क्या चीन ने बना लिया है अपना नया सैन्य अड्डा?

0
152

चीन ने अपना एक नया सैन्य अड्डा बना लिया है! चीन अमेरिका को उसके घर में घेरने के लिए कैरेबियाई देश एंटीगुआ में सैन्य अड्डा स्थापित करने की तैयारी में है। इसके लिए चीन ने एंटीगुआ के बंदरगाहों, हवाई अड्डों, वाटर सिस्टम सहित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों में निवेश को बढ़ा दिया है। इससे एंटीगुआ पर चीनी कर्ज काफी ज्यादा हो गया है। एंटीगुआ अमेरिका के वर्जिन द्वीप समूह के तट से केवल 220 मील की दूरी पर स्थित है। इस देश में करीब 1000 चीनी सुरक्षा गार्ड तैनात हैं। चीन ने एंटीगुआ के एक 1000 एकड़ के द्वीप को अपना ठिकाना बनाया हुआ है। माना जा रहा है कि इस द्वीप का इस्तेमाल अमेरिका की जासूसी करने और भविष्य में उसे सैन्य अड्डे के रूप में इस्तेमाल करने के लिए किया जा सकता है। एंटीगुआ में चीन की मौजूदगी से पूरे कैरिबियाई देशों में अमेरिका के लिए टेंशन बढ़ सकती है। न्यूजवीक की रिपोर्ट के अनुसार, एंटीगुआ की इस द्वीप को चीन एक विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित करेगा। चीन के कब्जे वाले इस द्वीप की अपनी सीमा शुल्क और आव्रजन औपचारिकताएं होंगी। इसके अलावा इस द्वीप के लिए एक शिपिंग बंदरगाह और एक समर्पित एयरलाइन भी होगी। इतना ही नहीं, चीनी अधिकारी इस द्वीप के निवासियों के लिए पासपोर्ट जारी करने में सक्षम होंगे।जहां केवल 97,000 लोग रहते है। ब्राउन ने कहा, पश्चिमी देश एंटीगुआ को आवश्यक मदद नहीं दे रहे हैं। चीन यहां लॉजिस्टिक्स से लेकर क्रिप्टोकरेंसी, चेहरे की सर्जरी से लेकर “वायरोलॉजी” तक सब कुछ प्रदान करने वाले व्यवसाय स्थापित करेगा।

न्यूजवीक ने सरकार और कॉरपोरेट दस्तावेजों की जांच के बाद बताया कि चीन, उसकी सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियां और संबद्ध निजी व्यवसाय द्वीप राष्ट्र एंटीगुआ और बारबुडा और इस रणनीतिक क्षेत्र के अन्य कैरेबियाई देशों में तेजी से विस्तार कर रहे हैं। कैरिबियाई देशों को लंबे समय से “अमेरिका की तीसरी सीमा” के रूप में जाना जाता है। 1960 के दशक में क्यूबा में सोवियत संघ की स्थापना के बाद से चीन की बढ़ती क्षेत्रीय उपस्थिति संभावित रूप से अमेरिका के लिए सबसे बड़ी बाहरी चुनौती है। इससे अमेरिकी सेना भी चिंतित है। अमेरिकी सेना के फ़्लोरिडा स्थित दक्षिणी कमान (साउथकॉम) के एक प्रवक्ता ने न्यूज़वीक को बताया, “हम जानते हैं कि चीन सैन्य उद्देश्यों के लिए अपनी वाणिज्यिक और राजनयिक उपस्थिति का उपयोग कर सकता है। एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व में, चीन पहले ही सैन्य उद्देश्यों के लिए मेजबान देश के बंदरगाहों पर वाणिज्यिक समझौतों का दुरुपयोग कर चुका है; हमारी चिंता यह है कि वह यहां भी भी ऐसा ही कर सकता है। एंटीगुआ की इस द्वीप को चीन एक विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित करेगा। चीन के कब्जे वाले इस द्वीप की अपनी सीमा शुल्क और आव्रजन औपचारिकताएं होंगी। इसके अलावा इस द्वीप के लिए एक शिपिंग बंदरगाह और एक समर्पित एयरलाइन भी होगी। इतना ही नहीं, चीनी अधिकारी इस द्वीप के निवासियों के लिए पासपोर्ट जारी करने में सक्षम होंगे।आलोचकों का कहना है कि चीन से करोड़ों डॉलर के ऋण और अनुदान और चीनी राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियों द्वारा बंदरगाहों, हवाई अड्डों और जल प्रणालियों सहित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के व्यापक निर्माण से एंटीगुआ अब चीन के सामने के यार्ड में बदल रहा है।

एंटीगुआ के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन ने सेंट जॉन्स में एक न्यूजवीक को दिए इंटरव्यू में चीन और उसके नेता शी जिनपिंग की प्रशंसा की। 170 वर्ग मील में फैला सेंट जॉन्स एंटीगुआ की राजधानी है, जहां केवल 97,000 लोग रहते है। ब्राउन ने कहा, पश्चिमी देश एंटीगुआ को आवश्यक मदद नहीं दे रहे हैं। ब्राउन ने कहा, “हालांकि, मैं चीन को एक ऐसे देश के रूप में देखता हूं जो सच्चाई पर कायम है, और एक ऐसा देश है, जिसमें कम से कम छोटे राज्यों और आम तौर पर वैश्विक स्तर पर गरीबों और वंचित व्यक्तियों के लिए कुछ हद तक सहानुभूति है।” यही नहीं आपको बता दें कि चीन ने करीब एक दशक बाद अपनी सेना में बड़ा बदलाव किया है और आधुनिक युद्ध यानी मॉडर्न वॉरफेयर की चुनौतियों से निपटने के लिए एक नई यूनिट बनाने की घोषणा की है. इस यूनिट को नाम दिया है इन्फॉर्मेशन सपोर्ट फोर्स (ISF). 19 अप्रैल को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की स्ट्रैटेजिक सपोर्ट फोर्स, जो इंटेलिजेंस कलेक्शन से लेकर साइकोलॉजिकल वायरफेयर, इन्फॉर्मेशन वारफेयर, स्पेस वायरफेयर और इलेक्ट्रॉनिक वायरफेयर के लिए जिम्मेदार थी, उसे भंग कर दिया गया और उसकी जगह इस नई यूनिट को बनाने का ऐलान किया गया.