यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या बीजेपी हिंदुत्व के दम पर फिर से जीत पाएगी या नहीं! बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीति का एक तरीका है कि वो अपने कार्यों को या चर्चित योजनाओं को देश स्तर पर जामा पहनाते रहे हैं। इसका गवाह देश की राजनीति का इतिहास रहा है। जैसे स्कूल बच्चियों की पोशाक योजना हो या साइकिल योजना। इन योजनाओं ने नीतीश कुमार की राजनीति को एक सोशल रंग डाला। इसके बाद कई राज्यों ने हू-ब-हू पोशाक और साइकिल योजना को अपने राज्यों में लागू किया। आधी आबादी को पंचायत और नगर निगम की राजनीति में आरक्षण या फिर हर घर नल जल योजना को भी देश स्तर पर ख्याति मिली। अब जब देश चुनाव के रास्ते पर उतर रहा है तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एन मौके पर जातीय सर्वे के बहाने जातीय जनगणना करा कर देश भर में चर्चा का विषय बना चुके हैं। यहां तक कि राहुल गांधी ने भी जातीय जनगणना को वर्तमान राजनीति की जरूरत बताते कहा कि ये आबादी के अनुसार हिस्सेदारी के लिए जरूरी भी है। बिहार में जातिगत सर्वे के बाद जातीय संख्या का जो सच सामने आया उसके बाद इसे लेकर पूरे देश में बहस छिड़ गई है। तमाम राज्यों में जातिगत जनगणना कराने की मांग की जाने लगी है। जातीय गणना रिपोर्ट के बाद बिहार ही नहीं इन 5 राज्यों में सियासी सुगबुगाहट शुरू हो गई है।
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र में भी जातिगत सर्वे की मांग तेज हो गई है। वहीं, कर्नाटक में 2015 में हुई जातिगत जनगणना के नतीजों को सार्वजनिक करने की मांग उठने लगी है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने बिहार में हुए जातीय सर्वे जैसे कदम की जमकर प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि बिहार में जाति आधारित गणना और उसे प्रकाशित करना सामाजिक न्याय की दिशा में उठा बेहतर कदम है। जातिगत जनगणना 85-15 के संघर्ष का नहीं बल्कि सहयोग का नया रास्ता खोलेगी। जो सच में अधिकार दिलवाना चाहते हैं, वो जातिगत जनगणना करवाते हैं। भाजपा सरकार राजनीति छोड़े और देशव्यापी जातिगत जनगणना करवाए।
उत्तर प्रदेश में अखिलेश के अलावा कांग्रेस ने भी सीएम योगी को पत्र लिखकर जातिगत जनगणना कराने की मांग की है। सपा के साथ उसके सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल रालोद और अपना दल के ने भी यूपी में जातिगत जनगणना की मांग की है। रालोद के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने कहा कि विभिन्न सरकारी योजनाओं में विभिन्न जातियों की सही हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए यूपी में भी जाति जनगणना जरूरी है। हम यूपी सरकार से तुरंत जाति जनगणना का आदेश देने की मांग करते हैं। कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई ने भी राज्य सरकार से बिहार की तर्ज पर ‘जाति आधारित गणना’ कराने का आग्रह किया है। साथ ही ये आरोप लगाया कि एकनाथ शिंदे सरकार इस तरह की कवायद से बच रही है। हमारे नेता राहुल गांधी देश में जाति आधारित जनगणना कराने की लगातार मांग कर रहे हैं। महाराष्ट्र विधान सभा में विपक्ष के नेता वडेट्टीवार ने केंद्र से तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार की ओर से 2011 में किए गए जातिगत सर्वेक्षण के विवरण का खुलासा करने की भी मांग भी की है। केंद्र को ये स्पष्ट करने को भी कहा कि 2011 की इस कवायद का विवरण गुप्त क्यों रखा गया है?
चुनावी राज्य मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने जातीय जनगणना के मुद्दे को सीधे ओबीसी वर्ग के सम्मान से जोड़ दिया है। कांग्रेस के ओबीसी चेहरे पूर्व मंत्री अरूण यादव और कमलेश्वर पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए यूपीए सरकार में हुई जातिगत जनगणना के आंकड़ों को सार्वजनिक करने की मांग की। इसके साथ कांग्रेस ने आबादी के हिसाब से आरक्षण देने की मांग की। पूर्व मंत्री अरुण यादव ने कहा कि वो प्रधानमंत्री मोदी से पूछना चाहते हैं कि जातीय जनगणना के आंकड़े कब जारी करेंगे? देश के पिछड़ों के लिए उनका क्या एजेंडा है, इसे पिछड़ा वर्ग को बताएं। भाजपा ने ओबीसी के हक को छीनने काम किया है।
बहरहाल, एमपी, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे तीन बड़े राज्यों के अलावा भी कई राज्य हैं, जिन्होंने अपने एजेंडे में जातीय जनगणना को प्राथमिकता के साथ रखा है। वैसे, भाजपा इस मुद्दे से अपने को कैसे बचाव करती है, देखने वाली बात होगी। लेकिन नीतीश कुमार ने जातीय सर्वे कराकर देश को भाजपा के हिदुत्व के विरुद्ध एक मुद्दा तो दे ही दिया है।