Thursday, March 19, 2026
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क्या हरियाणा की हार नहीं सह पा रही कांग्रेस?

वर्तमान में कांग्रेस हरियाणा की हार नहीं सह पा रही है! हरियाणा चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस नेताओं की ओर से इस बात पर आश्चर्य प्रकट किया जा रहा है कि ऐसा कैसे हो गया। हार के कारणों को भी पार्टी स्वीकार नहीं कर पा रही है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस आलाकमान भी खामोश है लेकिन सवाल यह है कि क्या उसे पता नहीं कि आखिर हरियाणा में हुआ क्या। यह किसी एक राज्य की कहानी नहीं, ऐसा पूर्व में कुछ और राज्यों में भी हो चुका है। इसका खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ा है। गांधी परिवार को भी यह पता है और बावजूद इसके शीर्ष नेतृत्व कोई ओर से कोई बड़ा फैसला नहीं हो सका। हरियाणा के नतीजों को समझने के साथ ही बाकी राज्यों में जो हुआ उसे भी समझना जरूरी है। बता दें कि जनता सब समझती है। यदि किसी को ऐसा लगता है कि पब्लिक नहीं समझ रही तो ऐसा सोचना बेमानी है। हरियाणा चुनाव की घोषणा के साथ ही पूरे राज्य में ऐसी चर्चा थी कि कांग्रेस पार्टी के भीतर गुटबाजी है। पार्टी के भीतर दो गुट बताए गए लेकिन एक तीसरा गुट भी खामोशी से इंतजार कर रहा था। टिकटों के बंटवारे के बाद गुटबाजी और बढ़ गई। इन सबके बीच हरियाणा में यह मैसेज क्लियर चला गया कि पार्टी किस ओर आगे बढ़ रही है। कांग्रेस की ओर से भले ही किसी का नाम सीएम पद के लिए नहीं लिया गया लेकिन भूपेंद्र सिंह हुड्डा अघोषित दावेदार हो गए। इधर कुमारी शैलजा भी अपनी दावेदारी से पीछे नहीं हट रही थीं।

गांधी परिवार को भी इस बात का एहसास हुआ कि आखिर वहां हो क्या रहा है। इस बीच राहुल गांधी और प्रियंका चुनावी मंच से भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कुमारी शैलजा को साथ दिखाने की कोशिश करते हैं। साथ दिखाने की कोशिश जो की गई वह पब्लिक के बीच वैसे ही गया और जनता भी इस बात को समझ रही थी कि कुछ तो बात है। इतना सब जानते हुए कांग्रेस आलाकमान की ओर से कोशिश जिस मंच से हुई वह काम नहीं आई। नतीजा अब सामने है। कारण कुछ और भी हो सकते हैं लेकिन पहले दिन से जिस बात को लेकर चर्चा थी उसकी चर्चा नतीजों के बाद भी है तो इसको आसानी से समझा जा सकता है।

पंजाब में कांग्रेस पहले ही हाथ जला चुकी थी। जिस नवजोत सिंह सिद्धू के लिए कैप्टन अमरिंदर को किनारे किया आज वह राजनीति में ही नहीं। कैप्टन भी बागी हो गए। यानी कांग्रेस के दोनों नेता साथ नहीं। नवजोत सिंह सिद्धू का राजनीति से ही मोहभंग हो गया वह वापस क्रिक्रेट कमेंट्री की दुनिया में लौट आए हैं। चुनाव से ठीक पहले चरणजीत सिंह चन्नी को आगे किया जाता है लेकिन सीएम के दावेदार को लेकर जंग जारी रही। चुनाव से पहले कभी सिद्धू दिल्ली आकर प्रियंका गांधी से मिलते तो कभी पंजाब में कोई और कुछ कहता। जब नतीजे आए तो कांग्रेस यहां चुनाव बुरी तरह हार जाती है। झगड़े पर कोई बड़ा फैसला पार्टी नहीं ले सकी और इसका खामियाजा उसे उठाना पड़ा।

राजस्थान में क्या हुआ यह पूरे देश ने देखा। अशोक गहलोत और पायलट के बीच झगड़ा इस कदर एक वक्त बढ़ गया कि मध्य प्रदेश की याद पार्टी को राजस्थान में आने लगी। हालांकि मामला तब शांत हो गया लेकिन आखिरी वक्त पार्टी दो खेमों में दिखाई दी। कुछ विधायक और मंत्री सचिन पायलट तो बाकी अशोक गहलोत के साथ दिखाई दिए। दोनों ओर से बयानबाजी होती रही। इस पूरे झगड़े के बीच कांग्रेस आलाकमान केवल पर्यवेक्षक-पर्यवेक्षक खेलते रहे। चुनाव के बाद जब नतीजे सामने आए तो आशंका सच्चाई में बदल चुकी थी। एक और राज्य इस झगड़े की भेंट चढ़ चुका था।

मध्य प्रदेश का झगड़ा किसी से नहीं छिपा है। कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच जो कुछ चल रहा था उस पर गांधी परिवार मौन था। नतीजा यह हुआ कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी ही चुप्पी तोड़ दी और अब वह बीजेपी के साथ हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया की गिनती तब राहुल गांधी के बहुत करीबी नेताओं में हुआ करती थी। कांग्रेस पार्टी को इस झगड़े की बहुत बड़ी कीमत मध्य प्रदेश में चुकानी पड़ी। पार्टी टूट गई और ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कई विधायक बीजेपी में आ गए। वहां की सरकार भी चली गई। पार्टी आलाकमान देखता रह गया। उसके बाद भी जो चुनाव हुए तब भी दो गुट दिखाई पड़ा। एक बार फिर सबकुछ कमलनाथ के हवाले था और जब नतीजे आए तो पार्टी उम्मीद के विपरीत सत्ता से दूर रह गई।

राजनीति में ऐसा नहीं होगा यह संभव नहीं, दूसरे दलों में भी होता है। पूर्व में भी हुआ है और आगे भी होगा। गुटबाजी कहां नहीं है। बीजेपी के अंदर भी है। लेकिन कांग्रेस को इसकी कीमत हाल के दिनों में अधिक चुकानी पड़ी है। कांग्रेस आलाकमान खासकर राहुल गांधी ऐसे झगड़ों पर कोई बड़ा फैसला क्यों नहीं कर पाते। लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी के पक्ष में जो माहौल बना था आखिर वह कैसे एक झटके में हिल गया। हरियाणा में जिस बात से डरकर किसी का नाम आगे नहीं बढ़ाया उसके बावजूद उसका कोई फायदा नहीं मिला। पार्टी या तो नाम मजबूती से आगे बढ़ाती या फिर मजबूती से इस बात को कहती कि चुनाव के बाद ही तय होगा। कोई तीसरा भी हो सकता है। लेकिन कांग्रेस पूर्व की तरह यहां भी देखती रही।

यह कहानी सिर्फ इन्हीं राज्यों की नहीं हिमाचल और कर्नाटक के अंदर भी क्या चल रहा है यह सबको पता है। बावजूद इसके कांग्रेस नेतृत्व खामोश है। कड़े और बड़े फैसले लेने से पार्टी क्यों हिचकती रही है और वह भी तब जब एक के बाद एक राज्य उसी झगड़े की भेंट चढ़ रहे हैं। हार स्वीकार नहीं करने से क्या बात बनेगी, पार्टी को इस ओर भी सोचने की जरूरत है।

 

क्या आने वाले समय में अपना राजनीतिक डेब्यू करने वाली है प्रियंका गांधी?

अब आने वाले समय में प्रियंका गांधी अपना राजनीतिक डेब्यू करने वाली है! चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र और झारखंड के साथ-साथ उपचुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इस बीच कांग्रेस ने केरल की वायनाड सीट से प्रियंका गांधी की उम्मीदवारी का औपचारिक ऐलान कर दिया है। प्रियंका गांधी पहली बार चुनावी मैदान में होंगी। इस सीट पर राहुल गांधी ने चुनाव जीता था। कांग्रेस ने जून में ही प्रियंका गांधी के वायवाड से चुनाव लड़ने की घोषणा की थी, जब उनके भाई राहुल गांधी ने यूपी में पारिवारिक सीट रायबरेली को बरकरार रखने के लिए यह सीट खाली कर दी थी। प्रियंका गांधी भले ही कभी चुनाव नहीं लड़ीं, लेकिन वो राजनीति में काफी पहले से सक्रिय हैं। प्रियंका गांधी ने 1999 में राजनीति में एंट्री ली थी, जब वो अपनी मां सोनिया गांधी के लिए चुनाव प्रचार करने उतरी थीं। इस दौरान उन्होंने पहली बार राजनीतिक मंच से बीजेपी उम्मीदवार अरुण नेहरू के खिलाफ प्रचार था। लेकिन इन 25 सालों में ऐसा कभी नहीं हुआ, जब प्रियंका गांधी ने चुनाव लड़ा हो। हालांकि उनके चुनाव लड़ने की कई बार चर्चा हुई। कांग्रेस समर्थक प्रियंका गांधी से यूपी में अपनी दादी और मां की विरासत को आगे बढ़ाने की आशा टिकाए हुए थे

प्रियंका गांधी अपनी सूझबूझ के लिए जानी जाती हैं। 2017 में यूपी विधानसभा में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन और सीट बंटवारे में प्रियंका गांधी ने बड़ी भूमिका निभाई। कांग्रेस ने यूपी चुनाव में 110 सीटों की मांग कर रही थी, जबकि अखिलेश यादव की पार्टी ने 100 सीटें देने की पेशकश की थी। जनवरी 2019 तक प्रियंका को पूर्वी यूपी में कांग्रेस का महासचिव बनाया गया था, जहां कांग्रेस के गढ़ अमेठी और रायबरेली हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने के बाद, सितंबर 2020 तक, उन्हें पूरे उत्तर प्रदेश की प्रभारी महासचिव नियुक्त किया गया था। हालांकि दिसंबर 2023 में संगठनात्मक फेरबदल में उनसे उत्तर प्रदेश का प्रभार छीन लिया गया, लेकिन वो पार्टी की महासचिव बनी रहीं।

प्रियंका गांधी वायनाड से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो गई हैं। लेकिन ये बस इतनी सी कहानी नहीं है। दरअसल कांग्रेस दक्षिण भारत खासतौर पर केरल में अपनी पैठ बढ़ाना चाहती है। पार्टी कर्नाटक और तेलंगाना में सत्ता में है और अपनी सहयोगी डीएमके के साथ तमिलनाडु की सत्ता पर काबिज है। उत्तर भारत के विपरीत, जहां बीजेपी की पकड़ मजबूत है, वहीं कांग्रेस दक्षिण में जीत हासिल करने की कोशिश में है। अगर प्रियंका गांधी वायनाड से जीतती हैं, जिसे कांग्रेस के लिए सुरक्षित सीट माना जाता है, तो यह पहली बार होगा जब नेहरू-गांधी परिवार के तीन सदस्य एक साथ संसद में होंगे। पहली बार राहुल और प्रियंका गांधी लोकसभा में और सोनिया गांधी राज्यसभा में होंगी।

बता दे कि हरियाणा चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस नेताओं की ओर से इस बात पर आश्चर्य प्रकट किया जा रहा है कि ऐसा कैसे हो गया। हार के कारणों को भी पार्टी स्वीकार नहीं कर पा रही है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस आलाकमान भी खामोश है लेकिन सवाल यह है कि क्या उसे पता नहीं कि आखिर हरियाणा में हुआ क्या। यह किसी एक राज्य की कहानी नहीं, ऐसा पूर्व में कुछ और राज्यों में भी हो चुका है। इसका खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ा है। गांधी परिवार को भी यह पता है और बावजूद इसके शीर्ष नेतृत्व कोई ओर से कोई बड़ा फैसला नहीं हो सका। हरियाणा के नतीजों को समझने के साथ ही बाकी राज्यों में जो हुआ उसे भी समझना जरूरी है।

जनता सब समझती है। यदि किसी को ऐसा लगता है कि पब्लिक नहीं समझ रही तो ऐसा सोचना बेमानी है। हरियाणा चुनाव की घोषणा के साथ ही पूरे राज्य में ऐसी चर्चा थी कि कांग्रेस पार्टी के भीतर गुटबाजी है। पार्टी के भीतर दो गुट बताए गए लेकिन एक तीसरा गुट भी खामोशी से इंतजार कर रहा था। टिकटों के बंटवारे के बाद गुटबाजी और बढ़ गई। सालों में ऐसा कभी नहीं हुआ, जब प्रियंका गांधी ने चुनाव लड़ा हो। हालांकि उनके चुनाव लड़ने की कई बार चर्चा हुई। कांग्रेस समर्थक प्रियंका गांधी से यूपी में अपनी दादी और मां की विरासत को आगे बढ़ाने की आशा टिकाए हुए थे।इन सबके बीच हरियाणा में यह मैसेज क्लियर चला गया कि पार्टी किस ओर आगे बढ़ रही है। कांग्रेस की ओर से भले ही किसी का नाम सीएम पद के लिए नहीं लिया गया लेकिन भूपेंद्र सिंह हुड्डा अघोषित दावेदार हो गए। इधर कुमारी शैलजा भी अपनी दावेदारी से पीछे नहीं हट रही थीं।

 

शादी का लहंगा खरीदने जा रहे हैं? अगर आप चीज़ों का ध्यान नहीं रखेंगे तो आप मुसीबत में पड़ सकते हैं

शादी के दिन में एक महीना बचा है? हर दुल्हन अपनी शादी के दिन सबसे अलग दिखना चाहती है। और उस सपने को पूरा करने के लिए सैलून जाएं और फेशियल, क्लीनअप, बोटोक्स… और क्या-क्या पर हजारों रुपए खर्च कर दें! आप चाहे सैलून में कितने भी ब्यूटी ट्रीटमेंट के लिए जाएं, परमानेंट ज़ेला नहीं आती। त्वचा को मुलायम, मुलायम और चमकदार बनाने के लिए त्वचा की अंदर से मरम्मत की जरूरत होती है। आपकी शादी से पहले की त्वचा का रंग वापस लाने के लिए आपको अपनी दैनिक दिनचर्या में कुछ चरणों का पालन करना होगा। तभी आपकी त्वचा खास दिन पर बाकी सभी की तुलना में अधिक चमकदार दिखेगी।

त्वचा का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए क्या करें?

1) शादी का दिन आने से पहले घर पर कई बार फेशियल कराना चाहिए। फेशियल से रक्त संचार बेहतर होता है। त्वचा चमकती है. लेकिन सोच रही हूं कि फेशियल क्या करूं? अगर आपके घर में मुल्तानी मिट्टी है तो आप इसे आज़मा सकते हैं। आप मुल्तानी मिट्टी में थोड़ा सा दूध और शहद मिलाकर फेशियल कर सकती हैं। त्वचा की रंगत निखारने के लिए आप कुछ घरेलू फेस पैक का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

2) मौसम बदलने पर त्वचा रूखी हो जाती है। त्वचा पर मृत कोशिकाएं जमा हो जाती हैं। इस समय चेहरे पर जमा कोशिकाओं को साफ करना जरूरी है। सप्ताह में कम से कम दो बार शहद, जई और खट्टे दही का मिश्रण लगाएं। इसके बाद कुछ देर तक अपने चेहरे की मसाज करें। मृत कोशिकाएं हट जाएंगी और त्वचा की चमक लौट आएगी। सुबह नहाने के बाद मॉइस्चराइजर लगाना न भूलें। बाहर जाते समय सनस्क्रीन का प्रयोग अवश्य करना चाहिए।

3) सिर्फ सुंदरता का अभ्यास करना ही जरूरी नहीं है, बल्कि खान-पान पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी है। देखें कि आप सुबह से रात तक क्या खाते हैं। इस समय विटामिन डी और विटामिन सी से भरपूर भोजन करना चाहिए। दैनिक आहार में खट्टा दही, सब्जियां, मौसमी फल शामिल करें।

4) त्वचा को अंदर से स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा तरीका है अधिक पानी पीना। दिन में ढाई से तीन लीटर पानी पियें। आप काम के दौरान नियमित रूप से ‘डिटॉक्स वॉटर’ पी सकते हैं। रात को सोने से पहले एक जग पानी में खीरा, पुदीना, नींबू के टुकड़े डाल दें। अगले दिन उस पानी को पूरे दिन थोड़ा-थोड़ा करके पीने का अभ्यास करें। दिन में ढाई से तीन लीटर पानी पियें।

5) शादी से पहले कई तरह के विचार आते हैं. जिम्मेदारियां बहुत हैं. सुनिश्चित करें कि आप इस दौरान पर्याप्त नींद लें। अन्यथा जिले का कभी विकास नहीं हो पायेगा. बहुत दिनों बाद आप शादी में अपनी पसंद से खरीदा हुआ लहंगा पहनेंगी। लेकिन क्या आपने सोचा है कि लहंगा खरीदने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है? हालांकि अभी भी समय है, तय कर लें कि आपकी शादी के दिन का लुक कैसा होगा। यदि आवश्यक हो, तो आप विभिन्न ब्लॉगों और पत्रिकाओं की मदद ले सकते हैं।

आजकल डिजाइनरों से सलाह लेने का चलन काफी बढ़ गया है। वे दुल्हन को देखकर उसे बताते हैं कि उस पर किस रंग या स्टाइल का लहंगा अच्छा लगेगा। इसलिए अगर आप यह तय करने में असमंजस में हैं कि क्या पहनना है, तो किसी डिजाइनर से संपर्क करें। सर्दियों में शादी का जोड़ा मुलायम नहीं बल्कि थोड़ा भड़कीला होता है। इसलिए कोशिश करें कि आप हल्के रंग जैसे पीच, गुलाबी, पीला आदि के बजाय गहरे रंग के लहंगे पहनें। दूसरी ओर, आपके माता-पिता का शौक अपनी ‘छोटी’ बेटी को शादी के दिन लाल बनारसी परिधान में देखना है। इस समय आप शादी में लहंगा पहनना चाहती हैं। क्या यही तरीका है? मुश्किल आसन बनारसी सिल्क लहंगा। इसके अलावा बनारसी साड़ी को कभी-कभी लहंगे के रूप में भी पहना जाता है। तो शादी के परिधानों की लिस्ट में बनारसी को जरूर शामिल किया जा सकता है। दोनों पक्षों की इच्छा का सम्मान किया जाएगा. पर्याप्त समय लेकर लहंगा चुनें। लहंगे की नेक कटिंग, स्लीव साइज, हेम का हेम, बैक डिजाइन सही है या नहीं, इस पर ध्यान दें। हाल ही में ऑनलाइन शॉपिंग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। लहंगा खरीदने से पहले दूसरे खरीदारों के रिव्यू जरूर जांच लें। केवल कैटलॉग में दी गई तस्वीरों के आधार पर लहंगा न खरीदें। सबसे पहले यह जांच लें कि आप जिस वेबसाइट से लहंगा खरीद रही हैं वह विश्वसनीय है या नहीं। ऐसे में किसी प्रतिष्ठित वेबसाइट से खरीदारी करना बेहतर है, धोखाधड़ी का खतरा कम होता है।

विमान में बम विस्फोट की फर्जी धमकी की जांच के लिए पुलिस ने पिता और नाबालिग बेटे को बुलाया

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48 घंटे से भी कम समय में देश के अलग-अलग हिस्सों में 10 विमानों पर बमबारी की गई है. पूरे देश में हंगामा मचा हुआ है. मूल रूप से, यह बम एक्स हैंडल का उपयोग करके तैनात किया गया है। सोमवार को मुंबई एयरपोर्ट पर तीन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को बम से उड़ाने की धमकी मिली। घटना के बाद पुलिस ने छत्तीसगढ़ से एक किशोर, उसके पिता और एक अन्य व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुलाया।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सोशल मीडिया एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर किए गए एक पोस्ट में बम से हमले की धमकी दी गई थी. इसके बाद तीनों लोगों को बुलाया गया. पिता-पुत्र के अलावा तीसरा शख्स छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव का रहने वाला है. पुलिस पोस्ट देने वाले के एक्स हैंडल को भी खंगाल रही है। राजनांदगांव के पुलिस अधीक्षक मोहित गर्ग ने कहा, ”सोमवार को ओई एक्स हैंडल से एयर इंडिया की मुंबई-न्यूयॉर्क उड़ान और इंडिगो की मस्कट और जेद्दा की दो उड़ानों में बम की धमकी दी गई थी। इसके चलते पहली फ्लाइट को नई दिल्ली डायवर्ट किया गया। अन्य दो उड़ानें भी निर्धारित समय से काफी देर से उड़ान भरीं। घटना की जांच के लिए मुंबई पुलिस की एक टीम सोमवार को राजनांदगांव पहुंची. 17 वर्षीय, उसके पिता और एक तीसरे व्यक्ति को बाद में बुलाया गया। तीनों को पूछताछ के लिए मुंबई बुलाया गया है.

संयोग से 48 घंटे से भी कम समय में देश के अलग-अलग हिस्सों में 10 विमानों पर बमबारी की गई है. पूरे देश में हंगामा मचा हुआ है. मूल रूप से, यह बम एक्स हैंडल का उपयोग करके तैनात किया गया है। एक जांच अधिकारी ने कहा कि उनमें से कुछ खातों की पहचान पहले ही की जा चुकी है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, ”हमने कई अकाउंट की पहचान की है. वे बंद हैं. उन अकाउंट्स से बम की धमकी दी गई थी.” जांच अधिकारी ने यह भी बताया कि ये मैसेज लंदन समेत कई अन्य देशों से भेजे गए थे.

हालांकि, एक के बाद एक हवाई जहाजों में बम हमले की घटनाएं सामने आने से केंद्र हिल गया है. नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बुधवार को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है. वहां इस मामले पर चर्चा होगी. नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो ने कहा कि घटना की जांच चल रही है। अपराधियों की पहचान कर जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जायेगा.

दिल्ली के कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन पर बम फैलाने के आरोप में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है. कथित तौर पर युवक ने शराब पीते हुए सीआईएसएफ के कंट्रोल रूम को फोन किया और बताया कि वहां बम है. घटना का खुलासा सोमवार को हुआ.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रविवार को युवक ने फोन किया कि कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन पर बम है. स्वतंत्रता दिवस से दो दिन पहले बम हमले की खबर से पुलिस हिल गई। मेट्रो सुरक्षा गार्डों ने स्टेशन की तलाशी शुरू कर दी। लेकिन तलाशी में कुछ नहीं मिला. जांच करने पर पुलिस को एहसास हुआ कि किसी ने फर्जी बम की धमकी फैलाई है। इसके बाद फोन की लोकेशन ट्रैक की गई और आरोपी को पकड़ लिया गया. गिरफ्तार 26 वर्षीय युवक उत्तर प्रदेश का रहने वाला है. उससे पूछताछ के बाद पुलिस ने बताया कि युवक ने शराब पीने के बाद सीआईएसएफ कंट्रोल रूम में फोन किया था. मंगलवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. इस बीच, फर्जी बम की धमकी वाली खबर फैलाने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया।

एक छात्र ने मौज-मस्ती के लिए स्कूल में बमबाजी कर दी. ऐसी ही एक घटना दिल्ली के एक स्कूल में घटी. पिछले बुधवार को मथुरा रोड इलाके के एक स्कूल में ईमेल के जरिए बमबारी की गई थी. जांच के बाद पुलिस को पता चला कि ईमेल उसी स्कूल के 16 साल के छात्र ने भेजा था. उन्होंने जिरह में कहा कि छात्र ने सिर्फ मनोरंजन के लिए ऐसी हरकत की. छात्र के मुर्गी मामले ने जांचकर्ताओं को चौंका दिया।

पिछले बुधवार को ईमेल के जरिए दिल्ली के स्कूल में बम विस्फोट किया गया था. जैसे ही ईमेल स्कूल अधिकारियों के ध्यान में आया, पुलिस को सूचित किया गया। स्कूल के करीब 4,000 छात्रों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया. पुलिस ने स्कूल में तलाशी शुरू कर दी. लेकिन कुछ नहीं मिला. पुलिस को एहसास हुआ कि नकली बम की धमकी फैलाई गई है। जांच के बाद पुलिस ने स्कूली छात्र से पूछताछ की। तभी छात्र ने कहा कि यह पूरा मामला उसके दिमाग की उपज है। ऐसा उसने मनोरंजन के लिए किया.

देश में फर्जी बम की अफवाहों की कई घटनाएं सामने आई हैं। कुछ महीने पहले दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर फर्जी बम होने की अफवाह के आरोप लगे थे. पुणे जाने वाली स्पाइसजेट की एक फ्लाइट में बम होने की धमकी दी गई। जिसके कारण विमान रुक गया. तलाशी अभियान शुरू हुआ. लेकिन कुछ नहीं मिला. बाद में, जांचकर्ता ताजजाब जंगल में उतर गए। गर्लफ्रेंड के चक्कर में फ्लाइट लेट होने पर 3 युवकों ने रची बम की साजिश। उनमें से एक ने हवाईअड्डे को फोन किया। और यहीं पर हुलस्थुल गिरता है। उन 3 युवकों के कारनामे ने मुझे आमिर खान की मशहूर फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ की याद दिला दी.

जयशंकर पाकिस्तान में हैं, लेकिन 24 घंटे से भी कम समय के लिए रहेंगे पाकिस्तान

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कुल मिलाकर जयशंकर 24 घंटे से भी कम समय के लिए पाकिस्तान में रहेंगे. लेकिन राजनयिक खेमे का मानना ​​है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के निमंत्रण के जवाब में इस्लामाबाद जाने के फैसले से परोक्ष रूप से भारत की ओर से सकारात्मक संदेश गया है. विदेश मंत्री एस जयशंकर का विमान मंगलवार शाम को इस्लामाबाद के नूर खान एयरबेस पर पहुंचा। एयरबेस पर मौजूद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने हाथ मिलाया, हाथों में फूल लिए दो लड़के और लड़कियां। इस अवसर पर एससीओ शासनाध्यक्षों के सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।

लेकिन राजनयिक खेमे के मुताबिक नौ साल के लंबे अंतराल के बाद किसी भारतीय विदेश मंत्री की पाकिस्तानी धरती की यात्रा कूटनीति के स्थायी कैलेंडर में शामिल हो गई. आज रात, जयशंकर अन्य एससीओ देशों के नेताओं के साथ पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शाहबाज़ शरीफ द्वारा आयोजित रात्रिभोज में शामिल हुए।

कुल मिलाकर जयशंकर 24 घंटे से भी कम समय के लिए पाकिस्तान में रहेंगे. लेकिन राजनयिक खेमे का मानना ​​है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के निमंत्रण के जवाब में इस्लामाबाद जाने के फैसले से परोक्ष रूप से भारत की ओर से सकारात्मक संदेश गया है. यहां तक ​​कि वे इस मुद्दे को ‘आश्वस्त करने वाले कदम’ के तौर पर भी दिखाना चाहते हैं. कह रहे हैं, गेंद अब पाकिस्तान के पाले में है. इस संबंध में जयशंकर का स्पष्ट बयान है, ‘साउथ ब्लॉक इस्लामवाद के सकारात्मक और नकारात्मक व्यवहार का मुकाबला करने के लिए तैयार है।’

यह भी याद दिलाया जाता है कि जिस देश में सुषमा स्वराज 2015 में अफगानिस्तान पर सम्मेलन में भाग लेने गई थीं, आज उस देश की स्थिति उससे कहीं ज्यादा खराब है, क्योंकि पाकिस्तान दशकों से विदेशी ऋण पर निर्भर है और वित्तीय सुधारों के बिना घिरा हुआ है। चीन ने पाकिस्तान का इस्तेमाल अपने भू-रणनीतिक हितों के लिए किया है। उस देश की किसी भी सरकार ने सीमा पार आतंकवाद को एक प्रमुख राज्य नीति के रूप में उपयोग करने में पाकिस्तान के अपने शेयर बाजार पर दबाव पर विचार नहीं किया है। ऐसे में पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने मार्च में भारत-पाकिस्तान व्यापार को बहुत ढीले ढंग से आगे बढ़ाने का आह्वान किया था. लेकिन जहां रिश्ते इतने कड़वे हों, वहां विदेश मंत्रालय को लगा कि ऐसे शब्दों को हवा में उछालने का कोई मतलब नहीं है.

फिर भी, शरीफ़ के बुलावे पर इस्लामाबाद पहुँचने के लिए कम समय में लंबी यात्रा क्यों मानी जाती है? ऐसा इसलिए क्योंकि ठीक डेढ़ साल पहले गोवा में एससीओ विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में जयशंकर की पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री बिलाल भुट्टो से तीखी बहस हो गई थी. भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया राजनयिक आदान-प्रदान में यह सबसे निचला बिंदु था। भुट्टो ने पत्रकारों से बातचीत में एससीओ कार्यक्रम छोड़ दिया और भारत की आलोचना करने लगे। मोदी ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया.

जयशंकर ने भी बार से निकलने के बाद कुछ नहीं कहा. उनका बयान था, ‘वह (भुट्टो) आतंकी फैक्ट्री के प्रवक्ता और आयोजक भी हैं. यही अब पाकिस्तान की मुख्यधारा है. आतंकवाद के शिकार लोग कभी भी एक मेज पर बैठकर आतंकवाद के आकाओं के साथ आतंकवाद पर चर्चा नहीं करते।” उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, ”पाकिस्तान की विश्वसनीयता उसके विदेशी मुद्रा भंडार की तुलना में तेजी से गिर रही है।”

विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक जयशंकर फिलहाल खुले दिमाग से इस्लामाबाद गए हैं. लेकिन अगर एससीओ शिखर सम्मेलन से पहले, बाद में या उसके दौरान कश्मीर या आतंकवाद के बारे में कोई भी उत्तेजक टिप्पणी आती है, तो भारत चुपचाप नहीं सुनेगा। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा या पिछले साल एससीओ सम्मेलन में भारत ने जिस तरह इस संबंध में अपना रुख स्पष्ट किया, उससे यह संकेत स्पष्ट है।

कल सुबह इस्लामाबाद के जिन्ना कन्वेंशन सेंटर में एससीओ सदस्य देशों के सरकारी नेताओं की बैठक से पहले नई दिल्ली के पास कई राजनयिक लक्ष्य हैं। सबसे पहले, विदेश मंत्री एस जयशंकर कल इस बहुपक्षीय मंच का उपयोग मध्य एशिया के साथ वाणिज्यिक और रणनीतिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए करेंगे। इसके अलावा वह दुनिया के दक्षिणी हिस्से में गरीब देशों के नेतृत्व की मांग भी जोरदार तरीके से उठाएंगे. वहीं, युद्ध विरोधी संदेश के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संघर्ष को सुलझाने के तरीकों पर बात करेंगे.

राजनयिक सूत्रों के अनुसार, यह एससीओ समूह इस मायने में अनोखा है कि इसमें ब्रिक्स की तरह ही चीन भी प्रतिद्वंद्वी है। इनमें रूस, पाकिस्तान समेत मध्य एशियाई देश हैं. जैसा कि बीजिंग कई सामाजिक-आर्थिक पहलों के माध्यम से एससीओ क्षेत्र पर हावी होना चाहता है, नई दिल्ली भी डिजिटल जन बुनियादी ढांचे, फिनटेक, स्वास्थ्य सेवाओं और नए उद्यमों में अपनी विशेषज्ञता का विपणन करके प्रभाव बढ़ाना चाह रही है।

जयशंकर गरीब देशों (ग्लोबल साउथ) के संकट और प्राथमिकताओं पर भी प्रकाश डालेंगे। सरब को भोजन, ईंधन और उर्वरक सुरक्षा की चिंता रहेगी। यह भी ज्ञात है कि विदेश मंत्री यूरेशिया और भारत के साथ गलियारों में एक परिपक्व आतंकवाद विरोधी नीति तैयार करने में शामिल होंगे।

2005 में एससीओ का पर्यवेक्षक राज्य बनने के बाद भारत ने समूह की मंत्रिस्तरीय बैठकों में नियमित रूप से भाग लेना शुरू कर दिया। यूरेशियन क्षेत्र में सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर जोर दिया गया। इस बार इस्लामाबाद में सम्मेलन में विदेश मंत्री की भागीदारी से भारत ने यह संदेश साफ कर दिया है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता, व्यापार सहयोग और आतंकवाद-निरोध के मुद्दों पर एक अनुकरणीय प्रतिनिधि बनना चाहता है.

चूंकि इस बार इस सम्मेलन का मेजबान देश पाकिस्तान है, इसलिए अगले 24 घंटों तक भारत-पाकिस्तान की हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी. लेकिन कूटनीतिक हलकों में यह बात भी याद है कि सम्मेलन में चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग भी मौजूद हैं. लाल सेना पिछले पांच साल से सीमा पर बैठी है. बार-बार कूटनीतिक और सैन्य वार्ता

‘डीप कट’ या ‘हॉल्टर नेक’ पहनना चाहती हैं? सितारे जैसी चिकनी, चिकनी पीठ कैसे पाएं?

किसी त्योहार, शाम की पार्टी में खूबसूरत साड़ी या डिजाइनर लहंगा पहनें, ओपन बैक ब्लाउज हर आउटफिट को और भी खूबसूरत बना देता है। और अगर पीठ बेदाग और खूबसूरत नहीं होगी तो ड्रेस सही नहीं बनेगी. ऑफ-शोल्डर गाउन, या खुली पीठ वाले हॉल्टर ब्लाउज, मिठास में परम हैं। सितारों जैसी चिकनी पीठ पाने के लिए पेलाबू को इसका भी ख्याल रखना होगा। सिर्फ चेहरे का ही ख्याल नहीं रखना चाहिए बल्कि हाथ, पैर और पीठ का भी ख्याल रखना चाहिए। और निःसंदेह सबसे उपेक्षित हिस्सा, पीठ। किसी त्योहार, शाम की पार्टी में खूबसूरत साड़ी या डिजाइनर लहंगा पहनें, ओपन बैक ब्लाउज हर आउटफिट को और भी खूबसूरत बना देता है। और अगर पीठ बेदाग और खूबसूरत नहीं होगी तो ड्रेस सही नहीं बनेगी. जानें कि बैकलेस, हॉल्टर या डीप कट ड्रेस में खुद को ग्लैमरस दिखाने के लिए अपनी पीठ की देखभाल कैसे करें।

वैक्सिंग

निश्चित रूप से हाथ और पैर या चेहरे पर बाल? पीछे की ओर भी देखें. पीठ के अनचाहे बाल न केवल भद्दे होते हैं बल्कि पीठ को असमान भी दिखाते हैं। आप लिक्विड वैक्स या हेयर रिमूवल क्रीम से पीठ को साफ रख सकते हैं। आवश्यकतानुसार या हर दो महीने में एक बार वैक्सिंग करना पर्याप्त है।

पीठ की मालिश

रोजाना धूल, मिट्टी, तेल जमा हो जाता है और पीठ काली पड़ जाती है। हालांकि हर दिन नहाने के दौरान लूफै़ण से पूरे शरीर को साफ करना संभव है, लेकिन पूरी पीठ तक नहीं पहुंचा जा सकता। इसलिए रोजाना अपनी पीठ को लंबे हैंडल वाले ब्रश से रगड़ें। यह मसाज और स्क्रबिंग दोनों करेगा।

नहाने के बाद मॉइस्चराइज़ अवश्य करें। ऐसे में अगर आप नहीं पहुंच सकते तो साफ मुलायम ब्रश की मदद ले सकते हैं।

काले धब्बे

यदि आप धूप से झुलस जाते हैं या हमेशा कपड़ों से ढके रहते हैं, तो अक्सर पीठ पर काले धब्बे दिखाई देने लगते हैं। इसलिए नियमित स्क्रबिंग जरूरी है। 1 कप चीनी में 1 चम्मच नींबू का रस और 6 चम्मच बादाम का तेल या जैतून का तेल मिलाएं। इस स्क्रब को पहले से नमीयुक्त पीठ पर लगाएं। आप चीनी को दूध, शहद या खट्टे दही के साथ मिलाकर भी स्क्रब कर सकते हैं। पांच मिनट तक मसाज करें और अच्छे से धो लें।

पीठ पर मुँहासे

अगर आपको पीठ पर मुंहासे या रैशेज की समस्या है तो आप टी ट्री ऑयल का इस्तेमाल कर सकते हैं। आप चाय के पेड़ के तेल को नारियल के तेल के साथ मिलाकर सोने से पहले मुंहासों पर लगा सकते हैं। आप नहाने के पानी में एसेंशियल ऑयल की कुछ बूंदें मिला सकते हैं। यह मुंहासों की समस्या को भी दूर कर सकता है.

त्वचा की देखभाल में एक कदम एक्सफोलिएशन है। यह विधि मृत त्वचा कोशिकाओं को हटा देती है। मृत त्वचा की परत को हटाकर त्वचा सांस ले सकती है। जिला आता है. त्वचा को वापस पाने के लिए बहुत से लोग प्रसिद्ध सौंदर्य प्रसाधनों का उपयोग करते हैं। कभी-कभी वह फेशियल करवाने के लिए पार्लर में घुस जाते हैं। कीमत पर खरीदी गई क्रीम का नियमित प्रयोग करें। लेकिन सब अस्थायी है. कुछ दिनों के बाद त्वचा अपनी पुरानी स्थिति में आ जाती है। तो ऐसे में सौंदर्य प्रसाधनों की जगह कुछ सब्जियां भरोसेमंद बन सकती हैं। अगर आप इसे अपने पैरों पर रखेंगे तो त्वचा को सामान्य होने में देर नहीं लगेगी।

1) पके पपीते का प्रयोग अक्सर सौंदर्य प्रसाधनों में किया जाता है। कई लोग पके पपीते से फेशियल भी करते हैं। कुछ कच्चे पपीते मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाने में सबसे प्रभावी होते हैं। पपीते को उबाल कर पीस लीजिये. इसके बाद इसे अपने चेहरे पर लगाएं. कम से कम दस मिनट के लिए छोड़ दें. जब यह थोड़ा सूख जाए तो इसे अच्छे से रगड़कर चेहरा धो लें।

2) खीरे का फेशियल कोई नई बात नहीं है। हालाँकि, खीरा मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाने में भी बहुत प्रभावी है। खीरे के टुकड़े को चेहरे पर अच्छे से रगड़ा जा सकता है. अगर आप इसे लगातार पांच मिनट तक करेंगे तो यह अच्छा काम करेगा। एक काम और किया जा सकता है. आप खीरे और टमाटर को मिलाकर अपने चेहरे पर लगा सकते हैं. कुछ देर बाद जब यह मिश्रण चेहरे पर सूख जाए तो इसे रगड़कर हटा दें। इसके बाद चेहरे को गीले टिश्यू से पोंछ लें। त्वचा चमक उठेगी.

3) अगर किसी बंगाली के घर में आलू हों तो कितनी समस्याएं हल हो जाती हैं। दोपहर के भोजन से लेकर नाश्ते तक, बस कुछ आलू ही पर्याप्त हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आलू त्वचा की देखभाल के लिए भी अच्छा होता है? – आलू को बारीक कद्दूकस कर लीजिए और उस पर थोड़ा सा नमक और हल्दी डाल दीजिए. कुछ देर बाद आलू के चिप्स को अपने चेहरे पर रगड़ें। पांच मिनट तक रगड़ते रहें. इसके बाद अपने चेहरे को ठंडे पानी से धो लें. त्वचा से मृत कोशिकाएं हट जाएंगी.

अर्जेंटीना की जर्सी में मेसी की हैट्रिक वापस, ब्राजील भी जीता, रोनाल्डो को नहीं मिला गोल

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कोपा अमेरिका जीतने के बाद लियोनेल मेसी पहली बार अर्जेंटीना की जर्सी में खेले. उन्होंने हैट्रिक लगाकर उस मैच को यादगार बना दिया. उन्होंने दो गोल किये. ब्राज़ील ने भी बड़े अंतर से जीत हासिल की. कोपा अमेरिका जीतने के बाद लियोनेल मेसी पहली बार अर्जेंटीना की जर्सी में खेले. उन्होंने हैट्रिक लगाकर उस मैच को यादगार बना दिया. उन्होंने दो गोल किये. विश्व कप क्वालीफाइंग मैच में अर्जेंटीना ने बोलीविया को 6-0 से हराया। ब्राज़ील ने भी बड़े अंतर से जीत हासिल की. हालांकि, क्रिस्टियानो रोनाल्डो की पुर्तगाल यूईएफए नेशंस लीग में फंस गई।

मेस्सी चोट के कारण कोपा के बाद देश के लिए नहीं खेल सके। वह क्लब इंटर मियामी के लिए कुछ मैचों में नहीं खेल सके। हाल ही में क्लब के लिए वापसी की। देश की जर्सी में भी उनके पैरों से तीन गोल निकले.

मेसी ने बोलीविया के खिलाफ 19 मिनट में पहला गोल किया. लुटारो मार्टिनेज ने मार्सेलो सुआरेज से गेंद छीनकर मेस्सी को दे दी। मेस्सी ने बेहतरीन फिनिश के साथ गोल किया। 43वें मिनट में मेसी ने मार्टिनेज के साथ जवाबी हमला करते हुए गोल किया। तीन मिनट बाद जूलियन अल्वारेज़ ने गोल किया।

ब्रेक के बाद निकोलस ओटामेंडी के गोल को ऑफसाइड के कारण खारिज कर दिया गया। हालांकि चौथे गोल के लिए ज्यादा देर इंतजार नहीं करना पड़ा. थियागो अल्माडा ने नाहुएल मोलिना के पास पर गोल किया। मेसी ने 84वें मिनट में अपना दूसरा गोल किया. दो मिनट बाद उन्होंने हैट्रिक पूरी की. मेसी की हैट्रिक देखकर कई फैंस रो पड़े.

दूसरी ओर, डोरिवल जूनियर के कोच बनने के बाद ब्राजील ने पहली बार किसी मैच में दबदबा बनाया। वे हाल में पराग्वे और वेनेज़ुएला जैसी टीमों को नहीं हरा सके. हालाँकि, पिछले मैचों में चिली को 4-0 से और मंगलवार रात को पेरू को हराने के बाद टीम काफी राहत महसूस कर रही है। रफिन्हा ने पेनाल्टी से दो गोल किये.

सब्स्टीट्यूट एंड्रियास परेरा ने ब्रासीलिया के नेशनल स्टेडियम में 60,000 दर्शकों को प्रभावित करने के लिए तीसरा गोल किया। मैच में एक और बदलाव लुइस एनरिक ने देर से किया। रफिन्हा ने मैच के बाद कहा, ”हमने दोनों मैचों में ताकत दिखाई. लेकिन हम अभी भी एक आदर्श खेल से दूर हैं।” वहीं रोनाल्डो स्कॉटलैंड के खिलाफ गोल नहीं कर सके. आखिरी मिनट में ब्रूनो फर्नांडिस की फ्री किक बचाने के बाद स्कॉटिश गोलकीपर क्रेग गॉर्डन हीरो रहे। हालाँकि, पुर्तगाल A1 ग्रुप में शीर्ष पर रहा।

यह खेल अफ़्रीकी कप ऑफ़ नेशंस में भी था। अंगोला, मिस्र, सेनेगल और डीआर कांगो ने अगले साल की प्रतियोगिता के लिए अर्हता प्राप्त की।

उन्हें अमेरिका में खेलते हुए काफी समय हो गया है. पेरिस सेंट-जर्मेन के बारे में सुनकर लियोनेल मेसी आज भी गुस्सा हो जाते हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने एक बार फिर अपने पूर्व क्लब पर दुख जताया। मेसी के मूड से कई लोग हैरान हैं.

पूर्व मेजर लीग सॉकर स्टार ब्रेख्त डेजागर ने हाल ही में मेस्सी का साक्षात्कार लिया। मेस्सी से पूछा गया कि क्या पेरिस की तुलना में मियामी में उनका समय बेहतर गुजर रहा है।

मेसी ने जो कहा उसका जवाब खुद डेगेगुर ने दिया. उन्होंने कहा, ”वह आश्चर्यचकित थे. मैंने उसे बताया कि मैंने पार्स डेस प्रिंसेस में टूलूज़ के लिए उसके क्लब के खिलाफ खेला है। उसे मेरी याद नहीं है. लेकिन मेरा बचपन का सपना सच हो गया। क्योंकि मेस्सी हमेशा से मेरे पसंदीदा खिलाड़ी रहे हैं।”

डेज़ेगेरे ने कहा, “मेस्सी से दोबारा मिलना बहुत अच्छा रहा।” उन्होंने तब कहा था कि पीएसजी में उनका जीवन भयानक था। पेरिसवासियों के शुरुआती स्वागत के बावजूद, चैंपियंस लीग में विफलता के बाद मेसी को कई बुरी खबरों का सामना करना पड़ा। गेंद पकड़ने का मज़ाक उड़ाया जाएगा।” नेमार को पहले भी आलोचना का सामना करना पड़ा है. उन्होंने पेरिस में अपने समय की तुलना ‘नरक’ से की। नेमार ने पीएसजी छोड़ दिया और अब सऊदी अरब के अल हिलाल क्लब में खेलते हैं।

लेकिन लियोनेल मेस्सी पानी और कीचड़ से भरे मैदान में अर्जेंटीना की जर्सी पहनकर खेल रहे हैं! विश्व कप विजेता कप्तान ने वेनेजुएला के खिलाफ फंसने के लिए मैदान को जिम्मेदार ठहराया.

मेस्सी ने विश्व कप क्वालीफाइंग मैच खेला था। चोट से उबरने के बाद भी वह मैदान पर लौटे लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके. अर्जेंटीना बनाम वेनेज़ुएला मैच 1-1 से बराबरी पर ख़त्म हुआ. मेसी ने कहा, “घृणित पिच।” लगातार दो पास नहीं खेले जा सकते। मैदान पर इतना पानी है कि गेंद फंस रही है. ऐसे हालात में खेलना मुश्किल है.’ फील्ड से कोई मदद नहीं मिली. एक ऐसे मैदान की ज़रूरत थी जो खेलने लायक हो, खेलने लायक मौसम हो और गेंद घूम रही हो। क्या इसकी मांग नहीं की जा सकती है?”

अर्जेंटीना अटक गया लेकिन ब्राज़ील जीत गया। उन्होंने चिली को 1-2 से हराया. खेल शुरू होने के दो मिनट बाद चिली के एडुआर्डो वर्गास ने गोल करके टीम का नेतृत्व किया. हालांकि, पहला हाफ खत्म होने से पहले ब्राजील के इगोर जीसस ने गोल कर स्कोर बराबर कर दिया. विजयी गोल 89वें मिनट में आया। लुइज़ एनरिक ने गोल किया.

क्या भारत और मालदीव के रिश्ते आने वाले समय में और बेहतर होंगे?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या भारत और मालदीव के रिश्ते आने वाले समय में और बेहतर होंगे या नहीं! मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत की आर्थिक सहायता एवं लगातार समर्थन के लिए बृहस्पतिवार को आभार जताया। पत्नी साजिदा मोहम्मद के साथ भारत की पांच दिन की राजकीय यात्रा समाप्त कर वापस लौटे राष्ट्रपति ने मालदीव को, विशेष तौर पर मुश्किल समय में, आर्थिक सहायता देने और लगातार समर्थन करने के लिए भारत के प्रति आभार जताया। मुइज्जू ने एक प्रेस बयान में भारत की आर्थिक सहायता के लिए आभार व्यक्त किया, जिसमें पांच करोड़ अमरीकी डॉलर के ट्रेजरी बिल की मियाद को एक वर्ष बढ़ाना शामिल है। पदभार ग्रहण करने के बाद मुइज्जू की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के निमंत्रण पर यह पहली भारत यात्रा थी। यात्रा के दौरान, मुइज्जू ने राष्ट्रपति मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत सरकार के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें कीं।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि ये चर्चाएं मालदीव और भारत के बीच मैत्री और विकास साझेदारी को मजबूत करने पर केंद्रित थीं। भारत और मालदीव ने सोमवार को मुद्रा अदला-बदली को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए और वित्तीय संकट से जूझ रहे द्वीपसमूह राष्ट्र में बंदरगाहों, सड़क नेटवर्क, विद्यालयों और आवास परियोजनाओं के निर्माण के लिए विकास सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।प्रधानमंत्री मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू ने मालदीव में रुपे कार्ड की भी शुरुआत की, हनीमाधू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नये रनवे का उद्घाटन किया तथा द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की, जो पिछले वर्ष खराब हो गए थे। मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू को चीन के प्रति नरम रुख रखने के लिए जाना जाता है और पिछले साल नवंबर में शीर्ष पद के लिए निर्वाचित होने के बाद उन्होंने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए तुर्किये को चुना था।

दोनों पक्षों ने ‘व्यापक आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी के लिए एक दृष्टिकोण’ पर भी सहमति व्यक्त की, जो एक दस्तावेज है जो सहयोग के विभिन्न पहलुओं को समाहित करता है। वार्ता के बाद भारत ने हुलहुमाले में 700 सामाजिक आवास इकाइयां भी सौंपीं, जिनका निर्माण एक्जिम बैंक की क्रेता ऋण सुविधाओं के तहत किया गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने मालदीव को 40 करोड़ डॉलर की सहायता की भी घोषणा की। दोनों पक्षों ने 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की मुद्रा अदली-बदली के समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस कदम से मालदीव को वित्तीय चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। दोनों नेताओं ने स्वीकार किया कि यह द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक आर्थिक और समुद्री सुरक्षा भागीदारी में बदलने को लेकर सहयोग की एक नई रूपरेखा तैयार करने का उपयुक्त समय है। यह जन-केंद्रित, भविष्य-उन्मुख है और हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता बनाये रखने में एक आधार के रूप में काम करेगा।

मुइज्जू ने भारत की अपनी इस यात्रा के दौरान आगरा के साथ-साथ मुंबई और बंगलुरु की भी यात्रा की, जहां कई बैठकें और कार्यक्रम हुए। इस यात्रा के दौरान, साजिदा मोहम्मद ने भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) और बेंगलुरु में सेंट जोसेफ विश्वविद्यालय का दौरा किया, जहां से उन्होंने पढ़ायी की थी। जबकि दोनों राष्ट्र अगले वर्ष औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित करने की 60वीं वर्षगांठ के करीब पहुंच रहे हैं, मुइज्जू ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ-साथ राष्ट्रपति मुर्मू को मालदीव की राजकीय यात्रा पर आमंत्रित किया।

मुइज्जू ने पिछले साल ‘इंडिया आउट’ अभियान के तहत राष्ट्रपति चुनाव जीता था और नयी दिल्ली से इस साल मई तक द्वीपसमूह राष्ट्र में तैनात अपने सैन्य कर्मियों को वापस बुलाने के लिए कहा था। द्विपक्षीय संबंधों में तब भी खटास आई जब मालदीव के मंत्रियों ने मोदी की आलोचना की। हालांकि, मुइज्जू ने तब से अपने भारत विरोधी रुख को नरम कर दिया है और यहां तक कि उन मंत्रियों को भी बर्खास्त कर दिया है जिन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना की थी।

बता दे कि रिपोर्ट के अनुसार, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की भारत यात्रा के दौरान गाधू और इहावंधिपोल्हू में ट्रांसशिपमेंट पोर्ट में एक साथ काम करने पर सहमति बनी है। गाधू में एक एकीकृत समुद्री केंद्र स्थापित करने के लिए 11 अप्रैल को चीन की CAMCE कंपनी लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। सैटेलाइट इमेज से पुष्टि होती है कि गाधू में परियोजना के तहत कोई व्यावहारिक काम नहीं किया गया है।

मालदीव की मीडिया अधाधु की रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना में शामिल चीनी कंपनी को प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बैंकों ने ब्लैकलिस्ट कर दिया है। मालदीव की तरफ से मालदीव पोर्ट लिमिटेड (एमपीएल) ने CAMCE के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। मालदीव की सरकार ने यह नहीं बताया कि CAMCE के साथ समझौता रद्द किया गया था या नहीं। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार भारत के साथ मिलकर इस परियोजना को कैसे आगे बढ़ाने की योजना बना रही है।

मालदीव ने अप्रैल में घोषणा की थी कि वह गाधू एकीकृत समुद्री केंद्र में एक ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह, एक क्रूज टर्मिनल, एक नौका मरीना और एक इको-रिसॉर्ट विकसित करेगी। मालदीव औद्योगिक विकास मुक्त क्षेत्र (MIDFZ) को इहावनधिप्पोल्हु क्षेत्र को एक विशेष आर्थिक क्षेत्र और मालदीव आर्थिक प्रवेशद्वार के रूप में विकसित करने का काम सौंपा गया है। हालांकि, परियोजना अभी तक किसी भी कंपनी को नहीं दी गई है।

 

आखिर कश्मीर में बीजेपी के मुस्लिम उम्मीदवारों को क्यों नहीं मिला वोट?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि कश्मीर में बीजेपी के मुस्लिम उम्मीदवारों को वोट क्यों नहीं मिला है! कश्मीर घाटी के मुसलमान बीजेपी को वोट क्यों नहीं देते हैं? ये एक बड़ा सवाल है, जब जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव हुए और उसके नतीजे बीजेपी की उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। रिजल्ट में बीजेपी को जम्मू क्षेत्र में तो अच्छी बढ़त मिली, मगर कश्मीर घाटी में कमल नहीं खिल पाया। 90 सदस्यीय जम्मू-कश्मीर विधानसभा के नतीजों में बीजेपी महज 29 सीटें ही जीत पाई। ये सभी सीटें जम्मू क्षेत्र की हैं, जहां बीजेपी को बढ़त मिली। जम्मू क्षेत्र में कुल 43 विधानसभा सीटें हैं। वहीं कश्मीर क्षेत्र में भाजपा को एक भी सीट नसीब नहीं हुई है। यहां पर उसका अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन रहा है। ऐसा क्यों हुआ, यह समझते हैं। जम्मू-कश्मीर की 90 सदस्यीय विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस को 42 सीटें, बीजेपी को 29, कांग्रेस को 6, पीडीपी को 3, जेपीसी को 1, माकपा को 1, आप को 1और निर्दलीय को 7 सीटें मिली हैं। बीजेपी को प्रदेश में सबसे ज्यादा वोट शेयर 25.64 फीसदी, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस को 23.43 फीसदी मिले हैं। कश्मीर घाटी की 47 सीटों पर बीजेपी ने 19 उम्मीदवार ही खड़े किए थे। यानी 28 सीटों पर बीजेपी ने उम्मीदवार ही नहीं उतारे। जो भी प्रत्याशी उतारे भी गए थे, उनमें से ज्यादातर मुसलमान थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह से लेकर पार्टी के कई बड़े नेताओं ने दावा किया था कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद से क्षेत्र में पहले की तुलना में शांति है और कश्मीर घाटी के लोगों का भी सरकार और भारतीय जनता पार्टी में भरोसा बढ़ा है। मगर, इन दावों पर कश्मीर घाटी के लोगों ने भरोसा नहीं किया।

जम्मू-कश्मीर चुनाव में जनजातीय समुदाय गुज्जर-बकरवाल की भूमिका हमेशा से काफी मायने रखती रही है। जम्मू-कश्मीर की सभी राजनीतिक पार्टियां इन दोनों ही समुदायों को साधने की कोशिश करती रही हैं। भाजपा ने गुज्जर वोट के लिए कई रणनीति बनाई थी, लेकिन पहाड़ी और गुज्जर वोट को साधने की भाजपा की रणनीति सिरे नहीं चढ़ी और राजौरी-पुंछ की आठ सीटों में से भाजपा के खाते में केवल एक सीट आई। इंजीनियर रशीद बड़ा फैक्टर नहीं बन पाए और यह साबित हो गया कि लोकसभा चुनाव में उनकी जीत केवल तात्कालिक माहौल के कारण ही थी। इंजीनियर रशीद की अगुआई वाली अवामी इत्तेहाद पार्टी और जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार चुनाव में कोई खास प्रभाव नहीं डाल पाए। इंजीनियर रशीद की अवामी इत्तेहाद पार्टी (एआईपी) ने 44 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। मगर, वो एक भी सीट नहीं जीत पाई।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के गठबंधन ने भी कश्मीर में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दीं। इस चुनावी गठबंधन से कश्मीर में बीजेपी विरोधी लहर और भी बढ़ गई है। लोगों को कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ़्रेंस गठबंधन के तौर पर एक विकल्प मिलता नजर आया। बीजेपी के लिए अनुच्छेद 370 को भुनाना बड़ी चुनौती थी। डॉ. राजीव रंजन गिरि कहते हैं कि बीजेपी ने अनुच्छेद 370 खत्म कर देश के बाकी हिस्सों में एक नैरेटिव जरूर सेट किया, मगर कश्मीर घाटी में लोगों को यह बात नहीं समझा पाई कि 370 हटते ही कश्मीर के सारे मसले हल हो गए।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा की 90 में से 43 सीटें जम्मू में हैं। जम्मू ही बीजेपी का असल वोट बैंक समझा जाता है। यहां हिंदुओं की अच्छी ख़ासी आबादी है। हालांकि, इस बार बीजेपी ने जम्मू-के पीरपंजाल में भी कई मुसलमान उम्मीदवारों को टिकट दिया था। पीरपंजाल मुस्लिम बहुल इलाका है। हिंदू बहुल इलाका होने के बाद भी जम्मू में बीजेपी को क्लीन स्विप मिलती नहीं दिख रही है। उसे 25-26 सीटें ही मिलती नजर आ रही थीं।

भाजपा ने इस बार कश्मीर में लोकसभा का चुनाव भी नहीं लड़ा था। हालांकि, भाजपा ने हिंदू बहुल जम्मू की दो सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। वहीं, मुस्लिम बहुल कश्मीर घाटी की तीनों सीटों में से एक सीट पर भी अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था। भाजपा ने तीसरी बार जम्मू और उधमपुर सीट पर जीत दर्ज की। जम्मू-कश्मीर में बीजेपी ने काफी सोच-समझकर मुस्लिम उम्मीदवारों पर दांव खेला था। पार्टी ने लोकसभा चुनाव में जम्मू इलाके की दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। कश्मीर रीजन में मुस्लिम वोटों के सियासी प्रभाव को देखते हुए बीजेपी ने मुस्लिम कैंडिडेट उतारे। मगर, सभी के सभी हार गए। कश्मीर पंचायत चुनाव में भी बीजेपी ने मुस्लिम बहुल इलाकों में मुस्लिमों पर दांव खेला था, जिसमें कुछ हद तक कामयाब रही। यही वजह है कि विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने मुस्लिम मतदाताओं पर भरोसा जताया था।

बीजेपी ने अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर के माहौल में आए बदलाव, विकास की गाथा और कांग्रेस की परिवारवादी राजनीति के खात्मे को आधार बना रही है। बीजेपी पिछले पांच साल में आए बदलाव की तस्वीर जनता के सामने रखकर उनसे विकास या विनाश का विकल्प चुनने के लिए कह रही है। इसके अलावा जिस तरह से कश्मीर रीजन वाले इलाके की सीटों पर मुस्लिम कैंडिडेट उतारे गए हैं, उसको बीजेपी की सत्ता में वापसी का मूल मंत्र माना जा रहा था। मगर, बीजेपी का यह मंत्र काम नहीं आया। लोगों को रोजगार, आतंक और कश्मीर में बाहरी लोगों के प्रवेश से सख्त ऐतराज है। 2019 में 370 हटने के बाद से बीजेपी नौकरियां देने में विफल रही तो वहीं, आतंकी घटनाओं में भी इस दौरान कोई कमी नहीं आई। घाटी में भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू नहीं चल पाया, मगर मोदी सरकार घाटी समेत पूरे जम्मू-कश्मीर में शांतिपूर्ण चुनाव कराने में कामयाब रही। इसे एक तरह से बीजेपी की जीत माना जा रहा है।

 

आखिर क्या है दिल्ली का सीएम हाउस मामला?

आज हम आपको दिल्ली के सीएम हाउस मामले के बारे में जानकारी देने वाले हैं! दिल्ली में मुख्यमंत्री आवास को लेकर बवाल मच गया है। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि उपराज्यपाल के कहने पर पीडब्लूडी ने मुख्यमंत्री आतिशी का सामान बाहर निकालकर आवास को सील कर दिया है। दिल्ली के सीएम ऑफिस (CMO) की ओर से आरोप लगाया गया कि देश के इतिहास में पहली बार मुख्यमंत्री आवास खाली कराया गया। बीजेपी के इशारे पर दिल्ली के उपराज्यपाल ने जबरन सीएम आतिशी का सामान मुख्यमंत्री के सरकारी आवास से बाहर निकाला। इसी के बाद आतिशी को दिल्ली का नया सीएम बनाया गया। नई सीएम आतिशी हाल ही में 6, फ्लैगस्टाफ रोड स्थित इसी सरकारी आवास में शिफ्ट हुई थीं। हालांकि, अब सीएमओ की ओर से उनका बंगला खाली कराने का आरोप लगाया गया है। इससे पहले अरविंद केजरीवाल अपने परिवार के साथ 9 साल से भी ज्यादा समय से इसी बंगले में रह रहे थे।

आम आदमी पार्टी (आप) ने आरोप लगाया कि अधिकारी प्रोटोकॉल की अवज्ञा कर बीजेपी के दबाव में दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी को 6, फ्लैगस्टाफ रोड स्थित बंगला आवंटित नहीं कर रहे। ये हाल तब है जबकि अरविंद केजरीवाल इसे खाली कर चुके हैं। इस बीच, दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने मुख्यमंत्री पर गैरकानूनी ढंग से बंगले में रहने का आरोप लगाया और मांग की कि इसे सील किया जाए। आतिशी अपना सामान लेकर सोमवार को उत्तर दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके में स्थित बंगले में रहने आ गई थीं। आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने आरोप लगाया कि बंगला अभी आतिशी को आवंटित नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि बंगले के कैंपस में मौजूदा मुख्यमंत्री का एक शिविर कार्यालय भी खाली करा लिया गया है। बीजेपी दिल्ली में विधानसभा चुनाव जीत नहीं पाई है इसलिए वह अब दिल्ली के मुख्यमंत्री का बंगला हड़पने की कोशिश कर रही है।

संजय सिंह ने दस्तावेज दिखाते हुए दावा किया कि केजरीवाल ने उचित तरीके से बंगला खाली कर दिया है। इससे पहले, बीजेपी ने आरोप लगाया कि बंगला लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को नहीं सौंपा गया है और इसकी चाबियां अब भी केजरीवाल के पास हैं। हालांकि, संजय सिंह ने इस दावे को खारिज किया। आरोपों पर जवाब देते हुए विजेंद्र गुप्ता ने सवाल किया कि केजरीवाल की ओर से बंगले की चाबियां पीडब्ल्यूडी को क्यों नहीं सौंपी गयीं और इसके बजाय यह आतिशी के हाथों में चली गयीं।

विजेंद्र गुप्ता ने पीडब्ल्यूडी से 6, फ्लैगस्टाफ रोड बंगला सील करने का अनुरोध किया और मुख्यमंत्री पर गैरकानूनी रूप से उस पर कब्जा जमाने का आरोप लगाया। बीजेपी नेता ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि आतिशी को मथुरा रोड पर पहले ही एबी-17 बंगला आवंटित कर दिया गया है। उन्होंने अधिकारियों पर फ्लैगस्टाफ रोड बंगले पर गैरकानूनी कब्जे को जानबूझकर बचाने का आरोप लगाया। आतिशी को केजरीवाल सरकार में मंत्री नियुक्त किए जाने के बाद पिछले साल एबी-17 आवास आवंटित किया गया था।

संजय सिंह ने आरोप लगाया कि बीजेपी केजरीवाल के बंगला खाली करने के दस्तावेजी सबूत होने के बावजूद इस मुद्दे पर झूठ फैला रही है। उन्होंने एक बयान में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री आतिशी ने बंगले में शिविर कार्यालय में एक बैठक की लेकिन बाद में वहां मौजूद कर्मचारियों को हटा दिया गया। प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर अधिकारियों ने भाजपा के दबाव में आतिशी को मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास आवंटित नहीं किया है।

यही नहीं आपको बता दें कि आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल सिविल लाइंस में फ्लैगस्टाफ रोड पर स्थित दिल्ली के मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास अगले एक दो दिनों में खाली कर देंगे। अरविंद केजरीवाल के लिए नई दिल्ली क्षेत्र में एक आवास तय हो गया है, जहां वह अपने परिवार के साथ रहने के लिए आएंगे। AAP ने बुधवार को यह जानकारी दी। पार्टी सूत्रों ने दावा किया कि केजरीवाल अपने परिवार के साथ मंडी हाउस के पास फिरोज शाह रोड पर AAP के राज्यसभा सांसदों को आवंटित दो सरकारी बंगलों में से एक में रहने के लिए जा सकते हैं। ये दोनों बंगले रविशंकर शुक्ला लेन स्थित आम आदमी पार्टी मुख्यालय से कुछ ही मीटर की दूरी पर हैं। इस महीने की शुरुआत में दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह नवरात्रि के दौरान फ्लैगस्टाफ रोड स्थित सरकारी आवास खाली कर देंगे। नवरात्रि का का यह त्योहार गुरुवार से शुरू हो रहा है।

पार्टी ने एक बयान में कहा केजरीवाल अगले एक – दो दिनों में मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास खाली कर देंगे, क्योंकि उनके और उनके परिवार के लिए एक आवास तय कर लिया गया है। पार्टी ने कहा कि केजरीवाल अपने परिवार के साथ नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र में रहेंगे, जिसका प्रतिनिधित्व वे दिल्ली विधानसभा में करते हैं।

इससे पहले, AAPने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय पार्टी के प्रमुख के रूप में केजरीवाल को आधिकारिक आवास दिए जाने की भी मांग की थी। जेल से रिहा होने के बाद आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर सभी को चौंका दिया था। उनके इस्तीफे के बाद आतिशी दिल्ली की नई मुख्यमंत्री हैं।