Wednesday, March 4, 2026
Home Blog Page 777

क्या भारत न्याय यात्रा बनेगी कांग्रेस की ढाल?

भारत न्याय यात्रा कांग्रेस की ढाल बन सकती है! भारत जोड़ो यात्रा के बाद अब राहुल गांधी नए साल में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भारत न्याय यात्रा पर निकलेंगे। कांग्रेस की 14 जनवरी से भारत न्याय यात्रा में मणिपुर से मुंबई तक छह हजार किमी से अधिक दूरी तय होगी। राहुल गांधी यात्रा 2.0 में अधिक दूरी कम समय में तय करेंगे। 6200 किलोमीटर की यात्रा कई ऐसे राज्यों से होकर गुजरेगी जहां लोकसभा की अधिक सीटें हैं। जिन राज्यों से भारत न्याय यात्रा गुजरेगी वहां से लोकसभा की 355 सीटें आती हैं। लोकसभा चुनाव से पहले इस यात्रा का कांग्रेस के नजरिए से काफी महत्व होगा। हालांकि इस भारत न्याय यात्रा पर इंडिया गठबंधन के साथियों की भी नजर रहेगी। विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I.A में सीटों का बंटवारा अभी हुआ नहीं है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द हो जाएगा। राहुल गांधी इस बार जिन राज्यों से होकर गुजरेंगे उनमें से अधिकांश राज्य ऐसे हैं जहां इंडिया गठबंधन के भीतर सीटों के तालमेल को लेकर सवाल हैं। इसमें बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र प्रमुख रूप से शामिल है। यात्रा के पहले या बीच इंडिया गठबंधन में सीटों की बात तय होती या नहीं दोनों ही सूरत में यह देखने वाली बात होगी कि विपक्ष के दूसरे साथी इस यात्रा को कैसे देखते हैं। कांग्रेस ने राहुल गांधी की अगुवाई में 14 जनवरी से 20 मार्च तक भारत न्याय यात्रा आयोजित करने की बुधवार को घोषणा की। यह यात्रा मणिपुर से शुरू होकर मुंबई तक जाएगी और इस दौरान 14 राज्यों और 85 जिलों में छह हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की जाएगी। भारत जोड़ो यात्रा के बाद पार्टी राहुल गांधी के नेतृत्व में भारत न्याय यात्रा निकालेगी। भारत न्याय यात्रा मणिपुर, नागालैंड, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात और महाराष्ट्र से होकर गुजरेगी और 6,200 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। भारत न्याय यात्रा ज्यादातर बस से होगी लेकिन कहीं-कहीं पदयात्रा भी होगी। यात्रा मणिपुर से शुरू करने के कारण के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस की ओर से कहा गया कि वह देश का महत्वपूर्ण हिस्सा है, साथ ही पार्टी उस पूर्वोत्तर राज्य के लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने की प्रक्रिया शुरू करना चाहती है।

भारत न्याय यात्रा 14 राज्यों से होकर गुजरेगी और यहां लोकसभा की कुल 355 सीटें आती हैं। ये वो राज्य हैं जहां कांग्रेस का पिछले दो चुनावों में प्रदर्शन बेहद ही खराब रहा।  लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भारत न्याय यात्रा पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों से होकर गुजरेगी। ये वो राज्य हैं जहां बड़ी संख्या में लोकसभा सीटें हैं। इसके अलावा, जब पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में इंडिया गठबंधन में शामिल दलों के साथ सीट बंटवारे की बात आती है तो कांग्रेस को सबसे अधिक चुनौतियों का सामना यहीं करना पड़ सकता है। यात्रा के दौरान इंडिया गठबंधन के सहयोगी अपने-अपने राज्यों में राहुल गांधी का किस तरह समर्थन करते हैं यह देखना होगा। यह वक्त 2024 के चुनाव से ठीक पहले का होगा और इंडिया गठबंधन के दूसरे दल भी इसी दौरान विभिन्न स्थानों पर रैलियों की योजना बना रहे हैं।

यात्रा की अगुवाई राहुल गांधी करेंगे और कांग्रेस की ओर से पूरे यात्रा के केंद्र में वही रहेंगे। पोस्टर- बैनर से लेकर यात्रा के केंद्र में वह रहेंगे। ऐसे में यह भी काफी दिलचस्प है क्योंकि हाल ही में दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को 2024 में इंडिया गठबंधन की ओर से पीएम उम्मीदवार बनाए जाने का प्रस्ताव रखा। हालांकि खरगे ने इस बात पर जोर दिया था कि गठबंधन को एक पीएम चेहरा पेश करने की जरूरत नहीं है। फिलहाल जरूरी काम चुनाव जीतना है। राहुल गांधी का नाम फिलहाल गठबंधन के किसी साथी की ओर से आगे नहीं रखा जा रहा है। यात्रा मणिपुर से शुरू करने के कारण के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस की ओर से कहा गया कि वह देश का महत्वपूर्ण हिस्सा है, साथ ही पार्टी उस पूर्वोत्तर राज्य के लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने की प्रक्रिया शुरू करना चाहती है।साथ ही खरगे का नाम आगे कर कुछ दलों ने अपनी मंशा भी जाहिर कर दी है। ऐसे में इस यात्रा के बीच ही कई सवालों के जवाब भी मिलेंगे। साथ ही यह भी तय हो जाएगा कि 2024 से ठीक पहले विपक्ष की दिशा क्या होगी।

क्या भारत आ रहे जहाजों को बनाया जा रहा है निशाना?

वर्तमान में भारत आ रहे जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है! लाल सागर में यमन के हूतियों ने हाल में भारत आ रहे व्‍यापारिक जहाजों को निशाना बनाया। इन हमलों ने फिर से एक बात उजागर की। इसने दिखाया कि ग्‍लोबल ट्रेड के लिए समुद्री सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है। समुद्री शक्ति और सुपरपावर का दर्जा पाने वाले देश के बीच हमेशा एक रिश्‍ता रहा है। जैसे-जैसे भारत की भू-राजनीतिक प्रोफाइल बढ़ती है, उसे समुद्री शक्ति में ज्‍यादा से ज्‍यादा संसाधनों का निवेश करने की जरूरत होगी। यह उसकी बढ़ती आकांक्षाओं को पूरा करने और उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरी है। ऐसा क्‍यों है? आइए, यहां इसे समझने की कोशिश करते हैं। 21वीं सदी में इंडो-पैसिफिक दो कारणों से प्रमुख भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक क्षेत्र के रूप में उभरा है। पहला, क्षेत्र की आर्थिक और जनसांख्यिकीय शक्ति। दूसरा, एक गैर-लोकतांत्रिक और आक्रामक चीन का उदय। भारत इस क्षेत्र का प्रमुख घटक है। वह हिंद महासागर की बड़ी समुद्री शक्ति है। इस क्षेत्र का दूसरा किरदार अमेरिका है। यह संयोग है कि इंडो-पैसिफिक निर्माण के अस्तित्व में आने से भारत प्रमुख आर्थिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक शक्ति के रूप में उभरा है। इसमें जनसांख्यिकीय लाभ है। यह भारत को अपनी समुद्री शक्ति को और विकसित करने का एक ऐतिहासिक अवसर देता है।

हालांकि, भारत की व्यापक राष्ट्रीय शक्ति में समुद्री शक्ति एक कमजोर कड़ी बनी हुई है। वॉल्‍यूम के लिहाज से भारत का 95 फीसदी ट्रेड और मूल्‍य के हिसाब से 68 फीसदी समुद्री मार्गों से होता है। भारत के EXIM ट्रेड में भारतीय जहाजों की हिस्सेदारी 1987-88 में 40.7 फीसदी से घटकर 2018-19 में लगभग 7.8 फीसदी रह गई है। दुनिया के 50 सबसे व्यस्त बंदरगाहों में सिर्फ दो भारतीय बंदरगाह शामिल हैं। भारत के व्यापारिक जहाजरानी बेड़े में 2021 में 1,491 जहाज शामिल थे। डेड वेट टन भार कुल ग्‍लोबल टन वेट का 1.3% की क्षमता के मामले में भारत दुनिया में 19वें स्थान पर था। ग्‍लोबल शिपबिल्डिंग में भारत की हिस्‍सेदारी सिर्फ 0.12 फीसदी है। इस तरह 2021 में भारत में निर्मित वैश्विक जहाजों की संख्या में वह 15वें स्थान पर था। वैश्विक जहाज मरम्मत और रखरखाव का बाजार 2028 तक 40 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। लेकिन, सस्ते और कुशल कार्यबल के फायदे होने के बावजूद इस क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी 1 फीसदी से भी कम है।

समुद्री शक्ति के तमाम मेट्रिक्स में भारत कई देशों से पीछे है। इनमें समुद्री वैज्ञानिक अनुसंधान, पानी के भीतर खोज और खनन के मामले शामिल हैं। समुद्री सैन्य शक्ति के संदर्भ में बेशक भारत के पास सक्षम नौसेना है। लेकिन, प्रतिकूल समुद्री शक्तियों के साथ समुद्री सैन्य असंतुलन को रोकना महत्वपूर्ण है। लिहाजा पर्याप्त और तकनीकी रूप से प्रासंगिक समुद्री बलों को बनाए रखने के लिए जहाज और पनडुब्बी निर्माण कार्यक्रम जरूरी है। हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है। आरबीआई के एक लेख में कहा गया है कि इसे हासिल करने के लिए भारत की अर्थव्यवस्था को सालाना 7.6 फीसदी या उससे ज्‍यादा की निरंतर रफ्तार से बढ़ना होगा। समुद्री क्षेत्र आज भारत की जीडीपी में लगभग 5 फीसदी का योगदान देता है। भारत सरकार ने समुद्री क्षेत्र में वैश्विक और घरेलू निवेश को आकर्षित करने के लिए कई पहलों की शुरुआत की है। इनमें नेशनल मैरीटाइम डेवलपमेंट प्रोग्राम, सागरमाला कार्यक्रम, मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 की घोषणा शामिल है। लेकिन, भारत के समुद्री क्षेत्र को भारत की जीडीपी में अपना योगदान दोगुना कर लगभग 10 फीसदी करने के लिए और भी बहुत कुछ करने की जरूरत है।

हमें अपने जहाज निर्माण क्षेत्र और शिपिंग बेड़े पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इन दोनों क्षेत्रों में पर्याप्त राष्ट्रीय क्षमता के बिना भारत दूसरे दर्जे की समुद्री शक्ति बना रहेगा। भारत के राष्ट्रीय शिपिंग बेड़े में गिरावट से भारत के आर्थिक, वाणिज्यिक और रणनीतिक लाभ कम हो गए हैं। भारतीय कार्गो के परिवहन के लिए विदेशी वाहकों पर निर्भरता बढ़ गई है। इनके कारण ही महत्वपूर्ण सप्‍लाई चेन बन पाती है। इस मोर्चे पर हमें ज्‍यादा करने की जरूरत है। भारत समुद्री अस्थिरता के दो चापों के बीच स्थिरता के गढ़ के रूप में बैठा है। पश्चिमी चाप जो स्वेज नहर से अदन की खाड़ी तक पश्चिम एशिया, पूर्वोत्तर अफ्रीका और हॉर्न ऑफ अफ्रीका और अरब की अशांत भूमि से होकर गुजरता है। इसके उत्तर में होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से समान रूप से अशांत समुद्री मार्ग है। भारत का ज्‍यादातर तेल और प्राकृतिक गैस आयात इसी क्षेत्र से होता है। हमारे पूर्व में मलक्का जलडमरूमध्य और अशांत दक्षिण चीन सागर है। यहां से होकर भारत का आधे से अधिक समुद्री व्यापार गुजरता है। लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर ताजा हमले भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए खतरे की बानगी है।

भारत को सभी पहलुओं को शामिल करते हुए नेशनल मैरीटाइम पॉलिसी के जरिये अपनी व्यापक समुद्री शक्ति के विकास के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। मजबूत आर्थिक विकास, अनुकूल जनसांख्यिकी, लोकतांत्रिक राजनीति, सॉफ्ट पावर और इंडो-पैसिफिक निर्माण के रूप में अनुकूल समुद्री वातावरण के साथ भारत के पास अपनी प्राचीन महाशक्ति का दर्जा हासिल करने का ऐतिहासिक अवसर है। इस लक्ष्य को हासिल करने में समुद्री शक्ति प्रमुख भूमिका निभाएगी।