Wednesday, March 4, 2026
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हल्द्वानी हिंसा में अब तक क्या-क्या हुआ है?

आज हम आपको बताएंगे कि हल्द्वानी हिंसा में अब तक क्या-क्या हो गया है! उत्तराखंड का हल्द्वानी शहर हिंसा की आग में सुलग उठा। यहां बनभूलपुरा क्षेत्र में अवैध मदरसा तोड़े जाने के दौरान हिंसा भड़क उठी, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई है। यहां कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पांच हजार अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मामले के आरोपियों के खिलाफ रासुका लगाने की तैयारी है। सुरक्षा के लिहाज से हल्द्वानी शहर को 7 जोन में बांट दिया गया है। वहीं पूरे उत्तराखंड में अलर्ट जारी किया गया है। अधिकारियों ने यहां बताया कि हल्द्वानी में गुरुवार को हुई हिंसा के बाद हालात पर काबू पाने के लिए क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया गया है, जबकि दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं। बनभूलपुरा क्षेत्र में अवैध मदरसा तोड़े जाने के दौरान भड़की हिंसा में 6 लोगों की मौत हो गई है। पुलिस अधीक्षक हरबंस सिंह ने शुक्रवार को इस बात की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि एक पत्रकार समेत 7 घायलों का शहर के विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है। अस्पतालों में भर्ती कराए गए करीब 60 घायलों में से ज्यादातर को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। देहरादून, हरिद्वार, रामनगर, उधम सिंह नगर सभी जगह पुलिस को 24 घंटे अलर्ट पर रहने के साथ ही किसी भी ऐसी घटना से निपटने के लिए अलर्ट पर रहने के आदेश दिए गए हैं। डीएम वंदना सिंह ने कहा कि पूरी प्लानिंग के तहत हिंसा की घटना को अंजाम दिया गया। यहां कोई इंटेलिजेंस फेल्योर का मामला नहीं है। प्लानिंग के तहत कानून को चुनौती दी गई। अतिक्रमण हटाए जाने के आधे घंटे के भीतर उपद्रवियों की भारी भीड़ वहां पहुंची। प्रशासन और पुलिस की टीम को निशाना बनाकर हमला किया गया। देसी हथियारों से पुलिस पर फायरिंग की गई। पेट्रोल बम से हमला कर गाड़ियों को जलाया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यहां पहुंचकर खुद हालात का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश पर अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासन और पुलिस की टीम पर ‘सुनियोजित तरीके से हमला किया गया।’ उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगा और जिन लोगों ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया है और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्य सचिव और डीजीपी ने स्पष्ट किया कि आरोपियों पर NSA लगेगा। मजिस्ट्रेट और अधिकारियों को अग्रिम आदेश तक के लिए तत्काल तैनाती के आदेश जारी कर दिए गए हैं। पुलिस ने 4 उपद्रवियों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में 10-15 उपद्रवियों की सक्रिय भूमिका सामने आ रही है, जिन्होंने लोगों को भड़काने का काम किया। हल्द्वानी में हालात का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि न्यायालय के आदेश पर अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासन और पुलिस की टीम पर ‘‘सुनियोजित तरीके से हमला किया गया।’’ उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगा और जिन लोगों ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया है और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी । मुख्यमंत्री ने कहा कि अराजक तत्वों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।

हल्द्वानी के वनभूलपुरा में हुई हिंसा के बाद वहां शांति और सुरक्षा व्यवस्था फिर से बहाल करने तथा दोबारा ऐसी स्थिति ना बने इस पर नज़र बनाए रखने के लिए हल्द्वानी शहर को सात जोनों में बांट दिया गया है। इसके लिए मजिस्ट्रेट और अधिकारियों को अग्रिम आदेश तक के लिए तत्काल तैनाती के आदेश जारी कर दिए गए हैं। वहीं हल्द्वानी में हुई हिंसा के बाद पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी किया गया है। देहरादून, हरिद्वार, रामनगर, उधम सिंह नगर सभी जगह पुलिस को 24 घंटे अलर्ट पर रहने के साथ ही किसी भी ऐसी घटना से निपटने के लिए अलर्ट पर रहने के आदेश दिए गए हैं।

इसके अलावा हल्द्वानी में हिंसा में शामिल लोगों को अब चिह्नित करके गिरफ्तार करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस ने उपद्रव, आगजनी, तोड़फोड़, सरकारी संपत्ति को नुकसान व सरकारी कार्य में व्यवधान आदि गंभीर धाराओं में तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए हैं।अतिक्रमण हटाए जाने के आधे घंटे के भीतर उपद्रवियों की भारी भीड़ वहां पहुंची। प्रशासन और पुलिस की टीम को निशाना बनाकर हमला किया गया। देसी हथियारों से पुलिस पर फायरिंग की गई। पेट्रोल बम से हमला कर गाड़ियों को जलाया गया। पुलिस ने चार उपद्रवियों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में 10-15 उपद्रवियों की सक्रिय भूमिका सामने आ रही है, जिन्होंने लोगों को भड़काने का काम किया।

आखिर हल्द्वानी का कैसे बदला लेंगे सीएम पुष्कर सिंह धामी?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि कम पुष्कर सिंह धामी हल्द्वानी का बदला कैसे लेंगे! उत्तराखंड की सरजमीं में उबाल है। देवभूमि की शांत वादियां सुलग उठी हैं। कुमाऊं की प्राकृतिक खूबसूरती में यहां का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले हल्द्वानी में बदनुमा दाग लगा है। यह शहर आजकल सुर्खियों में है। गुरुवार की शाम में कई घंटों तक यहां की सड़कों पर तांडव चला। हिंसा की लपट भड़क उठी, जिसमें कई जानें भी गईं। बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए। खाकी वर्दी से लेकर पत्रकारों की कलम तक तोड़ दी गई। इसके बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने खुद पहुंचकर लोगों को हौंसला बंधाया। अब सख्त रवैये की तैयारी है। पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुल्डोजर चलाकर जो नजीर पेश की है, उसी फॉर्म्युले को अब धामी सरकार हल्द्वानी में भी लागू करने की तैयारी में है। उत्तराखंड की धामी सरकार ने हल्द्वानी हिंसा को लेकर अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। आरोपियों की पहचान चालू कर दी गई है। सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। माहौल खराब करने के आरोपियों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उपद्रवियों पर रासुका लगाने की तैयारी है। यूपी में योगी आदित्यनाथ के बुल्डोजर ऐक्शन से नेताओं ने सबक लिया है। पुलिस के रवैये और समय लेने वाली भारतीय न्यायिक प्रक्रिया के कारण बुल्डोजर मॉडल त्वरित न्याय यानी इंस्टेंट जस्टिस का प्रतीक बन गया है।

हल्द्वानी के बनभूलपुरा में अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण के खिलाफ स्थानीय आबादी ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया। 5 से 6 घंटे तक जमकर हिंसा हुई। प्रशासन इधर लोगों से अपील करने और जांच में व्यस्त था तो वहीं दूसरी तरफ खाली पड़ी छतों पर पत्थर जुटा लिए गए। प्लास्टिक की बोतलों में पेट्रोल बम तैयार किए गए। इसके बाद ऐन वक्त पर हर छत और हर गली से हमला शुरू कर दिया गया। डीएम वंदना सिंह चौहान ने पूरे हमले का कच्चा चिट्ठा खोला है। उन्होंने इसे अचानक नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से किया गया हमला करार दिया।

उन्होंने बताया कि भीड़ का पहला हमला पत्थरों से किया गया। हमने उसे निष्क्रिय कर दिया तो दूसरी भीड़ हाथ में पेट्रोल बमों के साथ आई। उन्हें उसमें आग लगा-लगाकर फेंकी। इसके बाद उपद्रवियों ने थाना घेर लिया। थाने में मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस अधिकारी और मशीनरी थे, उन्हें बाहर नहीं निकलने दिया गया। उन पर पत्थरबाजी, पेट्रोल बमों से हमला किया गया। थाने के बाहर वाहनों को आग लगा दी गई। इस आगजनी में थाने के अंदर धुआं भर गया। डीएम ने बताया कि जिस निर्माण को लेकर कार्रवाई की गई, वो खाली प्रॉपर्टी है। इसमें दो स्ट्रक्चर हैं, ये न तो किसी धार्मिक संरचना के तौर पर रजिस्टर्ड हैं, न ही किसी प्रकार से मान्यता प्राप्त हैं। इस स्ट्रक्चर को कुछ लोग मदरसा कहते हैं, कुछ लोग पूर्व नमाज स्थल कहते हैं। लेकिन उसका विधिक रूप से कोई दस्तावेज नहीं है। उन्हें हमने खाली कराया। ओपन स्पेस ले लिया गया। फिर एक नोटिस स्ट्रक्चर पर चस्पा कराया क्योंकि कथित रूप से ये एरिया मलिक का बगीचा नाम से जाना जाता है। जबकि कागजों में ये नगर निगम के नजूल के रूप में दर्ज है। नोटिस में तीन दिन के अंदर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए।

दरअसल, 2017 में सत्ता संभालने के बाद योगी आदित्यनाथ ने कई अभियान चलाए। अपराधियों के एनकाउंटर और अवैध कब्जों पर बुलडोजर की कार्रवाई के बाद यूपी की राजनीति में हंगामा मच गया। योगी अपने विरोधियों के निशाने पर आ गए। हालांकि साल 2019 के दिसंबर महीने में देश में सीएए-एनआरसी कानून को लेकर हंगामा मच गया। यूपी में भी राजधानी लखनऊ से लेकर पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश हिंसा की चपेट में आ गया। मुस्लिम बहुल इलाकों में प्रदर्शन ने हिंसक रूप लिया तो फिर बाबा का बुल्डोजर अपना रंग दिखाने लगा। राजधानी लखनऊ में 19 दिसंबर की तारीख में हिंसक प्रदर्शन हुए। इसी दिन संभल भी जल उठा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद नाराज हुए और अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी और प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह को उपद्रवियों से सख्ती से निपटने के निर्देश दिए। सीएम योगी ने आम जन के जानमाल की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित करने को कहा। इसके साथ ही उपद्रवियों को चिह्नित कर कड़ी कार्रवाई की गई।

तोड़फोड़, आगजनी और पत्थरबाजी के आरोपियों की तस्वीरें वीडियो के आधार पर चौक-चौराहों पर लगवा दी गईं। योगी सरकार ने स्पष्ट आदेश दिया कि हर एक दंगाई की पहचान करके उसकी संपत्ति को नीलाम करके नुकसान की भरपाई की जाएगी। कहीं दुकानें सील की गईं तो कहीं इमारत। ऐसा ही मंजर जून 2022 में देखने को मिला, जब बीजेपी नेत्री नुपूर शर्मा की आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद कानपुर सहित यूपी में कई जगहों पर हिंसा हुई। पुलिस ने सख्ती से निपटना चालू किया और आरोपियों पर गैंगस्टर भी लगा।

हल्द्वानी में हिंसा के बाद अब पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। हल्द्वानी में बड़ा सच ऑपरेशन शुरू किया गया है। गुरुवार की शाम भड़की हिंसा के बाद प्रशासन की टीम में कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्य सचिव ऋतु रतूड़ी हल्द्वानी पहुंची थीं। उन्होंने इलाके का जायजा लिया। वहीं, डीजीपी का इस मामले में बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन के खिलाफ दंगों को भड़काया गया था। ऐसे तमाम दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ एनएसए लगाया जाएगा।

बीजेपी के लिए राज्यसभा में क्या बोल गए जयंत चौधरी?

हाल ही में जयंत चौधरी ने बीजेपी के लिए राज्यसभा में एक बयान दे दिया है! आज लोकसभा में राम मंदिर के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा चल रही थी तो राज्यसभा में घनघोर हंगामा हो रहा था। संसद के उच्च सदन में लोकसभा की तरह अपनी कार्यवाही धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा से शुरू नहीं की बल्कि वहां सभापति ने जयंत चौधरी के आग्रह पर उन्हें दो शब्द रखने का मौका दिया। चौधरी ने शुक्रवार को अपने दादा और देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा से खुश होकर सदन में अपनी बात रखने का आग्रह सभापति जगदीप धनखड़ से की थी। सभापति ने उन्हें यह मौका दिया तो कांग्रेसी सांसद बवाल करने लगे। जयंत चौधरी जब अपनी बात रखने लगे तो जयराम रमेश ने उनपर टिप्पणी कर दी। हंगामा चलता रहा तो सभापति ने सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे से अपने सांसदों को शांत करने की अपील की। फिर खरगे ने सदन को संबोधित किया और उन्होंने सभापति पर ही सवाल उठा दिया। उन्होंने सभापति पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि आखिर किस नियम के तहत जयंत चौधरी को बोलने का मौका दिया गया? इस पर बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला बिफर पड़े। उन्होंने खरगे पर आसन का अपमान करने का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस पार्टी चौधरी चरण सिंह और नरसिम्हा राव को भारत रत्न दिए जाने से बेचैन है, उसे यह रास नहीं आ रहा है। उन्होंने सदन में चीख-चीखकर कांग्रेस पर आरोपों की बौछार कर दी। फिर सभापति धनखड़ ने भी बारी-बारी से मल्लिकार्जुन खरगे और जयराम रमेश को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि वो चौधरी चरण सिंह का अपमान किसी हाल में बर्दाश्त नहीं करेंगे। पूरे बवाल की पटकथा तैयार हुई जयंत चौधरी को सदन में बोलने की अनुमति देने से। जयंत राज्यसभा के सदस्य हैं, लेकिन वो कल तक विपक्षी खेमे में बैठा करते थे। आज वो ट्रेजरी बेंच यानी सत्ता पक्ष की तरफ बैठे। ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और नीतीश कुमार की तरफ से मिले झटकों पर झटके से जख्मी हुई कांग्रेस पार्टी ने जयंत को भी पाला बदलते देखा तो तिलमिला उठी। यही वजह है कि जब जयंत सभापति की अनुमति से बोलने उठे तो जयराम रमेश ने उन पर टिप्पणी कर दी। हंगामा नहीं रुका तो जयंत चौधरी अपनी बात पूरा किए बिना बैठ गए। तब सभापति ने सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे से अपील की।

खरगे कहा कि वो भारत रत्न पाने वाले सभी महान आत्माओं को सलाम करते हैं। हालांकि, उन्होंने सभापति पर ही सवाल दाग दिया। उन्होंने कहा, ‘आपने किस नियम से जयंत चौधरी को बोलने की अनुमति दी? अगर ऐसा है तो हमें भी हमेशा मौका दीजिए। हमसे तो आप हमेशा नियम दिखाने की मांग करते हैं।’ खरगे की बातों पर पशुपालन मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला हत्थे से उखड़ गए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पचा नहीं पा रही है कि उसने जिन्हें सरकार से बाहर कर दिया था, उन्हें भारत रत्न कैसे मिल सकता है।

वो चिल्ला-चिल्लाकर बोलने लगे, ‘इस देश में किसानों की आवाज को रोकने वाला कोई पैदा नहीं हुआ, नहीं होगा, होगा भी नहीं। आप एक किसान की प्रशंसा नहीं सुन सकते हो? किसान को भारत रत्न मिला, कांग्रेस के जेहन में क्या आग लग गई? ये कांग्रेस का असली चरित्र है। ये कांग्रेस का असली चेहरा है। इन्होंने चरण सिंह की सरकार गिराई थी। कांग्रेस का दुख यही है कि जिनकी सरकार हमने गिराई, उन्हें भारत रत्न कैसे मिल सकता है!’ रूपाला ने सभापति को संबोधित करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने तो उलटे आसन पर ही आरोप मढ़ दिया जबकि चेयरमैन हर बार सदन को पूरे गौर से खरगे को सुनने की हिदायत दिया करते हैं।

फिर सभापति ने कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी को अपनी बात रखने को कहा, लेकिन विपक्षी खेमे में हंगामा नहीं रुका तो धनखड़ फिर अपील करने लगे। उन्होंने कहा, ‘मुझे बड़ा आघात पहुंचा है, बहुत पीड़ा हुई है। जिस तरह सदन में विपक्ष के नेता ने मुझ पर आरोप लगाए हैं, वो सही नहीं हैं।’ सभापति के इतना कहते ही विपक्ष की ओर से चीख-चिल्लाहट बढ़ गई। तभी धनखड़ ने कहा, ‘मि. शक्ति सिंह गोहिल अगल आपने इसे दोहराया, रमेश, मैं अब सबसे कड़ा कदम उठाऊंगा।’ धनखड़ की चेतावनी के बावजूद विपक्ष से चीख-चिल्लाहट जारी रही। इस बीच सभापति ने कहा, ‘हम किसान और किसान वर्ग का इतना असम्मान बर्दाश्त नहीं कर सकते। भारत में गांव और किसान भी बसता है। एक किसान को सम्मान मिला और सदन में अव्यवस्था फैल जाएगी! कितनी बड़ी पीड़ा होती है।’

इस पर विपक्षी बेंच से फिर शोर होने लगा तो धनखड़ ने चेतावनी दी कि ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं करें। मैं चौधरी चरण सिंह का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता। वो बोले, ‘चौधरी चरण सिंह अनुकरणीय सार्वजनिक जीवन के प्रतिमान हैं। किसानों के प्रति उनकी निष्ठा अतुलनीय है। दूरदर्शी सोच थी उनकी किसानों और गांवों के लिए। उनके विषय पर विवाद करना!’ उन्होंने आगे कहा, ‘चौधरी चरण सिंह की कर्मभूमि उत्तर प्रदेश और पूरा भारत रही है। उनको भारत रत्न मिला हो, इस विषय पर, इस सदन में, मेरे यहां बैठे हुए इस प्रकार का वातावरण हो!’ धनखड़ ने आगे कहा, ‘आपने चौधरी चरण सिंह का अपमान किया है, आपने उनकी विरासत का अपमान किया है। आपके मन में भारत रत्न चौधरी चरण सिंह के प्रति सम्मान नहीं है। आज के दिन हर किसान के दिल पर आप चोट कर रहे हो। उसके दिल को दहका रहे हो। चौधरी चरण जैसे व्यक्तित्व के ऊपर इस प्रकार का वातावरण हाउस में क्रिएट करना! हमारा सिर शर्म से झुक जाना चाहिए। मैं खुद दुखी हूं।’

उसके बाद जयंत चौधरी अपनी बात पूरी करने उठे। उन्होंने कहा, ‘माननीय सांसदों के इस सदन की कार्यवाही के दौरान दुर्व्यवहार को लेकर दुखी हूं। मुझे अचंभा होता है कि चौधरी चरण सिंह जैसी शख्सियत को किसी गठजोड़ के बनने या तोड़ने और चुनाव तक सीमित रखना चाहते हैं। लेफ्ट, राइट और सेंटर में ही हम बंटे रहेंगे तो इस देश के जो असली धरतीपुत्र थे, उनका आदर और सम्मान हम कैसे कर पाएंगे?’

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान एमएस धोनी ने एक बैट निर्माता के करोड़ों रुपये ठुकरा दिए।

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धोनी की बड़े दिल वाली पहचान, करोड़ों रुपये का ऑफर छोड़ क्या किया? धोनी ने इससे पहले उस संस्था के लोगो के साथ खेला था जिसने धोनी की बल्लेबाजी में मदद की थी। धोनी ने ऐसा करने के लिए करोड़ों रुपये का मोह छोड़ दिया. ऐसा कंपनी के मालिक ने कहा. महेंद्र सिंह धोनी आईपीएल की तैयारी में जुटे हैं. भारत के विश्व कप विजेता कप्तान प्रैक्टिस में तल्लीन. उनकी एक तस्वीर वायरल हो गई है. धोनी अपने बचपन के दोस्त की कंपनी के स्टीकर के साथ प्रैक्टिस करते नजर आ रहे हैं. लेकिन ऐसी घटनाएं नई नहीं हैं. धोनी ने इससे पहले उस संस्था के लोगो के साथ खेला था जिसने धोनी की बल्लेबाजी में मदद की थी। धोनी ने ऐसा करने के लिए करोड़ों रुपये का मोह छोड़ दिया. ऐसा कंपनी के मालिक ने कहा. 2019 विश्व कप में धोनी उस संस्था के लोगो के साथ खेल रहे थे जिसने उन्हें अपना क्रिकेट करियर शुरू करने में मदद की थी। उस कंपनी की मालिक सोमी कोहली ने कहा, ”धोनी ने मुझसे कोई पैसा नहीं मांगा. उन्होंने मुझसे एक बल्ला भेजने को कहा जिस पर मेरी कंपनी का लोगो लगा हो। मैंने उसे समझाने की कोशिश की. अगर उसने मेरा लोगो नहीं लगाया तो उसे दूसरी कंपनी से करोड़ों रुपये का ऑफर था। लेकिन उन्होंने मेरी कंपनी का लोगो लगाने का फैसला किया. मैंने धोनी की पत्नी, मां, पिता से उन्हें मनाने के लिए कहा। लेकिन उन्हें किसी भी तरह से राजी नहीं किया जा सका. उन्होंने मेरी कंपनी का लोगो लगाया.” धोनी ने 1998 में पहली बार कोहली की कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था. उन्होंने अपने बल्ले पर संगठन के लोगो के साथ अपना पहला अंतरराष्ट्रीय शतक बनाया। धोनी के दोस्त परमजीत सिंह ने किसी तरह कोहली को धोनी के बल्ले पर अपना लोगो लगाने के लिए मना लिया. तब भी धोनी ने भारतीय क्रिकेट में अपनी प्रतिभा बिखेरनी शुरू नहीं की थी. धोनी से भी तेज़! इंग्लैंड के पूर्व कप्तान एलेक स्टीवर्ट ने सीरीज के बीच में इंग्लिश विकेटकीपर पर टिप्पणी की. उन्होंने बेन फोक्स को महेंद्र सिंह धोनी से आगे रखा. सभी ने महेंद्र सिंह धोनी की कीपिंग की तारीफ की. विशेषकर जिस गति से वह स्टंप करता है वह आश्चर्यजनक है। लेकिन इंग्लैंड के पूर्व कप्तान एलेक स्टीवर्ट धोनी को सबसे तेज़ कहने से कतराते हैं. वह खुद एक विकेटकीपर थे. उन्होंने इंग्लैंड के मौजूदा टेस्ट विकेटकीपर बेन फोक्स को धोनी से आगे रखा है. फोक्स ने भारत के खिलाफ पहले दो टेस्ट में छह कैच लपके। उनके दो स्टंप आउट हैं. इसके बाद स्टीवर्ट ने फॉक्स के लिए अपना मुंह खोला. उन्होंने कहा, ”धोनी के हाथ बहुत तेज़ हैं. लेकिन क्रिकेट में फोल्क्स के हाथ सबसे तेज़ होते हैं. कोई भी उस तरह से कैच या स्टंप नहीं कर सकता जैसा वह करता है। उनकी गति की बराबरी कोई नहीं कर सकता. यह उनकी प्राकृतिक प्रतिभा है।” स्टीवर्ट ने कहा कि फॉल्क्स कड़ी मेहनत से इस मुकाम तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा, ”वह बहुत मेहनती हैं. जिस तरह से वह प्रत्येक मैच से पहले खुद को तैयार करते हैं उससे पता चलता है कि फोक्स इतने सफल क्यों हैं। जब मैं सरे क्रिकेट क्लब का निदेशक था तब मैंने फॉक्स के इस प्रयास को देखा था। इसलिए उनकी सफलता मुझे और भी खुश करती है।”

फोक्स ने इंग्लैंड के लिए 22 टेस्ट मैचों में 63 कैच लपके। आठ स्टंपिंग कीं. हालांकि इतने कम समय में उनकी तुलना धोनी से होते देख कई लोग हैरान रह गए. क्योंकि धोनी भारत के लिए तीनों फॉर्मेट में 535 मैचों में 823 आउट के साथ जुड़े थे. इनमें 631 कैच और 192 स्टंप आउट हैं. फोल्क्स ने अभी अपना करियर शुरू किया है। ऐसे में कई लोग उन्हें समय देने की बात कर रहे हैं. डेढ़ महीने बाद शुरू होगा आईपीएल. उस प्रतियोगिता में वह एक बार फिर चिर-परिचित नंबर 7 की जर्सी में नजर आएंगे। हाल ही में चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) की जर्सी का अनावरण किया गया है जिस पर उनका नाम लिखा है। आईपीएल से पहले महेंद्र सिंह धोनी ने बताया कि क्यों उन्हें नंबर 7 इतना पसंद है. सीएसके के कप्तान ने यह भी बताया कि उन्हें 7 नंबर क्यों पसंद है। जिस तरह क्रिकेट में 10 नंबर सचिन तेंदुलकर के साथ जुड़ा है, उसी तरह धोनी 7 नंबर के साथ अटूट रूप से जुड़े हुए हैं। चेन्नई के फैंस उनके बहुत दीवाने हैं. कई लोगों ने भारतीय टीम से 7 नंबर की जर्सी वापस लेने की मांग की है. शुक्रवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए, धोनी ने कहा, “वही समय था जब मेरे माता-पिता मुझे दुनिया में लाए थे। मेरा जन्म 7 जुलाई को हुआ था. जुलाई सातवां महीना भी है. मेरे जन्म वर्ष के अंतिम दो अंक 81 हैं। 8 में से 1 घटाने पर 7 प्राप्त होता है। इसलिए जब मुझसे पहली बार पूछा गया, ‘आपको किस नंबर की जर्सी चाहिए’, तो मेरा जवाब बहुत सरल था।’

पीएम नरेंद्र मोदी के सवाल के बाद एमएसपी पर पूरी चर्चा दूसरी दिशा में चली गई.

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पिछले लोकसभा चुनाव से पहले, मोदी सरकार ने 2018-19 के बजट में घोषणा की थी कि फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य या एमएसपी खेती की लागत का डेढ़ गुना होगा। यह सोचा गया था कि सरकार सभी फसलों को एमएसपी दर पर खरीद सकती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसानों को वास्तव में खेती की लागत का डेढ़ गुना एमएसपी मिले। क्या यह वास्तविक रूप से संभव है या क्या किसानों को एमएसपी दिलाने का कोई और तरीका है, इस पर सरकार के भीतर तनाव के बीच एक बैठक में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने सवाल किया कि क्या सरकार ने पहले कभी सभी फसलें खरीदी थीं। अगर ऐसा पहले कभी नहीं हुआ तो सरकार को अब सभी फसलें क्यों खरीदनी चाहिए?

पूर्व केंद्रीय वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने अपनी हाल ही में प्रकाशित पुस्तक ‘वी आल्सो मेक पॉलिसी’ में लिखा है कि प्रधानमंत्री के सवाल के बाद पूरी चर्चा दूसरे सेक्टर की ओर मुड़ गई। इससे पहले चर्चा चल रही थी कि एमएसपी घोषित करने के अलावा सरकार किसानों को एमएसपी कैसे दिलवा सकती है? खुद फसल खरीदकर? या सब्सिडी के साथ? यह पूछे जाने पर कि क्या प्रधानमंत्री को वाकई इसकी जरूरत है या नहीं, सरकार पहले की तरह मुख्य रूप से धान और गेहूं ही खरीदेगी. बाकी फसल का एमएसपी घोषित कर देनदारी तय की जाएगी। पंजाब-हरियाणा में किसानों ने नए एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है. उनका तर्क है कि मोदी सरकार कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न दे रही है. दावा है कि स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिशों के अनुरूप खेती की लागत से डेढ़ गुना अधिक दाम पर फसल के दाम घोषित किये गये हैं। लेकिन किसानों को वह एमएसपी मिले इसकी व्यवस्था नहीं की जा रही है. ऐसे में विपक्षी खेमे को लगता है कि पूर्व वित्त सचिव की किताब में छपी जानकारी अहम हो जाएगी.

किसानों के आंदोलन के साथ खड़े होकर राहुल गांधी ने मंगलवार को घोषणा की कि विपक्षी गठबंधन ‘भारत’ की सरकार सत्ता में आने पर एमएसपी को कानूनी गारंटी देगी. बीजेपी खेमे ने इस बात पर पलटवार किया है कि राष्ट्रीय किसान नीति 2007 में यूपीए सरकार के दौरान बनाई गई थी. तब यूपीए सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिशों को मानते हुए खेती की लागत का डेढ़ गुना एमएसपी देने की सिफ़ारिश को नहीं माना था. 2010 में मनमोहन सरकार के कृषि मंत्री केवी थॉमस ने संसद में एक सवाल के जवाब में यह बात कही थी. अब राहुल गांधी हार टालने की हताशा में अवास्तविक वादे कर रहे हैं। सरकारी सूत्रों का दावा है कि एमएसपी की गारंटी के लिए सरकार को सालाना 10 से 11 लाख करोड़ रुपये खर्च करने होंगे. विकास के अन्य क्षेत्रों पर कोई पैसा खर्च नहीं किया जाएगा.

कांग्रेस ने प्रतिवाद किया कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने नीति आयोग उप-समिति के प्रमुख के रूप में एमएसपी की सिफारिश की थी। अब वह अपनी ही सिफ़ारिशों पर अमल नहीं कर रहे हैं. झूठ फैलाया जा रहा है कि सरकारी कैंपों से 11 लाख करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे. सच तो यह है कि एमएसपी की कानूनी गारंटी के लिए सरकार को सभी फसलें खरीदने की जरूरत नहीं है। सरकार को तभी हस्तक्षेप करना पड़ता है जब बाजार में कीमतें एमएसपी से नीचे चली जाती हैं। या नहीं कांग्रेस से जुड़े किसान मोर्चा ने 16 फरवरी को ‘ग्रामीण बंद’ का समर्थन करने का फैसला किया. आज राहुल गांधी ने एक्स हैंडल पर लिखा, ”मोदी और उनका अभियान गरीबों, किसानों का दुश्मन है. मित्र उद्योगपतियों का करोड़ों का कर्ज माफ कर सकती है मोदी सरकार! लेकिन जब किसानों को एमएसपी की गारंटी की बात आती है तो सवाल उठाए जाते हैं। एमएसपी की गारंटी का कांग्रेस का फैसला मील का पत्थर साबित होगा। यह फैसला ग्रामीण अर्थव्यवस्था और करोड़ों किसानों के जीवन को बदल देगा।” 22 जनवरी को अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में शुरू हुआ राजसूय यज्ञ 10 फरवरी को दिल्ली में नवनिर्मित संसद भवन में संपन्न हुआ। सत्रहवीं लोकसभा के आखिरी सत्र के अंतिम दिन, संसद में चर्चा का एजेंडा आइटम था: राम मंदिर। यह मुद्दा क्यों निर्धारित हुआ, यह प्रश्न अनावश्यक है। वर्तमान भारत में मंदिर-कीर्तन संसद का सबसे गंभीर कार्य माना जाता है। निस्संदेह, महत्वपूर्ण कारक धर्म नहीं-राजनीति है। अयोध्या के मंदिर और मूर्तियां उसी राजनीति का उदाहरण हैं. इसके केंद्र में केंद्र सरकार और सत्तारूढ़ दल है। लोकतंत्र की शब्दावली में ‘बराबरों में प्रथम’ माने जाने वाले इस नायक को प्रधानमंत्री तक सीमित करने के बारे में सोचना, रामायण महाभारत के सभी ग्रंथों और उनके भक्तों और अनुयायियों को अशुद्ध कर देगा। वह उस धर्म में सर्वोपरि सत्य है।

समाजवादी पार्टी ने सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस से निराशा जताई है.

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तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी के बाद इस बार समाजवादी पार्टी ने सीट समझौते को लेकर कांग्रेस पर निराशा व्यक्त की है. तृणमूल और आम आदमी पार्टी की तरह, समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस लोकसभा सीट समझौता सौदे में सीटों की बढ़ी हुई और अवास्तविक संख्या की मांग कर रही है। समाजवादी पार्टी के उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने कहा कि इस मामले पर समाजवादी पार्टी की शीर्ष स्तरीय बैठक में चर्चा हुई. उन्होंने कहा, ”एनसीपी या डीएमके जैसे पुराने सहयोगियों को छोड़कर बाकी सभी राज्यों में गुटनिरपेक्षता के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है. यह भारत गठबंधन धीरे-धीरे सोने का घड़ा बन गया है।’ इसका भाजपा को सुविधा पहुंचाने के अलावा कोई उद्देश्य नहीं है।” ऐसे में कांग्रेस की राष्ट्रीय गठबंधन समिति की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा हो गया है. सिर्फ भारत की साझेदार टीमों के बीच नहीं. कांग्रेस के भीतर भी. विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय दलों से बात करने के लिए मुकुल वासनिक, सलमान खुर्शीद, मोहन प्रकाश की समितियां बनाई गईं। इसमें कांग्रेस के दो पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और भूपेश बघेल शामिल थे. तब यह तर्क दिया गया था कि ममता बनर्जी की यूथ कांग्रेस के दिनों से ही वासनिक से दोस्ती थी। मोहन प्रकाश से नीतीश कुमार का पुराना रिश्ता है. अखिलेश यादव भी उत्तर प्रदेश के खुर्शीद के साथ हैं
दिन की अंतरंगता.

दरअसल, देखा जा रहा है कि तमिलनाडु, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड जैसे राज्यों में जहां कांग्रेस का दूसरे दलों के साथ सीट समझौता पहले से था, किसी भी राज्य में किसी भी दल के साथ सीट समझौता फाइनल नहीं हो पाया है. ममता बनर्जी ने कांग्रेस से कहा है कि वह पश्चिम बंगाल में सीट नहीं छोड़ेंगी. नीतीश भारत छोड़ चुके हैं. अब अखिलेश यादव भी नाराज हैं. दोनों पार्टियों ने तय किया है कि पंजाब में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच सीटों पर कोई समझौता नहीं होगा. लेकिन कांग्रेस सूत्रों ने दावा किया कि दिल्ली में सीटों का समझौता फाइनल हो गया है. मंगलवार को आम आदमी पार्टी ने गुजरात की भरूच और गोवा की एक सीट समेत दो सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की. अरविंद केजरीवाल की पार्टी के मुताबिक, पिछले एक महीने में कांग्रेस ने दिल्ली की सीटों पर समझौते को लेकर कोई बात नहीं की है. दिल्ली में कांग्रेस को सात में से एक सीट मिलना यथार्थवादी नहीं है.

समाजवादी पार्टी के किरणमय नंदा भी इसी निराशा से ग्रस्त हैं। उन्होंने कहा, ”सीट समझौते के सवाल पर कांग्रेस की उम्मीदें आसमान पर हैं. लेकिन ज़मीन पर उनके पैरों के निशान नहीं हैं।” अखिलेश यादव ने पहले कहा था कि वह शुरुआत में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए 11 सीटें छोड़ रहे हैं. किरणमयी का बयान, ‘कांग्रेस 20 सीटें चाहती है. हमने 11 से ज्यादा डिबेट नहीं दिए हैं. कांग्रेस काफी समय से बात कर रही है. भले ही गठबंधन अब बेकार हो गया है. यदि जुताई के समय भूमि की देखभाल नहीं की गई तो बाद में उस पर फसल नहीं पैदा होगी। क्योंकि लोग शांत नहीं बैठे हैं. वे अपने-अपने इलाकों में बस गये हैं. कांग्रेस की अनुचित देरी से भाजपा को फायदा हुआ है।” उनका बयान था, ”कांग्रेस के बिना 20 लोकसभा सीटों का मतलब व्यावहारिक रूप से सैकड़ों विधानसभा सीटें देना है. हमें 2027 में उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को भी ध्यान में रखना होगा. इससे पहले हमने कांग्रेस के हाथों 105 विधानसभा सीटें हारने का नतीजा देखा था. कांग्रेस ने केवल 5 सीटें जीतीं। सपा शीर्ष नेतृत्व के मुताबिक, भारत गठबंधन की घोषणा के बाद राहुल गांधी की भारत जोरो न्याय यात्रा विपक्षी एकता के लिए गले की कील है. विपक्ष को नजरअंदाज कर बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस और राहुल गांधी का चेहरा साफ तौर पर सामने आ गया है. इसलिए भारत ने गठबंधन की मानसिकता को तोड़ दिया है.

हालांकि, कांग्रेस को अभी भी उम्मीद है कि अगले हफ्ते एसपी के साथ सीटों का समझौता फाइनल हो जाएगा। अमेठी,रायबरेली समेत 15-16 सीटें सपा कांग्रेस के खाते में जाएंगी। अखिलेश ने यह भी कहा कि वह अमेठी या रायबरेली में यात्रा में शामिल होंगे. लेकिन दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ सीटों का समझौता होगा या नहीं इस पर संशय पैदा हो गया है. यह भी सवाल उठाए गए हैं कि क्या केजरीवाल केंद्रीय जांच एजेंसी के बार-बार समन के दबाव में भारत विरोधी रुख अपना रहे हैं। गुजरात के भरूच में आम आदमी पार्टी द्वारा उम्मीदवार उतारे जाने से भी कांग्रेस नेतृत्व नाराज है. भरूच सोनिया गांधी के लंबे समय तक राजनीतिक सचिव रहे दिवंगत अहमद पटेल का निर्वाचन क्षेत्र है। कांग्रेस वहां उनकी बेटी मुमताज पटेल को मैदान में उतारने की योजना बना रही है। मुमताज ने कहा, ”मैं भरूच की बेटी हूं, वोटर हूं. मैं यहां की स्थिति के बारे में अधिक जानता हूं।’ 2022 के विधानसभा चुनाव में भरूचे को कांग्रेस आप से 1 लाख 64 हजार ज्यादा वोट मिले थे. उनसे पहले कांग्रेस के चार विधायक थे।”

BJD ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा के अश्विनी वैष्णव का समर्थन किया.

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राज्यसभा में अश्विनी को बीजेडी का समर्थन, पिनाकी पर बीजेपी का दबाव राज्यसभा सांसद के रूप में रेल मंत्री का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है। इससे पहले वह ओडिशा से निर्वाचित होकर संसद के ऊपरी सदन में गये थे. नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी को ओडिशा से राज्यसभा में तीन सदस्य मिल सकते हैं. बीजद ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को तीन में से एक पद देने के लिए भाजपा से हाथ मिलाने का फैसला किया। कांग्रेस सहित विपक्ष के अनुसार, बीजद एक बार फिर भाजपा की ‘बी’ पार्टी के रूप में सामने आई है। . सूत्रों के मुताबिक, बीजेडी के लोकसभा नेता पिनाकी मिश्रा ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वह आगामी लोकसभा में खड़े नहीं होंगे. उन्हें राज्यसभा टिकट की उम्मीद थी. लेकिन नवीन ने उन्हें राज्यसभा का टिकट नहीं दिया. राजनीतिक खेमे का मानना ​​है कि इसके पीछे बीजेपी का दबाव है. राज्यसभा सांसद के रूप में रेल मंत्री का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है। इससे पहले वह ओडिशा से निर्वाचित होकर संसद के ऊपरी सदन में गये थे. इस बार भी बीजेपी के पास ओडिशा से राज्यसभा में सांसद भेजने के लिए जरूरी संख्या नहीं थी. इस राज्य के तीन सांसदों का कार्यकाल अप्रैल में ख़त्म हो रहा है. संख्या के हिसाब से इस राज्य से राज्यसभा सदस्य बनने के लिए हर उम्मीदवार को 37 वोटों की जरूरत होगी. हालांकि, ओडिशा विधानसभा में बीजेपी के पास सिर्फ 22 विधायक हैं. इसके बावजूद अश्विनी को ओडिशा से उम्मीदवार बनाया गया है. वहीं वैष्णव को मैदान में उतारने के बाद ओडिशा की सत्तारूढ़ बीजू जनता दल ने घोषणा की है कि वह केंद्रीय रेल मंत्री का समर्थन करेगी. ऐसे में बीजेडी ने अपनी पार्टी के दो उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है. बीजेडी ने सर्कुलर में कहा कि वे राज्य में रेलवे बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अश्विनी वैष्णव का समर्थन करेंगे। ओडिशा के निवर्तमान कांग्रेस नेता अजय सिंह ने अपने एक्स हैंडल पर पिछले साल जून में बालासोर ट्रेन दुर्घटना का विवरण दिया और कहा, “रेल मंत्री ने उस दिन लोगों को दिखाने के लिए कुछ आँसू बहाए।” आज फिर बीजद उस रेल मंत्री का समर्थन कर रही है. पूरा ओडिशा देख रहा है.

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, नवीन को पिनाकी मिश्रा को राज्यसभा का टिकट देने से रोकने के लिए बीजेपी नेतृत्व की ओर से दबाव था. Q. रिश्वत मामले में एथिक्स कमेटी का तृणमूल सांसद महुआ मैत्रा से टकराव सामने आया. बीजेपी के एक धड़े के मुताबिक बीजेडी के ये सांसद इस लड़ाई में महुआ के पक्ष में थे. इसलिए राजनीतिक गलियारे में खबर है कि उन्हें सजा मिलनी तय है.

देश के 15 राज्यों की कुल 56 राज्यसभा सीटों के लिए 27 फरवरी को चुनाव होने जा रहे हैं। उस दिन पश्चिम बंगाल की पांच सीटों पर चुनाव होंगे. लेकिन वोटिंग नहीं होगी. क्योंकि किसी भी पार्टी ने ‘अतिरिक्त’ उम्मीदवार नहीं दिया है. तीन साल पहले उनका नाम सुर्खियों में था. जनवरी 2021 में, जिस दिन राम मंदिर निर्माण के लिए धन संग्रह शुरू हुआ, उस दिन गुजरात के हीरा व्यापारी गोविंदभाई ढोलकिया ने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट को 11 करोड़ रुपये का दान दिया। इस बार बीजेपी ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के राज्य में राज्यसभा चुनाव में उतारा है. सूरत के हीरा कारोबारी और ‘रामकृष्ण डायमंड’ के नेता गोविंदा आरएसएस से जुड़े रहे हैं कब का। वह विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की सूरत शाखा में भी नियमित रूप से जाते हैं। दरअसल, उन्होंने वीएचपी के जरिए राम मंदिर ट्रस्ट को चंदा भेजा था. बुधवार को राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार के रूप में अपने नाम की घोषणा के बाद गोविंदा ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “मेरा जीवन एक किसान परिवार के बच्चे के रूप में शुरू हुआ।” व्यावसायिक जीवन की यात्रा भी मेरे लिए आनंददायक रही। कुछ घंटे पहले मुझे पता चला कि उम्मीदवार के तौर पर मेरा नाम तय हो गया है.’ बीजेपी नेतृत्व ने ये फैसला सोच समझकर लिया होगा.” विधायकों की संख्या के संदर्भ में, सत्तारूढ़ भाजपा को गुजरात में सभी सीटें जीतने की उम्मीद है। गोविंदा के अलावा, मोदी-शाह राज्य से उच्च सदन के लिए उम्मीदवारों के रूप में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, मयंकभाई नाइक और यशवंतसिन परमार के नामों की बुधवार को घोषणा की गई। संयोग से, राज्यसभा के वोट राज्य (और दिल्ली, पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों) में विधायकों की संख्या के अनुपात में होते हैं। विधायक अपनी पसंद के हिसाब से वोट देकर राज्यसभा सांसद चुनते हैं।

नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई बॉलीवुड फिल्म भक्षक का रिव्यू.

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चेतना इतनी आसान है? कहानी बिहार के मुनावरपुर में एक आश्रय गृह के आसपास शुरू होती है। वहां आश्रय प्राप्त अनाथ लड़कियों को नियमित रूप से दुर्व्यवहार का शिकार होना पड़ता है। पटना के एक टीवी चैनल की पत्रकार वैशाली (भूमि पेडनेकर) ने इसके खिलाफ कदम उठाया। सुकुमार रॉय ने काफी समय पहले लिखा था- ‘आज तुम्हें वो समझाऊंगा/समझूंगा नहीं, तुम्हारी ग़ज़ल को मैं गुंजाब बना दूंगा।’ यदि सभी लोग सब कुछ समझ लें और उसके अनुसार कार्य करें तो शायद दुनिया में अन्याय नाम की कोई चीज ही नहीं रहेगी। और क्योंकि उस तरह की चीज़ लगभग अवास्तविक है, कभी-कभी फिल्म के स्क्रीन पर ‘स्पष्टीकरण’ करना आवश्यक होता है। ‘भक्षक’ एक ऐसी ही फिल्म है, जिसमें जो सच सबकी आंखों के सामने है उसे एक बार फिर आंखों में उंगली डालकर दिखाया जाता है. ‘सोई हुई जनता’ को जगाने और झकझोरने की एक और कोशिश की गई है. और इस कोशिश के पीछे निर्देशक पुलकित और उनकी पत्नी ज्योत्सना की लंबी मेहनत, अध्ययन और शोध है। निर्देशक पुलकित ने कैंसर जैसी घातक बीमारी से लड़ते हुए यह कहानी लिखी है। जिस जुनून के साथ उन्होंने फिल्म बनाई है, अगर कुछ दर्शकों को भी यह पसंद आता है, तो उनका प्रयास सार्थक है। लेकिन निर्माण में कुछ कमजोरियों के कारण यह फिल्म उतनी आकर्षक नहीं बन सकी. यहां तक ​​कि अगर मन में घाव काटे जाएं, तो यह लंबे समय तक एक दंश छोड़ जाएगा, नेटफ्लिक्स की इस फिल्म की सामग्री उतनी नहीं है। कहानी बिहार के मुनावरपुर में एक आश्रय गृह के आसपास शुरू होती है। वहां आश्रय प्राप्त अनाथ लड़कियों को नियमित रूप से दुर्व्यवहार का शिकार होना पड़ता है। पटना के एक टीवी चैनल की पत्रकार वैशाली (भूमि पेडनेकर) ने इसके खिलाफ कदम उठाया। कैमरे पर उनके साथी हैं भास्कर (संजय मिश्रा)। चूंकि शेल्टर होम के मालिक बंशी साहू (आदित्य श्रीवास्तव) के संबंध ऊपरी इलाकों तक हैं, इसलिए सरकार जानबूझकर आंखें मूंद लेती है और कोई कार्रवाई नहीं करती है। पुलिस FIR नहीं लिखती. जांच के दौरान वैशाली को हर कदम पर उत्पीड़न, अपमान और असहयोग का सामना करना पड़ा। फिल्म इस बारे में है कि वह शेल्टर होम की लड़कियों को कैसे न्याय दिलाती है।

इस फिल्म की तैयारी बिहार और उसके बाहर के कई शेल्टर होम में पूछताछ करके, वकीलों, पुलिस, डॉक्टरों से बात करके की गई है। सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्म में होने वाली लगभग हर चीज अपेक्षित होती है। आखिरी वाला भी. इसलिए फिल्म में कुछ तत्वों को अनकहा तरीके से रखना पड़ा, जो अप्रत्याशित है, दर्शक के लिए चौंकाने वाला है। यदि संवादों की पुनरावृत्ति, धीमी गति की पटकथा, महिलाओं को बचाने के लिए महिलाओं के आगे आने का पारंपरिक फार्मूला न होता तो ‘भक्ति’ और मजबूत हो सकती थी। जिस तरह से वैशाली को परिवार के अंदर और बाहर संघर्ष करना पड़ता है, उसका चित्रण भी काफी एकतरफा है। जिस तरह से वैशाली एक कमरे में केवल एक कैमरा लगाकर चैनल चलाती है, वह अपनी ‘खबरी’ को हजारों रुपये देने की ताकत कैसे पा सकती है, यह आश्चर्यजनक है! साँप की पूँछ पर पैर रखने से वैशाली के साथ जो कुछ हो सकता था, उसका हश्र नहीं होता, शायद अंत में उसकी जीत सुनिश्चित करने के लिए ही। और इसीलिए यह जानते हुए भी कि पुलिस आ रही है, अपराधी सोफे पर बैठकर हथकड़ी लगने का इंतज़ार करते हैं!

फिल्म के अधिकांश आकर्षक, ज्ञानवर्धक संवाद वैशाली उर्फ ​​भूमि पेडनेकर द्वारा बोले गए हैं। वह अपने किरदार में बेहद विश्वसनीय हैं. संजय मिश्रा भी अपने किरदार को बखूबी निभाते हैं। दोनों सहकर्मियों के बीच के रिश्ते को भी खूबसूरती से चित्रित किया गया है। फिल्म में कई बुरे लोग हैं, जिनमें आदित्य श्रीवास्तव, सत्यकाम आनंद जैसे कलाकारों ने ध्यान खींचा। गुप्ताजी के रूप में दुर्गेश कुमार की भूमिका, जो वैशाली को समाचार पहुंचाते हैं, सूक्ष्मता से सशक्त है। फिल्म के अंत में एसएसपी जसमीत गौरे के रूप में साई ताम्हणकर जैसे अभिनेता आए, लेकिन उनके पास करने के लिए कुछ खास नहीं था। ‘गंगा’ या ‘शामिल है’ जैसे गाने फिल्म के मूड के अनुरूप हैं। कैमरा वर्क भी फिल्म को ऊंचे स्तर पर ले जाने में मदद करता है।

नाबालिगों के साथ लगातार हो रहे अपराधों के आंकड़े थोड़ा नजर डालने पर पता चल सकते हैं. लगभग हर कोई जानता है कि आंकड़े न जानने पर भी अन्याय होता है। उनमें से अधिकांश की जागरूकता या विवेक समाचार पत्र पढ़ने या टीवी चैनल देखने में बिताए गए समय तक ही सीमित है। उससे आगे बढ़कर सोचें, दूसरों के लिए – यही बात यह फिल्म बार-बार कहती है। इस प्रयास पर अंकुश लगाना होगा.

बीसीसीआई का कहना है कि विराट कोहली को निजी छुट्टी मांगने का पूरा अधिकार है.

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क्या इंग्लैंड सीरीज पर बोर्ड की नजरें छुट्टियों पर हैं? सचिव जय शाह ने जवाब दिया कि विराट कोहली ने निजी कारणों से इंग्लैंड सीरीज से छुट्टी ली है. वह एक भी टेस्ट नहीं खेलेंगे. क्या विराट बोर्ड के निशाने पर हैं? जय शाह ने खोला मुंह. क्या विराट कोहली ने की गलती? क्या विराट से नाराज है भारतीय क्रिकेट बोर्ड? विराट ने निजी कारणों से इंग्लैंड सीरीज से छुट्टी ले ली है. वह एक भी टेस्ट नहीं खेलेंगे. क्या विराट बोर्ड के निशाने पर हैं? बीसीसीआई सचिव जय शाह ने खोला मुंह. हालांकि, बोर्ड ने साफ कर दिया है कि वे विराट के फैसले का सम्मान करते हैं। जॉय ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘अगर कोई क्रिकेटर 15 साल में एक बार निजी कारणों से छुट्टी लेना चाहता है तो उसे इसका अधिकार है। विराट एक ऐसे क्रिकेटर हैं जो बिना वजह छुट्टी नहीं मांगेंगे। हम उनके फैसले का सम्मान करते हैं. हमें अपने क्रिकेटरों पर भरोसा है। हम विराट से बाद में बात करेंगे। भारत की पहली दो टेस्ट टीम में विराट पहले स्थान पर थे। लेकिन सीरीज शुरू होने से पहले वह अचानक छुट्टी चाहते हैं. उस वक्त भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने कहा था कि विराट ने मैनेजमेंट और कप्तान रोहित शर्मा से बात की है. टीम ने विराट के फैसले को स्वीकार कर लिया. हालांकि यह साफ नहीं है कि विराट ने छुट्टी क्यों ली, लेकिन अटकलें हैं कि विराट की पत्नी अनुष्का शर्मा दूसरी बार मां बनने वाली हैं। इस वजह से वह अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताना चाहते हैं। लेकिन विराट ने अभी तक इस बारे में अपना मुंह नहीं खोला है. तीसरे टेस्ट में विराट की टीम में वापसी होगी या नहीं, इसे लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई थी. इसी वजह से टीम की घोषणा में देरी हुई. आखिरकार पता चला कि विराट ने जानकारी दी है कि वह इस टेस्ट के एक मैच में भी नहीं खेल पाएंगे. इसके बाद चयनकर्ताओं ने विराट को बाहर कर टीम की घोषणा कर दी. विराट कोहली के साथ बेन स्टोक्स का द्वंद्व भारत बनाम इंग्लैंड श्रृंखला का मुख्य आकर्षण हो सकता था। लेकिन कोहली निजी कारणों से पूरी सीरीज से हट गये. बेन स्टोक्स इस सवाल का जवाब नहीं देना चाहते थे कि क्या उनकी अनुपस्थिति से इंग्लैंड को फायदा हुआ। उन्होंने कहा कि जिस क्रिकेटर ने निजी कारणों से अपना नाम वापस ले लिया है, उस पर टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए. कोहली का टेस्ट न खेलना बड़ा नुकसान, इंग्लैंड के कप्तान विराट के साथ खड़े भारत बनाम इंग्लैंड सीरीज में विराट कोहली का बेन स्टोक्स के साथ मुकाबला मुख्य आकर्षण में से एक हो सकता था। कोहली नहीं खेलेंगे तो ऐसा नहीं हो रहा है. बेन स्टोक्स तीसरे टेस्ट से पहले कोहली के साथ खड़े रहे. बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्टोक्स से कोहली के बारे में पूछा गया. उन्होंने कहा, ”मैं इस सवाल के जवाब में कोई असम्मानजनक बात नहीं कहना चाहता. स्थिति आसान नहीं है. कोहली ने कुछ व्यक्तिगत कारणों से अपना नाम वापस ले लिया जिनके बारे में हम निश्चित नहीं हैं। इसलिए मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता कि इससे हमें फायदा होगा या नुकसान.” स्टोक्स के मुताबिक, कोहली की गैरमौजूदगी क्रिकेट प्रेमियों के लिए बड़ा नुकसान है. उन्होंने कोहली को शुभकामनाएं भी दीं. उन्होंने कहा, ”जो हो रहा है उसे स्वीकार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है. यह क्रिकेट के लिए बहुत बड़ी क्षति है.’ कोहली जिस भी दौर से गुजरें, मेरी शुभकामनाएं हमेशा उनके साथ रहेंगी।’ मुझे उम्मीद है कि यह समय जल्द ही बीत जायेगा. क्रिकेट के मैदान पर कोहली ऐसे शख्स हैं जिन्हें देखने के लिए हर कोई मैदान पर आता है।” रिची टॉपले को पाकिस्तान सुपर लीग में खेलने की इजाजत नहीं. वह चोटिल है। आईपीएल टीम आरसीबी चिंतित है. टॉपले आईपीएल में इसी टीम के लिए खेले थे. लेकिन चोट के कारण वह उपलब्ध नहीं हो सकेंगे. आईपीएल से पहले विराट कोहली की टीम मुश्किल में है. मालूम हो कि इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने टॉपले को चोट के कारण पाकिस्तान सुपर लीग में खेलने की इजाजत नहीं दी थी. वे टॉपले को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहते क्योंकि इस साल जून में टी20 वर्ल्ड कप है. यही इस फैसले का कारण है. हालांकि टॉपले ने दक्षिण अफ्रीका टी20 लीग में डरबन सुपर जाइंट्स के लिए 12 मैच खेले हैं. वे धावक बन गये. इसके बाद इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने ये फैसला लिया. टॉपले 13 विकेट के साथ दक्षिण अफ्रीका टी20 लीग में संयुक्त रूप से दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं। वह नई गेंद के साथ-साथ पुरानी गेंद से भी अच्छी गेंदबाजी कर सकते हैं। ट्वेंटीज़ क्रिकेट में एक प्रभावी गेंदबाज होने के नाते, उन्होंने राष्ट्रीय टीम के अलावा दुनिया की लगभग सभी क्रिकेट लीगों में खेला।

आईपीएल नीलामी में आरसीबी ने टॉपलेक को 1 करोड़ 90 लाख में अपनी टीम में लिया. विराट ने उन्हें ध्यान में रखते हुए एक टीम बनाने की योजना बनाई थी. लेकिन अगर वे इस स्थिति में नहीं खेल सके तो उनके लिए मुसीबत खड़ी हो जाएगी. हालांकि आईपीएल शुरू होने में अभी वक्त है. उससे पहले विराट इस बात पर नजर रखेंगे कि टॉपल उबर पाते हैं या नहीं.

यूएई के अबू धाबी में मंदिर के उद्घाटन में पीएम नरेंद्र मोदी, भारत-यूएई संबंधों में बदलाव का प्रतीक है.

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मोदी ने एक मुस्लिम देश में एक मंदिर का उद्घाटन किया, अमीरशाही में सुरक्षा-सहयोग पर चर्चा की और 2015 में संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया। उसके बाद, वहां की सरकार ने घोषणा की कि वे हिंदू मंदिर बनाने के लिए 20,000 वर्ग मीटर भूमि आवंटित करेंगे। उत्तर प्रदेश के अयोध्या के बाद इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशियाई मुस्लिम देश संयुक्त अरब अमीरात में मंदिर का उद्घाटन किया. संयुक्त अरब अमीरात की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दूसरे दिन, उन्होंने बुधवार को अबू धाबी में BAPS (बोचासनबासी श्री अक्षर पुरूषोत्तम स्वामीनारायण सोसायटी) द्वारा निर्मित एक हिंदू मंदिर का उद्घाटन किया। वहां बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार, विवेक ओबेरॉय और सिंगर शंकर महादेवन मौजूद थे.

यह अबू धाबी का पहला हिंदू मंदिर है। संयुक्त अरब अमीरात में दूसरा. देश के सबसे बड़े शहर दुबई में एक मंदिर है। संयोग से, अबू धाबी में मंदिर बनाने की चर्चा मोदी के सत्ता में आने के बाद ही शुरू हुई। मोदी ने 2015 में संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया। उसके बाद, वहां की सरकार ने घोषणा की कि वे अबू धाबी के शेख जायद राजमार्ग पर अबू मुरीखा में एक हिंदू मंदिर बनाने के लिए 20,000 वर्ग मीटर भूमि आवंटित करेंगे। पिछले दिसंबर में, स्वामीनारायण संगठन के प्रतिनिधियों स्वामी ईश्वरचरणदास और स्वामी ब्रह्मविहिरदास ने दिल्ली में प्रधान मंत्री के आवास का दौरा किया और उन्हें मंदिर का उद्घाटन करने के लिए आमंत्रित किया। मोदी ने उनसे अल वाथबा जाने का वादा भी किया. मोदी ने मंगलवार को अमीरशाही की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ बैठक की। विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि बुधवार को द्विपक्षीय प्रतिनिधि स्तर की बैठक में अमीरशाही में बिजली उत्पादन के क्षेत्र में भारतीय कंपनियों की भागीदारी और अरब सागर क्षेत्र की सुरक्षा में दोनों देशों के बीच सहयोग के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैसाख की भीषण गर्मी में भी पंखा बंद है। आरोप है कि घर के मालिक ने बिजली कनेक्शन काट दिया. क्योंकि इनमें से किसी का एक महीने का किराया बाकी है तो किसी का दो महीने का। शाम को बंद घर से निकल कर सुरक्षित दूरी पर रवीन्द्र सरानी के फुटपाथ पर बैठने से कोई राहत नहीं मिलती। पुलिस की गाड़ी ने डंडा उठाया और उन्हें ऊपर जाने को कहा.

लगातार लॉकडाउन के कारण कमाई बंद हो गई. शहर की अधिकांश यौनकर्मियों को अपने घर का किराया चुकाने में परेशानी हो रही है। लॉकडाउन के कारण वे घर लौटने में असमर्थ हैं। यहां तक ​​कि किराया चुकाने के लिए भी आमदनी पर्याप्त नहीं है. सोनागाछी की एक यौनकर्मी जो बहरामपुर में अपने घर नहीं लौट सकी, ने कहा, “इतने लंबे समय तक, वह स्वयंसेवी संगठनों, पुलिस और विधायकों द्वारा उपलब्ध कराए गए भोजन पर चल रही थी। पिछले कुछ दिनों से वह सहायता कम होने लगी है। मुझे नहीं पता कि आगे क्या करना है. अगर मुझे खाना मिल भी जाए तो मेरे पास पैसे नहीं हैं, मैं घर का किराया कैसे दे पाऊंगा!

कालीघाट इलाके में ऐसे घर का मासिक किराया घटकर पांच हजार रुपये हो गया है. सोनागाछी में एक घर का न्यूनतम मासिक किराया लगभग आठ हजार टका है। यौनकर्मियों के साथ काम करने वाले एक स्वयंसेवी संगठन के प्रमुख ने कहा, “यदि आप कोलकाता में पांच सितारा होटल के कमरे की प्रति वर्ग फुट कीमत की गणना कर सकते हैं, तो कई मामलों में यह सोनागाछी से भी कम है! यहां की सड़कों पर कई तरह के घर हैं। 20 फीट गुणा 30 फीट श्रेणी ‘ए’ घर और एक ठंडी बालकनी का किराया 60 हजार टका प्रति माह। अगर आपकी आमदनी है तो बात अलग है, लेकिन अब इतने पैसे कोई कैसे दे सकता है?” लंबे समय से सोनागाछी में वॉलंटियर के तौर पर काम कर रहीं रूपा सरकार ने इस घर की और भी दिक्कतों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि किराया कोई भी हो, किसी भी मकान के किराये के बदले किरायेदार को दस्तावेज नहीं दिये जाते हैं. केवल मासिक खाता ही काम करता है. मकान मालिक द्वारा नियुक्त व्यक्ति उस खाते को देखकर किराया लेता था। रूपा ने कहा, ”अनैतिक तस्करी रोकथाम अधिनियम किसी भी घर को यौन कार्य के लिए किराए पर देने पर रोक लगाता है। वह एक आपराधिक अपराध है. इसलिए किराया बिना कागज़ के चला जाता है।” स्वयंसेवी संगठन ‘दरबार महिला समन्वय समिति’ के संस्थापक डॉक्टर स्मरजीत जाना ने कहा, घर के कागजात की कमी के कारण इस समय यौनकर्मियों के लिए अधिक समस्याएं पैदा हो गई हैं। उन्होंने कहा, ”पते का कोई दस्तावेज नहीं है क्योंकि कोई कागज नहीं है. परिणामस्वरूप, कई यौनकर्मियों के पास राशन कार्ड नहीं थे। ऐसे में अगर मदद नहीं मिली तो राशन खाने का भी मौका नहीं मिल रहा है. एक समय में, हमने उषा कोऑपरेटिव के माध्यम से यौनकर्मियों की बैंक पुस्तकें बनाईं। किराये के मकान के पते के साथ वोटर कार्ड चुनाव आयोग को दिया गया था. उस फॉर्मूले के मुताबिक कुछ लोगों को राशन कार्ड मिल गये लेकिन सभी को नहीं.”

एसोसिएशन के सूत्रों के मुताबिक सोनागाछी में विभिन्न जिलों की करीब पांच हजार यौनकर्मी फंसी हुई हैं, जो घर लौटने में असमर्थ हैं. कालीघाट और बाउबाजार सेक्स एरिया में ऐसे करीब दो हजार लोग रह रहे हैं. इसी तरह खिदिरपुर में डेढ़ हजार से ज्यादा सेक्स वर्कर हैं. अगर लॉकडाउन हट भी गया तो भी उनके जल्दी कमाई की ओर लौटने की कोई संभावना नहीं है. क्योंकि पेशे की खातिर उनका स्पर्श बचा पाना नामुमकिन है. ऐसे में यौनकर्मियों के साथ काम करने वाले स्वयंसेवी संगठन चिंतित हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के माध्यम से राज्य की एड्स रोकथाम और नियंत्रण सोसायटी को मिलने वाली धनराशि भी समय पर आएगी या नहीं। उनका दावा है, ”हमने कई घर मालिकों से बात करके किराए की समस्या को अस्थायी रूप से हल करने की कोशिश की है. लेकिन इस तरह से कितने दिनों तक काम चलाया जा सकता है? बाकी के बारे में क्या?”