Thursday, April 3, 2025
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क्या जयललिता जैसा इतिहास रच पाएंगे थलपति विजय?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या थलपति विजय जयललिता जैसा इतिहास रच पाएंगे या नहीं! 1952 को दिवाली का दिन था। तमिलनाडु के सिनेमाघरों में एक फिल्म लगी-पराशक्ति। यह फिल्म तमिल सिनेगा के इतिहास में बहुत बड़ी हिट साबित हुई। खास बात यह थी कि इस फिल्म में हिंदू और जाति व्यवस्था पर चोट की गई थी। द्रविड़ आंदोलन का महिमामंडन किया गया था। खास बात यह थी कि इस फिल्म की पटकथा एम करुणानिधि ने लिखी थी, जो बाद में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने। यह वही करुणानिधि थे, जिनका सिक्का चेन्नई से लेकर दिल्ली तक रहता था।

इसी फिल्म से तमिल सियासत में सिनेमा की एंट्री का दौर शुरू हो गया, जो आज तक जारी है। हाल ही में तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय ने अपनी सियासी पारी का जबरदस्त आगाज कर दिया है। विजय की सभा में इतनी भीड़ उमड़ी कि लोग हैरान रह गए। ऐसी भीड़ कभी सीएन अन्नादुरई, एम करुणानिधि, एमजी रामचंद्रन और जे जयललिता की सभाओं में उमड़ा करती थी। जानते हैं कि तमिल सियासत का तमिल सिनेमा से नाता क्या रहा है? तमिलनाडु में अप्रैल, 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। माना जाता है कि तमिलनाडु में पराशक्ति के रिलीज होने से वहां की सियासत में एक नए राजनीतिक दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम यानी द्रमुक के उदय को बढ़ावा मिला। यह पार्टी 1949 में बनी थी। इसी फिल्म ने द्रमुक का तमिल समाज में इतना प्रचार-प्रसार किया कि 1967 के चुनाव में कांग्रेस को हराकर सीएन अन्नादुरई मुख्यमंत्री बने। फिल्म के कोर्ट सीन में शिवाजी गणेशन के अभिनय को भी दर्शकों ने खूब सराहा और माना जाता है कि इसी ने उन्हें स्टारडम दिलाया। पराशक्ति को तमिल सियासत और सिनेमा के संबंधों के दौर में महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है।

तमिलनाडु के पहले द्रविड़ मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुरई द्रविड़ विचारधारा को फिल्म पटकथाओं में शामिल करने में सबसे आगे थे। पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने पराशक्ति के लिए पटकथा लिखी, जिसमें डीएमके के दो संस्थापक सदस्यों शिवाजी गणेशन और एसएस राजेंद्रन ने अभिनय किया था। डीएमके पार्टी द्वारा निर्मित फिल्मों को तत्कालीन सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार से कड़ी सेंसरशिप मिली।

तमिल फिल्मों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द अन्ना था, जो तमिल में बड़े भाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है। डीएमके प्रमुख सीएन अन्नादुरई के लिए का सियासी नाम अन्ना ही था, जो बेहद पॉपुलर था। जब अन्ना की स्क्रीन पर तारीफ होती थी तो दर्शक तालियां बजाते थे। द्रविड़ विचारधाराओं के प्रमुख प्रचार वाहन के रूप में फिल्म मीडिया का उपयोग पहली बार डीएमके के संस्थापक प्रमुख अन्नादुरई ने अपनी पटकथाओं से किया था। उनकी पहली फिल्म नल्लथम्बी (गुड ब्रदर, 1948) थी, जिसमें सहकारी खेती और जमींदारी प्रणाली के उन्मूलन को बढ़ावा दिया।

द्रविड़ पार्टियों के 7 में से 5 मुख्यमंत्री तमिल सिनेमा में या तो लेखक या अभिनेता के रूप में सक्रिय रूप से शामिल थे। एमजी रामचंद्रन, जे. जयललिता सबसे सफल रहीं। उन्होंने डीएमके के नेताओं के साथ व्यक्तिगत मतभेदों के बाद अपनी खुद की द्रविड़ पार्टी बनाई और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में सत्ता में आए। ये लोग आमतौर पर अपने फिल्म प्रशंसकों और निचले लेवल पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की मदद से सत्ता पर काबिज हुए। माना जा रहा है कि थलापति विजय की इतनी बड़ी फैन फॉलोइंग उन्हें सत्ता के शीर्ष पर पहुंचा सकती है।

कई और दक्षिणी राज्यों के कुछ सितारों ने फिल्म की लोकप्रियता को राजनीति में भुनाने की कोशिश की है। आंध्र प्रदेश के एनटी रामा राव, कर्नाटक के राजकुमार और केरल के प्रेम नजीर ने अपनी पॉपुलैरिटी को सियासत में भुनाया और काफी हद तक कामयाब भी रहे। हालांकि, हाल के बरसों में कमल हासन और रजनीकांत जैसे सुपरस्टार सियासत में अपनी खास पहचान नहीं बना सके। यह प्रयोग तमिलनाडु की सियासत में ज्यादा सफल रहा।

शुरुआती तमिल फिल्मों में आमतौर पर पौराणिक कहानिया होती थीं। आजादी से काफी पहले जब देश में प्रगतिशील आंदोलन चल रहा था तो उस वक्त यानी 1936 में समकालीन समाज पर आधारित फिल्में बनना शुरू हुई थीं। आजादी के बाद भी सत्तारूढ़ कांग्रेस ने अपनी बैठकों में केबी सुंदरमबल जैसे फिल्मी सितारों का इस्तेमाल किया। मगर, चुनाव प्रचार या सत्ता तक पहुंचाने के लिए इनकी लोकप्रियता के इस्तेमाल से परहेज ही बरता।

22 जून, 1974 को जन्मे जोसेफ विजय चंद्रशेखर को फिल्मों में विजय के नाम से जाना जाता है। वह अभिनेता और पार्श्व गायक हैं। अपने तीन दशक से ज्यादा के करियर में विजय ने 68 फिल्मों में अभिनय किया है। उनकी थलाइवा, लियो, द ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम, सरकार समेत कई फिल्में अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली तमिल फिल्मों में से हैं। विजय भारत में सबसे ज्यादा भुगतान पाने वाले अभिनेताओं में से एक हैं। उनकी आखिरी फिल्म थलापति 69 होगी, क्योंकि इसके बाद उन्होंने कोई फिल्म नहीं करने का ऐलान किया है।

 

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