यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अब बांग्लादेश के साथ हुए समझौते टूट जाएंगे या नहीं! बांग्लादेश में जारी बवाल के बीच प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यही नहीं उन्हें ढाका से भागने पर मजबूर होना पड़ा। वो भारत पहुंचीं। उनका विमान सोमवार शाम हिंडन एयरबेस पर उतरा। यहां उनकी अगवानी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने की। हिंडन एयरबेस पर ही एनएसए डोभाल और शेख हसीना के बीच मीटिंग भी हुई। ऐसा माना जा रहा कि इसमें आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। वहीं बांग्लादेश के ताजा हालात को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाईलेवल बैठक की। इसमें एनएसए अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह शामिल हुए। ऐसा माना जा रहा कि बांग्लादेश में बिगड़े हालात का असर भारत पर भी पड़ेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि बीते जून महीने में ही शेख हसीना बांग्लादेश की पीएम के तौर पर भारत दौरे पर थीं।
उस समय दोनों देशों के बीच तीस्ता प्रोजेक्ट समेत 10 समझौतों पर मुहर लगी थी। आइए जानते हैं वो कौन से समझौते थे जिन पर दोनों देश आगे बढ़ रहे थे। सवाल ये भी उठ रहा कि शेख हसीना के जाने से इन समझौतों का क्या होगा? 22 जून 2024, यही वो दिन था जब बांग्लादेश की तत्कालीन पीएम शेख हसीना और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हाईलेवल मीटिंग हुई थी। इस वार्ता में तीस्ता जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर अहम समझौता हुआ। दोनों देशों के बीच तीस्ता नदी के संरक्षण से जुड़ी परियोजना को लेकर एग्रीमेंट हुआ। ये तय हुआ कि भारत से टेक्निकल टीम बांग्लादेश जाएगी। ये एग्रीमेंट इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि भारत की ओर से आपत्तियों के बावजूद करीब एक अरब डॉलर के इस प्रोजेक्ट पर चीन की नजर थी। इसके साथ ही दोनों देशों ने डिजिटल क्षेत्र के साथ-साथ समुद्री, रेलवे, मेडिकल, अंतरिक्ष समेत कई अहम समझौतों पर मुहर लगाई।,
दोनों देश तीस्ता नदी के जल-बंटवारे पर चर्चा के लिए तकनीकी टीम भेजने पर हुए सहमत, डिजिटल डोमेन में संबंध मजबूत करने को लेकर समझौता, ‘हरित साझेदारी’ को लेकर अहम समझौता, दोनों देशों के बीच रेलवे संपर्क बढ़ाने के समझौता, भारत का बांग्लादेश के नागरिकों को मेडिकल ई-वीजा की सुविधा ऐलान, समुद्री रिसर्च, मेरीटाइम सहयोग पर समझौता, अंतरिक्ष के क्षेत्र में सहयोग को लेकर समझौता, सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में आपसी सहयोग को लेकर समझौता, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन-मत्स्य पालन संबंधी समझौता!
बांग्लादेश की पीएम रहते हुए शेख हसीना ने जिस तरह से भारत को तरजीह दी, तीस्ता एग्रीमेंट के जरिए चीन को जोर झटका दिया, वो मोदी सरकार के लिए बड़ी कामयाबी मानी जा रही थी। हालांकि, अब बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद इन समझौतों पर क्या असर होगा। मोदी सरकार कैसे इस हालात को संभालती है। सवाल ये भी है भारत के इस पड़ोसी राष्ट्र में बनने वाली अगली सरकार से कैसे रिश्ते रहेंगे देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल भारत के सामने बांग्लादेश का घटनाक्रम एक बड़ी चुनौती की तरह जरूर है। यही नहीं आपको बता दें कि बांग्लादेश में शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार गिरने के बाद हिंदू समुदाय के सदस्यों के खिलाफ हिंसा बढ़ी है। हसीना नौकरियों में विवादित आरक्षण व्यवस्था को लेकर अपनी सरकार के खिलाफ हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर 5 अगस्त को भारत आ गई थीं।
बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और नौ अन्य लोगों के खिलाफ नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध के आरोपों की जांच शुरू कर दी है। हसीना पर ये आरोप 15 जुलाई से पांच अगस्त के बीच उनकी सरकार के खिलाफ छात्रों के व्यापक आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं को लेकर हैं। इस बीच देश की नई अंतरिम सरकार में गृह विभाग के सलाहकार शखावत हुसैन ने माना है कि अल्पसंख्यकों पर हमले हुए हैं और उनकी सुरक्षा में चूक हुई है। जनरल एम. सखावत हुसैन ने हिन्दुओं से इसके लिए माफी भी मांगी है। साथ ही उन्होंने शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर हिंसा फैलाने के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी है।
हम अपने फर्ज को पूरा करने में नाकामयाब रहे हैं। हुसैन ने कहा है कि चीजें ठीक हो रही हैं और उम्मीद है कि हालात जल्द ही बेहतर हो जाएंगे। शखावत हुसैन ने शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के नेताओं को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर अवामी लीग के लोग किसी भी तरह से अव्यवस्था पैदा करने की कोशिश करेंगे तो उनसे सख्ती से निपटा जाएगा।


