Friday, April 4, 2025
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क्या इजरायल की महिला सैनिकों ने भी उठाया है बीड़ा?

वर्तमान में इजरायल की महिला सैनिकों ने भी एक बीड़ा उठा लिया है! गाजा पर हमास के हैरान करने वाले हमले के बाद से ही इजरायल डिफेंस फोर्सेज आईडीएफ की तरफ से बमबारी जारी है। देश के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू ने हमास के अटैक के बाद युद्ध का ऐलान करते हुए इस संगठन को पूरी तरह से खत्‍म करने की कसम खाई है। कई पूर्व सैनिकों, रिजर्वबल अब युद्ध के लिए ड्यूटी पर वापस आ गए हैं। वहीं जो बात सबसे दिलचस्‍प है कि बॉर्डर पर आईडीएफ की महिला सैनिकों ने भी मोर्चा संभाला हुआ है। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि महिलाओं के लिए भारत की तरह इजरायल में भी सेना में एंट्री पाना आसान नहीं था। लेकिन जब साल 2018 में रिकॉर्ड महिलाओं ने आईडीएफ की कॉम्‍बेट यूनिट में हिस्‍सेदारी पाई तो एक इतिहास बन गया था। इजरायल सरकार के आंकड़ों के मुताबिक सन् 1962 से 2016 तक 535 महिला सैनिकों ने ऑन ड्यूटी जान गंवा दी थी। सन् 1947 से 1949 तक फिलिस्‍तीन के साथ जब युद्ध हुआ तो उस समय महिलाओं को अर्धसैनिकों की रैंक के तहत नियुक्‍त किया गया। सन् 1948 के अरब-इजरायल युद्ध के बाद सैनिकों की कमी के चलते कई महिला इजरायली सैनिकों को युद्ध के मैदान में भेजा गया। लेकिन इजरायल की सरकार ऐतिहासिक रूप से महिलाओं को युद्ध में जाने से प्रतिबंधित कर दिया था। इसके बजाय उन्‍हें कई तकनीकी और प्रशासनिक सहायता वाली भूमिकाओं में तैनात किया गया था। आईडीएफ की स्थापना के तुरंत बाद ही महिलाओं को फ्रंटलाइन से हटा दिया गया। कहा गया कि अक्‍सर दुश्‍मन महिला सैनिकों को पकड़ लेते और फिर उनका बलात्कार या यौन उत्पीड़न जैसे अपराधों को अंजाम देते।

सन् 2000 में इजरायल ने महिला समान अधिकार कानून में एतिहासिक संशोधन किया। इसके तहत इजरायल की मिलिट्री में महिला और पुरुषों को एक बराबर माना गया। साल 2001 में महिला सैनिकों ने वीमेन कोर जिसे हिब्रू में चायिल नाशिम कहते हैं, उसमें सेवा की। पांच साल की ट्रेनिंग के बाद इन्‍हें क्‍लर्क, ड्राइवर, वेलफेयर एक्टिविस्‍ट, नर्स, रेडियो ऑपरेटर, फ्लाइट कंट्रोलर जैसे पद मिलते थे। साल 2000 में कराकल की स्‍थापना हुई थी। यह देश की पहली बटालियन है जिसमें पुरुष और महिला सैनिक एक साथ लड़ते हैं। काराकल में 60 से 70 प्रतिशत महिलाएं हैं।

इस यूनिट का नाम रेगिस्तान में मिलने वाली बिल्ली की एक प्रजाति पर लड़ा है। यूनिट की स्थापना के साथ ही महिलाओं के लिए कॉम्‍बेट ड्यूटी के दरवाजे भी खुल गए। काराकल यूनिट को साल 2016 में इजरायल से लगे मिस्र के बॉर्डर पर तैनात किया गया था। इसका मकसद आईएसआईएस से लड़ना था। साल 2011 तक आईडीएफ ने 80 फीसदी महिला उम्‍मीदवारों को वरीयता और 69 फीसदी तक पद सौंपे गए। साल 2014 में जब गाजा पर युद्ध हुआ तो आईडीएफ ने दुनिया को बताया कि चार फीसदी से भी कम महिला सैनिकों को पैदल सेना, हेलीकॉप्‍टर या फाइटर पायलट जैसे पदों पर भर्ती किया गया था।

साल 2018 की गर्मियों में खबर आई कि करीब 1000 महिलाओं को आईडीएफ की कॉम्‍बेट यूनिट में शामिल किया गया था। देश के इतिहास में पहली बार था जब इतनी बड़ी संख्‍या में महिला सैनिकों को इतने अहम रोल में मंजूरी मिली थी। यह नया रिकॉर्ड तब बना सेना में महिला सैनिक ज्‍यादा से ज्‍यादा लड़ाकू भूमिकाओं को सफलतापूर्वक निभा रही थीं। सैन्य आंकड़ों के मुताबिक साल 2017 में कुल मिलाकर 1050 महिलाओं को कॉम्‍बेट यूनिट्स में शामिल किया गया था। उनमें से करीब 1000 नियुक्तियां गर्मियों में हुई थीं।

साल 2024 में तो आईडीउफ की तरफ से पायलट प्रोग्राम के तहत सेना की सबसे एलीट यूनिट सायरेट मटकल के अलावा दो और यूनिट्स में महिला कमांडोज को भर्ती किया जाएगा।पांच साल की ट्रेनिंग के बाद इन्‍हें क्‍लर्क, ड्राइवर, वेलफेयर एक्टिविस्‍ट, नर्स, रेडियो ऑपरेटर, फ्लाइट कंट्रोलर जैसे पद मिलते थे। साल 2000 में कराकल की स्‍थापना हुई थी। यह देश की पहली बटालियन है जिसमें पुरुष और महिला सैनिक एक साथ लड़ते हैं। काराकल में 60 से 70 प्रतिशत महिलाएं हैं। जून 2023 में इजरायल के हाईकोर्ट ने पूछा था कि आईडीएफ यह बताए कि उसने सभी इकाइयां महिलाओं के लिए क्यों नहीं खोलीं। आईडीएफ ने तब जवाब दिया था कि साल 2024 के अंत से महिला सैनिकों कई विशेष शारीरिक और मानसिक जांच से गुजर सकेंगी। इसके बाद उन्‍हें सायरेट मटकल कमांडो यूनिट में कॉम्‍बेट पोस्‍ट्स पर जिम्‍मेदारी दी जाएगी। सायरेट मटकल को दुनिया की एलीट कमांडो फोर्स में से एक माना जाता है। इसका अहम मकसद दुश्‍मन की खुफिया जानकारी जुटाना है।

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