Sunday, April 6, 2025
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आखिर मणिपुर में सीआरपीएफ क्यों नहीं चाहती फोर्स?

वर्तमान में मणिपुर में सीआरपीएफ की नियुक्ति फोर्स नहीं चाहती है! गृह मंत्रालय ने मणिपुर से असम राइफल्स की दो बटालियन कम कर उन्हें जम्मू-कश्मीर भेजने और उनकी जगह पर सीआरपीएफ की बटालियन तैनात करने का निर्देश दिया है। हालांकि असम राइफल्स इसके पक्ष में नहीं था। सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय के लिखित आदेश आने के काफी पहले से इसे लेकर बातचीत चल रही थी और असम राइफल्स की तरफ से यह बात रखी गई थी कि अभी मणिपुर में असम राइफल्स की जरूरत है और मौजूदा हालात में यहां से बटालियन कम करना सही नहीं होगा। मणिपुर में स्थिति कंट्रोल में करने के लिए असम से भी असम राइफल्स के सैनिकों को मणिपुर में तैनात किया गया है। सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि मणिपुर के चूराचांदपुर के कन्गवाई से और केपीआई के कामचुक से असम राइफल्स की दो बटालियन हटाकर जम्मू-कश्मीर भेजी जाएं। कई सीनियर अधिकारियों से बात करने पर उन्होंने बताया कि अगर मणिपुर से असम राइफल्स के सैनिकों को हटाकर सीधे जम्मू-कश्मीर भेज दिया जाए तो उनका मनोबल कम होगा और उन्हें लगेगा कि उन्हें सजा के तौर पर हटाया गया है। इसलिए इस पर चर्चा चल रही है कि मणिपुर से इन दो बटालियन को अरुणाचल प्रदेश भेजा जाए और वहां से दो बटालियन को जम्मू-कश्मीर भेजा जाए।

जिन्होंने हिंसा की साजिश की और उसे पोषित किया, पता होना चाहिए कि मणिपुर को तोड़ने की कोई भी कोशिश राज्य में ही नहीं बल्कि पूरे रीजन में सतत और हिंसक संघर्ष को आमंत्रित करना है।एक अधिकारी ने कहा कि इस वक्त फोर्स का मनोबल बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। करीब दो साल पहले भी असम राइफल्स की दो बटालियन को जम्मू-कश्मीर भेजा गया था और वो अभी वहीं तैनात हैं।

कुकी समुदाय के संगठनों ने असम राइफल्स की बटालियन हटाकर सीआरपीएफ लगाने का विरोध किया है। कुकी समुदाय से आने वाले मणिपुर के विधायकों ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने को कहा है कि जातीय हिंसा से ग्रस्त मणिपुर में असम राइफल्स संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा करती रहे और उनकी जगह सीआरपीएफ ना लगाई जाए। दूसरी तरफ मैतई संगठन COCOMI ने असम राइफल्स पर कुकी लोगों का साथ देने के आरोप लगाए हैं। मैतई संगठनों ने असम राइफल्स की जगह सीआरपीएफ और बीएसएफ को लाने की मांग की है।

इनर मणिपुर से कांग्रेस सांसद अंगोमचा अकोइजम ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह कहने की जरूरत नहीं है कि मैं मणिपुर का अपमान या नुकसान पहुंचाने के किसी भी प्रयास का मूकदर्शक बनने राजनीति में नहीं आया हूं। उन्होंने लिखा कि उन विभाजनकारी और सांप्रदायिक ताकतों और उनके आकाओं को जिन्होंने हिंसा की साजिश की और उसे पोषित किया, पता होना चाहिए कि मणिपुर को तोड़ने की कोई भी कोशिश राज्य में ही नहीं बल्कि पूरे रीजन में सतत और हिंसक संघर्ष को आमंत्रित करना है।

मणिपुर के राज्यसभा सांसद और बीजेपी सदस्य लैशेम्बा सनाजाउबा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट को अपने एक्स पोस्ट पर शेयर किया है। जिसमें असम राइफल्स की बटालियन जम्मू-कश्मीर भेजे जाने के बारे में लिखा है कि यह मणिपुर की स्थिति को संभालने के लिए सकारात्मक कदम है। केंद्र सरकार ने अब मणिपुर के लोगों की मांगें पूरी करना शुरू किया है। बता दें कि सीनियर अधिकारियों से बात करने पर उन्होंने बताया कि अगर मणिपुर से असम राइफल्स के सैनिकों को हटाकर सीधे जम्मू-कश्मीर भेज दिया जाए तो उनका मनोबल कम होगा और उन्हें लगेगा कि उन्हें सजा के तौर पर हटाया गया है। इसलिए इस पर चर्चा चल रही है कि मणिपुर से इन दो बटालियन को अरुणाचल प्रदेश भेजा जाए और वहां से दो बटालियन को जम्मू-कश्मीर भेजा जाए।

समय आ गया है कि हम केंद्र और राज्य सरकार पर भरोसा करें ताकि वे मणिपुर में स्थायी शांति के लिए काम करें। इस पोस्ट में लिखा है कि हम मैतई अपनी पहली जीत देख रहे हैं। यही नहीं कुकी समुदाय के संगठनों ने असम राइफल्स की बटालियन हटाकर सीआरपीएफ लगाने का विरोध किया है। कुकी समुदाय से आने वाले मणिपुर के विधायकों ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने को कहा है कि जातीय हिंसा से ग्रस्त मणिपुर में असम राइफल्स संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा करती रहे और उनकी जगह सीआरपीएफ ना लगाई जाए। अगर हमें अभी अहसास नहीं हुआ तो अगले 10-20 सालों में मैतीय कहीं नहीं रहेगा।

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