अक्टूबर में कोरोना की वज़ह से सभी को बुखार हो सकता है! कोरोना काल के कारण पिछले दो साल में देश फेस्टिवल सीजन से बिल्कुल दूर रहा था। इन दो सालों में दिवाली आई और चली गई। दशहरा पर भी जश्न नहीं मना। पर इस साल देश में कोरोना में कमी आने के बाद लोग जमकर जश्न मनाने के लिए जुटे हुए हैं। बाजार में लोगों की जबरदस्त भीड़ देखने को मिल रही है। दुकान सामानों से भरा हुआ है। लेकिन जैसे-जैसे बाजारों में भीड़ बढ़ रही है, वैसे-वैसे बीमारी भी घर-घर दस्तक दे रही है। इस वक्त लगभग हर घर में सर्दी जुकाम और बुखार वाले मरीज आपको मिल जाएंगे। बड़ा सवाल ये है कि क्या वायरल संक्रमण है या फिर कोविड का खतरा? विशेषज्ञों की माने तो सावधानी में कमी आने से कोविड से लेकर कई संक्रामक बीमारियों का खतरा फेस्टिव सीजन में बढ़ सकता है।त्योहारी सीजन के बीच ही कोरोना पर देश के लिए एक बुरी खबर आई है। भारत में कोरोना का वेरिएंट BQ.1 का सब वेरिएंट एक मरीज मिला है। नए वेरिएंट के मिलने के बाद त्योहारी सीजन में कोरोना बढ़ने का खतरा भी मंडराने लगा है। नया सब वेरिएंट BA.5 की प्रजाति है वेरिएंट है। इस वेरिएंट के केस अभी अमेरिका में मिल रहे हैं। वहां हाल के 60% नए कोरोना केस इसी वेरिएंट के हैं।

डॉक्टर्स का कहना है कि देश में भले ही इस वक्त कोरोना की लहर कमजोर पड़ गई हो लेकिन ये अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। डॉक्टरों ने बताया कि इस वक्त इन्फ्लुएंजा के इंफेक्शन के कारण स्थिति और खराब हो रही है। स्वाइन फ्लू और H3N2 वायरस के कारण राजधानी दिल्ली में लोगों में बुखार वाली बीमारी ज्यादा हो रही है। अपोलो अस्पताल के डॉक्टर सरनजीत चटर्जी ने बताया कि ऐसा लग रहा है कि जैसे वायरस एक दूसरे लड़ाई कर रहे हों। इसी कारण ज्यादा लोग बीमार हो रहे हैं। इसलिए लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है और खुद को बीमारियों से बचाने के लिए सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनने और नियमित अंतराल पर हाथ धोना चाहिए। उन्होंने बताया कि पिछले एक महीने में बुखार के मरीजों की संख्या पांच गुना बढ़ गई है।

दिल्ली के डॉक्टर ने बताया कि फ्लू वाली बीमारी लगातार बढ़ रही है। हालांकि, मौसम बदलने के कारण ऐसा हो रहा है। उन्होंने बताया कि हर सप्ताह 20-25 स्वाइन फ्लू समेत इंन्फ्लुएंजा के केस देख रहे हैं। बच्चों में सांस वाली बीमारियां भी बढ़ती दिख रही है, खासतौर पर बड़े बच्चों में। उन्होंने बताया कि कोरोना मरीजों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। लेकिन हो सकता है कि कोरोना टेस्टिंग के गाइडलाइंस में बदलाव के कारण ऐसा हो रहा हो!डॉक्टर्स का कहना है कि देश में भले ही इस वक्त कोरोना की लहर कमजोर पड़ गई हो लेकिन ये अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। डॉक्टरों ने बताया कि इस वक्त इन्फ्लुएंजा के इंफेक्शन के कारण स्थिति और खराब हो रही है। स्वाइन फ्लू और H3N2 वायरस के कारण राजधानी दिल्ली में लोगों में बुखार वाली बीमारी ज्यादा हो रही है। अपोलो अस्पताल के डॉक्टर सरनजीत चटर्जी ने बताया कि ऐसा लग रहा है कि जैसे वायरस एक दूसरे लड़ाई कर रहे हों। इसी कारण ज्यादा लोग बीमार हो रहे हैं। इसलिए लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है और खुद को बीमारियों से बचाने के लिए सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनने और नियमित अंतराल पर हाथ धोना चाहिए। उन्होंने बताया कि पिछले एक महीने में बुखार के मरीजों की संख्या पांच गुना बढ़ गई है। दिल्ली के एक अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर ने बताया कि इस अस्पताल में कोरोना के केवल 2 मरीज भर्ती हैं।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 के सिम्टम अब माइल्ड हो गए हैं। कोरोना के मरीजों को अब अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है। इसलिए अब किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि, वैसे लोगों को थोड़ा सतर्क रहना चाहिए जिसके परिवार में कमजोर इम्युन वाले लोग हों।उन्होंने कहा कि कोविड-19 के सिम्टम अब माइल्ड हो गए हैं। कोरोना के मरीजों को अब अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है। इसलिए अब किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। दिल्ली एम्स में एडिशनल प्रोफेसर डॉ नीरज निश्चल ने कहा कि भीड़भाड़ वाली जगह पर मास्क पहनने से सांस के जरिए फैलने वाले वायरस से बचा जा सकता है। चाहे वो कोविड-19 के वायरस हों, इंन्फ्लुएंजा A या स्वाइन फ्लू के वायरस हों। ये सभी वायरस छींक के कारण फैलते हैं।