आज हम आपको पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की कहानी बताने जा रहे हैं! दिल्ली में राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक में जब उन्हें कारसेवकों के विरुद्ध कड़े कदम उठाने की सलाह दी गई तो उन्होंने बेहिचक यही बात कही। 30 अक्टूबर, 1990 को मुलायम सिंह यादव की सरकार ने आयोध्या में कारसेवकों पर गोलियां चलवाई थीं। अगले वर्ष 1991 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में मुलायम को मुख्यमंत्री की कुर्सी खोनी पड़ी और पहली बार बीजेपी को प्रदेश में अपना मुख्यमंत्री बनाने का मौका मिला। भाजपा ने इस पद के लिए कल्याण सिंह को चुना तो वो सीधे अयोध्या गए, राम लला का दर्शन करने। वहां उन्होंने अपना प्रण दुहराया- राम लला आपका मंदिर बनकर रहेगा, चाहे कुछ भी हो। कल्याण ने अपना संकल्प पूरा किया, भले ही उन्हें एक वर्ष में ही अपनी सरकार की आहुति देनी पड़ी। 5 जनवरी, 1932 को अलीगढ़ जिला स्थित अतरौली गांव में जन्मे कल्याण सिंह ने दुनियादारी की समझ होते ही राष्ट्रवाद का रास्ता चुन लिया। वो अपने स्कूली दिनों में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस से जुड़ गए। देश के लिए कुछ कर गुजरने की लालसा ने उनमें अथक परिश्रमी और अटल संकल्प का व्यक्तित्व गढ़ दिया। कल्याण वाचाल थे तो समाज और सियासत में उनकी पूछ होने लगी। कद बढ़ा तो पद भी बढ़ा। 1967 में पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा पहुंच गए और 10 साल बाद 1977 में पहली बार प्रदेश सरकार में मंत्री भी बने। 1980 के दशक शुरुआती दशक में जब विश्व हिंदू परिषद वीएचपी ने अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का आंदोलन चलाया तो कल्याण सिंह इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने लगे। वो हिंदुत्व का प्रमुख चेहरा बन गए, खासकर उत्तर प्रदेश में।
कल्याण जब 1991 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, तब तक भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या की रथयात्रा संपन्न हो चुकी थी। रथयात्रा को बिहार में रोककर आडवाणी को नजरबंद कर लेने के बावजूद राम मंदिर आंदोलन अपने उद्देश्य की तरफ बढ़ता रहा और 30 अक्टूबर, 1990 का वो दिन आया जब अयोध्या में कार सेवकों पर पुलिस ने गोलियां बरसा दीं। तब से मुलायम सिंह यादव की छवि मुल्ला मुलायम की बनने लगी। संभवतः मुलायम के कार सेवकों के प्रति इसी कठोर रवैये ने कल्याण सिंह को भी एक रास्ता सुझाया- किसी भी हद तक जाने का। उन्हें लगा कि अगर मंदिर बनने से रोकने वाले कुछ भी कर सकते हैं तो मंदिर बनाने की राह में आने वाली किसी बाधा की परवाह भला वो क्यों करें।
कल्याण सिंह की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया था कि बाबरी मस्जिद को नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा। लेकिन राम मंदिर निर्माण का निश्चय पक्का था, इसलिए सरकार ने अयोध्या में राम जन्मभूमि के आसपास 2.27 एकड़ जमीन खरीद ली और पास में ही राम चबूतरा बनवा दिया। सरकार का मकसद साफ था- तीर्थस्थल में पर्याप्त सुविधाएं सुनिश्चित करना। विश्व हिंदू परिषद भी लोगों को समझा-बुझाकर तीर्थस्थल के आसपास के इलाके की जमीनें खरीदने लगी। कल्याण सरकार ने भी जो जमीनें खरीदीं, वो विश्व हिंदू परिषद के ट्रस्ट को सौंपती गई। उसने राम कथा पार्क के लिए आसपास की 42.09 एकड़ जमीन विहिप ट्रस्ट को ट्रांसफर कर दी।
6 दिसंबर, 1992 को जब अयोध्या में कारसेवकों का जनसमुद्र उमड़ा तो आडवाणी समेत बीजेपी और आरएसएस के दिग्गज नेताओं ने उन्हें संभालने की भरपूर कोशिशें कीं। लेकिन रामभक्तों पर एक मानो एक जुनून सवार था- अत्याचार और अन्याय की सदियों पहले पड़ी नींव के प्रतीक रूप में बाबरी मस्जिद का सफाया। एक-एक कर कारसेवक बाबरी मस्जिद की गुंबदों पर चढ़ने लगे और कुछ देर में ही गुंबद टूटकर गिरने लगे। दो साल पहले उत्तर प्रदेश की जिस पुलिस ने अयोध्या की भूमि कारसेवकों के खून से रंग दी थी, वो बाबरी विध्वंस को चुपचाप देख रही थी। कल्याण सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे के मुताबिक बाबरी की सुरक्षा में असफल रहने की नैतिक जिम्मेदारी लेने में देर नहीं की। उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अदालत की अवमानना के लिए 2,000 रुपये का जुर्माना लगाकर उन्हें 24 घंटे के लिए तिहाड़ जेल भेज दिया। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें उस समय पद खोने का कोई पछतावा है तो कल्याण सिंह ने जवाब दिया कि मुख्यमंत्री का पद भगवान राम के सामने कुछ भी नहीं है। वर्षों बाद जब सुप्रीम कोर्ट ने ही राम जन्मभूमि पर ही भव्य मंदिर बनाने का रास्ता साफ कर दिया तो कल्याण सिंह ने लखनऊ में अपने आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इसमें उन्होंने कहा, ‘6 दिसंबर 1992 को जब बाबरी मस्जिद गिरी थी, मैंने अयोध्या में हुई अराजकता की पूरी जिम्मेदारी ली थी। मैंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर और उसी दिन राज्यपाल को इस्तीफा सौंपकर उसकी कीमत चुकाई थी। मेरा विश्वास है कि 2022-23 तक अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर बनकर तैयार होगा, जिसके दर्शन देश-विदेश से लोग करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘हर किसी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है और उसे स्वीकार कर लिया है, जो न्यायपूर्ण, वैध और सर्व-समावेशी है। इसने 500 साल पुराने विवाद को समाप्त कर दिया है।’