राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कौन-कौन से नेता जाएंगे?

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आज हम आपको बताएंगे कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कौन-कौन से नेता जाने वाले हैं! आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की तीन राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है। आप ने दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल, संजय सिंह और नारायण दास गुप्ता को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। संजय सिंह और एन.डी. गुप्ता राज्यसभा में मौजूदा सांसद भी हैं। वहीं स्वाति मालीवाल को पहली बार मौका मिला है, स्वाति मालीवाल को सुशील कुमार गुप्ता की जगह उम्मीदवार बनाया गया है। 19 जनवरी को चुनाव होगा और रिजल्ट की घोषणा भी इसी दिन की जाएगी। शराब घोटाला मामले में जेल में बद आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह की सदस्यता इसी महीने की 27 तारीख को समाप्त हो रही है। लेकिन संजय सिंह राज्यसभा चुनाव के लिए एक बार फिर से अपना नॉमिनेशन करेंगे। इसके लिए उन्होंने राऊज एवेन्यू कोर्ट में आवेदन दिया था, जिस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने उन्हें जेल से नॉमिनेशन फाइल करने की अनुमति दे दी है। संजय सिंह आम आदमी पार्टी कद्दावर नेता हैं। मणिपुर हिंसा से लेकर अडानी मामले तक, संजय सिंह ने केंद्र सरकार के खिलाफ संसद में जमकर हल्ला बोल किया है। संजय सिंह को पिछले साल 4 अक्टूबर को कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। 8 दिन तक ईडी कस्टडी में रहने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। तब से वह तिहाड़ में ही हैं।

​इस बार आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए स्वाति मालीवाल का नाम प्रस्तावित किया है। स्वाति मालीवाल को राज्यसभा में सुशील कुमार गुप्ता की जगह रिप्लेस किया गया है। वह देश की चर्चित एक्टिविस्ट हैं और दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने आज ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देते वक्त स्वाति काफी भावुक नजर आईं। स्वाति को देखकर स्टाफ के सदस्य भी भावुक हो गए। सभी स्वाति मालीवाल को बाहर गेट तक छोड़ने आए थे। महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक मुद्दों को मजबूती से उठाती रही हैं। स्वाति मालीवाल को वर्ष 2015 में दिल्ली महिला आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।

नारायण दास गुप्ता को AAP ने दूसरी बार राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। उनका जन्म 16 अक्टूबर 1945 को हरियाणा जिले के सोनीपत के गुहना गांव में हुआ था। एन डी गुप्ता एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। वे इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया 2001-02 के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके अलावा, वे इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ अकाउंटेंट्स, यूएसए के बोर्ड में चुने जाने वाले पहले भारतीय हैं। बता दें कि सबको पता है कि आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह इस वक्त दिल्ली शराब घोटाला मामले के चलते जेल में बंद हैं। उन्हें वहीं से नामांकन भरने की इजाजत मिल गई। आप आदमी पार्टी ने उनपर दोबारा दांव खेला है। सूत्रों के मुताबिक, उनकी उम्मीदवारी पहले ही पक्की हो गई थी, हालांकि जेल जाने से पहले ही उन्हें दूसरे कार्यकाल का इशारा दिया गया था। आप के सबसे मुखर और तेज़ तर्रार नेताओं में से एक संजय सिंह ने पार्टी के लिए अपनी एक अलग पहचान बनाई है। अडाणी के मुद्दे पर वह सदन के अंदर सबसे मुखर रहे। उनकी गिरफ्तारी के बाद AAP लगातार यह कह रही है कि उन्हें मोदी और उनके दोस्त यानी गौतम अडाणी पर बोलने के कारण झूठे केस में फंसाया गया है।

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से आने वाले संजय सिंह, पार्टी की अंदरूनी कलह से लेकर दूसरे दलों से बातचीत तक, हर मुश्किल मोर्चे पर अहम भूमिका निभाते हैं। हाल ही में संसद के मानसून सत्र के दौरान, बार-बार निर्देशों की अनदेखी करने के आरोप में उन्हें तत्कालीन राज्यसभा अध्यक्ष जगदीप धनखड़ ने पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया था। आम आदमी पार्टी लगातार मोदी सरकार के ‘बदले की भावना’ पर आरोप लगाती रही है, जिसके चलते इसके पांच नेता – संजय सिंह, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन, विजय नायर और गुजरात के विधायक छैतर वासवा – जेल में बंद हैं! 

स्वाति मालीवाल को आम आदमी पार्टी ने पहली बार चुना है। उन्होंने राज्यसभा के लिए नामांकन भरने से पहले दिल्ली महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। पद से दिए इस्तीफे के बाद वह काफी भावुक भी नजर आईं। आम आदमी पार्टी ने स्वाति मालीवाल के नाम का चुनाव कर महिला कार्ड भी खेला है। इसे केंद्र सरकार के लाए नए महिला कानून बिल नारी शक्ति से भी जोड़ कर देखा जा सकता है। स्वाती मालीवाल अगर राज्यसभा चुनाव जीतती हैं तो वह आप आदमी पार्टी की ओर से एकलौती महिला सासंद होंगी।

2015 में, मालीवाल को दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। महिलाओं के अधिकारों की पैरोकारी करने, उनकी शिकायतों का समाधान करने और उन्हें न्याय दिलाने का प्लेटफॉर्म देने में वो काफी सक्रिय रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि मालीवाल ने खुद को सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रखा। हिंसाग्रस्त मणिपुर पहुंचकर, उन्होंने वहां संघर्ष में बुरी तरह प्रभावित महिलाओं को सहारा दिया। 8 साल के कार्यकाल में, मालीवाल और उनकी टीम ने लगभग 1,70,000 शिकायतों का निपटारा किया। वो महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर काफी सक्रिय रहती हैं और उनकी चुस्ती-फुर्ती की तारीफ होती है तो आलोचना भी।