Monday, December 23, 2024
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क्या है ईरान का परमाणु समझौता? जानिए खास बातें!

ईरान में हाल ही में परमाणु समझौते को बहाल करने की कवायद चल रही थी! ईरान में बड़े सुधारों की बयार चल रही है। ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी दुनिया के बड़े देशों के साथ साल 2015 के परमाणु समझौते को बहाल करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं। रईसी रुकी हुई वार्ता को फिर से शुरू करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में रईसी ने देश की सब्सिडी प्रणाली में बड़े सुधार किये हैं। राष्ट्रपति ने सोमवार देर रात एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि वे प्रतिबंधों के बावजूद कीमतों को स्थिर करने के लिए अपने पूर्ववर्ती द्वारा शुरू की गई सब्सिडी प्रणाली को धीरे-धीरे बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली में भ्रष्टाचार काफी अधिक रहा है। रईसी ने कहा, ‘रोटी, दवा और पेट्रोल की कीमतें किसी भी परिस्थिति में नहीं बढ़ेंगी।’

इसके बाद ईरान के केंद्रीय बैंक ने कहा कि देश की 8.50 करोड़ की आबादी में से अधिकांश लोगों को रईसी की वादा की गई नकद सब्सिडी मिली है। बैंक ने कहा कि लोगों के बैंक खातों में दो महीनों के लिए कुल 460 लाख करोड़ रियाल (10.8 अरब डॉलर) डाले गए हैं। इस राशि का उपयोग लोग आने वाले दिनों में कर सकते हैं। इस नकद सब्सिडी योजना से केवल सबसे अमीर ईरानियों को ही बाहर रखा गया है। लगभग एक-तिहाई आबादी को कथित तौर पर 40 लाख रियाल (94 डॉलर) प्राप्त हुए हैं और 60 फीसद ने एक महीने में प्रति व्यक्ति 30 लाख रियाल (71 डॉलर) प्राप्त किए हैं।

इलेक्ट्रॉनिक कूपन योजना

लगभग दो महीने के बाद, कीमतों को नियंत्रित करने के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक कूपन योजना लागू होने की उम्मीद है। कूपन योजना को डिजिटल रूप से लागू किए जाने की संभावना है। यह विशेष रूप से रोटी की कीमतों को सब्सिडी देने के लिए है, जो कि यूक्रेन युद्ध के कारण गेहूं की कीमतों में वैश्विक उछाल के बीच प्रभावित हुई है। अधिकारियों ने कहा कि इस योजना में बाद में चिकन और वनस्पति तेल जैसे अन्य सामान शामिल हो सकते हैं।एक्सपर्ट्स ने इन सुधारों का स्वागत किया है। ये सुधार ईरानी बाजारों में अत्यधिक अस्थिरता के समय पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी के प्रशासन द्वारा लागू की गई दोषपूर्ण नीति से छुटकारे का संकेत देते हैं। रूहानी ने मूल्य वृद्धि को रोकने के उद्देश्य से अप्रैल 2018 में आयात के लिए प्रति अमेरिकी डॉलर 42,000 रियाल की कृत्रिम दर की शुरुआत की थी। वास्तव में, एक बहुस्तरीय विनिमय दर व्यवस्था का निर्माण किया गया, क्योंकि खुले बाजार में दरें बहुत अधिक थीं और बढ़ती रहीं। उस समय अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की 2015 के परमाणु समझौते से बाहर निकलने की धमकियों के परिणामस्वरूप ईरानी मुद्रा में एक लंबी गिरावट शुरू हुई थी। ट्रम्प ने तब कठोर प्रतिबंधों के अपने “अधिकतम दबाव” अभियान को शुरू किया था, जिसने COVID-19 महामारी के साथ मिलकर ईरानी अर्थव्यवस्था को पस्त कर दिया।

अधिकारी और अर्थशास्त्रियों के अनुसार, सब्सिडी वाली मुद्रा दर न केवल आसमान छूती कीमतों पर सार्थक रूप से अंकुश लगाने में विफल रही, बल्कि इससे भ्रष्ट बिचौलियों को भी अरबों का फायदा हुआ। रियाल का ओपन मार्केट रेट अब सब्सिडाइज्ड रेट से करीब सात गुना है। रूहानी प्रशासन ने भी रियायती मुद्रा दर को खत्म करने पर विचार किया, लेकिन उनकी सरकार और संसद इस बात पर सहमत नहीं हो सके कि इसे इस तरह से कैसे किया जाए, जिससे ऐसे समय में नए मूल्य झटके न लगें, जब वार्षिक मुद्रास्फीति 50 फीसद तक बढ़ गई थी। अप्रैल में यह दर 39.2 फीसद थी।

कृत्रिम मुद्रा दर को प्रभावी ढंग से समाप्त करने के रईसी के फैसले संकेत देते हैं कि ईरान की अर्थव्यवस्था अब ट्रम्प-युग से पूरी तरह बाहर आ रही है। हालांकि, पहले की पॉलिसी से 70 फीसद तक सब्सिडी फंड लोगों को नहीं मिल पाएगा। अर्थशास्त्री ने कहा, ‘अनुमान बताते हैं कि ईरान की सीमाओं से सटे इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और यहां तक कि उत्तरी सीमाओं के इलाकों में रहने वाले 1.50 करोड़ लोग तस्करी के रूप में गेहूं और दवा जैसे सामानों पर ईरानी सब्सिडी से लाभान्वित हुए हैं। यह अब रुक सकता है, जो मुझे लगता है कि देश के लिए काफी मात्रा में धन बचाएगा और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।’ सब्सिडी को हटाने से महंगाई में थोड़ी वृद्धि हो सकती है या ऐसा भी हो सकता है कि अगले महीने से महंगाई कम होना शुरू हो जाए। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि रईसी स्थिति को कैसे मैनेज करते हैं।

राष्ट्रपति रईसी द्वारा योजना की घोषणा करने के एक दिन बाद ही परमाणु समझौता वार्ता के यूरोपीय संघ के समन्वयक एनरिक मोरा अमेरिका के साथ गतिरोध को समाप्त करने में मदद करने के प्रयास के लिए तेहरान पहुंचे थे। राष्ट्रपति ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि वे देश की अर्थव्यवस्था के भाग्य को वार्ता से नहीं जोड़ेंगे और उन्होंने चालू वर्ष के लिए 8 फीसद जीडीपी विकास दर का वादा किया, जिससे अनुमान लगता है कि अमेरिकी प्रतिबंध लागू रहेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, इस समय आर्थिक सुधारों को प्रचारित करना वाशिंगटन और परमाणु समझौते के अन्य हस्ताक्षरकर्ताओं को सीधा संकेत दे सकता है।

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