हाल ही में आदित्य एल 1 अपनी मंजिल पर पहुंच चुका है! इसरो ने अंतरिक्ष में एक और उपलब्धि हासिल कर ली है। देश की पहली सोलर ऑबजर्वेटरी आदित्य-एल1 लैंगरंग प्वाइंट एल1 पर स्थापित हो चुकी है। यहां से अब अंतरिक्ष यान सूर्य को ‘आकाशीय सूर्य नमस्कार’ करेगा। खास बात है कि इसरो के इस जटिल मिशन को लीड करने वाली एक महिला हैं। प्रोजक्ट डायरेक्ट निगार शाजी वो नाम है जो आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। एक सौम्य और मुस्कुराती महिला जिन्होंने इस मिशन को सफल बनाने के लिए अपनी टीम के साथ आठ वर्षों तक अथक परिश्रम किया। इसरो के कई मिशनों में अहम भूमिका निभा रही 59 वर्षीया शाजी अब उन कई महिलाओं के लिए आदर्श बन गई हैं जो अंतरिक्ष विज्ञान में अपना करियर बनाना चाहती हैं। निगार शाजी ने 1987 में विशिष्ट अंतरिक्ष एजेंसी इसरो को जॉइन किया था। उन्होंने इसरो में अपना कार्यकाल आंध्र तट के पास श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष बंदरगाह पर काम के साथ शुरू किया था। बाद में उन्हें बेंगलुरु के यू आर राव सैटेलाइट सेंटर में स्थानांतरित कर दिया गया, जो उपग्रहों के विकास के लिए प्रमुख केंद्र है। इसरो के साथ कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक पूरा किया। शाजी इसरो में भरोसे का प्रतीक बन गईं। इसके बाद उन्हें भारत के पहले सौर मिशन के परियोजना निदेशक बनाया गया। शाजी पहले रिसोर्ससैट-2ए के सहयोगी परियोजना निदेशक भी रह चुकी हैं। यह प्रोजेक्ट अभी भी चालू है। शाजी सभी निचली कक्षा और ग्रहीय मिशनों के लिए प्रोग्राम डायरेक्टर भी हैं।
शाजी और उनकी टीम ने 2016 में आदित्य एल1 परियोजना पर काम करना शुरू किया। हालांकि 2020 के आसपास कोविड महामारी ने उनके काम को रोक दिया। उस समय इसरो की गतिविधियां लगभग रुक गईं, लेकिन प्रोजेक्ट का काम कभी नहीं रुका। उन्होंने और उनकी टीम ने सात वैज्ञानिक उपकरणों वाली सोलर ऑब्जर्वेटरी पर काम करना जारी रखा। मिशन आदित्य एल1 को पिछले साल 2 सितंबर को लॉन्च किया गया था। शाजी और उनकी टीम ने कई अभ्यासों के बाद पृथ्वी से L1 बिंदु की ओर अपनी पूरी यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यान पर कड़ी नजर रखी। उनकी कड़ी मेहनत के कारण, आदित्य-एल1 अंततः अपने गंतव्य, हेलो कक्षा तक पहुंच गया है। यहां से अंतरिक्ष यान बिना किसी बाधा या रुकावट के सूर्य का निरीक्षण करेगा।
शाजी का जन्म तमिलनाडु के तेनकासी जिले के सेनगोट्टई में एक मुस्लिम तमिल परिवार में हुआ। शाजी की स्कूली शिक्षा सेनगोट्टई में ही हुई। उन्होंने मदुरै कामराज विश्वविद्यालय के तहत तिरुनेलवेली के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया। उन्होंने यहां से इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। बाद में, उन्होंने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मिसरा से इलेक्ट्रॉनिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। शाजी के पिता शेख मीरान भी मैथ में ग्रेजुएट थे। हालांकि, उन्होंने अपनी पसंद से खेती की ओर रुख किया। हाल ही में एक इंटरव्यू में शाजी ने बताया था कि मेरे पिता ने मुझे हमेशा जीवन में कुछ बड़ा करने के लिए प्रेरित किया। मेरे माता-पिता दोनों ने मेरे पूरे बचपन में बहुत सहयोग किया। उनके निरंतर समर्थन के कारण, मैं इतनी ऊंचाइयों तक पहुंची।
अंतरिक्ष एजेंसी में लैंगिक भेदभाव के बारे में किसी भी गलतफहमी को दूर करते हुए शाजी ने कहा कि उन्हें इसरो में कभी भी लैंगिक भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा। उनका कहना है कि अपने सीनियर्स के लगातार सहयोग के कारण ही वह आज इस मुकाम तक पहुंच पाई हैं। शाजी कहती हैं कि टीम लीडर होने के नाते, अब कई लोग मेरे अधीन काम करते हैं। इसलिए, मैं उसी तरह तैयार होती हूं जैसे मेरे सीनियर्स ने मुझे तैयार किया। बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने सूर्य का अध्ययन करने के लिए देश के पहले अंतरिक्ष-आधारित मिशन ‘आदित्य एल1’ यान को आज पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर उसकी अंतिम गंतव्य कक्षा में स्थापित करने की तैयारी कर ली है। इसरो अधिकारियों के अनुसार, अंतरिक्ष यान पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के ‘लैग्रेंज प्वाइंट 1 एल 1 के आसपास एक ‘हेलो’ कक्षा में पहुंचेगा। ‘एल1 प्वाइंट’ पृथ्वी और सूर्य के बीच की कुल दूरी का लगभग एक प्रतिशत है। ‘लैग्रेंज प्वाइंट’ वह क्षेत्र है जहां पृथ्वी और सूर्य के बीच गुरुत्वाकर्षण निष्क्रिय हो जाएगा। ‘हेलो’ कक्षा, एल 1 , एल 2 या एल 3 ‘लैग्रेंज प्वाइंट’ में से एक के पास एक आवधिक, त्रि-आयामी कक्षा है। उन्होंने कहा कि ‘एल1 प्वाइंट’ के चारों ओर ‘हेलो’ कक्षा में उपग्रह से सूर्य को लगातार देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि इससे वास्तविक समय में सौर गतिविधियों और अंतरिक्ष मौसम पर इसके प्रभाव का अवलोकन करने में अधिक लाभ मिलेगा।
इसरो के एक अधिकारी ने शुक्रवार को कहा, ‘शनिवार शाम लगभग चार बजे आदित्य-एल1 को एल1 के चारों ओर एक ‘हेलो’ कक्षा में पहुंचा देगी। यदि हम ऐसा नहीं करते हैं, तो संभावना है कि यह शायद सूर्य की ओर अपनी यात्रा जारी रखेगा।’ इसरो के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी57 ने दो सितंबर को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र एसडीएससी के दूसरे प्रक्षेपण केंद्र से आदित्य-एल1 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया था। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष यान विभिन्न चरणों से होकर गुजरा और पृथ्वी के प्रभाव क्षेत्र से बचकर, सूर्य-पृथ्वी ‘लैग्रेंज प्वाइंट 1’ एल 1 की ओर बढ़ गया।