Thursday, March 5, 2026
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क्या लोकसभा चुनाव जीतने का है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आत्मविश्वास?

लोकसभा चुनाव जीतने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आत्मविश्वास है! कल के बजट में एक बाद कॉमन थी। बजट सत्र से पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उनकी सरकार ही पूर्ण बजट पेश करेगी। दूसरी तरफ बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जोर देकर कहा कि जब जुलाई हमारी सरकार पूर्ण बजट पेश करेगी तो विकासित भारत का विस्तृत रोडमैप पेश किया जाएगा। यही नहीं, अंतरिम बजट में मोदी सरकार ने कोई लोकलुभावन घोषणा भी नहीं की। तो बड़ा सवाल है कि आखिर केंद्र की भारतीय जनता पार्टी बीजेपी, जिसे कुछ ही दिनों में आम चुनाव में जाना है, इतना भरोसे में कैसे है? दरअसल, इस भरोसा के पीछे तमाम वजहें हैं लेकिन एक जो सबसे अहम है वो है बिखरा विपक्ष। इसके अलावा सरकार के तमाम वो सुधार जिससे उसे भरोसा है कि देश की जनता लगातार तीसरी बार उसे ही चुनेगी। पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी दोनों ही 2024 के चुनाव के लिए मजबूत दावे कर रहे हैं। इसके पीछे जो सबसे कारण है वो है राम मंदिर का निर्माण। भगवा दल का सबसे अहम चुनावी मुद्दा 22 जनवरी को अयोध्या में पूरा हो चुका है। खुद पीएम मोदी मुख्य यजमान बनकर राम मंदिर में बाल राम की प्राण प्रतिष्ठा कर चुके हैं। राम के लहर पर बीजेपी उत्तर भारत में विपक्ष पर बड़ी बढ़त की तैयारी में है। पार्टी इसके लिए कोशिश भी शुरू कर चुकी है। कई राज्यों से आम लोगों को राम मंदिर के दर्शन के लिए लाया जा रहा है। विपक्ष भी दबी जुबान में ये मान रहा है कि भगवा दल को इसका फायदा हो सकता है।

पीएम मोदी का सामना करने के लिए इंडिया गठबंधन बनाया गया था। लेकिन चुनाव आते-आते इसके मुख्य कर्ता-धर्ता ही बीजेपी में शामिल हो गए। बिहार में नीतीश के बीजेपी में शामिल होने के बाद राज्य में भगवा दल को बढ़त हासिल हो गई है। दूसरी तरफ ममता बनर्जी ने भी कांग्रेस का हाथ बंगाल में छोड़ दिया है। यानी एक वक्त जो लग रहा था कि इसबार पीएम मोदी को तगड़ी टक्कर मिल सकती है। उसकी सूरत फिलहाल तो नजर नहीं आ रही है। यही नहीं, विपक्ष तो अभी कई राज्यों में सीट शेयरिंग पर भी अटका है। दूसरी तरफ बीजेपी को कुछ राज्यों में छोड़ दें ज्यादातर जगहों पर अकेले ही लड़ना है। ऐसे में कमजोर और बिखरे विपक्ष के कारण उसे ज्यादा परेशानी नहीं होगी।

इसके अलावा बीजेपी को राम मंदिर निर्माण का बड़ा फायदा मिलने वाला है। पार्टी के घोषणापत्र में हर बार राम मंदिर का मुद्दा रहता था। विपक्ष तो बीजेपी एक समय तंज कसता था कि मंदिर वही बनाएंगे लेकिन तारीख नहीं बताएंगे। अब 22 जनवरी को राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद बीजेपी काफी जोश में है। पार्टी को इसका फायदा पूरे उत्तर भारत में मिलने की उम्मीद है। पार्टी इसके अलावा आर्टिकल 370 का भी जमकर जिक्र करती है। यानी राम के जरिए भगवा दल को जीत की आस दिख गई है। शायद इसीलिए बजट में को लोकलुभावन योजना भी नहीं दिखी।

पीएम नरेंद्र मोदी अपने लगभग हर कार्यक्रम और सभा में इसका जिक्र जरूर करते हैं। कोरोना के काल से 80 करोड़ों लोगों को केंद्र सरकार मुफ्त अनाज मुहैया करा रही है। यही लाभार्थी हैं जो बीजेपी के कोर वोटर भी बन गए हैं। इसी की बदौलत बीजेपी ने कई राज्यों में चुनावी बिसात बिछाई और उसे कामयाबी भी मिली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी अपने बजट भाषण में इसका जिक्र किया था। बीजेपी ऐसे लाभार्थियों के जरिए मजबूती के साथ आगे बढ़ने का तरीका ढूंढ चुकी है।

पीएम मोदी सरकारी योजनाओं को लागू करने में बिचौलियों के नहीं रहने की बात अक्सर करते हैं। यानी सरकारी लाभ सीधे जरूरतमंदों के खाते में जाता है। बिचौलिया गायब। चाहे किसान सम्मान निधि की बात हो या अन्य मदों में डायरेक्ट ट्रांसफर। सरकार अपने बेहतर गर्वनेंस मॉडल के जरिए भ्रष्टाचार रोकने का दावा करती है। इसके अलावा बीजेपी भाई-भतीजावाद से खुद को दूर रखने का वादा करती है। पार्टी सामाजिक न्याय के जरिए जीत का रास्ता सुनिश्चित करने के लिए जोर लगा रही है। निर्मला ने अपने बजट भाषण में कहा कि हमारे शासन में पारदर्शिता है, इस बात का भरोसा है कि पात्र लोगों तक फायदे पहुंचाए जा रहे हैं। संसाधनों का उचित वितरण होता है। समाज में चाहे किसी का भी दर्जा हो, सभी को अवसर मिलते हैं। हम व्यवस्थागत असमानताओं को दूर कर रहे हैं… हम केवल खर्च पर ध्यान नहीं देते, बल्कि परिणामों पर जोर देते हैं, ताकि सामाजिक-आर्थिक बदलाव लाया जा सके।

पीएम मोदी ने ओबीसी जाति जनगणना की काट ढूंढने के लिए चार जातियों का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था गरीब, महिलाएं, युवा और किसान उनके चार जातियां हैं। इस बार के बजट में भी इन चारों जातियों के लिए निर्मला ने कुछ न कुछ जरूर दिया है। यानी बीजेपी ने 2024 के लिए अपने वोटर वाला लक्ष्य भी तय कर लिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन सभी समूहों की जरूरतों, आकांक्षाओं और कल्याण को पूरा करना सरकार की “सर्वोच्च प्राथमिकता” बताई। उन्होंने कहा कि जब वे आगे बढ़ते हैं तो देश आगे बढ़ता है। इन चारों वर्गों को अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए सरकार के समर्थन की आवश्यकता होती है और वो प्राप्त भी करते हैं।

जुलाई में पेश करेंगे पूर्ण बजट के पीछे पीएम मोदी के भरोसे के कुछ कारण तो आप जान ही गए हैं। इसके अलावा भी बीजेपी अन्य कल्याणकारी योजनाओं के जरिए जीत का मार्ग प्रशस्त करने की कोशिश में लग गई है। बीजेपी के लिए चुनाव का सबसे बड़ा चेहरा पीएम मोदी हैं। वो कुछ दिनों में पूरी तरह से चुनावी माहौल में खुद उतर जाएंगे। ऐसे में बिखरा विपक्ष और पीएम मोदी की छवि के बीच टक्कर होगी। जनता इन्हीं में से किसी एक चुनेगी।

क्या जनसंख्या नियंत्रण बन सकता है महत्वपूर्ण मुद्दा?

अब जनसंख्या नियंत्रण महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है! गुरुवार को पेश अंतरिम बजट की सबसे अहम बातों में एक रहा जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में सरकार का अब निर्णायक पहल करने का संकेत। वित्त मंत्री निर्मला ने कहा कि सरकार जनसंख्या वृद्धि और डेमोग्राफिक चेंज से पैदा होने वाली चुनौतियों से निबटने के लिए एक कमिटी का गठन करेगी। उन्होंने कहा कि समिति को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के संबंध में इन चुनौतियों से व्यापक रूप से निपटने के लिए सिफारिशें करने का काम सौंपा जाएगा। इसका साफ संदेश गया कि अगर मोदी सरकार तीसरे टर्म में आती है तो उनके अजेंडे में यह एक सबसे अहम बात होगी। ऐसा नहीं है कि वित्त मंत्री ने अचानक बजट में इस बारे में संकेत दिया। पिछले दिनों पीएम नरेन्द्र मोदी खुद इस दिशा में बोल चुके हैं। उन्होंने पिछले दिनों जनसंख्या नियंत्रण बजट की बात को सार्वजनिक बहस का मुद्दा बनाने की पहल की। पीएम मोदी ने लाल किले से कहा था कि हमारे यहां जो जनसंख्या विस्फोट हो रहा है, ये आने वाली पीढ़ी के लिए संकट पैदा करता है। सबसे पहले जनसंख्या के आंकड़ों को पेश करना होगा जिससे इस पहल को जस्टिफाय किया जा सके। 2011 के बाद देश में जनगणना नहीं हुई है। तब के आंकड़े ने संकेत दिया था कि देश में आबादी के बढ़ने की दर में कमी आई है। यह ट्रेंड हर धर्मों में समान रूप से दिखा था। उसमें यह बात सामने आई थी कि जनसंख्या वृद्धि का सीधा संबंध गरीबी और अशिक्षा से है। पूर्व में तमाम सरकारों ने इस मोर्चे पर पहले करने की इच्छा जरूर दिखाई, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी।पीएम ने जनसंख्या विस्फोट को सबसे बड़ा चिंताजनक ट्रेंड बताते हुए छोटे परिवार की परिकल्पना को देशभक्ति से जोड़ा था। दरअसल जनसंख्या नियंत्रण बीजेपी और संघ दोनों के लिए सबसे अहम एजेंडा रहा है। सरकार और पार्टी के अंदर मानना है कि राम मंदिर, धारा 370 सहित कई अहम मुद्दे सुलझ गए हैं। इसके बाद 2024 में अगर सत्ता में आती है तो जनसंख्या नियंत्रण का काम आगे लाया जाएगा।इस दिशा में बेहतर कानून के विकल्प तलाशने को कहा था। अब बजट में वित्त मंत्री ने एक कमिटी गठन का प्रस्ताव देकर ठोस संकेत दे दिया कि इस संवदेनशील मसले पर सरकार निर्णायक तरीके से आगे बढ़ने को तैयार है।

दरअसल पिछले तीन दशक से जनसंख्या नियंत्रण के लिए क्या-क्या प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं इस बार बहस जारी है। 1991 में सीनियर कांग्रेस नेता के करुणाकरण के नेतृत्व में एक कमिटी ने जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में जो सुझाव दिए थे उसमें जनप्रतिनिधियों के लिए यह शर्त अनिवार्य रूप से लागू करने को कहा गया था कि उनके दो से अधिक बच्चे नहीं हों। लेकिन वह प्रस्ताव लागू नहीं हो सका। हालांकि टुकड़ों-टुकड़ों में कुछ राज्यों ने पंचायत स्तर पर इसकी कोशिश जरूर की। उसी रिपोर्ट से इनपुट लेते हुए मोदी सरकार ने भी पिछले दिनों कानून मंत्रालय को इस दिशा में बेहतर कानून के विकल्प तलाशने को कहा था। अब बजट में वित्त मंत्री ने एक कमिटी गठन का प्रस्ताव देकर ठोस संकेत दे दिया कि इस संवदेनशील मसले पर सरकार निर्णायक तरीके से आगे बढ़ने को तैयार है।

जनसंख्या नियंत्रण पर हालांकि आगे बढ़ने की बात जरूर की गई है, लेकिन आगे का रास्ता सहज नहीं है। सबसे पहले जनसंख्या के आंकड़ों को पेश करना होगा जिससे इस पहल को जस्टिफाय किया जा सके। 2011 के बाद देश में जनगणना नहीं हुई है। तब के आंकड़े ने संकेत दिया था कि देश में आबादी के बढ़ने की दर में कमी आई है। यह ट्रेंड हर धर्मों में समान रूप से दिखा था। उसमें यह बात सामने आई थी कि जनसंख्या वृद्धि का सीधा संबंध गरीबी और अशिक्षा से है। पूर्व में तमाम सरकारों ने इस मोर्चे पर पहले करने की इच्छा जरूर दिखाई, बता दे कि पिछले तीन दशक से जनसंख्या नियंत्रण के लिए क्या-क्या प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं इस बार बहस जारी है। 1991 में सीनियर कांग्रेस नेता के करुणाकरण के नेतृत्व में एक कमिटी ने जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में जो सुझाव दिए थे उसमें जनप्रतिनिधियों के लिए यह शर्त अनिवार्य रूप से लागू करने को कहा गया था कि उनके दो से अधिक बच्चे नहीं हों। लेकिन वह प्रस्ताव लागू नहीं हो सका। हालांकि टुकड़ों-टुकड़ों में कुछ राज्यों ने पंचायत स्तर पर इसकी कोशिश जरूर की। लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी। साथ ही यह ऐसा संवेदनशील मामला है जहां कोई सरकार सीधे कानून बनाकर आगे बढ़ना नहीं चाहेगी।

वित्त मंत्री के बजट को पूरा समझिए!

आज हम आपको वित्त मंत्री के बजट को पूरा समझने वाले हैं! वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले ही कह दिया था, माफ करना- अंतरिम बजट में कोई धमाका नहीं होगा, बस सरकार आमदनी-खर्च का हिसाब दे देगी। वह अपनी बात पर कायम रहीं। बजट में कोई फुलझड़ी नहीं थी लेकिन आप इसे उनकी आलोचना मत समझिए, यह तो उनकी प्रशंसा है। निर्मला के अंतरिम बजट से अर्थशास्त्री झूम उठे हैं। उन्होंने इसमें रेवड़ियां नहीं बांटीं और राजकोषीय घाटे में कमी का वादा किया। राजकोषीय घाटे का मतलब है, सरकार की आमदनी से अधिक खर्च। निर्मला ने बताया कि वित्त वर्ष 2024 में यह घाटा GDP का 5.8 प्रतिशत रहा, जबकि पिछले बजट में इसके लिए 5.9 प्रतिशत का अनुमान रखा गया था। सरकार ऐसा इसलिए कर पाई क्योंकि उसे अच्छी आमदनी हुई। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025 में यह 5.1 प्रतिशत रहेगा और उससे अगले साल 4.5 प्रतिशत। कोरोना महामारी, यूक्रेन युद्ध और अल निनो जैसी चुनौतियों के बीच यह बात खास मायने रखती है। कुछ आलोचक कह सकते हैं कि राजस्व घाटा तो वित्त वर्ष 2024 में GDP का 2.8 प्रतिशत रहा, जिसे कभी खत्म करने की बात कही गई थी और अगले वित्त वर्ष में भी यह 2 प्रतिशत रहने वाला है। कुछ अर्थशास्त्री यह भी कहेंगे कि सरकारी खजाने की सेहत तभी अच्छी मानी जाती है, जब प्राथमिक घाटा खत्म हो जाए। राजकोषीय घाटे में से सरकार की ब्याज देनदारी निकालने बाद जो रकम बचती है, उसे प्राथमिक घाटा कहते हैं। प्राथमिक घाटा शून्य हो तो उसका मतलब है कि सरकार जो भी उधार ले रही है, वह उससे निवेश करेगी। वित्त वर्ष 2024 में प्राथमिक घाटा 2.3 प्रतिशत रहा, लेकिन अगले साल इसके 1.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। शायद यह आने वाले वर्षों में खत्म हो जाए।

सवाल यह भी है कि राजकोषीय घाटे को लेकर अंतरिम बजट से जो अच्छी खबर आई, उसका शेयर बाजार पर पॉजिटिव असर क्यों नहीं पड़ा? असल में मार्केट टैक्स छूट की उम्मीद कर रहा था, जो पूरी नहीं हुई और बजट से पहले शेयर बाजार में यूं भी अच्छी तेजी आ चुकी थी। इसलिए गुरुवार को इसमें मामूली गिरावट आई और निफ्टी 50 इंडेक्स 0.13 प्रतिशत नीचे बंद हुआ।

कई जानकारों को लग रहा था कि वित्त मंत्री कुछ रेवड़ियों का ऐलान करेंगी। यूं तो अंतरिम बजट में ऐसा नहीं करना चाहिए, लेकिन पहले के कुछ वित्त मंत्रियों ने इस बंधन को नहीं माना था। 5 साल पहले पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट पेश किया था और तब उन्होंने पर्सनल इनकम टैक्स से छूट की सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया था। उन्होंने सैलरीड क्लास के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन में छूट के साथ अन्य रियायतें भी दी थीं। उन्होंने दावा किया था कि इससे मध्यवर्ग के 3 करोड़ करदाताओं को फायदा होगा, जो BJP का वोट बैंक माने जाते हैं।

गोयल के बजट से कुछ सप्ताह पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को सालाना 6,000 रुपये देने की घोषणा की थी। इसे तेलंगाना की रायतू बंधु, ओडिशा की KALIA और राहुल गांधी की चुनाव जीतने पर हर किसान परिवार को 72,000 रुपये देने के वादे के मुकाबले में लाया गया था। रायतू बंधु योजना के तहत तेलंगाना में हर कटाई सीजन में किसानों को 4,000 रुपये प्रति एकड़ और KALIA के तहत ओडिशा के ग्रामीण इलाकों में रहने वालों को 10,000 रुपये का भुगतान किया जाता है। 2019 में BJP को भरोसा नहीं था कि वह आम चुनाव जीत जाएगी। दरअसल, कुछ महीने पहले मध्य भारत के तीन राज्यों में हुए चुनाव में वह हार गई थी। यूं तो मोदी अक्सर कहते हैं कि चुनाव रेवड़ियां बांटकर नहीं, परफॉरमेंस से जीते जाते हैं। इसके बावजूद BJP को तब रेवड़ियां बांटनी पड़ी थीं, भले ही दूसरी पार्टियों की तुलना में उसने कम फ्रीबीज दिए।

2024 लोकसभा चुनाव से पहले हालात बिल्कुल अलग हैं। BJP को आम चुनाव में जीत का भरोसा है। मोदी की अप्रूवल रेटिंग 90 प्रतिशत तक है। किसी अन्य लोकतांत्रिक देश के लीडर के लिए ऐसी रेटिंग सपना है। कुछ समय पहले हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी को शानदार जीत मिली। मध्य प्रदेश में तो सत्ता में रहते हुए भी उसकी सीटें बढ़ गईं। आज उसे सत्ता विरोधी लहर का डर नहीं है इसलिए 5 साल पहले भले ही गोयल के लिए रेवड़ी बांटना राजनीतिक मजबूरी थी, निर्मला के सामने ऐसी मजबूरी नहीं है। BJP को परफॉरमेंस के दम पर लोकसभा चुनाव जीतने का यकीन है। इसलिए अंतरिम बजट में जब वह अपनी सरकार की एक के बाद एक उपलब्धियां बता रही थीं तो उनकी पार्टी के सांसद हर बड़े दावे पर मेजें थपथपा रहे थे। उन्होंने यह वादा भी किया कि पिछले 10 वर्षों में BJP के नेतृत्व में देश ने क्या हासिल किया है और उससे पहले के दशक में कांग्रेस सरकार ने क्या हासिल किया था, इस पर रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगी।

आज भारत दुनिया के बड़े देशों में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। पहले अग्रिम अनुमान में बताया गया कि वित्त वर्ष 2024 में देश की ग्रोथ 7.3 प्रतिशत रह सकती है, जो एक साल पहले 7.2 प्रतिशत थी। ऐसे वक्त में, जब दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था डूब रही हो, तब इतनी शानदार ग्रोथ की सराहना की जानी चाहिए। मसलन, भारत के पड़ोसी देशों- पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश को इधर IMF के पास मदद के लिए जाना पड़ा। यूं तो नेताओं की फेंकने की आदत होती है, लेकिन निर्मला के पास वाकई इसका अधिकार है।

मध्यम वर्ग को साधना, मोदी सरकार का क्या है उद्देश्य?

मध्यम वर्ग को साधना, मोदी सरकार का एक उद्देश्य माना जा रहा है! BJP सरकार के दूसरे टर्म के अंतिम बजट लेखानुदान में उम्मीद के अनुरूप ही सब कुछ रखा गया। लोकलुभावन फैसलों से जरूर परहेज था, लेकिन अपने मजबूत वोट बैंक का ख्याल रखा गया और आगे का रोडमैप भी पेश करने की कोशिश की गई। इन सबके बीच अगले दो-तीन महीने में होने वाले आम चुनाव से पहले BJP का जीत का आत्मविश्वास भी इस बजट में दिखा। अंतरिम बजट आने के एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उनकी ही सरकार इस साल जुलाई में भी पूर्ण बजट पेश करेगी। लेकिन इसके साथ सियासी जोखिम मोल न लेने की मंशा भी साफ नुमायां हुई। इस अंतरिम बजट में पिछले 10 सालों का आर्थिक रिपोर्ट कार्ड पेश करने की कोशिश की गई। कुल मिलाकर देखा जाए तो मोदी सरकार ने संदेश दिया है कि आर्थिक रूप से कुछ बड़ा करने का काम इस साल पूर्ण बजट से ही शुरू होगा। दरअसल, पिछले कई मौकों पर खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने तीसरे टर्म की प्राथमिकता के बारे में विस्तार से बात की है। इसके सियासी मायने भी निकाले जाते रहे हैं। मोदी 2.0 के पहले बजट में संदेश दिया गया कि रॉबिन हुड सरकार की छवि बनाए रखने के प्रयास जारी रहेंगे। 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी 1.0 के पहले बजट में रिफॉर्म पर फोकस किया गया, लेकिन बाद में विपक्ष ने ‘सूट-बूट की सरकार’ कहकर हमले किए। नरेंद्र मोदी की सरकार को तब इसका सियासी नुकसान भी उठाना पड़ा। उसके बाद से इस सरकार का पूरा फोकस खास तौर से दो तबकों पर आकर टिक गया- गरीब और महिलाएं। गरीबों को मुफ्त राशन देकर अपने पाले में किया गया। महिलाओं को भी अलग-अलग तरीके से कुछ न कुछ देने की कोशिश की जाती रही। अब सरकार ने एक नए तबके – नियो मिडल क्लास यानी नव मध्य वर्ग पर ध्यान देना शुरू किया है। कहा जा रहा है कि अगले कुछ सालों में वोटर का सबसे बड़ा तबका यही होगा। अगर पिछले ढाई दशक के नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर को गौर से देखें, तो उन्होंने इस नए वोट बैंक को ठोस रूप देने के लिए कई सफल सियासी प्रयोग किए हैं। छोटे-छोटे कस्बों में रहने वाले गरीब और मिडल क्लास के बीच रहने वाली आबादी को उन्होंने अपने फोकस में लिया। उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी सरकारी स्कीमें लेकर आए और इनके जरिए न केवल नया जनाधार साधा बल्कि एक नया सामाजिक समीकरण भी बनाया। OBC को अपने साथ जोड़ने के विशेष प्रयास किए। इस बार भी बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आवास योजना और ऐसी कुछ अन्य योजनाओं का विस्तार करने की मंशा जता दी। फिर भी सच यही है कि इस बजट में सियासी तौर पर कोई बड़ा एलान नहीं किया गया और यह बात राजनीतिक पंडितों को चौंका रही है। इसकी वजह यह है कि एक तरह से यह आम राय बन चुकी थी कि दूसरे टर्म के अंतिम बजट में कुछेक बड़ी घोषणाएं तो जरूर होंगी।

अब जबकि केंद्र सरकार ने इस बजट में लोकलुभावन फैसले से परहेज किया, तो विपक्ष को स्वाभाविक ही इसमें अपने लिए अवसर दिखेगा। I.N.D.I.A. में बिखराव से लेकर राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा तक जिस तरह से विपक्षी खेमा बैकफुट पर दिख रहा है, उसके मद्देनजर BJP काडर में उत्साह है। इसकी काट के रूप में अब विपक्ष चुनाव से पहले लोकलुभावन वादे पेश कर सकता है। कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों ने यह संकेत पहले से ही दे दिया है कि इस बार वे जनता के सामने कई लोकलुभावन वादे लेकर जाएंगे। अगले कुछ दिनों में विपक्ष की इस मोर्चे पर पहल दिख सकती है। वैसे देखने लायक तो यह भी होगा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में BJP किस तरह से विपक्ष की इस पहल का जवाब देती है। हालांकि इस दिशा में शुरुआत हो चुकी है। इसका सबूत यह है कि BJP लोगों के बीच ‘मोदी की गारंटी’ से लैस होकर जा रही है। वह कहते हैं कि मोदी गारंटी पूरा करता है जबकि विपक्ष महज घोषणा तक ही सीमित रहता है। BJP को इससे चुनावी फायदे की उम्मीद है तो उसकी अपनी वजहें भी हैं।

दरअसल, यह सामान्य ट्रेंड रहा है कि मौजूदा सरकार की घोषणाओं का जनता पर असर अधिक होता है। पिछले साल मध्य प्रदेश चुनाव के दौरान कांग्रेस ने महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये देने का एलान किया, लेकिन इस वादे के बाद ही तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने हर महीने 1200 रुपये देने की लाडली योजना लॉन्च कर दी। इसका बड़ा असर हुआ और कांग्रेस के 1500 रुपये के वादे पर BJP के 1200 रुपये की योजना का क्रियान्वयन भारी पड़ा। उसी तरह कांग्रेस ने 2019 में 12000 रुपये सालाना वाली न्याय योजना का वादा किया था। तब भी अंतरिम बजट में 6000 रुपये सालाना किसान सम्मान निधि का एलान किया गया और चुनाव से पहले इसकी पहली किस्त दे भी दी गई। इसका बड़ा असर हुआ और कांग्रेस को उसके वादों का लाभ नहीं मिला। हालांकि इन सबके बीच मिडल क्लास ऐसा तबका है, जो संभवत: इन सबसे पीछे छूटता दिख रहा है। गुरुवार को बजट पेश होने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी झलक भी दिखी। 2019 में जब इस तबके में निराशा थी तो उसे दूर करने के लिए इनकम टैक्स स्लैब में छूट मिली थी। लेकिन इस बार मिडल क्लास को कोई बड़ी छूट नहीं मिली।

जानिए कितनी खतरनाक है सर्वाइकल कैंसर की बीमारी?

आज हम आपको बताएंगे कि सर्वाइकल कैंसर की बीमारी कितनी खतरनाक है! केंद्र सरकार ने इस बार के अंतरिम बजट में महिलाओं की सेहत को लेकर काफी ध्यान देने की बात कही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में सर्वाइकल कैंसर को रोकने के लिए एक बड़ा ऐलान किया था। बजट भाषण के दौरान निर्मला ने घोषणा की कि देशभर में इसके लिए वैक्सीनेशन अभियान चलाया जाएगा। हाल के बरसों में सर्वाइकल कैंसर एक महामारी की तरह बढ़ रहा है। मशहूर मॉडल पूनम पांडे की सर्वाइकल कैंसर से मौत ने इस बीमारी के खतरे को बताने के लिए काफी है। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि देशभर में 9-14 साल की लड़कियों को मुफ्त में HPV वैक्सीन लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार मुख्य मकसद सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम करना है। उन्होंने कहा कि इस मिशन की शुरुआत मिशन इंद्रधनुष के जरिए किया जाएगा। सर्वाइकल कैंसर के कारण हर साल हजारों महिलाओं की जान जा रही है।

उल्लेखनीय है कि सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। अगर सही उम्र में इस वैक्सीन को लगवा लिया जाए तो इस गंभीर बीमारी को 98 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कम से कम 70 प्रतिशत महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर की जांच होनी चाहिए। सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर भारत में महिलाओं में सबसे आम कैंसर और दुनिया भर में महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है। यह मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमावायरस के संक्रमण की वजह से होता है। सर्वाइकल कैंसर को रोकने के कई तरीके हैं। उनमें वैक्सीनेशसन सबसे ज्यादा कारगर है। यूट्रस के सर्विक्स में होता है। ये बीमारी कितना खतरनाक है कि आप इससे समझ सकते हैं कि इसके कोई लक्षण भी जल्दी नहीं दिखते हैं। बाद में केवल जांच पर ही इस बीमारी का पता चलता है। दुनिया के कई देशों में इस बीमारी से बचने के लिए मुफ्त वैक्सीन लगवाई जाती है।

मशहूर मॉडल पूनम पांडे की मौत भी सर्वाइकल कैंसर की वजह से हुई है। वो महज 32 साल की थीं। इससे आप समझ सकते हैं कि ये बीमारी किसी भी उम्र में महिलाओं को जकड़ लेती है। अगर इस बीमारी से बचना है तो वैक्सीन ही एकमात्र उपाय है। ये महिलाओं में होने वाली दूसरी सबसे कॉमन कैंसर है। पहला ब्रेस्ट कैंसर है। पूनम की मौत ने इस खतरनाक बीमारी के प्रति अब लोगों को सोचने पर मजबूर करेगा। हालांकि पूनम की मौत सच नहीं थी, उसके बाद पूनम ने अगले दिन पोस्ट करके अपनी मौत का सच भी बता दिया था, लेकिन यह बीमारी सच में खतरनाक है इस बात का अंदाजा हम इसी से लगा रहे हैं कि लगातार इससे मौतें होती जा रही है! इस बीमारी के खतरनाक रूप को देखते हुए ही सरकार ने बच्चियों को इसकी वैक्सीन लगाने का फैसला किया है। महिलाओं के लिए दूसरी सबसे खतरनाक बीमारी सर्वाइकल कैंसर है। महिलाओं में हर तरह के कैंसर के करीब 18 प्रतिशत मामले सामने आते हैं।ये बीमारी कितना खतरनाक है कि आप इससे समझ सकते हैं कि इसके कोई लक्षण भी जल्दी नहीं दिखते हैं। बाद में केवल जांच पर ही इस बीमारी का पता चलता है। दुनिया के कई देशों में इस बीमारी से बचने के लिए मुफ्त वैक्सीन लगवाई जाती है। हर साल करीब 1 लाख 20 हजार नए मामले सर्वाइकल कैंसर के आते हैं। जिसमें 77 हजार से ज्यादा महिलाओं की मौत हो जाती है। देश में सर्वाइकल कैंसर की जांच महज एक फीसदी महिलाएं कराती हैं। जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि कम से कम 70 प्रतिशत महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर की जांच होनी चाहिए। सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर भारत में महिलाओं में सबसे आम कैंसर और दुनिया भर में महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है। बता दें कि हाल के बरसों में सर्वाइकल कैंसर एक महामारी की तरह बढ़ रहा है। मशहूर मॉडल पूनम पांडे की सर्वाइकल कैंसर से मौत ने इस बीमारी के खतरे को बताने के लिए काफी है। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि देशभर में 9-14 साल की लड़कियों को मुफ्त में HPV वैक्सीन लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार मुख्य मकसद सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम करना है। उन्होंने कहा कि इस मिशन की शुरुआत मिशन इंद्रधनुष के जरिए किया जाएगा। यह मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमावायरस के संक्रमण की वजह से होता है। सर्वाइकल कैंसर को रोकने के कई तरीके हैं। उनमें वैक्सीनेशसन सबसे ज्यादा कारगर है।

आखिर क्या है तोशाखाना मामला?

आज हम आपको तोशाखाना मामलें के बारे में बताने जा रहे है! पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. किसी भी वक्त उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है. तोशाखाना मामले में इमरान को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस लाहौर स्थित जमां पार्क आवास पर पहुंची है. पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, इमरान खान तोशाखाना मामले की सुनवाई के दौरान लगातार गैर-मौजूद रहे हैं. इस वजह से इमरान खान को गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है. इसके लिए इस्लामाबाद पुलिस अपनी समकक्ष पंजाब पुलिस को साथ लेकर पहुंची है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल वजीराबाद में एक जानलेवा हमले में गोली लगने के बाद से जख्म से उबर रहे इमरान खान इस्लामाबाद के सत्र न्यायालय में तोशाखाना मामले की सुनवाई में तीन बार मौजूद नहीं रहे. इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के कार्यकर्ताओं की ओर से पुलिस का विरोध किया जा रहा है. पीटीआई कार्यकर्ता बड़ी तादाद में इमरान खान के आवास के बाहर जमा हैं. पीटीआई नेता फवाद चौधरी के आह्वान पर वे इकट्ठा हुए हैं. पीटीआई ने व्यापक आंदोलन की धमकी दी है. वहीं पाकिस्तान के गृह मंत्री राणा सनाउल्लाह के मुताबिक, इमरान खान के खिलाफ गैर-जमानती वॉरंट अदालत के आदेश पर जारी हुआ है, इसमें सरकार का कोई हाथ नहीं है. आखिर क्या है तोशाखाना मामला जो इमरान खान के गले के हड्डी बन गया. आइए जानते हैं.

तोशाखाने का मतलब ऐसे कमरे से है जहां राजा या अमीरों के कपड़े, गहने और महंगी चीजें जैसे कि उपहार आदि संभालकर रखे जाते हैं. पाकिस्तान में सरकार के संग्रहस्थान को तोशाखाना नाम दिया गया है, जिसे अंग्रेजी में स्टेट डिपॉजिटरी भी कहते हैं.इमरान को प्रधानमंत्री रहते हुए उनकी विदेश यात्राओं या किसी प्रकार की आधिकारिक यात्रा के दौरान करीब साढ़ 14 करोड़ रुपये के ऐसे उपहार मिले थे. उपहारों को तोशाखाने में जमा भी कर दिया गया था पाकिस्तान के कानून के मुताबिक, विदेशों से या विदेशी मेहमानों से मिले उपहारों को इसी तोशाखाने में जमा कर दिया जाता है. प्रधानमंत्री अगर उपहार अपने पास रखना चाहे तो उसे उसका मूल्य चुकाना होगा. इन उपहारों की नीलामी भी की जा सकती है. नीलामी से अर्जित धन सरकारी खजाने में ही जाएगा. कुल मिलाकर प्रधानमंत्री को मिले उपहार राष्ट्र की संपत्ति हैं!

इमरान को प्रधानमंत्री रहते हुए उनकी विदेश यात्राओं या किसी प्रकार की आधिकारिक यात्रा के दौरान करीब साढ़ 14 करोड़ रुपये के ऐसे उपहार मिले थे. उपहारों को तोशाखाने में जमा भी कर दिया गया था. आरोप है कि इमरान खान ने तोशाखाने में जमा किए उपहारों को सस्ते में 2.15 करोड़ रुपये में खरीद लिया और फिर ज्यादा कीमत में बाजार में उन्हें बेच दिया और पांच करोड़ रुपये से ज्यादा धन मुनाफे के तौर कमा लिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन उपहारों में एक ग्राफ घड़ी, एक जोड़ा कफलिंक, एक कीमती पेन, एक अंगूठी और रोलेक्स की चार घड़ियां भी शामिल थीं. यह भी आरोप है कि इमरान ने इस पूरे काम को अंजाम देने के लिए सरकारी कानून में परिवर्तन भी किया! पिछले साल इमरान खान की सरकार गिरने के कुछ महीनों बाद, सत्तारूढ़ पीएमएल-एन गठबंधन वाली सरकार के कुछ सांसदों ने पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष राजा परवेज अशरफ के सामने तोशाखाना मामले को उठाया था और इमरान खान पर आरोप लगाए थे. उन्होंने एक आरोपपत्र तैयार किया था, जिसमें कहा था कि इमरान खान ने उन्हें मिले उपहारों की डिटेल तोशाखाने को नहीं सौंपी थी. उन्होंने कहा कि इमरान ने उपहार बेंचकर रुपये कमा लिए. नेशनल असेंबली ने जांच का आदेश दिया था. आठ सितंबर को इमरान को एक नोटिस भेज दिया गया था. नोटिस के जवाब में इमरान ने चार उपहारों को बेचने की बात कबूली थी! 

वहीं, इमरान ने दलील दी थी कि उपहार उन्हें निजी तौर पर मिले थे, इसलिए वो उनका कुछ भी करें. इमरान ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार बताया था. मामला कोर्ट में पहुंच गया. उपहारों को इसी तोशाखाने में जमा कर दिया जाता है. प्रधानमंत्री अगर उपहार अपने पास रखना चाहे तो उसे उसका मूल्य चुकाना होगा. उन्होंने कहा कि इमरान ने उपहार बेंचकर रुपये कमा लिए. नेशनल असेंबली ने जांच का आदेश दिया था. आठ सितंबर को इमरान को एक नोटिस भेज दिया गया था. नोटिस के जवाब में इमरान ने चार उपहारों को बेचने की बात कबूली थी! इन उपहारों की नीलामी भी की जा सकती है. नीलामी से अर्जित धन सरकारी खजाने में ही जाएगा. कुल मिलाकर प्रधानमंत्री को मिले उपहार राष्ट्र की संपत्ति हैं!इसी मामले में पूर्व पीएम इमरान के खिलाफ गैर-जमानती वॉरंट जारी हुआ है! 

क्या करदाताओं को होने वाला है फायदा?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या करदाताओं को फायदा होने वाला है या नहीं! वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण 2024 के दौरान टैक्सेशन से जुड़ा कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। इसके बावजूद करीब एक करोड़ लोगों को टैक्स से जुड़ा लाभ मिलेगा क्योंकि वित्त मंत्री ने पुराने टैक्सेशन से जुड़े पुराने विवादों के समाधान की दिशा में एक बड़ा एलान किया है। वित्त मंत्री ने वर्षों से लंबित बकाया प्रत्यक्ष कर मांगों को वापस लेने का फैसला किया है। वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा है कि उन्होंने परंपरा को निभाते हुए अंतरिम बजट 2024 के दौरान टैक्स दरों को अपरिवर्तित रखा है।  वित्त मंत्री के ताजा एलान से कराधान से जुड़े सभी पुराने विवादित मामलों में करदाताओं को राहत नहीं मिलेगी। वित्त मंत्री के अनुसार वर्ष 1962 से जितने पुराने करों से जुड़े विवादित मामले चले आ रहे हैं उनमें वर्ष 2009-10 तक लंबित रहे प्रत्यक्ष कर मांगों से जुड़े 25000 रुपये तक के मामलों को वापस लिया जाएगा। इसी तरह 2010-11 से 2014-15 के बीच लंबित रहे प्रत्यक्ष कर मांगों से जुड़े 10 हजार रुपये तक के मामलों को वापस लेने का फैसला किया गया है।

वित्त मंत्री के अनुसार सरकार की ओर से पुराने विवादों को सुलझाने का कदम उठाने से कम से कम एक करोड़ करदाताओं को फायदा होगा। उन्होंने कहा है कि इससे ईमानदार करदाताओं को लाभ मिलेगा। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के साथ-साथ इंपोर्ट ड्यूटी के लिए भी समान दरों को बरकरार रखा गया है। स्टार्टअप्स और सॉवरेन वेल्थ व पेंशन फंड्स में निवेश करने वालों को टैक्स सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी। वित्त मंत्री की ओर से पुराने विवादों के समाधान के एलान से टैक्स रिफंड की प्रक्रिया में सुगमता आएगी। वित्त मंत्री ने बजट भाषण के दौरान जीवन की सुगमता और व्यापारिक सुगमता में सुधार करने की सरकार की परिकल्पना के तहत करदाताओं की सुविधा के लिए बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा, “बड़ी संख्या में कई छोटी-छोटी, गैर-सत्यापित, गैर-समायोजित या विवादित प्रत्यक्ष कर मांग बही खातों में लंबित हैं। इनमें से कई मांग तो वर्ष 1962 तक के भी पुराने समय से मौजूद हैं। इनके कारण ईमानदार करदाताओं को परेशानी होती है तथा बाद के वर्षों में रिफंड जारी करने की प्रक्रिया में भी बाधा आती है। मैं वित्तीय वर्ष 2009-10 तक की अवधि से संबंधित पच्चीस हजार रुपए (25,000) तक तथा वित्तीय वर्ष 2010-11 से वर्ष 2014-15 से संबंधित दस हजार रुपए (10,000) तक की ऐसी बकाया प्रत्यक्ष कर मांगों को वापस लेने का प्रस्ताव करती हूं। इससे लगभग एक करोड़ करदाताओं के लाभान्वित होने की अपेक्षा है।”

वित्त मंत्री ने स्टार्टअप्स और पेंशन फंड्स में निवेश करने वालों को मिलने वाले कर लाभ की समयसीमा 31 मार्च 2024 से बढ़ाकर 31 मार्च 2025 कर दी है। ऐसे में स्टार्टअप्स को इस बजट से एक साल का अतिरिक्त कर लाभ मिलेगा। इसके अलावे वित्त मंत्री ने बजट भाषण के दौरान कराधान के संबंध में किसी भी बदलाव से जुड़े प्रस्ताव का एलान नहीं किया है। वित्त मंत्री ने प्रत्यक्ष कर तथा आयात शुल्कों सहित अप्रत्यक्ष करों के संबंध में कर दरों को पहले के समान बरकरार रखा है। उन्होंने कहा कि स्टार्ट-अप और सावरेन संपदा या पेंशन फंड द्वारा किए गए निवेशों के लिए कुछ कर लाभ तथा कुछ आईएफएससी यूनिटों की कतिपय आय पर कर छूट की समय सीमा 31 मार्च 2024 को समाप्त हो रही है। कराधान में निरंतरता बनाए रखने के लिए मैं समय सीमा की इस तारीख को 31 मार्च 2025 तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है।

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में करदाताओं को आश्वस्त किया कि उनके योगदान का देश के विकास और जनता के कल्याण के लिए विवेकपूर्ण उपयोग किया गया है। उन्होंने करदाताओं के सहयोग के लिए उनकी सराहना भी की। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि सरकार ने कर दरों में कटौती की है और इन्हें विवेकपूर्ण बनाया है। नई कर योजना के तहत अब 7 लाख तक की आय वाले करदाताओं के लिए कोई कर देनदारी नहीं है। वित्तीय वर्ष 2013-14 में 2.2 लाख तक की आय वाले करदाताओं के लिए कोई कर देनदारी नहीं थी। वित्त मंत्री ने बताया कि खुदरा व्यापार के लिए प्रीजम्प्टिव कराधान की सीमा 2 करोड़ से बढ़ाकर 3 करोड़ की गई है। इसी प्रकार प्रीजम्प्टिव कराधान के पात्र व्यवसायियों के लिए यह सीमा 50 लाख से बढ़ाकर 75 लाख की गई। साथ ही कारपोरेट कर की दर मौजूदा स्वदेशी कंपनियों के लिए 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दी गई और कुछ नई विनिर्माण कंपनियों के लिए यह दर 15 प्रतिशत की गई है।

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि पिछले पांच वर्षों में करदाता सेवाओं में सुधार करने पर हमारा विशेष जोर रहा है। पहचान रहित निर्धारण और अपील की शुरुआत कर, क्षेत्राधिकार आधारित निर्धारण प्रणाली को बदल दिया गया जिससे कार्यकुशलता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है। अद्यतन की हुई आयकर विवरणियां, नया फार्म 26एएस और पहले से भरी हुई कर विवरणियां शुरू किए जाने से कर विवरणियां दाखिल करने की प्रक्रिया अधिक सरल और आसान हो गई है।

क्या दही से भी पा सकते हैं बीमारियों से मुक्ति?

दही खाने से भी बीमारियों से मुक्ति पाई जा सकती है! दही हमारी सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक है। आयुर्वेद में दही के गुणों के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसके सेवन से पाचन में सुधार होता है और हड्डियों को मजबूती मिलती है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि किसी भी शुभ काम से पहले दही चीनी का सेवन करने से वो काम अच्छे से संपन्न होता है। आज भी कई घरों में लोग घर से बाहर निकलने से पहले दही-चीनी खाकर निकलते हैं। दही को लेकर अधिकांश लोगों को यह भ्रम रहता है कि तासीर ठंडी होने की वजह से दही के सेवन से खांसी या जुकाम बढ़ सकता है। वास्तविकता में देखा जाए ऐसा कुछ भी नहीं है बशर्ते आप फ्रिज में रखी ठंडी दही का सेवन ना कर रहे हों। आयुर्वेद के अनुसार दही भारी, चिकनाई युक्त, कफ और पाचन शक्ति बढ़ाने वाला होता है। दही को बहुत ही पौष्टिक आहार माना गया है। छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक सबके लिए दही का सेवन फायदेमंद है। दही में भरपूर मात्रा में विटामिन, कैल्शियम और प्रोटीन पाया जाता है। अगर आप खाने के साथ में दही खाते हैं तो इससे खाना आसानी से पच जाता है।

रोजाना दही का सेवन करने से पाचन तंत्र सही रहता है और पेट से जुड़ी समस्याओं से बचाव होता है। पाचन तंत्र दुरुस्त करने के अलावा दही खाने के और भी कई फायदे हैं। आइये उनमें से प्रमुख फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं। दही की तासीर ठंडी होती है। इसमें लाभदायक बैक्टीरिया बहुत अधिक संख्या में होते हैं। जिस वजह से यह पेट से जुड़े रोगों में बहुत जल्दी फायदा पहुंचाती है। पेट से जुड़े किसी भी तरह के संक्रमण में दही का सेवन करना लाभकारी माना जाता है। सर्दी होने पर बुखार होना आम बात है। हालांकि सर्दी होने पर अधिकांश लोग दही का सेवन नहीं करते हैं लेकिन आपको बता दें कि दही के सेवन से सर्दी वाले बुखार में आराम मिलता है।

आयुर्वेद के अनुसार सामान्यतया रात में दही का सेवन नहीं करना चाहिए। दही का सेवन करते समय इसमें घी, शहद, चीनी, मूंग की दाल, आंवला चूर्ण या लवण भास्कर चूर्ण आदि में से कुछ ना कुछ ज़रूर मिला देना चाहिए। इन पदार्थों को बिना मिलाये दही का सेवन नहीं करना चाहिए। दही को आग या धूप आदि में गर्म करके नहीं खाना चाहिए, दही में कफ और पित्त को बढ़ाने वाले गुण होते हैं। इसीलिए गर्मी, बसंत और शरद ऋतु में दही खाने से मना किया गया है। मानसून, हेमंत और शिशिर ऋतु में दही का सेवन अच्छा माना गया है। दही सेहत के लिए फायदेमंद तो है लेकिन कुछ ख़ास चीजों के साथ अगर आप दही का सेवन करते हैं तो इससे आपको सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। आयुर्वेद में ऐसे आहारों को विरूद्ध आहार कहा गया है। आइये दही के विरुद्ध संयोगो के बारे में जानते हैं।

दही की मलाई भी सेहत के लिए काफी गुणकारी होती है। इसके सेवन से शरीर को ताकत मिलती है, शुक्राणुओं की गुणवत्ता बढ़ती है। इसके अलावा दही की मलाई का सेवन खूनी बवासीर में भी लाभकारक है। आयुर्वेद के अनुसार दही के पानी में लघु, पाचन-शक्ति बढ़ाने वाले , कब्ज दूर करने वाले गुण होते हैं। इसके अलावा यह पानी वात का अनुलोमक, स्रोतों को शुद्ध करने वाला और मल-पदार्थों का अनुलोमन करने वाला है। दही के पानी का नियमित सेवन शरीर को स्वस्थ रखने में  मदद करता है। दही की मलाई भी सेहत के लिए काफी गुणकारी होती है। इसके सेवन से शरीर को ताकत मिलती है, शुक्राणुओं की गुणवत्ता बढ़ती है। इसके अलावा दही की मलाई का सेवन खूनी बवासीर में भी लाभकारक है।

आयुर्वेद के अनुसार दही के पानी में लघु, पाचन-शक्ति बढ़ाने वाले , कब्ज दूर करने वाले गुण होते हैं।इसमें लाभदायक बैक्टीरिया बहुत अधिक संख्या में होते हैं। जिस वजह से यह पेट से जुड़े रोगों में बहुत जल्दी फायदा पहुंचाती है। पेट से जुड़े किसी भी तरह के संक्रमण में दही का सेवन करना लाभकारी माना जाता है। सर्दी होने पर बुखार होना आम बात है। हालांकि सर्दी होने पर अधिकांश लोग दही का सेवन नहीं करते हैं लेकिन आपको बता दें कि दही के सेवन से सर्दी वाले बुखार में आराम मिलता है। इसके अलावा यह पानी वात का अनुलोमक, स्रोतों को शुद्ध करने वाला और मल-पदार्थों का अनुलोमन करने वाला है। दही के पानी का नियमित सेवन शरीर को स्वस्थ रखने में  मदद करता है।

लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने क्या दिए संदेश?

वर्तमान में लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने कुछ संदेश दे दिए हैं! केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मौजूदा सरकार का आखिरी बजट पेश किया। आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर ये अंतरिम बजट है। इस दौरान वित्त मंत्री का बजट भाषण करीब एक घंटे चला। मोदी 2.0 सरकार के इस अंतरिम बजट में करदाताओं को खुश होने के लिए बहुत कुछ नहीं मिला। सरकार पूंजीगत व्यय और अन्य सामाजिक कल्याण सेवाओं में निरंतर रुचि के साथ राजकोषीय कंसोलिडेशन के मार्ग पर आगे बढ़ती नजर आई है। जिस तरह से पीएम मोदी किसानों, युवाओं, महिलाओं, गरीबों पर खास फोकस की बात करते हैं। निर्मला सीतारमण ने भी एक बार फिर अलग-अलग वर्ग के समर्थन में आवाज बुलंद की। वित्त मंत्री ने अपना बजट भाषण शुरू करने से पहले ही साफ कर दिया कि उनका पूरा फोकस देश के विकास पर केंद्रित रहेगा। बजट रखने पहले पहले निर्मला सीतारमण ने कहा कि अगले पांच साल बेहद अहम हैं, ये अभूतपूर्व विकास और 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने के सुनहरे पल होंगे।

फिस्कल प्रूडेंस के रास्ते पर चलते हुए, सरकार की ओर से बार-बार कहा गया कि वह वित्त वर्ष 2026 तक राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 4.5 फीसदी तक कम करना चाहती है। अंतरिम बजट के दौरान, फाइनेंस मिनिस्टर सीतारमण ने राजकोषीय घाटे को लेकर बड़ी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सकल घरेलू उत्पाद के 5.9 फीसदी के पिछले लक्ष्य से घटाकर सकल घरेलू उत्पाद का 5.8 प्रतिशत कर दिया है। वहीं वित्त वर्ष 2025 के लिए ये लक्ष्य GDP का 5.1 फीसदी निर्धारित किया गया है। फाइनेंशियल ईयर 2025 के लिए शुद्ध उधारी 11.75 लाख करोड़ रुपये देखने को मिली है जबकि केंद्र की सकल उधारी 14.13 लाख करोड़ रुपये देखी गई है। सरकार ने वित्त वर्ष 2025 के लिए रक्षा क्षेत्र में आवंटन को 4 फीसदी बढ़ाकर 6.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। ये वित्त वर्ष 2024 के बजटीय अनुमान 5.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि टैक्स ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, चाहे वह प्रत्यक्ष कर हो या अप्रत्यक्ष। हालांकि, सॉवरेन वेल्थ फंड और पेंशन फंड में किए गए निवेश को एक और साल के लिए टैक्स फ्री कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2025 में कुल राजस्व प्राप्ति अब 30 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया जा रहा है, जो वित्त वर्ष 2024 में 26.99 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से अधिक है।

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि वित्त वर्ष 2025 के लिए पूंजीगत व्यय परिव्यय का बजट 11 फीसदी बढ़ाकर 11.11 लाख करोड़ रुपये या जीडीपी का 3.4 फीसदी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले चार साल में पूंजीगत व्यय तीन गुना होने से आर्थिक विकास और रोजगार सृजन पर कई गुना प्रभाव पड़ा है। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा बढ़ाने के लिए लगभग 40,000 सामान्य रेल बोगियों को वंदे भारत मानकों में परिवर्तित किया जाएगा। इसके अलावा, तीन प्रमुख आर्थिक रेलवे कॉरीडोर यानी ऊर्जा, खनिज, और सीमेंट कॉरीडोर तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही पोर्ट कनेक्टिविटी कॉरीडोर और हाई ट्रैफिक डेंसिटी कॉरीडोर्स लागू किए जाएंगे। सरकार ने महिला उद्यमियों को 30 करोड़ मुद्रा योजना ऋण उपलब्ध कराए हैं। एसटीईएम पाठ्यक्रमों में अब 43 फीसदी नामांकन लड़कियों और महिलाओं का है। ये दुनिया में सबसे ज्यादा है। वित्त मंत्री ने कहा कि पीएम आवास योजना के तहत 70 फीसदी से अधिक घर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को दिए गए हैं। सरकार लड़कियों 9-14 वर्ष के लिए सर्वाइकल कैंसर टीकाकरण को प्रोत्साहित करेगी। बेहतर पोषण वितरण के लिए सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 में तेजी लाई जाएगी।

सरकार अगले पांच वर्षों में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत अतिरिक्त 2 करोड़ घर बनाने का लक्ष्य रख रही है। निर्मला सीतारमण ने कहा कि नागरिकों को घर खरीदने या बनाने में मदद के लिए मध्यम वर्ग के लिए एक नई आवास योजना शुरू की जाएगी। सरकार राज्यों को प्रतिष्ठित पर्यटन केंद्र विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। सॉवरेन वेल्थ फंड और पेंशन फंड में किए गए निवेश को एक और साल के लिए टैक्स फ्री कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2025 में कुल राजस्व प्राप्ति अब 30 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया जा रहा है, जो वित्त वर्ष 2024 में 26.99 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से अधिक है।इसके अलावा, विकास को प्रोत्साहित करने के लिए राज्यों को दीर्घकालिक ब्याज मुक्त लोन प्रदान किया जाएगा। सरकार ने कहा कि लक्षद्वीप सहित आईलैंड्स में बंदरगाह कनेक्टिविटी, पर्यटन बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के लिए प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे।

कैसा रहा आर्मी के लिए आवंटित बजट?

आज हम आपको आर्मी के लिए आवंटित बजट के बारे में जानकारी देने वाले हैं! सरकार रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी तकनीक पर लगातार जोर दे रही है। इस बार तो डीप-टेक के लिए नई स्कीम का भी ऐलान किया गया है। लेकिन लगातार दो सालों से उस फंड का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है जो स्वदेशी कंपनियों को प्रोटाइप विकसित करने में मदद देने के लिए बनाया गया है। पिछले बार की तरह ही इस बार भी आर्मी के लिए दिए इस फंड का महज एक पर्सेंट ही खर्च हो पाया। लगातार दो बार से यही स्थिति रही है और अब इस बार आर्मी के लिए यह फंड घटाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि पिछली बार इस मद में 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। एयरफोर्स के लिए भी यह फंड है। जिसका इस्तेमाल भी कम हो पाया। हालांकि यह आर्मी से थोड़ा बेहतर है। एयरफोर्स के लिए दिए गए फंड का करीब 30 पर्सेंट खर्च हो पाया। इस बार एयरफोर्स के लिए इस फंड में थोड़ी बढ़ोतरी भी की गई है। रक्षा मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक ये टेक्नॉलजी डिवेलपमेंट फंड खासकर नए स्टार्टअप, एमएसएमई और अकेडमिया को ध्यान में रखकर बनाया गया ताकि डिफेंस में डीआरडीओ के साथ मिलकर टेक्नॉलजी इनोवेशन के लिए युवाओं को प्रोत्साहित किया जा सके।

पिछले साल आर्मी के लिए टेक्नॉलजी डिवेलपमेंट फंड 100 करोड़ रुपये आवंटित किया गया था। यह उन स्वदेशी कंपनी या स्टार्टअप या युवाओं को मिलता जो आर्मी की जरूरत के हिसाब से कोई वेपन या उपकरण तैयार कर रहे हैं और उन्हें उसका प्रोटोटाइप विकसित करने के लिए आर्थिक मदद दी जाती। लेकिन यह 100 करोड़ रुपये का बजट संशोधित बजट में 1 करोड़ रुपये हो गया। ऐसा तब होता है, जब फंड दिया जाता है और करीब आधा साल गुजरने के बाद भी उस दिशा में कोई प्लानिंग ना हुई हो और बजट का इस्तेमाल ना किया गया हो। ऐसा ही पिछली बार भी हुआ था। पिछले बार एयरफोर्स प्रोजेक्ट्स के लिए 1131 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था लेकिन ये भी संशोधित बजट में घटकर 388 करोड़ रह गया। इस बार एयरफोर्स प्रोजेक्ट्स के लिए टेक्नॉलजी डिवेलपमेंट फंड में 1697 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने डिफेंस पर कहा कि नई डीप-टेक टेक्नोलॉजी को लाया जाएगा। आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाएंगे। एयरफोर्स के लिए भी यह फंड है। जिसका इस्तेमाल भी कम हो पाया। हालांकि यह आर्मी से थोड़ा बेहतर है। एयरफोर्स के लिए दिए गए फंड का करीब 30 पर्सेंट खर्च हो पाया। इस बार एयरफोर्स के लिए इस फंड में थोड़ी बढ़ोतरी भी की गई है। रक्षा मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक ये टेक्नॉलजी डिवेलपमेंट फंड खासकर नए स्टार्टअप, एमएसएमई और अकेडमिया को ध्यान में रखकर बनाया गया ताकि डिफेंस में डीआरडीओ के साथ मिलकर टेक्नॉलजी इनोवेशन के लिए युवाओं को प्रोत्साहित किया जा सके।डीप टेक टेक्नोलॉजी यानी क्वांटम कंप्यूटिंग, एआई, रोबोटिक्स, ग्रीन एनर्जी, एडवांस्ड कंप्यूटिंग और एयरोस्पेस जैसे उद्योग शामिल हैं। देश की रक्षा के क्षेत्र में अब निजी कंपनियों को ज्यादा मौके मिलने वाले हैं। सरकार की योजना देश को ज्यादा ताकतवर बनाने की है। रक्षा मंत्रालय ने अपनी साल के अंत की समीक्षा में कहा था कि रक्षा अधिग्रहण परिषद डीएसी ने 2023 में भारत के सशस्त्र बलों की शक्ति को बढ़ाने के लिए 3.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। इसके अलावा, डीएसी ने फ्रांसीसी रक्षा प्रमुख डसॉल्ट एविएशन से भारतीय नौसेना के लिए संबंधित उपकरण, हथियार, सिम्युलेटर और स्पेयर सहित 26 राफेल समुद्री विमानों के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी। FY22 में रक्षा व्यय पर लगभग 5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अक्टूबर 2023 में कहा था कि साल 2047 तक जब हम आजादी के 100 साल मनाएंगे, तब एक विकसित देश बनने के लिए भारत को आधुनिक उपकरणों के साथ मजबूत सशस्त्र बलों की जरूरत है। अगर हम एक विकसित राष्ट्र बनाना चाहते हैं,डीएसी ने 2023 में भारत के सशस्त्र बलों की शक्ति को बढ़ाने के लिए 3.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। इसके अलावा, डीएसी ने फ्रांसीसी रक्षा प्रमुख डसॉल्ट एविएशन से भारतीय नौसेना के लिए संबंधित उपकरण, हथियार, सिम्युलेटर और स्पेयर सहित 26 राफेल समुद्री विमानों के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी। FY22 में रक्षा व्यय पर लगभग 5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए। तो हमें आधुनिक हथियारों और उपकरणों के साथ मजबूत सशस्त्र बलों की जरूरत पड़ेगी। अभी दुनिया में चौथी सबसे ताकतवर मिलिट्री भारत के पास है। भारत इस मामले में जापान और इंग्लैंड जैसे विकसित देशों से आगे है। चीन तीसरी सबसे बड़ी मिलिट्री ताकत है।