हमारे वैदिक विज्ञान में कई प्रकार की औषधियों का वर्णन किया गया है! सूरजमुखी फूल की खास बात ये है कि यह फूल सूरज के चारो तरफ घुमती है यानि जिस-जिस ओर सूर्य घुमता है,इसलिए इसका नाम सूरजमुखी है। सूरजमुखी एक प्रमुख तिलहन है। सूरजमुखी का तेल सूरजमुखी के बीज से बनता है जिसके गुण अनगिनत हैं। सुरजमुखी का फूल देखने में तो आकर्षक होता है लेकिन इसमें कोई सुवास नहीं होता है। सूरजमुखी के बीज में विटामिन बी1, बी3, बी6, मैग्निशियम, फॉस्फोरस, प्रोटीन जैसे बहुत सारे पोषक तत्व हैं। इसलिए सूरजमुखी का प्रयोग आयुर्वेद में कई तरह के दवाईयों के लिए किया जाता है। चलिये इसके बारे में आगे जानते हैं।

क्या होता है?

सूर्यमुखी पञ्चाङ्ग के एल्कोहल सत्त् में कैंसर-विरोधी-गुण पाई जाती है। यह पाचन में सहायक तथा विशेषत केंचुओं का नाशक और वातदोष को कम करने वाली है। सूरजमुखी की जड़ मूत्र संबंधी बीमारी में फायदेमंद होने के साथ-साथ दर्दनिवारक के रुप में भी काम करते हैं।

इसके फूल कड़वे और ठंडे तासीर के होते हैं। यह कृमिनाशक, कामोत्तेजक, सूजन, कुष्ठ, व्रण या अल्सर, सांस संबंधी समस्या, मूत्रमार्गगत असामान्य स्राव, पाण्डु या एनीमिया, तंत्रिकाशूल या नर्व में दर्द, लीवर की बीमारी, फेफड़े में सूजन, आँख की बीमारी, किडनी की बीमारी, कृमि, बुखार, अर्श या पाइल्स में लाभप्रद होते हैं। इसके बीज मधुर, उत्तेजक, मूत्रल कफनिसारक, दुर्बलता दूर करने वाली, रतिज दुर्बलता, प्रवाहिका, कास, प्रतिश्याय तथा बिन्दुमूत्रकृच्छ्र में लाभप्रद होते हैं। इसके पत्र वामक, कफनिसारक तथा वातानुलोमक होते हैं।

इसके फायदे

अगर दांत दर्द से परेशान रहते हैं तो सूरजमुखी के जड़ को पीसकर दांतों पर मलने से दांत का दर्द कम होता है।अगर सर्दी-खांसी या  किसी बीमारी के साइड इफेक्ट के तौर पर कान में दर्द होता है तो सनफ्वार से इस तरह से इलाज करने पर आराम मिलता है।

सूरजमुखी पत्र कल्क एवं स्वरस से सिद्ध तेल को 1-2 बूंद कान में डालने से कान का दर्द एवं पूतिकर्ण में लाभ होता है। (इसका पत्र स्वरस अकेला भी प्रयोग किया जा सकता है।सूरजमुखी पत्र स्वरस में थोड़ा सा त्रिकटु (सोंठ, काली मिर्च, पीपल) चूर्ण मिलाकर गुनगुनाकर, छानकर एक से दो बूंद कान में डालने से कान दर्द तथा कर्णस्राव आदि कर्ण विकारों का शमन होता है।

सूरजमुखी का जड़ और लहसुन दोनों को पीसकर, गले पर लेप करने से गलगंड या घेंघा में लाभ होता है।अगर खाने-पीने में गड़बड़ी होने के कारण पेट में दर्द हो रहा है तो सूरजमुखी के फूलों के रस की दस बूंदे दूध में डालकर पिलाने से पेट दर्द तथा आध्मान या अपच में लाभ होता है।

बच्चों को विशेष रुप से पेट के कृमि की समस्या सबसे ज्यादा होती है। उनको सूरजमुखी का सेवन इस तरह से कराने पर लाभ होता है।1 से 3 ग्राम की मात्रा में सूरजमुखी के बीज खिलाने से पेट की कृमि निकल जाती है।1½-3 ग्राम बीज चूर्ण में शक्कर मिलाकर दिन में दो बार दो दिन तक देते हैं और तीसरे दिन एरंड तेल का विरेचन देते हैं, पेट की कृमि निकालने में आसानी होती है।

आजकल के प्रदूषित खाद्द, पैकेज़्ड फूड और असंतुलित आहार के सेवन का फल पथरी की समस्या है। 2 ग्राम सूरजमुखी के जड़ को गाय के दूध में पीसकर पिलाने से अश्मरी या पथरी टूटकर निकल जाती है।अगर किसी बीमारी के साइड इफेक्ट के कारण वैजाइना में दर्द या जलन हो रहा है तो सूरजमुखी के जड़ को चावल के मांड में घिसकर योनि में लगाने से योनि यानि वैजाइना का जलन कम होता है।

अगर लंबे समय तक बैठकर काम करने के कारण कमर में दर्द हो रहा है तो सूरजमुखी के पत्तों को पीसकर कमर पर लगाने से कमर का दर्द कम होता है।आजकल के तरह-तरह के नए-नए कॉज़्मेटिक प्रोडक्ट के दुनिया में त्वचा रोग होने का खतरा भी दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। सुरजमुखी के द्वारा बनाये गए घरेलू उपाय चर्म या त्वचा रोगों से निजात दिलाने में मदद करते हैं। सूरजमुखी के तेल में कपूर मिलाकर खुजली में लगाने से लाभ होता है।

अगर काम के तनाव के कारण अक्सर आपको सिर में दर्द होता है तो सूरजमुखी का प्रयोग इस तरह से करने परसूरजमुखी के पत्तों के रस में ही इसके बीजों को पीसकर मस्तक पर दो तीन दिन तक लेप करने से, सिरदर्द कम होता है।अगर लंबे समय तक बैठकर काम करने के कारण कमर में दर्द हो रहा है तो सूरजमुखी के पत्तों को पीसकर कमर पर लगाने से कमर का दर्द कम होता है।आजकल के तरह-तरह के नए-नए कॉज़्मेटिक प्रोडक्ट के दुनिया में त्वचा रोग होने का खतरा भी दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। सुरजमुखी के द्वारा बनाये गए घरेलू उपाय चर्म या त्वचा रोगों से निजात दिलाने में मदद करते हैं।