कोलकाता रेप केस पर पीएम मोदी ने लिया ममता बनर्जी को आड़े हाथ!

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हाल ही में पीएम मोदी ने इशारों ही इशारों में कोलकाता रेप केस पर ममता बनर्जी को आड़े हाथ ले लिया है! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लालकिले के प्राचीर से दिए अपने भाषण में कोलकाता डॉक्टर केस को लेकर संकेतों में बड़ी बात कही है। पीएम ने कहा कि महिलाओं का हम दमखम देख रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ कुछ चिंता की बातें भी आती हैं और आज मैं लाल किले से एक पीड़ा व्यक्त करना चाहता हूं। एक समाज के नाते हमें गंभीरता से सोचना होगा। हमारी माताओं-बहनों और बेटियों के प्रति अत्याचार हो रहे हैं। उसके प्रति देश का आक्रोश है, जनसामान्य का आक्रोश है। इस आक्रोश को मैं महसूस कर रहा हूं। इसे देश को, समाज को, हमारी राज्य सरकारों को गंभीरता से लेना होगा। मोदी ने भले ही पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया, मगर उन्होंने इशारों-इशारों में बड़ी बात कह दी है। वो भी उन ममता के लिए जिन्हें उनके समर्थक सियासी योद्धा मानते हैं! सोशल मीडिया पर आरजी कर हॉस्पिटल में हुए कोलकाता डॉक्टर केस को लेकर #BengalHoror #यह_आज़ादी_झूठी_है #KolkataDeathCase #MamataMustResign और #KolkataPolice जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। बता दें कि महिलाओं के लिए दिल्ली और राजस्थान सबसे असुरक्षित राज्य हैं, लेकिन दहेज के लिए जान लेने वालों में पहले नंबर पर उत्तर प्रदेश और दूसरे नंबर पर बिहार है। दहेज के लिए उत्तर प्रदेश में 2138 और बिहार में 1057 महिलाओं की हत्‍या कर दी गई। डॉक्टर के इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ने वाली आम जनता ममता बनर्जी सरकार से इस्तीफे की मांग कर रही है। वहीं, कोलकाता पुलिस के रुख को लेकर भी प्रदर्शन कर रहे हैं। लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि दीदी अब आपको गुस्सा क्यों नहीं आ रहा है। कहां गया वो आक्रोश? लोग तो यह भी कह रहे हैं कि क्या यह वही दीदी हैं, जिसने अकेले दम पर पश्चिम बंगाल पर 34 साल से काबिज वाम मोर्चे की सरकार का सफाया कर दिया था।

राष्‍ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध दिनोंदिन बढ़ रहे हैं। 2022 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 4,45, 256 मामले दर्ज किए गए, जो 2021 की तुलना में 4 प्रतिशत अधिक हैं। यानी हर एक घंटे में 51 महिलाओं के साथ अपराध हुआ। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में देश में कुल 58,24,946 आपराधिक मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 4,45, 256 मामले महिलाओं के खिलाफ हुए अपराध के हैं, जबकि साल 2021 में 4, 28,278 केस दर्ज किए गए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, देश में रेप के कुल 31,516 मामले दर्ज किए गए, जिनमें सबसे अधिक मामले 5399 राजस्थान के हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 3690 केस, मध्‍यप्रदेश में 3029 , महाराष्ट्र में 2904 और हरियाणा में 1787 दुष्‍कर्म के मामले दर्ज किए गए। वहीं, महिलाओं के लिए दिल्ली और राजस्थान सबसे असुरक्षित राज्य हैं। हालांकि, दहेज के लिए जान लेने वालों में पहले नंबर पर उत्तर प्रदेश और दूसरे नंबर पर बिहार है। दहेज के लिए उत्तर प्रदेश में 2138 और बिहार में 1057 महिलाओं की हत्‍या कर दी गई। वहीं मध्‍यप्रदेश में 518, राजस्थान में 451 और दिल्‍ली में 131 महिलाओं की दहेज के लिए हत्‍या कर दी गई।

भारत में वर्कप्लेस पर महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों में बढ़ोतरी हुई है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, 2018 से 2022 के बीच ऐसे अपराध 402 से बढ़कर 422 हो गए। ये हालात तब हैं, तब वर्कप्लेस पर महिलाओं से यौन अपराध अधिनियम, 2013 कब का पारित हो चुका है। महिलाओं के लिए दिल्ली और राजस्थान सबसे असुरक्षित राज्य हैं, लेकिन दहेज के लिए जान लेने वालों में पहले नंबर पर उत्तर प्रदेश और दूसरे नंबर पर बिहार है। दहेज के लिए उत्तर प्रदेश में 2138 और बिहार में 1057 महिलाओं की हत्‍या कर दी गई। वहीं मध्‍यप्रदेश में 518, राजस्थान में 451 और दिल्‍ली में 131 महिलाओं की दहेज के लिए हत्‍या कर दी गई।

बंगाल के लोगों को इस संवेदनशील घटना पर ममता सरकार का रवैया हैरान कर रहा है। पश्चिम बंगाल की पुलिस पर आरोप है कि उसने इतने वीभत्स कांड में भी टाल-मटोल वाला रवैया अपनाया जिसकी वजह से सीबीआई को जांच का जिम्मा सौंपना पड़ा। उस वक्त कोलकाता पुलिस ने इस मामले में सुसाइड की आशंका जताई थी। सीबीआई जांच की पहली ही रात को अचानक हजारों की भीड़ ने हमला कर दिया। इस पर यह सवाल उठा कि रात को अचानक इतनी भीड़ कहां से आई, क्या यह साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश थी? जब यह मामला गरमाया तो ममता ने कहा कि ये हमला राम और वाम ने बाहरी लोगों से कराया है।