यह सवाल उठना लाजिमी है कि विधानसभा चुनाव से पहले यूनिफाइड पेंशन स्कीम पर दाव खेलना कितना सही है और कितना नहीं! लोकसभा चुनाव 2024 में 400 पार का सपना देखने वाली बीजेपी महज 240 सीटों पर सिमट कर रह गई थी। बीजेपी को एनडीए के घटक दलों के सहयोग से केंद्र में सरकार बनानी पड़ी। लोकसभा चुनाव में भारी सीटों को नुकसान होते ही बीजेपी विपक्षी पार्टियों के निशाने पर आ गई। लेकिन बीजेपी आगामी चार राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर काफी ऐक्टिव है, इस बार बीजेपी कोई मौका नहीं गंवाना चाहती। शायद यही वजह है मोदी सरकार ने चुनावों से ठीक पहले सरकारी कर्मचारियों को पेंशन का तोहफा दे दिया है।केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के लिए नई पेंशन योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना को यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) नाम दिया गया है। इस फैसले से सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद सैलरी का 50% पेंशन के तौर पर मिलेगा। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने यह कदम एनपीएस को लेकर सरकारी कर्मचारियों की नाराजगी को देखते हुए उठाया है। वहीं, सरकार का कहना है कि UPS, NPS का बेहतर वर्जन है।
बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि यूनिफाइड पेंशन स्कीम सरकारी कर्मचारियों को राहत देने वाली है, यह स्कीम सरकारी कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही पेंशन की मांग को ध्यान में रखकर लाई गई है। दरअसल इस साल हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में नई पेशन योजना को मंजूरी देकर बीजेपी ने सरकारी कर्मचारियों के वोट को अपनी तरफ खींचने की कोशिश की है। आंकड़े बताते हैं कि लोकसभा चुनाव में सरकारी कर्मचारियों के पेंशन को लेकर गुस्से और विरोध के चलते बीजेपी को भारी मतों का नुकसान हुआ था। इस साल जिन राज्यों में चुनाव है। उन राज्यों में बीजेपी को मिले पोस्टल बैलेट (डाक मतपत्र) की संख्या 2019 के मुकाबले 2024 के लोकसभा चुनाव में कम हुई है। पोस्टल बैलेट की सुविधा वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग व्यक्तियों के अलावा आवश्यक सरकारी सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों को दी जाती है, इसमें रक्षा बलों के कर्मी भी शामिल हैं।
हरियाणा में कांग्रेस को इस बार पोस्टल बैलेट में BJP से ज्यादा वोट मिले हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने BJP से 5 सीटें छीन लीं। इसके साथ ही पोस्टल बैलट में भी कांग्रेस का वोट शेयर बढ़ा है। 2019 में BJP ने हरियाणा की सभी 10 लोकसभा सीटें जीती थीं। उस समय पोस्टल बैलेट में BJP को 74% वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस को सिर्फ 16% वोट मिले थे। 2024 के चुनाव में BJP को 44.26% और कांग्रेस को 48.49% पोस्टल वोट मिले। 2019 में हरियाणा में कुल 53,689 पोस्टल बैलट पड़े थे। 2024 में यह संख्या घटकर 51,237 रह गई। हरियाणा में विधानसभा चुनाव 1 अक्टूबर को होने हैं।
जम्मू और कश्मीर में 2019 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले 2024 में बीजेपी को पोस्टल बैलेट में बड़ी गिरावट का सामना करना पड़ा है। 2019 में बीजेपी को 69% पोस्टल बैलेट मिले थे, जबकि कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन को सिर्फ 16% वोट मिले थे। 2024 में हुए चुनाव में पोस्टल बैलेट के आंकड़े बदल गए। इस बार कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन को 38.64% वोट मिले, जबकि बीजेपी को 33.26% वोट मिले। जम्मू और कश्मीर में 18 सितंबर, 25 सितंबर और 1 अक्टूबर को तीन चरणों में वोटिंग होनी है। 2019 में कुल 53,737 पोस्टल बैलेट डाले गए थे। 2019 में बीजेपी ने जम्मू की दोनों लोकसभा सीटें और लद्दाख की सीट जीती थी, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कश्मीर की तीनों सीटें जीती थीं। इस साल जम्मू और कश्मीर (बिना लद्दाख के) में कुल 42,867 पोस्टल बैलेट डाले गए। 2024 के चुनाव में बीजेपी ने जम्मू की अपनी दोनों लोकसभा सीटें बरकरार रखीं, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस को दो सीटों से संतोष करना पड़ा। कश्मीर की तीसरी सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।
महाराष्ट्र में पोस्टल बैलेट के आंकड़े बता रहे हैं कि राजनीतिक समीकरण कैसे बदल रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी और शिवसेना को पोस्टल बैलेट में बड़ी जीत मिली थी। लेकिन 2024 में महाविकास अघाड़ी आगे निकल गई। इसका मतलब साफ है, 2024 के चुनाव में मुकाबला कड़ा होने वाला है। 2019 में बीजेपी और शिवसेना को कुल 2.15 लाख पोस्टल वोटों में से 54.8% वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस और NCP को सिर्फ 30.15% वोट ही मिल पाए थे। लेकिन 2024 में तस्वीर बदल गई। इस बार महाविकास अघाड़ी ने पोस्टल बैलेट में 43.72% वोट हासिल किए, जबकि बीजेपी और उसके सहयोगियों को 39% वोट ही मिले। इस बदलाव के पीछे कई कारण हो सकते हैं। 2019 के बाद से महाराष्ट्र की राजनीति में काफी उथल-पुथल हुई है। शिवसेना में टूट हो गई और NCP भी दो गुटों में बंट गई। इन बदलावों का असर पोस्टल बैलेट के नतीजों पर साफ दिखाई दे रहा है।
झारखंड और हरियाणा में 2019 के लोकसभा चुनाव में पोस्टल बैलेट के नतीजे अलग-अलग रहे। झारखंड में बीजेपी गठबंधन को ज्यादा वोट मिले, जबकि हरियाणा में कांग्रेस गठबंधन आगे रहा। झारखंड में 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी और AJSU को कुल 38,553 पोस्टल बैलेट में से 57% वोट मिले थे। वहीं, कांग्रेस, JMM, RJD और CPI(ML) गठबंधन को 32.49% वोट मिले थे। इस चुनाव में NDA ने झारखंड की 14 में से 12 लोकसभा सीटें जीती थीं, जबकि विपक्ष को 2 सीटों पर जीत मिली थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में हरियाणा में पोस्टल बैलेट के नतीजे अलग थे। हरियाणा में डाले गए कुल 1.69 लाख पोस्टल बैलेट में से कांग्रेस गठबंधन को 47% वोट मिले, जबकि बीजेपी गठबंधन को 42% वोट मिले। दोनों राज्यों में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं।


