Thursday, March 5, 2026
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अभिनेता जॉन सीना की न्यूड फोटोस पर क्या बोले बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह ?

हाल ही में बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह ने अभिनेता जॉन सीना की न्यूड फोटोस पर अपना बयान दिया है! ऑस्‍कर 2024 जहां ‘ओपेनहाइमर’ के दबदबा, क्रिस्‍टोफर नोलन और रॉबर्ट डाउनी जूनियर को उनके पहले एकेडमी अवॉर्ड के लिए याद रखा जाएगा, वहीं डॉल्‍बी थ‍िएटर के अंदर और बाहर सबसे अध‍िक चर्चा जॉन सीना की रही। एक्‍टर, सिनेमा के सबसे प्रतिष्‍ठ‍ित अवॉर्ड शो के मंच पर न्‍यूड होकर पहुंचे। उनका यह स्‍टंट चर्चा में है। जॉन सीना स्‍टेज पर बेस्‍ट कॉस्‍ट्यूम डिजाइनर का अवॉर्ड प्रजेंट करने पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि कपड़े उतारकर, वह कपड़ों की अहमियत बताना चाहते थे। अब उनके इस स्‍टंट पर खूब तालियां बज रही हैं। लेकिन क्‍या यह मानस‍िक दोगलापन नहीं है? क्‍योंकि बीते साल 2023 में जब रणवीर सिंह एक फोटोशूट के लिए न्‍यूड हुए थे, तब उनकी खूब आलोचना हुई थी। लेकिन जब यही काम एक हॉलीवुड एक्‍टर ने किया तो सोशल मीडिया पर ‘बहारों फूल बरसाओ’ जैसा माहौल है। साल 2023 में रणवीर सिंह ने जब सोशल मीडिया पर अपनी फोटोज शेयर की थीं, तब हंगामा मच गया था। विवाद इतना बढ़ा कि एक्टर को इंस्टाग्राम से तस्वीरों को डिलीट करना पड़ा। कुछ ऐसा ही विद्युत जामवाल के साथ हुआ। उन्होंने भी कुछ इसी तरह की फोटोज शेयर कीं तो लोगों ने नाक-भौंह सिकोड़ लिया। इन सबसे पहले जब मिलिंद सोमन भी जागरुकता बढ़ाने के लिए ही समंदर किनारे न्‍यूड होकर दौड़े थे, तब उन पर केस दर्ज हुआ। ऐसे में सवाल उठना लाजिम है कि देसी और विदेशी कलाकारों के साथ हमारा ये दो-मुंहा बर्ताव क्‍यों है?

पूरी दुनिया की नजरें ऑस्कर सेरेमनी पर टिकी थीं, तभी स्टेज पर रेसलर और एक्टर जॉन सीना बिना कपड़ों के यानी न्यूड होकर स्टेज पर पहुंचे। उनके हाथ में अवॉर्ड विनर के नाम का लिफाफा था। इसी से उन्होंने प्राइवेट पार्ट को छिपाया हुआ था। हालांकि, वह पूरी तरह से न्‍यूड नहीं हुए थे। उन्‍होंने मॉडेस्‍टी पाउच, साधारण शब्‍दों में कहें तो स्‍क‍िन कलर की लंगोट पहन रखी थी। उन्हें इस हाल में देख वहां मौजूद लोग हंस पड़े। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ तो यूजर्स भी मुस्कुराए बिना नहीं रह पाए। लेकिन सोचिए। अगर यही चीज भारत में हुई होती तो क्या हाल होता! किसी अवॉर्ड शो में कोई एक्टर इस हालत में पहुंचता तो क्या नजारा होता।

जॉन सीना की ये हरकत बेहूदापन है या फिर कुछ अलग हटकर करने की कोशिश! हर साल ऑस्कर में कुछ ना कुछ ऐसा होता है, जिसे सालों-साल याद किया जाता है। पिछली दफा विल स्‍म‍िथ का थप्‍पड़ कांड तो सबको आज भी याद है। तो क्‍या इसी वजह से जॉन सीना ने खुद को याद रखे जाने के लिए जानबूझकर ये सब किया। क्‍योंकि, कपड़ों की अहमियत बताने के लिए कपड़े उतारने का अंदाज तो समझ से परे है। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है, जब ऑस्‍कर के मंच पर कोई न्‍यूड होकर पहुंचा हो। 49 साल पहले ऑस्कर के मंच पर कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला था, जब एक शख्स स्टेज पर न्यूड होकर पहुंच गया था। जॉन सीना ने इसी मोमेंट को फिर से री-क्रिएट किया है। वैसे, ऑस्‍कर के इतिहास में विवादित लम्‍हों की लिस्‍ट इससे भी लंबी है। आइए, बात निकली है तो आपसे यह भी साझा कर ही लेते हैं।

हॉलीवुड की फेमस एक्ट्रेसेस में से एक एंजेलिना जोली को साल 2000 में ऑस्कर मिला था। अपनी स्पीच में उन्होंने पूरी दुनिया के सामने भाई जेम्स हेवन के लिए प्यार जाहिर किया था। यहां तक कि रेड कारपेट पर लिप Kiss भी किया था, जिसे देखकर सभी चौंक गए थे। इस पर काफी बवाल भी हुआ था, जिस पर कुछ महीने बाद एक्ट्रेस ने सफाई में कहा कि उनका और भाई का रिश्ता एकदम पवित्र है। सचिन लिटिलफेदर ने 45वें एकेडमी अवॉर्ड में ‘द गॉडफादर’ मूवी के लिए बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड हासिल करने वाले मार्लन ब्रैंडो की तरफ से ऑस्कर को ठुकरा दिया था। उन्होंने बताया था कि मार्लन ने ऑस्कर को ठुकरा दिया और इसकी वजह फिल्म इंडस्ट्री में अमेरिकन इंडियंस के साथ होने वाला बर्ताव है।

ये पिछले साल की बात है, जब विल स्मिथ को ‘किंग रिचर्ड’ के लिए बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला था। वो अपनी वाइफ जेडा के साथ सेरेमनी में शामिल हुए थे। क्रिस रॉक सेरेमनी को होस्ट कर रहे थे। तभी उन्होंने जेडा के बाल झड़ने की बीमारी पर मजाक बनाया और विल को ये बात पसंद नहीं आई और उन्होंने भरी महफिल में क्रिस को थप्पड़ जड़ दिया। फिलहाल, विल स्मिथ ऑस्कर के लिए बैन हैं। ये किस्सा साल 2017 का है, जब ऑस्कर अवॉर्ड के दौरान बेस्ट पिक्चर के लिए ‘मूनलाइट’ का नाम लिया जाना था, लेकिन प्रेजेंटर्स ने गलती से ‘ला ला लैंड’ का नाम ले लिया। पूरी टीम जश्न मनाने लगी, तभी दोबारा अनाउंस किया गया कि उनसे भूल गुई है। ये किस्सा काफी चर्चा में था और प्रेजेंटर्स की खूब किरकिरी भी हुई थी।

क्या अब भी दहक रहा है उत्तराखंड का जोशीमठ?

उत्तराखंड का जोशीमठ अब भी दहक रहा है! जोशीमठ एक ऐसी आपदा है जिसने लोगों के आशियाने ध्वस्त कर दिए, उनके सपने तोड़ दिये। पाई-पाई जोड़कर घर बनाया लेकिन अपने घरों को इस तरह आपदा की भेंट चढ़ते देख लोगों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर आंदोलन के रूप में नजर आने लगा है। जिस आपदा ने उनके घरों की नींव हिला दी, उसी आपदा के जख्म ने आपसी सामाजिक रिश्तों में भी दरार डाल दी है। जोशीमठ आपादा पीड़‍ितों के अधिकारों के लिए पहले एक संगठन था। धीरे-धीरे बाद में कई और संगठन बने। इन अलग से बने संगठन के मुखिया भले ही यह दुहाई दे रहे हों कि अलग संगठन बनाने से किसी तरह का मतभेद नहीं होगा, लेकिन लोग इसे आपसी रिश्ते टूटने की शुरूआत मान रहे है। यहां आ कर बसे लोग इससे आहत हैं तो वहीं शुरू से आंदोलन कर रहे नेता इसे राजनीतिक षड़यंत्र बता रहे हैं। कहने को जोशीमठ के मूल निवासी और बाहर से आ कर बसे लोग कितना ही यह कहें कि उनके बीच कोई मतभेद या मनभेद नहीं है लेकिन जमीनी हालात इससे उलट कहानी बयान कर रहे हैं। आंदोलन के एक साल के भीतर आंदोलनकारियों के तीन से चार संगठन अपनी लड़ाई लड़ने के लिए खड़े हो गए। इससे यह साफ हो रहा है कि यहां के लोग अब अपने-अपने तरीके से अपने घर और जमीन की लड़ाई लड़ना चाहते हैं। इस तरह से अलग-अलग मोर्चों का खड़ा होना यह साबित करता है कि अब तक आंदोलन का नेतृत्व कर रहे लोगों को अपने नेताओं पर भरोसा नहीं रहा है। जोशीमठ में अब तक मिलजुलकर आपदा से लड़ते-लड़ते अब जोशीमठ के मूल, पुश्तैनी लोग अपनी लड़ाई को थोड़ा अलग तरीके से लेकर सड़कों पर उतरे हैं। अब ये अपना अलग ‘मूल निवासी स्वाभिमान संगठन बनाकर’ सरकार से अपने हक हकूकों की लड़ाई लड़ने को सड़कों पर उतर रहे हैं।

जोशीमठ में दरारें आने का सिलसिला भले ही पुराना हो लेकिन 14 महीने पहले अचानक जब दरारों ने विकराल रूप लेना शुरू कर दिया तो लोग एकजुट हो कर सरकार, एनटीपीसी और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतर आए थे। आंदोलनकारियों के तेवरों को देखते हुए सरकार हरकत में आई और तमाम आश्वासनों के बाद विस्थापन का दावा किया गया। लेकिन अब इस वायदे पर देरी होते देख लोगों के सब्र का बांध टूट रहा है। यहीं से आंदोलन में बिखराव दिखने लगा। लोग अपनी जमीन और घर की लड़ाई खुद लड़ने के लिए अलग संगठन बना कर आगे आ रहे हैं। अब मूल निवासिसयों का अलग संगठन बन गया है। इसका असर आंदोलन करने वालों और नेताओं के बीच भी नजर आया। यह संगठन बनने के बाद अब यहां पर बाहर से आ कर बसे लोग खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं।

दरअसल जोशीमठ में डेढ़ वर्ष पहले दिसंबर 2022 में इन दरारों ने विकराल रूप लेना शुरू कर दिया था। घरों में दरारें पहले से ही आ रही थीं लेकिन साल 2022 से ज्यादा दिखाई देने लगीं थीं। जनवरी 2023 की शुरुआत में ये दरारें और अधिक चौड़ी हुईं और भूधंसाव बढ़ने लगा था। नगर के सुनील और मनोहर बाग वार्ड में कई आवासीय भवन और होटल इन दरारों की चपेट में आए। नगर के विभिन्न वार्डों में स्थित लगभग 600 भवनों में में दरारें पड़ी।

जोशीमठ में बढ़ते भूधंसाव और दरारों को देखते हुए जोशीमठ के आपदा प्रभावित लोग 5 जनवरी 2023 को भारी संख्या में सड़कों पर उतर आए। उन्‍होंने नारेबाजी-प्रदर्शन कर सड़कें जाम की। पूरा दिन कड़कडाती सर्दी के बीच चौराहों पर अलाव जलाकर लोगों ने धरना दिया। तब अपर जिलाधिकारी से जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में बातचीत हुई। जोशीमठ के आपदा प्रभावितों की सुध लेने, उनकी उचित व्यवस्था करने, विस्तृत विस्थापन नीति लाने के साथ तमाम बिंदुओं पर बातचीत के बाद चक्का जाम खोला गया और यह धरना स्थगित हुआ। जोशीमठ में पड़ी दरारों के कारण लोगों में बढ़ते गुस्से को देखते हुए शासन स्तर से कार्रवाई शुरू हुई और जोशीमठ के भवनों को अलग-अलग श्रेणियो में बांटा गया। कुछ को सुरक्षित, असुरक्षित और कुछ को ठीक-ठाक की श्रेणी में रखा गया।कुछ भवनों को सुरक्षा की दृष्टि से ध्वस्त भी कर दिया गया था और लोगों को मकान खाली करने के निर्देश हुए। जब तक लोगों की उचित व्यवस्था नहीं हुई तब तक उन्हें राहत शिविरों में रखा गया और किराए पर जाने के लिए किराया भी मुहैया करवाया गया।

वैज्ञानिकी सर्वे में जोशीमठ के अलग-अलग 9 वार्डों में स्थित लगभग 1200 मकान खतरे में बताए गए और इन मकानों को खाली करने के निर्देश हुए। लोगों को सुझाव पत्र बांटे गए। इन पत्रों में आपदा प्रभावित लोगों को कई प्रकार के विकल्प दिए गए थे जैसे कि लोग अपने मकान का भुगतान किस प्रकार चाहते हैं। जमीन के बदले जमीन या भवन के बदले भवन भी ले सकते हैं। नगर में यह विकल्प पत्र बांटने के बाद और आपदा के इस दौर में जोशीमठ के मूल और पुश्तैनी लोग अपनी लड़ाई अलग-अलग अंदाज में लड़ रहे हैं। दरअसल मूल और पुश्तैनी लोगों को यह चिंता है कि यदि जोशीमठ से पलायन करना पड़ा तो वह कहां जाएंगे। साथ ही यहां उनके हक हकूक मरघट, पनघट, गोचर भूमि आदि का क्या होगा। मूल निवासियों ने यह संगठन बनाने के बाद बांटे गए विकल्प पत्र वापस लौटा दिए और जोशीमठ छोड़ने से इनकार किया। इन लोगों ने सरकार से यहीं पर व्यवस्था करने की मांग की है।बीते रविवार को जोशीमठ में मूल निवासी स्वाभिमान संगठन के बैनर तले एक विशाल जुलूस निकाला गया। इस विशाल जुलूस का हिस्सा जोशीमठ के सभी मूल और पुश्तैनी निवासी थे। संगठन के अध्यक्ष के मुताबिक इस संगठन के बैनर तले जोशीमठ के मूल निवासियों के हक हकूकों की लड़ाई लड़ी जा रही है।

1976 में सरकार द्वारा नियुक्त एमसी मिश्रा समिति ने पहले ही चेतावनी दी थी कि निर्माण कार्य से बचा जाना चाहिए, विशेष रूप से इसकी संवेदनशीलता के कारण पहाड़ी के ढलाव पर निर्माण नहीं होना चाहिए। भूवैज्ञानिकों के अनुसार आरनोल्ड हेम और ऑगस्ट गैनसर ने 1939 में अपनी किताब सेंट्रल हिमालय में कहा था कि जोशीमठ भूस्खलन के मलबे पर बसा है। यह भूस्खलन कब हुआ, इस बारे में कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन इतिहासकार शिव प्रसाद डबराल की किताब में कहा गया है कि कत्यूर राजवंश की जोशीमठ में राजधानी हुआ करती थी, लेकिन लगभग 1,000 साल पहले हुए एक भूस्खलन की वजह से कत्यूर राजाओं ने यहां से अपनी राजधानी हटा दी थी।

दिसंबर 2022 के अंतिम सप्ताह में जोशीमठ में दरारों में तेजी आने की लोगों की बात की तस्दीक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर ने की थी। नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर द्वारा 13 जनवरी 2023 को सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर जानकारी दी गई कि 27 दिसंबर 2022 से 8 जनवरी 2023 (केवल 12 दिन) के बीच जोशीमठ 5.4 सेंटीमीटर नीचे धंस गया, जबकि अप्रैल-नवंबर 2022 के बीच सात महीने में 9 सेमी भूधंसाव हुआ था। हालांकि शाम होते-होते राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के हस्तक्षेप के बाद इसरो ने यह रिपोर्ट अपनी वेबसाइट से हटा दी।

चुनावी बॉण्ड के लिए विपक्ष ने सरकार पर क्या लगाए आरोप?

हाल ही में चुनावी बॉण्ड के लिए विपक्ष ने सरकार पर कई आरोप लगा दिए हैं! कांग्रेस ने चुनावी बॉण्ड का विवरण देने के लिए समय बढ़ाने की भारतीय स्टेट बैंक की मांग को हास्यास्पद करार दिया। कांग्रेस ने सोमवार को दावा किया कि सरकार को इस बात का डर है कि उसके सारे राज खुल जाएंगे। पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर से भारतीय लोकतंत्र को सरकार की ‘साजिशों ‘ से बचाने के लिए सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामला बड़े भ्रष्टाचार का है तथा यह सरकार एवं उसके कॉरपोरेट मित्रों के बीच की सांठगांठ को भी उजागर करता है। सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ ने चुनावी बॉण्ड संबंधी जानकारी का खुलासा करने के लिए समयसीमा बढ़ाए जाने का अनुरोध करने वाली भारतीय स्टेट बैंक एसबीआई की याचिका सोमवार को खारिज कर दी और उसे 12 मार्च को कामकाजी घंटे समाप्त होने तक निर्वाचन आयोग को चुनावी बॉण्ड संबंधी विवरण उपलब्ध कराने का आदेश दिया।

पीठ ने एसबीआई से पूछा कि उसने चुनावी बॉण्ड योजना को पिछले महीने रद्द किए जाने से पहले राजनीतिक दलों द्वारा भुनाए गए बॉण्ड संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए अभी तक क्या कदम उठाए हैं। वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “उच्चतम न्यायालय एक बार फिर भारतीय लोकतंत्र को इस शासन की कुटिल साजिशों से बचाने के लिए आगे आया है। उन्होंने दावा किया कि एसबीआई की तरफ से एक दिन के साधारण से काम के लिए समय बढ़ाने की मांग करना हास्यास्पद था। सच तो यह है कि सरकार को डर है कि उनके सारे राज़ सामने आ जाएंगे। वेणुगोपाल का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से प्रमाणित यह ‘महाभ्रष्टाचार’ का मामला, भाजपा और उसके भ्रष्ट कॉरपोरेट मित्रों के बीच अपवित्र सांठगांठ को उजागर करेगा। कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि जो सत्ता में आए थे स्विस बैंकों के खातों को सार्वजनिक करने की बातें करके वो आज एसबीआई तक के आंकड़ों को सार्वजनिक करने में थर-थर कांप रहे हैं।

मियाद पूरी होने के बाद कुछ याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और उससे एसबीआई पर अदालत की मानहानि का मुकदमा चलाने की मांग की। अब प्रधान न्यायाधीश सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ अलग से इस याचिका पर सुनवाई करेगी। याचिका में आरोप लगया गया है कि एसबीआई ने शीर्ष अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना की है। याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग को डीटेल सौंपने के आदेश की अवहेलना करने के लिए एसबीआई को दंडित किया जाना चाहिए। आइए इस मामले की एक-एक महत्वपूर्ण बात जान लेते हैं। एसबीआई ने मियाद से दो दिन पहले 4 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी और कहा कि उसे यह बताने के लिए 30 जून तक का वक्त दिया जाए कि किस पार्टी ने कितने चुनावी बॉण्ड भुनाए।

एसबीआई ने अदालत से कहा कि एक-एक जानकारी को इकट्ठा करके, उसका मिलान करना आसान नहीं। उसने कहा कि इसमें लंबा वक्त लगेगा, इसलिए सुप्रीम कोर्ट को मियाद बढ़ाना चाहिए। आवेदन में कहा गया है कि चूंकि व्यवस्था यह की गई थी कि दानताओं की पहचान गुप्त रखी जाए, इसके लिए कड़े उपाय किए गए थे। अब चुनावी बॉण्ड को डिकोड करना और दानदाताओं का दान से मिलान करना एक जटिल प्रक्रिया होगी। एसबीआई ने कहा, ‘बॉण्ड जारी करने से संबंधित डेटा और बॉण्ड के भुनाने से संबंधित डेटा को दो अलग-अलग जगहों पर स्टोर किया गया था। कोई केंद्रीय डेटाबेस नहीं रखा गया था। ऐसा इसलिए किया गया ताकि दानदाताओं की पहचान छिपी रहे।’

एसबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, ‘आपको बता दें कि चंदा देने वालों की जानकारियां कुछ चिह्नित बैंक ब्रांचेज में एक सीलबंद लिफाफे में रखे गए थे और ऐसे सभी सीलबंद लिफाफे अप्लीकेंट बैंक की मुख्य शाखा में जमा किए गए थे, जो मुंबई में स्थित है।’ दूसरी तरफ, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और कॉमन कॉज ने एसबीआई के खिलाफ अदालत की अवमानना की याचिका दाखिल की है। इन्होंने आरोप लगाया गया है कि एसबीआई ने जानबूझकर मियाद पूरी होने से ठीक पहले समय बढ़ाने का आवेदन दिया है ताकि आगामी लोकसभा चुनावों से पहले दानदाताओं और और उनकी तरफ से राजनीतिक दलों को हुई फंडिंग की जानकारी जनता के सामने न आ सके। उनकी याचिका में कहा गया है कि चुनावी बॉण्ड योजना के क्लॉज 7 के अनुसार, अगर कोर्ट आदेश दे तो बॉण्ड खरीदने वालों की तरफ से दी गई जानकारियां सार्वजनिक की जा सकती हैं।

स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया को क्या बोला उच्चतम न्यायालय?

हाल ही में उच्चतम न्यायालय द्वारा स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया को कड़ी फटकार लगाई गई है! इलेक्टोरल बॉन्ड पर SBI की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देश के सबसे बड़े बैंक को जमकर सुना दिया। यही नहीं, SBI की तरफ से पैरवी कर रहे देश के नंबर वन वकील हरीश साल्वे पर बैकफुट पर नजर आए। 5 जजों की बेंच की अगुवाई कर रहे चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ साल्वे की हर दलील को काट रहे थे। साल्वे जैसे दिग्गज वकील अपने मुवक्किल SBI को चुनावी बॉन्ड के बारे में डिटेल देने के लिए और मोहलत हासिल करने असफल रहे। यही नहीं जजों के सवाल-जवाब के दौरान भी वो बैकफुट पर नजर आ रहे थे। उनकी दलीलों को चीफ जस्टिस से लेकर बेंच कई जज लगातार काट रहे थे। कई बार तो ऐसा लग रहा था कि साल्वे जैसे वकील की दलील जजों को प्रभावित नहीं कर पा रही है। सोशल मीडिया पर कई वीडियो में साल्वे अपनी दलीलों से बेंच को प्रभावित करते नहीं दिखे।

चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बी.आर. गवई, जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा ने पूरे मामले की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने SBI को निर्देश जारी किया है कि वह इलेक्टोरल बॉन्ड के खरीददार और राजनीतिक दलों के बारे में जानकारी चुनाव आयोग के सामने 12 मार्च तक पेश करें। कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि वह 15 मार्च तक इस बारे में डिटेल अपने वेबसाइट पर अपलोड करें। सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक बेंच ने कहा था कि एसबीआई को चुनावी बॉन्ड का ब्यौरा देना होगा। इस ब्यौरे में यह बताया जाए कि किस तारीख को यह बॉन्ड किसने खरीदा और कितने का खरीदा और किस तारीख को किसने कैश कराया और इसमें कितनी राशि थी। राजनीतिक पार्टियों द्वारा कैश कराए गए एक-एक बॉन्ड का ब्यौरा SBI मुहैया कराए। शीर्ष अदालत ने कहा था कि SBI द्वारा जानकारी मुहैया कराए जाने के बाद 13 मार्च तक चुनाव आयोग को इस बारे में जानकारी अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी होगी।

एसबीआई की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे पेश हुए और कहा कि एसबीआई ने गोपनीयता बरतने के लिए एक-एक बॉन्ड के बारे में मैचिंग का डाटा नहीं रखा है और उसे मिलान करने में 30 जून तक का वक्त लगेगा। डोनर का डिटेल और जिसने उसे भुनाया इसका डिटेल अलग-अलग शीट में है। अदालत के आदेश के तहत इसे मिलान करने में वक्त लगेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे आदेश के तहत एसबीआई को इसे मिलान करने की जरूरत नहीं है। आप सीधे जानकारी दें।

चीफ जस्टिस ने कहा कि चूंकि एक-एक परचेजर का केवाईसी हो रखा है और बैंक के पास राजनीतिक पार्टियों का खाता है और किस पार्टी ने कितना भुनाया है इसका डिटेल है। कोर्ट ने कहा कि हमने जो आदेश दिया था उसमें मैचिंग (मिलान) करने के लिए नहीं कहा था। हमने आपको कहा था कि डोनर और राजनीतिक पार्टियों के डिटेल पेश करें। ऐसे में आपने जिस आधार पर वक्त मांगा है वह हमारे आदेश में नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में एसबीआई के वकील साल्वे ने इस बात को स्वीकार किया कि एसबीआई के पास बॉन्ड के परचेजर का डिटेल है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि हमारा आदेश 15 फरवरी का था। 11 मार्च को सुनवाई के रोज 26 दिन बीत गए। आपने मैचिंग यानी मिलान के लिए 26 दिन में क्या किया। आपने इस बारे में आवेदन में क्यों नहीं लिखा कि क्या किया। अदालत ने कहा कि SBI से कहा गया है कि वह इलेक्टोरल बॉन्ड के खरीद का डिटेल और खरीददार का डिटेल SBI के पास है। साथ ही SBI के पास राजनीतिक पार्टियों द्वारा इसे भुनाए जाने का डिटेल भी है। जस्टिस खन्ना ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों के डिटेल हैं कि कितने बॉन्ड किसने भुनाए।

कोर्ट ने कहा कि जो जानकारी एसबीआई से मांगी गई है वह उसके पास उपलब्ध है ऐसे में वह डिटेल 12 मार्च तक पेश करे। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि वह 15 मार्च को शाम पांच बजे तक इलेक्टोरल बॉन्ड के बारे में जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड करे। सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी को इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को खारिज कर दिया था। साथ ही इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को निर्देश दिया था कि वह छह साल से चल रही इस स्कीम के तहत डोनेशन देने वालों के नामों की जानकारी चुनाव आयोग को छह मार्च तक मुहैया कराएं।

शीर्ष अदालत ने कहा कि SBI की उस अर्जी को खारिज की जाती है जिसमें उसने जानकारी देने के लिए 30 जून तक का वक्त मांगा था और SBI को निर्देश दिया जाता है कि वह 12 मार्च 2024 तक सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक इलेक्टोरल बॉन्ड का डिटेल चुनाव आयोग के सामने पेश करें।

CAA के तहत नागरिकता के लिए कैसे किया जा सकता है आवेदन?

आज हम आपको बताएंगे कि CAA के तहत नागरिकता के लिए आवेदन कैसे किया जा सकता है! भारत सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 यानी सीएए को देशभर में लागू कर दिया गया है। भारत सरकार ने इसके लिए अनिवार्य नियमों को अधिसूचित कर दिया। खबर लिखे जाने तक नियमों की डिटेल जानकारी नहीं आने से अभी नियमों में स्पष्टता नहीं है कि देश की नागरिकता पाने के लिए भारत के तीन पड़ोसी मुल्कों से भारत आने वाले छह अल्पसंख्यक कम्युनिटी के नागरिकों को भारत की नागरिकता कैसे मिलेगी। सीएए लागू करने के लिए हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी यह घोषणा की थी कि देश में आम चुनावों की घोषणा होने से पहले सरकार देशभर में सीएए लागू करने की घोषणा कर देगी। इसके लिए सोमवार शाम को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर सीएए लागू करने के संबंध में मैसेज पोस्ट करके इसकी जानकारी दी। जिसमें कहा गया कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 सीएए-2019 के लिए नियमों को आज नोटिफाई कर दिया जाएगा। यह नियम भारतीय नागरिकता पाने वाले पात्रों को आवेदन करने में सक्षम बनाएंगे। इसके लिए प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी। सीएए के तहत इन तीन पड़ोसी मुल्कों से भारत में शरण लेकर रह रहे हिंदू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी को भारत की नागरिकता देने का काम करेगा। इसमें गैर-मुस्लिमों को देश की नागरिकता दी जाएगी। नागरिकता लेने के लिए भारत सरकार ने एक पोर्टल तैयार किया है। जिसके माध्यम से ऐसे तमाम शरणार्थी देश की नागरिकता लेने के लिए आवेदन कर सकेंगे।यानी सीएए के तहत जो भी भारतीय नागरिकता पाने के लिए पात्र होंगे। उन्हें इसके लिए किसी ऑफिस में नहीं जाना होगा, बल्कि सबकुछ ऑनलाइन तरीके से किया जाएगा।

सीएए किसके लिए जरूरी होगा? इसके जवाब में अधिकारियों ने बताया कि सीएए भारत के तीन पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक आधार पर प्रताड़ित भारत आए फिलहाल उन शरणार्थियों के लिए है। जो की 31 दिसंबर 2014 से पहले तक भारत में शरण लेने के लिए आ चुके हैं। यह कानून उन विदेशी नागरिकों को भारत की नागरिकता देने का अधिकार देने वाला कानून है। सीएए के तहत इन तीन पड़ोसी मुल्कों से भारत में शरण लेकर रह रहे हिंदू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी को भारत की नागरिकता देने का काम करेगा। इसमें गैर-मुस्लिमों को देश की नागरिकता दी जाएगी। नागरिकता लेने के लिए भारत सरकार ने एक पोर्टल तैयार किया है। जिसके माध्यम से ऐसे तमाम शरणार्थी देश की नागरिकता लेने के लिए आवेदन कर सकेंगे।

सीएए की अधिसूचना जारी होते ही बीजेपी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से पोस्ट किया- जो कहा सो किया… मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून की अधिसूचना जारी कर पूरी की अपनी गारंटी। इसमें टाइम लाइन भी दी गई है। जिसमें कहा है कि सीएए 1955 में बदलाव के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 में संसद में पेश किया गया। यह 10 दिसंबर 2019 को लोकसभा और इसके अगले दिन राज्यसभा में पास हुआ। 12 दिसंबर 2019 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही सीएए कानून बना और आज केंद्र सरकार ने सीएए की अधिसूचना जारी कर दी। यह नियम भारतीय नागरिकता पाने वाले पात्रों को आवेदन करने में सक्षम बनाएंगे। इसके लिए प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी। यानी सीएए के तहत जो भी भारतीय नागरिकता पाने के लिए पात्र होंगे। उन्हें इसके लिए किसी ऑफिस में नहीं जाना होगा, बल्कि सबकुछ ऑनलाइन तरीके से किया जाएगा।दरअसल सीएए बीजेपी का चुनावी वादा भी रहा है। बीजेपी को पश्चिम बंगाल में इससे फायदे की उम्मीद है। इससे पश्चिम बंगाल के मतुआ समुदाय को नागरिकता मिलेगी और वहां मतुआ समुदाय की 10 लाख से ज्यादा आबादी है। 2019 में बीजेपी में मतुआ समुदाय से वादा किया था कि सीएए से उन्हें नागरिकता दी जाएगी। लेकिन यह अभी तक लागू नहीं हो पाया था।

चुनाव से ठीक पहले इसकी अधिसूचना से बीजेपी को उम्मीद है कि मतुआ समुदाय उनके साथ रहेगा। पश्चिम बंगाल के नादिया, उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों की कम से कम चार लोकसभा सीट में यह समुदाय जीत-हार तय कर सकता है। देश की नागरिकता दी जाएगी। नागरिकता लेने के लिए भारत सरकार ने एक पोर्टल तैयार किया है। जिसके माध्यम से ऐसे तमाम शरणार्थी देश की नागरिकता लेने के लिए आवेदन कर सकेंगे।बंगाल से आए मुस्लिम इसके विरोध में हैं और पश्चिम बंगाल में उनकी भी बड़ी संख्या है। माना जा रहा है कि सीएए लागू होने के बाद वोटों को ध्रुवीकरण हो सकता है।

देश में निष्पक्ष चुनाव कराए जाने के लिए क्या बोला चुनाव आयोग?

हाल ही में चुनाव आयोग ने देश में निष्पक्ष चुनाव कराए जाने के लिए निर्देश दे दिए हैं! देश में होने वाले लोकसभा चुनावों को निष्पक्ष, स्वतंत्र, भयमुक्त, बिना दबाव और प्रलोभन मुक्त कराने के लिए देशभर में 2150 आब्जर्वर नियुक्त किए जाएंगे। इनमें 900 जनरल, 800 एक्सपेंडिचर और 459 पुलिस ऑब्जर्वर होंगे। इन सभी के साथ भारतीय चुनाव आयोग ने सोमवार को मीटिंग की। जिसमें इन्हें बताया गया कि उन्हें अपनी-अपनी लोकसभा और विधानसभा सीटों पर किस तरह से काम करना होगा।पर्यवेक्षकों की ब्रीफिंग में नौ पाइंट सेट किए गए। जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने तमाम पर्यवेक्षकों को उनकी महत्वपूर्ण भूमिका याद दिलाते हुए कहा कि आयोग के प्रतिनिधियों के रूप में तमाम पर्यवेक्षकों से यह अपेक्षा की जाती है कि वह पेशेवर तरीके से काम करेंगे। वह तमाम उम्मीदवारों समेत सभी हितधारकों के लिए आसानी से उपलब्ध रहेंगे। तमाम पर्यवेक्षकों को अपने-अपने लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की भौगोलिक जानकारी होने के साथ-साथ क्राइम की दृष्टि से भी इनकी संवेदनशीलता की तमाम जानकारी होनी चाहिए। आयोग ने अपने नौ पाइंट के निर्देश में पर्यवेक्षकों को यह तमाम आदेश दिए हैं।

तमाम पर्यवेक्षक पूरी चुनाव प्रक्रिया के दौरान अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों की सीमाओं के अंदर फिजिकली मौजूद रहेंगे। ऐसा नहीं कि वह अपने इलाके में ऑफिस में बैठकर ही काम करें, बल्कि उन्हें शारीरिक रूप से इलाके में मौजूदगी दर्ज करानी होगी। इसके लिए उन पर जीपीएस के माध्यम से नजर भी रखी जााएगी। तमाम पर्यवेक्षकों की गाड़ियों में जीपीएसी ट्रेकिंग सिस्टम लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। सभी पर्यवेक्षक अपने मोबाइल फोन और लैंडलाइन नंबर, ईमेल एड्रेस और रहने के स्थान आदि की जानकारी अपने-अपने सीईओ की वेबसाइट पर देंगे। इसका मीडिया के माध्यम से प्रचार भी करेंगे। ताकि कोई भी शख्स उनके पास तक आसानी से अपनी पहुंच बना सके।

सभी पर्यवेक्षक सदैव अपने फोन और ईमेल पर आसानी से उपलब्ध रहेंगे। ताकि जरूरत पड़ने पर अगर उन्हें कोई भी उम्मीदवार, राजनीतिक दल, सामान्य जनता, चुनावी डयूटी में लगे कर्मचारी या अन्य कोई कॉल करें तो वह उसे अटेंड कर उसका तुरंत जवाब दें। पर्यवेक्षकों के लिए जो भी सिक्योरिटी और इन्फॉर्मेशन अधिकारी लगाए जाएंगे। डीईओ और अन्य अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह ईमानदार और निरपेक्ष होने चाहिए। उन्हें उनके कर्तव्यों और डयूटी के प्रति निष्ठा बरतने के बारे में उचित जानकारी दी जाए। तमाम पर्यवेक्षकों को आदेश दिए गए हैं कि वह अपने-अपने कंफर्ट जोन से बाहर आकर सक्रिय रूप से चुनावी प्रक्रिया के लिए कार्य करेंगे। पर्यवेक्षकों के लिए भी जरूरी है कि वह भी अपनी डयूटी पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ करेंगे। इनमें जहां-जहां भी बलों की तैनाती करनी है या फिर अन्य कार्य। वह सब निष्पक्ष रूप से करने होंगे। राजनीतिक दलों द्वारा सुविधा पोर्टल का उपयोग और सभी उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के लिए समान अवसर भी सुनिश्चित करने की प्रक्रिया में पूरी तरह से संतुष्टि होनी चाहिए।

पर्यवेक्षकों को आदेश दिए जाते हैं कि वह अधिक से अधिक संवेदनशील मतदान केंद्रों और कमजोर क्षेत्रों का दौरा करेंगे। इन इलाकों में रहने वाले लोगों से बात कर उनकी समस्या का समाधान करना होगा। पर्यवेक्षकों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि डीईओ और आरओ द्वारा उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की जो मीटिंग बुलाई जा रही हैं। क्या वह ठीक तरीके से चल रही हैं। उनमें उनकी समस्याओं और शिकायतों को ठीक से सुनकर उनके निपटारे के लिए काम किया भी जा रहा है या उसमें कोई लापरवाही बरती जा रही है।

जिस दिन मतदान होगा, उस दिन तमाम पर्यवेक्षक मतदान होने के दौरान अधिक से अधिक मतदान केंद्रों का दौरा करेंगे। वह नियमित रूप से इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि पोलिंग स्टेशनों के अंदर कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं हो रही है।सभी पर्यवेक्षक अपने मोबाइल फोन और लैंडलाइन नंबर, ईमेल एड्रेस और रहने के स्थान आदि की जानकारी अपने-अपने सीईओ की वेबसाइट पर देंगे। इसका मीडिया के माध्यम से प्रचार भी करेंगे। ताकि कोई भी शख्स उनके पास तक आसानी से अपनी पहुंच बना सके। वहां स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से मतदान हो रहा है या नहीं। पर्यवेक्षकों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जहां-जहां केंद्रीय और राज्य पुलिस बलों की तैनाती की जा रही है। क्या उनका वहां सही और निष्पक्ष तरीके से उपयोग किया भी जा रहा है या नहीं। उनकी तैनाती से किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार का पक्ष तो नहीं लिया जा रहा है।

आखिर कैसे पाई जाएगी भारत की नागरिकता? जानिए क्या है CAA?

आज हम आपको बताएंगे कि भारत की नागरिकता कैसे पाई जा सकती है! तथा CAA क्या है! पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में रहने वाले हिंदू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी धर्म के जो विदेशी नागरिक इन देशों से धार्मिक आधार पर प्रताड़ित होकर 31 दिसंबर, 2014 तक भारत में शरण लेने के लिए आ चुके हैं। उनके लिए भारत की नागरिकता लेने के लिए सोमवार को भारत सरकार ने नियमों को नोटिफाई कर दिया। इसके तहत भारत की नागरिकता लेने के लिए सारी प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी। कुछ भी ऑफलाइन नहीं होगा। यह सिस्टम तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा। नागरिकता लेने वाले नियम काफी आसान बनाए गए हैं। जिससे की नागरिकता लेने वाले आधिकारिक पात्रों को कोई परेशानी ना होने पाए। इसमें किसी तरह के दस्तावेज नहीं मांगे गए हैं, केवल जानकारियां मांगी गई हैं। मांगी गई जानकारी में अगर आवेदक के पास कोई दस्तावेज है तो वह इसकी जानकारी दे सकता है। नियमों के तहत भारत की नागरिकता लेने वाले विदेशियों को अपना नाम, माता-पिता का नाम, भारत में कब से रह रहे हैं और कहां, भारत में शरण लेने के लिए कब प्रवेश किया, कौन से देश से आए हैं, जिस देश से आए हैं। वहां कहां रह रहे थे। उसका राज्य, जिला और तहसील, जब से भारत में रह रहे हैं। तब से अब तक का भारत में रहने की तमाम एड्रेस की डिटेल, मेल-फीमेल, भारत में आने के बाद क्या काम कर रहे हैं, अगर नौकरी कर रहे हैं तो कंपनी या जहां नौकरी कर रहे हैं उसका एड्रेस। शरीर पर पहचान का कोई निशान, जिस देश से आए हैं। उस देश की डिटेल देने समेत यह भी बताना होगा कि आवेदक हिंदू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी धर्म में से किस से संबंध रखता है। अगर पासपोर्ट और वीजा की भी कोई डिटेल है तो वह भी देनी होगी।

39 पेज के इस नोटिफिकेशन में सरकार ने बैचलर और शादीशुदा के लिए अलग-अलग फॉर्म भरने की व्यवस्था की है। इसमें इन तीन पड़ोसी मुल्क से आए विदेशी ने भारत आकर किसी भारतीय से शादी कर ली है तो इसके लिए उस भारतीय नागरिक की तमाम डिटेल देने समेत अलग से फॉर्म भरना होगा। जिसमें जिस भारतीय मेल या फीमेल से शादी की है। उसके नाम और रहने समेत पहचान की तमाम जानकारी होनी चाहिए। बच्चों के लिए अलग से फॉर्म दिया गया है।

भारत की नागरिकता लेने वालों में से अगर किसी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड है तो इसकी जानकारी भी फॉर्म भरकर देनी होगी। इसमें किस तरह का अपराध किया है और उसका अब क्या स्टेटस है। यह तमाम जानकारी देनी होगी। इससे पहले भी जिस देश से आए हैं। वहां वह किस-किस तरह की गतिविधि में शामिल रहे। यह भी फॉर्म में भरना होगा। इसमें अगर सरकार को लगेगा कि ऐसे किसी शख्स को भारत की नागरिकता देने से खतरा हो सकता है तो ऐसे पात्रों के बारे में विचार किया जा सकता है।

भारत की नागरिकता पाने के लिए जो भी फॉर्म भरे जाएंगे। उनमें शेड्यूल-1ए के तहत नौ तरह के दस्तावेज मांगे गए हैं। शेड्यूल-बी के तहत 20 तरह के और शेड्यूल-1सी के तहत एफिडेविट देना होगा। इन तमाम शेड्यूल के तहत मांगे गए दस्तावेज सामान्य जानकारियों वाले मांगे गए हैं। किसी में भी ऐसा कोई दस्तावेज नहीं मांगा गया है। जिसे पूरा करने में आवेदक को कोई परेशानी सामने आए। इसमें अगर कोई जानकारी आवेदक के पास नहीं है तो वह उसमें उसका कारण बता सकता है। इसमें जिस देश से आए हैं। वहां का पासपोर्ट, रेजिडेंशल परमिट, बर्थ सर्टिफिकेट, स्कूल सर्टिफिकेट, लाइसेंस, अपना घर, जमीन या किराए के घर से संबंधित कोई दस्तावेज, पहचान साबित करने वाला कोई दस्तावेज, भारत में आने का दिन, भारत में आने के लिए वीजा या इमिग्रेशन स्टैंप समेत कई अन्य जानकारियां मांगी गई हैं।

भारत की नागरिकता पाने के लिए जो भी आवेदक इसमें आवेदन करेंगे। उसमें भारत सरकार की संतुष्टि होने के बाद उन्हें डिजिटल सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। अगर आवेदक चाहेगा तो उन्हें हार्ड कॉपी भी दी जा सकेगी। लेकिन सारा काम ऑनलाइन ही किया जाएगा। भारत की नागरिकता पाने वालों में से सभी को इस बात की शपथ लेने वाला फॉर्म भी भरना होगा कि जो जानकारी भी उन्होंने दी है। वह सही हैं। अगर उसमें कहीं कोई झूठ या धोखाधड़ी पाई गई तो ऐसे पात्रों की नागरिकता वाला फार्म कैंसल भी किया जा सकता है।

क्या सामने आएगी कांग्रेस की दूसरी सूची? इस बार क्या हो सकता है परिवर्तन?

आने वाले समय में कांग्रेस की दूसरी सूची भी आ सकती है और आज हम आपको बताएंगे कि उसमें क्या परिवर्तन हो सकता है! लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होने से ठीक पहले कांग्रेस नेतृत्व अपनी दूसरी कैंडिडेट लिस्ट को लेकर तैयारी में जुट गया है। इसी को लेकर दिल्ली स्थिति पार्टी मुख्यालय में पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई। इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और समिति में शामिल कई अन्य नेताओं, संबंधित राज्यों के प्रभारी शामिल हुए। जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड, राजस्थान और कुछ अन्य राज्यों के लिए उम्मीदवारों के नामों पर मुहर लगाने के लिए ये बैठक हुई। कांग्रेस केंद्रीय चुनाव समिति ये दूसरी बैठक थी। सूत्रों का कहना है कि लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवारों की दूसरी सूची अगले एक-दो दिन के भीतर जारी हो सकती है। कांग्रेस ने शुक्रवार को ही 39 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की थी। इसमें पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई वरिष्ठ नेताओं के नाम शामिल थे। राहुल गांधी एक बार फिर केरल की वायनाड सीट से चुनाव लड़ेंगे।

सीईसी ने लोकसभा चुनाव के लिए बीते गुरुवार को बैठक की थी। इसमें छत्तीसगढ़, केरल समेत कई अन्य राज्यों की 39 सीट के लिए उम्मीदवारों के नाम पर मुहर लगाई थी। सीईसी की बैठक में राज्य के लिए गठित विभिन्न स्कीनिंग कमेटी की ओर से भेजे गए नामों में से उम्मीदवारों के नाम पर मुहर लगाई जाती है। कांग्रेस सीईसी की दूसरी बैठक में लोकसभा चुनाव के वास्ते सोमवार को उत्तराखंड, राजस्थान और कुछ अन्य राज्यों के लिए उम्मीदवारों के नामों पर मुहर लगाने को लेकर मंथन किया। कांग्रेस के साथ-साथ सोमवार को ही बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति की भी बैठक हुई। माना जा रहा कि बीजेपी भी जल्द उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट जारी कर सकती है। इसी को लेकर दिल्ली स्थिति पार्टी हेडक्वार्टर पर चुनाव समिति की बैठक हुई। इसमें पीएम मोदी, अमित शाह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत पार्टी के दिग्गज नेता शामिल हुए। इससे पहले बीजेपी ने भी 195 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी। बता दे कि हाल ही में लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारी की तस्वीर साफ करते हुए कांग्रेस ने पार्टी की पहली लिस्ट जारी कर दी है। कांग्रेस ने अपनी पहली लिस्ट में 39 उम्मीदवारों का ऐलान किया है। इन लिस्ट के अनुसार कांग्रेस नेता राहुल गांधी फिर से वायनाड से चुनाव लड़ने वाले हैं। वहीं छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल राजनांदगांव की सीट से चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस की पहली लिस्ट में उत्तर प्रदेश के किसी भी प्रत्याशियों का नाम नहीं है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कांग्रेस दूसरी लिस्ट में उन उम्मीदवारों का ऐलान कर सकती है।कांग्रेस ने पहली लिस्ट में जिन 39 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है। उसमें 15 प्रत्याशी सामान्य वर्ग के हैं। जबकि बचे हुए 24 प्रत्याशी एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के हैं।

कांग्रेस की पहली लिस्ट में 12 उम्मीदवार 50 साल से कम उम्र के हैं। आठ उम्मीदवार 50 से 60 वर्ष के बीच के और 12 उम्मीदवार 61 से 70 साल के बीच के जबकि सात उम्मीदवार 71 से 76 साल के बीच के हैं।मुख्य विपक्षी दल के उम्मीदवारों की पहली सूची में सबसे अधिक 16 उम्मीदवार केरल से हैं। कांग्रेस केरल की कुल 20 लोकसभा सीट में 16 पर चुनाव लड़ेगी। चार सीट पर सहयोगी दल चुनाव लड़ेंगे।कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ की छह, कर्नाटक की सात, तेलंगाना की चार, मेघालय की दो तथा लक्षद्वीप, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा की एक-एक सीट के लिए उम्मीदवार घोषित किए हैं।

पार्टी ने केरल में अपने सभी 15 मौजूदा लोकसभा सदस्यों को फिर से चुनावी मैदान में उतारा है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ की कोरबा सीट से सांसद ज्योत्सना महंत और कर्नाटक की बेंगलुरु ग्रामीण सीट से मौजूदा सांसद डीके सुरेश पर फिर से विश्वास जताया है।कांग्रेस केंद्रीय चुनाव समिति ये दूसरी बैठक थी। सूत्रों का कहना है कि लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवारों की दूसरी सूची अगले एक-दो दिन के भीतर जारी हो सकती है। कांग्रेस ने शुक्रवार को ही 39 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की थी। छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल राजनांदगांव की सीट से चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस की पहली लिस्ट में उत्तर प्रदेश के किसी भी प्रत्याशियों का नाम नहीं है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कांग्रेस दूसरी लिस्ट में उन उम्मीदवारों का ऐलान कर सकती है।कांग्रेस ने पहली लिस्ट में जिन 39 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है।इसमें पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई वरिष्ठ नेताओं के नाम शामिल थे।भारतीय जनता पार्टी भाजपा ने कुछ दिन पहले ही लोकसभा चुनाव के लिए 195 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी।

सुप्रीम कोर्ट सीएए नियमों पर रोक लगाने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा.

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क्या सीएए को देश में निलंबित किया जाना चाहिए, सुप्रीम कोर्ट में मामला दायर किया जाना चाहिए, सुनवाई कब हो सकती है, साढ़े चार साल पहले संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसकी जानकारी दी थी. देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी CAA बिल को मंजूरी दे दी. लेकिन इतने समय तक सीएए लागू करने को लेकर कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है. नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को संसद से पारित होने और कानून बनने के बाद भी इसे लागू होने में लगभग साढ़े चार साल लग गए। सोमवार को भारत में CAA लागू हो गया और विपक्ष एक बार फिर इसके विरोध में उतर आया है. इस बार सीएए पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला दाखिल किया गया है. सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई 19 मार्च को करेगा.

वकील कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच के सामने यह मामला उठाया. उसके बाद, न्यायाधीश ने कहा, मामला अगले सप्ताह सूचीबद्ध किया गया है। बता दें कि 2019 से अब तक इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सौ से ज्यादा याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं.

दूसरी बार सत्ता में आने के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने 11 दिसंबर 2019 को सीएए पारित किया था. उस कानून के मुताबिक, अगर बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे मुस्लिम देशों के धार्मिक अल्पसंख्यक धार्मिक उत्पीड़न के कारण उस देश में शरण मांगते हैं, तो भारत उन्हें शरण देगा। लेकिन जबकि सीएए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाइयों को नागरिकता प्रदान करता है, इसमें मुसलमानों का उल्लेख नहीं है। करीब साढ़े चार साल पहले संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी सीएए बिल पर अपनी सहमति दे दी थी. लेकिन इतने समय तक सीएए लागू करने को लेकर कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है. पिछले सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीएए लागू करने के लिए अधिसूचना जारी की थी.

विपक्ष का दावा है कि सीएए ‘असंवैधानिक’ और ‘भेदभावपूर्ण’ है. उनके मुताबिक इस कानून में सिर्फ छह समुदायों का ही जिक्र क्यों है? केंद्र सरकार ने मुस्लिम समुदाय को बाहर क्यों रखा? विरोधियों के मुताबिक भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है. वहां ऐसे कानून लोगों के बीच ‘भेदभाव’ पैदा कर रहे हैं. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शुरू से ही इस कानून का विरोध कर रही हैं। उनके शब्दों में, ”एनआरसी का सीएए से रिश्ता है. मैं रंगभेदी सीएए से सहमत नहीं हूं.” हालांकि केंद्र सरकार का दावा है, सीएए और एनआरसी बिल्कुल अलग हैं. दोनों चीजों के बीच कोई संबंध नहीं है. सीएए केवल नागरिकता देने के लिए बनाया गया है। इससे किसी भी भारतीय की नागरिकता रद्द नहीं होगी।” उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा संशोधित नागरिकता कानून (सीसीए) लागू करने की अधिसूचना जारी करने के बाद आपत्ति जताई। उन्होंने पूछा कि केंद्र भारत के नागरिकों को वंचित कर पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से आए लोगों के हितों की रक्षा के लिए इतना सक्रिय क्यों है।

इस बार उन तीन देशों के हिंदू और सिख शरणार्थियों ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (यूपी) नेता अरविंद केजरीवाल की टिप्पणी का विरोध करना शुरू कर दिया, उन्होंने केजरीवाल से तत्काल माफी की मांग की। गुरुवार को दिल्ली में उनके आवास के सामने हजारों हिंदुओं और सिखों ने विरोध प्रदर्शन किया. शुक्रवार को भी विरोध प्रदर्शन हुआ. दूसरी बार सत्ता में आने के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने 11 दिसंबर 2019 को सीएए पारित किया था. उस कानून के मुताबिक, अगर बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे मुस्लिम देशों के धार्मिक अल्पसंख्यक धार्मिक उत्पीड़न के कारण उस देश में शरण मांगते हैं, तो भारत उन्हें शरण देगा। पिछले सोमवार (11 मार्च) को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीएए लागू करने के लिए अधिसूचना जारी की थी. और उसके बाद विवाद खड़ा हो गया.

बुधवार को केजरीवाल ने सीएए को लेकर मोदी सरकार पर ”वोट बैंक की राजनीति” करने का आरोप लगाया। उन्हें डर है कि इसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से शरणार्थियों का आना शुरू हो जाएगा. परिणामस्वरूप, भारतीय नागरिकों के लिए आवास और आजीविका का संकट पैदा हो जाएगा। इस टिप्पणी के विरोध में गुरुवार को उनके घर के सामने प्रदर्शन किया गया. इसके जवाब में केजरी एक्स ने हैंडल पर लिखा, ”आज कुछ पाकिस्तानियों ने मेरे घर के सामने विरोध प्रदर्शन किया और हंगामा किया. दिल्ली पुलिस ने उन्हें पूरा सहयोग और सुरक्षा दी है. बीजेपी ने समर्थन दिया है. उनमें दिल्ली की जनता द्वारा चुने गए मुख्यमंत्री से माफी की मांग करने की हिम्मत है!”

आईसीसी टी20 विश्व कप 2024 के लिए और अधिक टिकट जारी करने की तैयारी में है.

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टी20 विश्व कप के टिकटों की मांग बढ़ रही है, दर्शकों के अनुरोधों को देखते हुए, यह निर्णय लिया गया है कि ICCT-W20 विश्व कप शुरू होने में अभी देर है। लेकिन अब टिकटों की मांग बढ़ती जा रही है. दर्शकों की अपील के बाद आईसीसी को फैसला लेना पड़ा. आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप के और टिकट जारी करने जा रहा है. प्रतियोगिता जून में शुरू होगी. लेकिन अब टिकटों की मांग बढ़ती जा रही है. दर्शकों की अपील के बाद आईसीसी को फैसला लेना पड़ा.

इस बार वर्ल्ड कप वेस्टइंडीज और अमेरिका में होगा. इससे पहले आईसीसी ने 38 मैचों के टिकट जारी किए थे. उन्होंने शुक्रवार को 13 और मैचों के टिकट जारी करने का फैसला किया है. टिकटों की बिक्री अगले मंगलवार को भारतीय समयानुसार रात 8:30 बजे से शुरू होगी. दर्शक आईसीसी की वेबसाइट पर जाकर उन टिकटों को खरीद सकते हैं।

आईसीसी के ‘हेड ऑफ इवेंट्स’ क्रिस टेटली ने कहा, ”हमने विश्व कप के प्रायोजकों से बात करने के बाद यह फैसला लिया है. 13 और मैचों के टिकट जारी किए जा रहे हैं. परिणामस्वरूप, दर्शक 55 मैचों में से 51 मैचों के लिए टिकट खरीद सकते हैं। टिकटों के लिए 30 लाख से अधिक आवेदन पहले ही प्राप्त हो चुके हैं। वर्ल्ड कप की इस मांग को देखकर आईसीसी खुश है. जो नए मैचों के टिकट जारी किए गए हैं उनमें भारत बनाम आयरलैंड मैच और दो सेमीफाइनल शामिल हैं।

टी20 वर्ल्ड कप 1 जून से शुरू होगा. 29 जून तक जारी रहेगा. भारत और पाकिस्तान एक ही ग्रुप में हैं. अमेरिकी मैदान पर इनका आमना-सामना होगा. इस मैच के लिए अलग स्टेडियम बनाया जा रहा है.मैथ्यू वेड ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है. वह आईपीएल में गुजरात टाइटंस के लिए खेले थे. लेकिन उन्होंने कहा कि वह पहले दो मैचों में नहीं खेलेंगे. वेड ऑस्ट्रेलिया में घरेलू क्रिकेट में अपने राज्य के लिए खेलते हैं। वह वहां रेड बॉल मैच खेलने के बाद संन्यास ले लेंगे। लेकिन सफेद गेंद से क्रिकेट खेलूंगा. तो वह टी20 वर्ल्ड कप में नजर आ सकते हैं.

36 टेस्ट खेल चुके वेड ने शुक्रवार को कहा, “टेस्ट क्रिकेट की अपनी चुनौतियां हैं।” मुझे बहुत मज़ा आया। लेकिन अब मैं सिर्फ सफेद गेंद का क्रिकेट खेलना चाहता हूं।’ मेरा लक्ष्य ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलना है. मैं उसे प्राथमिकता दूँगा. मैं टेस्ट नहीं खेलकर सफेद गेंद क्रिकेट में मजबूत रहूंगा।’ मैं जिम में अधिक समय बिता सकता हूं. मैं लंबे समय तक सफेद गेंद का क्रिकेट खेल सकता हूं।’ इसलिए मैं टेस्ट से संन्यास ले रहा हूं।”

वेड को 2021 के बाद ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीम में जगह नहीं मिली. 36 वर्षीय वेड ने 36 टेस्ट मैचों में 1613 रन बनाए। लाल गेंद क्रिकेट में उनके नाम चार अंतरराष्ट्रीय शतक हैं। वनडे क्रिकेट में भी वेड को मौका नहीं मिलता है. हालांकि, टी20 में वह अब भी ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलते हैं. टी20 वर्ल्ड कप में खेलने की संभावना है. आगामी आईपीएल में गुजरात का पहला मैच 24 मार्च को मुंबई इंडियंस के खिलाफ है। दूसरा मैच 26 मार्च को चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ है. आशावादियों को प्रतियोगिता की दो सबसे सफल टीमों के खिलाफ वेड नहीं मिलेगा। वह तस्मानिया के लिए शेफील्ड शील्ड फाइनल खेलेंगे। वेड 21 मार्च से 25 मार्च तक व्यस्त रहेंगे. इसके बाद वह आईपीएल फ्रेंचाइजी कैंप में शामिल होंगे. तस्मानिया के कोच जेफ वॉन ने कहा, “हमें खुशी है कि वेड ने घरेलू रेड बॉल क्रिकेट फाइनल में अपना दबदबा बनाया है।” उन्होंने आईपीएल फ्रेंचाइजी से बात करने का फैसला किया. हमें खुशी है, गुजरात के अधिकारियों ने उन्हें अनुमति दे दी है.’ वेड हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं।

पिछले वर्ल्ड कप के बाद बाबर आजम दूर चले गए. इसके बाद शाहीन अफरीदी को टी20 टीम की जिम्मेदारी दी गई. चार महीने के अंदर उन्हें यह जिम्मेदारी मिलने वाली है. पाकिस्तानी मीडिया सूत्रों के मुताबिक, शाहीन को टी20 वर्ल्ड कप से पहले हटा दिया जाएगा. सुनने में आ रहा है कि बाबर को दोबारा कमान सौंपी जा सकती है.

न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में पाकिस्तान 1-4 से हार गया. शाहीन ने उस सीरीज का नेतृत्व किया था. शाहीन की अगुवाई वाली लाहौर कलंदर्स ने इस साल के पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) में 10 मैचों में केवल एक गेम जीता है। तीन अंकों के साथ सबसे नीचे रही। इससे शाहीन की नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े होते हैं.

पाकिस्तानी वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, बाबर की बहाली हो सकती है. अगर वह नहीं माने तो मोहम्मद रिजवान को जिम्मेदारी दी जा सकती है. दोनों ने पीएसएल में अच्छा नेतृत्व किया है. रिजवान का मुल्तान शीर्ष पर और बाबर का पेशवा दूसरे स्थान पर रहा।