जानिए बीजेपी कैसे पहुंची 240 आंकड़े तक?

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आज हम आपको बताएंगे कि बीजेपी आखिर कैसे 240 के आंकड़े तक पहुंची है! देश के सामने लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे हैं। इन नतीजों से देश का सियासी पारा काफी हाई हो गया है। इन चुनाव परिणामों से कांग्रेस को संजीवनी मिल गई है। वहीं इंडिया गठबंधन का जोश भी हाई हो गया है। लेकिन बीजेपी को सबसे बड़ा झटका लगा है। बीजेपी ‘अबकी बार 400 पार’ ने स्लोगन के साथ जनता के बीच में थी। लेकिन जनता ने बीजेपी को 240 सीटों पर ही रोक दिया। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अकेले 303 सीटों पर जीत हासिल की थी। इस बार बीजेपी को 63 सीटों का बड़ा नुकसान हुआ है। हालांकि बीजेपी एनडीए के अन्य दलों के सहयोग से सरकार बनाने की स्थिति में है, लेकिन मिली जुली ‘खिचड़ी’ सरकार में बीजेपी पहले की तरह बड़े फैसले ले सकेगी, यह एक बड़ा प्रश्न है। जनसंघ के दौर से पीएम मोदी की ‘गारंटी’ वाली बीजेपी ने सियासत के कई रंग देखे हैं। आइए जानते हैं 2 से 240 सीटों तक सफर तय करने वाली बीजेपी का सफरनामा। 1975 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जब पूरे देश में आपातकाल लागू किया तो जनसंघ ने देश में एक बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया। इंदिरा गांधी सरकार ने जनसंघ के कई नेताओं को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया था। 1977 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल खत्म करने के ऐलान के साथ ही देश में आम चुनाव की प्रक्रिया भी शुरू हो गई। जनसंघ का जनता पार्टी में विलय हो गया। कई दलों के विलय से बने जनता पार्टी का मकसद इंदिरा गांधी को चुनाम में मात देना था। इस चुनाव में जनता पार्टी को जीत मिली और मोरारजी देसाई पीएम बने। इस चुनाव में जनसंघ से आए नेताओं को अच्छी कामयाबी मिली। अटल बिहारी वाजपेयी को मोरारजी कैबिनेट में विदेश मंत्री बनाया गया।

इंदिरा के खिलाफ जनता पार्टी का प्रयोग पूरी तरह असफल रहा। 1979 में ये मिली जुली सरकार गिर गई। इसके बाद 6 अप्रैल 1980 को देश की सियासत में नए राजनीतिक दल के रूप में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की स्थापना की गई और अटल बिहारी वाजपेयी इसके पहले अध्यक्ष बने। 1984 में देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश में आम चुनाव हुए। इस चुनाव में बीजेपी मात्र 2 सीटें जीत पाई। इसके बाद 1986 में लालकृष्ण आडवाणी पार्टी के अध्यक्ष बने। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर राम जन्मभूमि आंदोलन शुरू किया। 1989 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पहली बार सफलता का स्वाद चखा और इसकी सीटें 86 हो गईं। इसके बाद बीजेपी कामयाबी के शिखर पर चढ़ता गया। 1991 के लोकसभा चुनाव राजीव गांधी की हत्या के बाद हुए थे। इस चुनाव में बीजेपी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और 120 सीटों पर जीत हासिल की।

1996 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 161 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में स्थापित हुई। सहयोगियों के समर्थन से बीजेपी ने सरकार बनाई और अटल बिहारी वाजपेयी पीएम बने, लेकिन समर्थन न मिलने की वजह से मात्र 13 दिन में ही उनकी सरकार गिर गई। 1998 में बीजेपी ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया और पार्टी ने इस बार के लोक सभा चुनाव में 182 सीटें जीतीं। एनडीए के बैनर तले अटल फिर पीएम बने, इस बार उनकी सरकार 13 महीने चली। 1999 में तीसरी बार पीएम बने अटल वाजपेयी की सरकार गिरने के बाद 1999 में देश में एक बार फिर से मध्यावधि चुनाव हुए। बीजेपी को इस बार भी 182 सीटें ही मिली लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी सहयोगियों के दम पर पूरे पांच साल तक सरकार चलाने में सफल रहे।

2004 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बीजेपी ने लोकसभा का चुनाव लड़ा। बीजेपी ने ‘इंडिया शाइनिंग’ और ‘फील गुड’ का स्लोगन दिया। लेकिन चुनावी समय में बीजेपी धराशायी हो गई। पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा। एनडीए के कई सहयोगियों ने बीजेपी का साथ जोड़ दिया। इसके बाद 2004 से लेकर 2014 तक बीजेपी विपक्ष में रही। 2009 में आडवाणी के नेतृत्व में लड़े गए लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा।

केंद्र की सियासत में बीजेपी के मोदी युग की शुरुआत 2013 में हुई। 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने लोकसभा का चुनाव लड़ा और भारी मतों से केंद्र की सत्ता में वापसी की। 282 सीटें लेकर बीजेपी ने पहली बार केंद्र में अपने दम पर सरकार बनाई। 2019 के चुनाव में भी नरेंद्र मोदी के दम पर बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की और 303 सीटों के रिकॉर्ड बहुमत के साथ केंद्र में सरकार बनाई। अब 2024 में भी बीजेपी केंद्र में सरकार बनाने की स्थिति में दिख रही है।