कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की आतंकी फंडिंग व अन्य गतिविधियों के चलते भारत में पांच साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। गृह मंत्रालय की ओर से इसके लिए अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। यूएपीए एक्ट के तहत इस संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया है। बता दें कि PFI एक कट्टरपंथी संगठन है। 2017 में NIA ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी।कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें सबूत मिला है कि PFI के मेंबर्स के संबंध ग्लोबल टेररिस्ट ग्रुप्स से हैं। संगठन के मेंबर्स ने ईराक, सीरिया और अफगानिस्तान में ISIS जॉइन किया। कई मुठभेड़ों में मारे गए। कई मेंबर्स की गिरफ्तारी हुई। देश में भी राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने मेंबर्स को अरेस्ट किया। PFI के कुछ फाउंडिंग मेंबर्स SIMI के लीडर्स थे। इसके संबंध जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश से थे। ये दोनों प्रतिबंधित संगठन हैं। NIA जांच में इस संगठन के कथित रूप से हिंसक और आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने के बात आई थी। NIA के डोजियर के मुताबिक यह संगठन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना गया। केंद्र सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, पीएफआई के अलावा 8 सहयोगी संगठनों को भी पांच साल के लिए बैन कर दिया गया है. पीएफआई के अलावा रिहैब इंडिया फाउंडेशन RIF, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया CFI, ऑल इंडिया इमाम काउंसिल AIIC, नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन NCHRO, नेशनल वीमेन फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन, केरल जैसे सहयोगी संगठनों पर भी बैन लगाया गया है |
पीएफआई केरल से संचालित होने वाला एक कट्टर इस्लामिक संगठन है, मगर खुद को यह वंचितों की आवाज बताता है. पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया 22 नवंबर 2006 को तीन मुस्लिम संगठनों के मिलने से बना था. इसकी स्थापना कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी KFD, केरल के नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट NDF और तमिलनाडु के मनिता नीति पसरई MNP के एक संघ के रूप में की गई थी. पीएफआई यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया खुद को मुसलमानों के साथ-साथ वंचितों के हक में आवाज उठाने और उन्हें सशक्त बनाने वाला संगठन बताता है. इसका मुख्यालय दिल्ली में है टेरर लिंक के सबूत मिलने के बाद पीएफआई यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है और उस पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है टेरर लिंक को लेकर केंद्रीय एजेंसियों से मिले पुख्ता सबूत के आधार पर गृह मंत्रालय ने पीएफआई और उसके 8 सहयोगी संगठनों पर पांच साल का बैन लगाया है. बता दें कि इस संगठन पर पहले से ही बैन की मांग हो रही थी, मगर एनआईए-ईडी की ताबड़तोड़ छापेमारी और पुख्ता सबूत मिलने के बाद बाद केंद्र सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया PFI और इससे जुड़े संगठन गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। ये गतिविधियां देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा हैं। इनकी गतिविधियां भी देश की शांति और धार्मिक सद्भाव के लिए खतरा बन सकती हैं। ये संगठन चुपके-चुपके देश के एक तबके में यह भावना जगा रहा था कि देश में असुरक्षा है और इसके जरिए वो कट्टरपंथ को बढ़ावा दे रहा था।PFI की ओर से जिन जरियों से बैंक अकाउंट्स में पैसा ट्रांसफर किया गया, वह अकाउंट होल्डर के प्रोफाइल से भी मैच नहीं करता। इस फंड के जरिए PFI जिन गतिविधियों को अंजाम देने का दावा करता है, वह भी नहीं किया गया। इसके बाद इनकम टैक्स ने PFI और रेहाब इंडिया फाउंडेशन का रजिस्ट्रेशन कैंसल कर दिया |
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर ऐक्शन हुआ तो बोले लालू
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के मुखिया लालू प्रसाद यादव ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर बैन का तो स्वागत किया है लेकिन साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) बैन की मांग कर डाली है। लालू ने कहा कि आरएसएस को आपातकाल में भी बैन किया गया था। लालू ने बिना नाम लिए बीजेपी पर जमकर साधा निशाना। उन्होंने कहा कि 2024 में विपक्ष बीजेपी को धूल चटाएगा। लालू ने कहा कि पीएफआई जैसे संगठनों पर भी बैन लगे। मुस्लिम संगठनों को निशाना बनाया जा रहा है। लालू ने कहा कि भ्रष्टाचार का बोलबाला है। देश में अक्लियत लोगों को हिंदू-मुस्लिम करके ये देश को तोड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मैंने पहले भी बोला था कि देश रहेगा या टूटेगा। हर बात में हिंदू-मुस्लिम मस्जिदों पर चढ़कर झंडा फहराना। भगवा ध्वज फहराना ये बहुत गंदी बात है।
पीएफआई व उससे संबद्ध कई अन्य संगठनों पर प्रतिबंध क्यों ? गृह मंत्रालय की गिनाईं वजह …..
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