Saturday, March 21, 2026
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बिजनौर में सड़क हादसे में दूल्हा-दूल्हन समेत 7 की मौत:झारखंड से शादी करके घर लौट रहा था परिवार, कार ने ऑटो को मारी टक्कर

यूपी के बिजनौर में बेकाबू कार ने टेंपो में टक्कर मार दी। टेंपो सड़क किनारे खाई में जा गिरा। हादसे में दूल्हा-दुल्हन समेत 7 लोगों की मौत हो गई। 2 घायल हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दूल्हा-दूल्हन और परिजन झारखंड से ट्रेन से रात 1:30 बजे मुरादाबाद स्टेशन पर उतरे ,वहां से टेंपो में सवार होकर धामपुर आ रहे थे। हादसा शनिवार रात 2 बजे थाना धामपुर के नेशनल हाईवे-74 के फायर स्टेशन के पास हुआ। मरने वालों में दूल्हा-दुल्हन, दूल्हे की मौसी, मौसा और मौसेरी बहन समेत 7 लोग शामिल हैं। घर पहुंचने से पहले आ गई मौत जानकारी के अनुसार बिजनौर जिले के तिबड़ी गांव निवासी खुर्शीद अपने बेटे विशाल की करने झारखंड गए थे। शादी करके परिवार के साथ गांव लौट रहे थे। उनके साथ विशाल,उसकी पत्नी खुशी, मौसी रूबी, मौसा मुमताज, मौसेरी बहन बुशरा के अलावा परिवार के दो लोग थे। ट्रेन से मुरादाबाद स्टेशन पर आए। वहां से घर आने के लिए ऑटो बुक किया था। धामपुर के नगीना मार्ग स्थित फायर स्टेशन के पास क्रेटा कार ने उनके ऑटो को टक्कर मार दी। हादसे में हादसे में में खुर्शीद (65), विशाल (25), खुशी (22), मुमताज़ (45), रूबी (42), बुशरा (10) और ऑटो चालक अजब की मौत हो गई। दो लोग घायल हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने सभी को रामपुर सीएचसी पहुंचाया। 7 शवों को पोस्टमॉर्टम मे लिए भेज दिया गया। दोनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एसपी बोले-कोहरे के कारण हुआ हादसा
एसपी अभिषेक ने बताया- बिजनौर में कार और ऑटो की टक्कर में दूल्हा-दूल्हन समेत 7 लोगों की मौत हो गई। परिवार झारखंड में शादी करके बिजनौर लौट रहा था। दो लोग घायल हुए हैं, जिन्हें सीएचसी में भर्ती कराया गया है। घने कोहरे के कारण हादसा हुआ है। घायल बोले तेज रफ्तार ने ऑटो को मारी टक्कर
घायल युवक ने बताया- भाई की शादी करके हम झारखंड से लौट रहे थे। ट्रेन से मुरादाबाद पहुंचे। मुरादाबाद से ऑटो से रात में घर जा रहे थे। तेज रफ्तार क्रेटा कार ने ऑटो को टक्कर मार दी। परिवार के 7 लोगों की मौत हो गई। सीएम ने जताया शोक
सीएम योगी आदित्यनाथ ने बिजनौर में सड़क हादसे में हुई जनहानि पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सीएम ने संबंधित जिला प्रशासन के अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में तेजी लाने और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर उनके समुचित उपचार के निर्देश दिए हैं। साथ ही, घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना की है। ————————– ये भी पढ़ें… मैडम ब्यूटी पार्लर के उद्धघाटन में व्यस्त:व्यापारियों का दर्द- क्या चाय-समोसे भी हमें ही मंगाने पड़ेंगे, लखनऊ में तैनाती को बेताब अफसर एक मैडम महिलाओं की समस्या से ज्यादा ध्यान सौंदर्य पर दे रही हैं। इसे लेकर भगवा दल के नेताओं में चिंता है। उधर, राजधानी के व्यापारी नेता गुस्से में हैं। वजह है मैडम का तवज्जो न देना। मैडम ने उन्हें चाय-पानी नहीं पूछा, और तो और अपने चैम्बर से उठकर जाने लगीं। सरकार की किरकिरी कराने वाले कुछ अफसरों के सिर पर कार्रवाई की तलवार लटकी है। राजधानी में चर्चा है कि जिले के कप्तान और जोन के सुपर कप्तान दोनों की कुर्सी खतरे में है। इस शनिवार सुनी-सुनाई में पढ़िए ब्यूरोक्रेसी और राजनीति में चल रही चर्चाएं… पढ़ें पूरी खबर…

परवीन बाबी से रिश्ता टूटने पर बोले कबीर बेदी:बताया परवीन के साथ रिश्ता खत्म होने का सच,

परवीन बॉबी से रिश्ता टूटने की बात को लेकर कबीर बेदी ने बातचीत की। उन्होंने कहा कि दरअसल, मैंने नहीं बल्कि परवीन ने मुझसे रिश्ता तोड़ा था। इस दौरान कबीर ने परवीन की तारीफ की और कहा कि परवीन की गलती नहीं थी उसने मुझे इसलिए छोड़ा क्योंकि उसकी मेंटल हेल्थ ठीक नहीं थी।
कबीर बेदी और परवीन बाबी का रिश्ता काफी कम समय तक चला था। कबीर बेदी ने बताया कि ये रिश्ता उस समय शुरू हुआ, जब परवीन अपनी मेंटल हेल्थ से जूझ रही थीं। हाल ही में एक इंटरव्यू में कबीर ने परवीन के साथ अपने रिश्ते को खत्म करने के बारे में भी बात की। हाल ही में एक इंटरव्यू में कबीर ने परवीन के साथ अपने रिश्ते के खत्म होने के बारे में बात की। अपने रिश्ते की सच्चाई भी बताई है।

आखिर 11 अक्टूबर की रात को दिल्ली में क्या हुआ था?

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आज हम आपको बताएंगे कि 11 अक्टूबर की रात को दिल्ली में आखिर क्या हुआ था! देश की राजधानी दिल्ली का भीड़भाड़ वाला इलाका- सराय काले खां। तारीख 11 अक्टूबर 2024 और आधी रात के लगभग 3 बजे का वक्त। दिल्ली पुलिस के पास एक कॉल आती है। फोन करने वाला शख्स बताता है कि इलाके में एक महिला बेसुध और बुरी हालत में पड़ी है। दिल्ली पुलिस की गाड़ी तुरंत मौके पर पहुंचती है। महिला के शरीर से खून बह रहा था और उसकी हालत काफी नाजुक थी। महिला को फौरन एम्स के ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया जाता है, जहां जांच के बाद डॉक्टर बताते हैं कि उसके साथ गैंगरेप हुआ है। जांच में ये भी पता चलता है कि पीड़िता ओडिशा की रहने वाली है और मानसिक तौर पर विक्षिप्त है। मौके पर पुलिस के आला अफसर भी पहुंचते हैं और केस की तफ्तीश के लिए तेज-तर्रार अफसरों की 10 टीमें गठित कर दी जाती हैं। पीड़िता इस हालत में नहीं थी कि उसके साथ दरिंदगी करने वालों का हुलिया या कोई सुराग बता सके। ऐसे में पुलिस के लिए पूरी तरह से ये एक ब्लाइंड केस था।

पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती पीड़िता से उन लोगों के बारे में जानकारी जुटाने की थी, जिन्होंने उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके लिए पुलिस एक प्लान बनाती है। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की एक महिला कॉन्सटेबल को सामाजिक कार्यकर्ता बनाकर पीड़िता के पास भेजा जाता है। साथ ही एम्स मैनेजमेंट से बातचीत के बाद एक महिला ओडिया ट्रांसलेटर भी नर्स के कपड़ों में उसके पास भेज दी जाती है।

धीरे-धीरे पीड़िता का भरोसा इन दोनों महिलाओं पर बन जाता है। जब उससे घटना के बारे में पूछा जाता है, तो वो उंगली के इशारे से बताती है कि उसके साथ हैवानियत करने वाले तीन लोग थे। पीड़िता बहुत ज्यादा जानकारी तो नहीं दे पाती, लेकिन इतना जरूर बताती है कि इन तीनों में से एक विकलांग था और दूसरा ऑटो ड्राइवर। इसके साथ ही वो रेलवे स्टेशन का भी जिक्र करती है। अब इस मासूम के साथ दरिंदगी करने वालों को पकड़ने के लिए पुलिस के पास मजबूत ना सही, लेकिन कुछ सुराग जरूर थे। पहला- आदमी तीन थे। दूसरा- एक ऑटो ड्राइवर था, जबकि एक विकलांग, तीसरे के बारे में कुछ नहीं पता। और तीसरा सुराग- वारदात रेलवे स्टेशन के आसपास हुई थी। पुलिस को एहसास हो गया कि अपराधियों को पकड़ने के लिए उन्हें काफी लंबी जद्दोजहद करनी होगी।

सबसे पहले एक साइट प्लान तैयार किया जाता है, जिसके तहत उस इलाके से लेकर आसपास की सभी सड़कों के सीसीटीवी कैमरे खंगाले जाते हैं, जहां पीड़िता बेसुध हालत में मिली थी। सरकारी और प्राइवेट मिलाकर पुलिस 700 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चेक करती है। आखिरकार एक कैमरे में पीड़िता 10 अक्टूबर की सुबह तकरीबन 10 बजे पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते हुए दिख जाती है। शुरुआती तीनों सुरागों के बाद पुलिस के लिए ये एक बड़ा सुराग था। अब यहां से पुलिस पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन और सराय काले खां के बीच में पड़ने सभी रूट्स के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चेक करती है। पुरानी दिल्ली स्टेशन से निकलकर पीड़िता कहां-कहां जा सकती है, सारे रूट का डिजिटल मैप तैयार किया जाता है।

इसके साथ ही इस डिजिटल मैप के जरिए, सुबह 10 बजे से लेकर पीड़िता के मिलने के बीच के समय में, रूट पर दिखे लगभग 150 ऑटो रिक्शा वालों की नंबर प्लेट की लिस्ट तैयार होती है। इनमें कुछ नंबर पूरे नजरआए थे, जबकि कुछ अधूरे। काम बेहद मुश्किल था, लेकिन पुलिस की ये टीम किसी भी कीमत पर उन तीनों अपराधियों तक पहुंचना चाहती थी। और आखिरकार, पुलिस की मेहनत रंग लाती है। एक सीसीटीवी फुटेज में एक ऑटो रिक्शा उस जगह पर खड़ा दिखाई देता है, जहां महिला मिली थी। आगे की तफ्तीश होती है, तो कुछ और कैमरों में यही ऑटो रिक्शा दूसरी जगह जाते हुए और एक जगह पर रुकते हुए नजर आता है। ड्राइवर यहां अपने ऑटो से उतरता है और सड़क पार कर दूसरी तरफ जाता है। पुलिस ने अपने डिजिटल मैप के जरिए जिन 150 ऑटो रिक्शा की लिस्ट बनाई थी, उनमें ये ऑटो रिक्शा भी था!

थोड़ी मशक्कत के बाद पुलिस को इस ऑटो रिक्शा और उसके ड्राइवर की पूरी डिटेल मिल जाती है। ड्राइवर का नाम था प्रभु महतो। घटना वाली रात उसके मोबाइल की लोकेशन भी उसी इलाके में एक्टिव मिलती है। 30 अक्टूबर को पुलिस प्रभु महतो को गिरफ्तार कर लेती है। पूछताछ में महतो अपना जुर्म कबूलते हुए दूसरे साथी प्रमोद उर्फ बाबू का नाम बताता है और उसे भी 2 नवंबर को पकड़ लिया जाता है। इसके बाद वहां शमशुल पहुंचा। उसने भी शराब पी रखी थी और प्रमोद के बाद शमशुल ने महिला के साथ हैवानियत की। इन दोनों को दुष्कर्म करते हुए प्रभु महतो ने देख लिया और उसने भी महिला के साथ अपने ऑटो में दरिंदगी की। इसके बाद महतो पीड़िता को सराय काले खां इलाके में फेंककर फरार हो गया। इस केस को सुलझाने में 24 दिनों का वक्त लगा और पुलिस का कहना है कि वो आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिलाएगी।

 

क्या लॉरेंस बिश्नोई के चक्कर में टूट चुकी है पप्पू यादव की हिम्मत?

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यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या पप्पू यादव की हिम्मत लॉरेंस बिश्नोई की वजह से टूट चुकी है या नहीं! बिहार के ‘कथित’ बाहुबली और पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की जिंदगी में जब तक गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की एंट्री नहीं थी, तब तक मजे में ‘रॉबिन हुड’ स्टाइल में वक्त गुजर रहा था। मगर, जैसे ही लॉरेंस आया, पप्पू यादव का सुख-चैन छिन गया। अब तो ‘घर’ भी टूट चुका है। कांग्रेस की सांसद पत्नी रंजीत रंजन ने घर की बात पब्लिक कर दीं। वरना, किसी को क्या पता था कि पप्पू यादव और उनकी पत्नी रंजीत रंजन अलग-अलग रह रहे हैं। दोनों का पॉलिटिकल करियर सेट है, फिर भी घर का ‘क्लेश’ सार्वजनिक हो गया। ये सबकुछ सिर्फ और सिर्फ लॉरेंस बिश्नोई की वजह से हुआ। अब तो दूसरे जगह से भी पप्पू यादव को नसीहतें मिल रही है। बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव की गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की वजह से सुख-चैन छिन गया है। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि लॉरेंस चाहे सलमान खान को मारे या किसी और को, उन्हें कोई लेना-देना नहीं है। वे (लॉरेंस) जब आना चाहें, आ जाएं और उन्हें मार कर चले जाए। वो डरने वालों में से नहीं है। पप्पू यादव ने कहा कि लॉरेंस बिश्नोई, आपको जिसे मारना है, मारिए। मुझे कोई मतलब नहीं है। मेरा कोई लेना-देना नहीं है। सलमान को या फिर किसी और को मारिए, हमें क्या लेना-देना है। सलमान को बचाना है या नहीं ये सरकार का दायित्व है। हमारी हिफाजत की चिंता आप लोग मत करिए।

इससे पहले पप्पू यादव को सोशल मीडिया और फोन के जरिए जान से मारने की धमकी मिल चुकी है। पप्पू यादव के मुताबिक लॉरेंस बिश्नोई के आदमियों ने उन्हें ये धमकी दी थी। ये सबकुछ इसलिए हुआ क्यों कि मुंबई में बाबा सिद्दीकी हत्या के बाद पप्पू यादव ने लॉरेंस बिश्नोई को ‘दो टके’ का क्रिमिनल बताया था। साथ ही 24 घंटे में उसके गैंग की सफाया करने की चुनौती दी थी। मुंबई जाकर बाबा सिद्दीकी के बेटे जीशान सिद्दीकी से मातमपुर्सी भी की थी। जिसके बाद लॉरेंस के गुर्गे का ‘कॉल’ पप्पू यादव के पास आ गया। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय से पप्पू यादव ने खुद के जान का खतरा बताते हुए ‘जेड’ कैटेगरी की सिक्योरिटी की मांग रख दी।

यहां तक तो सबकुछ गैंगस्टर बनाम बाहुबली की फाइट लग रही थी। मगर, मामला तब और संगीन हो गया, जब उनकी सांसद पत्नी ने सांसद पप्पू यादव से किनारा कर लिया। छत्तीसगढ़ से कांग्रेस की राज्यसभा सांसद रंजीत रंजन ने कहा कि यह कानून-व्यवस्था का मसला है। इसका उनके या उनके बच्चों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये मामला सरकार की जिम्मेदारी है। पप्पू यादव के इस बयान से उनका कोई संबंध नहीं है। हम पति-पत्नी डेढ़-दो साल से अलग-अलग रह रहे हैं। उनसे मेरा विचार नहीं मिलता है।

वैसे, ये बात उन दिनों की है जब रंजीत रंजन की तस्वीर देख पप्पू यादव को प्यार हुआ था। ये पहली नजर का इश्क था। राजनीति में आने से पहले रंजीत रंजन टेनिस प्लेयर थीं। रंजीत का फोटो देखकर पप्पू यादव अपना दिल हार बैठे थे। खास बात यह है कि टेनिस खेलते हुए रंजीत रंजन की ये तस्वीर खुद पप्पू यादव के दोस्त और रंजीत के भाई ने उन्हें दिखाई थी। फोटो को देखते ही पप्पू यादव ने मन ही मन फैसला कर लिया कि वो रंजीत से शादी करेंगे। तब तक पप्पू यादव की पहचान एक बाहुबली सांसद के तौर पर हो चुकी थी।

शुरू में पप्पू यादव ने रंजीत को शादी के लिए प्रपोज किया, तो उन्होंने इसे ठुकरा दिया। फिर भी, पप्पू यादव ने हार नहीं मानी। करीब तीन महीने तक लगातार प्रयास करते रहे। आखिरकार, उनकी इश्क वाली मेहनत रंग लाई और रंजीत ने शादी के लिए हां कर दी। अब दोनों के दो बच्चे भी हैं। मगर, अब ये सांसद जोड़ा अलग रह रहा है। हालांकि, पत्नी रंजीत रंजन के बयान पर पप्पू यादव ने अब तक कुछ नहीं कहा है।

लॉरेंस और पप्पू के मामले में अब नया ट्विस्ट आ गया है। उत्तर प्रदेश के कैसरगंज से पूर्व बीजेपी सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह ने पप्पू यादव का नाम लिए बगैर कहा कि एक कोई बिहार के अंदर बाहुबली हैं, जो हर विषय पर बोलते हैं। उन्होंने पहले बोला और अब सिक्योरिटी मांग रहे हैं। तीन-चार क्विंटल वजन है उनका। क्यों बयान दिया? बिना बयान दिए आपका काम नहीं चलता है। अगर आपने बयान दिया है तो झेलो। जो किसी समाज के खिलाफ, किसी जाति के खिलाफ अपने देश के खिलाफ जो टिप्पणी करता है। उसके लिए सीधा कानून होना चाहिए कि उनको जीवन में कभी भी सरकारी सुरक्षा ना मिले।

हालांकि, पप्पू यादव ने ब्रजभूषण शरण सिंह को जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जब करणी सेना के अध्यक्ष की हत्या की गई थी, तब उनकी बोलती बंद क्यों हो गई थी? जो लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं और कह रहे हैं कि मैं डर गया हूं, तो वे मुझे मरवा दें, कोई दिक्कत नहीं है। हम चाहते हैं कि जल्दी मर जाएं। आपको भी मारने की जल्दबाजी है, तो जल्दी खत्म कर दो। हिंदुस्तान से एक शख्स गायब हो जाएगा। जब आना है आ जाओ, मार के चले जाओ।

 

कैदी और जमानत के बारे में क्या बोले पूर्व जस्टिस ऑफ इंडिया?

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हाल ही में पूर्व जस्टिस ऑफ इंडिया ने कैदी और जमानत के बारे में एक बड़ा बयान दे दिया है! भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ कुछ दिनों बाद रिटायर होने वाले हैं। रिटायर होने से पहले उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा कि न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संवाद बहुत जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जजों पर ‘भरोसा’ रखें। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि सच तो यह है कि जैसा कि मैंने कहा कि इस तरह की बातचीत में कभी कोई ‘डील’ नहीं होती। इसलिए, कृपया हम पर भरोसा रखें, हम कोई ‘डील’ करने के लिए वहां नहीं हैं। जब भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश जस्टिस चंद्रचूड़ 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रार्थना करते हुए उनकी तस्वीरों के राजनीतिक संदर्भ में पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे तो उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मेरे घर एक निजी कार्यक्रम के लिए आए थे, यह कोई सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं था। मुझे लगता है कि इसमें कुछ भी गलत नहीं था क्योंकि न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच सामाजिक स्तर पर भी निरंतर बैठकें होती रहती हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या पीछे मुड़कर देखें तो क्या वह तस्वीर में कुछ बदलाव करना चाहेंगे, जैसे कि अन्य जजों या विपक्ष के नेता को भी शामिल करना? इस पर चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने मजाकिया अंदाज में कहा कि ऐसा करने पर वह एक चयन समिति बन जाती। उन्होंने कहा कि मैं विपक्ष के नेता को इसलिए शामिल नहीं करूंगा क्योंकि यह केंद्रीय सतर्कता आयुक्त या सीबीआई निदेशक की नियुक्ति के लिए कोई चयन समिति नहीं है।

अदालतों द्वारा कई मामलों में जमानत न दिए जाने के मुद्दे पर, CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि सीजेआई के रूप में यह उनके लिए गंभीर चिंता का विषय है कि यह संदेश निचली अदालतों तक नहीं पहुंच पाया है कि जमानत एक नियम है, अपवाद नहीं, और ये अदालतें जमानत देने से हिचकिचाती हैं। उन्होंने कहा कि जहां तक मेरी बात है, मैंने हमेशा कहा है कि मैंने A से Z तक , अर्नब से लेकर जुबैर तक सभी को जमानत दी है। यही मेरा सिद्धांत है। CJI ने यह भी बताया कि उनके दो साल के कार्यकाल में, शीर्ष अदालत में जमानत के 21,000 मामले दायर किए गए थे, जबकि 21,358 जमानत मामलों का डिस्पोजल किया गया।

इसके बाद न्यायिक नियुक्तियों पर सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि कॉलेजियम ने अपना काम पूरा कर लिया है और उन्हें उम्मीद है कि सरकार लंबित सिफारिशों को मंजूरी दे देगी। उन्होंने कहा कि उनमें से कुछ नाम अभी भी सरकार के पास लंबित हैं और आपने उनमें से कुछ का उल्लेख किया है। मुझे उम्मीद है कि सरकार द्वारा उन्हें मंजूरी दे दी जाएगी। हमने सर्वोच्च न्यायालय के रूप में अपनी शक्ति के भीतर वह सब कुछ किया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हम संविधान की प्रक्रिया में अपना हिस्सा निभाएं। नामों का मूल्यांकन करें, नामों पर चर्चा करें, और हम नाम सरकार को भेजते हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या न्यायाधीशों की नियुक्ति में देरी करके सरकार प्रभावी रूप से वीटो पावर का इस्तेमाल करती है, CJI ने कहा कि कॉलेजियम भी वीटो का इस्तेमाल करता है। उन्होंने कहा कि मुझे आपको बताना होगा कि यह वीटो सिर्फ सरकार द्वारा ही नहीं लगाया जाता है। कॉलेजियम द्वारा भी वीटो का इस्तेमाल किया जाता है। जब तक हम नियुक्ति को मंजूरी नहीं देते, तब तक कोई भी नियुक्ति नहीं हो सकती।

यह बताते हुए कि राज्य सरकारें न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम को भेजे जाने वाले नामों में किस तरह भूमिका निभाती हैं, उन्होंने कहा कि जहां हमें लगता है कि कोई विशेष उम्मीदवार नियुक्ति के योग्य नहीं है और हम उसे वीटो करते हैं, तो भारत सरकार उस उम्मीदवार को नियुक्त नहीं कर सकती। हम यह सुनिश्चित करते हैं कि जिन्हें हम नियुक्ति के योग्य नहीं मानते हैं, उन्हें न्यायाधीश के रूप में नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए। अपने नेतृत्व वाले कॉलेजियम के ट्रैक रिकॉर्ड पर, CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के 18 न्यायाधीशों की सिफारिश की गई थी, जिन्हें नियुक्त कर दिया गया था।शीर्ष अदालत में जमानत के 21,000 मामले दायर किए गए थे, जबकि 21,358 जमानत मामलों का डिस्पोजल किया गया। सिफारिश किए गए 42 मुख्य न्यायाधीशों में से 40 को नियुक्त किया गया था। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए 164 सिफारिशों में से 137 को मंजूरी दे दी गई, जबकि 27 सरकार के पास लंबित हैं।

 

रिटायरमेंट के बाद आखिर क्या है पूर्व जस्टिस का प्लान?

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आज हम आपको बताएंगे कि रिटायरमेंट के बाद पूर्व जस्टिस ऑफ इंडिया का प्लान क्या है! भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ रिटायर हो गए हैं। अपने वर्किंग डे के आखिरी दिन उन्होंने ‘बुलडोजर न्याय’ पर फैसला सुनाया। जस्टिस चंद्रचूड़ ने 9 नवंबर, 2022 को सीजेआई का पद संभाला था। उनकी जगह अब संजीव खन्ना भारत के अगले चीफ जस्टिस होंगे। 11 नवंबर यानी सोमवार को जस्टिस खन्ना ये जिम्मेदारी संभालेंगे। जस्टिस चंद्रचूड़ अपने सख्त फैसलों और टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। उनके रिटायरमेंट के बाद लोग यह सोच रहे हैं कि आगे उनका प्लान क्या है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस मुद्दे पर खुलकर बात की। उन्होंने अपनी आगे की योजना के संबंध में खुद सबको जानकारी दी। डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि उनका मानना है एक बार कोई व्यक्ति CJI या जज के पद से रिटायर हो जाता है, तो भी लोग उसे जज या CJI ही मानते हैं। ऐसे में रिटायरमेंट के बाद भी उनके काम ऐसे होने चाहिए जो उनकी जिम्मेदारी को दर्शाते हों। उन्होंने कहा कि अगर मैं कोई पद संभालता हूं, तो मेरा मानना है कि CJI या जज के पद से रिटायर होने के बाद भी लोग आपको जज या CJI ही मानते हैं। समाज को आपसे एक खास तरह के व्यवहार की उम्मीद होती है। मैं खुद के लिए यह कह सकता हूं कि मुझे उस पद के प्रति वफादार रहना चाहिए जो मैंने अबतक संभाला था और रिटायरमेंट के बाद मैं जो भी करूं, उसमें यह दिखना चाहिए।

CJI चंद्रचूड़ ने बताया कि रिटायर हुए जज संसदीय कानूनों के तहत नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन और टेलीकॉम डिस्प्यूट्स ट्रिब्यूनल जैसे कई ट्रिब्यूनल में काम कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के जज या CJI के लिए संभावित भूमिकाओं की ओर इशारा करते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि इन ट्रिब्यूनल के सामने आने वाले मामलों की प्रकृति ऐसी होती है कि उनका बहुत महत्व होता है। इन मामलों की सुनवाई के लिए अत्यधिक ईमानदारी और विशेषज्ञता वाले व्यक्तियों की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि पूर्व जजों, खासकर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों को इन पदों पर नियुक्त किया जाता है।

हालांकि, जस्टिस चंद्रचूड़ ने ऐसे मामलों में कुछ कमियों का भी जिक्र किया जिसके चलते रिटायर हुए जज ट्रिब्यूनल या शिकायत निवारण में भूमिका निभाने से हिचकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी पद पर जुड़ने को लेकर उनके कार्यों, उनके कार्यकाल के दौरान सुनाए गए फैसलों से जोड़कर देखा जा सकता है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि इस तरह की चर्चा ही कई जजों को रिटायरमेंट के बाद की भूमिकाओं को स्वीकार करने से रोकती है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बताया।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर इन भूमिकाओं में सबसे ईमानदार और विशेषज्ञ जज नहीं होंगे, तो इसका असर देश की अर्थव्यवस्था के विकास और बदलाव पर पड़ेगा। इसे एक गंभीर चिंता बताते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि इन ट्रिब्यूनल का कामकाज उन विवादों को निपटाने के लिए जरूरी है जो लगातार जटिल होते जा रहे हैं। इसलिए मेरा मानना है कि मीडिया को इस बात पर पुनर्विचार करना चाहिए कि वह रिटायर हुए जजों द्वारा इन भूमिकाओं को स्वीकार करने को कैसे दिखाता है। हमें इन पदों पर पूर्व जजों की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रक्रिया निष्पक्ष और भरोसेमंद हो।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि संसद की ओर से सुप्रीम कोर्ट के रिटायर हुए जजों के लिए ऐसी भूमिकाएं बनाने के फैसले के अधिकार के कारण उस जज पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए जो यह भूमिका निभा रहा है। हमेशा एक CJI या जज के रूप में देखे जाने पर विश्वास व्यक्त करते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि समाज को आपसे एक खास तरह के व्यवहार की उम्मीद होती है। मैं खुद के लिए यह कह सकता हूं कि मुझे उस पद के प्रति वफादार रहना चाहिए जो मैंने संभाला था और रिटायरमेंट के बाद मैं जो भी करूं, उसमें यह दिखना चाहिए। समाज को आपसे एक खास तरह के व्यवहार की उम्मीद होती है। मैं खुद के लिए यह कह सकता हूं कि मुझे उस पद के प्रति वफादार रहना चाहिए जो मैंने अबतक संभाला था और रिटायरमेंट के बाद मैं जो भी करूं, उसमें यह दिखना चाहिए।जस्टिस चंद्रचूड़ के जवाब से यह स्पष्ट है कि अगर वह रिटायरमेंट के बाद ऐसी कोई भूमिका निभाते हैं, तो उस पद पर उनके कार्य उनकी CJI के रूप में की गयी सेवा को दर्शाएंगे।

 

‘गदर 2 हिट कराने के लिए हमने टिकट नहीं खरीदे’:डायरेक्टर अनिल शर्मा बोले- गदर-3 जल्द आएगी, अभी टाइम ‘वनवास’ का है

गदर-2 फिल्म के डायरेक्टर अनिल शर्मा शुक्रवार को जयपुर में थे। उन्होंने कहा कि गदर-2 एक ऑरिजनल हिट थी। इसे आम दर्शकों ने हिट करवाया था। न ही बल्क में टिकट खरीदे गए और न ही कॉरपोरेट बुकिंग हुई। सनी देओल बहुत कुछ डिजर्व करते हैं। गदर-2 के बाद उन्हें वह मिल भी रहा है। इसको लेकर मैं बहुत खुश हूं। उन्होंने अपने बेटे उत्कर्ष के लिए कहा- वह एक प्रोफेशनल एक्टर हैं। उसने लॉकडाउन में मुझे सत्यजीत रे का सिनेमा दिखाया। वह बहुत हार्ड वर्किंग एक्टर है। दैनिक भास्कर से अनिल शर्मा की खास बातचीत… सवाल: वनवास फिल्म के बारे में बताएं किस तरह की फिल्म है और किस तरह का एक्सपीरियंस देने वाली है? अनिल शर्मा: वनवास एक पारिवारिक फिल्म है। गदर-2 के बाद मुझे सभी ने कहा कि आपको एक बड़ी एक्शन फिल्म बननी चाहिए, वनवास क्यों बना रहे हैं? यहां तक की नाना पाटेकर साहब ने भी यही कहा था। तब मैंने कहा था कि आज परिवार बहुत न्यूक्लियर हो गए हैं। हर बुजुर्ग व्यक्ति अपने घर में वनवासी है। वह अकेला बैठा रहता है। आप भी घर में जब एंट्री लेते हैं तो बाबूजी से हाल-चाल पूछ कर दो ही मिनट में बाहर चले जाते हैं। इसलिए यह एहसास करना की परिवार हमारी जिंदगी का एक अंग है। सवाल: रामजी का वनवास तो 14 साल का था, यह वनवास कितने समय का और क्या खास इसमें नजर आएगा? अनिल शर्मा: देखिए वह त्रेता युग का वनवास था। उसमें पुत्र अपने पिता की वचन के लिए वनवास चला जाता है। आजकल तो पुत्र पिता को वनवास दे रहे हैं। यह कलयुग है, इसमें युगों का फर्क है। परिवार नहीं तो कुछ भी नहीं है। इसलिए मैंने यह पारिवारिक फिल्म बनाई। जब फिल्म खत्म होगी तो आप सीट पर बैठे रह जाएंगे।जब बाहर निकलेंगे तो सबसे पहले अपने पिता को फोन करेंगे। सवाल: इस फिल्म में लीड आपके बेटे उत्कर्ष शर्मा हैं, एक बाप-बेटे की जोड़ी जो सेट पर आकर एक्टर-डायरेक्टर की जोड़ी में बदल जाती है, उसे कैसे देखते हैं? अनिल शर्मा: एक्टर के तौर पर उत्कर्ष सामने होता है तो हम बतौर डायरेक्टर काम करते हैं। ऐसे में जो डायरेक्टर एक्टर का रिश्ता होता है। वह बहुत प्रोफेशनल होता है। उत्कर्ष एक प्रोफेशनल एक्टर है। जो अमेरिका से पढ़कर और ट्रेनिंग लेकर आए हैं। मैं भी एक हाइली प्रोफेशनल डायरेक्टर हूं। घर पर तो जैसे पिता-पुत्र में प्यार का रिश्ता होता है वैसे ही हमारा रिश्ता है। लॉकडाउन उसने मुझे सत्यजित रे का सिनेमा दिखाया। जब मैं करियर के शुरुआती दिन में था, तब मैंने यह सिनेमा देखा था। उस समय बंगाली तो आती नहीं थी। उसने मुझे अब सारा सिनेमा दिखाया। सवाल: आपने नाना पाटेकर को किस तरह मनाया, वह अब बॉलीवुड से थोड़ी दूर रहते हैं? अनिल शर्मा: नाना सर थोड़े से वनवासी टाइप व्यक्ति हैं। जब तक उनको स्क्रिप्ट सही नहीं मिलती। वह काम नहीं करते हैं। जब मैं नाना सर के पास यह सब्जेक्ट लेकर गया तो उन्होंने कुछ देर में हां कर दिया था।। उन्होंने बहुत मेहनत की। नाना सर का इस फिल्म में अपने किरदार को लेकर बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन है। लोगों ने नाना पाटेकर को मीम्स में ज्यादा देखा है। थोड़े बहुत उनके डायलॉग में देखा है। नाना पाटेकर की परफॉर्मेंस का लेवल लोगों ने आज तक देखा नहीं देखा है। आज की ऑडियंस देखेगी कि नाना पाटेकर इतने बड़े एक्टर क्यो है? सवाल: गदर 2 की रिलीज के बाद कहा जा रहा था कि अनिल शर्मा, सन्नी देओल की आंखों में भी आंसू थे। उसके बारे में आप बताएं ? अनिल शर्मा: हां यह सही है। जब एग्जाम में ईश्वर आपको टॉप कर देता है तो आपकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। वह खुशी के आंसू होते हैं। यह बिल्कुल सही बात है कि रिलीज वाले 11 अगस्त के दिन जब पहली बार सुबह 7:30 वह रिव्यू देख रहे थे तो सनी सर को मैंने कॉल किया। मेरे साथ मेरी वाइफ भी थी। उस कॉल के दौरान हमारे तीनों के आंखों में आंसू थे। सनी सर ने मुझे कहा- यह कमाल हो गया है। सवाल: आपने गदर की सक्सेस के बाद कहा सन्नी से कहा था- कि आप एक फिल्म के 50 करोड़ रुपए लेने वाले एक्टर हैं, आज वह सिद्ध भी किया है? अनिल शर्मा: सनी सर बहुत डिजर्व करते हैं। बिजनेस कम्युनिटी है, कुछ स्टूडियो देखते हैं कि आपकी पिछली फिल्मों ने कितना बिजनेस किया। उस हिसाब से आपको पेमेंट मिलता है। स्टूडियो भी अपनी जगह राइट है। अगर आप 2 रुपए ही कमा रहे हैं। आपको उतना ही मिलेगा और आप 100 रुपए कमा रहे हैं तो आपको इतना मिलेगा। यह सही है कि गदर 2 के बाद सनी सर जो डिजर्व करते हैं, वह उनको हासिल हुआ है। मैं उनको लेकर बहुत खुश हूं। सवाल: गदर और गदर-2 फिल्मों के अनुभव कैसे रहे? अनिल शर्मा: दोनों फिल्मों का एक जैसा माहौल मैने देखा है। गदर 2 एक ओरिजिनल हिट रही है। इसे हिट करवाने के लिए न ही हमने बल्क में टिकट खरीदी, न कॉर्पोरेट बुकिंग हुई। आम दर्शक फिल्म को देखने पहुंचे थे। हमारी टिकट रेट भी 200 से 250 रुपए रखी गई थी। अगर हमने 500 से 600 रुपए टिकट किया होता। हमारी फिल्म 700 करोड़ नहीं कमाती। हमारी फिल्म हजार करोड़ से ऊपर कमाती। सवाल: हर कोई अब गदर 3 की बात कर रहा है, तो कहां से शुरुआत होने वाली है और कब यह दर्शकों के बीच आएगी? अनिल शर्मा: अभी तो हम वनवास फिल्म की बात कर रहे हैं। इसके बाद हम गदर 3 की तैयारी में जुड़ जाएंगे। उसकी कहानी पर काम चल रहा है। तारा और जीते की कहानी को हम आगे जरूर बढ़ाएंगे। बॉलीवुड से जुडृी ये खबर भी पढ़िए… एक्टर विक्रांत मैसी बोले- मुझे धमकियां मिल रहीं:फिल्म ‘द साबरमती रिपोर्ट’ करने पर पत्नी ने कहा था तुम पागल हो, परिवार-दोस्त बोले गालियां पड़ेंगी ​​​​​​​एक्टर विक्रांत मैसी अपनी फिल्म ‘द साबरमती रिपोर्ट’ के प्रमोशन के लिए जयपुर आए। इस दौरान उन्होंने फिल्म से जुड़े अनुभवों से लेकर अपने फिल्मी करियर पर बात की। उन्होंने कहा- जब यह फिल्म उन्हें ऑफर हुई थी, घरवालों और दोस्तों ने इसे करने से मना कर दिया था।​​​​​​​ पूरी खबर पढृिए…

क्या कनाडा में भारतीय हो रहे हैं भेदभाव का शिकार?

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वर्तमान में भारतीय कनाडा में भेदभाव का शिकार होते जा रहे हैं! हाल ही में अटलांटिक कनाडा के किचनर-वाटरलू में शूट किया गया वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में एक बुजुर्ग श्वेत महिला बिना किसी उकसावे के भारतीय मूल के एक कनाडाई व्यक्ति को नस्लीय रूप से गाली दे रही है। साथ ही भारतीयों को वापस जाने के लिए कह रही है। ब्रिटिश कोलंबिया में दूसरी तरफ, प्रांतीय चुनावों में कंजर्वेटिव पार्टी के एक उम्मीदवार को नस्लवादी और इस्लामोफोबिक टिप्पणी करने के लिए माफी मांगनी पड़ी, लेकिन उनकी पार्टी ने उन्हें बर्खास्त नहीं किया। इस उम्मीदवार ने अपने दक्षिण एशियाई प्रतिद्वंद्वी को लगभग 4,000 वोटों से हरा दिया। कभी ‘अप्रवासी-हितैषी’ माने जाने वाले कनाडा में पिछले कुछ महीनों में ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों ही तरह से भारतीय मूल के अप्रवासियों के खिलाफ नस्लवादी टिप्पणियों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया पोस्ट में कई तरह की बातें शामिल हैं। इसमें भारतीय अप्रवासियों की व्यक्तिगत स्वच्छता के बारे में गलत जानकारी से लेकर यह दावा भी शामिल है कि वे सभी अकुशल नौकरियां छीन रहे हैं।

इनमें से कुछ दावों ने ऑनलाइन पब्लिकेशन्स में काफी जगह बनाई है। इससे उनके वायरल होने की प्रकृति और भी बढ़ गई है। उन्हें विश्वसनीयता मिली है, और मुख्यधारा के मीडिया को इस पर ध्यान देने के लिए मजबूर होना पड़ा है। हालात इतने खराब हैं कि माउंटीज को भी हस्तक्षेप करना पड़ा है। इस तरह के मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। अन्य मामलों में जांच की गई है। शुक्रवार, 1 नवंबर को, एक सीसीटीवी वीडियो वायरल हुआ। इसमें एक दक्षिण एशियाई महिला को भारतीय पारंपरिक पोशाक में दिखाया गया था। यह महिला कथित तौर पर पड़ोस में विभिन्न घरों के बाहर बच्चों के लिए रखी गई हैलोवीन कैंडी उठा रही थी। लगभग प्रत्याशित रूप से, इसने कई यूजर्स से नस्लवादी टिप्पणियां और ‘गंदे भारतीय’ जैसे लेबल पोस्ट देखने को मिले।

जुलाई में, भारतीयों की कथित शौचालय की आदतों पर हमला करने वाली दो अन्य पोस्ट वायरल हुई थीं। TikTok पर एक वीडियो में दावा किया गया था कि भारतीय अप्रवासी ओंटारियो के वासागा बीच को गंदा कर रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक अन्य पोस्ट में ब्रैम्पटन में एक पार्किंग एरिया में कथित तौर पर शौच करते हुए एक पगड़ीधारी व्यक्ति की तस्वीर दिखाई गई थी। दोनों दावों की प्रामाणिकता के बारे में गंभीर संदेह उठाए गए हैं। कुछ सोशल मीडिया जासूसों ने दिखाया कि कैसे सिख व्यक्ति की तस्वीर के साथ छेड़छाड़ की गई थी। लेकिन दूसरों ने तुरंत एक और वीडियो बनाया जिसमें कथित तौर पर उसी व्यक्ति को किसी अन्य स्थान पर सार्वजनिक रूप से शौच करते हुए दिखाया गया था। इसने सुनिश्चित किया कि अफवाहों का बाजार लगातार चलता रहे।

इन पोस्ट के प्रभाव को समझने के लिए उनके फ्रेमिंग को देखना महत्वपूर्ण है। ‘विदेशी, ‘ई-बाइक डिलीवरी गैंग’, ‘आवारा’ और ‘मास इमिग्रेशन’ जैसे शब्द भारतीय अप्रवासियों की एक नकारात्मक लेकिन सामान्य प्रोफाइल बनाते हैं। यह एक अवांछनीय लेकिन अत्यधिक प्रतिनिधित्व वाले समूह के रूप में है। नस्लवादी रूढ़िवादिता के निशाने पर मुख्य रूप से पंजाबी सिख हैं। इनकी पहचान अक्सर उनकी संख्या के कारण दक्षिण एशियाई पहचान के साथ जोड़ दी जाती है। कनाडा की 2021 की जनगणना के अनुसार, सिखों की आबादी 2.1 प्रतिशत है। इससे यह देश भारत के बाहर सबसे बड़ी सिख आबादी का घर बन गया है।

कैनेडियन रेस रिलेशंस फाउंडेशन के अनुसार, 2019 और 2022 के बीच दक्षिण एशियाई लोगों के खिलाफ घृणा अपराधों में 143% की वृद्धि हुई है। एक चौथाई दक्षिण एशियाई-कनाडाई लोगों ने अकेले 2022 में भेदभाव या उत्पीड़न का अनुभव किया है। किचनर-वाटरलू वीडियो को फिल्माने वाले अश्विन अन्नामलाई ने इस संवाददाता को बताया कि पिछले कुछ महीनों में उन पर कई बार नस्लवादी हमले हुए हैं।

वाटरलू निवासी ने कहा कि ऐसे कई मौके आए जब मुझे धक्का दिया गया और धक्का दिया गया, लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा। बस इस बार मैंने उस महिला से भिड़ने की कोशिश की जिसने मुझे बीच वाली उंगली दिखाई और बिना किसी उकसावे के नस्लवादी बातें कहीं। मैंने उससे भिड़ने की कोशिश की, जिससे वह और भड़क गई।

दक्षिण भारत से आने वाले तमिल भाषी अन्नामलाई 2018 में एक अंतरराष्ट्रीय छात्र के रूप में कनाडा आए थे। आज, वे एक कनाडाई नागरिक हैं और फ्रेंच भी बोलते हैं। नस्लवादियों के साथ तर्क करने की निरर्थकता के बारे में पूछे जाने पर, अन्नामलाई कहते हैं कि वे एक कनाडाई के रूप में समाज की सामूहिक भलाई के लिए अन्य कनाडाई लोगों के साथ जुड़ने के लिए जिम्मेदार महसूस करते हैं। वे कहते हैं कि अधिकतर कनाडाई गर्मजोशी से भरे और स्वागत करने वाले लोग हैं। आपको उस वायरल वीडियो के बाद से मुझे मिले समर्थन का सागर देखना चाहिए।

कनाडा में पढ़ रहे भारतीयों की चिंताएं बढ़ गई हैं। निष्ठा गुप्ता वैंकूवर में ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय में सार्वजनिक नीति में मास्टर की पढ़ाई कर रही हैं। गुप्ता कहती हैं कि मैंने कई घटनाओं पर गौर किया है, जिसमें कनाडा में भारतीयों पर गलत तरीके से असामाजिक व्यवहार करने का आरोप लगाया गया है। एक अप्रवासी के रूप में, यह मुझे इस देश में अपने दीर्घकालिक भविष्य के बारे में चिंतित करता है।

शत्रुता की वर्तमान लहर अप्रवासियों की संख्या में वृद्धि के बाद आई है। हालांकि, अप्रवासियों को दक्षिण एशियाई लोगों के बराबर मानते हुए, यह इस तथ्य को नजरअंदाज़ कर देता है कि यूरोप से गोरे लोगों सहित विभिन्न जातीय बैकग्राउंड के लोग कनाडा में आते रहते हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान, चीनी मूल के कनाडाई लोगों को इसी तरह की नस्लवादी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा था। उस समय, भारतीय प्रवासियों को शायद लगता था कि वे इस तरह के कटुतापूर्ण व्यवहार से अछूते हैं। अब, जब ये उनके खिलाफ हो रहा है, तो भारतीय प्रवासियों में से कई को लगता है कि उनका ‘आदर्श अल्पसंख्यक’ मिथक टूट गया है।

कनाडा में चल रहे किफायती आवास संकट ने स्थानीय चिंताओं को और बढ़ा दिया है। इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को दोषी ठहराया जा रहा है, जिनमें से अधिकांश भारत से आते हैं। लोग अपने अस्तित्व के सवालों के जवाब पाने के लिए बेताब हैं। सूक्ष्म स्पष्टीकरण बलि का बकरा खोजने की उनकी जरूरत को पूरा करने में विफल हैं। पिछले साल एक प्रमुख खालिस्तान अलगाववादी की हत्या के बाद कनाडा और भारत के बीच तनावपूर्ण संबंधों ने मामले को और जटिल बना दिया है।

नस्लवाद को अक्सर कई कनाडाई लोगों द्वारा चर्चा के लिए बहुत ही अश्लील विषय माना जाता है। कनाडा के लोग यह मानना पसंद करते हैं कि यह केवल अमेरिका तक सीमित समस्या है। इस तरह के इनकार के माहौल में, कोई भी जातीय अल्पसंख्यक कनाडा में नस्लवाद से अछूता रहने की उम्मीद नहीं कर सकता। कल, यह चीनी थे; आज, यह भारतीय हैं; कल, यह कोई और हो सकता है।

 

क्या समुद्र में बढ़ने वाली है भारत की ताकत?

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आने वाले समय में समुद्र में भारत की ताकत बढ़ने वाली है! समुद्र में भारत की ताकत बढ़ने जा रही है। भारतीय नौसेना को जल्द ही आईएनएस तुशील के रूप में अपना नया साथी मिलने जा रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण लंबी देरी के बाद भारत को इस महीने के अंत तक रूस में निर्मित दो गाइडेड मिसाइल युद्धपोतों में से पहला प्राप्त होने वाला है। इन दो गाइडेड मिसाइल के मिलने से भारतीय नौसेना की ताकत और बढ़ जाएगी। इससे निश्चित रूप से चीन और पाकिस्तान की टेंशन बढ़ जाएगी। लगभग 4,000 टन वजनी वाला मल्टी रोल वाला फ्रिगेट पिछले कुछ महीनों से कलिनिनग्राद के यंतर शिपयार्ड में तैनात 200 से अधिक अधिकारियों और नाविकों के भारतीय दल को सौंप दिया जाएगा। इसके बाद युद्धपोत को आईएनएस तुशील के रूप में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की तरफ से नेवी में कमीशन किया जाएगा। राजनाथ सिंह भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग सैन्य-तकनीकी सहयोग (आईआरआईजीसी-एमएंडएमटीसी) की बैठक के लिए दिसंबर की शुरुआत में रूस का दौरा करने वाले हैं। हालांकि, एस-400 ट्रायम्फ वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियों के 2 शेष स्क्वाड्रनों की डिलीवरी 2026 तक देरी होने की संभावना है। इसके साथ ही परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर पनडुब्बी का पट्टा 2028 तक मिलने की संभावना है।

एक सूत्र ने बताया कि दूसरा फ्रिगेट, आईएनएस तमल को अगले साल की शुरुआत में सौंप दिया जाएगा। दोनों स्टील्थ फ्रिगेट में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों सहित हथियार और विभिन्न मिशनों को अंजाम देने के लिए सेंसर लगे होंगे। इसकी लंबाई 124.8 मीटर है। आईएनएस तुषिल की टॉप स्पीड 30 समुद्री मील है। इनकी अधिकतम स्पीड 59 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। यह जंगी जहाज इलेक्ट्रोनिक वारफेयर सिस्टम से लैस है। साथ ही इसकी क्रूजिंग रेंज 4850 मील है। भारत ने अक्टूबर 2018 में चार ग्रिगोरोविच श्रेणी के फ्रिगेट की खरीद के लिए एक अम्ब्रेला समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें से पहले दो को रूस से लगभग 8,000 करोड़ रुपये में आयात किया जाना था।

अन्य दो का निर्माण गोवा शिपयार्ड (जीएसएल) में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ लगभग 13,000 करोड़ रुपये की कुल लागत से किया जा रहा है। इसमें से पहला इस साल जुलाई में त्रिपुत के रूप में ‘लॉन्च’ किया गया है। ये चार युद्धपोत छह ऐसे रूसी फ्रिगेट में शामिल हो जाएंगे, जिनमें तीन तलवार श्रेणी के और तीन टेग श्रेणी के युद्धपोत हैं, जो 2003-04 से नौसेना में पहले से ही शामिल हैं।

पानी के अंदर की बात करें तो भारत ने पहले रूस से लीज पर लेकर दो परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर पनडुब्बियों INS चक्र-1 और INS चक्र-2 (जिन्हें SSN कहा जाता है) का संचालन किया है। इनमें पारंपरिक हथियार (जिन्हें SSN कहा जाता है) शामिल हैं। मार्च 2019 में, भारत ने रूस के साथ 10 साल के लिए एक अधिक एडवांस SSN को लीज पर लेने के लिए 3 अरब डॉलर (21,000 करोड़ रुपये) से ज़्यादा का सौदा किया था। हालांकि, इसकी डिलीवरी भी 2027 से आगे टल गई है। सूत्र ने कहा कि रूस से SSN को पहले डिलीवर करने के लिए कहा गया है, लेकिन 2028 से पहले इसकी डिलीवरी संभव नहीं है।

एक अन्य सूत्र ने कहा कि रूस के साथ किए गए 5.43 बिलियन डॉलर (40,000 करोड़ रुपये) के कॉन्ट्रैक्ट के तहत, एस-400 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों के चौथे और पांचवें स्क्वाड्रन की डिलीवरी 2026 तक ही होगी। एक अन्य सूत्र ने कहा कि भारत ने रूस से जल्द डिलीवरी के लिए कहा है लेकिन यह मुश्किल लग रहा है। इसकी वजह है कि रूस का पूरा डिफेंस टेक्नोलॉजी प्रोडक्श यूक्रेन युद्ध में जुटा हुआ है। भारतीय वायुसेना ने पहले तीन एस-400 स्क्वाड्रनों को तैनात किया है, जो 380 किलोमीटर की दूरी पर शत्रुतापूर्ण रणनीतिक बमवर्षकों, जेट विमानों, जासूसी विमानों, मिसाइलों और ड्रोनों का पता लगा सकते हैं। साथ ही उन्हें नष्ट कर सकते हैं। ये स्क्वाड्रन चीन और पाकिस्तान दोनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत में तैनात किए गए हैं।

संयोगवश, प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने 9 अक्टूबर को 40,000 करोड़ रुपये की लागत से दो एसएसएन बनाने की स्वदेशी परियोजना को मंजूरी दे दी। हालांकि, इन्हें चालू होने में कम से कम एक दशक लगेगा। भारत ने परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइलों (जिन्हें एसएसबीएन कहा जाता है) के साथ अपनी दूसरी परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बी को अगस्त में आईएनएस अरिघात के रूप में नौसेना में शामिल किया था। अगले साल की शुरुआत में आईएनएस अरिधमन के रूप में तीसरी पनडुब्बी को नौसेना में शामिल करने की योजना है, जो सामरिक प्रतिरोध के लिए एक बड़ा बढ़ावा होगा।

 

भूषण कुमार ने किया बड़ा खुलासा:अजय देवगन और रोहित शेट्टी पर लगाया गंभीर आरोप, बोले- ‘भुल भूलैया-3 के साथ नाइंसाफी हुई’

कार्तिक आर्यन की भूल भुलैया 3 का क्लेश अजय देवगन की सिंघम अगेन से हुआ था। यह फिल्म दिवाली के मौके पर 1 नवंबर को रिलीज हुई थी। अब हाल ही में टी-सीरीज़ के मालिक भूषण कुमार ने एक इंटरव्यू में अजय देवगन और रोहित शेट्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सिंघम अगेन की टीम को अनफेयर बताया। कनेक्ट सिने के साथ हाल ही में बातचीत में भूषण कुमार ने खुलासा करते हुए बताया, ‘भूल भुलैया 3’ और ‘सिंघम अगेन’ की रिलीज से पहले स्क्रीन बराबर बांटने को लेकर मेरी सिंघम अगेन की टीम से बहस हुई थी। मेरा मानना था कि ये दोनों ही फिल्में बड़ी हैं, इसलिए दोनों को बराबर स्क्रीन मिलनी चाहिए। मैं इस मामले में निष्पक्षता चाहता था, लेकिन कुछ पर्सनल इंटरेस्ट्स के चलते ऐसा नहीं हो पाया। इसे लेकर सिंघम अगेन की टीम ने अनफेयर किया। हालांकि, मैं थिएटर चेन को दोष नहीं देना चाहता, क्योंकि वे दूसरी फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर थे और उनके कुछ मुद्दे थे। इसके बाद भी उन्होंने हमें सपोर्ट किया। भूषण कुमार ने कहा, ‘मैंने एडवांस बुकिंग शुरू करने का सुझाव दिया था, ताकि फिल्म का रिस्पॉन्स देखा जा सके। भूल भुलैया 3 ने बड़ी फिल्म के बावजूद 36 करोड़ रुपये से ज्यादा की ओपनिंग की। वैसे तो दोनों ही फिल्मों ने अच्छी कमाई की।’ फिल्मों के क्लेश को लेकर भूषण कुमार ने कहा कि दोनों ही टीमें क्लैश को टालने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन किसी भी फिल्म के लिए अपनी रिलीज डेट बदलना संभव नहीं था। उन्होंने अजय देवगन और रोहित शेट्टी को बताया कि उन्होंने भूल भुलैया 3 पहले अनाउंस की थी और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के साथ उनकी कुछ डील्स थीं, इसलिए वह फिल्म को आगे नहीं कर सकते थे। सिंघम अगेन की टीम ने यह समझा, लेकिन उनकी भी अपनी वजह थी क्योंकि उनकी फिल्म का थीम रामायण से जुड़ा हुआ था, और वे दीवाली पर रिलीज करना मिस नहीं कर सकते थे। सिंघम अगेन के टाइटल ट्रैक पर टी-सीरीज ने लगाया था स्ट्राइक
जब यूट्यूब पर सिंघम अगेन का टाइटल ट्रैक रिलीज किया गया था, तो कुछ ही देर बाद टी-सीरीज ने उस वीडियो पर कॉपीराइट स्ट्राइक जारी कर दी थी। टी-सीरीज का दावा था कि टाइटल ट्रैक में 2011 की मूल सिंघम फिल्म की थीम के कुछ तत्व शामिल हैं, जिनके राइट्स उनके पास हैं। इसके बाद डायरेक्टर रोहित शेट्टी को सारे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से टाइटल ट्रैक को हटाना पड़ा था। गाने की फिर से एडिटिंग करनी पड़ी और इसे फिर से दोबारा यूट्यूब पर अपलोड करना पड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सिंघम अगेन के टाइटल ट्रैक में सिंघम फिल्म की थीम के 10 सेकंड से ज्यादा तत्व शामिल थे, जबकि कॉपीराइट पॉलिसी के अनुसार किसी भी गाने में तीन सेकंड से ज्यादा का तत्व शामिल करने के बाद उस पर कॉपीराइट का दावा किया जा सकता है।