Thursday, March 5, 2026
Home Blog Page 752

आखिर कितना विकसित हुआ है भारत?

ये सवाल उठना लाजमी है कि भारत आखिर कितना बदला है और विकसित हुआ है! हम दुनियाभर से हथियार खरीदते हैं तो दर्जनों देशों को अपने यहां बने रक्षा उत्पाद बेचते भी हैं। बड़ी बात है कि हमारे डिफेंस प्रॉडक्ट्स के ग्राहक इजरायल, अमेरिका, फ्रांस, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, इटली जैसे बड़े-बड़े देश भी हैं। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत 85 से ज्यादा देशों को रक्षा निर्यात कर रहा है। दूसरी तरफ, रक्षा आयात में तेजी से गिरावट आ रही है और हम अपनी सेना की जरूरतों के साजो-सामान खुद ही बनाने में जुट गए हैं। इससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ का अपना सपना पूरा करने की दिशा में प्रगति हो रही है तो ‘मेक इन इंडिया’ को भी बल मिल रहा है। इस प्रयास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने कई कदम उठाए हैं, वो चाहे नीतियों को लेकर हों या फिर कार्यक्रमों को जमीन पर उतारने की। अभी भारत ने रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 91 देशों में अपने डिफेंस अताशे रखा है। वहीं, रक्षा उत्पादन के क्षेत्र की भारतीय कंपनियां कई देशों में काम कर रही हैं। मोदी सरकार के 10 साल के कार्यकाल में किस क्षेत्र में क्या उपलब्धियां हासिल हुईं, इस सीरीज में आज हम रक्षा क्षेत्र में निर्यात को लेकर गहन विश्लेषण कर रहे हैं। मोदी सरकार में रक्षा खरीद, उत्पादन और अनुसंधान एवं विकास की प्रक्रिया को आसान और सुगम बनाने के लिए कई नीतिगत सुधार किए गए हैं। सरकार ने इनोवेटर्स, स्टार्टअप, एमएसएमई और अनुसंधान क्षेत्र को शामिल करके रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्रों में इनोवेशन और टेक्नॉलजी डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सेलेंस iDEX लॉन्च किया। दूसरी तरफ, कोविड-19 रिकवरी पैकेज के हिस्से के रूप में घोषित आत्मनिर्भर भारत स्कीम के तहत घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाए गए। सरकार ने रक्षा निर्यात बढ़ाने के लिए एक स्ट्रक्चर्ड रोडमैप मुहैया करने के लिए एक व्यापक रक्षा निर्यात रणनीति तैयार की है। यह रणनीति निर्यात प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, विदेशी रक्षा बाजारों के साथ जुड़ाव बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर स्वदेशी रक्षा उत्पादों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। रक्षा निर्यात को सुविधाजनक बनाने और बढ़ावा देने के लिए रक्षा निर्यात संवर्धन एजेंसी डीईपीए की स्थापना की गई है। साथ ही, निर्यात लाइसेंसिंग प्रक्रिया का सरलीकरण, लाइसेंस की लंबी वैधता और घटकों और उप-प्रणालियों के निर्यात पर कम प्रतिबंध। इसके साथ ही दुनिया के 91 देशों में भारत के डिफेंस अताशे हैं जो संबंधित देश को भारत से रक्षा उपकरणों के आयात की प्रक्रिया में मदद करते हैं।

भारत के रक्षा बजट में पिछले कुछ वर्षों में क्रमिक वृद्धि देखी गई है, जिससे सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और देश की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने में मदद मिल रही है। भारत अभी एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश है, जिसका 2023 में कुल रक्षा बजट 5.94 लाख करोड़ रुपये है। रक्षा बजट में पूंजीगत व्यय उपकरणों की खरीद और आधुनिकीकरण और राजस्व व्यय वेतन, रखरखाव आदि के लिए आवंटन शामिल हैं। सरकार ने पूंजीगत खरीद बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा विशेष रूप से घरेलू उद्योगों के लिए आवंटित किया, जिसका उद्देश्य विदेशी निर्भरता को कम करना और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। रक्षा खरीद प्रक्रिया में संशोधन, विशेष रूप से डीपीपी 2016 की शुरुआत और उसके बाद डीएपी 2020 में परिवर्तन, रक्षा खरीद प्रक्रिया को आधुनिक बनाने, आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने और भारत को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के सरकार के रणनीतिक इरादे को दर्शाता है। इसका असर भी हो रहा है। विदेशों से रक्षा उत्पादों की खरीद वित्त वर्ष 2018-19 में 46% के मुकाबले दिसंबर 2022 में घटकर 36.7% रह गई।

पीएम मोदी की अध्यक्षता में 2020 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आकाश मिसाइल सिस्टम के निर्यात को मंजूरी दे दी और तेजी से निर्यात अनुमोदन के लिए एक हाई पावर कमिटी भी बनाई। इसी तरह, पिछले चार-पांच वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाकर निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। इनमें हथियारों के आयात पर चरणबद्ध प्रतिबंध लगाना, स्थानीय रूप से निर्मित सैन्य हार्डवेयर खरीदने के लिए एक अलग बजट बनाना, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को 49% से बढ़ाकर 74% करना और व्यापार करने में आसानी बढ़ाना शामिल है। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने देश में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पर ध्‍यान केन्द्रित किया है और पहली बार उत्पादन एक लाख करोड़ के रिकॉर्ड आंकड़े को पार कर गया है। रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत 2024-25 तक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में ₹1,75,000 करोड़ का कारोबार हासिल करने का लक्ष्य रख रहा है। 31 दिसंबर, 2023 को तेजपुर विश्वविद्यालय के 21 वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा क्षेत्र में आत्‍मनिर्भरता प्राप्‍त करने के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा उठाए गए विभिन्‍न कदमों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पहली बार हथियारों के आयात को बैन किया गया है। उन्होंने कहा कि हमने पांच सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जारी की, जिसके अंतर्गत 509 ऐसे रक्षा उपकरणों की पहचान की गई है, जिनका निर्माण अब देश में ही किया जाएगा। इसके अतिरिक्‍त, हमने रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की 4 सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची भी जारी की है, जिसमें 4,666 वस्तुओं की पहचान की गई है जो अब भारत में ही निर्मित होंगी।

मोदी सरकार में भारतीय रक्षा उपकरणों के निर्माण के क्षेत्र में उपलब्धियों का आकलन इस बात से भी किया जा सकता है कि भारत बड़े रक्षा आयातक से निर्यातक के रास्ते पर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट पिछले वर्षों की तुलना में रक्षा निर्यात के आंकड़ों में कई गुना वृद्धि का संकेत देती है। व्यक्तिगत सुरक्षा वस्तुओं से लेकर सॉफिस्टिकेटेड वेपन सिस्टम्स तक के उत्पाद एक्सपोर्ट पोर्टफोलियो का हिस्सा हैं। भारतीय रक्षा उत्पादों को दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य पूर्व, अफ्रीका और यहां तक ​​कि यूरोप और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी बाजार मिल गया है। इससे देश की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में दुनियाभर के दशों के बढ़ते विश्वास और भारत के विदेशी संबंधों की रणनीतिक गहराई का पता चलता है। भारत से निर्यात किए जाने वाले प्रमुख रक्षा उत्पादों में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण, ऑफशोर पेट्रोल वेसल्स, एएलएच हेलीकॉप्टर, एसयू एवियोनिक्स, भारती रेडियो, तटीय निगरानी प्रणाली, कवच एमओडी II लॉन्चर और एफसीएस, रडार के लिए स्पेयर पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और हल्के इंजीनियरिंग मैकेनिकल पार्ट्स शामिल हैं!

क्या नीतीश कुमार फिर से बदलेंगे पाला?

ये सवाल उठना लाजमी है कि क्या नीतीश कुमार फिर से पाला बदलेंगे या नहीं! पीएम मोदी ने आज यूपी के बुलंदशहर से लोकसभा चुनाव का शंखनाद कर दिया है। बीजेपी पूरी ताकत के साथ चुनावी रण में उतरने को तैयार हैं। लेकिन बीजेपी को घेरने में जुटे विपक्षी दलों के गठबंधन की हालत पतली होती दिख रही है। दरअसल राहुल गांधी चुनाव से पहले ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के जरिए देशवाासियों को एकजुट करने निकले हैं, उधर विपक्षी दलों का इंडिया गठबंधन टूट की कगार पर खड़ा होता दिख रहा है। एक के बाद एक इंडिया गठबंधन के लिए बुरी खबर आ रही है। पहले ममता ने एकला चलो का ऐलान किया तो केजरीवाल ने भी दूरी बना ली। भगवंत मान ने अकेले ही पंजाब में लोकसभा चुनाव का बिगुल फूंक दिया। बीजेपी से कांग्रेस में गए कर्नाटक के पूर्व सीएम शेट्टार भी वापस आज बीजेपी में लौट आए और अब नीतीश के वापस एनडीए में लौटने की अटकलें तेज हो गई हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर नीतीश कुमार ने एनडीए में वापसी कर ली तो इंडिया गठबंधन का वजूद संकट में आ जाएगा और इंडिया गठबंधन चुनाव से पहले पूरी तरह टूट जाएगा। अयोध्या में राम मंदिर उद्घाटन के बाद बीजेपी लोकसभा चुनाव को लेकर और ज्यादा ऐक्टिव नजर आ रही है। पीएम मोदी ने खुद चुनाव प्रचार की कमान संभाल ली है। यूपी के बुलंदशहर से आज पीएम मोदी ने लोकसभा चुनाव का बिगुल फूंक दिया है। किसी भी वक्त चुनाव आयोग लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। उधर बीजेपी और पीएम मोदी को लोकसभा चुनाव में कांटे की टक्कर देने का दावा करने वाला इंडिया गठबंधन चुनाव से पहले ही टूट की कगार पर खड़ा हो गया है। ममता बनर्जी और भगवंत मान के बाद अब नीतीश कुमार के पाला बदलने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि बिहार के सीएम नीतीश कुमार बिहार सीएम के पद से इस्तीफा देकर एनडीए का दामन थाम सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कांग्रेस को इस बात का डर सता रहा है कि अगर ममता बनर्जी के बाद नीतीश कुमार ने साथ छोड़ दिया तो इंडिया गठबंधन की अबतक की चुनावी तैयारियों में पानी फिर जाएगा और कांग्रेस को लोकसभा चुनाव को लेकर फिर से नई प्लानिंग करनी होगी। कम वक्त में नई रणनीति के साथ आगे बढ़ना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा।

बिहार में सत्ता परिवर्तन को लेकर चर्चा जोरों पर है। नीतीश कुमार के बिहार सीएम का पद छोड़ने की अटकलें तेज हैं। बिहार की सियासत से बेरुखी से पहले नीतीश की इंडिया गठबंधन से नाराजगी की अटकलें भी काफी तेज थीं। वह गठबंधन की मीटिंग को आधे में छोड़कर लौट गए थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को चुनौती देने के लिए विपक्षी दलों ने एक इंडिया गठबंधन तैयार किया है। हाल ही में इसमें शामिल सभी 28 राजनीतिक दलों की दिल्ली में बैठक हुई थी। इस बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर उछला। इसके बाद विपक्षी दलों के बीच रार ठन गई है। जनता दल यूनाइटेड के एक वरिष्ठ नेता ने खड़गे का नाम प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में आगे बढ़ाए जाने पर नाराजगी व्यक्त की थी। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इंडिया गठबंधन में खुद का कद घटता देख नीतीश कुमार बेहद नाराज हैं। अब वह अपने पुराने सहयोगी एनडीए की ओर जाने का मन बना सकते हैं।

लोकसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इंडिया गठबंधन को बड़ा झटका दिया है। ममता ने कहा है कि वह बंगाल में अकेली चुनाव लड़ेंगी। ममता बनर्जी के ऐलान के बाद I.N.D.I.A. गठबंधन टूटता नजर आ रहा है। कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी ने पहले कांग्रेस को दो सीटें देने को कहा था लेकिन अब ममता ने साफ कर दिया है कि वह कांग्रेस को एक भी सीट नहीं देंगी। पश्चिम बंगाल में 42 लोकसभा सीटे हैं और ममता बनर्जी ने सभी 42 सीटों पर एकला चलो के साथ आगे बढ़ गई हैं। बताया जा रहा है कि टीएमसी के गढ़ बीरभूम जिले में ममता बनर्जी ने एक बंद कमरे में संगठनात्मक बैठक की। इस दौरान ममता बनर्जी ने पार्टी नेताओं से अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहने को कहा है। ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें हमेशा कहा है कि हम बंगाल में अकेले ही बीजेपी को हराने का दम रखते हैं। उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा बंगाल के इतने पास है और उन्हें नहीं बुलाया गया।

दक्षिए भारत से भी इंडिया गठबंधन के लिए बुरी खबर सामने आई है। कर्नाटक के बड़े लिंगायत नेता जगदीश शेट्टार ने भी कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया है। दरअसल लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी अपने नाराज नेताओं की घर वापसी करा रही है। गुरुवार को कर्नाटक के नेता जगदीश शेट्टार पूर्व सीएम वाई. एस. येदियुरप्पा के साथ दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय पहुंचे। वह आज फिर से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। सात महीने पहले कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान जगदीश शेट्टार कांग्रेस में शामिल हो गए थे। तब शेट्टार टिकट कटने से नाराज थे। विधानसभा चुनाव में वह हुबली धारवाड़ सीट पर कांग्रेस के कैंडिडेट बने मगर करीब 34 हजार वोटों से हार गए। जगदीश शेट्टार कर्नाटक के लिंगायत नेताओं में शुमार हैं और हुबली धारवाड़ इलाके में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।

बीते साल मध्य प्रदेश में कांग्रेस की हार के बाद समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के दिग्गज नेता कमल नाथ को आड़े हाथों लिया था। सपा प्रवक्ता मनोज सिंह काका ने कहा था कि कमल नाथ के अमर्यादित बयानों की वजह से कांग्रेस विधानसभा का चुनाव हार गई। उन्होंने कहा था कि विधानसभा चुनाव के दौरान कमल नाथ का अहंकार सिर चढ़कर बोल रहा था। दरअसल मध्य प्रदेश चुनाव में अखिलेश यादव के कांग्रेस से सीट मांगने पर कमल नाथ भड़क गए थे। अखिलेश यादव ने इंडिया गठबंधन के सहयोगी होने के नाते प्रस्ताव रखा था, जिसे कमल नाथ ने ठुकरा दिया था और अखिलेश यादव के प्रति अपमानजनक टिप्पणी की थी। उसी दिन से सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई थी कि अखिलेश की गठबंधन में कोई पूछ नहीं है। सपा के कुछ सहयोगियों ने भी अखिलेश को गठबंधन से हटने की सलाह दी है।

नीतीश कुमार के पाला बदलने के बाद राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा ने बिहार में प्रवेश किया.

0

सरकार बदलने के बाद न्याय यात्रा ने बिहार में प्रवेश किया, राहुल के मुंह में फिर ‘प्यार की दुकान’ सोमवार को जब राहुल की बस किशनगंज में दाखिल हुई तो वहां सरकार बदल चुकी है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ‘महागठबंधन’ से अलग होकर रविवार को भाजपा नीत राजग में शामिल हो गए। राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ सोमवार सुबह बिहार में प्रवेश कर गई. जब राहुल ने 14 जनवरी को मणिपुर से अपनी यात्रा शुरू की, तो बिहार में ‘महागठबंधन’ सरकार सत्ता में थी, जिसमें उनकी पार्टी कांग्रेस भी शामिल थी। लेकिन सोमवार को जब उनकी बस किशनगंज में दाखिल हुई तो वहां की सरकार बदल चुकी थी. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ‘महागठबंधन’ से अलग होकर रविवार को भाजपा नीत राजग में शामिल हो गए। इसके बाद बीजेपी ने जेडीयू की मदद से उस राज्य में सरकार बनाई. हालाँकि, उस गठबंधन सरकार में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं। 14 जनवरी को मणिपुर में राहुल की यात्रा शुरू होने के बाद वह असम से होते हुए पिछले गुरुवार को बंगाल में दाखिल हुए. हालांकि इसके बाद राहुल दो दिन की छुट्टी लेकर दिल्ली चले गए। शनिवार को जब उन्होंने उत्तरी बंगाल के जलपाईगुड़ी से अपनी यात्रा फिर से शुरू की, तब भी बिहार की राजनीति में ‘महागठबंधन’ गठबंधन सत्ता में था। लेकिन 24 घंटे के अंदर सबकुछ बदल गया. भले ही मुख्यमंत्री एक ही हों, लेकिन सत्ता की कुर्सी पर जेडीयू, बीजेपी और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम माझीं की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) का गठबंधन है. यात्रा सोमवार सुबह उत्तरी दिनाजपुर के सोनापुर से शुरू हुई और 11 बजे बिहार के किशनगंज पहुंची. यह मुस्लिम बहुल इलाका है. 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद से किशनगंज लोकसभा क्षेत्र पर कांग्रेस का कब्जा है. भारत जोरो न्याय यात्रा कल पूर्णिया और परसों कटिहार से होकर गुजरेगी. दोनों जिले जदयू के गढ़ के रूप में जाने जाते थे। जब यात्रा शुरू हुई तो ये इलाके कांग्रेस के ‘पक्ष में’ थे. लेकिन अब समीकरण बदल गया है. 31 जनवरी को राहुल की यात्रा बिहार से फिर बंगाल में प्रवेश करेगी. यह मालदा के सुजापुर से होते हुए आगे बढ़ेगी. उसके बाद झारखंड में प्रवेश करेंगे. 14 जनवरी को मणिपुर में राहुल की यात्रा शुरू होने के बाद वह असम से होते हुए पिछले गुरुवार को बंगाल में दाखिल हुए. हालांकि इसके बाद राहुल दो दिन की छुट्टी लेकर दिल्ली चले गए। शनिवार को जब उन्होंने उत्तरी बंगाल के जलपाईगुड़ी से अपनी यात्रा फिर से शुरू की, तब भी बिहार की राजनीति में ‘महागठबंधन’ गठबंधन सत्ता में था। लेकिन 24 घंटे के अंदर सबकुछ बदल गया. भले ही मुख्यमंत्री एक ही हों, लेकिन सत्ता की कुर्सी पर जेडीयू, बीजेपी और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम माझीं की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) का गठबंधन है.

यात्रा सोमवार सुबह उत्तरी दिनाजपुर के सोनापुर से शुरू हुई और 11 बजे बिहार के किशनगंज पहुंची. यह मुस्लिम बहुल इलाका है. 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद से किशनगंज लोकसभा क्षेत्र पर कांग्रेस का कब्जा है. भारत जोरो न्याय यात्रा कल पूर्णिया और परसों कटिहार से होकर गुजरेगी. दोनों जिले जदयू के गढ़ के रूप में जाने जाते थे। जब यात्रा शुरू हुई तो ये इलाके कांग्रेस के ‘पक्ष में’ थे. लेकिन अब समीकरण बदल गया है. 31 जनवरी को राहुल की यात्रा बिहार से फिर बंगाल में प्रवेश करेगी. यह मालदा के सुजापुर से होते हुए आगे बढ़ेगी. उसके बाद झारखंड में प्रवेश करेंगे. बेनजीर द्वारा कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बारे में कड़े शब्दों का इस्तेमाल करने पर विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी दबाव में हैं। राहुल कांग्रेस की ‘न्याय यात्रा’ में मौजूद हैं. यात्रा सोमवार को बंगाल से बिहार के लिए रवाना हुई. राज्य में वापस आ रहा हूं. इस दौरान सुभेंदु ने खुलेआम कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया. इसके बाद कांग्रेस ने राज्य भर के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में शुवेंदु के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का फैसला किया। कांग्रेस का दावा है कि पार्टी नेता और गांधी परिवार के सदस्य के बारे में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल ‘अपमानजनक’ है. सत्तारूढ़ तृणमूल ने भी घटना की निंदा की. सुबवेंदु पर तृणमूल ने ऐसे शब्दों के इस्तेमाल को ‘असंस्कृत’ करार देते हुए हमला बोला है.

सोमवार को शुभेंदु राहुल की न्याययात्रा को लेकर नंदीग्राम में बैठे. मीडिया की ओर से राहुल की यात्रा के बारे में सवाल सुनकर शुवेंदु नाराज हो गए. इसके बाद उन्होंने कहा, ”राहुल गांधी, राहुल गांधी पिछले चार दिनों से सवाल पूछ रहे हैं. कौन हैं हरिदास पाल? ए…” इसके बाद शुवेंदु ने कहा, ”सुबह चूल्हे पर कोयला रखकर चाय बनाई जाती है. चूल्हे पर कोयला चढ़ते मैंने न तो देखा, न सुना। जिसकी समझ, उसे क्यों गिनते हो? पश्चिम बंगाल में अप्रासंगिक पार्टी. इस पार्टी का कोई अस्तित्व नहीं है.” बंगाली राजनीति में कड़वे बोलों का कोई अंत नहीं है. हालांकि, शुवेंदु ने सोमवार को जिस शब्द का इस्तेमाल किया, उसे बंगाली भाषा में ‘अश्लील’ माना जाता है।

राहुल की यात्रा को लेकर कांग्रेस की शुरू से ही सत्तारूढ़ तृणमूल से तनातनी रही है. राहुल के सरकारी गेस्ट हाउस में रुकने और खाने को लेकर भी विवाद है. हालाँकि, राहुल के बारे में अपने भाषण में सुवेंदु पर हमला करने के लिए शब्दों का इस्तेमाल करने में तृणमूल आक्रामक है। राहुल के साथ खड़े होने से बेहतर है कि तृणमूल पर निशाना साधा जाए।’

सिद्धार्थ आनंद द्वारा निर्देशित बॉलीवुड फिल्म फाइटर की समीक्षा.

0

पिछले साल के मध्य में, ऋतिक रोशन ने इंस्टाग्राम पर अपनी एक तस्वीर साझा की थी, जिसे टॉम क्रूज़ की ‘टॉप गन’ के लिए गलत समझा जा सकता है। उस वक्त रितिक सिद्धार्थ आनंद की ‘फाइटर’ की शूटिंग कर रहे थे। एक्शन-ड्रामा में बॉलीवुड परफेक्ट है। लेकिन पूरी हवाई कार्रवाई बाकी थी. ‘फाइटर’ सिद्धार्थ का ‘देसी टॉप सॉन्ग’ है। लेकिन तस्वीर देखकर पिछला भ्रम दूर हो जाएगा. शैलीबद्ध एक्शन के बिना, टॉम क्रूज़ फ़िल्म का कोई स्पर्श नहीं है। यह फिल्म राष्ट्रवाद से ओत-प्रोत है. पुलवामा घटना, बालाकोट एयरस्ट्राइक और दो देशों की वायुसेना के बीच हवाई लड़ाई, कैप्टन अभिनंदन की पाकिस्तान में कैद, भारतीय वायुसेना का पाकिस्तानी सीमा के अंदर जैश कैंप पर हमला… ‘फाइटर’ कई वास्तविक घटनाओं पर आधारित है। सिद्धार्थ ने कहा कि उनकी फिल्म वास्तविकता और कल्पना का मिश्रण है। अत: अतिशयोक्ति आश्चर्य की बात नहीं है। उन्होंने इसे अच्छे से किया. यदि रितिक रोशन पायलट की सीट पर हैं, तो छोटी-छोटी बातों की परवाह कौन करता है! सभी की निगाहें शमश पठानिया उर्फ ​​पैटी (ऋतिक रोशन) पर हैं। एंट्री सीन से लेकर क्लाइमेक्स तक का एक्शन…मल्टीप्लेक्स दर्शक भी दे रहे हैं सीटी!

भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और आतंकी संगठन जैश का मुकाबला करने के लिए विशेष टीमों का गठन किया। इसका नेतृत्व राकेश जय सिंह उर्फ ​​रॉकी (अनिल कपूर) कर रहे हैं। टीम में स्क्वाड्रन लीडर पैटी, मीनल राठौड़ या मिनी (दीपिका पादुकोण), सरताज गिल (करण सिंह ग्रोवर), बशीर खान (अक्षय ओबेरॉय) और जना पंचेक शामिल हैं। पैटी और रॉकी के बीच की कठिनाई को फिल्म की शुरुआत से ही समझा जा सकता है। रिहर्सल के दौरान, रॉकी ने पैटी को कोई भी ‘फैंसी स्टंट’ न करने की चेतावनी दी। चेतावनी के पीछे पैटी का काला अतीत है। कहानी में कुछ भी नया नहीं है. मूल भारत-पाक संघर्ष कश्मीर पर केंद्रित था। जैश आतंकवादी अज़हर अख्तर (ऋषभ साहने) फिल्म का खलनायक है। मजबूत ठुड्डी, लाल आंखें और पीछे की ओर पतले बालों वाला यह खलनायक पाक सेना के शीर्ष पर रहकर सारे फैसले लेता है। क्या नायक का मुकाबला ऐसे खलनायक से होगा? इसलिए निर्देशक ने समय रहते नायक को आसमान से गिराकर खलनायक के साथ लड़ाई के एक्शन सीन की व्यवस्था की है।

इन सबके अलावा कुछ सबप्लॉट, साइड कैरेक्टर और रितिक-दीपिका का प्यार भी है। ‘फाइटर’ के लिए रितिक ने खुद को अलग तरह से विकसित किया है। वर्दी में रहो, क्या है, उससे दूर देखो! वहीं लाइट मेकअप के साथ दीपिका काफी सॉफ्ट लग रही हैं। हालांकि, ऋतिक-दीपिका का लंबे समय से चल रहा प्यार आखिरकार ठंडा पड़ गया। हिंदी सिनेमा के दो ‘हॉट’ कलाकार अपने रोमांस से दर्शकों को दीवाना नहीं बना सके. दीपिका का किरदार महत्वपूर्ण है भले ही उन्हें रितिक जैसी रेंज न मिले। गणतंत्र दिवस परेड में सबसे आगे चल रही भारतीय सेना की लड़कियों ने सबका ध्यान खींचा। ऐसे में मीनल के किरदार को एक अलग दर्जा मिलना चाहिए. अनिल कपूर, करण सिंह ग्रोवर अपने रोल में परफेक्ट हैं।

‘वॉर’, ‘पठान’ के डायरेक्टर सिद्धार्थ ग्लैमरस विजुअल क्रिएट करने में माहिर हैं। हवाई युद्ध खंड देखने लायक हैं। ‘फाइटर’ के दृश्यों के पीछे ‘ड्यून’ या जेम्स बॉन्ड फिल्म की वीएफएक्स कंपनी है। छायांकन और पृष्ठभूमि संगीत ने उस दृश्य को और निखारा। ‘फाइटर’ सिद्धार्थ का ‘देसी टॉप सॉन्ग’ है। लेकिन तस्वीर देखकर पिछला भ्रम दूर हो जाएगा. शैलीबद्ध एक्शन के बिना, टॉम क्रूज़ फ़िल्म का कोई स्पर्श नहीं है। यह फिल्म राष्ट्रवाद से ओत-प्रोत है. पुलवामा घटना, बालाकोट एयरस्ट्राइक और दो देशों की वायुसेना के बीच हवाई लड़ाई, कैप्टन अभिनंदन की पाकिस्तान में कैद, भारतीय वायुसेना का पाकिस्तानी सीमा के अंदर जैश कैंप पर हमला… ‘फाइटर’ कई वास्तविक घटनाओं पर आधारित है। सिद्धार्थ ने कहा कि उनकी फिल्म वास्तविकता और कल्पना का मिश्रण है। अत: अतिशयोक्ति आश्चर्य की बात नहीं है। उन्होंने इसे अच्छे से किया. यदि रितिक रोशन पायलट की सीट पर हैं, तो छोटी-छोटी बातों की परवाह कौन करता है! सभी की निगाहें शमश पठानिया उर्फ ​​पैटी (ऋतिक रोशन) पर हैं। एंट्री सीन से लेकर क्लाइमेक्स तक का एक्शन…मल्टीप्लेक्स दर्शक भी दे रहे हैं सीटी!

लेकिन सिर्फ शानदार दृश्य ही नहीं, सिद्धार्थ की फिल्म में एक दृष्टिकोण भी है। लोकसभा चुनाव वाले साल में गणतंत्र दिवस पर रिलीज होने वाली फिल्म में दिल छू लेने वाले संवाद होंगे – “अगर हम बत्तमीजी पे उतर आए तो तुम्हारा हर महल्ला आईओपी बॉन जाएगा, भारत-अधिकृत-पाकिस्तान” या “उन्हें दिखाना पड़ेगा के, बाप” कौन है।” स्पीलबर्ग निर्मित ‘मास्टर ऑफ द एयर’ सीरीज में हर संवाद में हाथ से ताली बजाने का अभ्यास किया जा रहा है। यह भी वास्तविकता पर आधारित एक एरियल एक्शन ड्रामा है। लेकिन मनोरंजन के लिए आंख में उंगली डालकर राष्ट्रवाद को वहां नहीं धकेला गया है. लेकिन ये बॉलीवुड है. मनोरंजन के जनक!

बिग बॉस 17 के विजेता मुनव्वर फारुकी ने फिक्स्ड विनर कॉन्ट्रोवर्सी कहे जाने पर प्रतिक्रिया दी.

0

‘बिग बॉस’ के घर में मुनव्वर पर लगा धोखाधड़ी का आरोप, विनर की ओर से आया जवाब- ‘बिग बॉस’ सब चौपट! मुनव्वर की जीत तय है. डोंगरी के बेटे ने आखिरकार ट्रॉफी के साथ विरोधियों को जवाब दिया। ‘बिग बॉस 17’ का करीब साढ़े तीन महीने का दौरा रविवार को खत्म हो गया। दिमाग और दिमाग के इस खेल में 17 प्रतियोगियों में से मुनव्वर फारूकी विजयी हुए। टॉप चार में उनके साथ मन्नारा चोपड़ा, अभिषेक कुमार और अंकिता लोखंडे थे। दर्शकों ने शुरुआत से ही अंकिता और मुनव्वर को टॉप दो से आगे रखा. लेकिन टेलीविजन का मशहूर चेहरा अंकिता को चौथे नंबर पर जाना पड़ा। मुनव्वर ने शुरू से ही कहा कि ट्रॉफी ‘डोंगरी’ आ रही है. इस नेट इन्फ्लुएंसर ने यह दिखाया। लेकिन जब मुनवर ने पुरस्कार जीता, तो दर्शकों का एक वर्ग खुशी से झूम उठा। वे शिकायत करते हैं, “बिग बॉस” सब ग़लत है! मुनव्वर की जीत तय है. आख़िरकार उन्होंने विरोधियों को ट्रॉफी देकर जवाब दिया. मुनव्वर ने लगातार दो रियलिटी शो जीते। इससे पहले कंगना रनौत की ‘लॉक अप’ ने बाजी मारी थी. उसके बाद मुनव्वर ने सलमान का ‘बिग बॉस’ जीता। वह शुरू से ही ‘बिग बॉस’ के घर के पसंदीदा प्रतियोगी हैं। 1 जनवरी 2021 को उन्हें हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में मध्य प्रदेश पुलिस को गिरफ्तार करना पड़ा. इसके बाद शो के बीच उनकी लव लाइफ और शादी से जुड़े कई सच सामने आए। उसको लेकर भी कम आलोचना नहीं हुई. आख़िरकार उनके हाथ में ट्रॉफी देखकर उनके विरोधियों ने उन पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया। मुनव्वर ने आखिरकार चुप्पी तोड़ी और कहा, ‘अगर सब कुछ पहले से तय होता तो मुझे शो में इतना कुछ नहीं सहना पड़ता। मैं उनसे अनुरोध करता हूं कि मुझ पर धोखाधड़ी का आरोप लगाने से पहले पूरा सीजन दोबारा देखें।” आम दर्शकों से लेकर बीटाउन स्टार तक, मुनव्वर ने कई लोगों को अपनी तरफ कर लिया है। उनके शब्दों में, “हां, मेरे पास बहुत बड़ा प्रशंसक आधार है। लेकिन ऐसे शोज़ के प्रशंसक खोने का डर भी रहता है. जो लोग मेरे बारे में परोक्ष टिप्पणियां कर रहे हैं, मैं उनकी राय नहीं बदल सकता. ‘बिग बॉस’ जीतने के बाद अपना मन नहीं बदलना चाहता।” पति के जाने के बाद से अंकिता लोखंडे परेशान हैं। हो सकता है विक्की बाहर जाकर पार्टी में मजा करे. जिसका उसे डर था वही सच हुआ। अंकिता के पति को ‘बिग बॉस’ की पूर्व महिला प्रतियोगियों के साथ पार्टी करते देखा गया था। इतना ही नहीं, उस पार्टी में एक लोकप्रिय नेट इन्फ्लुएंसर पुरबा राणा भी मौजूद थीं। सफेद दीवार के एक कोने में विक्की को पुरबा के साथ लिपटते हुए देखा गया। उनकी अंतरंग तस्वीरें सोशल मीडिया पर छा गई हैं। इस बार तस्वीर अंकिता के हाथ लग गई. पहली नजर में अवाक रह गई एक्ट्रेस. आपने अपने पति के साथ क्या निर्णय लिया? कुछ घंटे प्रतीक्षा करें. रविवार शाम को बिग बॉस का फिनाले। अंकिता टॉप चार में हैं. लेकिन अंकिता के पति को घर से निकाल दिया गया है. इस बार विक्की कंडाकारखाना के नए एपिसोड में डायरेक्टर रोहित शेट्टी ने अंकिता को पेश किया. अन्य महिला प्रतियोगियों के प्रति विक्की के व्यवहार को लेकर ‘बिग बॉस’ के घर में विक्की और अंकिता के बीच कई झगड़े हुए। जैसे ही विक्की ‘बिग बॉस’ के घर से बाहर निकला, अंकिता ने उसे पार्टी न करने की चेतावनी दी। हालांकि, ‘बिग बॉस’ के घर के मास्टरमाइंड ‘विक्की भैया’ अपनी पत्नी की बात सुने बिना पार्टी में मस्ती कर रहे हैं। उस पार्टी में आयशा खान, ईशा मालविया, सना रईस खान, पुरबा राणा और अन्य लोग मौजूद थे। संयोग से, पार्टी में कोई अन्य पुरुष नहीं देखा गया। हालांकि, तस्वीरों से साफ है कि विक्की अपने दोस्तों की कंपनी एन्जॉय कर रही हैं। इस बार रोहित ने अंकिता के सामने वह तस्वीर दिखाते हुए कहा, मैं अपने काम की कसम खाता हूं, रोटी-रोटी की कसम खाता हूं। घर से निकलते ही विक्की ने पार्टी करना शुरू कर दिया. पिछले दो दिनों से पार्टी चल रही है. यह आपके घर में चल रहा है।” तस्वीर देखकर अंकिता अवाक रह गईं और बोलीं, ”वह जो कर रहा है उससे सच में मुझे उसे थप्पड़ मारने का मन कर रहा है।” उन्होंने खुद इस बात को स्वीकार किया है. लेकिन क्या ‘बिग बॉस’ के घर से निकलने के बाद इनका रिश्ता कोई नया मोड़ लेगा!

क्या अब के के पाठक की मुश्किलें हट गई है?

वर्तमान में के के पाठक की सारी मुश्किलें हट गई है! शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के कड़े फैसलों से शिक्षकों में हड़कंप तो था ही, पूर्व शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर की भी उनकी बेपटरी जगजाहिर थी। दोनों के बीच बेपटरी की शुरुआत तो उसी दिन हो गई थी, जब सीएम नीतीश कुमार ने अपने तत्कालीन शिक्षा मंत्री के बजाय शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को काम करने की खुली छूट दे दी थी। उनकी सहूलियत के लिए नीतीश ने चंद्रशेखर का विभाग भी बदल दिया। जैसे संकेत मिल रहे हैं, नए शिक्षा मंत्री आलोक मेहता महकमे के अपर मुख्य सचिव के काम में बाधा नहीं डालेंगे। नीतीश की सख्त हिदायत है कि केके पाठक के काम में कोई दखलंदाजी नहीं होनी चाहिए। नीतीश कुमार से लोजपा आर के अध्यक्ष चिराग पासवान और पूर्व सीएम जीतन राम मांझी का भले ही छत्तीस का आंकड़ा रहा हो, पर केके पाठक के प्रति दोनों के मन में आदर-सम्मान का भाव रहा है। जीतन राम मांझी तो उनकी तारीफ करते हुए यहां तक कह गए कि उन्हें बिहार का मुख्य सचिव बना देना चाहिए। इससे बिहार का भला होगा। चिराग पासवान ने कहा कि जिस तरह पूर्व शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर अपने बयानों से जातिवाद को बढ़ा दे रहे थे, वैसे में उन्हें हटाया जाना सरकार का उचित कदम है। इसको इस रूप में भी समझा जा सकता है कि केके पाठक ने नीतीश की छवि को इतना सुधार दिया है कि विरोधी भी अब नीतीश के फैसले की तारीफ करने लगे हैं।

इसे महज संयोग कहें या नीतीश कुमार की कोई चाल मानें कि केके पाठक जब छुट्टी पर गए तो उनके इस्तीफे का चौतरफा शोर हुआ। जिस दिन वे छुट्टी से लौटे, उसके अगले ही दिन नीतीश ने चंद्रशेखर को शिक्षा मंत्री के पद से हटा दिया और आलोक मेहता को नई जिम्मेवारी दे दी गई। आलोक मेहता इसके पहले भूमि सुधार और राजस्व महकमे के मंत्री थे। आलोक मेहता ने नीतीश द्वारा नई जिम्मेवारी देने के बाद जिस अंदाज में उनका धन्यवाद किया, उससे इतना तो स्पष्ट हो ही जाता है कि वे इससे खुश हैं और केके पाठक के काम में शायद ही दखलंदाजी की हिमाकत करें। हालांकि राजनीतिक गलियारे में चर्चा यही रही है कि चंद्रशेखर के विवादित बयानों और अपने एसीएस केके पाठक से उनकी बेपटरी से नीतीश बेहद खफा थे। नाराजगी के कारण ही केके पाठक ने छुट्टी पर जाने का फैसला किया। कहा तो यह भी जा रहा है कि पाठक छुट्टी से लौट कर शिक्षा विभाग छोड़ना चाहते थे। इसकी वजह अपने विभागीय मंत्री से उनकी बेपटरी ही कारण थी। नीतीश को यह नागवार लगा और उन्होंने अपनी नाराजगी आरजेडी के शीर्ष नेतृत्व से जाहिर कर दी। नीतीश इतने नाराज थे कि अगले ही दिन आरजेडी नेता और बिहार के डेप्युटी सीएम तेजस्वी यादव अपने पिता और पार्टी के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के साथ नीतीश के दरबार में पहुंच गए। तकरीबन घंटे भर तीनों नेताओं ने राय-मशविरा किया। आखिरकार चंद्रशेखर का विभाग बदलने पर बेमन से ही सही, आरजेडी ने सहमति दे दी। चूंकि यह विभाग आरजेडी कोटे का था, इसलिए किसी और को मंत्री बनाने के बजाय भूमि-राजस्व मंत्री आलोक मेहता को शिक्षा विभाग की जिम्मेवारी देने की सलाह आरजेडी के शीर्षस्थ नेताओं ने दी।

यह भी सच है कि केके पाठक के शिक्षा विभाग का एसीएस बनाए जाने के बाद बिहार की शिक्षा व्यवस्था पटरी पर आने लगी। स्कूलों में समय से शिक्षक आने-जाने लगे तो छात्रों की उपस्थिति भी बढ़ी। कोचिंग संचालकों पर नकेल कस कर पाठक ने उनकी भी कमर तोड़नी शुरू कर दी। जीतन राम मांझी तो उनकी तारीफ करते हुए यहां तक कह गए कि उन्हें बिहार का मुख्य सचिव बना देना चाहिए। इससे बिहार का भला होगा। चिराग पासवान ने कहा कि जिस तरह पूर्व शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर अपने बयानों से जातिवाद को बढ़ा दे रहे थे, वैसे में उन्हें हटाया जाना सरकार का उचित कदम है। इसको इस रूप में भी समझा जा सकता है कि केके पाठक ने नीतीश की छवि को इतना सुधार दिया है कि विरोधी भी अब नीतीश के फैसले की तारीफ करने लगे हैं।लोग भी यह मानते हैं कि कोचिंग के लोभ में बच्चे स्कूलों में नामांकन तो लेते थे, लेकिन वहां न जाकर वे कोचिंग क्लासेज में चले जाते थे। इतना ही नहीं, सरकारी स्कूलों के शिक्षक भी कोचिंग क्लास चलाने लगे थे। पाठक ने उन्हें भी स्कूल आने के लिए मजबूर कर दिया।

क्या लालू यादव की पार्टी में मच गया है सियासी घमासान?

वर्तमान में लालू यादव की पार्टी में सियासी घमासान मच चुका है! बिहार में वाम दलों को छोड़ इंडी अलायंस की बाकी सभी पार्टियों में खटपट की आहट साफ सुनाई देने लगी है। लोकसभा चुनाव में अभी तीन महीने बाकी हैं, लेकिन नेताओं के इधर से उधर होने की कवायद शुरू हो गई है। जेडीयू में यह सिलसिला तो पहले से ही चल रहा है। कांग्रेस में भी विनीता विजय के लोजपा ज्वाइन करने के साथ इसका श्रीगणेश हो चुका है। अब आरजेडी में भी खटपट की गूंज सुनाई दे रही है। लोकसभा चुनाव की घोषणा होने तक नेताओं के इधर से उधर होने की रफ्तार तेज हो सकती है। मुस्लिम-यादव M-Y के मजबूत समीकरण में भी सेंध लग चुकी है। हालांकि अभी तक आरजेडी के किसी नेता ने पाला बदल नहीं किया है, लेकिन कुछ ऐसे संकेत मिल रहे, जिससे आने वाले दिनों में पार्टी को ऐसे दिन देखने को मिल सकते हैं। अपने विवादित बयानों के लिए बिहार में चर्चित रहे चंद्रशेखर का विभाग नीतीश कुमार ने बदल दिया। हिन्दू भावनाओं को भड़काने वाले बयानों के लिए शिक्षा मंत्री रहते चंद्रशेखर मशहूर हो गए थे। नीतीश ने एक दफा उनको रोका भी था, लेकिन उन्होंने अपना अंदाज नहीं बदला। कहा तो यह भी जाता है कि चंद्रशेखर ने पलट कर नीतीश को जवाब दे दिया था कि वे अपने स्टैंड पर कायम हैं। उन्हें आरजेडी ने भी शह दिया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह उनके समर्थन में थे। लालू परिवार का करीबी और स्वजातीय होने के कारण उनका मनोबल बढ़ा हुआ था। नीतीश ने मौका पाकर अपनी तल्खी दिखाई तो लालू-तेजस्वी को भागे-भागे उनके के दरबार में हाजिर होना पड़ा। आखिरकार चंद्रशेखर का विभाग बदलने पर राजद ने अपनी सहमति दे दी। जाहिर है कि यह न चंद्रशेखर को जंचा होगा और न उनके समर्थकों को। चंद्रशेखर के देवी-देवताओं और हिन्दू धर्मग्रंथों के खिलाफ बयान से मुस्लिम समाज के लोग भी आह्लादित थे। उनका विभाग बदले जाने को उनके समर्थक खफा हैं। इसका खामियाजा चुनाव में आरजेडी को भुगतना पड़ सकता है।

इधर आरजेडी की खटपट मुजफ्फरपुर में भी दिखी। आरजेडी शिक्षक प्रकोष्ठ के डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट हरिशंकर प्रसाद यादव ने कर्पूरी ठाकुर के जन्म शताब्दी समारोह के लिए बैठक बुलाई थी। उन्होंने सबसे आग्रह किया कि पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हाल में 24 जनवरी को होने वाले समारोह में ज्यादा से ज्यादा लोगों की जिले से सहभागिता होनी चाहिए। यहां तो बात ठीक थी, लेकिन राजद के प्रदेश महासचिव जयशंकर प्रसाद यादव का यह कहना कि राजद के मुजफ्फरपुर जिला अध्यक्ष पार्टी को कमजोर कर रहे हैं, गुटबंदी का संकेत दे गया। उन्होंने तो यहां तक आरोप जिला अध्यक्ष पर मढ़ दिया कि 10 जनवरी को कार्यकर्ता संवाद सम्मेलन में जिला कमेटी के लोगों को सम्मान नहीं मिला। कई प्रकोष्ठों के लोगों को बुलाया तक नहीं गया। इससे पार्टी कमजोर हो रही है। ऐसे जिला अध्यक्ष पर पार्टी को एक्शन लेना चाहिए।

हरिशंकर प्रसाद ने यह भी कह दिया कि कई प्रकोष्ठों के जिलाध्यक्षों और प्रदेश पदाधिकारियों को कार्यकर्ता संवाद सम्मेलन की सूचना तक जिला अध्यक्ष ने नहीं दी। यह पार्टी को कमजोर करने वाला कदम है। राजद के कार्यकर्ता इससे नाराज हैं। इससे पार्टी कमजोर होती जा रही है। जिलाध्यक्ष ने राजद को पैकेट पार्टी बना दिया है। उनके इस कदम से निष्ठावान कार्यकर्ता हताश हैं। उन्होंने पार्टी को नुकसान से बचाने के लिए जिलाध्यक्ष पर कार्रवाई की मांग की।

बिहार में सबसे मजबूत स्थिति आरजेडी की रही है। लेकिन कई कारणों से अब उसकी आगे की डगर आसान नहीं दिख रही। नीतीश कुमार की वजह से आरजेडी काफी दबाव में है। नीतीश कुमार के इंडी अलायंस का संयोजक पद ठुकराने के बाद आरजेडी को इसलिए मलामत का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उसी ने नीतीश को पीएम और संयोजक का सब्जबाग दिखाया था। नीतीश के बारे में यह भी चर्चा लगातार हो रही हैं कि वे इंडी अलायंस से अलग होकर फिर भाजपा से हाथ मिला सकते हैं। ऐसा होता है तो इससे आरजेडी की भारी फजीहत होगी। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद ने ही विपक्षी एकता की पहल के लिए नीतीश कुमार को सोनिया गांधी से मिलाया था। अगर नीतीश साथ छोड़ते हैं तो बिहार में महागठबंधन सरकार खतरे में पड़ सकती है। तब लालू के बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप का मंत्री पद भी चला जाएगा। सीबीआई और ईडी ने पहले से ही लालू परिवार के सदस्यों को हलकान कर रखा है।

जब पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की मौत पर हुआ था सियासी घमासान!

एक ऐसा समय जब पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की मौत पर सियासी घमासान शुरू हो गया था! बिहार के दो बार सीएम रहे ‘जननायक’ कर्पूरी ठाकुर को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जाएगा। नरेंद्र मोदी सरकार ने दिग्गज समाजवादी नेता को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए चुना है। लंबे समय से कर्पूरी ठाकुर को ‘भारत रत्न’ देने की मांग की जा रही थी। हालांकि, अब केंद्र ने इस पर फाइनल फैसला ले लिया। कर्पूरी ठाकुर को ‘भारत रत्न’ दिए जाने का ऐलान होते ही उन्हें लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। एक सवाल भी उठने लगे कि क्या बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की हत्या हुई थी? ‘जननायक’ की मौत को लेकर ये सवाल पहले भी कई बार उठ चुके हैं। कभी बीजेपी तो कभी आरजेडी की ओर से ये सवाल उठाए गए। कर्पूरी ठाकुर की मौत पर सवाल साल 2017 में बिहार बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष रहे नित्यानंद राय ने उठाए थे। उन्होंने कहा था कि जननायक कर्पूरी ठाकुर की मौत स्वभाविक नहीं थी बल्कि उनकी हत्या हुई थी। नित्यानंद राय ने तत्कालीन बिहार सरकार से मामले की जांच कराने की भी मांग की थी। 24 जनवरी 2017 को कर्पूरी ठाकुर की जयंती समारोह में उन्होंने ये बातें कही थीं, जिसे लेकर बिहार में सियासी घमासान तेज हो गया था। हालांकि, ये कोई पहला मौका नहीं था जब कर्पूरी ठाकुर की मौत पर सवाल उठाए गए।

साल 2021 में आरजेडी नेता और बाल संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य रहे डॉक्टर निशींद्र किंजल्क ने भी कुछ ऐसी बात कही थी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर की मौत की उच्चस्तरीय जांच कराने की बात कही थी। उन्‍होंने भी कर्पूरी ठाकुर की मौत के पीछे गहरी साज‍िश की आशंका जताई थी। आरजेडी नेता डॉ. निशींद्र किंजल्क ने उस समय सीएम नीतीश कुमार को इस संबंध में चिट्ठी भी लिखी थी। अपने पत्र में उन्होंने कर्पूरी ठाकुर के ही एक लेटर का जिक्र किया था। कर्पूरी ठाकुर ने ये लेटर अपनी मौत से करीब 4 साल पहले 11 सितंबर 1984 में बिहार के तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी को भेजा था। इसमें ‘जननायक’ ने अपनी हत्या की आशंका जताई थी। कर्पूरी ठाकुर का निधन 17 फरवरी, 1988 को दिल का दौरा पड़ने से हुआ था, उस समय उनकी 64 वर्ष थी। निशींद्र किंजल्क के 2021 में सीएम नीतीश को भेजे गए लेटर में कर्पूरी ठाकुर की मौत को लेकर कई बातों का जिक्र किया गया था। इसमें बताया कि जब कर्पूरी ठाकुर की मृत्यु हुई तो एक चश्मदीद ने दावा किया था कि पूर्व सीएम के मुंह से झाग निकल रहा था। उनकी मौत बेहद रहस्यमय तरीके से हुई थी ऐसे में इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।

नित्यानंद राय और निशींद्र किंजल्क ही नहीं कर्पूरी ठाकुर की मौत पर सवाल तो पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय रघुवंश प्रसाद सिंह ने भी किया था। उन्होंने 22 फरवरी, 1988 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को पत्र लिखकर रहस्यमय मौत की जांच को लेकर डिमांड की थी। उस समय के इस लेटर की प्रति बिहार के तत्कालीन सीएम भागवत झा आजाद को भी दी गई थी। फिलहाल इन दावों और आशंकाओं में कितनी सच्चाई है ये अब तक स्पष्ट नहीं हुआ है।

अब कर्पूरी ठाकुर की 100वीं जयंती पर उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ दिए जाने की चर्चा हर ओर हो रही। जननायक कर्पूरी ठाकुर की मौत स्वभाविक नहीं थी बल्कि उनकी हत्या हुई थी। नित्यानंद राय ने तत्कालीन बिहार सरकार से मामले की जांच कराने की भी मांग की थी। 24 जनवरी 2017 को कर्पूरी ठाकुर की जयंती समारोह में उन्होंने ये बातें कही थीं, जिसे लेकर बिहार में सियासी घमासान तेज हो गया था। हालांकि, ये कोई पहला मौका नहीं था जब कर्पूरी ठाकुर की मौत पर सवाल उठाए गए।सभी पार्टियां और नेता इस फैसले की तारीफ कर रहे हैं। बता दें कि कर्पूरी ठाकुर का जन्म 24 जनवरी 1924 को समस्तीपुर के पितौंझिया गांव में हुआ था। अब इस गांव को कर्पूरीग्राम भी कहा जाता है। बता दें कि कर्पूरी ठाकुर का निधन 17 फरवरी, 1988 को दिल का दौरा पड़ने से हुआ था, उस समय उनकी 64 वर्ष थी। निशींद्र किंजल्क के 2021 में सीएम नीतीश को भेजे गए लेटर में कर्पूरी ठाकुर की मौत को लेकर कई बातों का जिक्र किया गया था। इसमें बताया कि जब कर्पूरी ठाकुर की मृत्यु हुई तो एक चश्मदीद ने दावा किया था कि पूर्व सीएम के मुंह से झाग निकल रहा था। उनकी मौत बेहद रहस्यमय तरीके से हुई थी ऐसे में इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। कर्पूरी ठाकुर पहली बार 22 दिसंबर 1970 को और फिर दूसरी बार 24 जून 1977 को बिहार के सीएम बने थे। कर्पूरी ठाकुर 1952 की पहली बार विधानसभा चुनाव जीते और फिर कभी नहीं हारे।

आखिर कितने अमीर है लालू यादव और नीतीश कुमार?

आज हम आपको बताएंगे कि लालू यादव और नितेश कुमार कितने अमीर है! बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर आजादी के बाद से ही राजनीति में सक्रिय रहे। 1952 से 1984 तक लगातार विधायक या सांसद रहे। आपातकाल के बाद 1977 के आम चुनाव में वह समस्तीपुर से सांसद भी चुने गए। 1967 में बिहार सरकार के ताकतवर मंत्रालयों के मंत्री भी रहे। 1970 और 1977 में दो बार बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी भी संभाली। इसके बावजूद उनका बैक बैलेंस कम ही रहा। सीएम आवास में भी वह जमीन पर सोते थे। कर्पूरी ठाकुर की सादगी के कई किस्से मशहूर हैं। उनके निजी सचिव रहे पत्रकार सुरेंद्र किशोर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि सीएम पद से हटने के बाद उन्होंने अपनी फैमिली को पैतृक गांव पितौझिया भेज दिया था, क्योंकि उनकी इनकम कम थी। पटना जैसे शहर में वह परिवार का खर्च नहीं चला सकते थे। उनके पिता गोकुल ठाकुर बेटे के मंत्री और मुख्यमंत्री बनने के बाद भी नाई का काम करते रहे। अनुरंजन झा अपनी किताब ‘गांधी मैदान ब्लफ ऑफ सोशल जस्टिस’ में लिखा है कि कर्पूरी ठाकुर ने विधायक के लिए आवंटित सस्ते प्लॉट लेने से इनकार कर दिया था। आपातकाल के दौरान जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में सोशलिस्ट और जनसंघ के नेताओं ने एक ही छतरी के नीचे आंदोलन किया। सोशलिस्ट नेताओं लालू यादव, नीतीश कुमार और राम बिलास पासवान जैसे दिग्गज नेता कर्पूरी ठाकुर के साथ आंदोलन में जुड़े। कई मौकों पर ये नेता कर्पूरी ठाकुर को राजनीतिक गुरु बता चुके हैं। आपातकाल के बाद कर्पूरी ठाकुर के समाजवादी शिष्य भी विधायक और सांसद बने। 90 के दशक में लालू यादव और 2005 के बाद नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने। कर्पूरी ठाकुर की सादगी के चर्चे तो आज भी होते हैं, मगर उनके शिष्यों की आमदनी पर भी चर्चा होती है। अनुरंजन झा ने किताब ‘गांधी मैदान ब्लफ ऑफ सोशल जस्टिस’ में लिखा है कि लालू यादव विधायक बनते ही जीप खरीद ली, जबकि कर्पूरी ठाकुर रिक्शे में ही चलते रहे। एक बार कर्पूरी ठाकुर ने विधानसभा जाने के लिए उनसे गाड़ी मांगी तो लालू यादव ने बहाना बना दिया, जीप में तेल नहीं है। बाद में लालू यादव के खिलाफ चारा घोटाला, लैंड फॉर जॉब स्कीम समेत कई घोटालों की जांच हुई। चारा घोटाले में लालू यादव को सजा भी हुई।

2009 के चुनाव में लालू यादव ने बताया था कि उनके पास 3.20 करोड़ की संपत्ति है। 2020 में राबड़ी देवी ने अपनी संपत्ति 17.92 करोड़ रुपये बताई थी। लालू यादव के छोटे बेटे डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने चुनावी हलफनामे में 5.88 करोड़ की चल-अचल संपत्ति होने का खुलासा किया था। कैबिनेट सचिवालय की वेबसाइट के अनुसार, तेजस्वी यादव के पास 1.11 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 3 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति भी है। 2019 के लोकसभा चुनाव में पाटलिपुत्र से आरजेडी उम्मीदवार रहीं मीसा भारती ने बताया था कि उनके पास बिहार और दिल्ली में 6.72 करोड़ की प्रॉपर्टी है। 2020 के विधानसभा चुनाव में लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने 2.83 करोड़ की कुल प्रॉपर्टी होने की जानकारी दी थी। इससे अलग 2017 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने लालू परिवार की 9.32 करोड़ रुपये बेनामी संपत्ति जब्त की थी। इस संपत्ति का मार्केट रेट 175 करोड़ रुपये आंकी गई। जुलाई 2023 में भी ईडी ने भी लैंड फॉर जॉब घोटाले में उनकी फैमिली की 6 करोड़ की प्रॉपर्टी अटैच कर ली थी।

कर्पूरी ठाकुर के दूसरे शिष्य नीतीश कुमार पिछले 23 साल से बिहार के मुख्यमंत्री हैं। नीतीश कुमार भी वी पी सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकारों में केंद्रीय मंत्री रहे। सीएम बनने के बाद से वह कैबिनेट सचिवालय विभाग की वेबसाइट पर हर साल अपनी संपत्ति का खुलासा करते हैं। 2024 में घोषित विवरण के अनुसार, उनके पास 1.64 करोड़ रुपये की संपत्ति है। 2022 में उनकी संपत्ति कुल 75.53 लाख रुपये थी। उनके पास फोर्ड इकोस्पोर्ट कार है,जिसकी कीमत 11.32 लाख रुपये है। उनके पास नई दिल्ली के द्वारका में 1.48 करोड़ रुपये कीमत का एक अपार्टमेंट फ्लैट है, जिसे उन्होंने किराये पर दे रखा है। बाद में लालू यादव के खिलाफ चारा घोटाला, लैंड फॉर जॉब स्कीम समेत कई घोटालों की जांच हुई। चारा घोटाले में लालू यादव को सजा भी हुई।इसके अलावा नीतीश कुमार के पास 13 गायें और 10 बछड़े भी हैं। उनके बेटे निशांत के पास कुल 3.61 करोड़ की प्रॉपर्टी है। नीतीश कुमार की पैतृक प्रॉपर्टी और खेती वाली जमीन भी निशांत के नाम पर है। उनके बेटे के पास नालंदा के हकीकतपुर और कल्याण बीघा में मकान है। इसके अलावा पटना के कंकड़बाग में भी निशांत का घर है।

जानिए पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर का एक अद्भुत किस्सा!

आज हम आपको पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर का एक अद्भुत किस्सा सुनाने जा रहे हैं! बिहार के समस्तीपुर के पितौंझिया अब कर्पूरीग्राम में जन्मे कर्पूरी ठाकुर बिहार में एक बार उपमुख्यमंत्री, दो बार मुख्यमंत्री और दशकों तक विधायक और विरोधी दल के नेता रहे। जननायक 1952 की पहली विधानसभा में चुनाव जीतने के बाद वे बिहार विधानसभा का चुनाव कभी नहीं हारे। राजनीति में लंबा सफ़र बिताने के बाद जब उनका निधन हुआ, तब उनके परिवार को विरासत में देने के लिए एक मकान तक नहीं था। वे न तो पटना में, न ही अपने पैतृक घर में वो एक इंच जमीन जोड़ पाए। फरवरी 2014 में बिहार विधान परिषद की पत्रिका ‘साक्ष्य’ में जननायक से जुड़े कई स्मरण को साझा किया था। परिषद ने इस पत्रिका को प्रकाशित हुआ। ये पत्रिका पूरी तरह जननायक को समर्पित रही। इस अंक में बिहार के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके बारे में अपने स्मरण को साझा किया है। केंद्र सरकार ने उन्हें भारत रत्न देने का ऐलान किया है। कर्पूरी ठाकुर के बारे में बिहार राज्य पिछड़ा आयोग के सदस्य रहे निहोरा प्रसाद यादव ने ‘साक्ष्य’ में एक बेहतरीन स्मरण साझा किया है। उन्होंने लिखा है कि मुख्यमंत्री रहते कर्पूरी ठाकुर हर दिन पटना में जरूर मौजूद रहते थे। वे साढ़े सात बजे तैयार होकर अपने सरकारी आवास पर बैठ जाते। वहां एक बड़ा सा टेबल, जो कहीं-कहीं से टूटा हुआ रहता, उसी के पास लगे बेंच पर बैठते। इस दौरान बिहार भर से गरीबों का हुजूम पहुंचता। आने वाले लोगों के तन पर साफ कपड़े नहीं होते। कईयों के पैर में चप्पल नहीं होता। वे अपनी पीड़ा सुनाते। कर्पूरी ठाकुर उनकी समस्या को सुनते।

निहोरा प्रसाद यादव ने पत्रिका में चर्चा करते हुए उस दौर की बातों का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि उस दौरान मुख्यमंत्री के तौर पर लोगों की समस्या को लेकर अधिकारियों को तत्काल फोन करते। समस्या के निवारण का निर्देश देते। उसके साथ ही कई अधिकारियों को पत्र भी लिखते। इतना ही नहीं दूर से आने वाले लोगों से एक निवेदन भी करते। जननायक उनसे कहते कि-इतना पैसा लगाकर आने की जरूरत क्या थी? मैं खुद आपके इलाके में आने वाला था। कर्पूरी ठाकुर गरीबों को नम्र भाव से ये बात समझाते। वे कहते हैं कि एक रात जब उनसे मिलकर चलने लगा। उन्होंने कहा कि छह बजे आ जाइएगा। सुबह कहीं चलना है। उन्होंने लिखा है कि वे अक्सर मुझे अपने साथ लेकर जाया करते थे।

अगले दिन ठीक छह बजे निहोरा तैयार होकर जननायक के आवास पर पहुंच जाते हैं। उसके बाद अपनी बाइक बंद कर जैसे ही खड़े होने का प्रयास करते हैं। कर्पूरी ठाकुर उन्हें आवाज देते हैं। निहोरा प्रसाद यादव कहते हैं कि मुख्यमंत्री उनसे कहते हैं कि- चलिए। उसके बाद वे अचरज भरी निगाह से दबी आवाज में जननायक कर्पूरी ठाकुर से प्रश्न करते हैं कि गाड़ी तो अभी आपकी आई नहीं। उसके बाद मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर कहते हैं कि आपकी मोटरसाइकिल से ही चलेंगे। निहोरा प्रसाद यादव अपने स्मरण में लिखते हैं कि इतना सुनने के बाद मेरा खून सुख गया। थोड़ी देर तक मैं शून्यता की स्थिति में चला गया। फिर उन्होंने आवाज दी। कहा- स्टार्ट करिए। निहोरा यादव ने कहा है कि बड़ी हिम्मत और साहस के साथ अपने आपको नियंत्रित करते हुए मैंने मोटरसाइकिल स्टार्ट की। बैठने के क्रम में पीछे लगे करियर से कर्पूरी ठाकुर के पैर छिल गये। मैंने अफसोस और दुख प्रकट किया। उन्होंने कहा कि मेरा कद छोटा है। इसलिए ऐसा हुआ। चलिए कोई बात नहीं। बैठने के बाद दोनों हाथ मेरे कंधो पर उन्होंने रख दिया और कहा कि बेली रोड चलिए। निहोरा प्रसाद यादव कहते हैं कि मैं उस समय अजीबो-गरीब स्थिति में था। जब सड़क से गुजरने वाले, पैदल हों या गाड़ी से या साइकिल से सभी लोग जननायक कर्पूरी ठाकुर को मोटरसाइकिल से देख रहे थे। सभी के चेहरे पर अविश्वास था।

लोगों को विश्वास नहीं हो रहा था कि इतने बड़े राजनेता और बिहार के मुख्यमंत्री मोटरसाइकिल से सफर कर रहे हैं। यह नहीं हो सकता। आपस में तर्क-वितर्क सही गलत होने लगा। कईयों ने उंगली से इशारा कर बताना चाहा कि देखें कर्पूरी ठाकुर जी मोटरसाइकिल से जा रहे हैं। कईयों ने सिर झुकाकर अभिवादन किया। कईयों ने हाथ उठाकर प्रणाम किया। उसके बाद कर्पूरी ठाकुर ने निहोरा प्रसाद यादव को बताया कि कई दिनों से विदेश के कुछ पत्रकार मुझसे मिलने आए हैं। समय नहीं रहने के कारण उन्हें प्रेसिडेंट होटल में ठहरने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मैंने पत्रकारों से वादा किया था कि सुबह छह बजे मैं स्वयं होटल में ही आकर बात करूंगा।

केंद्र की मोदी सरकार की ओर से कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने का ऐलान हुआ है। उस दौर में आम लोगों के करीबी रहे कर्पूरी ठाकुर के बारे में यादगार बातों को साझा करते हुए निहोरा प्रसाद यादव ने आगे लिखा है कि जैसे ही होटल के पास बाइक रुकी। होटल स्टाफ और कर्मचारी दौड़ कर आ गए। जब विदेशी पत्रकारों के समूह को इसकी जानकारी मिली। वे भी बाहर आए। उन्होंने कर्पूरी ठाकुर को देखते ही कहा- You are really a leader of downtrodden people. We have not seen any leader as you in the entire world. उन्होंने लिखा है कि उनका विशाल व्यक्तित्व एवं बड़े राजनेता होने का एहसास गरीबों की आवाज बनने में कभी और कहीं भी बाधक नहीं बना। यहीं कारण रहा कि वे आवाज को मजबूती प्रदान करने में साधन नहीं, अपने आपको साध्य मानकर आगे बढ़ते गए। लक्ष्य तक पहुंचने में रास्ता चाहे जैसा भी हो। उनकी तनिक भी परवाह नहीं की। न रात देखा और न दूरी देखी। न साधन देखा। न मुसीबत देखी। निर्भीक होकर सीना फैलाकर पैर अड़ाकर लड़ने और संघर्ष से तनिक भी नहीं रुके पूरी जिंदगी ही मानें गरीबों के अपना जीवन गिरवी रख दिया।