यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या पाकिस्तान कारगिल जैसा युद्ध करना चाहता है या नहीं! क्या पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ कोई नई रणनीति बनाई है? क्या वह चाहता है कि भारत फिर उसके खिलाफ एयर स्ट्राइक या सर्जिकल स्ट्राइक करे? क्या पाकिस्तान युद्ध चाहता है- पूर्ण नहीं तो सीमित ही? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि डोडा हमले से यह संदेह पुष्ट होता दिख रहा है कि पाकिस्तान अपने रिटायर्ड फौजियों की घुसपैठ भारत में करवा रहा है। हमले में वीरगति को प्राप्त हुए भारतीय सैनिकों को जिस तरह निशाना बनाया गया है, उससे साफ पता चलता है कि हमला मिलट्री ट्रेनिंग में महारत लोगों ने किया है। भारतीय सैनिकों के शरीर में उन जगहों पर गोलियां लगी हैं जो हेलमेट या बुलेटप्रुफ जैकेट से कवर नहीं थे। इतना सटीक निशाना लगाना आम आतंकियों के बूते की बात नहीं है। दूसरी तरफ जिस तरह पाकिस्तानी हमलावरों ने भारतीय सीमा में आकर किसी स्थानीय ओवरग्राउंड वर्कर से मदद नहीं ली और जंगल में ही छिपे रहे, इसके लिए भी कठिन फौजी ट्रेनिंग में महारत रखने की जरूरत होती है। डोडा हमले में राष्ट्रीय राइफल्स के चार सैनिक वीरगति को प्राप्त हो गए। कैप्टन बृजेश थापा, नायक डोक्करी राजेश, सिपाही बिजेंद्र और सिपाही अजय कुमार सिंह ने पाकिस्तानी हमलावरों से लड़ते हुए अपनी प्राणों की बलि दे दी। उनके शरीर पर गोलियों के निशान बताते हैं कि हमलावर कोई आम आतंकी नहीं बल्कि पाकिस्तानी आर्मी के विशेष खुफिया अभियान बल के लोग थे। पाकिस्तानी आर्मी ने स्पेशल सर्विस ग्रुप (एसएसजी) बना रखा है जिसके लिए सीधे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईसएसआई नियुक्तियां करती है। जम्मू डिविजन में अचानक बढ़े आतंकी वारदात के पीछे इसी एसएसजी का हाथ हो सकता है। पाकिस्तान ने करगिल में भी अपने नॉर्दर्न लाइट इन्फेंट्री के जवानों को भेजा था जिसके चलते भारत को युद्ध छेड़नी पड़ी और पाकिस्तान चारों खाने चित हो गया।
अब तक की जांच में पता चला है कि डोडा के आतंकियों ने सुरक्षा कवच को भेदने वाली गोलियों और अमेरिकी एम4 कार्बाइनों से हमला किया है जो अफगानिस्तान युद्ध में इस्तेमाल हुए थे। अधिकारियों ने कहा कि डोडा हमले में शामिल आतंकियों ने जिस तरह खुद को बाहरी दुनिया के संपर्क में आने से बचाए रखा और जंगलों में ही छिपे रहे, उससे पता चलता है कि उन्होंने फौजी ट्रेनिंग ले रखी है। संभव है कि आईएसआई से भर्ती एसएसजी जवानों ने डोडा अटैक को अंजाम दिया हो।
भारतीय सेना के उत्तरी कमांड ने डोडा हमले के बाद कहा है कि घुसपैठ की गंभीरता से जांच चल रही है। इस काम में जम्मू-कश्मीर पुलिस की मदद ली जा रही है। विदेशी घुसपैठिये जम्मू रीजन के उधमपुर, डोडा और किश्तवाड़ जिलों से होकर कश्मीर जा रहे हैं। उधर, छिपे हुए आतंकियों के सफाये के लिए राष्ट्रीय राइफल्स और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सोमवार रात से ही अभियान छेड़ रखा है। अभियान के तहत जंगलों की खास छानबीन की जा रही है। इसके लिए आर्मी, पैरा-कमांडोज के साथ-साथ हवाई निगरानी के लिए हेलिकॉप्टरों और ड्रोनों की मदद ली जा रही है। जम्मू-कश्मीर में हुए हालिया आतंकी हमलों के लिए जैश-ए-मोहम्मद के आउटफिट कश्मीर टाइगर्स ने जिम्मेदारी ली है। 2021 से जम्मू संभाग में आतंकी हमले बढ़ गए हैं। इन हमलों में अब तक 52 सैनिकों समेत कुल 70 लोगों की जानें जा चुकी हैं।
अगर इन हमलों के लिए पाकिस्तानी सेना जिम्मेदार है तो निश्चित रूप से भारत बदले की कार्रवाई करेगा। मोदी सरकार ने पाकिस्तान पर सर्जिकल और एयर स्ट्राइक्स किए हैं। बावजूद इसके पाकिस्तान की तरफ से हो रही आतंकी गतिविधियां बताती हैं कि उसके मन में कुछ ना कुछ चल तो जरूर रहा है। क्या उसने यही प्लानिंग की है कि भारत को युद्ध के लिए उकसाया जाए? क्या वह चीन के इशारे पर भारत को अशांत करना चाहता है? यह संभव है क्योंकि भारत की प्रगति की एक से बढ़कर एक गाथा सुनकर आर्थिक रूप से बर्बाद हो चुके पाकिस्तान की नींदे हराम तो जरूर हो रही होंगी।जम्मू डिविजन में अचानक बढ़े आतंकी वारदात के पीछे इसी एसएसजी का हाथ हो सकता है। पाकिस्तान ने करगिल में भी अपने नॉर्दर्न लाइट इन्फेंट्री के जवानों को भेजा था जिसके चलते भारत को युद्ध छेड़नी पड़ी और पाकिस्तान चारों खाने चित हो गया। देखना होगा कि आखिर भारत अपने शैतान पड़ोसी की मंशा भांपकर भी सबक सिखाने की कार्रवाई से खुद को कब तक रोके रख सकता है।


