आखिर क्या है राजस्थान के श्याम प्रभु श्री खाटू श्याम मंदिर का रहस्य?

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आज हम आपको राजस्थान के श्याम प्रभु श्री खाटू श्याम मंदिर का रहस्य बताने जा रहे हैं! जानकारी के लिए बता दें कि हमारे देश में कई भगवानों को पूजा जाता है! उनकी आराधना की जाती है, लेकिन भारत के एक राज्य राजस्थान के जिले सीकर में एक ऐसा मंदिर है जहां पर जाने से हर भक्त की मनोकामना पूर्ण हो जाती है! यदि कोई भक्त आर्थिक तंगी से गुजर रहा है, तो वह इस मंदिर में जाकर अपने आप को धन-धान्य से परिपूर्ण कर सकता है! जी हां, हम बात कर रहे हैं कलयुग के राजा और श्री कृष्ण का रूप कहे जाने वाले श्री खाटू श्याम मंदिर की! जो राजस्थान के सीकर में है, लेकिन एक सवाल कि आखिर खाटू श्याम जी के मंदिर का रहस्य क्या है, और य़ह इतना प्रसिद्ध क्यों है? तो आज हम आपको इसी सवाल का जवाब देने वाले हैं! 

आपको बता दे कि भारत में लाखों मंदिर हैं। हर मंदिर के बनने के पीछे कोई न कोई रहस्‍य छिपा हुआ है। ऐसा ही एक रहस्यमयी और चमत्कारिक मंदिर है खाटू श्‍याम मंदिर। राजस्‍थान के सीकर जिले में स्थित यह मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। आज लाखों लोग न केवल खाटू बाबा को मानते हैं, बल्कि हर मौके पर यहां भक्‍ताें की भीड़ उमड़ती है। मान्‍यता है कि जो लोग यहां आकर भगवान खाटू के दर्शन करते हैं, उनके जीवन की हर समस्‍या दूर हो जाती है। 

जानकारी के लिए बता दें कि बाबा को हारे का सहारा कहा जाता है। इसलिए लोग यहां अपनी परेशानियां लेकर आते हैं। खाटू श्याम बाबा मंदिर से जुड़ी कई बाताें के बारे में आपने सुना होगा। लेकिन आज हम आपको बाबा खाटू श्याम के मंदिर का रहस्य बताने जा रहे हैं.. जानकारी के लिए बता दें कि आज पूरा भारत जिन्‍हें खाटू श्याम बाबा के रूप में पूजता है, असल में वे श्रीकृष्ण का कलयुग अवतार हैं। इसलिए उनका जन्‍म भी कार्तिक शुक्‍ल देवउठनी ग्‍यारस के दिन मनाया जाता है। इस दिन परिसर में विशाल मेला लगता है , जो ग्‍यारस मेला के नाम से मशहूर है। 

दरअसल, खाटू श्‍याम बाबा द्वापर या महाभारत काल के समय में बर्बरीक के रूप में जाने जाते थे। वे तीन बाण धारी शक्तिशाली योद्धा थे। वे पांडव पुत्र भीम के नाती और घटोत्कच के पुत्र थे। बर्बरीक की माता का नाम हिडिम्बा था। बताया जाता है कि महाभारत के दौरान श्री कृष्ण ने बर्बरीक से शीश दान में मांगा था। बर्बरीक ने कुछ सोचे बिना उन्हें अपना शीश दान दे दिया। तब श्रीकृष्ण ने प्रसन्‍न होकर उन्‍हें वरदान दिया था कि कलयुग में तुम मेरे नाम से जाने जाओगे। जो हारा हुआ भक्‍त तुम्‍हारे पास आएगा, तुम उसका सहारा बनोेगे। इसी वजह से उन्‍हें हारे का सहारा भी कहा जाता है। मान्‍यता के अनुसार, महाभारत का युद्ध खत्म होते ही श्रीकृष्ण ने बर्बरीक के शीश को रूपवती नदी में बहा दिया था। जिसके बाद यह खाटू गांव की जमीन में दफन हो गया। 

एक दिन वहां से गाय गुजरी, तो उसके थन से अपने आप ही दूध बहना लगा। यह देखकर गांव वाले हैरान रह गए और यह खबर खाटू के राजा तक पहुंचाई गई। खाटू के राजा जब यह देखने के लिए उस जगह पहुंचे, तो उन्हें याद आया कि कुछ दिन पहले रात को उन्हें सोते समय एक ऐसा ही सपना आया था। सपने में भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें आदेश दिया था कि एक जगह पर जमीन में शीश दफन है उस जमीन से शीश को निकालकर खाटू गांव में ही स्थापित कर मंदिर का निर्माण करवाना होगा। यही नहीं बता दे कि बर्बरीक की माता का नाम हिडिम्बा था। बताया जाता है कि महाभारत के दौरान श्री कृष्ण ने बर्बरीक से शीश दान में मांगा था। बर्बरीक ने कुछ सोचे बिना उन्हें अपना शीश दान दे दिया। तब श्रीकृष्ण ने प्रसन्‍न होकर उन्‍हें वरदान दिया था कि कलयुग में तुम मेरे नाम से जाने जाओगे। जो हारा हुआ भक्‍त तुम्‍हारे पास आएगा, तुम उसका सहारा बनोेगे। इसी वजह से उन्‍हें हारे का सहारा भी कहा जाता है। जिसके बाद खाटू के राजा ने उस जगह की खुदाई करने का आदेश दिया और वहां जमीन से एक शीश निकला। शीश के निकलने के बाद राजा ने उस शीश को खाटू में ही एक जगह पर स्थापित कर मंदिर का निर्माण करा दिया। आज वह मंदिर बाबा खाटू श्याम के नाम से पूरे भारत में मशहूर है। तो यह है बाबा खाटू श्याम मंदिर के रहस्य की कहानी!