दिल्ली विधानसभा में चल रहे मानसून सत्र का आज दूसरा दिन है। जिसमे। विधायकों के वेतन भत्ते से जुड़ा एक अहम विधेयक आज पास किया जा सकता है। इस विधेयक के पास होने पर दिल्ली में विधायको के वेतन-भत्तों में एक बार में लगभग 66% की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
इसके अतरिक्त चार और विधेयक इस विधनसभा सत्र में पारित किए जा सकते है।
गौरतलब है की पिछले 11 साल से दिल्ली में विधायकों के वेतन में बढ़ोतरी नहीं की गई है। अगर इस विधेयक को विधानसभा से स्वीकृति मिल जाती है तो इसके बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद ये विधेयक कानून बन जायेगा।इसके बाद दिल्ली में विधायको की जो मौजूदा वेतन हैं उसमे लग भाग 66 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो जायेगी।
अभी दिल्ली में विधायको का वेतन 54 हजार है तो वही विधेयक के कानून बनते ही ये बढ़कर 90 हज़ार प्रति माह हो जायेगा। वही मंत्रियो का वेतन बढ़कर एक लाख सत्तर हज़ार हो जायेगा।
इस विधेयक पर आम आदमी पार्टी का कहना है की दिल्ली के विधायको का वेतन अभी देश में सबसे कम है। इस पर मंत्रियों, विधायकों, मुख्य सचेतक, विस अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विपक्ष के नेता के वेतन से जुड़े पांच अलग अलग विधेयक सदन में पेश किए गए और उन्हें पारित करना बाकी है। वही दिल्ली के कानून मंत्री ने बताया कि दिल्ली का बढ़ा हुआ वेतन अभी भी देश के कई राज्यों के मुक़ाबले अभी भी काफी कम है। इस विधेयक पर चर्चा के दौरान सदस्यों ने बताया कि उनका वेतन बढ़ती हुई महंगाई के अनुसार ही तय किया गया है। वही इस पर बोलते हुए दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा की इससे राजनीति में प्रतिभाशाली लोगो को आने के लिए प्रेरित भी किया जा सकता है। वही विपक्ष में बैठे बीजेपी नेताओं ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
कितना और कहा बड़ा वेतन?
इस विधेयक के कानून बनते ही विधायकों का बेसिक वेतन 12 हजार रुपए से भढ़ाकर 30 हजार रुपए हो जायेगा। वही इसके अलावा दैनिक भत्ता मैं भी एक हजार की बढ़ोतरी करके 1500 रुपए कर दिया गया है। मुख्यमंत्री मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष मुख्य सचेतक और नेता प्रतिपक्ष का बेसिक वेतन जहां 60 हजार रुपए
होगा। पहले ये 18 हजार रुपए था। प्रस्ताव में विधायकों को अलग से सालाना एक लाख रुपए यात्रा भत्ता देने की बात कही गई है जो वर्तमान में 50 हजार रुपए मिलता है।
पहले विधायको का बेसिक वेतन 12 हजार रुपए था जो इस प्रस्ताव की मंजूरी के बाद बढ़कर 30 हजार रुपए हो जायेगा।
वही विधानसभा का भत्ता पहले मासिक 18000 था, जो प्रस्ताव पारित होने के बाद 25 हजार रुपए होगा।
किराया भत्ता 6 हजार से बढ़कर 10000 रुपए हो जायेगा है।
टेलीफोन भत्ता 8 हजार से बढ़ाकर 10 हजार हो जायेगा है।
सचिवालय भत्ता 10 हजार से बढ़ाकर 15 हजार हो जायेगा।
मौजूदा समय में वेतन और भत्ते मिलाकर हर महीने विधायकों को 54 हजार रुपए मिलते है जो अब राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद दिल्ली में विधायकों को हर महीने 90 हजार रुपए मिलने लगेंगे।
अभी दिल्ली में सबसे कम वेतन पाने वाले विधायको में है दिल्ली के विधायक।
दिल्ली सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में, एक विधायक का मासिक वेतन और भत्ते प्रति माह ₹ 95,000 तक बढ़ जाते हैं; गुजरात में, ₹ 105,000; बिहार में, ₹ 130,000; राजस्थान में, ₹ 142,500; हरियाणा में, ₹ ,55,000; और उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में क्रमशः
₹ 198,000 और ₹ 190,000। तेलंगाना अपने सांसदों को प्रति माह ₹ 250,000 का भुगतान करता है।
दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता रामवीर सिंह बिधूड़ी ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया और आप पर सीधा हमला बूते हुए कहा कि आप सरकार विधायकों को बुनियादी सुविधाएं देने में विफल रही है।
एक रिपोर्ट की अनुआर बदरपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले भाजपा विधायक बिधूड़ी ने कहा: “दिल्ली सरकार विधायकों को सुसज्जित कार्यालय, वाहन और बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने में विफल रही है। मैंने इस संबंध में सीएम कार्यालय और स्पीकर को पत्र लिखा है। दिल्ली सरकार को ऐसी चीजों के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी की जरूरत नहीं है। अब, वे विधायक के वेतन में मौजूदा वृद्धि के बारे में केंद्र सरकार को दोष देने की कोशिश कर रहे हैं, भले ही वह महामारी और इसके वित्तीय प्रभावों के आलोक में पर्याप्त हो। यह समय कोविड -19 की संभावित तीसरी लहर के खिलाफ तैयारियों के बारे में बात करने का है, न कि विधायकों के वेतन जैसे मुद्दों पर जो सीधे जनता को प्रभावित नहीं करते हैं। आप सरकार को सार्वजनिक परिवहन, स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे, जलापूर्ति आदि के मोर्चे पर अपनी विफलताओं को छिपाने के बहाने तलाशना बंद कर देना चाहिए। आपको बता दे की 70 विधान सभा सदस्यीय सदन में आप के 62 और भाजपा के आठ सदस्य हैं।