Friday, April 4, 2025
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दक्षिण के कितने राज्य हैं बीजेपी के हाथ?

दक्षिणी भारत में कई राज्य ऐसे हैं जो आज भी बीजेपी के पास नहीं है! भारत में 2024 में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। आम जनता के लिए तो अभी काफी वक्त है, मगर राजनीतिक पार्टियों ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। बीजेपी के लिए कहा जाता है कि ये पार्टी ऐसी है जो साल के सभी 365 दिन चुनावी मोड में रहती है। 2024 के आम चुनाव में पीएम मोदी के मुकाबले विपक्ष का कोई चेहरा फिलहाल अभी तक तो नजर नहीं आ रहा। अगर ऐसा ही रहा तो बीजेपी के लिए फिल से बहुत ज्यादा मुश्किलें नहीं होंगी। बीजेपी दक्षिण भारत के चार राज्यों में दो राज्यों में तो अच्छा प्रदर्शन कर रही है, मगर केरल और तमिलनाडु में पार्टी का खाता भी नहीं खुलता नजर आ रहा है। बीजेपी के लिए दक्षिण भारत सबसे खास बना हुआ है।

साउथ इंडिया में भाजपा

आपको याद होगा कुछ दिनों पहले तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में बीजेपी ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की थी। इस बैठक से बीजेपी ने इशारा दिया था कि अब उनका अगला निशाना दक्षिण भारत ही होगा। बीजेपी तेलंगाना और कर्नाटक में अच्छा प्रदर्शन करने जा रही है। इसके कई कारण है। बीजेपी लगातार दक्षिण के राज्यों में ग्राउंड के नेताओं को अपने साथ जोड़ रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई को Y श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की है। के अन्नामलाई के बारे में विरोधी भले ही उनको जोकर कहते हों मगर तमिलनाडु के अंदर इस नेता ने कमाल की जमीन तैयार की है। अन्नामलाई संघर्ष करते हैं, राज्य सरकारों की नीतियों का बहिष्कार करते हैं, आंदोलन करते हैं। सड़कों पर हजारों कार्यकर्ताओं का हुजूम इकट्ठा करने का वो माद्दा रखते हैं।भाजपा के वोट बैंक में इस बार सात से आठ प्रतिशत सीधे-सीधे वोटबैंक बढ़ने का अनुमान है। आप सोच रहें होंगे कि वो कैसे। कुछ दिनों पहले ही देश में राष्ट्रपति चुनाव हुए हैं। एनडीए की ओर से उम्मीदवार थीं द्रौपदी मुर्मू। द्रौपदी मुर्मू को बीजेपी शासित राज्यों के अलावा अन्य राज्यों ने भी खूब वोट दिया। देश में पूरी आबादी का लगभग 8.6 प्रतिशत आदिवासी वोटर है। आदिवासी मुख्य रूप से भारतीय राज्यों उड़ीसा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान आदि में बहुसंख्यक व गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यक है जबकि भारतीय पूर्वोत्तर राज्यों में यह बहुसंख्यक हैं, जैसे मिजोरम। इन राज्यों का ज्यादातर आदिवासी वोट इस बार बीजेपी को जाना तय है।

तेलंगाना की बात करें तो यहां पर केसीआर को नुकसान हो रहा है। केसीआर को 2019 में 42 फीसदी वोट मिला था, अगर अभी चुनाव हो जाएं तो 34 फीसदी वोट ही उनको मिल रहे हैं। इसके अलावा बीजेपी को 2019 में सिर्फ 20 फीसदी वोट मिले थे मगर अब 39 फीसदी वोट मिलते हुए नजर आ रहे हैं। वहीं कांग्रेस को यहां भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कांग्रेस को 2019 में 30 फीसदी वोट मिले थे तो वहीं अब 14 फीसदी मिल रहे हैं। यानी की 16 फीसदी वोट कम हुआ है। तेलंगाना में कुल 17 सीटें हैं। जिसमें से केसीआर को 8 सीटें मिल सकती हैं। बीजेपी को यहां पर 6 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस को दो सीटें मिल रही हैं। ओवैसी की पार्टी को यहां पर एक सीट जोकि खुद ओवैसी की है। वो मिलती हुई नजर आ रही है।

आंध्र तमिल में नहीं खुल रहा खाता

आंध्र प्रदेश में बीजेपी का खाता खुलता नहीं दिखाई दे रहा है। यहां पर लोकसभा की 25 सीटें हैं। बीजेपी को एक भी सीट नहीं मिल रही है। यहां पर जगन मोहन रेड्डी को 19 सीटें मिलती हुईं नजर आ रही है। टीडीपी यानी चंद्र बाबू नायडू के खाते में 6 सीटें मिलती हुई नजर आ रही है। कर्नाटक में कुल 28 सीटें हैं। यहां पर बीजेपी कुल 23 सीटें जीतती हुई नजर आ रही है। यहां पर कांग्रेस को चार सीटें मिलती हुईं नजर आ रही है। एसडी कुमारस्वामी की बात करें तो उन्हें सिर्फ एक सीट ही मिल रही है।

तमिलनाडु में कुल 39 लोकसभा सीटें हैं। यहां पर यूपीए के खाते में 38 सीटें जाती हुईं नजर आ रही हैं। यहां पर एनडीए के खाते में सिर्फ एक सीट जाती हुई दिख रही है। तमिलनाडु में डीएमके की 25 सीटें, कांग्रेस की 7, सीपीआई की 2, सीपीएम की 2, वीसीके की एक, समेत कई पार्टियों का गठबंधन है। ये पार्टियां यूपीए में आती हैं। इसीलिए यहां पर आपको 38 सीटें जाती हुई दिख रही हैं। केरल में कुल 20 लोकसभा सीटे हैं। यहां पर भी बीजेपी का खाता नहीं खुल रहा है। केरल की 20 सीटें कांग्रेस के खाते में जाती हुई दिख रही हैं।

महाराष्ट्र में अगर आज चुनाव हो जाएं तो यहां भी पीएम मोदी का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। 2019 में जब लोकसभा चुनाव हुए थे तो बीजेपी को 28 फीसदी वोट मिले थे। अगर आज चुनाव होते हैं यहां पर बीजेपी को 36 फीसदी वोट मिलेगा। यानी की बीजेपी का वोट बैंक यहां पर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। वहीं अगर एकनाथ शिंदे गुट की बात करें तो 2019 में उनके साथ सात फीसदी वोट थे मगर अब एकनाथ शिंदे गुट को 17 फीसदी वोट मिलेंगे। महाराष्ट्र में 48 लोकसभा सीटें हैं। अगर आज चुनाव होंगे तो यहां पर 26 सीटें बीजेपी को मिल सकती हैं। तीन सीटें उद्धव ठाकरे गुट को मिलती हुई दिख रही है। एकनाथ शिंदे को 11 सीटें मिलती हुई नजर आ रही है। एनसीपी को 2019 में 16 फीसदी वोट मिले थे, अब उनको एक फीसदी वोट का लाभ मिल रहा है। सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है उद्धव ठाकरे को। उनका वोट बैंक तीन फीसदी तक सिमट गया है।

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