Saturday, March 21, 2026
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भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह को हत्या की धमकी:कॉल करने वाले ने कहा- दो दिन में 50 लाख दो; नहीं तो जान से मार देंगे

भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह से 50 लाख की रंगदारी मांगी गई है। दो दिन के अंदर रुपए नहीं देने पर जान से मारने की धमकी भी दी है। जानकारी के मुताबिक, अक्षरा के मोबाइल पर 11 नवंबर की रात एक मिनट के अंदर दो अलग-अलग नंबर से कॉल आए और रंगदारी मांगने वाले ने एक्ट्रेस के साथ गाली-गलौज की। धमकी देने वाले ने कहा, ‘दो दिन का वक्त है, 50 लाख रुपए भेजो। रकम नहीं मिली तो जान से मार देंगे।’ वहीं, धमकी के बाद अक्षरा सिंह ने अपने एक करीबी को लिखित आवेदन देकर दानापुर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। थानाध्यक्ष प्रशांत भारद्वाज ने बताया कि लिखित आवेदन मिला है। पुलिस जांच कर रही है। जांच के बाद केस दर्ज किया जाएगा। भोजपुरी इंडस्ट्री में जाना-माना नाम हैं अक्षरा सिंह भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह ने अपने करियर की शुरुआत रवि किशन के साथ फिल्म ‘सत्यमेव जयते’ से की थी। उन्होंने ‘सत्या’, ‘तबादला’, ‘मां तुझे सलाम’ जैसी कई हिट फिल्मों में भी काम किया है। साथ ही कई सुपरहिट गाने भी गाए हैं। अक्षरा सिंह रिएयलिटी शो ‘बिग बॉस’ का भी हिस्सा रह चुकी हैं। अ इस बार अक्षरा सिंह ने छठ महापर्व भी किया था। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर छठ से जुड़े वीडियो भी शेयर किए थे। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को मिल चुकी है धमकी पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को भी बीते दिनों कई बार धमकी मिली है। सांसद का कहना है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग से धमकी मिली थी। दरअसल बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद पप्पू यादव ने लॉरेंस को दो कौड़ी का गुंडा बताया था, जिसके बाद से धमकी मिलनी शुरू हुई। सांसद का दावा है कि अलग-अलग लोकेशन, गैंग से धमकी दी जा रही है। पप्पू यादव के पीए को भी वॉट्सएप पर धमकी मिल चुकी है। धमकी मिलने के बाज पप्पू यादव ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से जेड कैटेगरी की सुरक्षा की मांग भी की है। फिलहाल वो वाई श्रेणी की सुरक्षा में रहते है।

पटना के एक होटल में काम करते थे पंकज त्रिपाठी:बोले- कभी पीछे के दरवाजे से घुसता था, अब मेन गेट पर शानदार स्वागत होता है

पंकज त्रिपाठी ने अपनी एक्टिंग और टैलेंट के दम पर इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई है। फिल्मों में आने से पहले वह पटना में एक होटल में काम करते थे। उनका कहना है कि एक्टिंग से उनका प्यार तब और भी ज्यादा बढ़ा, जब उन्होंने ‘अंधा कानून’ फिल्म देखी थी। एक्टर ने यह भी बताया कि काफी संघर्ष के बाद उन्हें मौके मिले। हालांकि, उस दौरान उन्हें कभी भी फुटपाथ पर सोना या भूखा नहीं रहना पड़ा। द लल्लनटॉप के साथ बातचीत में पंकज त्रिपाठी ने अपने होटल के दिनों को याद किया। उन्होंने कहा, ‘जिंदगी में कुछ भी बड़ा या छोटा काम नहीं होता है। ये आप पर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे लेते हैं। फिल्मों में आने से पहले मैं पटना के एक होटल में काम करता था। वहां के स्टाफ से मेरे आज भी बहुत अच्छे संबंध हैं। वे सभी मेरे संपर्क में हैं। जब भी मैं वहां जाता हूं, तो लोग मुझसे कहते हैं कि हमने साथ में काम किया था।’ पंकज त्रिपाठी ने कहा, ‘जिस होटल में काम किया करता था। वहां स्टाफ पीछे के दरवाजे से एंट्री लेते थे, तो मैं भी वहीं से जाता था। लेकिन आज उसी होटल के मेन गेट से एंट्री मिली और मेरा स्वागत करने के लिए जर्नल मैनेजर वहां खड़ा था। उस पल ने मुझे भावुक कर दिया। तो ये सभी यादें एकदम से आपकी नजरों के सामने आ जाती हैं और मुझे यकीन दिलाती हैं कि जीवन में कुछ भी होना संभव है। मेहनत और ईमानदारी से आप अपने हर सपने को पूरा कर सकते हैं।’ इसके अलावा पंकज त्रिपाठी ने अपने संघर्षों के बारे में पीटीआई से बात करते हुए कहा था, ‘मैं रात में होटल के किचन में काम करता था और सुबह थिएटर करता था। रात की शिफ्ट खत्म होने के बाद मैं पांच घंटे सोता, फिर 2 से 7 बजे तक थिएटर करता और फिर 11 बजे से सुबह 7 बजे तक होटल का काम करता। मैंने ये दो साल तक किया। बता दें, पंकज त्रिपाठी शुरुआती दौर में कई छोटे रोल किए। लेकिन उनके करियर में एक बड़ा बदलाव फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से आया, जिसके बाद हर जगह उनकी तारीफ होनी लगी। हाल ही में उन्हें फिल्म ‘स्त्री 2’ में भी देखा गया, जिसमें उनका काम सभी को पसंद आया था

मनोज बाजपेयी ने सुनाई स्ट्रगल स्टोरी:बोले, मुंबई में खाने के लिए लोगों को देना पड़ता था धोखा, 18 घंटे काम करने के बाद भी नहीं मिलते थे पैसे

मनोज बाजपेयी को बॉलीवुड में शुरुआती दिनों में काफी स्ट्रगल करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू में, एक्टर ने उस समय को याद किया जब उन्हें अपने खाने के लिए लोगों को धोखा देना पड़ता था। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा था जब उनके पास खाने तक के पैसे नहीं हुआ करते थे। मनोज ने कहा, खाना ढूंढना उनके लिए उस वक्त की सबसे बड़ी समस्या थी।
दिल्ली की बरसाती में रहना मुश्किल – मनोज
उन्होंने हाल ही में मिंट के लिए रितेश अग्रवाल से बातचीत के दौरान अपने पुराने दिनों को याद किया। मनोज ने कहा, मुंबई में बेसिक जरूरतों को पूरा करने के लिए कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। बातचीत के दौरान एक्टर ने दिल्ली की बदनाम बरसातियों में रहने को भी याद किया और बरसाती में रहने के फायदे और नुकसान के बारे में भी बात की। उन्होंने बरसाती में बिताए अपने दिनों के बारे में सोचकर कहा कि आज भी मैं वो दिन याद कर के कांप उठता हूं।
इस दौरान मनोज ने रिवील किया कि वे मुखर्जी नगर में बरसाती में रहते थे। उन्होंने कहा कि बरसाती का फायदा ये है कि वे सस्ते होते हैं। लेकिन गर्मियों में बहुत गर्मी होती थी और सर्दियों में बहुत ठंड। एक्टर ने कहा, अगर बाहर का तापमान 40 डिग्री होता तो बरसाती के अंदर 45 डिग्री जैसा लगता। और यह नरक जैसा था।
दिल्ली में 18 घंटे फ्री में काम करते थे मनोज
मनोज ने बताया कि उन्होंने कई सालों तक दिल्ली में रहते हुए, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में पढ़ाने के साथ अपनी एक्टिंग स्किल्स पर काम किया और बाद में वह मुंबई शिफ्ट हो गए थे। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जब मैं दिल्ली में था, तो थिएटर से मुझे पैसे नहीं मिलते थे, लेकिन फिर भी मैं बिजी रहता था क्योंकि दिन में 18 घंटे काम करता था।
काम न मिलने के कारण हो गए थे मेंटली डाउन
मनोज ने कहा, मैं अपने दोस्तों का शुक्रगुजार हूं, क्योंकि दिल्ली में उन्होंने मुझे कभी भूखा नहीं सोने दिया था। अगर मैं दोपहर का खाना नहीं खाता था तो मेरे दोस्त अपना खाना मेरे साथ शेयर करते थे। लेकिन, मुंबई में सर्वाइव करना मेरे लिए बहुत मुश्किल था। उन्होंने कहा काम न मिलने के कारण मैं न सिर्फ फिजिकली बल्कि इमोशनली और मेंटली भी डाउन हो गया था।
मनोज बाजपेयी ने बताया कि वो उस दौरान पूरी तरह से कंगाल थे। उन्होंने कहा कि मुंबई काफी महंगी जगह है, जहां इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि आपको खाना मिलेगा या नहीं। एक्टर ने कहा कि जब काम के लिए प्रोडक्शन वालों के पास जाता था तो वो भगा देते थे।
वर्कफ्रंट की बात करें तो मनोज को आखिरी बार फिल्म भैया जी और नेटफलिक्स सीरीज किलर सूप में देखा गया था।

बिग बॉस 18 का हिस्सा बनने वाली हैं कार्दशियन सिस्टर्स:शो के मेकर्स से चल रही है बातचीत, दिसंबर में लेंगी रियलिटी शो में एंट्री

टेलीविजन का पॉपुलर रियलिटी शो बिग बॉस 18 इन दिनों लगातार हो रहे झगड़ों के चलते सुर्खियों में है। शो को और ज्यादा दिलचस्प बनाने के लिए मेकर्स ने हाल ही में दो वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट की एंट्री करवाई है। दैनिक भास्कर ने सबसे पहले ब्रेक किया था कि रवि किशन, सलमान खान की जगह शो होस्ट करेंगे। अब करीबी सूत्रों की मानें तो इंटरनेशनल स्टार कार्दशियन सिस्टर्स जल्द ही शो में बतौर वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट पहुंचने वाली हैं। बिग बॉस से जुड़े करीबी सूत्र ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया है कि शो के मेकर्स की पिछले कुछ समय से कार्दशियन सिस्टर्स से शो में हिस्सा लेने के लिए बातचीत चल रही है। हालांकि अब तक ये साफ नहीं है कि वो शो में अगली वाइल्ड कार्ड एंट्री बनकर पहुंचेंगी या बतौर गेस्ट। सूत्र की मानें तो कर्दाशियन सिस्टर्स दिसंबर में शो में एंट्री लेने वाली हैं। फिलहाल सवाल ये भी है कि कार्दशियन सिस्टर्स किम, कोर्टनी और कोल में से कोई दो शो का हिस्सा बनेंगी या तीनों। अनंत-राधिका की शादी के लिए भारत आई थीं कार्दशियन सिस्टर्स बताते चलें कि कार्दशियन सिस्टर्स किम और क्लो इस साल बिजनेस टायकून मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी की शादी का हिस्सा बनी थीं। भारत आकर किम और क्लो सुर्खियों के साथ-साथ विवादों में भी रहीं। दरअसल, किम कार्दशियन ने भगवान गणेश की मूर्ति के साथ कुछ तस्वीरें क्लिक करवाई थीं, जिन्हें उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। भगवान की मूर्ति को प्रॉप की तरह इस्तेमाल करने पर उन्हें काफी ट्रोल किया गया था। विवाद होने के बाद उन्होंने तस्वीरें डिलीट कर दी थीं। सेंसेशनल मॉडल की भी हो सकती है बिग बॉस में वाइल्ड कार्ड एंट्री शो से जुड़े करीबी सूत्र ने दैनिक भास्कर को बताया है कि जल्द ही शो में हॉट वाइल्ड कार्ड एंट्री होने वाली है। इस सिलसिले में मेकर्स की पॉपुलर मॉडल और इन्फ्लूएंसर अदिति मिस्त्री से बातचीत जारी है। बताते चलें कि अदिति मिस्त्री एक मॉडल और इन्फ्लूएंसर हैं। वो सोशल मीडिया पर अपनी फिटनेस के लिए जानी जाती हैं। अदिति सोशल मीडिया पर बोल्ड कंटेंट के लिए अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। मॉडलिंग की दुनिया में भी अदिति ने कामयाबी हासिल की है। 24 साल की अदिति मिस्त्री के इंस्टाग्राम पर 2.4 मिलियन फॉलोवर्स हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो अदिति मिस्त्री, फॉर्मर एक्टर साहिल खान को डेट कर चुकी हैं। दोनों की वेकेशन से सामने आईं कई तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में रही थीं। ………………………………………………………. टीवी इंडस्ट्री से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए- ‘रुपाली गांगुली कभी विवादों में नहीं रही’:एक्ट्रेस की वकील ने सौतेली बेटी के आरोपों को झूठा बताया, कहा- छवि को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया हाल ही में सौतेली बेटी ईशा वर्मा ने उन पर कुछ गंभीर आरोप लगाए। काफी समय तक शांत रहने के बाद, अब रूपाली ने इस मामले पर कानूनी कदम उठाते हुए ईशा पर मानहानि का केस किया है। इसके साथ ही उन्होंने 50 करोड़ रुपये का मुआवजा भी मांगा है। पूरी खबर पढ़िए… बिग बॉस के नए ‘होस्ट’ रवि किशन बोले:मेरा मकसद भाषण और प्रवचन देना नहीं, सलमान को कोई रिप्लेस नहीं कर सकता दैनिक भास्कर से खास बातचीत के दौरान रवि किशन ने बताया कि सलमान खान बहुत बड़े लीजेंडरी हैं। उनको कोई रिप्लेस नहीं कर सकता है। आइए जानते हैं कि बातचीत के दौरान रवि किशन ने बिग बॉस को लेकर और क्या कहा। पूरी खबर पढ़िए…

पिता के निधन के बाद तंगी छाई:कभी 35 रुपए थी कमाई, एक्ट्रेस के कपड़े प्रेस किए; आज रोहित शेट्टी ने दी कई हिट फिल्में

‘छोटा ही था कि तभी पिता का साया सिर से उठ गया। घर की हालत से वाकिफ था। इस वजह से परिवार की जिम्मेदारियां खुद के कंधों पर ले लीं। दिन-रात मेहनत की। एक दिन में 3-3 शिफ्ट की, ताकि काम की कमी न रहे। लोगों को लगता है कि मैंने स्ट्रगल नहीं किया है। आम स्ट्रगलर्स की तरह मैंने भी धक्के खाए हैं, लेकिन कभी रुका नहीं। कई बार ठोकर लगने पर डर महसूस हुआ, फिर भी आगे बढ़ता गया।’ यह कहना है कि फिल्म इंडस्ट्री के सबसे फेमस डायरेक्टर्स में से एक रोहित शेट्टी का। रोहित को गोलमाल, ऑल द बेस्ट और सिंघम जैसी शानदार फिल्मों के लिए जाना जाता है। हालांकि, एक वक्त ऐसा था जब उन्हें फीस के तौर पर महज 35 रुपए मिले थे। वहीं अब रोहित की हालिया रिलीज फिल्म सिंघन अगेन बॉक्स ऑफिस पर नए-नए रिकॉर्ड बना रही है। रोहित के फर्श से अर्श तक की कहानी, उन्हीं की जुबानी… पिता की मौत के बाद माली हालत बिगड़ी, तो कमाना शुरू किया
रोहित ने बताया कि उन्होंने पिता को देखकर फिल्मों में आने का फैसला किया था। वे कहते हैं, ‘मेरा बचपन सामान्य बच्चों की तरह ही बीता। मेरे पिता फिल्मों में बतौर स्टंट डायरेक्टर काम करते थे। कुछ फिल्मों में उन्होंने एक्टिंग भी की थी। उस वक्त इंडस्ट्री में उनका बहुत नाम था। घर पर हमेशा फिल्मी माहौल रहता था। जब कभी उनके साथ बाहर जाता, तो वहां पर भी बस फिल्मों से जुड़ी बातें सुनने को मिलती थीं। यही वजह रही कि इस दुनिया के अलावा किसी दूसरी दुनिया से परिचय ही नहीं हुआ। मैंने बचपन में ही ठान लिया था कि पिता जो काम कर रहे हैं, वही मैं भी करूंगा। हालांकि, पिता की मौत के बाद सब कुछ बदल गया। मेरी उम्र कम थी, जब उनका निधन हुआ। वक्त के साथ परिवार की माली हालत भी खराब हो गई थी। इसी कारण मैंने बहुत जल्दी काम करना शुरू कर दिया। दूसरा, जुनून भी था कि फिल्मों की दुनिया में ही बेहतर काम करना है।’ 17 साल की उम्र में इंडस्ट्री में कदम रखा
रोहित 17 साल के थे, जब उन्होंने इंडस्ट्री में कदम रखा था। भले ही फिल्मी दुनिया में रोहित के जानने वाले थे, लेकिन उन्हें भी काम पाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी थी। कई बार तो ऐसा हुआ कि उनके पास बिल्कुल पैसे नहीं रहते थे। इस कारण वो भीषण गर्मियों में भी कई किलोमीटर पैदल और लोकल ट्रेन से सफर करते थे। कभी-कभार खाने के लिए भी कॉम्प्रोमाइज करना पड़ता था। इस बारे में उन्होंने कहा, ‘मैंने 17 साल की उम्र में काम करना शुरू कर दिया था। शुरुआत में ही मन बना लिया था कि या तो एक्शन डायरेक्टर बनूंगा या डायरेक्टर। इतने लंबे सफर में आम स्ट्रगलर्स की तरह मुझे भी संघर्ष करना पड़ा। मुझे बाकियों के जैसे ही काम पाने के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़े। पहली फिल्म बनाई, जो खास अच्छी नहीं चली। फिर गोलमाल बनाई, जिसने इतिहास रच दिया। मैंने अब तक 16 फिल्में बनाईं हैं। शायद कोविड न आता तो और भी बन जातीं (हंसते हुए)..।’ करियर की शुरुआत में स्टार्स के कपड़े भी प्रेस किए
रोहित ने करियर की शुरुआत बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर की थी। उनकी पहली कमाई महज सिर्फ 35 रुपए थे। हालांकि, इसके बाद भी रोहित ने स्ट्रगल और मेहनत करना नहीं छोड़ा। उन्हें दूसरे छोटे काम भी करने पड़े, जो उन्होंने किए भी। उन्होंने एक्ट्रेस की साड़ियों को प्रेस करने का काम किया। इतना ही नहीं, उन्होंने कुछ समय के लिए स्पॉटबॉय का भी काम किया। इस बारे में उन्होंने कहा, ‘हां, यह सच है। देखिए क्या होता है कि असिस्टेंट डायरेक्टर को हर छोटे काम करने ही पड़ते हैं। दूसरा यह है कि उस समय किसी भी फिल्म का बजट बहुत ज्यादा नहीं होता था। यूनिट छोटी होती थी। इसी कारण हर एक असिस्टेंट को बहुत से काम करने पड़ते थे। सिर्फ मैंने ही नहीं, कइयों ने इस तरह का काम किया है। उस वक्त किसी काम को कम करके नहीं आंका जाता था। एक्ट्रेस की साड़ी प्रेस करने से लेकर हर तरह के काम किए जाते थे।’ पहली फिल्म फ्लॉप होने पर डर में थे रोहित, गोलमाल से बदली किस्मत
अजय देवगन ने ‘दिल क्या करे’ और ‘राजू चाचा’ जैसी फिल्मों के साथ अपना प्रोडक्शन हाउस शुरू किया था। रोहित भी अजय के साथ जुड़ गए थे और असिस्टेंट डायरेक्टर के बतौैर काम करने लगे। ‘राजू चाचा’ बड़े बजट की फिल्म थी, लेकिन ये फिल्म ज्यादा चल नहीं पाई। अजय देवगन को इससे काफी नुकसान हुआ। दो साल के लिए अजय और रोहित को प्रोडक्शन हाउस बंद करना पड़ा। उन्होंने सारे कर्ज लौटाने के बाद ‘जमीन’ में साथ मिलकर डायरेक्शन किया। रोहित ने 2003 की फिल्म जमीन से डायरेक्टोरियल डेब्यू किया था। हालांकि, यह फिल्म भी कुछ खास नहीं चली थी। लगातार फ्लॉप फिल्में देने की वजह से कई डायरेक्टर और एक्टर रोहित के साथ काम करने से कतराने लगे थे। इसे बारे में रोहित ने कहा, ‘यह तो बहुत लाजमी है कि जब फिल्म नहीं चलती है तो बुरा तो लगता है। फिर दूसरी फिल्म बनाते वक्त मन में बहुत तरह के सवाल होते हैं। मन में यह भी दुविधा रहती है कि कोई प्रोड्यूसर-एक्टर आपके साथ काम करेगा या नहीं। सेल्फ डाउट भी रहता है। पहली फिल्म जमीन की रिलीज के बाद एक-डेढ़ साल स्क्रिप्ट पर काम चला और 2005 में फिल्म गोलमाल पर काम करना शुरू किया। फिर 2006 में रिलीज हुई इस फिल्म ने मेरा पूरा करियर ही बदल कर रख दिया। हालांकि, इस दौरान कभी इंडस्ट्री छोड़ने का ख्याल नहीं आया, लेकिन हार महसूस होती रही। मैं करियर की शुरुआत में इंडस्ट्री में सेटल नहीं था। इस वजह से कुछ खोने को भी नहीं था। मेरा मकसद बस इतना था कि कम बजट की कॉमेडी फिल्मों जैसे गोलमाल, ऑल द बेस्ट से लोगों को जोड़ पाऊं।’ हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के पहले फिल्ममेकर बने, जो यूनिवर्स जैसा कॉन्सेप्ट लेकर आए
रोहित हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के पहले फिल्ममेकर हैं, जिन्होंने फिल्मों में यूनिवर्स का कॉन्सेप्ट ईजाद किया। हालांकि, उन्होंने कभी इसकी प्लानिंग नहीं की थी। उन्होंने कहा, ‘पहले कभी ऐसा नहीं सोचा था। 2016 तक मेरे मन में इस तरह का कोई ख्याल नहीं था। सिंघम, सिंघम रिटर्न तक इसका ख्याल नहीं आया था, लेकिन फिल्म सिंबा बनाते वक्त यह ख्याल आया कि हम कॉप यूनिवर्स जैसा कुछ बना सकते हैं। खुशकिस्मती रही कि हमारी यह सोच कामयाब रही। 336 करोड़ है रोहित शेट्टी की कुल नेटवर्थ
रोहित शेट्टी का नाम आज हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के बड़े डायरेक्टर में शामिल है। कभी 35 रुपए कमाने वाले रोहित की कुल नेटवर्थ करीब 336 करोड़ रुपए है। लाइफ स्टाइल एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके पास लेम्बोर्गिनी, मासेराटी ग्रैन टूरिज्मो, रेंज रोवर वो, BMW X6 स्पोर्ट और फोर्ड मस्टैंग जीटी जैसी महंगी गाड़ियां भी हैं। इसके अलावा फिल्ममेकर के पास नवी मुंबई में एक आलीशान घर है, जिसे उन्होंने 2013 में खरीदा था। जुहू में भी उनके पास 10 मंजिला इमारत है।

द ग्रेट इंडियन कपिल शो के मेकर्स को लीगल नोटिस:विवादों के बीच सलमान खान की टीम ने दी सफाई, कहा- हमारा शो से कोई लेना-देना नहीं

नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रहे कॉमेडी शो द ग्रेट इंडियन कपिल शो के मेकर्स को लीगल नोटिस मिला है। आरोप हैं कि शो के एक सेगमेंट में नोबेल पुरुस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर का अपमान किया गया है। खबरें ये भी हैं कि सलमान खान की प्रोडक्शन टीम को भी लीगल नोटिस मिला है, जो पहले शो के प्रोडक्शन का हिस्सा थी। विवादों के बीच उनकी टीम ने सफाई देते हुए कहा है कि उनका शो से कोई लेना-देना नहीं है। स्टेटमेंट में लीगल नोटिस मिलने की खबर का भी खंडन किया गया है। BBMF (बोंगो भाषी महासभा फाउंडेशन) के अध्यक्ष ने हाल ही में अपने लीगल एडवाइजर नृपेंद्र रॉय के जरिए शो के उस सेगमेंट पर नाराजगी जाहिर करते हुए चिंता व्यक्त की, जिसमें नोबेल पुरुस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के लिए अपमानजनक बातों का इस्तेमाल किया गया था। उनका कहना है कि शो में सांस्कृतिक पहलुओं को गलत तरह पेश किया जा रहा है। उन्होंने शो में रवींद्रनाथ टैगोर की विरासत का अपमान करने का भी आरोप लगाया है। इस मामले में 1 नवंबर को मंडल की तरफ से एक कानूनी नोटिस जारी कर कहा गया कि सीरीज न केवल नोबल पुरुस्कार विजेताओं की विरासतों को धूमिल कर रहा है बल्कि धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचा रहा है। सलमान खान की प्रोडक्शन टीम को भी मिला नोटिस! टीम ने दी सफाई द ग्रेट इंडियन कपिल शो के अलावा सलमान खान की प्रोडक्शन टीम को भी लीगल नोटिस मिलने की खबरें है। विवादों के बीच उनकी टीम ने एक स्टेटमेंट जारी कर साफ किया है कि उनका शो से कोई लेना-देना नहीं है। रिपोर्ट्स हैं कि सलमान खान की प्रोडक्शन टीम को भी नोटिस मिला है, हालांकि ये खबरें गलत हैं। उनके प्रोडक्शन का नेटफ्लिक्स पर प्रसारित हो रहे शो से कोई ताल्लुक नहीं है। कपिल शर्मा शो प्रोड्यूस कर चुके हैं सलमान खान बताते चलें कि ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स में स्ट्रीम किए जाने से पहले सलमान खान कपिल शर्मा के शो को प्रोड्यूस कर रहे थे। हालांकि, ओटीटी में आ रहे शो में उनका कोई इन्वॉल्मेंट नहीं है। रवींद्रनाथ टैगोर का शो में उड़ाया गया मजाक बताते चलें कि हाल ही में काजोल और कृति सेनन अपनी फिल्म दो पत्ती का प्रमोशन करने द ग्रेट इंडियन कपिल शो का हिस्सा बनी थीं। इस दौरान कृष्णा अभिषेक ने रवींद्रनाथ टैगोर का गेटअप अपनाया था। एंट्री के वक्त वो रवींद्रनाथ टैगोर की नकल उतारते हुए उनका गीत ‘एकला चलो रे’ की जगह ‘पाचला चलो रे’ गाते दिखे। उन्होंने गाने के शब्द एकला (अकेले) को पाचला (5 लोगों के साथ) से रिप्लेस किया था। साथ ही उन्होंने कहा कि अकेले चलने में खतरा है क्योंकि कुत्ते पीछे पड़ जाते हैं। शो स्ट्रीम होने के बाद से ही कई राइटर्स और बंगाली समुदाय से जुड़े लोग इसका विरोध कर रहे हैं। ………………………………………………. टीवी इंडस्ट्री से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए- रुपाली गांगुली ने सौतेली बेटी को भेजा लीगल नोटिस:मानहानि होने पर 50 करोड़ और माफी की मांग की, बेटी ने लगाए थे धमकी देने के आरोप ईशा के आरोप थे कि पिता को कॉल करने पर रुपाली उन्हें जान से मारने की धमकी देती हैं और पिता को गलत दवाइयां देती हैं। ईशा द्वारा लगाए गए संगीन आरोपों के जवाब में रुपाली गांगुली ने उनके खिलाफ 50 करोड़ रुपए का मानहानि का मुकदमा दायर किया है। पूरी खबर पढ़िए… बिग बॉस 18 में जल्द होगी वाइल्ड कार्ड एंट्री:बोल्डनेस से सुर्खियों में रहने वालीं अदिति मिस्त्री बनेंगी शो का हिस्सा, साहिल खान से जुड़ा था नाम शो से जुड़े करीबी सूत्र ने दैनिक भास्कर को बताया है कि जल्द ही शो में हॉट वाइल्ड कार्ड एंट्री होने वाली है। इस सिलसिले में मेकर्स की पॉपुलर मॉडल और इन्फ्लूएंसर अदिति मिस्त्री से बातचीत जारी है। पूरी खबर पढ़िए…

मिर्जापुर के समय हुई थी गलतफहमी:विक्रांत को मिला था बड़ा सबक, बोले, पूरी स्क्रिप्ट पढ़े बिना अब कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं करता

विक्रांत मैसी इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म ‘द साबरमती रिपोर्ट’ को लेकर सुर्खियों में हैं। इसी बीच उन्होंने एक इंटरव्यू में मिर्जापुर में अपने किरदार बबलू भैया का किस्सा शेयर किया। मिर्जापुर का पहला सीजन 2018 में OTT पर रिलीज हुआ था, इस सीरीज में विक्रांत मैसी ने बबलू भैया का किरदार निभाया था। जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया था। मिर्जापुर से मिली थी बड़ी सीख
फेय डिसूजा से बातचीत के दौरान विक्रांत ने बताया कि उन्हें नहीं पता था कि मिर्जापुर में उनके किरदार को पहले सीजन के अंत में मार दिया जाएगा, नहीं तो वह इसे साइन करने से पहले काफी सोचते। विक्रांत ने बताया कि जब उनको इसका पता चला तो वह काफी परेशान हो गए थे, उन्होंने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करने से पहले उन्हें सीजन की पूरी स्क्रिप्ट नहीं दी गई थी और इसी गलतफहमी के कारण, उन्हें बाद में पता चला कि उनका किरदार पहले सीजन के अंत तक ही टिकेगा। एक्टर ने कहा कि ये मेरे लिए एक बड़ी सीख थी, क्योंकि उसके बाद से मैं ध्यान से पूरी स्क्रिप्ट को पढ़ता हूं, या जब तक मुझे पता नहीं होता कि मुझे क्या करने के लिए कहा गया है, मैं कॉन्ट्रैक्ट पर साइन नहीं करता। एक्सेल एंटरटेनमेंट ने किया भरोसा – विक्रांत
विक्रांत ने कहा कि ‘मिर्जापुर’ सीरीज के दौरान उन्हें ये गलतफहमी इसीलिए हुई, क्योंकि इस सीरीज का फॉर्मेट लंबा था, फॉर्मेट लंबा होने के कारण लेखन की प्रक्रिया शूटिंग के दौरान जारी रहती है। उन्होंने कहा कि मिर्जापुर के प्रोडक्शन हाउस एक्सेल एंटरटेनमेंट से उनके अच्छे रिलेशन हैं, एक्सेल एंटरटेनमेंट ने मुझे ‘दिल धड़कने दो’ में काम करने का मौका दिया था। विक्रांत ने कहा, जोया अख्तर, फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी ने मुझे उस समय काम दिया और साथ दिया जब कोई मेरे साथ नहीं था। 2024 में आया था मिर्जापुर का सीजन 3
बता दें, मिर्जापुर सीजन 3 अगस्त 2024 में रिलीज किया गया था। सीजन 3 की रिलीज के साथ निर्माताओं ने यह भी घोषणा की थी कि सीरीज को एक फिल्म के रूप में तैयार किया जाएगा, जिसे 2026 में रिलीज किया जाएगा। अब बात करें, विक्रांत की अपकमिंग फिल्म ‘द साबरमती रिपोर्ट’ की तो ये फिल्म 15 नवंबर को रिलीज हो रही है।

सलमान-गोविंदा के लेट आने पर अनीस बज्मी बोले:दोनों का समय पर आना किसी शॉक से कम नहीं, इसलिए उनके हिसाब से चलता हूं

फिल्म ‘नो एंट्री’ के डायरेक्टर अनीस बज्मी ने इंटरव्यू के दौरान सलमान खान और गोविंदा से जुड़ा एक किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा कि दोनों ही एक्टर्स कभी भी सेट पर ऑन टाइम नहीं पहुंचते, इसलिए मैं उनके हिसाब से अपना शेड्यूल तय करता हूं, ताकि दोनों में से किसी को भी कोई परेशानी न हो। मैशेबल इंडिया से बातचीत में अनीस बज्मी ने कहा, ‘सलमान खान और गोविंदा के साथ मैंने लंबे समय तक काम किया है। मैं उन दोनों से कभी उम्मीद नहीं करता कि वह सेट पर टाइम से आएंगे। इसके बजाय, मैं अपने शेड्यूल को उन्हीं के हिसाब से एडजस्ट कर लेता हूं। इससे आप उन लोगों के काम करने के तरीके को भी समझ जाएंगे, जिनके साथ आप काम कर रहे हैं। अगर वह तरीका आपके लिए ठीक है, तो उनके साथ काम करें। अगर नहीं, तो फिर काम न करें। अनीस बज्मी ने गोविंदा के साथ अपने एक्सपीरियंस को शेयर किया। उन्होंने कहा, ‘गोविंदा का देर से आना मेरे लिए कोई नई बात नहीं है। अगर वह समय पर आ गए, तो मुझे सच में हैरानी होगी, क्योंकि वह कभी मुझे ऐसा झटका नहीं देते। तो, जब मुझे पता है कि वह 9 बजे की शूटिंग के लिए 12 बजे आएंगे, तो मैं उस समय तक अपने बाकी काम निपटा लेता हूं, ताकि मेरा समय बर्बाद न हो और एक्टर के साथ भी तालमेल बना रहे।’ वहीं, इससे पहले भी कई एक्टर्स गोविंदा के सेट पर लेट आने के बारे में बात कर चुके हैं। यूट्यूब चैनल रिव्यूरोन के साथ बातचीत में प्रोड्यूसर वासु भगनानी ने कहा था, ‘स्विट्जरलैंड में हीरो नंबर 1 की शूटिंग होनी थी। सारी टीम वहां पहुंची हुई थी, लेकिन गोविंदा तीन दिन तक नहीं आए, जिस कारण शूटिंग रुकी रही।’ वासु भगनानी ने कहा, ‘मैंने उन्हें फोन किया और पूछा था अगर आप नहीं आने वाले हैं, तो हम वापस लौट जाएंगे। वह नाराज हो गए और बोले मैं आ रहा हूं। हालांकि देरी के बावजूद जब गोविंदा पहुंचे, तो वह अपने काम में बहुत कुशल थे और एक ही दिन में गाने का 70 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर लिया।’ बता दें, अनीस बज्मी ने ‘वेलकम’, ‘नो एंट्री’, ‘सिंह इज किंग’ और ‘भूल भुलैया 2 और 3’ जैसी कॉमेडी फिल्मों का डायरेक्शन किया है।

एक्टर विक्रांत मैसी बोले- मुझे धमकियां मिल रहीं:फिल्म ‘द साबरमती रिपोर्ट’ करने पर पत्नी ने कहा था तुम पागल हो, परिवार-दोस्त बोले गालियां पड़ेंगी

एक्टर विक्रांत मैसी अपनी फिल्म ‘द साबरमती रिपोर्ट’ के प्रमोशन के लिए जयपुर आए। इस दौरान उन्होंने फिल्म से जुड़े अनुभवों से लेकर अपने फिल्मी करियर पर बात की। उन्होंने कहा- जब यह फिल्म उन्हें ऑफर हुई थी, घरवालों और दोस्तों ने इसे करने से मना कर दिया था। पत्नी ने कहा था कि तुम पागल हो। तुम ऐसा क्यों कर रहे हो। परिवार और दोस्तों ने कहा- आप पहले ही सोशल मीडिया पर इतनी गालियां खाते हो। इसको करने के बाद गालियां और बढ़ जाएंगी। जब रिसर्च किया तो लगा कि करना चाहिए। फिल्म बनकर तैयार हो गई। अब खूब धमकियां मिल रही हैं। इसको लेकर मैंने पुलिस में रिपोर्ट भी करवाई है। साबरमती अग्निकांड को लेकर जो थ्योरी उस समय फैलाई गई। वह आज भी जिंदा है। उन थ्योरी को लोगों से दूर करने के लिए हम फिल्म बना रहे हैं। अपनी आइडियोलॉजी के बदलाव पर उन्होंने कहा- समय के साथ चीजें बदलती रहती हैं। मैं भी इवॉल्व हुआ हूं। इस फिल्म की वजह से मेरी आइडियोलॉजी में बदलाव नहीं आया है। आगे पढ़िए पूरा इंटरव्यू… भास्कर: ट्रेलर में एक डायलॉग है कि केंद्र की ट्रेन यूपी की जगह गुजरात होते हुए जानी चाहिए। इसमें साफ तौर पर पॉलिटिकल सिनेरियो को समझाया गया है, इस पर आपका क्या कहना है? विक्रांत मैसी: इसमें हमने ऐसी कोई चीज नहीं कही है, जो आपको पता नहीं है। हम 2002 की घटना का जिक्र कर रहे हैं। हमारी फिल्म 2002 से 2010 तक की जर्नी को बयां करती है। हमारा मानना है कि उन करीब 10 साल में बहुत सारे मेजर चेंज आए। पॉलिटिक्स के नजरिए से, पब्लिक परसेप्शन के नजरिए से, खास तौर पर साबरमती अग्निकांड के मामले पर। फिल्म का डायलॉग कहीं न कहीं सच्चाई है। आप भी शायद मानते होंगे। अब दिक्कत यह है कि बिना कहे वह नाम भी आपके सामने आ गए। आजकल फिल्म इंडस्ट्री में लेखक से ज्यादा वकील घूमते हैं। हम पर हर दूसरे दिन नोटिस आता है। अभी मैंने एक फिल्म सेक्टर 36 की है, जो थोड़े दिन पहले ही आई है। इसको लेकर 50 केस हम पर आ चुके हैं। मुझ पर ही नहीं, पूरी टीम पर अलग-अलग केस आए हैं। दिल्ली या नोएडा के जो सेक्टर 36 हैं। उन्होंने हम पर केस ठोक दिया है कि आप हमारे सेक्टर का नाम खराब कर रहे हैं। ऐसी चीजों से हमें भी जूझना पड़ता है। नाम बदलने पड़ते हैं। बहुत सारी ऐसी चीज करनी पड़ती है, जो नहीं करनी होती है। इसलिए हम प्रयास कर रहे हैं कि एक महत्वपूर्ण कहानी आप तक लेकर आएं। भास्कर: इस कहानी को सामने लाने में 22 साल कैसे लग गए? विक्रांत मैसी: यह एक ऐसी घटना थी, जिससे हमारा सोशल पॉलिटिकल फैब्रिक, कल्चरल फैब्रिक रातों-रात बादल गया। यह हमारा 9/11 वाली घटना के बराबर है। मेरे दोस्त जो इस समय मीडिया में हैं, उनका भी यही मानना है। इस घटना को 22 साल हो गए हैं। आज भी उन 59 लोगों को एक आंकड़े के तौर पर देखा जाता है। आधे लोग तो उस पर बात भी नहीं करते। मैं आश्वासन के साथ यह कह सकता हूं कि यह फिल्म देखेंगे तो आपको एक अलग नजरिया मिलेगा। मैं एक अलग चीज आपको बताना चाहता हूं कि दूसरे विश्व युद्ध में क्या हुआ। जर्मनी, रूस, अमेरिका में क्या हुआ। उसके आंकड़े हमारे पास मौजूद हैं। कौन सी तारीख को क्या हुआ। वह सब हमें हमारी किताबों में पढ़ाया गया। उस पर फिल्में भी बनी है। बहुत फिल्में बनी हैं, जिन्हें ऑस्कर भी मिला है। हमारे देश में इतनी बड़ी दुर्घटना घटी। उसके बारे में हमें पता नहीं चला। दुख की बात यह है कि आज भी उस समय की थ्योरी जिंदा है, जो उस समय ग्राउंड पर बनाई गई थी। इसका अफसोस होता है। अब इस कहानी को सामने लाने में 22 साल क्यों लगे, इसका तो मैं कुछ कह नहीं सकता। मेरा उद्देश्य इस कहानी को सामने लाना था। भास्कर: फिल्म की कहानी आने से पहले आपको इस घटना की कितनी जानकारी थी। इस फिल्म को करने के बाद खुद की आइडियोलॉजी में किसी प्रकार का बदलाव आया? विक्रांत मैसी: जब यह घटना घटी, तब मैं 15-16 साल का था। आप लोग सभी समझ सकते हैं। बचपन में आपके मां-बाप आपको प्रोटेक्ट करना चाहते हैं। जब उस घटना की न्यूज हमारे घर पर चलती थी। चैनल बदल दिया जाता था। उस समय न्यूज में दंगों की बात होती थी। हिंसा की बात होती थी। साबरमती अग्निकांड के बारे में बहुत सालों तक आपको न्यूज में सही तरीके से जानकारी तक नहीं दी गई थी। न्यूज में सिर्फ दंगों के बारे में था। अंतरराष्ट्रीय प्रेस ने भी यही छापा। दूर-दूर से लोग आए। बताया दंगे हुए हैं। मैं यहां पर डिस्क्लेमर दे रहा हूं कि कई बार कई बातों का गलत मतलब निकाला जाता है। उस दूसरे पहलू पर इतनी बातें हुईं कि पहले पहलू को हम भूल गए। मुझे भी जो जानकारी बाहर थी, यानी आग लगा दी गई या खाना बना रहे थे, कोई सिगरेट पी रहा था या कोई शॉर्ट सर्किट हुआ, इस तरह की थ्योरी हम तक पहुंची। जब यह कहानी मेरे पास आई, उस वक्त हमें बहुत सारा रिसर्च मटेरियल भी प्रोवाइड कराया गया। सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला है हमने उसी के आधार पर कहानी तैयार की। सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा है वही हमने कहानी के रूप में दिखाया है। कोर्ट का फैसला आने के बाद भी आज भी पुरानी थ्योरी बनी हुई है। हम कहते हैं लोकतंत्र में विश्वास करते हैं, लेकिन हम भी कहीं न कहीं कलेक्टिविज्म का शिकार हैं। जो हम विश्वास करना चाहते हैं, हम उसी का विश्वास करते हैं। चाहे कितने भी तथ्य या सत्य हमारे सामने ला दिए जाएं। इस फिल्म की वजह से मेरी आइडियोलॉजी नहीं बदली है। इंसान समय के साथ बदलता है। आप भी 10 साल पहले जो होंगे, वह आज नहीं होंगे। बदलाव आया होगा। एक इंग्लिश की कहावत है कि द चेंज इस द ओनली काॅन्स्टेंट। मैं देश-दुनिया घूमता हूं। चीजें अपनी आंखों से देखी है। अच्छी या गलत और मुझे पता है। इस सवाल का बैकग्राउंड क्या है, मैं जानता हूं। मैं अपना जवाब दे चुका हूं। मैं नहीं चाहता कि इस फिल्म के साथ भी ऐसा हो कि हमारी बातचीत कहीं पॉलिटिकल विषय में न घुस जाए। इतना जरूर कहूंगा कि मैं भी इवॉल्व हुआ हूं। वहीं स्थिर पानी की तरह मैं रहता तो पता नहीं क्या होता। मुझ पर कीड़े-मकोड़े जम जाते। मैं बहता हुआ पानी हूं। बदलाव आता रहना चाहिए। मुझे विश्वास है कि आज मैं जो हूं, 10 साल बाद नहीं रहूंगा। बदलते रहना चाहिए। भास्कर: आप सच्चाई से जुड़ी कहानियों पर ज्यादा काम करते हैं, इसका क्या कारण है? विक्रांत मैसी: आज भी मुझे विश्वास है कि कहानियों और फिल्मों में पूरा पोटेंशियल है। यह चीज लोगों को इंस्पायर करती है। एंटरटेनमेंट तो करती ही है। क्योंकि परिवार से लोग सिनेमाघर में हंस-खेल कर जाना चाहते हैं। हम भी चाहते हैं। कई बार क्या होता है कि वह कहानी को कहना बहुत जरूरी हो जाता है। इसे लोगों तक पहुंचना जरूरी होता है। आज मेरा यह प्रिविलेज है, मैं आज यहां पर सिनेमा हॉल में खड़ा हूं। यह मेरा सपना हुआ करता था। यह मेरी हकीकत है। मेरा यह जरूरी कदम है कि मैं अपने समाज, आप सभी लोगों को कुछ दूं, क्योंकि मैं आप लोगों की वजह से ही हूं। इसलिए मैं ऐसी कहानी लाता हूं, जो आपकी कहानी है।​ भास्कर: ​​​​​​क्या इस फिल्म के बाद आपके परिवार को धमकियां मिल रही हैं? इस फिल्म को करने से पहले आपने उनसे राय ली थी? विक्रांत मैसी: परिवार वालों को धमकी मिलने को लेकर मिस कम्युनिकेशन हुआ है। मुंबई की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुझे सवाल पूछा गया था, जिसका जवाब मैंने दिया था। जो सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पेश किया गया। मेरे घरवालों को धमकियां नहीं मिल रही हैं। मुझे धमकियां मिल रही हैं। यह एक तरीके से चाइनीज गेम की तरह है। मुझे टारगेट किया जा रहा है। मुझे बहुत कुछ कहा जा रहा है, लेकिन मैंने कुछ फैसले लिए हैं। अब डर नहीं लग रहा है। कहीं न कहीं एक हल्कापन लग रहा है। डर पहले था, जब कहानी कर रहे थे। जब 27 फरवरी को रीक्रिएट किया गया। शूटिंग करने में भी काफी दिक्कतें आईं। हम बहुत आसानी से पढ़ लेते हैं, लेकिन जब उसे करने जाते हैं। बड़ी समस्या सामने आती है। मेरी सुरक्षा करने के लिए जो जरूरी कदम हैं, परिवार की सुरक्षा करने के लिए जो कदम उठा रहे हैं, वह उठा रहा हूं। हम सब यह मिलकर कर रहे हैं। प्रोड्यूसर एकता कपूर के साथ मेरा गहरा रिश्ता है। वह एक निर्माता नहीं हैं। मेरी मेंटर भी हैं। साइबर पुलिस में हमने कंप्लेंट भी की है। सच कहूं तो अब डर कम होता जा रहा है। बहुत हिम्मत लगी थी, जब यह कहानी बोलने की कोशिश की थी। अब जब यह फाइनल कहानी आ रही है। अब तो बन गई है। सब कुछ हो गया है। अब कोई दिक्कत नहीं है। हमारी पहले दिन से ही यह सोच थी कि उन 59 लोगों को याद किया जाए, उनको सच्ची श्रद्धांजलि दी जाए। मीडिया का जो रोल था, वह लोगों के सामने लाया जाए। मैं हर चीज अपने परिवार से पूछता हूं। हालांकि डिसीजन मेरा ही होता है। मेरे माता-पिता बिल्कुल साधारण से लोग हैं। उनको इस तरह की कोई जानकारी नहीं होती है। उनका ऐसे सब्जेक्ट पर लेना-देना तो बहुत दूर की बात है। उनको यह भी जानकारी नहीं है फिल्म क्या होती है। स्क्रिप्ट क्या होती है। इसकी मेकिंग कैसे होती है। मार्केटिंग क्या होती है। उनको कुछ नहीं पता, हर मां-बाप की तरह उनको सिर्फ अपने बेटे पर गर्व है। मेरी पत्नी शीतल से बात करता हूं। जब घर पर चर्चा हुई थी तो आमतौर पर मैं ब्रीफ में बात करता हूं। जब उनको बताया कि इस सब्जेक्ट पर फिल्म बना रहे हैं। मैं सच कहूं पत्नी ने कहा था कि तुम पागल हो। तुम ऐसा क्यों कर रहे हो। मेरे कुछ दोस्त हैं, जो इसी इंडस्ट्री से हैं। उनसे पूछा तो वह कहते थे कि भाई क्यों पंगे ले रहा है। जब बाद में मुझे रिसर्च मटेरियल मिला। कहानी सुनी तो लगा कि यह कहानी कहनी चाहिए। जो एकता कपूर कहना चाहती है, उसे कहना चाहिए। जब इस फिल्म की स्क्रिप्ट मेरे पास आई थी, उस समय मैंने फिल्म के लिए मना नहीं किया था, लेकिन परिवार से और दोस्तों से इस बारे में डिस्कस किया। उन्होंने कहा- आप पहले ही सोशल मीडिया पर इतनी गालियां खाते हो। इसके करने के बाद गालियां और बढ़ जाएंगी। मिस अंडरस्टैंड करेंगे। क्योंकि इस सब्जेक्ट को बहुत ज्यादा मिस अंडरस्टैंड किया गया है। लोग कहेंगे कि यह किसी एक का पक्ष ले रहा है। फिर यह एक कम्युनिटी के विरुद्ध बोल रहा है। जैसे मैंने पहले कहा कि मेरा विश्वास आज भी यह है कि इतनी भी बुरी दुनिया नहीं है। आज भी कहीं न कहीं इंसानियत हमारे भीतर है। आखिर में यही कहूंगा कि उस ढाई साल के बच्चे को किसी पॉलिटिकल या रिलीजियस आंखों से नहीं देख सकता, जिसे जिंदा जला दिया गया था।

राजपाल यादव ने सुनाया ‘कंपनी’ से जुड़ा किस्सा:बोले- डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा से लीड रोल मांग लिया था, फिर मैं खुद डर गया था

राजपाल यादव को 1999 में आई फिल्म शूल में एक छोटे से किरदार से पहचान मिली थी। इसके बाद 2000 में आई फिल्म जंगल के बाद उनका करियर पूरी तरह बदल गया था। हाल ही में एक इंटरव्यू में राजपाल यादव ने एक दिलचस्प किस्सा शेयर किया। उन्होंने बताया कि, ‘मुझे लगा था कि राम गोपाल वर्मा मुझे अपनी फिल्म कंपनी से निकाल देंगे, क्योंकि मैंने अजय देवगन और मनीषा कोइराला के सामने कहा था कि मुझे यकीन है कि अगर राम गोपाल वर्मा के पास कोई ऐसी स्क्रिप्ट होगी, जिसमें मैं लीड रोल में फिट बैठूंगा, तो वह मुझे जरूर ऑफर करेंगे।’ राजपाल यादव को 2001 में पहला अवॉर्ड मिला था
राजश्री अनप्लग्ड से बातचीत में राजपाल यादव ने बताया कि साल 2001 में स्टार स्क्रीन अवॉर्ड्स हुए थे, जिसमें उन्हें बेस्ट एक्टर इन नेगेटिव रोल का अवॉर्ड मिला था। राजपाल को ये अवॉर्ड राम गोपाल वर्मा के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘जंगल’ के लिए मिला था। उन्होंने बताया कि ये उनके करियर की ऑफिशियली पहली फिल्म थी, जिसके लिए उन्हें क्रेडिट मिला था। एक्टर ने बताया कि इस फिल्म की सफलता के बाद उन्होंने एक से डेढ़ महीने में करीब 15-16 फिल्में साइन की थी।
मुझे राजपाल का कॉन्फिडेंस पसंद है – मनीषा कोइराला
राजपाल यादव ने फिल्म कंपनी से जुड़ा किस्सा शेयर किया। एक्टर ने कहा, ‘मुझे याद है कि जब हम हांगकांग में फिल्म कंपनी की शूटिंग कर रहे थे, जोकि मेरा पहला प्रोफेशनल टूर था। जब भी हम लोगों के पास समय होता था, तब एक दूसरे के साथ मजाक करते थे। याद है इंटर-कॉन्टिनेंटल की छत पर हम बैठे थे, तो उस दौरान राम गोपाल वर्मा को लोगों की टांग खींचने की बहुत आदत थी। उन्होंने अचानक मुझसे कहा था राजपाल, अब जब तुम स्टार बन गए हो, तो हमारे साथ तो कोई फिल्म साइन नहीं करोगे। मैंने जवाब देते हुए कहा था सर आप ही थे, जिन्होंने मुझे फिल्म जंगल दी। फिल्म प्यार तूने क्या किया दी और अब आपने मुझे अपनी फिल्म ‘कंपनी’ में भी कास्ट किया है। इससे मुझे पूरा यकीन है कि अगर कभी आपको कोई ऐसी स्क्रिप्ट मिलेगी, जिसमें मैं लीड रोल में फिट बैठूंगा, तो आप मुझे जरूर ऑफर करेंगे।’ राजपाल ने कहा, जब मैंने ये बात कही तो अजय देवगन, मनीषा कोइराला, विवेक ओबेरॉय, अंतरा माली, सभी हमारे साथ बैठे थे और मेरे इस स्टेटमेंट के बाद सब चुप हो गए थे। कुछ देर तक कोई भी कुछ नहीं बोला। कुछ देर बाद मनीषा ने कहा मुझे इनका कॉन्फिडेंस पसंद है।
राजपाल यादव ने आगे कहा, अगले दिन राम गोपाल वर्मा एयरपोर्ट पर शूटिंग कर रहे थे। उन्होंने मुझे देखा और कहा राजपाल, इधर आओ मुझे लगा कि बस अब वह मुझे फिल्म से निकाल देंगे। लेकिन जब मैं उनके पास गया तो उन्होंने मुझसे कहा राजपाल, मैं तुम्हारे कॉन्फिडेंस के कारण पूरी रात सो नहीं सका। क्या तुम मुझे कोई स्क्रिप्ट बता सकते हो? राजपाल की मानें तो रामगोपाल का ऐसा कहना उनकी जिंदगी का सबसे अच्छा दिन था।
इन फिल्मों में आ चुके हैं नजर
बता दें, राजपाल हाल ही में फिल्म भूल भुलैया 3 में नजर आए हैं। इस फिल्म में उन्होंने अपने सबसे फेमस किरदारों में से एक छोटा पंडित को दोहराया है। इसके अलावा एक्टर चंदू चैंपियन, ड्रीम गर्ल 2, भूत पुलिस, हंगामा 2, टोटल धमाल जैसी फिल्मों में नजर आ चुके हैं।