पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (NMCH) में इलाज के लिए भर्ती मरीज की आंख निकाल ली गई। इसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया और आलमगंज थाने में केस दर्ज कराया है। 14 नवंबर को नालंदा निवासी फंटूश कुमार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसे पेट में गोली लगी थी। इलाज के दौरान आज सुबह उसकी मौत हो गई। जब परिजन उसको देखने गए तो फंटूश की एक आंख गायब थी। इस मामले को लेकर एक डॉक्टर ने बताया कि ‘संभव है कि मरीज की आंख चूहा खा गया हो।’ वहीं अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विनोद सिंह ने बताया कि ‘फंटूश को इलाज के लिए 14 नवंबर को भर्ती कराया गया था। उसके पेट में गोली लगी थी। ऑपरेशन 15 नवंबर को हुआ था। ऑपरेशन के 36 घंटे के बाद उनकी मौत हो गई।’ सर्जरी के बाद आईसीयू में रखा गया था। परिजनों द्वारा बाई आंख गायब होने की बात पर उन्होंने कहा कि ‘इसकी जांच की जा रही है।’ यह पूछे जाने पर कि आंख को चूहे ने कुतर दिया है। इस पर उन्होंने कहा कि ‘संभव है, ऐसा हो सकता है। फिलहाल अस्पताल प्रबंधन और पुलिस दोनों मिलकर पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मामले का खुलासा होगा।’ नालंदा मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया, ‘कल 8:55 में फंटूश कुमार की मौत हुई थी। सुबह में देखा गया कि बाईं आंख नहीं है। इस संबंध में FIR कराई गई है। पुलिस जांच कर रही है। अस्पताल की तरफ से भी चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। जांच रिपोर्ट आने पर दोषियों और लापरवाही बरतने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल के बाहर परिजनों का हंगामा युवक की बायी आंख निकाली गई है। सुबह शव देखने के साथ ही परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। अस्पताल के बाहर भी लोगों की भीड़ लग गई है। इधर मामले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की छानबीन शुरू कर दी है। पटना सिटी के सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी) अतुलेश झा ने कहा, ‘नालंदा से परसों एक व्यक्ति को भर्ती कराया गया था। शुक्रवार को ऑपरेशन हुआ था। इसके बाद उसकी आज मौत हो गई। शनिवार को परिजनों ने बताया कि उनकी एक आंख गायब है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।’ आपसी रंजिश में मारी गई थी गोली नालंदा जिले के चिकसौरा थाना क्षेत्र के हुड़ारी में गुरुवार (14 नवंबर) को आपसी रंजिश में अपराधियों ने फंटूश कुमार (22) को गोली मार दी थी। जो उसके पेट में लगी थी। परिजनों ने आनन-फानन में स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया था। वहां से डॉक्टरों ने पटना NMCH रेफर किया था। 15 नवंबर को उसका ऑपरेशन हुआ था, उसके बाद से वो आईसीयू में भर्ती था। आज सुबह परिजनों को बताया गया कि युवक की मौत हो गई है। घटना के दिन 4 लोगों ने की थी फायरिंग मृतक के चचेरे भाई विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि 14 नवंबर को गांव के मदन प्रसाद, सदन प्रसाद, अवधेश प्रसाद, मिलन कुमार उर्फ जय कुमार ने गोली मारी थी। मदन प्रसाद और सदन प्रसाद का अपराधिक इतिहास है। थाना चिकिसौरा के हुड़ारी गांव में मिनी गन फैक्ट्री चलाता था। इस मामले में सदन प्रसाद जेल गया था और बेल पर बाहर है। हिलसा के योगीपुर में बैंक डकैती के मामले में मुख्य आरोपी है और अभी तक फरार है। सदन अपनी पत्नी की हत्या के मामले में भी आरोपी है।
माइक टायसन के क्रेज से नेटफ्लिक्स डाउन:19 साल के बाद रिंग में उतरे थे अमेरिकी मुक्केबाज, 6 घंटे ठप रही स्ट्रीमिंग सर्विस
दुनिया के ऑल टाइम ग्रेट मुक्केबाजों में गिने जाने वाले माइक टायसन का क्रेज 58 साल की उम्र में भी कायम है। टायसन ने 19 साल के बाद प्रोफेशनल बॉक्सिंग में वापसी की। टेक्सास में शनिवार को टायसन ने अपने ही देश के जैक पॉल से मुकाबला किया। यह बाउट नेटफ्लिक्स पर लाइव चल रहा था। मुकाबले को देखने के लिए फैंस इतनी बड़ी संख्या में आए कि नेटफ्लिक्स की स्ट्रीमिंग सर्विस ही ठप हो गई। शनिवार को सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक नेटफ्लिक्स का सर्वर डाउन रहा। दो राउंड में बढ़त बनाने के बाद पिछड़े टायसन
2005 के बाद पहली बार प्रोफेशनल बाउट खेल रहे टायसन ने जैक के खिलाफ पहले दो राउंड में बढ़त बना ली थी। इसके बाद वे अगले चार राउंड में पिछड़ गए। जैक ने बाउट 78-74 से जीत ली। दोनों प्रतिद्वंद्वी की उम्र के बीच में 31 साल का अंतर है। 2005 में केविन मैकब्राइड के खिलाफ उतरे थे टायसन
जैक पॉल के साथ बाउट से पहले टायसन ने अपना आखिरी प्रोफेशनल मुकाबला 2005 में आयरलैंड के केविन मैकब्राइड के खिलाफ खेला था। उन्हें हार के साथ अपना 20 साल का करियर समाप्त करना पड़ा था। टायसन के नाम सबसे युवा चैंपियन होने का रिकॉर्ड
टायसन ने 1986 में 20 साल की उम्र में ट्रेवर बेबरिक का रिकॉर्ड तोड़ दुनिया का सबसे युवा हैवीवेट चैंपियन होने का रिकॉर्ड दर्ज कराया था। यह रिकॉर्ड आज भी कायम है। टायसन करियर में केवल 7 मैच हारे
टायसन ने इस मुकाबले को लेकर 59 बाउट लड़े। एक प्रोफेशनल बॉक्सर के रूप में 50 मैच जीते हैं। जबकि, उन्हें केवल 7 में हार मिली। खास बात यह है कि टायसन ने 44 मुकाबले नॉकआउट के जरिए जीते। जैक पॉल यूट्यूबर से प्रोफेशनल बॉक्सर बने
27 साल के जैक पॉल यूट्यूबर से प्रोफेशनल बॉक्सर बने हैं। उन्होंने साल 2020 में प्रोफेशनल बॉक्सिंग शुरू की। पॉल ने इस मुकाबले को मिलाकर 12 में से 11 मैच जीते हैं। टायसन ने पॉल को थप्पड़ मारा
इस मुकाबले से एक दिन पहले दोनों खिलाड़ियों का फेस-ऑफ हुआ था। जहां टायसन ने जैक पॉल को थप्पड़ जड़ दिया था। टायसन के इस थप्पड़ ने मुकाबले का रोमांच चरम पर पहुंचा दिया था। नेटफ्लिक्स के 27 करोड़ से ज्यादा यूजर
यूजरडाउन डिटेक्टर डॉट कॉम के अनुसार भारत में यूजर्स को सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक नेटफ्लिक्स चलाने में समस्या आई। वहीं सुबह करीब 9.15 बजे 1,296 लोगों को नेटफ्लिक्स चलाने में दिक्कत आई। वहीं, दूसरी ओर अमेरिका में भारतीय समयानुसार सुबह 9.15 बजे 95,324 लोगों को स्ट्रीमिंग में दिक्कत का सामना करना पड़ा। भारत में नेटफ्लिक्स के लगभग 10 मिलियन यानी 1 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं। वहीं दुनियाभर के 190 देशों में नेटफ्लिक्स के 27 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं। ——————————————————————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… रोहित शर्मा दूसरी बार पिता बने:पत्नी रितिका ने बेटे को जन्म दिया; ऑस्ट्रेलिया में पहला टेस्ट खेल सकते हैं भारतीय कप्तान टीम इंडिया के टेस्ट और वनडे कप्तान रोहित शर्मा दूसरी बार पिता बन गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी पत्नी रितिका सजदेह ने 15 नवंबर को देर रात बेटे को जन्म दिया। हालांकि, रोहित या रितिका की ओर से अब तक इस बात को कन्फर्म नहीं किया गया है। पढ़ें पूरी खबर…
डॉक्टर 3-3 अधजले नवजात को उठाकर भागे:शरीर झुलसकर काला पड़ा, बच्चों का चेहरा देखते ही मां बेहोश हुई
हाय मेरा बच्चा, एक बार चेहरा तो दिखा दो। एक बार आंचल से लगा लेने दो यह कहते हुए प्रसूता नीलू बेहोश हो गई। पति ने उसे संभाला। नजारा झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज का है। यहां शुक्रवार रात 10.30 बजे शिशु वार्ड के SNCU (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में आग लगने से 10 नवजात बच्चों की जिंदा जलने से मौत हो गई। मेडिकल कॉलेज में धमाका सुनाई दिया, इसके बाद अफरा-तफरी मच गई। SNCU से धुआं उठते देख डॉक्टर बच्चों को बचाने दौड़े, लेकिन आग से SNCU पूरी तरह जल गया। जिन मशीनों का इस्तेमाल नवजात बच्चों को रखने के लिए किया जाता है, वे मलबे में तब्दील हो गईं। एक-एक कर 10 बच्चों के शव निकाले गए। स्टाफ और लोगों ने 39 बच्चों को रेस्क्यू किया। घटना की खबर मिलते ही दैनिक भास्कर रिपोर्टर मौके पर पहुंचा। यहां तस्वीरें विचलित कर देने वाली थी। पढ़िए भास्कर रिपोर्टर की आंखों देखी… एक डॉक्टर के हाथ में तीन नवजात
हम SNCU वार्ड के करीब पहुंचे, फायर ब्रिगेड की दो छोटी गाड़ी गेट पर लगी थीं। डायल-112 और पुलिस फोर्स तैनात थी। जैसे ही भीड़ के पास पहुंचे, दो डॉक्टरों को देखकर हमारे होश उड़ गए। एक डॉक्टर के हाथ में झुलसा हुआ एक नवजात था। दूसरे डॉक्टर के हाथों में तीन नवजात थे, जो पूरी तरह से झुलस गए थे। आगे बढ़े डॉक्टरों ने पीछे मुड़कर देखा, फिर दोनों डॉक्टर दौड़ पड़े। पीछे से आवाज आई- अरे राम-राम। सब जल गए…हम भी इनके पीछे दौड़े… करीब 200 मीटर तक गए। डॉक्टरों के पीछे नर्स और परिजन दौड़ रहे थे। वहां मौजूद एक व्यक्ति से पूछा क्या हो गया? उसने बताया- बच्चे जल गए। वार्ड की खिड़की से किया जा रहा था रेस्क्यू
हम SNCU की ओर बढ़े, जहां से ये लोग आ रहे थे। वहां चारों तरफ धुआं था, दवा और इलेक्ट्रॉनिक सामान जलने की दुर्गंध आ रही थी। लाइट काटी जा चुकी थी, अंधेरा था। पास गए तो देखा- कुछ लोग टॉर्च लेकर खिड़की से वार्ड के अंदर जा रहे थे। वहां मौजूद लोगों ने बताया- अब तक 8 बच्चे जले हुए निकले हैं। संतरा देवी बोलीं- किसी की बच्ची मुझे मिली, मेरा पोता नहीं
हम अस्पताल के अंदर जाने के लिए जैसे ही गैलरी के पास पहुंचे। 50-55 साल की संतरा देवी एक बच्ची को लेकर दौड़ रही थीं। पूछने पर बोलीं- मेरा बच्चा नहीं मिला। यह किसी की बेटी मिल गई। ये भी मर जाती, लेकिन मैं इसे बचा लूंगी। संतरा देवी बच्ची को दूसरे वार्ड पहुंचाने के बाद हमसे लिपटकर रोने लगीं। बोलीं- हम अपने पोते को नहीं बचा पाए। हम दवा लेने गए थे, जब लौटे, तो सभी कहने लगे- आग लग गई, आग लग गई। हमें मेरा बेटा नहीं मिला है। सभी अपने बच्चे लेकर भागने लगे। अंदर जाने नहीं दिया गया। संतरा ने कहा- हमें कभी भी अंदर नहीं जाने दिया। माइक से कह देते थे कि दवा ले आओ, ये ले आओ बस। इसके बाद वो जोर-जोर से रोने लगती हैं। जलकर राख हुआ SNCU वार्ड
हम वार्ड की तरफ लौटे। आग बुझ चुकी थी, आवाज आ रही थी…अब कोई बच्चा अंदर नहीं है। सभी को निकाल लिया गया है। पीछे से एक फायर ब्रिगेड कर्मी ने कहा- देखना जरा, कहीं भी धुआं हो तो बताना, अंदर से आवाज आई- अब कहीं कुछ नहीं है। इसके बाद धीरे-धीरे यह जगह खाली हुई। हम पास गए। वार्ड पूरी तरह जल चुका था। जिन मशीनों में बच्चों को रखा जाता था, वह जल गई थीं। रोते-बिलखते बदहवास हो गई प्रसूता, पति बोला- डॉक्टर की लापरवाही है
प्रसूता नीलू के पति कुलदीप ने बताया- नीलू कमजोर थी, बेटा सही से सांस नहीं ले पा रहा था। इसलिए बेटे को शिशु वार्ड में रखा गया था। नीलू बार-बार अपने पति से सिर्फ इतना ही कह रही थी कि मेरे बेटे को ला दो। कुलदीप ने बताया- हम लोग महोबा के रहने वाले हैं। यहां नीलू का मायका है। डिलीवरी 9 नवंबर को हुई थी। समय से पहले बच्चा हो गया, तो परेशानी बढ़ गई थी, लेकिन अब अनहोनी हो गई है। डॉक्टरों की लापरवाही से मेरा बेटा नहीं मिल रहा है। अंदर किसी को नहीं जाने देते थे। सब बाहर ही थे। सड़क पर बेहोश हो गई प्रसूता की सास
नीलू और कुलदीप को ढांढस बंधाने के बाद हम कुछ दूर बढ़े ही थे कि एक प्रसूता की सास सड़क पर बेहोश हो गई। उसके परिजन उसे उठाने के लिए दौड़ पड़े। DM साहब आए, जवाब मिला- 10 बच्चों की मौत हुई
यह सब कुछ महज आधे घंटे के भीतर हुआ। इसके बाद शोर हुआ- DM साहब आ गए हैं। पुलिस वाले गेट की तरफ बढ़ने लगे। हम भी उस तरफ गए। DM अविनाश कुमार ने अस्पताल के स्टाफ से बात की। इसके बाद वह मीडिया से मिले। DM अविनाश कुमार ने कहा- यहां बच्चों के दो वार्ड हैं। एक यूनिट अंदर की तरफ है, दूसरी बाहर की तरफ। अंदर वाली यूनिट में क्रिटिकल कंडीशन वाले बच्चों को रखा जाता है। कई बच्चों का सकुशल रेस्क्यू किया गया है। गंभीर रूप से घायल बच्चों का इलाज किया जा रहा है। अभी तक 10 बच्चों की मौत की सूचना है। DM ने कहा- घटना 10.30 बजे से 10.45 के बीच की है। एक जांच टीम बना दी गई है, जो इसकी रिपोर्ट देगी। जो बच्चे घायल हैं, उनकी मॉनिटरिंग की जा रही है। DM के जाने के कुछ देर बाद कांग्रेस के नेता पहुंचे, जो लोगों की मदद की बात करते नजर आए। अभी तक हमें यह कन्फर्म नहीं हुआ था कि वार्ड में कितने बच्चे भर्ती थे। इस सवाल के जवाब में हम मेडिकल स्टाफ से भी मिले, लेकिन उन्होंने कुछ भी बताने से मना कर दिया। संजना बोलीं- मेरा बच्चा जल गया है
DM जैसे ही वहां से निकले। उनकी गाड़ी के पीछे एक महिला दौड़ते हुए दिखाई दी। वह हमारे पास आकर रुकी। बोली- भैया हमारा बच्चा जलकर मर गया है। हमने नाम पूछा, तो बताने लगी- संजना नाम है। इसके बाद फिर उसने दौड़ लगा दी। संजना ने कहा- हमें बस मेरा बच्चा चाहिए। कमिश्नर बोले- अंदर की तरफ से लगी आग
कुछ देर बाद कमिश्नर विमल दुबे अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बताया- अधिकांश बच्चों को बचा लिया गया है। बच्चों के वार्ड की दो यूनिट हैं, एक अंदर और दूसरी बाहर की तरफ। आग अंदर की ओर से लगी है। CMS बोले- 54 बच्चे भर्ती थे, पूरे कमरे में आग फैल गई
झांसी के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) सचिन माहोर ने कहा- SNCU वार्ड में 54 बच्चे भर्ती थे, अचानक से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर में आग लग गई। यह वार्ड हाई ऑक्सीजेनेट होता है। जैसे ही आग लगी, पूरे कमरे में फैल गई। 10 बच्चों की अभी तक मौत हुई है। बाकी बच्चों का इलाज चल रहा है। बाप सिर पटकते हुए बोला- नहीं मिल रहा मेरा लाल सीएमएस की बात सुनने के बाद हम कैंपस के बाहर आकर रुके। यहां एक प्रसूता चीखते हुए कहा- मेरा बच्चा, हाय मेरा बच्चा। नहीं मिल रहा है। बगल में पति बैठा हुआ था। वह बार-बार सिर पटक रहा था। कह रहा था- मेरा बेटा, हाय मेरा बेटा। रेस्क्यू के बाद नॉर्मल वार्ड में रखे गए बच्चे CMS के बयान के बाद हम उस वार्ड में गए, जहां रेस्क्यू के बाद बच्चों को रखा गया था। यहां SNCU जैसी सुविधा नहीं थी। बच्चों को कपड़ों और तौलिए से लपेटकर रखा गया था। स्टाफ भी नहीं दिखाई दिया। लोग बोले- धमाके जैसी आवाज आई
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया- आग लगने का शोर हुआ, कुछ देर बाद वार्ड में धुआं हो गया था। इसके बाद धमाके जैसी आवाज भी आई। ऐसा लगा मानो बम फटा हो। फिर डॉक्टर और नर्स भागते दिखाई दिए। ये अस्पताल वालों की लापरवाही से हुआ है। 12 घंटे में जांच रिपोर्ट सबमिट करने के निर्देश
देर रात करीब एक बजे अस्पताल में आधा दर्जन थानों की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। इस दौरान लखनऊ से झांसी तक सूचना आई कि डिप्टी CM बृजेश पाठक के साथ स्वास्थ्य सचिव झांसी मेडिकल कॉलेज पहुंचेंगे। पूरा प्रशासनिक अमला घटनास्थल पर एक्टिव हो गया। ……………………………………………………. इस हादसे से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… झांसी मेडिकल कॉलेज में 10 नवजात जिंदा जले: SNCU में भर्ती थे, 39 बच्चे खिड़की तोड़कर बाहर निकाले गए झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट (SNCU) में शुक्रवार रात भीषण आग लग गई। हादसे में 10 बच्चों की मौत हो गई। वार्ड की खिड़की तोड़कर 39 बच्चों को सुरक्षित निकाला गया। घटना रात करीब साढ़े 10 बजे की है। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर में स्पार्किंग चलते आग लगी। फिर विस्फोट हो गया। कुछ ही देर में पूरे यूनिट में आग लग गई। पूरी खबर पढ़ें…
अनुपमा सीरियल के सेट पर लाइटमैन की मौत:शो की प्रोडक्शन टीम शख्स की पहचान नहीं बता रही, FWICE कर रही है जांच
स्टार प्लस का पॉपुलर शो ‘अनुपमा’ हमेशा टीआरपी और स्टोरी को लेकर चर्चाओं में रहता है। लेकिन इस बार ये टीवी शो एक बड़े हादसे के कारण सुर्खियों में है। दरअसल, रुपाली गांगुली स्टारर टीवी शो ‘अनुपमा’ के एक क्रू मेंबर की करंट लगने से मौत हो गई है। करंट लगने के बाद अफरा-तफरी में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई। यह हादसा तब हुआ जब क्रू मेंबर कुछ तकनीकी चीजों को संभाल रहे थे और इस दौरान उन्होंने गलती से बिजली के तारों को छू लिया था। FWICE कर रही है जांच
इस बारे में दैनिक भास्कर ने फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) के अध्यक्ष बीएन तिवारी से बात की। बीएन तिवारी ने कहा- अनुपमा सीरियल के सेट पर गुरुवार रात 9.30 बजे एक लाइटमैन की शॉर्ट सर्किट के कारण मौत हो गई। हम पूरा मामला जानने की कोशिश कर रहे हैं। अभी तब हमें उस लाइटमैन का नाम तक नहीं बताया गया है। प्रोडक्शन टीम इस बात को क्यों छुपाना चाहती है, इस बात का पता लगाया जा रहा है। अगर लापरवाही हुई है तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हालांकि, अब तक इस पूरे मामले पर राजन शाही की प्रोडक्शन टीम ‘डायरेक्टर कट प्रोडक्शन’ ने कोई बयान नहीं दिया है। प्रोडक्शन टीम ने अब तक शख्स का नाम और उम्र भी नहीं बताई है। टीआरपी लिस्ट में पीछे हुआ शो
वहीं, शो की टीआरपी की बात करें तो इस बार अनुपमा टीआरपी लिस्ट में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। लंबे समय से टॉप पर कायम यह शो इस बार 2.2 टीआरपी के साथ पीछे रह गया है, जबकि ये रिश्ता क्या कहलाता है टीआरपी लिस्ट में टॉप पर है। सौतेली बेटी संग चल रहा रुपाली गांगुली का विवाद
‘अनुपमा’ की लीड एक्ट्रेस रुपाली गांगुली इस समय अपनी सौतेली बेटी ईशा वर्मा को लेकर कंट्रोवर्सी में हैं। हाल ही में ईशा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए एक्ट्रेस पर उनकी मां के गहने चोरी करने और पेरेंट्स की शादी तोड़ने का आरोप लगाया था। इस मामले में ‘अनुपमा’ शो के प्रोड्यूसर राजन शाही ने रुपाली गांगुली का साथ दिया। प्रोड्यूसर ने एक पोस्ट शेयर कर रुपाली को सपोर्ट भी किया था।

