टाइटन (टाइटैनिक) जहाज करीब 111 साल पहले अटलांटिक महासागर में डूब गया था कहा जाता हैं कि टाइटैनिक जहाज कभी समुद्र में नहीं डूब सकता है, लेकिन एक आइस बर्ग से टकराने के बाद समुद्र में समा गया. हादसे के वक्त जहाज की रफ़्तार करीब 41 किलो मीटर प्रति घंटे से चल रहा था. इंग्लैंड के साउथम्पैटन से अमेरिका के न्यू यार्क की यात्रा पर जा रहा टाइटैनिक साल 1912 में 14 अप्रैल और 15 अप्रैल की रात अटलांटिक महा सागर में डूबा था. अभी तक के सबसे बड़े समुद्री हादसे में करीब 1500 लोगों की मौत हो गई थी. बहुत कम लोग ही इस हादसे से बच पाए थे और जो लोग बचे थे वह ख़ुशनसीब थे कि उन्हें एक नई ज़िंदगी देखने को मिली थी. आपको बता दें कि इसी टाइटैनिक के मलबे को देखने के लिए पाँच लोग एक छोटी सी टाइटन पनडुब्बी में गए थे वह बीते दिन रविवार(Sunday) के दिन से ग़ायब है जिसकी तलाश कई दिनों से जारी है लोग इसे ढूंढने का प्रयास कर रहे हैं साथ ही पनडुब्बी को ट्रैक करने की भी कोशिश जारी है परंतु अभी तक इसका कुछ अता पता नहीं चल पाया है.
जैसे–जैसे समय निकलता जा रहा है वैसे–वैसे पनडुब्बी में गए लोगों के ज़िंदा होने की उम्मीदें कम होती जा रही है. पनडुब्बी में पाँच लोग गए थे. वह पाँच लोग ब्रिटेन के बिज़नेसमैन हमीश हार्डिंग, फ्रांस के डाइवर पॉल हेनरी नार्जियोलेट, ओशनगेट के CEO स्टॉकन रश, पाकिस्तान के अरबपति शहजादा दाउद और उनके बेटे सुलेबान दाउद मौजूद है. कुछ ऐसे लोग भी हैं जो पहले टाइटैनिक के मलबे को देखने जा चुके हैं साथ ही सही सलामत वापस आ गए थे उन्होंने बात करते हुए बताया कि नवंबर के महीने में सीबीएस संडे मॉर्निंग के असाइनमेंट के दौरान टाइटैनिक जहाज का मलबा देखने गए डेविड पोग ने टाइटन पनडुब्बी को ‘बिना सीटों वाला मिनीवैन‘ कहा है. आप सोच रहे होंगे उन्होंने क्या कहा होगा ? जानकारी के लिए बता दें यात्रियों के लिए पनडुब्बी में सीटें मौजूद नहीं है और वह क्रॉस लेग करके बैठते हैं. इसके अंदर एक शौचालय मौजूद हैं, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी तक इसका इस्तेमाल कभी नहीं किया गया है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, टाइटन में जाने वाले सभी यात्री अपना हस्ताक्षर करते हैं. यह एक ‘प्रयोगात्मक’ जहाज है ‘जिसे किसी भीनियामक निकाय ने अनुमोदित या प्रमाणित नहीं किया है और इसके परिणाम स्वरूप शारीरिक चोट, विकलांगता, भावनात्मक, आघात या मौत भी हो सकती है ताकि अगर किसी के साथ कुछ हुआ तो इसमें किसी को कोई गलती नहीं मानी जाएगी. नेशनल पब्लिक रेडियो (NPR ) से बात करते हुए पोग ने कहा कि इस यात्रा के दौरान अगर कुछ गलत होता है, तो आप ज्यादा कुछ कर नहीं सकते. हालांकि, उन्होंने कहा कि टाइटन के वापस लौटने के कई तरीके हैं. यह सभी काम भी करेंगे. भले ही पनडुब्बी की बिजली चली जाए और उसमें बैठे लोगों की जान चली जाए. समुद्र की गहराई आपकी सोच से भी परे है टाइटैनिक का मलबा समुद्र की सतह से 12,500 फीट की गहराई में सकता है. एक अनुमान के मुताबिक, टाइटैनिक का मलबा दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा की ऊंचाई से भी साढ़े चार गुना ज्यादा गहराई में है. तो आप अंदाज़ा लगा सकते हैं इसे देखने जाने के लिए आपकी मौत भी हो सकती है. समुद्र के अंदर अंधेरा ही अंधेरा होगा क्योंकि सूरज कीरोशनी भी समुद्र के पानी में महज 660 फीट तक ही जा सकती है उसके बाद समुद्र की गहराई में अंधकार के सिवा कुछ नहीं होगा. स्कूबा डाइविंग के लिए लोग 130 फीट गहराई तक ही जाते हैं. समुद्र में अब तक का सबसे गहरा अंडरवाटर रेस्क्यू 1,575 फीट की गहराई में किया गया था.
यह पनडुब्बी 22 फीट लंबे 9 फीट चौड़े और 8 फीट ऊंचे कमरे की तरह है. इसके अंदर 8 घंटे की लंबी यात्रा में यात्रियों को चलने या आराम से बैठने की कोई जगह नहीं होती है. इसकी वजह से सभी को एक साथ ठूंसकर बैठना पड़ता है. सतह से टाइटैनिक तक उतरने में आम तौर पर तीन घंटे का समय लगता है. चालक समेत पांच लोगों बैठने की क्षमता पनडुब्बी 6.7 मीटर लंबी, 2.8 मीटर चौड़ी और 2.5 मीटर ऊंची होती है.
सिर्फ 96 घंटे की ऑक्सीजन होती है, पनडुब्बी में बैठने के लिए कोई सीट नहीं होती है, बल्कि एक सपाट फर्श होता है.
एक्रिलिक की खिड़की बनी होती है जिससे बाहर देखा जा सकता है, पनडुब्बी की बाहरी सतह 5 इंच मोटी होती है.