आखिर कैसा था इस बार का अंतरिम बजट?

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आज हम आपको बताएंगे कि इस बार का अंतरिम बजट कैसा था! लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार के अंतरिम बजट से लोगों को राहत की फुहारों की उम्मीदें थीं। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। किसानों को उम्मीद थी पीएम किसान सम्मान निधि की रकम बढ़ने की। सैलरीड क्लास को उम्मीद थी टैक्स में राहत की। महिला, गरीब, युवा, किसान सबने सीधे-सीधे कुछ रियायतों की आस लगा रखी थी। ये चार तो पीएम मोदी के लिए सबसे बड़ी जातियां हैं। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में भी बताया कि सरकार का मुख्य फोकस इन्हीं चार वर्गों पर है। ये प्राथमिकता में सबसे ऊपर हैं। लेकिन कुछ खास नहीं मिला। न किसान सम्मान निधि बढ़ी और न ही इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव हुआ। इनकम टैक्स ही नहीं, सभी डायरेक्ट टैक्स में कोई बदलाव नहीं हुआ। इनडायरेक्ट टैक्स में भी कोई बदलाव नहीं हुआ। विपक्ष बजट की आलोचना कर रहा। समाजवादी पार्टी के मुखिया तो वित्त मंत्री के बजट भाषण को मोदी सरकार का ‘विदाई भाषण’ करार दिया है। आखिर इस बजट के सियासी निहितार्थ क्या हैं? बजट के जरिए समझा जा सकता है कि चुनाव से पहले पीएम मोदी के दिमाग में आखिर क्या चल रहा। सरकार की 10 साल की उपलब्धियों का बखान, पिछली सरकार को कोसकर विपक्ष पर हमला, किसी भी तरह की नई लोकलुभावन योजना से परहेज और भविष्य में और ‘अच्छे दिन’ के सपने। मोटे तौर पर ये 4 बातें ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण का निचोड़ हैं।

मुद्रा योजना से लेकर पीएम किसान योजना तक, मुफ्त राशन स्कीम से लेकर अभूतपूर्व इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण तक, 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने से लेकर आर्थिक मोर्चे पर देश के शानदार प्रदर्शन तक…निर्मला ने बजट भाषण में मोदी सरकार की पिछले 10 साल की उपलब्धियों का बखान किया। ‘पहले और अब’ के जरिए उन्होंने मोदी सरकार के आने के बाद इकॉनमी से लेकर तमाम क्षेत्रों में क्या-क्या बदलाव आया, इसके जरिए भारत की बुलंद तस्वीर दिखाने की कोशिश की। नजीर के तौर पर, 2013-14 में 2.2 लाख रुपये की आय इनकम टैक्स के दायरे से बाहर थी जबकि अब 7 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इस तरह उन्होंने पिछली सरकारों को भी कोसा। यहां तक कि 2014 से पहले के कथित आर्थिक कुप्रबंधन पर श्वेत पत्र लाने का ऐलान किया।

बजट भाषण में किसी भी नई लोकलुभावन स्कीम का ऐलान नहीं हुआ जिसे मुफ्त की रेवड़ी कहा जा सके। ये संकेत है कि लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी मुफ्त की रेवड़ियों के मुद्दे पर विपक्षी दलों के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अख्तियार करने वाले हैं। निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में भविष्य को लेकर और ‘अच्छे दिन’ के सपने दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का वादा हो या रूफटॉप सोलर स्कीम के जरिए 1 करोड़ लोगों को हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा हो, किराये के घर या स्लम, चॉल या फिर अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले मध्यम वर्ग के लोगों को घर देने के लिए नई हाउसिंग स्कीम का ऐलान हो या 2047 तक विकसित भारत बनाने का वादा…बजट भाषण सुनहरे भविष्य का सपना भी दिखाता है।

रूफटॉप सोलर स्कीम यानी छत पर सौर ऊर्जा वाली स्कीम का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन को शाम में की थी। इस महत्वाकांक्षी स्कीम के जरिए 1 करोड़ लोगों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का फायदा पहुंचाने का लक्ष्य है। सरकार का दावा है कि इससे हर लाभार्थी परिवार को सालाना 15 से 18 हजार रुपये का फायदा पहुंचेगा। ये ऐसी स्कीम है जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव में जमकर भुनाने वाले हैं, भले ही अभी इसका ऐलान हुआ है, धरातल पर उतरना बाकी है। इसके जरिए ‘मुफ्त की रेवड़ियों’ पर उनका प्रहार और धारदार होगा। इसके जरिए उन्होंने मुफ्त में दिए बिना ही मुफ्त की बिजली के इंतजाम का विजन पेश किया है जो मुफ्त बिजली-मुफ्त पानी पॉलिटिक्स पर सीधा प्रहार है।

बजट में किसी भी नई लोकलुभावन स्कीम का ऐलान नहीं करने और सीधे-सीधे किसी वर्ग को नई रियायत नहीं देने की एक बड़ी वजह प्रधानमंत्री मोदी का केंद्र की सत्ता में हैटट्रिक लगाने का पूर्ण भरोसा है। ये बताता है कि मोदी पूरी तरह आश्वस्त हैं कि वह फिर सत्ता में आ रहे हैं। निर्मला सीतारमण ने अंतरिम बजट भाषण में इस भरोसे का ये कहकर पुरजोर इजहार भी किया कि जुलाई में वह पूर्ण बजट पेश करेंगी। इस भरोसे की बड़ी वजह संभवतः ‘राम लहर’ है। निर्मला ने भले ही परंपरा का हवाला देकर अंतरिम बजट में किसी तबके के लिए बड़ी रियायत का ऐलान नहीं किया लेकिन अंतरिम बजट तो 2019 में भी पेश हुआ था। मोदी सरकार का ही था। तब पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट पेश किया था और उसमें पीएम किसान सम्मान निधि के बारे में ऐलान था। ये स्कीम गेमचेंजर साबित हुई और 2019 में मोदी सरकार रिपीट में उसका बड़ा योगदान माना गया। लेकिन इस बार इस तरह की किसी गेमचेंजर स्कीम का ऐलान नहीं होना बताता है कि नरेंद्र मोदी सरकार को पक्का भरोसा है कि चुनाव बाद वही फिर सत्ता में आएगी। इस भरोसे की एक बड़ी वजह अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण है। 22 जनवरी को राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पूरे देश में एक जबरदस्त ‘राम लहर’ बनी है। नरेंद्र मोदी को अपनी सरकार के 10 साल के कार्यकाल में किए गए कामकाज और ‘राम’ पर भरोसा है।