यह सवाल उठना लाजिमी है कि आने वाले समय में भारत और चीन का अगला कदम आखिर क्या होगा! भारत और चीन के बीच सीमा समझौते के बाद दोनों देशों के रिश्ते में आगे और सुधार की उम्मीद बढ़ गई है। भारत और चीन ने सैनिकों को पीछे हटाने की दिशा में ‘कुछ प्रगति’ की है। डेमचोक और देपसांग में दोनों देशों के सैनिक पीछे हट चुके हैं। संयुक्त रूप से गश्त शुरू हो गई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस घटनाक्रम को ‘स्वागत योग्य’ कदम बताया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत और चीन के संदर्भ में हमने कुछ प्रगति की है। आप जानते हैं कि हमारे संबंध कुछ कारणों से बहुत ही खराब थे। हमने (सैनिकों के) पीछे हटने की दिशा में कुछ प्रगति की है। विदेश मंत्री ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के आसपास बहुत बड़ी संख्या में चीनी सैनिक तैनात हैं, जो 2020 से पहले वहां नहीं थे और बदले में हमने भी जवाबी तैनाती की। इस अवधि के दौरान संबंधों के अन्य पहलू भी प्रभावित हुए हैं। इसलिए स्पष्ट रूप से, हमें पीछे हटने के बाद देखना होगा कि हम किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। जयशंकर ने कहा, लेकिन, हमें लगता है कि पीछे हटना एक स्वागत योग्य कदम है। इससे यह संभावना खुलती है कि अन्य कदम भी उठाए जा सकते हैं।
जयशंकर ने कहा कि पिछले महीने रूस में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात के बाद उम्मीद थी कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और मैं दोनों अपने समकक्षों से मिलेंगे। तो चीजें इस तरह हुई हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत विकास के पथ पर अग्रसर है और दुनिया के साथ आगे बढ़ना चाहता है। जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया के देशों में भारत के साथ काम करने की सदिच्छा और भावना है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 21 अक्टूबर को दिल्ली में कहा था कि पिछले कई हफ्तों की बातचीत के बाद भारत और चीन के बीच एक समझौते को अंतिम रूप दिया गया है। इससे 2020 में उठे मुद्दों का समाधान निकलेगा। पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर सैनिकों को पीछे हटाने और गश्त करने पर सहमति बनी। यह चार साल से जारी गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी सफलता है। जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई भीषण झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में गिरावट आई थी।
बता दे कि भारत और अमेरिका के बीच एलएसी पर सीमा विवाद से जुड़ा एक समझौता हुआ है। समझौते के बाद दोनों देशों के सैनिक चिह्नित इलाकों से पीछे हटना शुरू हो चुके हैं। भारत और चीन के बीच चार साल से जारी तनाव खत्म करने को लेकर यह समझौता आखिर कैसे हुआ। आखिर पर्दे के पीछे ऐसे कौन से कदम और प्रक्रिया रही जिससे चीन भारत के साथ समझौता करने को आखिरकार तैयार होगया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान इस पूरे समझौते की कहानी को विस्तार से बताया। जयशंकर ने कहा कि आज हम जहां पहुंचे हैं, उसके दो कारण हैं, एक- अपनी जमीन पर खड़े रहने और अपनी बात रखने के लिए हमारी ओर से बहुत दृढ़ प्रयास और यह केवल इसलिए संभव हो सका क्योंकि सेना देश की रक्षा के लिए बहुत ही अकल्पनीय परिस्थितियों में वहां थी। विदेश मंत्री ने कहा कि सेना ने अपना काम किया और कूटनीति ने अपना काम किया। विदेश मंत्री ने पिछले 10 वर्षों में बेहतर बुनियादी ढांचे को भी उन कारकों में से एक के रूप में उजागर किया, जिसके कारण चीन अपने सैनिकों को उस स्थिति में वापस ले आया, जहां वे 2020 के गलवान संघर्ष से पहले थे।
विदेश मंत्री ने कहा कि आज हम एक दशक पहले की तुलना में प्रतिवर्ष पांच गुना अधिक संसाधन लगा रहे हैं, जिसके परिणाम सामने आ रहे हैं और सेना को वास्तव में प्रभावी ढंग से तैनात करने में सक्षम बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि सितंबर 2020 से भारत चीन के साथ समाधान निकालने के लिए बातचीत कर रहा था। विदेश मंत्री ने कहा कि इस समाधान के विभिन्न पहलू हैं। उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी बात यह है कि सैनिकों को पीछे हटना होगा, क्योंकि वे एक दूसरे के बहुत करीब हैं और कुछ घटित होने की आशंका थी। समझौते के पीछे दूसरी वजह यह रही कि पिछले दशक में हमने अपने बुनियादी ढांचे में भी सुधार किया है…मुझे लगता है कि इन सबके संयोजन से ही हम आज यहां तक पहुंचे हैं। जयशंकर ने कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी मिले, तो यह निर्णय लिया गया कि विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मिलेंगे और देखेंगे कि इसे कैसे आगे बढ़ाया जाए।
विदेश मंत्री ने कहा कि हाल के समय में सबसे लंबे समय तक चले सैन्य गतिरोधों में से एक को समाप्त करने के लिए भारत और चीन ने इस सप्ताह जो ऐतिहासिक समझौता किया था, उसे बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अंतिम मंजूरी दे दी। दोनों ने पांच साल के अंतराल के बाद कजान में द्विपक्षीय बैठक की और समझौते का समर्थन किया। भारतीय पक्ष के अनुसार, इससे वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति और बेहतर होगी। अगले कदम के रूप में, दोनों नेताओं ने अपनी 50 मिनट की बैठक में भारत-चीन सीमा प्रश्न पर जल्द ही विशेष प्रतिनिधियों (SRs) की वार्ता आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की, जो 2019 से नहीं हुई है, और “रणनीतिक और दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य से संबंधों को आगे बढ़ाने, रणनीतिक संचार बढ़ाने और विकासात्मक चुनौतियों का समाधान करने के लिए सहयोग की तलाश करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।