Thursday, March 5, 2026
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आखिर कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से कैसे बचा जाए?

आज हम आपको बताएंगे कि कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से कैसे बचा जा सकता है! कैंसर, वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती गंभीर और जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है, जिसके कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज का अनुमान है कि 2017 में कैंसर के कारण 9.56 मिलियन, 95.6 लाख लोगों की समय से पहले मौत हो गई। दुनिया में हर छठी मौत कैंसर के कारण होती है। मेडिकल क्षेत्र में आधुनिकता और तकनीक विकास के चलते कैंसर अब लाइलाज बीमारी तो नहीं रही है, पर अब भी आम लोगों के लिए इसका इलाज काफी कठिन बना हुआ है। दुनियाभर में कैंसर के बढ़ते खतरे को लेकर लोगों को जागरूक और शिक्षित करने के उद्देश्य से हर साल चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। कैंसर कई प्रकार के हो सकते हैं, सभी उम्र के व्यक्तियों में इसका जोखिम देखा जा रहा है। लक्षणों की समय पर पहचान और इलाज प्राप्त करके कैंसर से मृत्यु के जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।

कैंसर विश्वभर में मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण है। शरीर के किसी हिस्से में असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि और इसका अनियंत्रित रूप से विभाजन कैंसर का कारक हो सकती है। बता दें कि कैंसर, कोशिकाओं के भीतर डीएनए में उत्परिवर्तन के कारण होता है, इसके लिए कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। जीवनशैली की कुछ गड़बड़ आदतें जैसे धूम्रपान-शराब का सेवन, सूरज के अत्यधिक संपर्क में रहना, मोटापा और असुरक्षित यौन संबंध कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। आनुवांशिकी भी कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है। जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को कैंसर रह चुका है, उनमें कैंसर होने का खतरा अधिक हो सकता है।  आनुवांशिकता, पर्यावरणीय, लाइफस्टाइल में गड़बड़ी, रसायनों के अधिक संपर्क के कारण कैंसर होने का जोखिम बढ़ जाता है। महिलाओं में सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर जबकि पुरुषों में फेफड़े-प्रोस्टेट और कोलन कैंसर का खतरा सबसे अधिक देखा जाता रहा है।

कैंसर के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि यह शरीर के किस हिस्से में विकसित हो रहा है। मुख्यरूप से कैंसर के कारण थकान, अस्पष्टीकृत वजन कम होने की समस्या, त्वचा में परिवर्तन जैसे त्वचा का पीला या काला पड़ना, निगलने में कठिनाई, अस्पष्टीकृत रक्तस्राव की समस्या कैंसर का संकेत हो सकती है। अगर आपके शरीर में कहीं भी असामान्य तरीके से गांठ महसूस हो रही है तो इसकी समय रहते जांच जरूर कराएं। कैंसर, करने के उद्देश्य से हर साल चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। कैंसर कई प्रकार के हो सकते हैं, सभी उम्र के व्यक्तियों में इसका जोखिम देखा जा रहा है। लक्षणों की समय पर पहचान और इलाज प्राप्त करके कैंसर से मृत्यु के जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।कोशिकाओं के भीतर डीएनए में उत्परिवर्तन के कारण होता है, इसके लिए कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। जीवनशैली की कुछ गड़बड़ आदतें जैसे धूम्रपान-शराब का सेवन, सूरज के अत्यधिक संपर्क में रहना, मोटापा और असुरक्षित यौन संबंध कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। आनुवांशिकी भी कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है। जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को कैंसर रह चुका है, उनमें कैंसर होने का खतरा अधिक हो सकता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, समय पर अगर कैंसर का निदान हो जाए तो इसका उपचार और रोगी की जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। कैंसर के कई उपचार उपलब्ध हैं। कैंसर का प्रकार और अवस्था जैसी स्थितियों के आधार पर दवाओं, थेरेपी, सर्जरी के माध्यम से इसका इलाज किया जाता है। वर्तमान में इसका इलाज काफी कठिन बना हुआ है। दुनियाभर में कैंसर के बढ़ते खतरे को लेकर लोगों को जागरूक और शिक्षित करने के उद्देश्य से हर साल चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। कैंसर कई प्रकार के हो सकते हैं, सभी उम्र के व्यक्तियों में इसका जोखिम देखा जा रहा है। लक्षणों की समय पर पहचान और इलाज प्राप्त करके कैंसर से मृत्यु के जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है। डॉक्टर कहते हैं, सभी लोगों को कैंसर से बचाव को लेकर लगातार सावधानी बरतते रहना चाहिए। लाइफस्टाइल और आहार को पौष्टिक रखने के साथ शराब-धूम्रपान को छोड़कर कैंसर के खतरे से बचाव किया जा सकता है।

आखिर कौन है चंपई सोरेन? जिन्हें बनाया गया है झारखंड का नया मुख्यमंत्री!

आज हम आपको चंपई सोरेन के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें झारखंड का नया मुख्यमंत्री बनाया गया है ! चंपई सोरेन ने झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में पद की शपथ ले ली है। हेमंत सोरेन के इस्तीफे के बाद चंपई मुख्यमंत्री बने हैं। चंपई के साथ दो और मंत्रियों ने भी शपथ ली है। चंपई हेमंत सोरेन के करीबी बताए जाते हैं। हेमंत सरकार में चंपई कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। सरकार में झामुमो के अलावा कांग्रेस, राजद भी सहयोगी हैं।  चंपई सोरेन के अलावा कांग्रेस पार्टी के आलमगीर आलम ने मंत्री के रूप में शपथ ली। आलमगीर आलम पाकुड़ सीट से कांग्रेस के विधायक हैं। 70 साल के आलमगीर ने स्नातक की शिक्षा हासिल की है। उन्होंने 2019 में अपनी संपत्ति ₹7.02 करोड़ बताई थी। कांग्रेस नेता ने राजनीति और समाज सेवा से होने वाली आमदनी को अपनी कमाई का जरिया बताया है।

राजद के नेता सत्यानंद भोक्ता ने भी मंत्री के रूप में शपथ ली। सत्यानंद चतरा सीट से राजद के विधायक हैं। वे झारखंड सरकार में राज्य के कृषि मंत्री थे। वहीं पिछली सरकार में श्रम मंत्री थे। 53 वर्षीय सत्यानंद ने 10वीं तक ही पढ़ाई की है। उन्होंने 2019 में अपनी संपत्ति ₹77.58 लाख बताई थी। राजद नेता को राजनीति और समाज सेवा से आमदनी होती है। चंपई सोरेन झारखंड विधानसभा के सदस्य हैं। वर्तमान में वह झारखंड मुक्ति मोर्चा पार्टी से सरायकेला विधानसभा सीट से विधायक हैं। अवैध जमीन घोटाले में फंसे हेमंत सोरेन ने बुधवार को झारखंड के मुख्यमंत्री के पद से अपना इस्तीफा दे दिया। इस दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा झामुमो और कांग्रेस गठबंधन ने सोरेन सरकार में परिवहन मंत्री चंपई सोरेन को विधायक दल का नेता चुन लिया।वर्तमान में वह झारखंड मुक्ति मोर्चा पार्टी से सरायकेला विधानसभा सीट से विधायक हैं। कैबिनेट मंत्री के रूप वह हेमंत सोरेन सरकार में परिवहन, अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।कैबिनेट मंत्री के रूप वह हेमंत सोरेन सरकार में परिवहन, अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।चंपई ने 1974 में जमशेदपुर स्थित राम कृष्ण मिशन हाई स्कूल से 10वीं की पढ़ाई की थी।

जब बिहार से अलग झारखंड राज्य की मांग उठ रही थी उस दौरान चंपई का नाम खूब चर्चा में रहा। शिबू सोरेन के साथ ही चंपई ने भी झारखंड के आंदोलन में भाग लिया। इसके बाद ही लोग उन्हें ‘झारखंड टाइगर’ के नाम से बुलाने लगे। चंपई संयुक्त बिहार में 1991 में उपचुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने थे। सोरेन परिवार के बाहर जिन नामों पर चर्चा चल रही थी उनमें हेमंत सरकार के मंत्री का नाम सबसे आगे था। इनमें परिवहन मंत्री चंपई सोरेन का नाम सबसे आगे रहा है। वह हेमंत सोरेन के सबसे खास लोगों में शामिल हैं। चंपई ने शिबू सोरेन के साथ लंबे समय तक काम किया है।के.सी.मार्डी के इस्तीफा के बाद चंपई ने बतौर निर्दलीय चुनाव जीता था। फिर 1995 में झामुमो के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बने थे।

वहीं 2005 में चंपई झारखंड विधानसभा के लिए चुने गए थे। इसके बाद 2009 में भी विधायक बने। उन्होंने अर्जुन मुंडा वाली सरकार में सितंबर 2010 से जनवरी 2013 तक विज्ञान और प्रौद्योगिकी, श्रम और आवास मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। वहीं जुलाई 2013 से दिसंबर 2014 तक खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, परिवहन कैबिनेट मंत्री थे। 2014 में फिर झारखंड विधानसभा के लिए चुने गए। वहीं 2019 में भी विधायक बने। इसके साथ ही वह हेमंत सरकार में परिवहन, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री बन गए। 2019 में चंपई ने अपनी संपत्ति 2.55 करोड़ बताई थी।

अवैध जमीन घोटाले में फंसे हेमंत सोरेन ने बुधवार को झारखंड के मुख्यमंत्री के पद से अपना इस्तीफा दे दिया। इस दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा झामुमो और कांग्रेस गठबंधन ने सोरेन सरकार में परिवहन मंत्री चंपई सोरेन को विधायक दल का नेता चुन लिया।वर्तमान में वह झारखंड मुक्ति मोर्चा पार्टी से सरायकेला विधानसभा सीट से विधायक हैं। कैबिनेट मंत्री के रूप वह हेमंत सोरेन सरकार में परिवहन, अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।चंपई ने 1974 में जमशेदपुर स्थित राम कृष्ण मिशन हाई स्कूल से 10वीं की पढ़ाई की थी। इससे पहले सोरेन परिवार के बाहर जिन नामों पर चर्चा चल रही थी उनमें हेमंत सरकार के मंत्री का नाम सबसे आगे था। इनमें परिवहन मंत्री चंपई सोरेन का नाम सबसे आगे रहा है। वह हेमंत सोरेन के सबसे खास लोगों में शामिल हैं। चंपई ने शिबू सोरेन के साथ लंबे समय तक काम किया है।

आखिर अब paytm का क्या होगा?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि अब paytm का क्या होगा! ऑनलाइन पेमेंट ऐप पेटीएम को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पेटीएम पेमेंट बैंक पर कार्रवाई कारते हुए बड़ा झटका दिया. जिसके बाद पेटीएम पेमेंट बैंक की कई सेवाओं पर रोक लगा दी जा चुकी है. आरबीआई ने टॉप अप से लेकर क्रेडिट ट्रांजैक्शन तक की कई सेवाओं को 29 फरवरी के बाद रोक लगाने का आदेश सुनाया. कंफ्यूजन हैं. क्या पेटीएम बंद हो जाएगा? पेटीएम का फास्टैग का क्या होगा? बता दे कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक ने भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों की अनदेखी की. जिसके बाद उसके खिलाफ सख्त फैसला लिया गया.

आरबीआई की ये कार्रवाई पेटीएम ऐप पर नहीं पेटीएम पेमेंट बैंक पर हुआ है. यानी यदि आप पेटीएम ऐप का इस्तेमाल करते हैं और वह पेटीएम पेमेंट बैंक से सर्विस नहीं ले रहे हैं. तो एप पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. 29 फरवरी के बाद भी आपका पेटीएम ऐप पहले के जैसे ही काम करता रहेगा. 29 फरवरी के बाद पेटीएम पेमेंट बैंक के वॉलेट में बचे बैलेंस के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए तय सीमा से पहले वॉलेट के बैलेंस को ट्रांसफर कर लें.

पेटीएम पेमेंट बैंक पर आरबीआई ने एक्शन लिया है. केवल इसी से जुड़ी सेवाएं प्रभावित होगी. पेटीएम पेमेंट बैंक से UPI का उपयोग 29 फरवरी के बाद नहीं कर पाएंगे. लेकिन आप चाहे तो भुगतान के लिए अन्य बैंकों की यूपीआई आईडी का इस्तेमाल कर सकते हैं. आरबीआई की कार्रवाई के बाद पेटीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफोर्म एक्स पर जानकारी दी कि इस कार्रवाई का एनसीएमसी कार्ड पर प्रभाव नहीं पड़ेगा. कार्ड के बैलेंस का आप बाद में भी इस्तेमाल कर पाएंगे. पेटीएम अन्य बैंकों के साथ भुगतान की सुविधा के लिए सम्पर्क कर रहा है. पेटीएम फास्टैग का इस्तेमाल 29 फरवरी तक कर सकते हैं. इसके बाद वो निष्क्रिय हो जाएगा. फास्टैग सर्विस जारी रखने के लिए पेटीएम दूसरे बैंकों के साथ मिलकर काम कर रहा है. यदि बैंकों के साथ डील नहीं हो पाती है तो दूसरा नया फास्टैग खरीदना पड़ सकता है.

यदि आपने पेटीएम पेमेंट बैंक से लोन लिया है तो लोन का रीपेमेंट पहले के जैसे ही रहेगा. इसके लिए पहले के जैसे ही किस्तों का भुगतान होगा. पेटीएम की प्रमोटर कंपनी वन97 कम्युनिकेशन अन्य बैंकों के साथ भी काम करते आई है. पेटीएम पेमेंट बैंक पर हुए एक्शन के बाद उन्होंने अन्य बैंकों के साथ काम करना तेज कर दिया है. कंपनी थर्ड पार्टी बैंकों के साथ पहले के जैसे ही काम करेगी. बता दे कि वन97 कम्युनिकेशंस की सहयोगी कंपनी पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड का अगर आप इस्तेमाल करते हैं तो ये खबर आपके काम की है। आरबीआई ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक की कुछ सेवाओं पर रोक लगाई है। हालांकि कस्टमर को ट्रांसफर और विड्रॉल की अनुमति होगी। यहां हम आपको बताते जा रहे हैं कि पेटीएम के खिलाफ आरबीआई के इस कदम का यूजर्स पर क्या असर पड़ने वाला है। पेटीएम में क्या चलेगा और क्या नहीं चलेगा यहां हम आपको इसकी पूरी जानकारी देने जा रहे है, जिससे आपको किसी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े। पेटीएम के मुताबिक, कंपनी को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से फाइनेंशियल सर्विसेज को लेकर निर्देश मिले हैं। वह आरबीआई की ओर से मिले निर्देशों का पालन करने के लिए तुरंत कदम उठा रही है, जिससे पेटीएम का इस्तेमाल कर रहे ग्राहकों को कोई समस्या न हो।

आरबीआई के एक्शन से उन यूजर्स को परेशानी हो सकती है जिन्होंने अपने पेटीएम पेमेंट्स बैंक अकाउंट को यूपीआई से लिंक किया है। अगर आपका यूपीआई एड्रेस एसबीआई या आईसीआईसीआई जैसे किसी दूसरे बैंक अकाउंट के साथ लिंक है तो आरबीआई के एक्शन से आप पर कोई असर नहीं होगा। जो दुकानदार अपने पेटीएम पेमेंट्स बैंक अकाउंट में पैसा रिसीव करते हैं, वे पेमेंट रिसीव नहीं कर पाएंगे। पेटीएम फास्टैग यूजर्स को दूसरे इश्यूर से नया टैग खरीदना होगा और अभी जिसका इस्तेमाल कर रहे हैं, उसे डिएक्टिवेट करना होगा। पेटीएम के जरिए लोन लेने वालों को लगागार रिपेमेंट करते रहना होगा क्योंकि यह लोग थर्ड-पार्टी लेंडर का है, पेटीएम का नहीं।

पेटीएम पर जो बैन लगा है वो पेटीएम पेमेंट्स बैंक की सर्विसेस पर है, ना कि पेटीएम ऐप पर। इसका मतलब है कि पेटीएम ऐप के यूजर्स पहले की तरह ऐप की सर्विसेस का इस्तेमाल कर सकेंगे। पेटीएम के मुताबिक, कंपनी आरबीआई के निर्देशों का पालन करने के लिए तत्काल कदम उठा रही है। कंपनी ने बताया कि इससे यूजर्स के बचत खातों, वॉलेट, फास्टैग और एनसीएमसी खातों में जमा राशि पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं कस्टमर यहां पर उपलब्ध अपने बैलेंस का इस्तेमाल कर सकते हैं। बताया कि पेटीएम पेमेंट कंपनी के रूप में कई बैंकों के साथ काम कर रही है।

आखिर बीजेपी और कांग्रेस की किस यात्रा का पड़ेगा लोकसभा चुनाव पर प्रभाव?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि बीजेपी और कांग्रेस की यात्रा का लोकसभा चुनाव पर कैसा प्रभाव पड़ेगा! इस समय देश में दो यात्राएं चल रही हैं.एक राहुल गांधी की ”भारत जोड़ो न्याय यात्रा” और दूसरी ”विकसित भारत संकल्प यात्रा”.राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा 14 जनवरी 2024 को मणिपुर से शुरू हुई और 20 मार्च 2024 को मुंबई में समाप्त होगी. जबकि विकसित भारत संकल्प यात्रा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 नवंबर 2023 को झारखंड के खूंटी में शुरू किया था.यह यात्रा 26 जनवरी 2024 को समाप्त होने वाली थी लेकिन लक्ष्य पूरा न होने के चलते इसे आगे ब़ढ़ा दिया गया है.अब यह यात्रा लक्ष्य पूरा होने तक जारी रहेगी. इस यात्रा के तहत 2 लाख पचास हजार 362 आयोजन होने थे लेकिन 22 जनवरी 2024 तक 2 लाख 44 हजार 652 आयोजन ही हो सके.अब यह यात्रा तब तक चलेगी जब तक पूरे दो लाख पचास हजार 362 आयोजन नहीं हो जाते! इन दोनों यात्राओं में एक यात्रा राहुल गांधी वाली की तो खूब चर्चा हो रही है लेकिन दूसरी वाली विकसित भारत की बिल्कुल भी नहीं हो रही है.अब आप कह सकते हैं कि चूंकि राहुल गांधी की यात्रा राजनैतिक है और उसे कांग्रेस पार्टी आयोजित कर रही है इसलिए उसकी चर्चा हो रही है जबकि विकसित भारत संकल्प यात्रा सरकारी है, इसलिए उसकी चर्चा नहीं हो रही.लेकिन यह सच नहीं है.इन दोनों ही यात्राओं का मकसद राजनीतिक ही है.

आप याद करिये जब प्रधानमंत्री ने यह यात्रा शुरू की थी तब कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया था. कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनाव प्रचार में सरकारी अफसरों को लगा दिया है. इस यात्रा का मकसद मोदी सरकार की योजनाओं को लोगों को बताना और इस बात की गारंटी करना कि इन योजनाओं का लाभ इन श्रेणी में आने वाले लोगों को मिले. इन योजनाओं में आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जवाहर आवास योजना, प्रधानमंत्री गरीब योजना ग्रामीण, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, पोषण अभियान, हर घर जल, जल जीवन मिशन, जन धन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और अटल पेंशन योजना प्रमुख हैं. इस योजना के राजनैतिक होने का एक दूसरा उदाहरण भी दिया जा सकता है.

अभी पीछे जब पांच राज्यों के चुनाव हुए तो कांग्रेस ने विकसित भारत संकल्प यात्रा की शिकायत की. उसका कहना था कि इससे मतदाताओं को प्रभावित किया जा सकता है. तब चुनाव आयोग ने पांचों राज्यों में इस यात्रा पर रोक लगा दी थी. वैसे भी अधिकारी इस योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए अपनी सुविधा के लिए बीजेपी कार्यकर्ताओं की मदद लेते हैं.

तो आपने देखा कि इन दोनों ही यात्राओं का मकसद राजनैतिक ही है.अब अगर एक की चर्चा हो रही है और दूसरे की नहीं तो इसकी वजह भी है.राहुल गांधी की यात्रा जहां लोगों को आकर्षित कर रही है वहीं विकसित भारत संकल्प यात्रा में लोग बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं ले रहे.भाजपा शासित राज्यों में तो इस यात्रा का थोड़ा असर दिख भी रहा है लेकिन जिन राज्यों में विपक्षी सरकारें हैं वहां तो यह यात्रा बिल्कुल लोट गई है.

उदाहरण के लिए ओडिशा में नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल की सरकार है. वह सरकार विभिन्न मुद्दों पर केंद्र में मोदी सरकार का समर्थन भी करती है. इस तरह नवीन पटनायक को मोदी के सहयोगी के तौर पर मान सकते हैं. बावजूद इसके वहां विकसित भारत संकल्प यात्रा में महज पांच प्रतिशत लोगों ने दिलचस्पी दिखाई. कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है. वहां छह प्रतिशत लोगों ने रुचि ली तो पंजाब में आप की सरकार के लोगों ने भी इतनी ही दिलचस्पी दिखाई. बिहार में सात प्रतिशत तो तमिलनाडु और तेलंगाना में आठ प्रतिशत लोगों ने रुचि दिखाई. हां, बीजेपी शासित राज्यों में जरूर इस यात्रा का असर दिखा. वह भी उतना ज्यादा नहीं. बीजेपी को उन राज्यों में जितना वोट मिलता है उससे भी कम लोगों ने इस यात्रा में उत्साह दिखाया. हरियाणा में प्रति ग्राम पंचायत इस यात्रा में 33 प्रतिशत लोगों ने शिरकत की तो गुजरात में 35 प्रतिशत. उत्तर प्रदेश में 38 प्रतिशत तो मध्य प्रदेश में 47 प्रतिशत. राजस्थान में इस यात्रा को सबसे ज्यादा रिस्पांस मिला. वहां इस यात्रा को 68 प्रतिशत लोगों ने समर्थन दिया.

इसके विपरीत असम में इस यात्रा की स्थिति विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों जैसी दिखी. वहां महज पांच प्रतिशत लोगों ने इस यात्रा में दिलचस्पी दिखाई.आपने देखा कि जब राहुल गांधी असम पहुंचे तो वहां उनकी यात्रा में शामिल होने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी. यहां तक कि वहां की सरकार ने जब राहुल गांधी को एक स्कूल के छात्रों से मिलने की इजाजत नहीं दी तो छात्र खुद क्लास छोड़कर उनसे मिलने सड़क पर आ गये. यह स्थिति निश्चित ही मोदी सरकार और भाजपा के लिए चिंतनीय है खासकर तब जब 2024 के आम चुनाव काफी नजदीक आ गये हैं.

क्या भारत बन पाएगा दुनिया का रेलवे पावर हाउस?

भारत अब दुनिया का रेलवे पावर हाउस बन सकता है! केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में रेल को लेकर सरकार की गंभीरता और उत्साह की घोषणा की और कहा कि यात्रियों के यात्रा अनुभव को बेहतर बनाने और तेज गति देने के उद्देश्य से, जिससे यात्रा का समय कम हो जाए, अब रेल मंत्रालय 40,000 सामान्य रेल बोगियों को वंदे भारत मानकों में परिवर्तित करेगी. यह भारत के रेलवे बुनियादी ढांचे के लिए एक महत्वपूर्ण बढ़ावा है, जो केंद्र सरकार के पूंजीगत व्यय का एक केंद्रीय घटक है. सीतारमण ने पीएम गति शक्ति योजना के तहत लॉजिस्टिक्स दक्षता और कनेक्टिविटी में सुधार के लिए तीन प्रमुख आर्थिक रेलवे कॉरिडोर कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की भी घोषणा की! बाद में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि मेरा उद्देश्य भारत के रेलवे नेटवर्क को जर्मनी के बराबर अपग्रेड करना है. ताकि एक्सपोर्ट का मार्केट खुल सके. हमारा ध्यान वर्ल्ड क्लास रेल पर है.

वंदे भारत बोगी स्टैंडर्ड बोगियों से समग्र वजन को कम करते हैं, जिससे सामान्य बोगियों की तुलना में तेज त्वरण और मंदी की अनुमति मिलती है. ऐसे बोगियों का निर्माण इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई द्वारा किया जाता है, जिसका स्वामित्व और संचालन भारतीय रेलवे के पास है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सामान्य बोगियों को वंदे भारत मानकों के अनुरूप अपग्रेड करने में लगभग 15,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी और इसे लागू करने में 5 साल लगेंगे.

इस बीच, तीन प्रमुख आर्थिक रेलवे गलियारा कार्यक्रमों का उद्देश्य रसद दक्षता में सुधार करना और लागत कम करना और ऊर्जा, खनिज, सीमेंट, बंदरगाह कनेक्टिविटी और उच्च यातायात घनत्व गलियारों पर ध्यान केंद्रित करना है. हमने ऐसे तकरीबन 450-460 प्रोजेक्ट्स की पहचान की है , जिसमें कुछ में दोहरीकरण करना है, कुछ में मल्टी ट्रैकिंग करना शामिल है. करीब-करीब 40 हजार किलोमीटर नए रेलवे ट्रैक बनेंगे. इस प्रोजेक्ट को अमृत चतुर्भुज का रूप दिया गया है, और लक्ष्य है इसे जर्मनी के नेटवर्क बराबर अपग्रेड करना!

रेलमंत्री ने कहा कि अब तक के अनुभवों में हमारे पास वंदे भारत का अनुभव है, अमृत भारत का अनुभव है. इन दोनों अनुभवों से वंदे भारत के कोच को और भी अपग्रेड करेंगे. रेलवे में कैपेसिटी बढ़ाना सबसे बड़ी जरूरत थी. ट्रेन में 700 करोड़ को ट्रैवल कर रहे हैं इसको बढ़ा कर 1000 करोड़ करना लक्ष्य है. ऐसे में तीन साल बाद वंदे भारत को एक्सपोर्ट करना शुरू करेंगे. वंदे भारत और कवच पर सरकार का मुख्य रूप से फोकस है, मसलन सुरक्षित यात्रा सरकार का केंद्र बिंदु है. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुलेट ट्रेन को भी 28 भूकंपमापी स‍िस्‍टम सिस्मोमीटर से लैस करने की घोषणा की है.

परिणामस्वरूप उच्च-यातायात गलियारों में भीड़भाड़ कम होने से यात्री ट्रेनों के संचालन में सुधार करने में भी मदद मिलेगी, जिसके परिणामस्वरूप सुरक्षा और उच्च यात्रा गति होगी. समर्पित माल ढुलाई गलियारों के साथ, ये तीन आर्थिक गलियारा कार्यक्रम सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि में तेजी लाएंगे और रसद लागत को कम करेंगे, रेल मंत्री वैष्णव ने कहा कि अगले 6-8 वर्षों में इन गलियारों के लिए 40,000 किमी नई पटरियां बिछाई जाएंगी और पूरे कार्यक्रम पर अनुमानित 11,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी. वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए, रेलवे को आवंटित अनुमानित बजट चालू वित्त वर्ष 24 के लिए 2.6 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान की तुलना में थोड़ा अधिक 2.65 लाख करोड़ रुपये है. FY25 के लिए कुल बजट आवंटन में से 13,000 करोड़ रुपये का वित्तपोषण उधार के माध्यम से किया जाएगा, जो चालू वित्तीय वर्ष के लिए 20,000 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से 35 प्रतिशत की भारी कमी है. इसके अलावा, वित्त वर्ष 2015 में रेलवे की वाणिज्यिक लाइनों पर अनुमानित पूंजी परिव्यय वित्त वर्ष 2014 के 2.4 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान की तुलना में बढ़ाकर 2.52 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है.

अंतरिम बजट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के लिए संशोधित अनुमान 24.3 लाख करोड़ रुपये की तुलना में रेल मंत्रालय को 25.5 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. FY24 के लिए संशोधित अनुमान पिछले साल बजट में घोषित 24.1 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा अधिक है. वित्त वर्ष 2015 में रेलवे की रणनीतिक लाइनों पर अनुमानित पूंजी परिव्यय भी वित्त वर्ष 2014 के 101 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से बढ़कर 107 करोड़ रुपये हो गया है, जो 75 करोड़ रुपये के प्रारंभिक अनुमान से काफी अधिक है. भारत की पहली बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्‍ट को पूरा करने का काम भी जोर शोर से क‍िया जा रहा है. बुलेट ट्रेन को सबसे पहले मुंबई-अहमदाबाद के बीच संचाल‍ित क‍िया जाएगा, ज‍िसका ट्रायल रन संभवत: 2026 में होगा!

क्या ज्ञानवापी मामला जाएगा सुप्रीम कोर्ट?

अब ज्ञानवापी मामला सुप्रीम कोर्ट भी जा सकता है! उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिला कोर्ट के आदेश के बाद ज्ञानवापी परिसर स्थित व्यासजी तहखाने का दरवाजा खोल दिया गया। 31 सालों के बाद वहां पूजा- अर्चना शुरू कर दी गई है। 4 नवंबर 1993 को तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार के आदेश पर वाराणसी प्रशासन ने व्यासजी तहखाने को सील कर दिया था। इसके बाद से लगातार मंदिर के गेट को खोलने और नियमित पूजा करने की सुविधा देने का मामला जिला कोर्ट में चल रहा था। 31 दिसंबर को वाराणसी जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने इस मामले में बड़ा फैसला देते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दे दिया। व्यासजी तहखाने के रिसीवर वाराणसी डीएम को एक सप्ताह में पूजा शुरू कराने का आदेश दिया गया। इस मामले को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने एक मीडिया इंटरव्यू में बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि ज्ञानवापी केस को सुप्रीम कोर्ट ले जाने की तैयारी है। पूजा शुरू कराकर इस मामले में दबाव बढ़ाया जाएगा। केस को प्रभावित किए जाने की तैयारी है। यही प्लान है। डॉ. इलियास ने वाराणसी कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन की सक्रियता को चौंकाने वाला करार दिया। दरअसल, वाराणसी की जिला अदालत की ओर से हिंदू वादियों को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के दक्षिणी तहखाने में प्रार्थना करने की अनुमति दी गई थी। वाराणसी प्रशासन ने इस फैसले के कुछ ही घंटों के भीतर वहां पर पूजा- पाठ शुरू करा दी। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि आदेश और उसके बाद की घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण और चौंकाने वाली हैं। एआईएमपीएलबी के प्रवक्ता और वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने इस मामले को बाबरी विवाद से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद मामले में 22 दिसंबर 1949 को अंदर मूर्ति स्थापित करने के बाद परिसर में ताला लगा दिया गया था। इसे 1 फरवरी 1986 को खोला गया।

फैजाबाद जिला कोर्ट ने दर्शन की अनुमति देने के लिए ताले खोलने का आदेश दिया था। उस समय भी मुस्लिम पक्ष को सुने बिना फैसला सुनाया गया था। उस समय दूरदर्शन के जरिए बड़े पैमाने पर प्रचार किया कि रामलला की पूजा की जा सकती है। कल रात ज्ञानवापी में जो हुआ वह बिल्कुल वैसा ही प्रतीत होता है। एआईएमपीएलबी के प्रवक्ता ने कहा कि बाबरी मामले में जब स्वामित्व का मुकदमा अदालत में लंबित था। उस समय भी मस्जिद के अंदर दर्शन और पूजा अर्चना शुरू की गई थी। ठीक ऐसा ही बुधवार को ज्ञानवापी में भी हुआ। कोर्ट में एक आवेदन दायर किया गया था और कोर्ट ने व्यासजी तहखाने के अंदर पूजा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने प्रशासन को व्यवस्था करने के लिए सात दिन का समय दिया। लेकिन, देर रात तक सारी व्यवस्थाएं कर ली गईं और पूजा शुरू कर दी गई। भले मामले में सुनवाई जारी रहेगी, लेकिन यह स्थिति गलत है।

एआईएमपीएलबी के प्रवक्ता डॉ. इलियास ने कहा कि कोर्ट के आदेश से परिसर में तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है। एक वर्ग वहां पूजा के लिए जाएगा। दूसरा पक्ष मस्जिद में नमाज के लिए पहुंचेगा। इससे संघर्ष की स्थिति बन सकती है। उन्होंने कहा कि हिंदू पक्ष का यहां दावा कितना मजबूत होगा ये ईश्वर जानें। लेकिन, वर्तमान स्थिति सही नहीं है। वहां पर पूजा की इजाजत दिए जाने से पहले इस सवाल पर निर्णय लेने की जरूरत है कि क्या मस्जिद किसी और चीज के ऊपर बनाई गई है। इस सवाल का जवाब तय किए बिना वहां पर पूजा की इजाजत कैसे दी जा सकती है?

एआईएमपीएलबी के प्रवक्ता ने बाबरी मस्जिद पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि हमने बाबरी मामले में कोर्ट के आदेश को नहीं माना था। हमारी ओर से एक समीक्षा याचिका दायर की थी, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया। उसके बाद हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा था। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फैसला तो दिया, लेकिन बाबरी मामले में न्याय नहीं किया। ज्ञानवापी मामले में ऐसा फैसला हमें कैसे स्वीकार्य हो सकता है? उन्होंने कहा कि आपके पास कोई सबूत न होने के बावजूद भी आप पूजा शुरू कर देते हैं? जब तक ये मामला सुप्रीम कोर्ट में जाएगा, तब तक काफी पानी बह चुका होगा। तहखाना में पूजा जारी रहेगी और इससे केस पर असर पड़ेगा। यह एक सोची- समझी योजना है।

डॉ. इलियास ने सभी दलों पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी दल अवसरवादी हैं। उन्हें डर है कि अगर वे इस मामले में कुछ भी बोलेंगे तो हिंदू उनसे नाराज हो जायेंगे। आपको इंसाफ के बारे में बोलना चाहिए। जो सही है वह कहो। मौन रहना किसी भी मुद्दे का समाधान नहीं है। विपक्षी दल कहेंगे कि वे अदालत के फैसले के खिलाफ कुछ नहीं कर सकते। लेकिन वे कम से कम तब टिप्पणी कर सकते हैं जब अदालत कोई गलत निर्णय देती है। यह कहना गलत होगा कि जो कुछ भी हो रहा है, सभी हिंदू उसका समर्थन करते हैं। मंदिर- मस्जिद विवाद पैदा किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बात मथुरा और काशी तक ही सीमित नहीं है। लखनऊ की टीले वाली मस्जिद जैसी कई अन्य मस्जिदों पर भी दावे किए गए हैं। अगर यही सिलसिला जारी रहा तो कल मंदिरों पर भी बौद्धों की ओर से दावा किया जाएगा। हम देश को किस दिशा में ले जा रहे हैं?

प्रवक्ता ने कहा कि यह दावा भी गलत है कि 1993 तक ज्ञानवापी दक्षिणी तहखाने में प्रार्थना और पूजा की जाती थी। यह पूजा स्थल अधिनियम की भावना के भी खिलाफ है। विरोधी पक्ष को अपील दायर करने का समय दिया जाना चाहिए था। मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा। हालांकि, जब आप अंतरिम फैसले के आधार पर वहां पूजा की इजाजत दे देते हैं, तो मामले में फैसला करने के लिए क्या बचता है? सबसे पहले, मस्जिद के नीचे क्या मौजूद है, इसे अदालत में साबित किया जाना चाहिए। ऐसे फैसलों के बाद पूरा मामला ही अर्थहीन हो जाता है।

एआईएमपीएलबी के प्रवक्ता ने कहा कि अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद जिला अदालत और हाई कोर्ट में मुकदमा लड़ेगी। मामला जब सुप्रीम कोर्ट में आएगा तो एआईएमपीएलबी हस्तक्षेप करने पर विचार करेगा। अभी तक हमारी कानूनी टीम अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद से संपर्क में है। हम उन्हें कानूनी राय के साथ मदद करेंगे। इस मामले में एआईएमपीएलबी कोई पार्टी नहीं है, लेकिन बोर्ड एक पार्टी है। मामला मस्जिद से जुड़ा है। अभी यह कहना कठिन है। हमारा मानना है कि जब भी प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 को लागू किया जाएगा तो वहां ऐसी कोई बात नहीं होनी चाहिए। यह साबित हो चुका है कि ज्ञानवापी मस्जिद कई साल पुरानी है। यह दावा करना गलत है कि इसे औरंगजेब ने बनवाया था, क्योंकि रिकॉर्ड कहते हैं कि मस्जिद का निर्माण बहुत पहले हुआ था।

डॉ. इलियासी ने कहा कि इसका जीर्णोद्धार औरंगजेब के शासनकाल के दौरान ही किया गया था। इस्लाम में यह धार्मिक आदेश है कि आप किसी दूसरे की ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा करके या किसी मंदिर या किसी अन्य पूजा स्थल को तोड़कर मस्जिद नहीं बना सकते। इसलिए यह आरोप गलत है कि मुसलमानों ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई। बाबरी मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि इसका निर्माण किसी मंदिर को तोड़कर किया गया था।

आखिर कब होगा अजीत पवार गुट का फैसला?

आज हम आपको बताएंगे कि अजीत पवार गुट का फैसला आखिर कब होगा! सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी विधायकों की अयोग्यता पर फैसला लेने के लिए स्पीकर को 15 फरवरी तक का वक्त दिया है। शरद पवार गुट की तरफ से अजित पवार के साथ गए विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान स्पीकर नारवेकर की तरफ से सॉलिसिटर जनरल वकील तुषार मेहता ने कोर्ट से 3 सप्ताह का समय मांगा था, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें 15 दिन का समय दिया है। चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि विधायकों की अयोग्यता पर आदेश पारित करने के लिए 15 फरवरी तक का समय दिया जाए। इस पर कोर्ट ने कहा कि अयोग्यता पर फैसले के लिए 15 दिनों का समय दिया है। नार्वेकर ने पिछले दिनों शिवसेना के विधायकों पर अपना फैसला दिया था। जिसे उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पहले सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर को इस मामले में फैसला करने के लिए 31 जनवरी तक का समय दिया था।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि स्पीकर राहुल नार्वेकर शिवसेना के मतभेद पर दायर अयोग्यता याचिकाओं पर फैसले लेने में व्यस्त थे, ऐसे में कोर्ट द्वारा दी गई 31 तारीख पर आदेश का पालन करना संभव नहीं हैं। ऐसे में अतरिक्त समय दिया जाए। शरद गुट के नेता और महाराष्ट्र एनसीपी के प्रमुख जयंत पाटिल ने यह याचिका दाखिल की है। पिछले साल अजित पवार बीजेपी की अगुवाई वाले महायुति सरकार में शामिल हो गए थे। अजित गुट के विधायकों की अयोग्यता का मामला जहां स्पीकर के सामने विचाराधीन है तो वहीं एनसीपी किसकी है। यह मामला चुनाव आयोग में फैसले के लिए लंबित है।

2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने 288 सदस्यों वाली विधानसभा में 53 सीटों पर जीत हासिल की थी। एनसीपी में टूट के बाद काफी विधायक अजित पवार के साथ चले गए थे। अभी अजित पवार के साथ पार्टी 41 विधायक हैं, जबकि शरद पवार के साथ सिर्फ 12 विधायक है। महाराष्ट्र की सरकार को कुल 185 विधायकों का समर्थन है, जबकि विपक्ष में सिर्फ 77 विधायक हैं। बता दें कि शिवसेना विधायकों की अयोग्यता पर स्पीकर के फैसले के बाद अब सभी की नजरें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायकों की अपात्रता के मामले में टिकी हैं। अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी गुट के मुख्य मुख्य सचेतक अनिल पाटिल ने शरद पवार के अध्यक्ष बनने को गैरकानूनी कहा है। पाटिल ने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के समक्ष एक हलफनामा प्रस्तुत किया है। इसमें कहा गया है कि शरद पवार का एनसीपी के रूप में चुनाव अध्यक्ष अवैध था। यह पार्टी संविधान के अनुरूप नहीं था। नार्वेकर इन दिनों एनसीपी के प्रतिद्वंद्वी गुटों द्वारा दायर अयोग्यता याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे हैं। राहुल नार्वेकर ने अगली सुनवाई के लिए 23 जनवरी की तारीख तय की है।

जलगांव से राकांपा विधायक अनिल पाटिल एकनाथ शिंदे सरकार में राहत एवं पुनर्वास मंत्री हैं। पाटिल ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए शरद पवार गुट के 10 विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए स्पीकर के समक्ष अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं, जबकि शरद पवार गुट के राज्य राकांपा अध्यक्ष जयंत पाटिल ने विरोधी गतिविधियों के लिए अजीत पवार के नेतृत्व वाले विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए 40 याचिकाएं दायर की हैं। अजित गुट के मुख्य सचेतक पाटिल ने हलफनामे में कहा है कि पार्टी को शरद पवार द्वारा चलाया और प्रशासित किया जा रहा था। यह पार्टी के संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है। हलफनामें में कहा गया है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए शरद पवार का दावा भी एक कथित चुनाव पर आधारित है, जो कभी आयोजित नहीं किया गया था, तो वहीं दूसरी तरफ शरद पवार समूह का आरोप है कि चुनाव हुआ था।

पाटिल ने आरोप लगाया कि पार्टी संगठन को तानाशाही तरीके से चलाया जा रहा है, जहां शरद पवार पार्टी के मामलों को अपनी सनक और इच्छा के अनुसार चलाते हैं और पार्टी में किसी अन्य नेता को पार्टी के मामलों में कुछ भी कहने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा, पाटिल ने कहा कि राज्य अध्यक्षों और राष्ट्रीय समिति और कार्यसमिति सहित सभी समितियों का चुनाव होना था, लेकिन शरद पवार ने वास्तव में अपनी कथित क्षमता में सभी राज्य अध्यक्षों को अध्यक्ष के रूप में नामित किया है। अनिल पाटिल ने दावा किया है रेकॉर्ड के अनुसार पिछले साल 30 जून को अजित पवार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए थे। इस सबंध में चुनाव आयोग को भी सूचित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट शिवसेना के मामले की तरफ इस मामले में भी स्पीकर से अयोग्यता की याचिकाओं पर फैसला लेने को कहा है।

इस बार के बजट पर क्या बोले शशि थरूर?

आज हम आपको बताएंगे कि इस बार के बजट पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने क्या बयान दिया है! कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे पहले से तय होने के भारतीय जनता पार्टी के दावे को खारिज करते हुए गुरुवार को कहा कि पिक्चर अभी बाकी है और अंतरिम बजट मोदी सरकार का अंतिम बजट लगता है। थरूर ने जीडीपी को गवर्नेंस, डेवलपमेंट और परफॉर्मेंस बताने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की आलोचना भी की और कहा कि इस व्यवस्था के तहत जी का मतलब गवर्नमेंटल इंट्रूजन एंड टैक्स टेररिज्म , डी का मतलब डेमोग्रेफिक बिट्रेयल और पी का मतलब पावर्टी एंड राइजिंग इनिक्वालिटी है। थरूर ने अंतरिम केंद्रीय बजट को निराशाजनक करार देते हुए कहा कि बेरोजगारी की बात वित्त मंत्री के भाषण से पूरी तरह गायब थी। उन्होंने दावा किया कि आम आदमी के जीवन में सुधार के मामले में सरकार को एफ ग्रेड फेल मिलता है। थरूर ने कहा, मुद्रास्फीति, विशेष रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि इतनी चौंकाने वाली है कि नीचे की 20 प्रतिशत आबादी बाजार में उन्हें खरीदने में असमर्थ है, जबकि वे एक या दो साल पहले खरीद सकते थे।

यह आम भारतीय के जीवन की वास्तविकता है, यही कारण है कि सरकार चाहती है कि लोग राम मंदिर के लिए गर्व करते हुए वोट करें या बालाकोट, पुलवामा की घटना को लेकर पाकिस्तान पर कथित प्रहार के लिए गर्व के आधार पर वोट दें। पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना था कि भाजपा को 2019 में इसी तरह सफलता मिली थी। उन्होंने कहा, इस बार राम मंदिर मुद्दा बनने जा रहा है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि अबू धाबी मंदिर को जोड़ा जााएगा। स्पष्ट रूप से सरकारें ऐसा करने के लिए नहीं चुनी जाती हैं, सरकारें आम लोगों के जीवन में सुधार के लिए चुनी जाती हैं। क्या इस सरकार ने ऐसा किया? मैं कहूंगा कि उस विशेष मानदंड पर वह सरकार पूरी तरह विफल है।

यही नहीं तृणमूल कांग्रेस टीएमसी ने अंतरिम बजट को लोकसभा चुनाव से पहले ‘चुनावी शिगूफा’ करार दिया। टीएमसी ने बीजेपी से राजनीतिक नौटंकी बंद करने और मानव कल्याण को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। टीएमसी की वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने किसानों की आत्महत्याओं का जिक्र करते हुए केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी की निंदा की। भट्टाचार्य ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में प्रतिदिन औसतन 30 किसान आत्महत्या करते हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, बजट में अन्नदाता के कल्याण के लिए आपका दावा पिछले पांच सालों में 53,478 किसानों की आत्महत्या का मजाक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिखावा बंद करें और राजनीति के बजाय जीवन को प्राथमिकता दें।

सूर्योदय योजना पर चर्चा के दौरान सीतारमण की ओर से अयोध्या में राम मंदिर के संदर्भ का हवाला देने पर भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार पर लोगों का ध्रुवीकरण करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। टीएमसी भवन में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि हमने हमेशा कहा है कि मंदिर, मस्जिद और चर्च हो सकते हैं लेकिन जब आप बजट के दौरान मंदिर का उल्लेख करती हैं, तो यह स्पष्ट है कि आप इसे राजनीतिक एजेंडे के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं। सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना से एक करोड़ परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलेगी और उन्हें सालाना 18,000 रुपये तक की बचत करने में मदद मिलेगी। केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि यह योजना अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक दिन पर लिए गए प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करती है।

भट्टाचार्य ने कहा कि बजट में लोगों को मूर्ख बनाने के लिए झूठ और प्रहसन के अलावा कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि यह बजट और इसकी घोषणाएं चुनावी शिगूफा के अलावा कुछ नहीं हैं। इस बजट में आम लोगों को देने के लिए कुछ भी नहीं है। केंद्र को जवाब देना चाहिए कि उसने राज्य का वित्तीय बकाया क्यों रोक रखा है। भट्टाचार्य ने कहा कि बजट में युवाओं की चिंताओं को दूर करने और महंगाई से निपटने पर ध्यान नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने दावा किया कि महंगाई दर मध्यम है, लेकिन खाद्य महंगाई दरों पर करीब से नजर डालने पर एक अलग कहानी सामने आती है। प्रधानमंत्री मोदी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए अंतरिम आम बजट को ‘ऐतिहासिक, समावेशी और नवोन्मेषी’ करार दिया तथा कहा कि यह बजट 2047 के ‘विकसित भारत’ की नींव को मजबूत करने की गारंटी है।

रेलवे के लिए कैसा रहा इस बार का बजट?

इस बार का बजट रेलवे के लिए भी काफी खास रहा है! इस साल के अंतरिम बजट में रेलवे पर विशेष ध्यान दिया गया है। विशेष ध्यान इसलिए क्योंकि इस साल पिछले साल के मुकाबले 15 हजार करोड़ रुपये ज्यादा आवंटित किए गए हैं। इस साल रेलवे को दो लाख 55 हजार करोड़ रुपये की सौगात मिली है। इस रकम से रेलवे के तीन नए कॉरिडोर और 40 हजार पुराने डिब्बों को वंदे भारत ट्रेन के सुविधाजनक कोच में बदला जाएगा। आइए समझिए कहां और कितना आवंटन बढ़ा है। अंतरिम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की है कि देश में तीन मेजर इकॉनमिक रेलवे कॉरिडोर बनाए जाएंगे। इनमें से एक कॉरिडोर, एनर्जी, मिनरल और सीमेंट का होगा। दूसरा, पोर्ट कनेक्टिविटी कॉरिडोर और तीसरा, हाई स्पीड डेंसिटी कॉरिडोर। इस प्रोजेक्ट को पीएम गतिशक्ति योजना में मल्टि मॉडल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। इससे ना केवल लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ेगी, बल्कि लागत में भी कमी आएगी।

इकॉनमिक कॉरिडोर बनने से आम जनता को भी फायदा होगा। अभी एक ही रेलवे लाइन पर पैसेंजर ट्रेन और गुड्स ट्रेन का ऑपरेशन होता है। रेलवे की आमदनी का मुख्य जरिया माल गाड़ी है जबकि पैसेंजर ट्रेन में देश के माननीय चलते है। इसलिए दोनों को समय से चलाना जरूरी है। लेकिन ऐसा हो नहीं पाता है। इसलिए रेलवे ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बना कर माल गाड़ी के ऑपरेशन को बेहतर किया। अब तीन इकॉनमिक कॉरिडोर बनाने की बात है। इससे जिन रेल रूट पर ट्रेनों का बहुत अधिक ट्रैफिक है। वहां पर ट्रैफिक लोड कम होगा, जिससे यात्री ट्रेनों की संख्या और स्पीड बढ़ने में भी मदद मिलेगी। ट्रेनों की संख्या बढ़ने से यात्रियों का सफ़र सुहाना होगा। और अधिक यात्री सफर कर सकेंगे। माना जा हरा है कि इन तीनों कॉरिडोर से देश की जीडीपी ग्रोथ बढ़ेगी और लॉजिस्टिक कॉस्ट कम होगी।

रेलवे के रिटायर्ड मेंबर ट्रैफिक श्री प्रकाश का कहना है कि तीन नए आर्थिक कॉरिडोर बनने से कई तरह के फायदे सामने आएंगे। इसमें जब माल ढुलाई के लिए अलग-अलग स्तर पर तीन कॉरिडोर देश को और मिल जाएंगे, तब दूसरी तरफ इसका बड़ा फायदा यात्री ट्रेनों की संख्या और स्पीड बढ़ने के रूप में भी मिलेगा। जब गाड़ियों को रास्ता मिलेगा तो गाड़ियां समय से चलाने में मदद मिलेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ट्रेनों के 40 हजार सामान्य कोच को वंदे भारत ट्रेनों के मानकों जैसा कन्वर्ट करने की घोषणा की है। इससे ज़ाहिर है कि यात्रियों की सुविधा का ख्याल किया जा रहा है। एक्सपर्ट का कहना है कि आने वाले समय में ट्रेनों से सफर करने वाले यात्रियों और माल ढुलाई के लिए रेलवे ट्रेनों की संख्या बढ़ाने और हाई स्पीड ट्रैक बिछाने के साथ ही यात्रियों को और अधिक सुविधाएं मिलेंगी। इससे ट्रेनों में टिकटों के लिए होने वाली मारा-मारी भविष्य में पूरी तरह से खत्म नहीं भी होगी तो काफी हद तक कम ज़रूर होगी। साथ ही देश में आने वाले समय में वंदे भारत ट्रेनों की अधिक से अधिक सेवाएं ली जाएंगी।

साल 2021 का बजट रेलवे के लिए ऐतिहासिक था। उस साल पहली बार रेलवे को बजट से एक लाख करोड़ से अधिक रकम आवंटित की गई थी। इसके बाद से हर साल लगातार रेलवे का बजट आवंटन एक लाख करोड़ रुपये से अधिक ही रहा है। साल 2022 के बजट में यह बढ़ कर एक लाख 40 हजार करोड़ हुआ तो 2023 में यह दो लाख 40 हजार करोड़ रहा। इस बार रेलवे को दो लाख 55 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जोकि 15 हज़ार करोड़ रुपये अधिक हैं।

केंद्र सरकार ने दिल्ली में रेलवे के विकास के लिए 2577 करोड़ रुपये का बजट दिया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का कहना है कि दिल्ली में रेलवे को पहले की सरकार की तुलना में 25 गुना ज्यादा फंड दिया गया है। मंत्री का कहना है कि यूपीए सरकार के दौरान 2009-14 के बीच औसतन केवल 96 करोड़ का बजट था, इसमें अब बहुत बड़ा इजाफा किया गया है, ताकि रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से विकास किया जा सके। जानकारी के अनुसार बजट में दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल के विस्तार की घोषणा की गई है। इसके अलावा दिल्ली से अलवर के बीच 104 किलोमीटर की नई रेल लाइन बिछाई जाएगी। दिल्ली-सहारनपुर बाईपास के बीच 175 किलोमीटर का ट्रैक बिछाया जाएगा। इसके अलावा नई दिल्ली से तिलक ब्रिज के बीच पांचवी और छठी लाइन बिछाई जाएगी। यह लाइन 2.65 किलोमीटर की होगी। दिल्ली सब्जी मंडी और दिल्ली मेन के बीच अतिरिक्त लाइन बिछाए जाने की भी योजना है।

रेलवे ने इस बार मुंबई में यात्री सुविधाओं को बढ़ावा देने के साथ ही मौजूदा रेल ओवर ब्रिज का काम पूरा करने के लिए ठीकठाक राशि का प्रस्ताव दिया है। पश्चिम रेलवे को सड़क सुरक्षा के लिए 1196 करोड़ रुपये का बजट में प्रस्ताव है। इसमें से प्रभादेवी, दादर और विरार-वैतरणा रोड ओवरब्रिज को दोबारा बनाया जाना है। मध्य रेलवे को सड़क सुरक्षा के लिए 756 करोड़ राशि का बजट में प्रस्ताव है। इसमें विक्रोली और दिवा रेल ओवर ब्रिज और दिवा-वसई, दिवा-पनवेल लाइन पर आरओबी का प्रस्ताव है। यात्री सुविधाओं के लिए बजट में पश्चिम रेलवे के लिए 1135 करोड़ और मध्य रेलवे के लिए 1022 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है। इनमें स्टेशनों पर एस्केलेटर्स, लिफ्टस, प्लैटफॉर्म रूफ और फुटओवर ब्रिज के काम होने हैं। बजट में महाराष्ट्र की रेलवे परियोजनाओं के लिए करीब 15,500 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है।

क्या अब लोन की किश्त भी घटने वाली है?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अब लोन की किस्त भी घटने वाली है या नहीं! अंतरिम बजट में फिस्कल डेफिसिट, सरकारी उधारी और कैपिटल एक्सपेंडिचर के मोर्चे पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो बातें सामने रखी हैं, उनसे रुपये और इंफ्रास्ट्रक्चर को जरूरी सपोर्ट मिलने के साथ ब्याज दरों में कमी की राह भी बन सकती है। सीतारमण ने अगले वित्त वर्ष में फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 5.1 प्रतिशत तक रखने की बात की और कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 5.9 प्रतिशत के बजाय 5.8 पर रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि सरकारी उधारी मौजूदा के मुकाबले अगले वित्त वर्ष में कम होगी जिससे प्राइवेट इनवेस्टमेंट बढ़ाने में मदद मिलेगी। मौजूदा वित्त वर्ष में 17 लाख 34 हजार 773 करोड़ रुपये के रिवाइज्ड एस्टिमेट के मुकाबले अगले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 16 लाख 85 हजार 494 करोड़ रुपये तक रखने का लक्ष्य दिया गया है। राजस्व के मिलने और खर्च के अंतर यानी फिस्कल डेफिसिट के इंतजाम के लिए सरकार बॉन्ड जारी कर बाजार से उधार लेती है। सीतारमण ने कहा, ‘2024-25 में ग्रॉस मार्केट बॉरोइंग्स 14.13 लाख करोड़ और नेट मार्केट बॉरोइंग्स 11.75 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। ये दोनों ही मौजूदा वित्त वर्ष से कम होंगी।’

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के चीफ इकनॉमिस्ट डीके जोशी ने कहा, ‘जेपी मॉर्गन इंडेक्स में इंडिया बॉन्ड्स के शामिल होने के साथ ग्लोबल इकॉनमी के साथ हमारा इंटीग्रेशन बढ़ रहा है। हमारे फिस्कल एकाउंट्स पर दुनिया का ध्यान बढ़ रहा है। ऐसे में फिस्कल डेफिसिट घटाना अच्छी बात है। इससे सरकारी उधारी कम होने से इंटरेस्ट रेट घटने का चांस बढ़ गया है। निवेशकों के लिए काम की बात यह है कि जब भी ब्याज दरें घटेंगी, लॉन्ग ड्यूरेशन बॉन्ड्स पर मार्क टु मार्केट फायदा हो सकता है। अनुमान यही है कि इंटरेस्ट रेट घटने पर सात-साढ़े सात पर्सेंट वाला 10 साल का सरकारी बॉन्ड अगले एक साल में आपको 12-13 पर्सेंट का मार्क टु मार्केट प्रॉफिट दे सकता है।‘ कम फिस्कल डेफिसिट वाला बजट होने से महंगाई बढ़ने का चांस भी घटता है। ऐसा बजट आरबीआई का काम आसान कर देता है। तीसरी बात यह है कि प्राइवेट सेक्टर ही नहीं, बल्कि सरकार के लिए भी उधार जुटाने की लागत घट जाती है। बॉन्ड यील्ड घटने से इसका पता चलता है।’ सरकार ने आरबीआई को जिम्मा दिया है कि महंगाई दर को 2 से 6 प्रतिशत के बीच रखा जाए। अभी रेपो रेट 6.5 प्रतिशत पर है। महंगाई घटने पर आरबीआई रेपो रेट घटा सकता है।

सक्षम वेल्थ प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर समीर रस्तोगी ने कहा, ‘फिस्कल डेफिसिट घटना मैक्रो फंडामेंटल्स के लिए अच्छी बात है। इससे रुपये को भी सपोर्ट मिलेगा। यह बॉन्ड मार्केट के लिए तो अच्छा है ही, आने वाले दिनों में इक्विटी मार्केट्स को भी इससे फायदा होगा। सरकारी उधारी कम होने से इंटरेस्ट रेट घटने का चांस बढ़ गया है। निवेशकों के लिए काम की बात यह है कि जब भी ब्याज दरें घटेंगी, लॉन्ग ड्यूरेशन बॉन्ड्स पर मार्क टु मार्केट फायदा हो सकता है। अनुमान यही है कि इंटरेस्ट रेट घटने पर सात-साढ़े सात पर्सेंट वाला 10 साल का सरकारी बॉन्ड अगले एक साल में आपको 12-13 पर्सेंट का मार्क टु मार्केट प्रॉफिट दे सकता है।‘

वित्त मंत्री ने FY25 के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर 11 प्रतिशत बढ़ाकर 11.11 लाख करोड़ रुपये करने का ऐलान किया। हालांकि रिवाइज्ड एस्टिमेट के मुताबिक, मौजूदा वित्त वर्ष के लिए कैपेक्स 9.5 लाख करोड़ होगा, जो बजट एस्टिमेट से 50 हजार करोड़ रुपये कम है। बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने कहा, ‘फिस्कल डेफिसिट का 5.1 पर्सेंट का टारगेट व्यावहारिक है। बता दें कि मौजूदा वित्त वर्ष में 17 लाख 34 हजार 773 करोड़ रुपये के रिवाइज्ड एस्टिमेट के मुकाबले अगले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 16 लाख 85 हजार 494 करोड़ रुपये तक रखने का लक्ष्य दिया गया है। राजस्व के मिलने और खर्च के अंतर यानी फिस्कल डेफिसिट के इंतजाम के लिए सरकार बॉन्ड जारी कर बाजार से उधार लेती है। सीतारमण ने कहा, ‘2024-25 में ग्रॉस मार्केट बॉरोइंग्स 14.13 लाख करोड़ और नेट मार्केट बॉरोइंग्स 11.75 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। ये दोनों ही मौजूदा वित्त वर्ष से कम होंगी।’ सरकार के पास जितनी राजकोषीय गुंजाइश है, उसमें से कैपेक्स के लिए पर्याप्त इंतजाम किया गया है। यह अडिशनल टोटल आउटले के करीब 40 प्रतिशत है। इंफ्रा पर खर्च बढ़ने से स्टील, सीमेंट और कैपिटल गुड्स इंडस्ट्रीज पर पॉजिटिव इफेक्ट दिखेगा। प्राइवेट सेक्टर इनवेस्टमेंट बढ़ाएगा। राज्यों को केंद्र से करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। इससे उनकी ओर से भी खर्च बढ़ने की संभावना है।’