क्या भारत जोड़ो यात्रा से अलग होगी भारत न्याय यात्रा?

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यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या भारत न्याय यात्रा, भारत जोड़ो यात्रा से अलग होगी या नहीं! कांग्रेस ने जमीनी पकड़ मजबूत करने के लिए अपनी भारत यात्रा के चरण 2 का जो बुधवार को ऐलान किया, वह भारत जोड़ो यात्रा का अगला चरण होने के बावजूद कई मायनों में उससे अलग है। यह अंतर यात्रा के स्वरूप से लेकर उसकी थीम तक में है। जहां पहले चरण में भारत को जोड़ने की बात कही गई थी, वहीं दूसरे चरण में न्याय की बात कही गई है। अगर दोनों में अंतर की बात करें तो यह फर्क उल्लेखनीय हैं। पहली यात्रा दक्षिण से उत्तर की ओर निकाली गई थी, जो कन्याकुमारी से शुरू होकर कश्मीर में खत्म हुई थी। राहुल गांधी की यह यात्रा पूरी तरह से पैदल यात्रा थी, जिसमें वह लगभग रोज 25 किलोमीटर की दूरी तय करते थे। लगभग साढ़े चार महीने की यात्रा में कांग्रेस नेतृत्व ने तकरीबन 3600 किलोमीटर की दूरी तय की। यह यात्रा 12 राज्यों से होकर गुजरी। दूसरी ओर न्याय यात्रा पूरब के मणिपुर से शुरू होकर पश्चिम में मुंबई में खत्म होगी। यह यात्रा हाइब्रिड मोड में ज्यादातर बसों व कुछ हिस्सों में पैदल पूरी होगी। 6600 किमी की यात्रा दो महीने में पूरी होगी, जो 14 राज्यों व 85 जिलों से होकर गुजरेगी। कांग्रेस का कहना था कि भारत जोड़ो यात्रा का मुख्य मकसद देश में बढ़ रही नफरत, डर और कट्टरता के खिलाफ लड़ाई थी। कांग्रेस ने इसे समाज को तोड़ने व बांटने वाले कारक करार देते हुए देश को जोड़ने की बात कही थी। कांग्रेस का दावा है कि न्याय यात्रा के जरिए कांग्रेस देश में सामाजिक, आर्थिक व सामाजिक न्याय के हक की आवाज बुलंद करेगी। इसमें देश के लोगों के लिए आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक न्याय पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

दरअसल कांग्रेस को लगता है कि मोदी सरकार के दौर में देश में आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक स्तर पर लोगों के साथ न्याय नहीं हो रहा है। वहीं दूसरी ओर न्याय यात्रा का नाम देकर कांग्रेस कहीं न कहीं 2019 चुनावों के अपने मूल नारे न्याय योजना को रेखांकित करना चाहती है, जिसमें उसने अपने चुनावी घोषणा पत्र में हर गरीब परिवार हर साल 72 हजार रुपये देने का वादा किया था। हालांकि पार्टी को पिछली बार करारी हार का सामना करना पड़ा, लेकिन कांग्रेस को लगता है कि कांग्रेस अपनी उस योजना को जमीन पर ठीक तरह से उतार नहीं पाई।

भारत जोड़ो यात्रा कांग्रेस ने दो आम चुनावों के बीच में कुछ राज्यों के असेंबली चुनावों के मद्देनजर की थी, जबकि यह यात्रा आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर की जा रही है। भारत जोड़ो यात्रा का चुनावी असर कांग्रेस के लिए मिला जुला रहा। जहां वह उसके बाद हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक व तेलंगाना में अपनी सरकार बनाने में कामयाब रही तो वहीं राजस्थान व छत्तीसगढ़ जैसे दो मजबूत प्रदेशों से उसकी सत्ता जाती रही। बता दें कि कांग्रेस नागपुर से लोकसभा चुनाव के प्रचार की शंखनाद करने जा रही है। पार्टी के स्थापना दिवस पर ‘हैं तैयार हम’ रैली से चुनाव प्रचार की शुरुआत की जाएगी। इसके साथ ही पार्टी ने भारत जोड़ो यात्रा का दूसरे चरण की भी घोषणा कर दी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भारत न्याय यात्रा की शुरुआत करेंगे। यह यात्रा पूर्व से पश्चिम भारत के बीच होगी। भारत न्याय यात्रा की शुरुआत 14 जनवरी से होगी। यह यात्रा 20 मार्च को मुंबई में खत्म होगी। कांग्रेस नेता जयराम रमेश और पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल की तरफ से यह जानकारी दी गई।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा’ के बाद अब राहुल गांधी जी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ‘भारत न्याय यात्रा’ निकालने वाली है। मणिपुर से मुंबई तक करीब 6200 किलोमीटर की यह लंबी यात्रा 14 जनवरी से लेकर 20 मार्च तक निकाली जाएगी। जो कि 14 राज्यों से होकर निकलेगी। इसमें मणिपुर, नागालैंड, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, यूपी, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के 85 जिले शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने 3 मुद्दे उठाए थे- आर्थिक विषमता, सामाजिक ध्रुवीकरण औऱ राजनीतिक तानशाही। लेकिन भारत न्याय यात्रा का मुद्दा आर्थिक न्याय, सामाजिक न्याय और राजनीतिक न्याय है।

पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि 21 दिसंबर को कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने राय दी कि राहुल गांधी जी को पूर्व से पश्चिम तक यात्रा शुरू करनी चाहिए। सीडब्ल्यूसी की राय के बाद राहुल गांधी भी इस इच्छा पूरी करने के लिए सहमत हो गए हैं। इसके बाद ही अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने 14 जनवरी से 20 मार्च तक मणिपुर से मुंबई तक ‘भारत न्याय यात्रा’ आयोजित करने का निर्णय लिया है। केसी वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे 14 जनवरी को इंफाल में इस यात्रा को हरी झंडी दिखाएंगे। उन्होंने कहा कि यह यात्रा पूर्व-पश्चिम की है, दक्षिण-उत्तर की यात्रा हम पहले ही कर चुके हैं। मणिपुर के बिना हम यात्रा कैसे कर सकते हैं? हमें मणिपुर के लोगों के दर्द पर मरहम लगाने का प्रयास करना होगा।