सुप्रीम कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को किस तहत दी जमानत ?

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आज हम आपको बताएंगे कि सुप्रीम कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को किस तहत जमानत दी है! सुप्रीम कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को दिल्ली शराब नीति मामले में जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक जेल में रखना, सजा से पहले ही सजा जैसा है। कोर्ट ने ये भी कहा कि जांच एजेंसियां ये कैसे कह सकती हैं कि किसी नीति से कुछ लोगों को फायदा हुआ तो वो साजिश है? सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला PMLA और UAPA जैसे कानूनों में जमानत के मामलों के लिए एक मिसाल कायम करता है। सर्वोच्च अदालत ने अपने फैसले में कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। कोर्ट ने कहा कि सिसोदिया लगभग 18 महीने से जेल में हैं, और बिना मुकदमे के इतने लंबे समय तक जेल में रहना ‘बिना ट्रायल के सजा’ जैसा है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जेल नहीं बल्कि जमानत के सिद्धांत को दोहराया। अदालत ने कहा कि लंबे समय तक जेल में रहना दोषसिद्धि से पहले ‘बिना मुकदमे के सजा’ नहीं बन जाना चाहिए। संदर्भ के लिए, इस हफ्ते की शुरुआत में संसद को बताया गया था कि पिछले दशक में पीएमएलए के तहत 5,297 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 40 में दोषसिद्धि हुई। ये आंकड़ा कुल केस का 1 फीसदी से भी कम है।

सुप्रीम कोर्ट ने जांचकर्ताओं से पूछा कि वे केवल इस तथ्य से कैसे ‘स्वयं ही’ साजिश का अनुमान लगाते हैं कि एक पॉलिसी ने कुछ व्होलसेलर्स (थोक विक्रेताओं) को फाययदा पहुंचाया। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, ‘आप पॉलिसी और आपराधिकता के बीच की रेखा कहां खींचते हैं?’अहम प्वाइंट का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट दोनों को शीर्ष अदालत के अक्टूबर 2023 के फैसले पर ध्यान देना चाहिए था। इसमें ‘लंबे समय तक जेल’ और ‘ट्रायल में देरी’ को लेकर सीआरपीसी और पीएमएलए दोनों में जमानत प्रावधानों में पढ़ा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि स्पीडी ट्रायल एक आरोपी का ‘मूल अधिकार’ है। जब ट्रायल ‘आरोपी के अलावा किसी अन्य कारण से आगे नहीं बढ़ रहा हो, तो कोर्ट…जमानत दे सकता है। यह तब और भी सही होगा जब ट्रायल में बरसों लग जाएंगे।

पिछले साल जमानत देने से इनकार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को फिर से आवेदन करने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने कहा था कि अगर ‘ट्रायल… अगले तीन महीनों में धीमी गति से आगे बढ़ता है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2023 के जांचकर्ताओं के दावे का हवाला दिया कि ट्रायल ‘6 से 8 महीने’ में पूरा हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांचकर्ता ट्रायल शुरू करने के लिए तैयार नहीं थे। एल्गर परिषद मामलों से लेकर दिल्ली दंगों और कई पीएमएलए मामलों तक, जमानत हासिल करना अक्सर सजा के तौर पर होता है। सुप्रीम कोर्ट का सिसोदिया पर दिया गया फैसला इसी पर रोक लगा सकता है। यह फैसला PMLA के तहत ही नहीं, बल्कि UAPA जैसे उन सभी कानूनों के लिए एक मिसाल कायम करता है जहां जमानत मिलना मुश्किल होता है।

बता दे कि अदालत ने यह देखने के बाद याचिका मंजूर की कि मुकदमे में लंबी देरी ने मनीष सिसोदिया के शीघ्र सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन किया है। कोर्ट ने कहा कि शीघ्र सुनवाई का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वतंत्रता का एक पहलू है। बेंच ने कहा कि मनीष सिसोदिया को शीघ्र सुनवाई के अधिकार से वंचित किया गया है। हाल ही में जावेद गुलाम नबी शेख मामले में भी हम ऐसे ही निपटे थे। हमने देखा कि जब अदालत, राज्य या एजेंसी शीघ्र सुनवाई के अधिकार की रक्षा नहीं कर सकती है, तो अपराध गंभीर होने का हवाला देकर जमानत का विरोध नहीं किया जा सकता है। अनुच्छेद 21 अपराध की प्रकृति के बावजूद लागू होता है। मनीष सिसोदिया को बेल मिलने के बाद आम आदमी पार्टी में खुशी का माहौल है। इस मौके पर राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि ये सत्य की जीत हुई है। पहले से कह रहे थे इस मामले में कोई भी तथ्य और सत्यता नहीं थी।

जबरदस्ती हमारे नेताओं को जेल में रखा गया। 17 महीने तक जेल में रखा। क्या भारत के प्रधानमंत्री इस 17 महीने का जवाब देंगे। जिंदगी के 17 महीने जेल में डालकर बर्बाद किया। सुप्रीम कोर्ट का सिर झुकाकर नमन है। लंबे इंतजार के बाद न्याय मिला। एक फैसला आम आदमी पार्टी, मनीष सिसोदिया और एक-एक कार्यकर्ता के पक्ष में आया। सभी उत्साहित हैं। सांसद संजय सिंह ने आगे कहा कि दिल्ली का नागरिक खुश है। सब मानते थे कि हमारे नेताओं के साथ जोर जबरदस्ती और ज्यादती हुई है। हमारे मुखिया अरविंद केजरीवाल और सत्येंद्र जैन को जेल में रखा है। वो भी बाहर आएंगे। केंद्र की सरकार की तानाशाही के खिलाफ जोरदार तमाचा है। कभी ईडी कोई न कोई जवाब दाखिल करने का बहाना बनाया। एक पैसा मनीष सिसोदिया के घर, बैंक खाते से नहीं मिला। सोना और प्रॉपर्टी नहीं मिला। दिल्ली के विधानसभा चुनाव के लिए और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता के लिए खुशखबरी है। हमें ताकत मिलेगी।