्स के कुल 5 केसो की पुष्टि हो चुकी है जिसमें एक मरीज की मौत हो गई है।
राजस्थान में भी मेला केस-
मंकीपॉक्स वायरस का केस राजस्थान में भी देखने को मिला है। यहां मंकीपॉक्स के दो संदिग्ध मरीज सामने आए हैं। जिसमें पहला मरीज अजमेर और दूसरा भरतपुर का है। दोनों को जयपुर स्थित राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस में लाया गया है। फिलहाल मरीजों को आइसोलेशन में रखा गया है उनके सैंपल को आगे जांच के लिए पुणे भेजा गया है।
चलिए आपको बताते हैं कि मंकीपॉक्स वायरस आखिर है क्या?
क्या है मंकीपॉक्स वायरस-
कोरोना महामारी से जूझ रही दुनिया में एक नया संक्रमण फिर से फैल रहा है जिससे उबरने के लिए कई वैज्ञानिक चिंतित हैं। उस वायरस का नाम मंकीपॉक्स है। भारत में भी मंकीपॉक्स के कई मामले देखे जा चुके हैं परंतु ब्रिटेन, इटली, पुर्तगाल, स्पेन, स्वीडन और अमेरिका में लोग इससे संक्रमित अधिक मात्रा में पाए गए हैं। कनाडा ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस इस बीमारी के संभावित संक्रमण की जांच कर रहा है। जिसमें मृत्यु दर 10% हो सकती हैं। कुल मिलाकर मंकीपॉक्स के 100 से अधिक संदिग्ध और पुष्ट मामले सामने आए हैं।
मंकीपॉक्स मानव चेचक के समान एक दुर्लभ वायरल संक्रमण है यह पहली बार 1958 में शोध के लिए रखे गए बंदरों में पाया गया था। मंकीपॉक्स से होने वाले संक्रमण का पहला मामला 1970 में दर्ज किया गया था। यह मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय वर्षा वन क्षेत्रों में होता है और कभी-कभी अन्य क्षेत्रों में भी पहुंच जाता है।
संक्रामक रोगों पर सलाहकार डॉक्टर के अनुसार मंकीपॉक्स एक दुर्लभ जूनोटिक बीमारी है जो मंकीपॉक्स वायरस के संक्रमण के कारण होती हैं मंकीपॉक्स वायरस पाक्सविरिडे परिवार से संबंधित है जिसमें चेचक और चेचक की बीमारी पैदा करने वाले वायरस शामिल है।
क्या है बीमारी के लक्षण–
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मंकीपॉक्स आमतौर पर बुखार, दाने और गांठ के जरिए उभरता है और इससे कई प्रकार की चिकित्सा जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। रोग के लक्षण आमतौर पर दो 4 सप्ताह तक दिखते हैं जो अपने आप दूर होते चले जाते हैं। परंतु मामले गंभीर भी हो सकते हैं। हाल के समय में मृत्यु दर का अनुपात लगभग 3:00 से 6:00 प्रतिशत रहा है लेकिन यह 10% तक हो सकता है। संक्रमण के वर्तमान प्रसार के दौरान मौत का कोई मामला सामने नहीं आया है।
कैसे फैलता है मंकीपॉक्स-
मंकीपॉक्स वायरस किसी संक्रमित व्यक्ति या जानवर के निकट संपर्क के माध्यम से या वायरस से दूषित सामग्री के माध्यम से मनुष्य में फैलता है। यह चूहा चुहियों और गिलहरियों जैसे जानवरों से भी फैलता है। यह रोग घाव शरीर के तरल पदार्थ श्वसन बूंदों और दूषित सामग्री जैसे बिस्तर के माध्यम से फैलता है। वायरस चेचक की तुलना में कम संक्रामक है और कम गंभीर बीमारी का कारण बनता है। डॉक्टर्स के अनुसार कुछ संक्रमण यौनसंपर्क के माध्यम से भी संचालित हो सकते हैं। तभी डब्ल्यूएचओ कहा कि वह समलैंगिक या उभयलिंगी लोगों से संबंधित कई मामलों की भी जांच कर रही है।