Thursday, April 3, 2025
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क्या बॉलीवुड हमेशा से करता है मुस्लिम तुष्टिकरण?

यह सवाल उठना है कि क्या बॉलीवुड हमेशा से मुस्लिम तुष्टिकरण करता है या नहीं! हाल ही में रिलीज हुई वेबसीरीज IC 814: द कंधार हाईजैक को लेकर बवाल मचा हुआ है। ये वेब सीरीज 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 के हाईजैक की सत्य घटना पर आधारित है। पूरी वेब सीरीज में कई बार 1999 के असली दृश्य भी दिखाए गए हैं, जो इस दावे को और मजबूत करते हैं कि ये सीरीज असली हाईजैक की घटना से पूरी तरह जुड़ी हुई है। इस हाईजैक को पांच आतंकवादियों ने अंजाम दिया था। विवाद की वजह यह है कि इस वेबसीरीज में आतंकवादियों के असली नामों को बदलकर उनके कोडनेम ‘भोला’ और ‘शंकर’ जैसे हिंदू नामों से दर्शाया गया है। जबकि आतंकियों के असली नाम कुछ और ही थे, जिनका पूरी सीरीज में कहीं जिक्र नहीं हुआ है। विवादों के बीच केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने नेटफ्लिक्स इंडिया की कंटेंट हेड को समन भेजा है सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय ने सोमवार को नेटफ्लिक्स इंडिया की कंटेंट हेड मोनिका शेरगिल को ‘आईसी : 814’ वेब सीरीज कंटेंट विवाद को लेकर मंगलवार को दिल्ली तलब किया है। साथ ही उन्होंने वेब सीरिज से जुड़े विवादित तथ्यों पर स्पष्टीकरण भी मांगा है। वेब सीरीज निर्माताओं पर आरोप है कि आतंकवादियों के असली मुस्लिम नामों को छिपाकर हिंदू नाम दिए गए हैं, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई है। दरअसल वेब सीरीज में आतंकियों के नाम भोला, शंकर,डॉक्टर, बर्गर और चीफ बताए गए हैं। सीरीज में बताया गया है कि ये आतंकियों के कोमनैम थे। लेकिन मेकर्स ने 6 एपिसोड की इस सीरीज में कहीं भी आतंकियों के असली नाम नहीं बताए हैं, जब कि आतंकियों के असली नाम पब्लिक डोमेन में मौजूद थे। सबसे ज्यादा विवाद आतंकियों के ‘भोला’ और ‘शंकर’ नाम को लेकर है।

कंधार हाई जैक के बाद भारत सरकार के गृहमंत्रालय ने जांच के बाद इस हमले की पूरी जानकारी दी थी। 6 जनवरी 2000 को दिए गए गृह मंत्रालय के एक बयान में हाई जैकर्स के असली नाम और उनके पते बताए गए थे। पांचों आतंकी मुस्लिम थे और पाकिस्तान के रहने वाले थे। विदेश मंत्रालय ने बताया कि इन हाईजैकर्स को चीफ, डॉक्टर, बर्गर, भोला और शंकर नाम से जाना जाता है। ये लोग आपस में इन्हीं नामों का इस्तेमाल करते बातचीत करते और पूरे हाई जैक को अंजाम दिया।

IC-814 वेबसीरीज को लेकर बीजेपी ने भी डायरेक्टर अनुभव सिन्हा पर निशाना साधा है। बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, ‘आईसी-814 के हाईजैकर्स खूंखार आतंकवादी थे, जिन्होंने अपनी मुस्लिम पहचान छिपाने के लिए झूठे नामों का सहारा लिया। फिल्म निर्माता अनुभव सिन्हा ने उनके गैर-मुस्लिम नामों को आगे बढ़ाकर उनकी आपराधिक मंशा को वैध कर दिया। इसका नतीजा क्या होगा? दशकों बाद लोगों को लगेगा कि हिंदुओं ने IC-814 हाइजैक की थी। पाकिस्तानी आतंकी, जो सभी मुसलमान हैं उनके अपराधों को छिपाने के लिए वामपंथियों के एजेंडे ने काम किया। यह सिनेमा की ताकत है, जिसका कम्युनिस्ट 70 के दशक से ही आक्रामक तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं। यह सिर्फ भारत की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाएगा या कमजोर करेगा, बल्कि दोष को उन लोगों से दूर कर देगा, जो इस रक्तपात के लिए जिम्मेदार हैं।’

IC-814 वेबसीरीज के कास्टिंग डारेक्टर मुकेश छाबड़ा ने इस मुद्दे पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि इस सीरीज के लिए मेकर्स ने भरपूर रिसर्च की है। अपराधियों ने एक-दूसरे के लिए नकली नामों का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा कि मैं हाईजैकर्स के नामों से जुड़े बहुत सारे ट्वीट पढ़ रहा हूं। हमने भरपूर रिसर्च की है। वे एक-दूसरे को कोडमैन से पुकारते थे। आप उन्हें जो भी नाम देना चाहें।

भारत में फिल्मों और वेबसीरीज में पात्रों के नाम रखने को लेकर कोई खास नियम नहीं है। ये फैसला पूरी तरह फिल्ममेकर्स पर होता है। जब काल्पनिक फिल्में बनती हैं, तो दिक्कत नहीं होती। लेकिन ऐसी सत्य घटनाओं पर आधारित फिल्मों को लेकर यह अपेक्षा की जाती है कि निर्माता तथ्यों का सम्मान करें और धार्मिक या सांप्रदायिक भावनाओं को ठेस न पहुंचाएं। निर्माता अक्सर पात्रों के नामों को बदलने का फैसला लेते हैं ताकि कानूनी विवादों से बचा जा सके, या किसी विशेष समुदाय को ठेस न पहुंचे। लेकिन इस सीरीज पर तुष्टीकरण के आरोप लग रहे हैं। ये पहली ऐसी सीरीज नहीं है, जो विवादों में घिरी हो। पद्मावत, ताडंव, पठान, लैला, सेक्रेड गेम, पीके, ए सूटेबल बॉय और लक्ष्मी जैसी कई फिल्में और सीरीज पर मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप लग चुके हैं।

कुछ लोगों का कहना है कि वेब सीरीज में जिस तरह आतंकियों को हिंदू नाम दिए गए हैं, ये स्यूडो सेक्युलरिजम का उदाहरण है। इतनी बड़ी घटना पर सीरीज बनी और चालाकी से आतंकियों के असली नाम छुपा लिए गए। सीरीज के निर्माताओं की ये बैलेंसिंग पॉलिसी लोगों को पसंद नहीं आ रही। आखिर फिल्मी दुनिया इस तरह की बैलेंसिंग का नकाब क्यों चढ़ाना चाहती है। ये कुछ वैसी ही है, जैसा 2012 में केंद्र सरकार ने दंगे के लिए एक विधेयक में किया था। 2012 में केंद्र सरकार ने सांप्रदायिक हिंसा और दंगों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से “सांप्रदायिक और लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक” प्रस्तावित किया था। इस विधेयक में सांप्रदायिक हिंसा के पीड़ितों के रूप में केवल अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति, और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को मान्यता दी गई थी। इसे लेकर भी हिंदुओं में असंतोष पैदा हुआ क्योंकि जाहिर तौर पर ये विधेयक बहुसंख्यक समुदाय के खिलाफ पक्षपाती था और सांप्रदायिक हिंसा के मामलों में केवल बहुसंख्यकों हिंदुओं को दोषी ठहराने की कोशिश की गई।

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