द ग्रेट इंडियन कपिल शो के एक एपिसोड में रवींद्रनाथ टैगोर पर अपने कमेंट को लेकर कृष्णा अभिषेक विवादों में आ गए हैं। बंगाली लेखक सृजातो बंद्योपाध्याय ने कृष्णा पर टैगोर का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखते हुए कृष्णा से माफी मांगने की मांग की है। दरअसल, एपिसोड में कॉमेडी करते हुए कृष्णा अभिषेक ने ‘एकला चलो रे’ की जगह ‘पाचला चलो रे’ कहा था, जिसके बाद से बंगाली समाज के लोग शो के मेकर्स से काफी नाराज हैं। बंगाली लेखक सृजातो बंद्योपाध्याय का पोस्ट
बंगाली लेखक सृजातो बंद्योपाध्याय ने अपने फेसबुक हैंडल पर कृष्णा अभिषेक की आलोचना करते हुए एक लंबा नोट लिखा। उन्होंने लिखा, हास्य और मजाक में एक पतली लाइन जितना फर्क होता है, जिसे पार करना कभी-कभी खतरनाक साबित हो सकता है। अक्सर, लोग इस बात पर ध्यान नहीं देते कि वे किसके बारे में मजाक कर रहे हैं। हाई रेटिंग पाने के लिए और लोगों को हंसाने की कोशिश में वे भूल जाते हैं कि लाइन कहां खींचनी है।’ सृजातो बंद्योपाध्याय ने आगे कहा, ‘एकला चोलो रे गाने के साथ कृष्णा अभिषेक ने जो एक्ट किया वो मेरी नजर में, सम्मान और विनम्रता के लेवल से काफी नीचे गिर गए हैं। मुझे यकीन है कि उनमें गालिब, कबीर या प्रेमचंद पर ऐसे भद्दे चुटकुले बनाने की हिम्मत नहीं होगी, क्योंकि अगर वो ऐसा करेंगे तो शो को अगले दिन मजबूरन बंद करना पड़ेगा।’ लेखक ने आगे लिखा, ‘बंगाली लोगों को ऐसे चुटकुलों के आदत हैं, इसलिए वे ऐसे चुटकुले सुना सकते हैं। वो भी एक बंगाली एक्ट्रेस काजोल के सामने, जो इस एक्ट के दौरान बैठकर हंसती रहीं।’ बोंगो भाषी महासभा फाउंडेशन ने मेकर्स को भेजा था नोटिस
इस मामले में बोंगो भाषी महासभा फाउंडेशन (बीबीएमएफ) ने ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ के मेकर्स को कानूनी नोटिस भी भेजा था। उन पर रवींद्रनाथ टैगोर और बंगाली समुदाय के अपमान का आरोप लगाया था। ये नोटिस बीबीएमएफ के अध्यक्ष डॉ. मंडल ने अपने कानूनी सलाहकार नृपेंद्र कृष्ण रॉय के माध्यम से भेजा। नोटिस में कहा गया कि ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ में महान लेखक रवींद्रनाथ टैगोर का अपमान किया गया है। इसके चलते न केवल बंगालियों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को आहत पहुंची हैं, बल्कि दुनियाभर के बंगालियों की भावनाएं भी आहत हुई हैं। शो के मेकर्स ने दिया कानूनी नोटिस का जवाब
‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ के मेकर्स ने कानूनी नोटिस का जवाब भी दिया था। उन्होंने कहा था कि उनका टैगोर को गलत तरीके से पेश करने का कोई इरादा नहीं था। बल्कि द ग्रेट इंडियन कपिल शो पूरी तरह से मनोरंजन के लिए बनाया गया एक कॉमेडी शो है। यह शो पैरोडी और फिक्शन है, जिसका उद्देश्य किसी भी व्यक्ति या समुदाय को भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। जानें क्या है पूरा मामला?
बताते चलें कि हाल ही में काजोल और कृति सेनन अपनी फिल्म दो पत्ती का प्रमोशन करने द ग्रेट इंडियन कपिल शो का हिस्सा बनी थीं। इस दौरान कृष्णा अभिषेक ने रवींद्रनाथ टैगोर का गेटअप अपनाया था। एंट्री के वक्त वो रवींद्रनाथ टैगोर की नकल उतारते हुए उनका गीत ‘एकला चलो रे’ की जगह ‘पाचला चलो रे’ गाते दिखे। उन्होंने गाने के शब्द एकला (अकेले) को पाचला (5 लोगों के साथ) से रिप्लेस किया था। साथ ही उन्होंने कहा कि अकेले चलने में खतरा है क्योंकि कुत्ते पीछे पड़ जाते हैं। शो स्ट्रीम होने के बाद से ही कई राइटर्स और बंगाली समुदाय से जुड़े लोग इसका विरोध कर रहे हैं। ………………………………………………. इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़िए- 1. द ग्रेट इंडियन कपिल शो के मेकर्स को लीगल नोटिस:विवादों के बीच सलमान खान की टीम ने दी सफाई, कहा- हमारा शो से कोई लेना-देना नहीं नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रहे कॉमेडी शो द ग्रेट इंडियन कपिल शो के मेकर्स को लीगल नोटिस मिला है। आरोप हैं कि शो के एक सेगमेंट में नोबेल पुरुस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर का अपमान किया गया है। खबरें ये भी हैं कि सलमान खान की प्रोडक्शन टीम को भी लीगल नोटिस मिला है, जो पहले शो के प्रोडक्शन का हिस्सा थी। विवादों के बीच उनकी टीम ने सफाई देते हुए कहा है कि उनका शो से कोई लेना-देना नहीं है। स्टेटमेंट में लीगल नोटिस मिलने की खबर का भी खंडन किया गया है। पूरी खबर पढ़ें…
कपिल शर्मा का शो एक बार फिर विवादों में:रवीन्द्रनाथ टैगोर के गीत पर कमेंट करके फंसे कृष्णा अभिषेक, बंगाली कवि ने माफी की मांग की
बी-प्राक के घर हुई थीं एक-एक कर तीन मौतें:कहा- बेटे का शव जिंदगी की सबसे भारी चीज, पत्नी ने पूछा- दफना आए, शक्ल तो दिखा देते
तेरी मिट्टी, मन भरया और सब कुछ ही मिटा देंगे जैसे कई बेहतरीन गानों का आवाज देने वाले बी-प्राक ने हाल ही में बताया है कि उनकी जिंदगी में एक समय ऐसा आया, जब वो बुरी तरह टूट गए थे। उनके घर में एक-एक कर पहले पिता, फिर चाचा और फिर बेटे की डेथ हुई थी, जिससे परिवार पर बुरा असर पड़ा था। सिंगर ने ये भी बताया है कि मृत बेटे को उठाना उनकी जिंदगी की सबसे भारी चीज थी। हाल ही में शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में सिंगर बी-प्राक ने अपने बुरे वक्त को याद कर कहा है, चाचा का सबसे पहले निधन हुआ और फिर एक महीने भी नहीं हुए थे फादर चले गए, साल 2021 में। फिर 2022 में दूसरा बेटा। मैं बहुत नेगेटिव हो गया था। घर में ऐसा माहौल हो गया था, बता नहीं सकता। ऐसा टाइम कभी किसी की जिंदगी में न आए। लेकिन उसके आगे जो टाइम आया, वो हर एक की लाइफ में आए। आगे सिंगर ने कहा, जब मेरे चाचा की खबर आई तो मैं एक शो में था। मुझे स्माइल करना था, क्योंकि हम आर्टिस्ट हैं। आर्टिस्ट की यही जिंदगी है। फिर 24 दिसंबर 2021 को पिता की खबर आई। उस समय भी मेरा शो था क्रिसमस का। उस दिन मुझे जाना ही पड़ा। फिर जून में बेटे की। उसके बाद हमारी लाइफ पूरी बदल गई। मुझे समझ नहीं आता था कि मैं पत्नी मीरा को कैसे समझाऊं। मुझे कुछ समझ नहीं आता था। मैं उसे बोलता रहा कि बेटे को डॉक्टर्स देख रहे हैं, क्योंकि अगर हम बोल देते तो वो झेल ही नहीं पाती। आगे उन्होंने कहा, अगर लाइफ में मुझे कुछ भारी लगा है, किसी को उठाना, तो वो अपने बेटे की बॉडी है। उससे भारी मैंने लाइफ में कुछ नहीं उठाया। इतना भार, एक इतने से बच्चे का, ये सबसे भारी चीज थी मेरी लाइफ की। मैं अपनी मां से कह रहा था कि हम क्या करने आ रहे हैं। मैंने तो इतना भार कभी जिंदगी में नहीं उठाया। जब मैं वापस हॉस्पिटल आया, तो मीरा नीचे रूम में आ गई थी। उसने मुझे देखकर कहा, दफना आ आए बच्चे को। मुझे दिखा तो देते। वो बहुत बुरा टाइम था। हमने जिंदगी में सब खो दिया था। इतने नेगेटिव हो गए, आज तक वो मुझसे इस बात से नाराज है कि मैंने उसे बच्चे का चेहरा नहीं दिखाया। बताते चलें कि साल 2019 में बी-प्राक ने मीरा से शादी की थी। इस शादी से 2020 में उन्हें एक बेटा आदाब है। साल 2022 में उनके घर दूसरे बेटे का जन्म होने वाला था, हालांकि जन्म के समय ही उसकी मौत हो गई थी। कपल ने उसका नाम फाजा तय किया था। ……………………………………….. इससे जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए- पंजाबी सिंगर दिलजीत को नोटिस:पटियाला पैग-पंज तारा गाने पर रोक, हैदराबाद कॉन्सर्ट में बच्चों को मंच पर बुलाने पर पाबंदी पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ इन दिनों अपने दिल-लुमिनाती टूर को लेकर चर्चा में हैं। कल यानी शुक्रवार (15 नवंबर) को हैदराबाद में उनका कॉन्सर्ट है। तेलंगाना सरकार ने दिलजीत दोसांझ, उनकी टीम और हैदराबाद के होटल नोवोटेल को नोटिस जारी किया है। पूरी खबर पढ़िए…
फिल्म 2 पत्ती के खिलाफ सीएम से की मीटिंग:हुड्डा गोत्र पर टिप्पणी हटाने की मांग, नायब सैनी ने केंद्रीय मंत्री को भेजा मामला
सर्व हुड्डा खाप ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से चंडीगढ़ स्थित उनके निवास पर मुलाकात की। इस दौरान 25 अक्टूबर को रिलीज हुई फिल्म दो पत्ती में हुड्डा गोत्र पर की गई टिप्पणी को हटवाने और फिल्म निर्माता, निदेशक, अभिनेता और प्रसारित करने वाले ओटीटी प्लेटफार्म से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की गई। रोहतक के गांव बसंतपुर स्थित सर्व हुड्डा खाप के ऐतिहासिक चबूतरे पर 10 नवंबर को खाप के 45 गांव के प्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों ने पंचायत की थी। इसमें एक उच्च अधिकार प्राप्त समिति का गठन किया गया। इसके सदस्य और इस मामले को समाज के सामने लाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सुरेन्द्र सिंह हुड्डा को हरियाणा के मुख्यमंत्री और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री से पत्राचार कर मामले को उचित ढंग से उठाने का अधिकार दिया गया। सामाजिक कार्यकर्ता सुरेन्द्र सिंह हुड्डा ने बताया कि फिल्म दो पत्ती के एक संवाद से जाट समाज के हुड्डा गोत्र को बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस विवादित मामले को लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी से मुलाकात के दौरान हुड्डा गोत्र को बदनाम करने वाले मामले पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद मिलने का समय दिया। जो मुख्यमंत्री नायब सैनी की सामाजिक संवेदनशील को दर्शाता है । फिल्म दो पत्ती में जिस प्रकार से हुड्डा गोत्र को बदनाम करने का षड्यंत्र हुआ है, यह एक आपराधिक मामला है। जिस पर जल्द ही एफआईआर दर्ज होगी। पहले दिया जा चुका नोटिस सुरेन्द्र सिंह हुड्डा ने बताया कि फिल्म रिलीज होने के अगले ही दिन फिल्म दो पत्ती के निर्माता, निदेशक, अभिनेता और फिल्म को प्रसारित करने वाले ओटीटी प्लेटफार्म नेटफ्लिक्स को उन्होंने नोटिस जारी कर दिया था। जिसका जवाब फिल्म निर्माण करने वाली कम्पनी और फिल्म को प्रसारित करने वाली कम्पनी नेटफ्लिक्स ने देते हुए कहा है कि जो आरोप नोटिस में लगाए गए हैं वह घटना दो पत्ती फिल्म में हुई है। परन्तु यह फिल्म निर्माता और अभिनेता की बोलने की आजादी के तहत है और हुड्डा शब्द का प्रयोग केवल एक संजोग ही है। सुरेन्द्र सिंह हुड्डा ने कहा कि देश का कोई भी कानून किसी की भी सामाजिक प्रतिष्ठा खराब करने और मान-सम्मान की हानि करने का अधिकार नहीं देता है। फिल्म में प्रसारित विवादास्पद संवाद से उनकी व्यक्तिगत व समस्त हुड्डा खाप की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है और एक षड्यंत्र के तहत ही जाट समाज के हुड्डा गोत्र की मानहानि हुई है। मामले को केंद्रीय प्रसारण मंत्री को भेजने के निर्देश सुरेन्द्र सिंह हुड्डा ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि जाट समाज के हुड्डा गोत्र की एक षड्यंत्र के तहत सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाई जा रहा है। जिस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने मांग स्वीकार करते हुए हरियाणा सरकार के आग्रह के साथ मामले को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री को भेजने के लिए अपने अधिकारियों को मौके पर ही निर्देश दिए।
कांग्रेस का उद्देश्य खतरनाक है, चुनाव के लिए मोदी की तोप
कांग्रेस ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि अगर वे सत्ता में आए तो वे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को सस्ते गैस सिलेंडर उपलब्ध कराएंगे। दूसरी ओर, उन्होंने शिकायत की, गरीबों की स्थिति में सुधार होने पर कांग्रेस हमेशा क्रोधित होती है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से एक सप्ताह पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नवी मुंबई, पनवेल और शिवाजी पार्क में विभिन्न सार्वजनिक बैठकों में कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी पर तीखा हमला बोला। एक तरफ उन्होंने बांग्लादेश का नाम लेकर घुसपैठ का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा, कांग्रेस ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि अगर वे सत्ता में आए तो रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को कम कीमत पर गैस सिलेंडर देंगे। दूसरी ओर, उन्होंने शिकायत की, गरीबों की स्थिति में सुधार होने पर कांग्रेस हमेशा क्रोधित होती है। कांग्रेस अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को अलग-अलग जातियों के नाम पर बांटना चाहती है, ताकि उनके बीच झगड़े न हों।
यह स्पष्ट करते हुए कि भाजपा और विपक्षी महायुति महाराष्ट्र के लोगों की भलाई के लिए गरीबों और महिलाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं, मोदी ने कहा, “देश तभी प्रगति करेगा जब गरीब पहले प्रगति करेंगे। कांग्रेस पार्टी हमेशा गरीबों को गरीब बनाये रखने का कार्यक्रम अपनाती रही है. पीढ़ी दर पीढ़ी वे ‘गरीबी हटाओ’ का झूठ प्रचारित करते रहते हैं। आज आज़ादी के 70 साल बाद भी देश की अधिकांश जनता रोटी, कपड़ा और मकान के लिए संघर्ष कर रही है।” मोदी ने दावा किया, ”हमने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है, 4 करोड़ बेघरों के सिर पर छत है. मैंने 12 करोड़ शौचालय बनवाए हैं. महायुति शोषितों और वंचितों के लिए बनाई गई नीति है।” उन्होंने कहा, ”हम हर महीने 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन मुहैया कराते हैं. क्या कोई इस पर विवाद कर सकता है? क्या किसी गरीब के घर में चूल्हा जलने से किसी को आपत्ति हो सकती है? लेकिन कांग्रेस इससे खुश नहीं है. वे कह रहे हैं कि गरीबी से बाहर आए 25 करोड़ लोगों को भी मुफ्त राशन मिलेगा! अगर अघाड़ी को इस राज्य में सरकार बनाने का मौका मिला तो महाराष्ट्र फिर से गरीबी के अंधेरे में डूब जाएगा।”
इसके बाद वह बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर आये. मोदी के शब्दों में, “झारखंड में एक कांग्रेस नेता ने घोषणा की है कि वे घुसपैठियों को सस्ते गैस सिलेंडर देंगे। आप कहते हैं, वे घुसपैठियों की पूजा क्यों करना चाहते हैं? कांग्रेस का कहना है कि वह रोहिंग्याओं और बांग्लादेश के लोगों को सस्ती गैस देगी। कांग्रेस वोट पाने के लिए आपके बच्चे के भविष्य के साथ खेल रही है। कांग्रेस गरीबों की दुश्मन है. वे वोट बैंक की राजनीति करते हैं।”
महाराष्ट्र की महिला वोटों का दिल जीतने के लिए सत्ताधारी खेमा ‘महायुति’ शुरू से ही सक्रिय है. महायुति नेता ‘लाडली बहन’ योजना का प्रचार कर रहे हैं. मोदी के शब्दों में, ”महायुति माताजी लाडली बहन योजना के माध्यम से राज्य की महिलाओं को दोहरा लाभ दे रही है।” कांग्रेस और अघाड़ी गठबंधन इस योजना का विरोध कर रहे हैं और योजना को रोकने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उनके इरादे खतरनाक हैं. मैं इस बैठक में उपस्थित माताओं और बहनों से विशेष रूप से कह रहा हूं कि महाविकास अग्रहरि को किसी भी तरह से सरकार में आने का मौका नहीं मिलना चाहिए। राहुल गांधी पर मोदी की टिप्पणी, ‘शहजादा ने विदेश जाकर कहा है कि मौका मिलेगा तो आरक्षण खत्म कर देंगे.’ दलित, पिछड़े वर्ग के लोग एकजुट नहीं होंगे तो कमजोर होंगे।”
लोकसभा चुनाव के बाद से ही अटकलों का दौर शुरू हो गया था. भाजपा के नेतृत्व वाले ‘महाजुट’ में आंतरिक दरार पर चर्चा उस समय तेज हो गई जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और उनकी पार्टी राकांपा के प्रमुख नेता गुरुवार को मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक में शामिल नहीं हुए।
मुंबई के छत्रपति शिवाजी पार्क में मोदी की सभा में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और केंद्रीय मंत्री रामदास अठवाल मौजूद थे. वहां शिंदेसेना और आरपीआई (ए) के मुंबई नेता भी थे। लेकिन अजित बार, उनकी पार्टी के मुंबई विंग के तीन चेहरे – जीशान सिद्दीकी (मृतक पिता सिद्दीकी के बेटे), नवाब मलिक और सना मलिक – गठबंधन के कार्यक्रम में नहीं दिखे। ऐसे में अटकलें हैं कि चुनाव के बाद अजित फिर काका शरद से हाथ मिला सकते हैं। इस सप्ताह एक साक्षात्कार में, अजित ने दावा किया कि तत्कालीन अविभाजित राकांपा नेतृत्व ने 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा के नेतृत्व वाले राजग में शामिल होने के लिए सक्रियता शुरू कर दी थी। अजित का दावा है कि उस समय उन्होंने और उनके चाचा शरद पवार (अविभाजित एनसीपी के तत्कालीन अध्यक्ष) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ एक गुप्त बैठक की थी। इसके बाद उनकी टिप्पणी, ”शिल्पापति अडानी उस बैठक में मध्यस्थ के रूप में मौजूद थे.” वोटिंग के बाद अजित की इस टिप्पणी ने महाराष्ट्र में विवाद पैदा कर दिया है. ऐसी भी अफवाहें हैं कि बीजेपी नेतृत्व उनसे नाराज है. संयोग से, इसके बाद मोदी की बैठक से राकांपा नेतृत्व की अनुपस्थिति भी सामने आई।
दोनों पार्टियों के बीच टकराव जुलाई में आरएसएस के मुखपत्र में छपे एक लेख के बाद सामने आया, जिसमें महाराष्ट्र में लोकसभा चुनावों में एनडीए के खराब प्रदर्शन के लिए अजित की एनसीपी के साथ बीजेपी नेतृत्व की मिलीभगत को जिम्मेदार ठहराया गया था। महाराष्ट्र में लोकसभा की 48 सीटों में से एनडीए को 17 सीटें मिलीं. भाजपा ने सात सीटें जीतीं, जबकि दो साझेदारों शिव सेना (शिंदे) और राकांपा (अजित) ने क्रमश: नौ और एक सीट जीती। एनडीए गठबंधन को पांच साल पहले के नतीजे से करीब दो दर्जन सीटें कम मिलीं. ऐसे में आरएसएस के मुखपत्र ने लिखा, अनावश्यक राजनीतिक जोड़-तोड़ करते हुए पार्टी तोड़ना महाराष्ट्र में बीजेपी पर भारी पड़ गया है. लेख में अजित को ‘कांग्रेस विचारधारा का अनुयायी’ और ‘भ्रष्टाचार मामले में आरोपी’ भी करार दिया गया।
संयोग से, महाराष्ट्र में 288 विधानसभा क्षेत्रों में एक चरण में 20 नवंबर को मतदान होगा। 23 नवंबर को गिनती. मुख्य लड़ाई बीजेपी-शिवसेना (एकनाथ शिंदे)-एनसीपी (अजित) गठबंधन ‘महाजुति’ और कांग्रेस-शिवसेना (यूबीटी)-एनसीपी (शरद) ‘महाबिकाश अग्रहरि’ के बीच है। अजित की पार्टी ने 59 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं. लेकिन उनमें से नौ में बीजेपी या शिंदेसेना के साथ ‘बंद’ है
सुशांत ने प्रतीक बब्बर को बताई थी एक ख्वाहिश:छिछोरे की शूटिंग कर अंटार्कटिक जाने का था प्लान, कहा था- बस अकेले जाना चाहता हूं
हाल ही में अपनी फिल्म ख्वाबों का झमेला से एक इंटरव्यू में प्रतीक बब्बर ने सुशांत सिंह राजपूत पर बात की है। प्रतीक बब्बर ने दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के साथ फिल्म छिछोरे में काम किया था। सुशांत लीड रोल में थे, जबकि प्रतीक ने फिल्म में नेगेटिव किरदार निभाया था। हाल ही में एक इंटरव्यू में प्रतीक के साथ सेट पर समय बिताने पर बात कर उनकी एक अधूरी ख्वाहिश बताई है। फिल्मीज्ञान को दिए एक इंटरव्यू में प्रतीक बब्बर ने सुशांत सिंह राजपूत को लीजेंड बताया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वो उन्हें याद करते हैं। इसके जवाब में उन्होंने कहा, मैं कभी भी उसके बहुत ज्यादा क्लोज नहीं रहा हूं। लेकिन मैं कहना चाहूंगा कि जब उसका औरा बहुत बड़ा था, जब भी वो काम के दौरान मेरा पास होते थे। वो बहुत ज्यादा यूनीक था। वो एक्स्ट्रीम यूनिक और दिल से महसूस करने वाला था। आगे एक्टर ने कहा है, वो थोड़ा हटके थे। मैं कभी नहीं भूलुंगा। हम बास्केटबॉल सीन के लिए इंतजार कर रहे थे। हम बास्केटबॉल हूप के नीचे बैठे थे, बॉल से खेल रहे थे। उसने अचानक मुझसे कहा, यार मैं अंटार्कटिक जा रहा हूं। जब मैंने उनसे पूछा- हां? तो फिर बोला- अंटार्कटिक जा रहा हूं मैं, अकेले जाना है मुझे। ये बहुत हैरानी की बात है कि वो सोचता था। बस बैठे-बैठे उसने तय कर लिया कि उसे अंटार्कटिक जाना है। बताते चलें कि सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून साल 2020 में आत्महत्या कर ली थी। जांच के दौरान उनके पास एक डायरी मिली थी, जिसमें उन्होंने अपनी विश लिस्ट लिख रखी थी। उस लिस्ट में करीब 50 ऐसे काम थे, जिसे पूरा करने का एक्टर सपना देखा करते थे। उनमें ट्रेवलिंग, अंतरिक्ष और यूथ के लिए नए बिजनेस आइडिया से रिलेडेट कंपनी शुरू करने जैसे कई पॉइंट थे। अफसोस की सुशांत उनमें से महज 13 सपने ही पूरे कर चुके। बता दें कि प्रतीक बब्बर की फिल्म ख्वाबों का झमेला 6 नवंबर को रिलीज हो चुकी है। फिल्म में उनके साथ सयानी गुप्ता और कुब्रा सैत अहम किरदारों में हैं। ……………………………………………. इस खबर से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए- ’13 साल की उम्र से मैं ड्रग्स लेता था’:प्रतीक बब्बर बोले- इसके पीछे का कारण इंडस्ट्री का फेम नहीं, बल्कि घर की स्थिति थी प्रतीक बब्बर ने हाल ही में अपनी ड्रग्स की लत के बारे में खुलकर बात की। एक्टर ने कहा उन्हें 13 साल की उम्र से ड्रग्स लेने की लत लग गई थी। ऐसा नहीं है कि यह सब फिल्म इंडस्ट्री के फेम के कारण हुआ था। लेकिन हां, इसने उनकी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ दोनों पर बहुत ज्यादा असर डाला। हालांकि, अब वह इससे धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं। पूरी खबर पढ़िए…
‘टीकाकरण से शरीर ख़राब होता है’ के सिद्धांत के समर्थक! ट्रम्प ने कैनेडी को स्वास्थ्य सचिव के पद पर नियुक्त किया
कैनेडी जूनियर को हमेशा से टीकाकरण विरोधी माना जाता है। उन्हें कई बार यह कहते हुए सुना गया है कि टीकाकरण से ऑटिज़्म और अन्य शारीरिक बीमारियाँ होती हैं। राष्ट्रपति चुने जाने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप प्रशासनिक स्तर पर कई नियुक्तियां कर रहे हैं। इस बार उन्होंने रॉबर्ट एफ कैनेडी जूनियर को संयुक्त राज्य अमेरिका के स्वास्थ्य विभाग का प्रमुख नियुक्त किया। कैनेडी ट्रम्प प्रशासन में स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग के प्रभारी होंगे। संयोग से, कैनेडी जूनियर को हमेशा से टीकाकरण विरोधी माना जाता है। उन्हें कई बार यह कहते हुए सुना गया है कि टीकाकरण से ऑटिज़्म और अन्य शारीरिक बीमारियाँ होती हैं। इसलिए कैनेडी जूनियर को अमेरिकी स्वास्थ्य सचिव नियुक्त करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कैनेडी जूनियर की एक और पहचान भी है. वह पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी के भतीजे हैं। उनके पिता, रॉबर्ट एफ कैनेडी, एक समय संयुक्त राज्य अमेरिका के अटॉर्नी जनरल थे। कैनेडी जूनियर भी निवर्तमान राष्ट्रपति जो बिडेन के विरोध में राष्ट्रपति पद के लिए दौड़े। सबसे पहले, वह एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में व्हाइट हाउस पर कब्ज़ा करने की लड़ाई में थे, लेकिन बाद में उन्होंने नाम वापस ले लिया और रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ट्रम्प का समर्थन किया।
कई चुनावी रैलियों में ट्रंप ने कहा कि वह कैनेडी को संयुक्त राज्य अमेरिका के सार्वजनिक स्वास्थ्य की देखभाल की जिम्मेदारी देना चाहते हैं। राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद भी उन्होंने यह बात रखी. ट्रंप ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर कैनेडी जूनियर की नियुक्ति की घोषणा की. साथ ही, वह लिखते हैं, “बहुत लंबे समय से, अमेरिकी लोगों को फार्मास्युटिकल कंपनियों की गलत सूचनाओं से गुमराह किया गया है।” ट्रंप ने कैनेडी जूनियर की तारीफ करते हुए कहा, ”वह महामारी को खत्म कर देंगे। अमेरिका को फिर से महान और स्वस्थ बनाएं।” कैनेडी जूनियर ने भी ट्रंप को धन्यवाद देते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया. ट्रंप की टिप्पणियों के बाद उन्होंने कहा, “हम साथ मिलकर अमेरिका को फिर से स्वस्थ बनाएंगे।” मैं अमेरिका के लोगों को पारदर्शिता के साथ सारी जानकारी उपलब्ध कराऊंगा, ताकि वे अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार कर सकें।”
उन्हें रिपब्लिकन पार्टी के भीतर डोनाल्ड ट्रंप के आलोचक के रूप में जाना जाता है। पार्टी ने दक्षिण डकोटा के अनुभवी सीनेटर जॉन थ्यून को अमेरिकी कांग्रेस के ऊपरी सदन सीनेट के नेता के रूप में चुना। थ्यून ने रिपब्लिकन सीनेटरियल प्राइमरी में टेक्सास के सीनेटर जॉन कॉर्निन को हराया।
63 वर्षीय थ्यून निवर्तमान सीनेट बहुमत नेता मिच मैककोनेल का स्थान लेंगे। लेकिन मिच सीनेट में अल्पसंख्यक रिपब्लिकन समूह के नेता थे। थून नवनिर्वाचित बहुमत वाले रिपब्लिकन होंगे। संयोग से, इस बार राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प की जीत के अलावा, उनकी रिपब्लिकन पार्टी को अमेरिकी कांग्रेस के ऊपरी सदन, सीनेट और निचले सदन प्रतिनिधि सभा में भी बहुमत मिला।
सीनेट में सदस्यों की कुल संख्या 100 है। उनमें से 52 रिपब्लिकन सीनेटर हैं। सदन में 435 में से 220. थून और मिच के अलावा, फ्लोरिडा के सीनेटर रिक स्कॉट, ट्रम्प के वफादार, सीनेट रिपब्लिकन नेतृत्व के लिए दौड़ रहे थे। लेकिन प्राथमिक मतदान में वह हार गये. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि राष्ट्रपति चुनाव में कौन सा उम्मीदवार जीतता है, किसी भी नए कानून को पारित करने के लिए इन दोनों सदनों की मंजूरी की आवश्यकता होती है। हालाँकि, इस मामले में सीनेट का महत्व सदन से कुछ अधिक है। विभिन्न मामलों पर अंतिम निर्णय के अलावा सीनेट ही राष्ट्रपति समेत महत्वपूर्ण पदों पर जीत हासिल करने वाले उम्मीदवारों के नामांकन पत्र सुप्रीम कोर्ट में जमा करती है।
अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन प्रतिनिधि सभा ने राष्ट्रपति के रूप में उनका कार्यकाल समाप्त होने से एक सप्ताह पहले उनके खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पारित किया। कांग्रेस के उच्च सदन सीनेट का सत्र सोमवार को शुरू हुआ। डोनाल्ड ट्रम्प का “भाग्य” वहां अंतिम होगा। अगर प्रस्ताव सीनेट से पास हो गया तो ट्रंप 2024 में राष्ट्रपति पद का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
सीनेट में ”भाग्य की परीक्षा” से पहले ट्रंप खेमे में अंतिम तैयारियां चल रही हैं. राजनीतिक हस्तियों के साथ-साथ अमेरिका के कई शीर्ष वकील पूर्व राष्ट्रपति की मदद कर रहे हैं। उस टीम का नेतृत्व प्रसिद्ध दक्षिण कैरोलिना वकील बुच बोवर्स कर रहे हैं। वह सीनेट में ट्रम्प के लिए बोलेंगे। अमेरिकी प्रेस का दावा है कि जॉर्ज डब्ल्यू बुश के दौर में अमेरिकी न्याय विभाग के एक महत्वपूर्ण अधिकारी बोवर्स का रिपब्लिकन खेमे में काफी “प्रभाव” है।
साउथ कैरोलिना के रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम खुद ट्रंप खेमे की कानूनी और राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। ऐसी अटकलें थीं कि पूर्व अटॉर्नी जनरल चार्ली कॉन्डन भी ट्रंप खेमे में शामिल होंगे. लेकिन मंगलवार को उन्होंने ऐसी संभावना को खारिज कर दिया.
6 जनवरी को कैपिटल पर ट्रंप समर्थकों के हमले के कारण कांग्रेस में महाभियोग का प्रस्ताव आया था. अमेरिकी सीनेट के सदस्यों की संख्या 100 है। इनमें 50 डेमोक्रेट खेमे से हैं, जिनमें दो बिना पार्टी के हैं। 50 रिपब्लिकन भी हैं. महाभियोग प्रस्ताव पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 67 वोटों की आवश्यकता होती है। ट्रंप खेमे की रणनीति रिपब्लिकन खेमे को प्रभावित कर प्रस्ताव को कानूनी दलीलों के जाल में फंसाने की है।
यूक्रेन को अवैध रूप से प्रभावित करने के लिए अपने पद का दुरुपयोग करने के आरोप में 2019 में प्रतिनिधि सभा द्वारा ट्रम्प पर महाभियोग लगाया गया था। लेकिन सीनेट में यह प्रस्ताव खारिज हो गया. ट्रंप खेमे को उम्मीद है कि इस बार भी वही घटना दोहराई जाएगी.
गोधरा कांड की सच्चाई तलाशती ‘साबरमती रिपोर्ट’:विक्रांत मैसी की एक्टिंग लाजवाब, लेकिन कमजोर निर्देशन-स्क्रीनप्ले ने बिगाड़ा खेल
विक्रांत मैसी, रिद्धि डोगरा और राशि खन्ना स्टारर फिल्म द साबरमती रिपोर्ट रिलीज हो गई है। फिल्म की लेंथ 2 घंटे 3 मिनट है। दैनिक भास्कर ने इस फिल्म को 5 में से 2.5 स्टार रेटिंग दी है। द साबरमती रिपोर्ट एक क्राइम-थ्रिलर फिल्म है, जो 2002 में हुए गोधरा कांड पर आधारित है। इस फिल्म में 27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस की S6 बोगी में हुए आगजनी और उसमें मारे गए 59 कारसेवकों की सच्चाई को उजागर करने की कोशिश की गई है। फिल्म की कहानी समर कुमार (विक्रांत मैसी) नामक एक हिंदी पत्रकार के इर्द-गिर्द घूमती है, जो इस घटना के असल सच को सामने लाने के लिए संघर्ष करता है। फिल्म में रिद्धि डोगरा और राशि खन्ना भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म की कहानी क्या है?
‘द साबरमती रिपोर्ट’ में समर कुमार (विक्रांत मैसी), एक हिंदी पत्रकार है, जो फिल्म बीट कवर करता है। उसे हमेशा फिल्म इंडस्ट्री और अंग्रेजी भाषी पत्रकारों द्वारा हीन भावना से देखा जाता है। दूसरी ओर, मनिका (रिद्धि डोगरा), एक तेज तर्रार अंग्रेजी न्यूज एंकर है, जिसका मीडिया में दबदबा है। गोधरा में, 27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस की S6 बोगी में आग लगने से 59 कारसेवकों की मौत हो जाती है। मनिका, इस घटना को कवर करने के लिए गोधरा जाती है और समर को अपने कैमरा मैन के रूप में साथ ले जाती है। समर इसे अपने करियर का ‘गोल्डन चांस’ मानता है। लेकिन जब मनिका अपने बॉस के कहने पर पूरी घटना को उलटकर जनता के सामने झूठी रिपोर्ट पेश करती है, तो समर चौंक जाता है। वह सच्चाई को सामने लाने के लिए अपनी रिपोर्ट तैयार करता है, लेकिन चैनल के बॉस द्वारा उसे न केवल नौकरी से निकाल दिया जाता है, बल्कि कैमरा चोरी के आरोप में जेल भेज दिया जाता है। समर का जीवन संघर्षों से भरा हो जाता है—नौकरी से वंचित, शराब की लत में डूबा, और समाज से दूर। इस बीच, नानावटी कमीशन की रिपोर्ट के बाद झूठी खबर का खुलासा होने का डर चैनल के अधिकारियों और मनिका को सता रहा होता है। मनिका अपने चैनल की नई रिपोर्टर अमृता (राशि खन्ना) को गोधरा भेजती है, ताकि वह अपनी रिपोर्ट को पुख्ता कर सके और राज्य सरकार पर दोष मढ़ सके। अमृता को समर की रिपोर्ट का वीडियो मिलता है, और वह उसे अपने साथ गोधरा ले जाने के लिए मनाती है। इस प्रकार, दोनों मिलकर गोधरा कांड की सच्चाई तक पहुंचते हैं और उन निर्दोष 59 लोगों के साथ हुई त्रासदी को दुनिया के सामने लाते हैं। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है?
विक्रांत मैसी ने समर कुमार के किरदार में बेहतरीन अभिनय किया है। उनकी संवाद अदायगी और भावनात्मक गहराई को देखकर लगता है कि वे इस भूमिका के लिए पूरी तरह से समर्पित थे। गोधरा कांड की सच्चाई को ढूंढने की उनकी जद्दोजहद को स्क्रीन पर महसूस किया जा सकता है। रिद्धि डोगरा ने भी अपने किरदार मनिका में प्रभावी अभिनय किया है, और उनकी भूमिका में गहरे नकारात्मक शेड्स हैं। राशि खन्ना ने अमृता के किरदार को ठीक-ठाक तरीके से निभाया है, हालांकि कुछ दृश्यों में उनकी भूमिका थोड़ी अधूरी लगती है। डायरेक्शन कैसा है?
धीरज सरना ने फिल्म का निर्देशन किया है और एक संवेदनशील मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया है। हालांकि, फिल्म के पहले भाग में स्क्रीनप्ले और स्टोरीलाइन में कुछ खामियां नजर आती हैं। कुछ हलके-फुल्के कॉमिक सीन्स बिना किसी कारण के डाले गए हैं, जो गंभीर मुद्दे के साथ मेल नहीं खाते। फिल्म का दूसरा भाग थोड़ी थ्रिल बढ़ाता है। लेकिन क्लाइमेक्स थोड़ा कमजोर लगता है। जैसा कि इस फिल्म का उद्देश्य 59 निर्दोष लोगों की हत्या का सच दर्शाना था, लेकिन अंत में दर्शकों को कोई नई जानकारी नहीं मिलती, जो पहले से मीडिया और अखबारों में देखी जा चुकी हो। कैसा है फिल्म का म्यूजिक?
फिल्म का संगीत साधारण है, और सिर्फ “राजा राम” गाना प्रभावशाली लगता है। बाकी संगीत ज्यादा ध्यान आकर्षित नहीं करता। फाइनल वर्डिक्ट, देखें या नहीं?
द साबरमती रिपोर्ट’ को वे दर्शक देख सकते हैं, जो गोधरा कांड के बारे में फिल्मी अंदाज में जानकारी पाना चाहते हैं। हालांकि, फिल्म अपने विषय के साथ न्याय करने में पूरी तरह सफल नहीं होती। इसकी कहानी और प्रस्तुति में कुछ कमियां हैं, लेकिन विक्रांत मैसी और रिद्धि डोगरा की शानदार अदाकारी इसे एक बार देखने लायक बना देती है। गुजरात दंगे से जुड़ी ये जानकारी पढ़ें.. —————————- इससे जुड़ी खबरें पढ़िए 1. ‘गोधरा कांड की आग में रोटियां सेंकीं गईं’:इस पर बनी फिल्म करने पर धमकियां; विक्रांत बोले- विरोधी मेरे नवजात बच्चे को भी नहीं छोड़ रहे 15 नवंबर को फिल्म रिलीज हो रही है- द साबरमती रिपोर्ट। यह फिल्म गोधरा कांड और उसके बाद हुए गुजरात दंगों पर आधारित है। ट्रेलर रिलीज के बाद फिल्म विवादों में भी है। फिल्म के लीड एक्टर विक्रांत मैसी को धमकियां मिल रही हैं। यहां तक कि विरोधी उनके 9 महीने के बच्चे को भी नहीं छोड़ रहे। उसके बारे में भी अनाप-शनाप बोल रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

