अशोक गहलोत या सचिन पायलट में से कौन राहुल गांधी के अधिक पास है, यह भारत जोड़ो यात्रा ही तय कर सकती है! केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों के विरोध में राहुल गांधी कन्याकुमारी से जम्मू कश्मीर तक भारत जोड़ो यात्रा पर चल रहे हैं। लेकिन राजस्थान में उनकी यात्रा किस रूट से निकलेगी, इस पर रस्साकशी हो रही है। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी जिस जोड़ने वाले पथ पर चल रहे हैं उस पथ पर राजस्थान की कांग्रेस चलने के लिए तैयार नहीं है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच की खींचतान जगजाहिर है। माना जा रहा है कि इस खींचतान में नए एपिसोड़ के तौर पर राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा भी जुड़ गई है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का खेमा इस बात से आशंकित है कि प्रदेश में राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के तहत आने से सचिन पायलट को सियासी फायदा नहीं मिल जाए। लिहाजा उनकी राजस्थान एंट्री को लेकर फिर से माथापच्ची की जा रही है। पार्टी पिछले छह दिनों में अब तक रूट तय नहीं कर पाई है। भारत जोड़ो की राजस्थान यात्रा की जिम्मेदारी गहलोत खेमे के नेताओं के पास है। अभी तक तय किए गए रूट के अनुसार यात्रा का एक बड़ा हिस्सा राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र में हैं, लेकिन माना जा रहा है कि इस रूट के बजाए अब राहुल गांधी की यात्रा को जयपुर के रास्ते होते हुए आगे बढ़ाने का प्लान किया जा रहा है। इसकी एक वजह यह बताई जा रही है कि हाड़ौती में पायलट समर्थक इस समय काफी बुलंद है। वो पायलट को सीएम बनाने के लगातार मांग कर रहे हैं। पायलट के समर्थन से जुड़ा यह जन सैलाब यदि राहुल गांधी देखते हैं, तो शायद उन्हें सत्ता की चाबी सौंप सकते हैं।

राहुल गांधी की यात्रा को लेकर बने इस राजनैतिक समीकरण को सचिन पायलट के हाल ही हुए हाडौती क्षेत्र के दौरे से भी समझा जा सकता है। पिछले महीने सचिन पायलट वसुंधरा राजे के गढ़ झालावाड और इसके बाद कोटा जिले में पहुंचे थे। पायलट ने यहां शक्ति प्रदर्शन किया था। इस दौरान उनके काफिले में इस कदर भीड़ उमड़ी थी कि वहां जाम के हालात बन गए थे। पायलट के इस शक्ति प्रदर्शन ने हाडौती के कई कांग्रेस नेता नजर आए। इसकी रिपोर्ट मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी दी गई।

उस रिपोर्ट के बाद खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाडौती में पहुंचकर बारां में 2 दिन बिताए। इसके बाद अब अपनी कैबिनेट के चार मंत्री रामलाल जाट, प्रमोद जैन भाया, गोविंद मेघवाल और धर्मेंद्र राठौड़ को हाडौती में भेजा है, जो राहुल गांधी की यात्रा के रूट की तैयारियों में लगे हैं।हाड़ौती में पायलट की बढ़ती लोकप्रियता को इस बात से भी समझा जा सकता है कि हाल ही कोटा देहात कांग्रेस कमेटी की जिला अध्यक्ष सरोज मीणा ने पायलट के समर्थन में बढ़ा बयान दे दिया। सरोज मीणा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा है कि अगर राजस्थान में राहुल गांधी के भारत जोड़ो यात्रा के साथ आने के पहले आलाकमान सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाता है तो राजस्थान में सरकार वापसी में चार चांद लग जाएंगे। सूत्रों की अनुसार सरोज मीणा ने का असर भी गहलोत गुट के नेताओं पर हुआ। इसके चलते राजस्थान में राहुल गांधी की रूट को लेकर फिर से मंथन हो रहा है।

राजस्थान में गहलोत और पायलट के गुट में बटी कांग्रेस को लेकर पूर्व केंद्रीय पंचायत राज मंत्री मणिशंकर अय्यर ने कोटा पहुंचकर यह कहा था कि राहुल गांधी के राजस्थान में पहुंचने पर चमत्कार होगा।इसके बाद अब अपनी कैबिनेट के चार मंत्री रामलाल जाट, प्रमोद जैन भाया, गोविंद मेघवाल और धर्मेंद्र राठौड़ को हाडौती में भेजा है, जो राहुल गांधी की यात्रा के रूट की तैयारियों में लगे हैं।हाड़ौती में पायलट की बढ़ती लोकप्रियता को इस बात से भी समझा जा सकता है कि हाल ही कोटा देहात कांग्रेस कमेटी की जिला अध्यक्ष सरोज मीणा ने पायलट के समर्थन में बढ़ा बयान दे दिया। सरोज मीणा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा है कि अगर राजस्थान में राहुल गांधी के भारत जोड़ो यात्रा के साथ आने के पहले आलाकमान सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाता है तो राजस्थान में सरकार वापसी में चार चांद लग जाएंगे। सूत्रों की अनुसार सरोज मीणा ने का असर भी गहलोत गुट के नेताओं पर हुआ। इसके चलते राजस्थान में राहुल गांधी की रूट को लेकर फिर से मंथन हो रहा है। उन्होंने यह दावा किया है कि राहुल गांध के राजस्थान पहुंचते ही यहां कांग्रेस में चल रही कलह का समाधान निकल जाएगा।