Wednesday, March 12, 2025
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आखिर संसद में क्यों उठा महाभारत का मुद्दा?

आज हम आपको बताएंगे कि संसद में महाभारत का मुद्दा क्यों उठा था! लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बजट पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष को घेरने के लिए पौराणिक ग्रंथ महाभारत के कुरुक्षेत्र प्रकरण का जिक्र किया। राहुल ने बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को घेरने के लिए चक्रव्यूह के रूपकों का उपयोग किया। इसके जवाब में अगले दिन केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर की पुस्तक का सहारा लेकर राहुल गांधी पर खूब निशाने साधे। ठाकुर ने थरूर की अंग्रेजी में लिखा उपन्यास- द ग्रेट इंडियन नॉवेल में कही गईं कुछ बातों को पढ़कर सुनाया और कहा कि थरूर ने अपने इस उपन्यास में आधुनिक युग के कौरव के रूप में जिसकी तरफ इशारा किया, वो कांग्रेस पार्टी है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पढ़ते नहीं हैं, इस कारण वो नहीं जानते कि उनके ही सांसद शशि थरूर ने कांग्रेस पार्टी और राहुल के पूर्वजों के बारे में क्या-क्या लिखा है। ठाकुर ने कहा कि राहुल ने संविधान की वह प्रति भी नहीं पढ़ी है, जिसे लेकर वो इन दिनों घूम रहे हैं। उसकी भूमिका में भी कांग्रेस पार्टी और राहुल के पूर्वजों की घोर आलोचना की गई है। अनुराग ठाकुर ने थरूर के उपन्यास के तीन अलग-अलग पृष्ठों का उल्लेख किया। उन्होंने पेज नंबर 245 में देश के प्रथम प्रधानमंत्री और राहुल गांधी के नाना जवाहर लाल नेहरू की तरफ इशारा करते हुए उन्हें धृतराष्ट्र बताया। ठाकुर ने उपन्यास का कथन सदन में पढ़कर सुनाया, ‘भारत, जिसका नेतृत्व धृतराष्ट्र ने 15 अगस्त, 1947 को संभाला, नए जन्म की दर्दनाक प्रक्रिया से गुजरा ही था, वह फिर से इस अंतहीन चक्र में फंस गया।’ ठाकुर ने कहा कि 15 अगस्त, 1947 को प्रधानमंत्री के रूप में मोदी जी तो नहीं थे और यह कह रहे कि जिन्होंने 15 अगस्त, 1947 को सत्ता ली थी वो धृतराष्ट्र थे। तो धृतराष्ट्र किसको कहा गया?

केंद्रीय मंत्री ने उपन्यास की पृष्ठ संख्या 293 का हवाला देकर इंदिरा गांधी और उनके पुत्र संजय गांधी के बारे में थरूर के व्यक्त विचारों से सदन को रूबरू कराया। उन्होंने पूछा कि थरूर ने जिसे अवसरवादी समाजवादी कहा है, वो कौन थे? उन्होंने कहा, ‘ये फेबियन समाजवादी कौन थे, उसके बारे में किसी और ने नहीं आपके ही सांसद ने लिखा है। इसमें तो आगे इमरजेंसी की चर्चा भी है जिसे इंदिरा गांधी जी ने थोपा था।’ फिर उन्होंने उपन्यास के सातवें अध्याय का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें सिद्धार्थ शंकर रे को शकुनी की संज्ञा दी गई है। कांग्रेस नेता सिद्धार्थ शंकर रे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री थे।

ठाकुर ने फिर उपन्यास के पेज नंबर 366 का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आपातकाल में प्रेस की स्वतंत्रता छीन ली गई, मौलिक अधिकार को खत्म किया गया, अभिव्यक्ति की आजादी खत्म की गई। उन्होंने कहा कि दु:शासन और दुर्योधन दोनों बहुत ही दुष्ट, दुश्मन और बदमाश हो सकते थे लेकिन उन्होंने भी कभी इमरजेंसी नहीं लगाई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पूरे उपन्यास में में 74 बार कौरव और कौरव की पार्टी की चर्चा हुई, हरेक में कांग्रेस का चरित्र झलकता है राहुल जी राहुल जी सदन में हजारों साल पूर्व महाभारत की कहानी सुना रहे थे मगर उनकी अपनी पार्टी के पढ़े-लिखे एक विद्वान पूर्व मंत्री और सांसद आज के महाभारत की कहानी लिखते हुए बताते हैं कि कौन कौरव था, कौन शकुनी था, कौन धृतराष्ट्र था, कौन दु:शासन था, कौन दुर्योधन था कौन कर्ण था। जरूर पढ़िए सबके किरदार उसी में मिलने वाले हैं।

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने प्रधानमंत्री की तुलना महाभारत के अभिमन्यु से किया। उन्होंने कहा कि आप जिस अभिमन्यु को गिराने की कोशिश पिछले 22 सालों से कर रहे हैं, गुजरात से लेकर दिल्ली तक आपके योद्धा और आपकी सरकारें निपट गईं, लेकिन आप उनको घेर नहीं पाए क्योंकि वो जनता के दिलों में बसे हैं। आज यहां 293 अभिमन्यु बैठे हैं। भले ही आपके पास कर्ण जैसे धुरंधर हों, शकुनी जैसे कुटिल रणनीतिकार हों, धर्म हमारे साथ है। भले ही आपके पास नारायणी सेना हो,ठाकुर ने कहा कि 15 अगस्त, 1947 को प्रधानमंत्री के रूप में मोदी जी तो नहीं थे और यह कह रहे कि जिन्होंने 15 अगस्त, 1947 को सत्ता ली थी वो धृतराष्ट्र थे। तो धृतराष्ट्र किसको कहा गया? लेकिन स्वयं भगवान कृष्ण हमारे साथ हैं। फिर उन्होंने एक भजन की दो पंक्तियां कहीं, ‘हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता, शरण में रख दिया जब माथ तो किस बात की चिंता।’ अनुराग ठाकुर बोले, ‘हमारे साथ तो जनता रूपी रघुनाथ हैं और आगे भी रहने वाले हैं।’

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