जब 6 साल की बच्ची की मौत पर अमेरिका में हुआ विवाद?

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एक ऐसा समय जब 6 साल की बच्ची की मौत पर अमेरिका में विवाद उठ खड़ा हुआ! 6 साल की प्यारी सी फिलिस्तीनी बच्ची हिंद रजब का नाम अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी के एक हॉल पर लिखा हुआ है। यूनिवर्सिटी के ऐतिहासिक हैमिल्टन हॉल का नाम अब हिंद हॉल कर दिया गया है। ये वही यूनिवर्सिटी है, जहां कभी एंटी वियतनाम वॉर मूवमेंट चला था। गाजा पर इजरायली हमले के खिलाफ अमेरिका की कई यूनिवर्सिटी में इन दिनों छात्र सड़कों पर हैं। इस साल जनवरी के आखिर की बात है, जब मासूम बच्ची हिंद रजब जान बचाने के लिए अपने चाचा-चाची के साथ गाजा शहर में कहीं जा रही थी। तभी इजरायली टैंकों ने बमबारी की और उनकी कार के परखच्चे उड़ गए। हमले में हिंद रजब का परिवार मारा गया और वो किसी तरह बच गई। कई दिनों तक वो अपने मारे गए चाचा-चाची के शवों के बीच छिपी रही। उसके पास एक फोन था, जिससे वो मदद के लिए रो-रोकर गुहार लगाती रही। अपील करती रही, मगर कोई नहीं आया। कुछ दिन बाद उसकी लाश सड़ी-गली हालत में मिली। आज उसी रजब के लिए अमेरिका उठ खड़ा हुआ है। 7 अक्टूबर को हमास के इजरायल पर हुए हमले के बाद से इजरायल ने पलटवार किया। इजरायल की बमबारी में अब तक 34 हजार से मज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। 14 हजार से ज्यादा बच्चे मारे जा चुके हैं। वहीं, 20 हजार बच्चे अनाथ हो गए। अमेरिका में 30 से ज्यादा विश्वविद्यालयों में इजरायली हमले के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग याद दिला रहे हैं कि कुछ ऐसा ही वियतनाम युद्ध के वक्त एंटी वॉर प्रोटेस्ट अमेरिका में चला था, जिससे अमेरिकी राष्ट्रपतियों की नींद उड़ गई थी।

हिंद रजब की मौत का कनेक्शन आज से करीब 60 साल पहले अमेरिका-वियतनाम युद्ध से जुड़ा हुआ है। जब अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन बी जॉनसन की सनक ने अमेरिकी फौजों को बेवजह वियतनाम के साथ जंग में झोंक दिया। अमेरिका की नेशनल आर्काइव्स के आंकड़ों के अनुसार, करीब 8 साल तक चले इस युद्ध में 58 हजार से ज्यादा अमेरिकी फौजी मारे गए। जॉनसन के बाद जब अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन सत्ता में आए तो उन्होंने अमेरिका की नाक बचाने के लिए वियतनाम के खिलाफ हमले और तेज कर दिए। उनको लगा कि अमेरिका को एक पिद्दी सा देश कैसे मात दे सकता है। हालांकि, वह भी पिछले अमेरिकी राष्ट्रपतियों की तरह ही वियतनाम को आंकने में चूक गए। पूरी दुनिया में अमेरिका की थू-थू होने लगी। अमेरिका को अपने गलत फैसलों का बचाव करना भारी पड़ रहा था। यहां तक कि खुद अमेरिका में ही छात्रों ने बड़े पैमाने पर वियतनाम एंटी वॉर आंदोलन चलाया। हजारों छात्र जेलों में ठूंस दिए गए। सड़कों पर आर्मी की परेड होने लगी। बाद में सत्ता पर काबिज हुए अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने वियतनाम युद्ध से फौजियों को बुलाना शुरू कर दिया।

1964 की बात है, जब अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हो रहा था। उस वक्त चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार बैरी गोल्डवॉटर का पलड़ा भारी चल रहा था। गोल्डवॉटर का मशहूर नारा था कि आप अपने दिल से पूछें कि वह सही हैं। वहीं जॉनसन खुद को संतुलित रूप में जनता के सामने जा रहे थे। एक दिन अचानक एक रिपोर्टर को दिए इंटरव्यू ने गोल्डवॉटर की लोकप्रियता को जमीन पर ला पटका। उस इंटरव्यू में जॉनसन ने कहा था कि अगर मैं कर सका तो वियतनाम में चीनी सप्लाई लाइनों पर कम क्षमता वाला परमाणु बम गिरा दूंगा। इस बात को जॉनसन ने चुनाव प्रचार के दौरान खूब भुनाया और अमेरिकियों से कहा कि गोल्डवॉटर एक लापरवाह व्यक्ति हैं, जो देश को परमाणु युद्ध की ओर ले जा सकते हैं। यहीं से बाजी पलट गई और चुनाव में जॉनसन ने गोल्डवॉटर को आसानी से हरा दिया। उन्हें 61 फीसदी से ज्यादा पॉपुलर वोट मिले जो, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए अब तक सबसे ज्यादा था। ये वही जॉनसन हैं, जिन्होंने वियतनाम में फ्रांस के उपनिवेश की रक्षा करने के लिए समर्थन किया था और वहां सेना भेजने की गलती की थी।

वियतनाम युद्ध का कोई अंत नजर नहीं आ रहा था। 1967 के अंत तक हर हफ्ते करीब 500 अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की खबरें आ रही थीं। वियतनाम के गुरिल्ला लड़ाके अमेरिकी फौजियों पर अचानक हमला करते और उनके गले काट देते या उन्हें गोली से उड़ा देते। ऐसे में बहुत से अमेरिकी सैनिक मारे गए। अमेरिकी सरकार युद्ध पर पानी की तरह पैसे बहा रही थी। जॉनसन ने जो ग्रेट सोसाइटी प्रोग्राम चलाए थे, उन्हें पैसे मिलने बंद हो गए। महंगाई की रफ्तार बढ़ रही थी। ऐसे में 1965 से यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ छात्रों का एंटी वियतनाम आंदोलन और बढ़ता गया। पूरे अमेरिका में छात्र सड़कों पर नजर आ रहे थे। लिबरल डेमोक्रेट, बुद्धिजीवी और नागरिक अधिकार नेताओं सहित अमेरिकी आबादी में युद्ध विरोधी भावना फैलती चली गई। हर कोई युद्ध का जल्द से जल्द बातचीत से समाधान चाहता था।

अप्रैल 1968 में अफ्रीकी अमेरिकी नागरिक अधिकार नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर की हत्या ने वाशिंगटन डीसी और अन्य जगहों पर दंगे भड़का दिए। दो महीने बाद उप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रॉबर्ट कैनेडी की लॉस एंजिल्स में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस सबसे परेशान जॉनसन ने उत्तरी वियतनाम के साथ बातचीत शुरू कर दी और अक्टूबर में चुनाव से एक सप्ताह पहले जॉनसन ने बमबारी को पूरी तरह से बंद करने की घोषणा की। चुनाव बाद रिचर्ड निक्सन देश के अगले राष्ट्रपति बने। निक्सन ने भी पहले तो जंग तेज कर दी, मगर जनता की मांग के आगे उन्हें और उनके बाद आने वाले राष्ट्रपतियों को झुकना पड़ा।