अभी सरकार ने अग्निपथ’ योजना (Agnipath scheme) के तहत सेना की भर्ती शुरू अभी हुई ही नहीं थी कि बवाल होना शुरू हो गया। सरकार ने इस बीच साफ किया की रेजिमेंटल प्रणाली में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। देश के कई हिस्सों में इस नए माडल के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरु हो गया है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि ‘अग्निपथ’ योजना के लागू होने के पहले वर्ष में भर्ती होने वाले कर्मियों की संख्या भी केवल तीन प्रतिशत होगी।
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि ‘अग्निपथ’ योजना (Agnipath scheme) का उद्देश्य युवाओं के लिए सशस्त्र बलों में सेवा करने के अवसरों को बढ़ाना है। इसके (Agnipath scheme) तहत कर्मियों की भर्ती सशस्त्र बलों में मौजूदा नामांकन का लगभग तिगुना होगा। यह जानकारी ऐसे वक्त में सामने आई है जब एक दिन पहले ही सरकार ने दशकों पुरानी चयन प्रक्रिया में बड़े बदलाव का एलान किया है।
वही सरकारी सूत्रों के मुताबिक़ रेजिमेंटल सिस्टम में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। असल में सर्वश्रेष्ठ ‘अग्निवीर’ का चयन करना और देश की सुरक्षा को और दुरूस्त करना ही इस योजना का लक्ष्य है। जिससे इकाइयों की एकजुटता को और बढ़ावा मिलेगा। सूत्रों ने कहा कि ऐसी प्रणाली कई देशों में मौजूद है इसलिए यह पहले से ही परखी जा चुकी है। इसे सेना में अच्छी पहल के तौर पर लिया जाता है।
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि पहले वर्ष में भर्ती होने वाले ‘अग्निवीरों’ की संख्या सशस्त्र बलों का केवल तीन प्रतिशत होगी। चार साल बाद सेना में फिर से इन्हें शामिल करने से पहले उनके प्रदर्शन की जांच परख होगी।
कहां हुआ बवाल ?
उत्तर प्रदेश ककई शहरो जैसे बरेली, बुलंदशहर, मथुरा, प्रयागराज, गोरखपुर में सेना में भर्ती का युवाओं ने खुद विरोध प्रदर्शन किया । प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने इस योजना को रद करने की मांग की और साथ ‘अग्निपथ योजना वापस लो’ के नारे लगाए हैं। केंद्र सरकार की सेना में भर्ती के लिए बनाई गई अग्निपथ योजना के खिलाफ कई जगह युवाओं में आक्रोश बढ़ रहा है। सैकड़ों की संख्या में युवाओं ने मथुरा में रैपुराजाट गांव के पास आगरा-दिल्ली हाईवे पर जाम लगा दिया। जाम के कारण दोनों ओर से हाईवे सड़क यता यात रहा प्रभावित करीब 12 बजे युवाओं ने आगरा-दिल्ली हाईवे पर रैपुरा जाट के निकट जाम लगा दिया। इससे आगरा और दिल्ली से आने वाले जहां के तहां रुक गए।
अग्निपथ स्कीम के तहत अग्निवीर बनने से पहले ही अभ्यर्थी गुस्से में हैं। बिहार में इसका असर कुछ ज्यादा ही देखने को मिल रहा है। लगातार दूसरे दिन नौजवान सड़कों पर हैं। बक्सर से शुरू हुआ बवाल नवादा और छपरा तक पहुंच चुका है। जहानाबाद और सीवान में भारी हंगामा हुआ है। बिहार में, विरोध प्रदर्शन लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा क्योंकि शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों ने राज्य के विभिन्न जिलों में ट्रेनों की आवाजाही को बाधित कर दिया। बेगूसराय जिले में आक्रोशित युवक ने राजबारा गुमटी मार्ग को जाम कर दिया. ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई क्योंकि आंदोलनकारी प्रदर्शनकारियों ने रेलवे पटरियों पर बैठकर अपनी चिंताओं को व्यक्त किया। कई जगहों पर सड़कें भी जाम कर दी गईं। विरोध के दौरान रेलवे ट्रैक पर एक टायर जला दिया गया। दरअसल 2020 से आर्मी अभ्यर्थियों की कई परीक्षाएं हुई थी। किसी का मेडिकल बाकी था तो किसी का रिटेन। ऐसे सभी अभ्यर्थियों की योग्यता एक झटके में रद्द कर दी गई। पहले ये नौकरी स्थाई हुआ करती थी। मतलब सरकारी नौकरी का ख्वाब इससे नौजवान पूरा करते थे। नई स्कीम की तहत बताया गया कि अब चार साल की नौकरी होगी। इसमें सिर्फ 25 प्रतिशत अग्निवीरों को स्थाई किया जाएगा। 75 प्रतिशत चार साल बाद रिटायर हो जाएंगे। उनको पेंशन समेत बाकी सुविधाएं नहीं मिलेंगी। बिहार जैसे राज्य में जहां ज्यादातर युवाओं का ख्वाब सरकारी नौकरी होता है, ऐसे में सपना टूटता देख नौजवान सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर गए।जिले के साहेबपुरकमल रेलवे स्टेशन पर छात्रों ने जमकर हंगामा किया और साथ ही आगजनी और पथराव भी किया. लखीसराय जिले में भी ऐसा ही कोहराम देखा गया। केंद्र सरकार की इस योजना के विरोध में प्रदर्शनकारियों के एक विशाल समूह ने संयुक्त रूप से जिले में मार्च निकाला। धरने के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ भी नारेबाजी की गई। मौके पर मौजूद स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने एएनआई को बताया, “वे मुझे एक वीडियो शूट करने से रोक रहे थे और मेरा फोन भी छीन लिया। लगभग 4-5 डिब्बे प्रभावित हुए। यात्री उतर गए और अपने आप आगे बढ़ने में कामयाब रहे। सेना में भर्ती के नए नियम पर बिहार में बवाल मचा हुआ है। दर्जनभर जिलों में लगातार दूसरे दिन जबर्दस्त विरोध देखने को मिला। आर्मी अभ्यर्थियों के विरोध को देखते हुए कई बीजेपी शासित राज्यों ने लुभावने घोषणाएं की। राज्य की नौकरियों में वरीयता देने की बात कही। ताकि छात्रों के गुस्से को थामा जा सके। बिहार में सत्ता की साझीदार बीजेपी है मगर बागडोर जेडीयू के नीतीश कुमार के पास है। चूंकि केंद्र की बीजेपी सरकार ने नियमों में बदलाव किया तो जाहिर-सी बात है, नौजवानों में गुस्सा भी बीजेपी के खिलाफ है। इस बाबत न तो बिहार बीजेपी का कोई बड़ा नेता बयान दिया है और ना ही सरकार की ओर से युवाओं के लिए कोई घोषणाएं की गई है।
नेताओ ने बताया तानाशाही फरमान
मायावती, अखिलेश यादव के साथ ही प्रियंका गांधी जैसे सभी बड़े नेताओं ने केन्द्र सरकार के इस फैसले को तानाशाही वाला बताया है। सभी नेताओं ने कहा है कि सरकार अग्निपथ योजना पर पुनर्विचार करे। सरकार की अग्निपथ योजना के तहत थल सेना, जल सेना तथा वायु सेना में इस वर्ष करीब 46,000 सैनिक भर्ती करने की योजना है।