क्या वी डी सावरकर को मिल पाएगा भारत रत्न सम्मान?

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यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या वी डी सावरकर को भारत रत्न सम्मान मिल पाएगा या नहीं! मोदी सरकार ने समाजवाद और सामाजिक न्याय के पुरोधा कहे जाने वाले कर्पूरी ठाकुर को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से विभूषित करने का ऐलान किया है। बिहार के मुख्यमंत्री रहे ठाकुर के सम्मान के जरिए बीजेपी ने अत्यंत पिछड़ी जातियों को साधने की कोशिश की है। लगातार दो बार पूर्ण बहुमत के साथ केंद्र में बीजेपी की सरकार के पीछे ओबीसी वोटरों में पार्टी की मजबूत पकड़ एक बड़ी वजह है। कर्पूरी ठाकुर वाले दांव से पार्टी ने उस पकड़ को और भी मजबूत करने की कोशिश की है। लेकिन बीजेपी अपने आइकन विनायक दामोदर सावरकर को ‘भारत रत्न’ कब देगी? शिवसेना उद्धव बाल ठाकरे ने तो बीजेपी को घेरते हुए सवाल भी दाग दिया है कि सावरकर के लिए भारत रत्न क्यों नहीं? पार्टी नेता संजय राउत ने कहा कि 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद अबतक 11 लोगों को भारत रत्न दिया जा चुका है लेकिन सावरकर को इस लिस्ट में जगह नहीं मिली। आखिर वह बीजेपी की वेटिंग लिस्ट में क्यों हैं, आइए समझते हैं। वर्ष 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान वीडी सावरकर को ‘भारत रत्न’ मिलते-मिलते रह गया था। वाजपेयी सरकार ने सावरकर को सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजने की सिफारिश कर दी थी लेकिन तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन ने इसे ठुकरा दिया। इस तरह सावरकर को भारत रत्न मिलते-मिलते रह गया। हालांकि, तब अटल सरकार गठबंधन सरकार थी लेकिन अभी तो नरेंद्र मोदी की अगुआई में बीजेपी की प्रचंड बहुमत की सरकार है।

2014 में मोदी सरकार बनने के अगले ही साल 2015 में अटल बिहारी वाजपेयी और मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न से नवाजा गया। उसके बाद 2019 में तीन हस्तियों नानाजी देशमुख, भूपेन हजारिका और प्रणब मुखर्जी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिए जाने का ऐलान हुआ। अब समाजवादी दिग्गज कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने का ऐलान हुआ है। वीडी सावरकर कभी आरएसएस के सदस्य नहीं रहे लेकिन संघ में उनका बहुत सम्मान है। संघ और बीजेपी के लिए वह महान क्रांतिकारी और विचारक हैं जो बेहिचक हिंदुत्व की बात करते थे। सावरकर हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के पोस्टर बॉय हैं। बीजेपी ने 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए जारी किए गए अपने मैनिफेस्टो ‘संकल्प पत्र’ में उनको को भारत रत्न देने का वादा किया था। उनके अलावा सावित्रीबाई फुले को भी देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजने का वादा किया था। यही वजह है कि जैसे ही इस बार भारत रत्न के लिए कर्पूरी ठाकुर के नाम का ऐलान हुआ, शिवसेना यूबीटी ने बीजेपी को सावरकर के बहाने घेर लिया।

महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विनायक दामोदर सावरकर की शख्सियत ऐसी है कि उन्हें दक्षिणपंथी महानायक मानते हैं तो कांग्रेस और वामपंथी उनके नाम से चिढ़ते हैं। 1910 में नासिक के कलेक्टर जैकसन की हत्या के आरोप में उन्हें लंदन में गिरफ्तार किया गया था। 1911 में उन्हें अंडमान की सेल्युलर जेल में डाल दिया गया। इस जेल में सजा को काला पानी की सजा कहते थे। काला पानी के दौरान कैदियों को ऐसी अमानवीय यातनाएं दी जाती थीं, जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएं। कोल्हू में बैल की जगह कैदियों का इस्तेमाल, महीनों तक बेड़ियों में जकड़े रखना, अंग्रेज अफसरों की बग्घियों को खिंचवाना, कोड़ों से पिटाई और कुनैन पीने के लिए मजबूर किए जाने जैसी अमानवीय यातनाएं दी जाती थीं। जेल की कोठरियां बदबूदार थीं जिसमें सांस लेना अपने आप में सजा हो। शौचालय जाने के लिए समय तय था। कैदियों को रिश्तेदारों से मिलने की अनुमति नहीं थी। सावरकर 1921 तक सेल्युलर जेल में इस तरह की यातनाएं सहते रहे। इस दौरान उन्होंने 6 बार ब्रिटिश सरकार के पास दया याचिका भेजी। उनके आलोचक तत्कालीन अंग्रेजी हुकूमत को दया याचिका भेजने और माफीनामा की वजह से उन पर सवाल उठाते हैं। राहुल गांधी अक्सर सावरकर का मजाक उड़ाते रहते हैं। पिछले साल सावरकर पर राहुल गांधी की टिप्पणी के खिलाफ बीजेपी और एकनाथ शिंदे की अगुआई वाली शिवसेना ने पूरे महाराष्ट्र में ‘सावरकर गौरव यात्रा’ निकाली थी। दिलचस्प बात ये है कि राहुल गांधी की ही दादी इंदिरा गांधी ने 1970 में प्रधानमंत्री रहते सावरकर के सम्मान में उन पर डाक टिकट जारी किया था। इतना ही नहीं, 1980 में इंदिरा ने सावरकर ट्रस्ट को खत लिखकर उन्हें भारत का सपूत बताया था।

बीजेपी ने भले ही महाराष्ट्र के पिछले विधानसभा चुनाव में सावरकर को ‘भारत रत्न’ देने का वादा किया था, लेकिन ये हिंदुत्व विचारक अब भी उसकी वेटिंग लिस्ट में ही है। आखिर इसकी वजह क्या है? सावरकर बीजेपी के लिए हिंदुत्व का आइकॉन और कट्टर राष्ट्रवाद का चेहरा हैं। उन्हें ‘भारत रत्न’ देने से बीजेपी हिंदुत्ववादी वोट बैंक को और भी प्रभावी ढंग से साध पाती लेकिन अभी तो अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के जरिए हिंदुत्व वैसे ही सधा हुआ है। संभवतः इसीलिए बीजेपी ने सावरकर को वेटिंग लिस्ट में रखना ही मुनासिब समझा। दूसरी तरफ, कर्पूरी ठाकुर को ‘भारत रत्न’ के जरिए पार्टी ने ओबीसी और ईबीसी वोटरों को साधने का दांव चला है। लोकसभा चुनाव वाले वर्ष में भी बीजेपी ने अगर सावरकर को भारत रत्न देने का ऐलान नहीं किया तो इसकी एक और बड़ी वजह उसका केंद्र की सत्ता में हैटट्रिक लगाने का पक्का भरोसा भी है। बीजेपी को कहीं न कहीं लगता है कि 2024 में फिर उसकी सरकार आने वाली है, इसलिए सावरकर को ‘भारत रत्न’ दिए जाने से जुड़े तीर को अपने तरकश में बचाकर रखना चाहती है।