पाकिस्तान हमेशा से ही समय-समय पर भारत में हजारों आतंकी हमले करते हुए आया है! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को अपना ऐतिहासिक तीसरा शपथ ग्रहण कर रहे थे, उसी वक्त आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर में तीर्थयात्रियों पर हमला कर दिया। बीते 60 घंटे में एक के बाद एक तीन आतंकी हमलों को अंजाम दिया गया। तीन दिनों में जम्मू-कश्मीर के रियासी, कठुआ और डोडा में तीन आतंकी हमलों को अंजाम दिया गया। इन हमलों में 9 श्रद्धालुओं को जान गंवानी पड़ी। तीनों घटनाओं में करीब 50 लोग घायल हुए हैं। लम्मू-कश्मीर में 1989 में आतंकवाद की शुरुआत से लेकर अब तक आतंकी हमलों का सिलसिला जारी है, जो थमता नजर नहीं आ रहा है। आइए-समझते हैं कि आतंकियों ने मोदी के शपथ ग्रहण के दौरान का वक्त ही क्यों चुना? पाकिस्तान या पाकिस्तानी फौजियों ने भारत पर हमले को लेकर क्या रणनीति अपनाई है। डिफेंस एंड स्ट्रैटेजिक एनालिस्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के अनुसार, आतंकियों ने एक ऐसा समय चुना कि जब मोदी बतौर पीएम तीसरी बार शपथ ले रहे थे। दूसरा, उस वक्त पूरी दुनिया का ध्यान मोदी के शपथ ग्रहण की ओर था। पाकिस्तानी आतंकियों ने इसके बहाने भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ये संदेश दिया कि कश्मीर का मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ है। कमोबेश वो इसमें कामयाब भी रहे। पूरी दुनिया का ध्यान इस ओर गया।
लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के अनुसार, मोदी के शपथ ग्रहण के वक्त हमले के समय के पीछे का मकसद यह था कि आतंकियों को निजी तौर पर अंतरराष्ट्रीय पब्लिसिटी हासिल करना। तीन दिनों में तीन आतंकी घटनाएं इसी बात का सुबूत हैं। उस वक्त भारत पर पूरी दुनिया की निगाहें थीं। लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के अनुसार, आतंकियों की हमला करने की रणनीति ठीक वैसी थी जैसी सैन्य वाहनों पर घात लगाकर हमला करने की रही है। आतंकियों ने हमला करने के लिए शाम का वक्त चुना, ताकि भागने में आसानी हो। ऐसा इसलिए क्योंकि जब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई हो, तब तक अंधेरा हो जाए। आतंकी चाहते थे कि शाम 6 बजे से शुरू होने वाले शपथ ग्रहण समारोह को बाधित किया जा सके। हमला इसलिए शाम 5 बजे अंजाम दिया गया। हमले के बाद आतंकी घटनास्थल से भागने में सफल रहे, क्योंकि जहां हमला हुआ, उसके आसपास का इलाका जंगली है।
ले. कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के अनुसार, ऐसे हमलों के लिए खुफिया इनपुट्स मिले हो सकते हैं। इतनी ज्यादा संख्या में इंटेलीजेंस एजेंसीज से इनपुट्स मिलते हैं कि उसमें कई बार यह पता लगा पाना मुश्किल होता है कि कौन से इनपुट एक्शनेबल हो सकता है। कई बार मानवीय चूक भी हो जाती है, क्योंकि इनपुट्स में सारी डिटेल्स नहीं हों तो उस पर फौरी एक्शन लेना मुश्किल हो जाता है। सेना तो हमेशा अलर्ट मोड में रहती है, मगर कई बार अंदाजा नहीं लग पाता है।
लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी बताते हैं कि 1971 की जंग में बुरी तरह हारने के बाद तिलमिलाए पाकिस्तान ने यह समझ लिया था कि भारत को सीधी लड़ाई में नहीं हराया जा सकता। ऐसे में भारत में ऐसे हमले किए जाएं, जिससे उसकी अंदरूनी ताकत कमजोर हो जाए। 1976 में तत्कालीन पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष जनरल जिया उल हक ने एक मिलिट्री डॉक्ट्रिन बनाई। इसका नाम था-ब्लीड इंडिया विद् अ थाऊजैंड कट्स। जनरल जिया का कहना था कि ये फैसला इसलिए लिया गया है कि भारत को सीधे युद्ध में नहीं हराया जा सकता। ऐसे में भारत को अलग-अलग जगह से हमले किए जाएंगे और उसे गहरा घाव देंगे। इससे भारत की आंतरिक सुरक्षा की स्थिति बिगड़ेगी। यही जनरल जिया बाद में तख्तापलट करके पाकिस्तान के राष्ट्रपति बने। यह डॉक्ट्रिन पाकिस्तान के मिलिट्री कॉलेज, क्वेटा में फौजियों को पढ़ाई जाती है।
लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी बताते हैं कि 8 जुलाई, 2013 में चीन के सरकारी अखबार विनवीपू ने एक भविष्यवाणी की थी कि 2035 में टू-फ्रंट वॉर होगी, जिसमें चीन-पाकिस्तान मिलकर भारत पर हमला करेंगे। पीओजेके में चीन का भी इंटरेस्ट भी है। 65 बिलियन डॉलर का इकोनॉमिक कोरिडोर प्रोजेक्ट भी पीओके से होकर ही गुजरेगा। चीन ने पीओके में कई पनबिजली परियोजनाओं में पैसा लगाया है। 5,180 वर्ग किमी की शक्सगाम घाटी को पाकिस्तान ने 1963 में एक गैरकानूनी समझौते के तहत चीन को दे दी थी। इससे पहले पाकिस्तान ने अक्साई चिन का 38 हजार वर्ग किमी से ज्यादा का इलाका चीन को दे दिया था।
ले. कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के अनुसार, 2009 में भारतीय सेना ने कोल्ड स्टार्ट डॉक्ट्रिन विकसित की। इसके अनुसार, शांतिकाल में अगर कोई दुश्मन देश या उसके आतंकी हमला करते हैं तो उसके लिए 48 घंटे के अंदर पलटवार करने की स्ट्रैटेजी बनाई गई। इसका मकसद यह भी है कि जंग होने की स्थिति में पाकिस्तान को परमाणु हमला करने के लिए मौका नहीं देना भी है। अभी तक यह होता था कि अगर दुश्मन कोई हमला करता था तो देश के अलग-अलग हिस्सों से सैनिक टुकड़ियों को मूव कराने में काफी समय लग जाता था। कारगिल जंग में पाकिस्तान के मंसूबों पर भारतीय सेना ने इसी तरह पानी फेरा था।