Monday, March 16, 2026
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आखिर कोलकाता के डॉक्टर की मांग क्या है? जानिए!

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर कोलकाता के डॉक्टर की मांग क्या है! इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने 17 अगस्त को देशभर के सभी छोटे बड़े अस्पतालों में बंदी का ऐलान किया है। डॉक्टर 24 घंटे के लिए हड़ताल पर रहेंगे। यह जानकारी आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरवी अशोकन ने दी। शनिवार सुबह 6 बजे से हड़ताल शुरू होगी, जो अगले दिन सुबह 6 बजे तक चलेगी। इस दौरान इमरजेंसी सेवाएं चालू रहेंगी, लेकिन ओपीडी के साथ बाकी सेवाएं बंद रहेंगी। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप और मर्डर की घटना के व‍िरोध में देश भर के डॉक्टर आक्रोशित हैं। इसी क्रम में शनिवार को वे हड़ताल पर रहेंगे। आईएमए अध्यक्ष ने कहा कि जिस लड़की के साथ यह घटना हुई, वह मध्यम वर्गीय परिवार की इकलौती संतान थी। किसी एक व्यक्ति ने इस घटना को अंजाम नहीं दिया, बल्कि इसमें कई लोग शामिल थे। जिस तरह से उसकी हत्या की गई, उसका वर्णन करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह मानवता के खिलाफ किया गया अपराध है। यह काम करने वाली जगहों पर महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे से जुड़ा है। इस मामले में विरोध-प्रदर्शन कर रहे लोगों को अगर राज्य सरकार पर भरोसा नहीं है, तो वे किसी अन्य जांच एजेंसी से संपर्क कर सकते हैं। आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज के सेमिनार हॉल में 9 अगस्त को एक महिला ट्रेनी डॉक्टर की रहस्यमय परिस्थितियों में लाश मिली थी।किसी एक व्यक्ति ने इस घटना को अंजाम नहीं दिया, बल्कि इसमें कई लोग शामिल थे। जिस तरह से उसकी हत्या की गई, उसका वर्णन करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है।डॉक्टर और नर्स इस बात से चिंतित हैं कि वो अस्पताल में सुरक्षित नहीं हैं, उनके परिवार के लोग भी चिंतित हैं। मैं सीबीआई की जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा हूं।

आईएमए ने रेजिडेंट डॉक्टरों के काम करने और रहने की स्थिति में बदलाव की मांग की है। इसमें 36 घंटे की ड्यूटी शिफ्ट और आराम के लिए सुरक्षित जगहों की कमी जैसे मुद्दे शामिल हैं। आरजी कार अस्पताल का पीड़ित डॉक्टर भी 36 घंटे की ड्यूटी कर रहा था। आईएमए ने एक केंद्रीय कानून की मांग की है जिसमें 2023 में महामारी रोग अधिनियम, 1897 में किए गए संशोधनों को शामिल किया जाए। ऐसा माना जा रहा है कि इससे 25 राज्यों में मौजूदा कानून और मजबूत होंगे। डॉक्टरों के संगठन ने अपराध की एक निश्चित समय-सीमा के भीतर सावधानीपूर्वक और पेशेवर जांच और न्याय दिलाने की मांग की है। इसके साथ ही 14 अगस्त की रात आरजी कार अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ में शामिल लोगों की पहचान करने और उन्हें कड़ी सजा देने की मांग की है। आईएमए ने कहा, “सभी अस्पतालों के सुरक्षा प्रोटोकॉल किसी हवाई अड्डे से कम नहीं होने चाहिए। अस्पतालों को अनिवार्य सुरक्षा अधिकारों के साथ सुरक्षित क्षेत्र घोषित करना पहला कदम है। सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और प्रोटोकॉल का पालन किया जा सकता है।”

साथ ही, पीड़ित परिवार को क्रूरता के अनुरूप उचित और सम्मानजनक मुआवजा देने की मांग की गई है।

प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मामले को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में ले जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो आरोपियों को फांसी की सजा दी जाएगी। आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। एक आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इस मामले में विरोध-प्रदर्शन कर रहे लोगों को अगर राज्य सरकार पर भरोसा नहीं है, तो वे किसी अन्य जांच एजेंसी से संपर्क कर सकते हैं। इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है।

गौरतलब है कि आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज के सेमिनार हॉल में 9 अगस्त को एक महिला ट्रेनी डॉक्टर की रहस्यमय परिस्थितियों में लाश मिली थी।किसी एक व्यक्ति ने इस घटना को अंजाम नहीं दिया, बल्कि इसमें कई लोग शामिल थे। जिस तरह से उसकी हत्या की गई, उसका वर्णन करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। बता दें कि आरजी कार अस्पताल का पीड़ित डॉक्टर भी 36 घंटे की ड्यूटी कर रहा था। आईएमए ने एक केंद्रीय कानून की मांग की है जिसमें 2023 में महामारी रोग अधिनियम, 1897 में किए गए संशोधनों को शामिल किया जाए। ऐसा माना जा रहा है कि इससे 25 राज्यों में मौजूदा कानून और मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि यह मानवता के खिलाफ किया गया अपराध है। महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म किया गया था और उसकी हत्या कर दी गई थी। वह अस्पताल में स्नातकोत्तर द्वितीय वर्ष की मेडिकल छात्रा थी और हाउस स्टाफ के रूप में भी काम कर रही थी।

क्या महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए करना होगा इंतजार?

अब आने वाले समय के लिए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए इंतजार करना होगा! जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है। शुक्रवार को चुनाव आयोग ने दोनों राज्यों में चुनावी कार्यक्रम की घोषणा कर दी। जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटने के बाद पहला विधानसभा चुनाव है, ऐसे में चुनाव आयोग ने खास तैयारी की है। यहां तीन चरणों में चुनाव होंगे। वहीं हरियाणा में एक ही फेज में वोटिंग होगी। दोनों राज्यों के नतीजे 4 अक्टूबर को आएंगे। चुनाव आयोग ने जैसे ही दो राज्यों ने इलेक्शन शेड्यूल घोषित किया तो सवाल उठे कि महाराष्ट्र और झारखंड में भी चुनाव होने हैं फिर वहां तारीखों का ऐलान क्यों नहीं किया गया। इसके अलावा देशभर की 50 सीटों पर उपचुनाव भी कराए जाने हैं। जानिए महाराष्ट्र-झारखंड को लेकर चुनाव आयोग ने जवाब दिया है। यही नहीं जम्मू-कश्मीर का चुनाव कार्यक्रम एक नया पहलू है जो 2019 के चुनावी चक्र में नहीं था। जम्मू-कश्मीर में चुनाव होने से सुरक्षा के मद्देनजर कई चुनौतियां हैं। हाल ही में हुए आतंकी हमलों और एक दशक बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर, ECI के पास बहुत काम है। चुनाव आयोग ने बताया कि महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनावों को फिलहाल टाल दिया गया है। इसके दो कारण बताए जा रहे- पहली वजह जम्मू-कश्मीर के चुनाव हैं और दूसरा कारण महाराष्ट्र के कई इलाकों बाढ़ के हालात हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि इन्हीं दो वजहों से महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव कराना अभी मुश्किल है। आपको याद होगा कि 2019 में महाराष्ट्र और हरियाणा में एक साथ चुनाव हुए थे। लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। इसके साथ ही अलग-अलग राज्यों में करीब 50 सीटों पर उपचुनाव भी वेटिंग लिस्ट में है।

भले ही महाराष्ट्र और झारखंड में अभी चुनाव घोषित नहीं किया गया है, इसका मतलब ये नहीं है कि दोनों राज्यों में चुनाव ज्यादा देर से होंगे। महाराष्ट्र में 26 नवंबर 2024 तक और झारखंड में 5 जनवरी 2025 तक नई विधानसभा का गठन होना जरूरी है। झारखंड के पास थोड़ा समय है, लेकिन महाराष्ट्र के पास नहीं। यही कारण है कि महाराष्ट्र के चुनाव अक्सर हरियाणा के साथ ही कराए जाते हैं। हरियाणा विधानसभा का कार्यकाल 3 नवंबर 2024 को समाप्त हो रहा है, जो महाराष्ट्र से कुछ ही दिन पहले है। दिल्ली में 23 फरवरी 2025 तक नई विधानसभा का गठन होना है, जो झारखंड की समय सीमा के एक महीने बाद है।

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि महाराष्ट्र चुनाव को इस बार अलग से क्यों कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का चुनाव कार्यक्रम एक नया पहलू है जो 2019 के चुनावी चक्र में नहीं था। जम्मू-कश्मीर में चुनाव होने से सुरक्षा के मद्देनजर कई चुनौतियां हैं। हाल ही में हुए आतंकी हमलों और एक दशक बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर, ECI के पास बहुत काम है। इसलिए ECI अभी सिर्फ हरियाणा जैसे छोटे राज्य में ही चुनाव करा पाएगा।

CEC राजीव कुमार ने दूसरा कारण बताते हुए कहा कि महाराष्ट्र में बाढ़ ने ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों के काम को प्रभावित किया है। बता दें कि देशभर की 50 सीटों पर उपचुनाव भी कराए जाने हैं। जानिए महाराष्ट्र-झारखंड को लेकर चुनाव आयोग ने जवाब दिया है। चुनाव आयोग ने बताया कि महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनावों को फिलहाल टाल दिया गया है। इसके दो कारण बताए जा रहे- पहली वजह जम्मू-कश्मीर के चुनाव हैं और दूसरा कारण महाराष्ट्र के कई इलाकों बाढ़ के हालात हैं।

इससे राज्य में मतदाता सूची से जुड़ी कुछ प्रक्रियाओं में देरी हुई है। उम्मीद है कि जल्द ही यह काम पूरा हो जाएगा। भले ही महाराष्ट्र और झारखंड में अभी चुनाव घोषित नहीं किया गया है, इसका मतलब ये नहीं है कि दोनों राज्यों में चुनाव ज्यादा देर से होंगे। महाराष्ट्र में 26 नवंबर 2024 तक और झारखंड में 5 जनवरी 2025 तक नई विधानसभा का गठन होना जरूरी है।चुनाव आयोग का कहना है कि इन्हीं दो वजहों से महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव कराना अभी मुश्किल है। आपको याद होगा कि 2019 में महाराष्ट्र और हरियाणा में एक साथ चुनाव हुए थे। लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा।हालांकि, वरिष्ठ ECI अधिकारी महाराष्ट्र और झारखंड दोनों जगहों का दौरा कर चुके हैं, लेकिन CEC राजीव कुमार और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और सुखबीर संधू के नेतृत्व में पूरा आयोग अभी तक समीक्षा के लिए इन दोनों राज्यों का दौरा नहीं कर पाया है।

आने वाले समय में किन राज्यों में होंगे चुनाव?

आज हम आपको बताएंगे कि आने वाले समय में किन राज्यों में चुनाव होंगे! चुनाव आयोग ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर और हरियाणा विधानसभा चुनावों के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया है।जम्मू-कश्मीर में चुनाव तीन चरणों में होगा जबकि हरियाणा में एक ही चरण में चुनाव संपन्न कराया जाएगा। दोनों राज्यों के लिए पड़ने वाली वोटों का परिणाम 4 अक्टूबर को आएगा। चुनावों की घोषणा के साथ ही दोनों राज्यों में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई। हालांकि, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा के साथ अन्य दो राज्य महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव नहीं कराए जाएंगे। इनकी घोषणा बाद में की जाएगी। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने बताया कि 19 अगस्त को अमरनाथ यात्रा संपन्न होने के अगले दिन 20 अगस्त को ही 90 विधानसभा सीटों वाले जम्मू-कश्मीर में पहले चरण के चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। इसी के साथ उम्मीदवारों द्वारा नामांकन पत्र दाखिल करने भी शुरू कर दिए जाएंगे। पहले चरण के लिए 27 अगस्त तक पर्चे भरे जा सकेंगे, 28 अगस्त को भरे गए पर्चों की जांच और 30 अगस्त तक उम्मीदवार के नाम वापस लेने की लास्ट डेट होगी।

पहले चरण के लिए 18 सितंबर को वोट डाली जाएंगी। इसी तरह से यहां दूसरे चरण के लिए 29 अगस्त को अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। 5 सितंबर तक नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि होगी। 9 सितंबर तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकते हैं और 25 सितंबर को दूसरे चरण के लिए वोट डाली जाएंगी।

इसी तरह से जम्मू-कश्मीर में तीसरे चरण के चुनाव के लिए 5 सितंबर को अधिसूचना जारी की जाएगी, 12 सितंबर तक नामांकन पत्र दाखिल किए जा सकेंगे और 17 सितंबर तक नाम वापस लेने की डेट होगी। 1 अक्टूबर को वोट डालने का दिन होगा। 90 विधानसभा सीटों वाले जम्मू-कश्मीर में 87 लाख नौ हजार वोटर हैं। इनमें 44 लाख 46 हजार मेल और 42 लाख 62 हजार फीमेल वोटर हैं।

हालांकि, इनमें अभी और बदलाव हो सकता है, क्योंकि वोटर लिस्ट अपडेट का काम चल रहा है। सितंबर को भरे गए पर्चों की जांच होगी, 16 सितंबर तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे और 1 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे। जम्मू-कश्मीर और हरियाणा के लिए चुनावी प्रक्रिया 6 अक्टूबर को खत्म हो जाएगी।जिसे 20 अगस्त को फाइनल रूप से पब्लिश किया जाएगा। साल 2019 में 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में पहली बार विधानसभा चुनाव होंगे। जम्मू-कश्मीर में इससे पहले 2014 के नवंबर-दिसंबर में पांच चरणों में विधानसभा चुनाव हुए थे। तब लद्दाख भी इसका पार्ट था।

आयोग ने कहा कि पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर में चुनाव की तैयारियां का जायजा लिया गया था। उसमें तैयारियां पूरी दिखाई दी थी। रही बात आतंकी हमलों की तो कोई भी बाहरी या अंदरूनी ताकत चुनावी प्रक्रिया को पटरी से नहीं उतार सकती। यहां 11,838 पोलिंग स्टेशन पर वोट डाले जाएंगे। इनमें शहरी इलाकों में 2332 और ग्रामीण इलाकों में 9506 पोलिंग स्टेशन होंगे। इन पोलिंग स्टेशनों में 90 को दिव्यांग, 90 को महिला कर्मचारी वोट डलवाने की तमाम प्रक्रियाएं पूरी करेंगे। जबकि 360 पोलिंग स्टेशन मॉडल होंगे।

इसी तरह से 90 विधानसभा सीटों वाले हरियाणा राज्य में एक ही चरण में मतदान कराने की घोषणा की गई है। यहां 1 अक्टूबर, मंगलवार को मतदान होगा। जबकि रिजल्ट 4 अक्टूबर को घोषित किया जाएगा। इसके लिए 5 सितंबर को अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। इसी के साथ ही उम्मीदवारों द्वारा नामांकन पत्र भरने का काम शुरू हो जाएगा। नामांकन पत्र दाखिल करने की लास्ट डेट 12 सितंबर होगी, 13 सितंबर को भरे गए पर्चों की जांच होगी, 16 सितंबर तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे और 1 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे। जम्मू-कश्मीर और हरियाणा के लिए चुनावी प्रक्रिया 6 अक्टूबर को खत्म हो जाएगी।

राज्य में 2.01 करोड़ वोटर हैं। इनमें पुरुष वोटर-1.06 करोड़, महिला वोटर-95 लाख और ट्रांसजेंडर-459 हैं। दिव्यांग वोटरों की संख्या 1.50 लाख है। 85 या इससे अधिक की उम्र वाले वोटर 2.55 लाख, 100 साल की उम्र पार कर चुके वोटर-10,321 वोटर हैं। पहली बार वोट देने वाले 18 से 19 साल के यंग वोटर 4.52 लाख हैं।जिसे 20 अगस्त को फाइनल रूप से पब्लिश किया जाएगा। साल 2019 में 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में पहली बार विधानसभा चुनाव होंगे। जम्मू-कश्मीर में इससे पहले 2014 के नवंबर-दिसंबर में पांच चरणों में विधानसभा चुनाव हुए थे। तब लद्दाख भी इसका पार्ट था। वोट देने के लिए कुल पोलिंग स्टेशन 20,629 होंगे। आयोग ने कहा कि दोनों राज्यों में चुनावी प्रक्रिया के दौरान पूरी तरह से पारदर्शिता बरती जाएगी। इसमें कहीं भी ढिलाई नहीं होगी। तमाम जिलों के डीएम और एसएसपी को यह हिदायत दी गई है कि वह अपने-अपने इलाकों में बिना भेदभाव करे सभी उम्मीदवारों के साथ एक समान व्यवहार करेंगे।

क्या राहुल गांधी पर पड़ सकती है प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या राहुल गांधी पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी पड़ सकती है या नहीं! लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईडी उनके खिलाफ रेड करने की तैयारी कर रही है। राहुल ने दावा किया कि संसद में उनके ‘चक्रव्यूह’ वाले भाषण के बाद उनके खिलाफ साजिश की जा रही है। उनका दावा है कि ईडी के अंदरुनी सूत्र ने उन्हें छापेमारी के बारे में जानकारी दी है। बता दें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, ‘जाहिर है, 2 इन 1 को मेरा चक्रव्यूह भाषण पसंद नहीं आया। ईडी के ‘अंदरूनी सूत्र’ मुझे बताते हैं कि छापेमारी की योजना बनाई जा रही है। मैंबाहें खोलकर इंतज़ार कर रहा हूं, ईडी को चाय और बिस्किट मेरी तरफ से।’

बता दें कि 29 जुलाई को संसद में राहुल गांधी ने सरकार पर जमकर हमला बोला था उन्होंने कहा था कि 21वीं सदी में एक चक्रव्यूह तैयार हुआ है। चक्रव्यूह कमल के आकार का होता है और उसका जिन मोदी ने सीने पर लगा रखा है। राहुल ने बजट से पहले वित्त मंत्रालय की हलवा सेरेमनी पर भी निशाना साधते हुए कहा था कि उसमें कोई दलित या पिछड़े वर्ग का अधिकारी नहीं था। हलवा पर राहुल के बयान पर सीतारमण ने माथे पर हाथ रखकर उस कथन को हास्यास्पद जताने की कोशिश की थी। बीजेपी के सुधांशु त्रिवेदी ने नेहरू से लेकर राजीव गांधी और यूपीए सरकार तक का जिक्र कर आरोप लगाया कि चार पीढ़ियों पर हलवा खाया और दलितों-पिछड़ों को बलवा दिया।

बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें यह पता होना चाहिए कि ‘एलओपी’ (विपक्ष के नेता) का मतलब ‘लीडर ऑफ प्रोपेगैंडा’ (दुष्प्रचार के नेता) नहीं होता है।उन्होंने बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए यह भी कहा कि राहुल गांधी को ‘रील का नेता’ नहीं बनना चाहिए और यह समझना चाहिए कि ‘रीयल नेता’ बनने के लिए सच बोलना पड़ता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस नेता पर निशाना साधते हुए कहा कि जो ‘‘एक्सीडेंटल हिंदू’’ हैं, उनका महाभारत का ज्ञान भी ‘‘एक्सीडेंटल’’ है। उन्होंने कहा , ‘‘ एक नेता ने ‘कमल’ पर कटाक्ष किया। न जाने क्या दिक्कत है। कमल को बुरा दिखाने का प्रयास किया गया। जनता ने हमें लगातार तीसरी बार सत्ता में बैठाने का काम किया है।’’ कमल भाजपा का चुनाव चिह्न है। ठाकुर ने आरोप लगाया, ‘‘आप (राहुल) कमल का अपमान नहीं कर रहे हैं, आप भगवान शिव, बुद्ध का अपमान कर रहे हैं।’’ उन्होंने कटाक्ष किया, ‘‘केवल रील के नेता मत बनिए, रीयल नेता बनने के लिए सच बोलना पड़ता है।’’ यही नहीं स्वामी कांग्रेस पार्टी को विदेशी लोगों का गुट बता चुके हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस कोई पार्टी नहीं बल्कि विदेशी लोगों का गुट है। इसमें सब लोग एक गुलाम हैं। स्वामी का कहना है कि जब तक कांग्रेस से नेहरू परिवार की छुट्टी नहीं हो जाती तब तक कांग्रेस का कोई भविष्य नहीं है। साल 2012 में स्वामी ने चुनाव आयोग से कांग्रेस पार्टी की मान्यता रद्द करने की मांग की थी।

एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को लोन देने का हवाला देते हुए पार्टी की मान्यता रद्द करने की मांग की थी। स्वामी का कहना था कि आयकर अधिनियम की धारा 13ए और आरपीए अधिनियम की धारा 29ए से 29सी के अनुसार कोई भी राजनीतिक पार्टी किसी भी कम्पनी को ब्याज या ब्याज मुक्त ऋण नहीं दे सकती है। वहीं, कांग्रेस ने इसे भावनात्मक मुद्दा बताया था। वह राहुल गांधी को बेवकूफ से लेकर नशा करने वाला तक बता चुके हैं। इस साल एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने राहुल गांधी को बेवकूफ बताया था। स्वामी ने जुलाई 2019 में राहुल गांधी को नशेड़ी बताया था। स्वामी ने कहा था कि राहुल गांधी कोकीन लेते हैं। उनका कहना था कि राहुल गांधी का यदि डोप टेस्ट किया जाए तो वे फेल हो जाएंगे। इसके बाद स्वामी के खिलाफ केस भी दर्ज हुआ था। बिहार में एनएसयूआई ने बीजेपी सांसद के खिलाफ केस दर्ज कराया था। यह केस बिहार के मोतिहारी सिविल कोर्ट में दर्ज हुआ था। इतना ही नहीं स्वामी राहुल की डिग्री पर भी सवाल उठा चुके हैं। 2019 में ही स्वामी ने एक ट्वीट में कहा था कि कैम्ब्रिज सर्टिफिकेट के अनुसार राहुल गांधी का नाम राउल विंसी है। स्वामी ने कहा था कि राहुल नेशनल इकोनॉमिक प्लानिंग एंड पॉलिसी में फेल हो गए थे। उन्होंने एक सर्टिफिकेट भी पोस्ट किया था।

 

 

राहुल गांधी की नागरिकता पर क्या बोले सुब्रमण्यम स्वामी?

हाल ही में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने राहुल गांधी की नागरिकता पर सवाल उठा दिया है! कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उनकी नागरिकता के सवाल पर गृह मंत्रालय को जवाब नहीं दिया। इस मामले को लगातार उठा रहे बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने अब जानकारी दी है कि राहुल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल की गई है। स्वामी ने एक एक्स पोस्ट में बताया कि उनके सहयोगी वकील सत्य सभरवाल ने पीआईएल फाइल की है। स्वामी ने 10 अगस्त को एक फॉर्म एक्स पर शेयर किया था। स्वामी ने दावा किया है कि राहुल गांधी ने एक ब्रिटिश कंपनी के लिए दाखिल किए गए एनुअल रिटर्न में खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया है। एक पीआईएल फाइल की है। मंत्रालय ने राहुल को यह पूछते हुए कारण बताओ नोटिस भी नहीं जारी किया कि आखिर उनकी नागरिकता खत्म क्यों नहीं की जाए।तब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी यह पूछते हुए कठघरे में खड़ा किया था कि क्या सोनिया गांधी उन्हें ब्लैकमेल कर रहीं हैं कि वो राहुल के खिलाफ कार्रवाई नहीं करें? स्वामी ने 12 अगस्त को विराट हिंदुस्तान संगम नामक संस्था के राष्ट्रीय महासचिव जगदीश शेट्टी का एक पोस्ट शेयर किया।

इसमें पोस्ट में दावा किया गया है कि मोदी सरकार राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर नरमी बरत रही है। पोस्ट में कहा गया है, ‘यह सबूत है कि मोदी सरकार नैशनल हेरल्ड केस से जुड़े मामलों में राहुल-सोनिया के प्रति उदारता दिखा रहे हैं। सुब्रमण्यन स्वामी ने मूल शिकायत दर्ज करवाई थी और दोनों बेल पर बाहर हैं। संबंधित इनकम टैक्स केस और नैशनल हेरल्ड हाउस को खाली करने के केस में सोनिया और राहुल की तरफ से फाइनल अपील सुप्रीम कोर्ट में 2018 से ही लंबित है लेकिन सरकार के सॉलिसिटर जनरल या उनके वकीलों की टीम मामले को आगे बढ़ाने में बिल्कुल दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।’ शेट्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कार्यालय को टैग करते हुए पूछा है कि आज उन लोगों के प्रति उनका रुख इतना नरम क्यों है? उन्होंने लिखा, ‘नियमों के तहत सोनिया-राहुल के मामलों की भी त्वरित सुनवाई क्यों नहीं हो रही है जैसा कि दूसरे नेताओं के साथ हो रहा है? यह देश जानना चाहता है।’

स्वामी ने 10 अगस्त को ही एक और पोस्ट किया था जिसमें उन्होंने गृह मंत्रालय की तरफ से राहुल गांधी को भेजी गई चिट्ठी दी है। अब अमित शाह गृह मंत्री हैं जो तब से इस मामले को दबाए हैं।’उसकी भारतीय नागरिकता अपने आप खत्म हो जाती है। ऐसे में सुब्रमण्यन स्वामी का सवाल है कि अगर राहुल ब्रिटिश नागरिक हैं तो उनकी भारतीय नागरिकता कैसे बरकरार है?उन्होंने लिखा, ‘राजनाथ सिंह जब गृह मंत्री थे तब मंत्रालय ने राहुल गांधी को यह चिट्ठी भेजी थी। अब अमित शाह गृह मंत्री हैं जो तब से इस मामले को दबाए हैं।’

स्वामी ने अब ताजा पोस्ट में कहा है, ‘गृह मंत्रालय राहुल गांधी को दंडित करने में असफल रहा तो मेरे सहयोगी वकील सत्य सभरवाल ने एक पीआईएल फाइल की है। मंत्रालय ने राहुल को यह पूछते हुए कारण बताओ नोटिस भी नहीं जारी किया कि आखिर उनकी नागरिकता खत्म क्यों नहीं की जाए। राहुल गांधी ने गृह मंत्रालय को जवाब देने से इनकार कर दिया, इसलिए पीआईएल दाखिल की गई है।’

दरअसल, सुब्रमण्यन स्वामी लंबे समय से आरोप लगा रहे हैं कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन की एक कंपनी में डायरेक्टर के तौर पर अपनी नागरिकता ब्रिटिश बताई है। उन्होंने 10 अगस्त को अपने दावे के पक्ष में वह फॉर्म भी एक्स पर पोस्ट कर दिया। भारत में दोहरी नागरिकता का नियम नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी यह पूछते हुए कठघरे में खड़ा किया था कि क्या सोनिया गांधी उन्हें ब्लैकमेल कर रहीं हैं कि वो राहुल के खिलाफ कार्रवाई नहीं करें? स्वामी ने 12 अगस्त को विराट हिंदुस्तान संगम नामक संस्था के राष्ट्रीय महासचिव जगदीश शेट्टी का एक पोस्ट शेयर किया।भारत का कोई नागरिक जैसे ही किसी दूसरे देश की नागरिकता लेता है, राजनाथ सिंह जब गृह मंत्री थे तब मंत्रालय ने राहुल गांधी को यह चिट्ठी भेजी थी। अब अमित शाह गृह मंत्री हैं जो तब से इस मामले को दबाए हैं।’उसकी भारतीय नागरिकता अपने आप खत्म हो जाती है। ऐसे में सुब्रमण्यन स्वामी का सवाल है कि अगर राहुल ब्रिटिश नागरिक हैं तो उनकी भारतीय नागरिकता कैसे बरकरार है? अगर राहुल गांधी भारतीय नागरिक हैं ही नहीं तो वो चुनाव कैसे लड़ सकते हैं या कोई संवैधानिक पद कैसे हासिल कर सकते हैं?

आखिर क्यों उठते हैं राहुल गांधी की नागरिकता पर सवाल?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर राहुल गांधी की नागरिकता पर सवाल क्यों उठते रहते हैं! भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी एक बार फिर से सुर्खियों में बने हुए हैं। स्वामी ने इस बार राहुल गांधी की नागरिकता का मुद्दा उठाया है। स्वामी राहुल की नागरिकता के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गए हैं। बीजेपी नेता ने याचिका में गृह मंत्रालय को यह निर्देश देने की अपील की कि वह कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता रद्द करने के अनुरोध संबंधी उनके अभ्यावेदन पर फैसला करे। यह पहली बार नहीं है जब स्वामी ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोला है। स्वामी कांग्रेस के लिए अगस्ता वेस्टलैंड से लेकर नेशनल हेराल्ड केस में परेशानी खड़ी कर चुके हैं। वे राहुल गांधी के साथ ही सोनिया गांधी को भी अदालत तक पहुंचा चुके हैं। कांग्रेस से स्वामी की अदावत काफी पुरानी रही है। महज 24 साल की उम्र में हार्वर्ड से पीएचडी करने वाले स्वामी का इंदिरा गांधी से भी छत्तीस का आंकड़ा रहा है। बात 1968 की है। उस समय अमर्त्य सेन ने स्वामी को दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाने का न्योता दिया था। स्वामी ने उनका निमंत्रण स्वीकार कर दिल्ली में पढ़ाना शुरू कर दिया। एक साल बाद 1969 में स्वामी ने आईआईटी दिल्ली जॉइन कर लिया। इंदिरा गांधी से नाराजगी की वजह से 1972 में उन्हें आईआईटी की नौकरी गंवानी पड़ी। मामला अदालत तक पहुंचा। आखिरकार 1991 में फैसला स्वामी के पक्ष में आया। फैसले के बाद वह एक दिन के लिए आईआईटी दिल्ली गए। इसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

स्वामी कांग्रेस पार्टी को विदेशी लोगों का गुट बता चुके हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस कोई पार्टी नहीं बल्कि विदेशी लोगों का गुट है। इसमें सब लोग एक गुलाम हैं। स्वामी का कहना है कि जब तक कांग्रेस से नेहरू परिवार की छुट्टी नहीं हो जाती तब तक कांग्रेस का कोई भविष्य नहीं है। साल 2012 में स्वामी ने चुनाव आयोग से कांग्रेस पार्टी की मान्यता रद्द करने की मांग की थी। उन्होंने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को लोन देने का हवाला देते हुए पार्टी की मान्यता रद्द करने की मांग की थी। स्वामी का कहना था कि आयकर अधिनियम (1961) की धारा 13ए और आरपीए (1951) अधिनियम की धारा 29ए से 29सी के अनुसार कोई भी राजनीतिक पार्टी किसी भी कम्पनी को ब्याज या ब्याज मुक्त ऋण नहीं दे सकती है। वहीं, कांग्रेस ने इसे भावनात्मक मुद्दा बताया था।

स्वामी राहुल गांधी को लेकर अक्सर आक्रामक रहते हैं। वह राहुल गांधी को बेवकूफ से लेकर नशा करने वाला तक बता चुके हैं। इस साल एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने राहुल गांधी को बेवकूफ बताया था। स्वामी ने जुलाई 2019 में राहुल गांधी को नशेड़ी बताया था। स्वामी ने कहा था कि राहुल गांधी कोकीन लेते हैं। उनका कहना था कि राहुल गांधी का यदि डोप टेस्ट किया जाए तो वे फेल हो जाएंगे। इसके बाद स्वामी के खिलाफ केस भी दर्ज हुआ था। बिहार में एनएसयूआई ने बीजेपी सांसद के खिलाफ केस दर्ज कराया था। यह केस बिहार के मोतिहारी सिविल कोर्ट में दर्ज हुआ था। इतना ही नहीं स्वामी राहुल की डिग्री पर भी सवाल उठा चुके हैं। 2019 में ही स्वामी ने एक ट्वीट में कहा था कि कैम्ब्रिज सर्टिफिकेट के अनुसार राहुल गांधी का नाम राउल विंसी है। स्वामी ने कहा था कि राहुल नेशनल इकोनॉमिक प्लानिंग एंड पॉलिसी में फेल हो गए थे। उन्होंने एक सर्टिफिकेट भी पोस्ट किया था।

स्वामी अगस्ता वेस्टलैंड मामले को लेकर भी सोनिया गांधी के खिलाफ आक्रामक रहे हैं। एक इंटरव्यू के दौरान स्वामी ने कहा था कि स्वामी ने कहा कि मैं यह मान सकता हूं कि सोनिया गांधी दोषी हैं। लेकिन, इसे आपकी संतुष्टि के लिए साबित करने की प्रक्रिया में मुझे कानूनी प्रणाली से गुजरना होगा। मैं तब तक कोई मामला नहीं लेता जब तक मुझे यकीन न हो जाए कि व्यक्ति दोषी है। स्वामी का कहना था कि अगस्ता वेस्टलैंड मामले में जांच एजेंसी को सोनिया गांधी से पूछताछ करनी चाहिए। बीजेपी नेता ने कहा था कि बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल का पत्र स्पष्ट रूप से सोनिया गांधी की ओर इशारा करता है। उनका कहना था कि यह कांग्रेस अध्यक्ष की संलिप्तता की ओर इशारा करने वाला एकमात्र सबूत नहीं है। स्वामी का कहना था कि लेटर में कहा गया है कि सौदे के पीछे वही मुख्य ताकत हैं।

कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी करने वाले सुब्रहमण्यम स्वामी ने बोफोर्स के मुद्दे पर राजीव गांधी का साथ दिया था। एक समय में वे राजीव गांधी के करीबी दोस्तों में शामिल थे। स्वामी ने बोफोर्स का मुद्दा उछलने के दौरान सार्वजनिक रूप से कहा था कि राजीव ने इस मामले में एक भी पैसा नहीं लिया है। स्वामी ये दावा करते रहे हैं कि वे राजीव के साथ घंटों समय बीताते थे। इतना ही नहीं वे राजीव गांधी के बारे में काफी कुछ जानते हैं।

आखिर गाजा में कैसे आएगी शांति?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि गाजा में शांति कैसे आएगी! प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत की और गाजा में युद्ध की मौजूदा स्थिति में सुधार और जारी संघर्ष के शीघ्र व शांतिपूर्ण समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने का आह्वान किया।प्रधानमंत्री मोदी ने इसके साथ ही सभी बंधकों की तत्काल रिहाई, युद्धविराम तथा मानवीय सहायता जारी रखने की आवश्यकता के अपने आह्वान को दोहराया। नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री को फोन किया था और इस दौरान भारत के 78वें स्वतंत्रता दिवस की शुभकानाएं दीं। मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में इसकी जानकारी देते हुए कहा, ”हमने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। स्थिति में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। सभी बंधकों की तत्काल रिहाई, युद्धविराम और मानवीय सहायता जारी रखने की आवश्यकता के अपने आह्वान को दोहराया।’ गाजा में इजराइल और हमास के बीच युद्ध में अब तक 40 हजार से अधिक फलस्तीनी मारे गए हैं। बाद में यहां प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, ”उन्होंने (मोदी) बातचीत और कूटनीति के माध्यम से संघर्ष के शीघ्र और शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान किया।’

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी पहले भी नेतन्याहू से हुई अपनी बातचीत के दौरान इस संघर्ष का समाधान बातचीत व कूटनीति के जरिए निकालने पर जोर देते रहे हैं। पीएमओ के अनुसार दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं और भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर भी चर्चा की। इसके अलावा दोनों नेताओं ने संपर्क में रहने पर भी सहमति व्यक्त की। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब गाजा में युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से शांति वार्ता का एक नया दौर बृहस्पतिवार को शुरू हुआ।

अमेरिकी राष्ट्रपति भवन व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रवक्ता जॉन किर्बी के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों ने इजराइल-हमास युद्ध को रोकने और बड़ी संख्या में बंधकों की रिहाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वार्ता का एक नया दौर शुरू किया। गाजा में युद्ध विराम से संभवतः पूरे क्षेत्र में तनाव खत्म होने की उम्मीद है। युद्ध की शुरुआत सात अक्टूबर को तब हुई जब हमास के नेतृत्व वाले आतंकवादियों ने दक्षिणी इजराइल पर हमला किया, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए जिनमें से अधिकतर नागरिक थे और लगभग 250 लोगों को बंधक बनाकर गाजा लाया गया।

बता दे हमास नेता याह्या सिनवार गाजा के नीचे मौजूद सुरंगों में छिपा हुआ है। इजरायली सेना उसकी खोज में जमीन-आसमान एक किए हुए है। इसके बावजूद वह हमास के लड़ाकों और मध्य पूर्व के अन्य हिस्सों में मौजूद अपने नेताओं के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। सिनवार के लिए हमास के नेताओं और लड़ाकों से बातचीत करते रहना जरूरी भी है, ताकि नए नेता के तौर पर उसकी स्वीकार्यता बनी रहे। अरबी मीडिया में सिनवार को लेकर लगातार रिपोर्ट्स प्रकाशित हो रहे हैं, जिनमें बताया गया है कि वह अब इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन पर भरोसा नहीं करता है। उसे डर है कि इससे इजरायली सेना उसकी लोकेशन जान जाएगी और उसे मार डालेगी।

सिनवार को खान यूनिस का कसाई भी कहा जाता है। वह इजरायली जेल में रह चुका है और वहां की सेना के ऑपरेशनल टेक्निक को अच्छे से जानता है। इस कारण याह्वा सिनवार किसी भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के जरिए अपने साथियों से कम्युनिकेशन करने को लेकर सावधान है। हालांकि, वह पहला ऐसा आतंकवादी नेता या कार्टेल लीडर नहीं है, जो खुद को बचाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन जैसे मोबाइल और इंटरनेट से दूर है। 1970 और 1980 के दशक में अमेरिका में भी माफिया लीडर फोन का इस्तेमाल करने को लेकर सावधान थे।

सिनवार के नेतृत्व में हमास को पहले की तुलना में अधिक अंतरराष्ट्रीय समर्थन प्राप्त है। इसे रूस, तुर्की, चीन, ईरान और अन्य देशों से समर्थन प्राप्त है। स्पष्ट रूप से, बिना नेता वाला संगठन ऐसा नहीं कर सकता। इसलिए सिनवार न केवल अपने बाकी के ब्रिगेड कमांडरों के साथ बातचीत करता है, बल्कि किसी तरह विदेश में हमास के साथ भी संवाद करता है। सभी बंधकों की तत्काल रिहाई, युद्धविराम और मानवीय सहायता जारी रखने की आवश्यकता के अपने आह्वान को दोहराया।’ गाजा में इजराइल और हमास के बीच युद्ध में अब तक 40 हजार से अधिक फलस्तीनी मारे गए हैं।अरबी मीडिया के अनुसार, “हमास स्पेशल कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल पर निर्भर करता है जिसका उपयोग वे मुख्य रूप से विदेश में पार्टियों के साथ संवाद करने के लिए करते हैं।”

अब जम्मू कश्मीर में 10 साल बाद होंगे विधानसभा चुनाव!

आने वाले समय में अब जम्मू कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं! लंबी प्रतीक्षा के बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव का ऐलान हो गया। चुनाव आयोग ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव प्रक्रिया 4 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाएगी। शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने जम्मू-कश्मीर चुनाव के बारे में डिटेल जानकारी दी। निर्वाचन आयोग के अनुसार, पहले चरण में 18 सितंबर को वोट डाले जाएंगे। दूसरे चरण की वोटिंग 25 सितंबर को होगी। एक अक्टूबर को तीसरे चरण का मतदान होगा। इसके साथ ही केंद्रशासित प्रदेश में आचार संहिता लागू हो गई। चीफ इलेक्शन कमिश्नर राजीव कुमार ने बताया कि लोकसभा चुनाव 2024 सबसे बड़ी चुनावी प्रक्रिया सफलतापूर्वक शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हुई। चुनाव आयोग ने कई रेकॉर्डस बनाए। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के दौरे में जम्मू कश्मीर में लोगों और राजनीतिक दलों से बात की गई तो उनके उत्साह का पता चला। लोग चुनाव के लिए लालायित हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि कश्मीर में 47 और जम्मू में 43 विधानसभा सीटों के लिए अलग-अलग तीन चरणों में वोट डाले जाएंगे।

राजीव कुमार ने बताया कि लोकसभा चुनाव के दौरान कश्मीर वैली में 51 फीसदी वोटिंग हुई थी। विधानसभा चुनाव की घोषणा के लिए मौसम के ठीक होने का इंतजार किया गया। केंद्र शासित प्रदेश की 90 विधानसभा सीटों में 74 जनरल, एससी 7 और एसटी की 9 सीटें हैं।लंबी कतारों में छिपी हैं बदलते सूरतेहाल यानी जम्हूरियत की कहानी, रोशन उम्मीदें खुद करेंगी गोया अपनी तकदीरें बयानी। जम्हूरियत के जश्न में आपकी शिरकत, दुनिया देखेगी नापाक इरादों के शिकस्त की कहानी।यही नहीं हरियाणा मल्टी स्टोरी इमारतों में पोलिंग बूथ होंगे। चुनाव के लिए सभी में ललक दिखी। सीसीटीवी से पोलिंग बूथ की निगरानी की जाएगी। मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने बताया कि हम जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में चुनाव तारीखों का ऐलान करने जा रहे। ‘ जम्मू-कश्मीर में 87.09 लाख वोटर हैं, जिनमें 3.17 लाख नए वोटर हैं। मतदान के लिए कुल 11838 पोलिंग बूथ बनाए जाएंगे। सीसीटीवी से चुनाव प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी। चुनाव आयुक्त ने बताया कि सभी उम्मीदवारों को बराबर सुरक्षा दी जाएगी।

जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार ने आर्टिकल 370 हटा दिया था। इसके बाद से यहां विधानसभा चुनाव करवाए जाने थे। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को जम्मू कश्मीर में 30 सितंबर तक चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने का आदेश दिया था। परिसीमन के बार प्रदेश में विधानसभा की सीट 83 से बढ़कर 90 हो गई है, जिनमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को आवंटित सीट शामिल नहीं हैं। जम्मू कश्मीर में पिछला विधानसभा चुनाव 2014 में पांच चरणों में हुआ था , तब लद्दाख उसका हिस्सा था। विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले जम्मू-कश्मीर सरकार ने 24 आईपीएस अधिकारियों और 4 जिला प्रमुखों का ट्रांसफर कर दिया है।

बता दे सीईसी राजीव कुमार ने कहा कि हरियाणा में भी असेंबली चुनाव की तारीखों का ऐलान होने जा रहा। चुनाव आयोग ने बताया कि हरियाणा में 90 विधानसभा सीटें हैं। इनमें 73 सामान्य हैं। राज्य में 2 करोड़ से ज्यादा वोटर जिनमें 85 लाख नए वोटर। 20629 पोलिंग स्टेशन हैं। हरियाणा मल्टी स्टोरी इमारतों में पोलिंग बूथ होंगे। चुनाव के लिए सभी में ललक दिखी। सीसीटीवी से पोलिंग बूथ की निगरानी की जाएगी। मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने बताया कि हम जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में चुनाव तारीखों का ऐलान करने जा रहे। इस दौरान उन्होंने एक शायरी भी सुनाई। उन्होंने कहा, ‘लंबी कतारों में छिपी हैं बदलते सूरतेहाल यानी जम्हूरियत की कहानी, रोशन उम्मीदें खुद करेंगी गोया अपनी तकदीरें बयानी। जम्हूरियत के जश्न में आपकी शिरकत, दुनिया देखेगी नापाक इरादों के शिकस्त की कहानी।’

सीईसी राजीव कुमार ने बताया कि जम्मू कश्मीर में 11838 मतदान केंद्र। हर केंद्र पर औसतन 735 वोटर। बता दें कि निर्वाचन आयोग के दौरे में जम्मू कश्मीर में लोगों और राजनीतिक दलों से बात की गई तो उनके उत्साह का पता चला। लोग चुनाव के लिए लालायित हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि कश्मीर में 47 और जम्मू में 43 विधानसभा सीटों के लिए अलग-अलग तीन चरणों में वोट डाले जाएंगे। बता दें कि जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार ने आर्टिकल 370 हटा दिया था। इसके बाद से यहां विधानसभा चुनाव करवाए जाने थे। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को जम्मू कश्मीर में 30 सितंबर तक चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने का आदेश दिया था। महिलाओं और दिव्यांग के लिए विशेष व्यवस्था रहेगी। 360 मॉडल पोलिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। 19 अगस्त को अमरनाथ यात्रा खत्म हो रही, 20 अगस्त को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित हो जाएगी।

कोलकाता रेप केस के लिए उचित निर्णय क्यों नहीं ले पाई ममता बनर्जी?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि कोलकाता रेप केस के लिए उचित निर्णय ममता बनर्जी क्यों नहीं ले पाई! देशभर को झकझोर देने वाले कोलकाता मेडिकल कॉलेज में लेडी डॉक्टर की हत्या और रेप की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो सीबीआई करेगी। कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने बुधवार की सुबह तक केस डायरी के साथ सीसीटीवी फुटेज को सीबीआई के सुपुर्द करने का आदेश दिया है। देश भर में डॉक्टरों के गुस्से का कारण बने इस केस में पीड़ित परिवार के साथ चिकित्सकों की तरफ से निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही थी, लेकिन पीड़ित परिवार से मिलने के बाद भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता पुलिस को रविवार तक केस सॉल्व करने का समय दे दिया था। अब कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद सवाल खड़ा हो रहा है कि पूरे देश को हिला कर रख देने वाली इस घटना की गंभीरता को भांपने में क्या ममता बनर्जी से चूक हो गई? यह सवाल इसलिए भी खड़ा हो रहा है क्यों पूरे देश में ममता बनर्जी इकलौती महिला मुख्यमंत्री हैं। इस मामले को लेकर राज्य में मुख्य विपक्षी दल बीजेपी जहां उनके ऊपर हमलावर थी। पार्टी की तरफ से सीबीआई जांच की मांग की जा रही थी, राज्य सरकार चाहती तो इस मुद्दे को सीबीआई को सुपुर्द करके एक बड़ी मांग पूरी कर सकती है। अगर सरकार दो दिन पहले फैसला ले लेती तो शायद ही इस मामले में हाईकोर्ट को हस्तक्षेप होगा। विपक्ष के अलावा इंडिया गठबंधन के घटक दलों ने भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाने की अपेक्षा की थी, लेकिन ममता बनर्जी सीबीआई जांच की सिफारिश करने में चूक गईं। इससे पहले राज्य में सत्तारूढ़ टीएमसी को संदेशखाली के मुद्दे पर काफी किरकरी का सामना करना पड़ा था। शाहजहां शेख की गिरफ्तारी लंबी गुमशुदगी के बाद तब हुई थी जब हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की सीआईडी और पुलिस को अल्टीमेटम दे दिया था।

सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि तृणमूल कांग्रेस जघन्य हत्याकांड की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने के बारे में समय रहते फैसला क्यों नहीं लिया? पार्टी में ममता बनर्जी के साथ महिला सांसदों की बड़ी संख्या है। अगर पार्टी की तरफ इस मामले पर गंभीर रुख अपनाया गया होता तो शायद सरकार की साख में बढ़ोतरी होती। ममता बनर्जी की तरफ से दी गई डेडलाइन से पहले कोर्ट का आदेश नहीं आता, क्योंकि पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों के संगठनों ने ममता बनर्जी को पत्र लिखकर इस मामलो की जांच स्वतंत्र एजेंसी या फिर मजिस्ट्रेट की अगुवाई में जांच का आग्रह किया था। ममता बनर्जी एक महिला मुख्यमंत्री के तौर इस मामले में एक अलग लकीर खींच सकती थीं। इससे निश्चित तौर पर डॉक्टरों के बीच उनकी एक संदेवनशील मुख्यमंत्री की छवि उभरकर सामने आती क्योंकि कोलकाता में गुरुवार-शुक्रवार की देर रात के बाद आरजी कर हॉस्पिटल एंड मेडिकल कॉलेज में लेडी डॉक्टर की हत्या और रेप की तुलना दिल्ली के निर्भया कांड से हो रही है।

कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा लेडी डॉक्टर की हत्या और रेप के मामले की जांच सीबीआई को देने के बाद अब बीजेपी ने ममता बनर्जी से इस्तीफा देने की मांग की है। विधानसभा में विपक्ष के नेता अधिकारी ने लोगों से बनर्जी के इस्तीफे की मांग करते हुए सड़कों पर उतरने का आह्वान किया। बनर्जी के पास स्वास्थ्य और गृह विभाग का भी प्रभार है। उन्होंने कहा कि बीजेपी विधायक अपनी मांग को लेकर दबाव बनाने के लिए 14 अगस्त को कोलकाता में धरना देंगे। सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी पर हमला बोलने के साथ कहा कि वह चाहते हैं अदालत की निगरानी में सीबीआई हो, क्योंकि मुख्य दोषियों को बचाने के लिए सबूतों को दबाने की कोशिश की जाएगी, जिन्हें अभी सलाखों के पीछे डाला जाना है।

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस तमाम घोटालों और दूसरे मुद्दों को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को राजनीतिक बताती आई है, लेकिन सरकारी हॉस्पिटल एंड मेडिकल कॉलेज में 31 साल की लेडी डॉक्टर की बेरहमी से हत्या और दरिंदगी की घटना पर पार्टी के लिए खुद का बचाव करना कठिन होगा, क्योंकि राज्य में बीजेपी ही नहीं कांग्रेस भी महिला सुरक्षा के मुद्दे पर ममता बनर्जी को घेरती आई है। सुवेंदु अधिकारी के साथ कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी निशाने पर लिया है। राजधानी कोलकाता में जघन्य हत्या और लेडी डॉक्टर से दरिंदगी का मामला में आने वाले दिनों जहां विपक्ष को और हमला बोलने का मौका देगा, तो वहीं महिला होने के बाद ममता बनर्जी के लिए वूमेन सिक्योरिटी पर बोलना कठिन होगा।

कोलकाता रेप केस पर पीएम मोदी ने लिया ममता बनर्जी को आड़े हाथ!

हाल ही में पीएम मोदी ने इशारों ही इशारों में कोलकाता रेप केस पर ममता बनर्जी को आड़े हाथ ले लिया है! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लालकिले के प्राचीर से दिए अपने भाषण में कोलकाता डॉक्टर केस को लेकर संकेतों में बड़ी बात कही है। पीएम ने कहा कि महिलाओं का हम दमखम देख रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ कुछ चिंता की बातें भी आती हैं और आज मैं लाल किले से एक पीड़ा व्यक्त करना चाहता हूं। एक समाज के नाते हमें गंभीरता से सोचना होगा। हमारी माताओं-बहनों और बेटियों के प्रति अत्याचार हो रहे हैं। उसके प्रति देश का आक्रोश है, जनसामान्य का आक्रोश है। इस आक्रोश को मैं महसूस कर रहा हूं। इसे देश को, समाज को, हमारी राज्य सरकारों को गंभीरता से लेना होगा। मोदी ने भले ही पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया, मगर उन्होंने इशारों-इशारों में बड़ी बात कह दी है। वो भी उन ममता के लिए जिन्हें उनके समर्थक सियासी योद्धा मानते हैं! सोशल मीडिया पर आरजी कर हॉस्पिटल में हुए कोलकाता डॉक्टर केस को लेकर #BengalHoror #यह_आज़ादी_झूठी_है #KolkataDeathCase #MamataMustResign और #KolkataPolice जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। बता दें कि महिलाओं के लिए दिल्ली और राजस्थान सबसे असुरक्षित राज्य हैं, लेकिन दहेज के लिए जान लेने वालों में पहले नंबर पर उत्तर प्रदेश और दूसरे नंबर पर बिहार है। दहेज के लिए उत्तर प्रदेश में 2138 और बिहार में 1057 महिलाओं की हत्‍या कर दी गई। डॉक्टर के इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ने वाली आम जनता ममता बनर्जी सरकार से इस्तीफे की मांग कर रही है। वहीं, कोलकाता पुलिस के रुख को लेकर भी प्रदर्शन कर रहे हैं। लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि दीदी अब आपको गुस्सा क्यों नहीं आ रहा है। कहां गया वो आक्रोश? लोग तो यह भी कह रहे हैं कि क्या यह वही दीदी हैं, जिसने अकेले दम पर पश्चिम बंगाल पर 34 साल से काबिज वाम मोर्चे की सरकार का सफाया कर दिया था।

राष्‍ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध दिनोंदिन बढ़ रहे हैं। 2022 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 4,45, 256 मामले दर्ज किए गए, जो 2021 की तुलना में 4 प्रतिशत अधिक हैं। यानी हर एक घंटे में 51 महिलाओं के साथ अपराध हुआ। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में देश में कुल 58,24,946 आपराधिक मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 4,45, 256 मामले महिलाओं के खिलाफ हुए अपराध के हैं, जबकि साल 2021 में 4, 28,278 केस दर्ज किए गए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, देश में रेप के कुल 31,516 मामले दर्ज किए गए, जिनमें सबसे अधिक मामले 5399 राजस्थान के हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 3690 केस, मध्‍यप्रदेश में 3029 , महाराष्ट्र में 2904 और हरियाणा में 1787 दुष्‍कर्म के मामले दर्ज किए गए। वहीं, महिलाओं के लिए दिल्ली और राजस्थान सबसे असुरक्षित राज्य हैं। हालांकि, दहेज के लिए जान लेने वालों में पहले नंबर पर उत्तर प्रदेश और दूसरे नंबर पर बिहार है। दहेज के लिए उत्तर प्रदेश में 2138 और बिहार में 1057 महिलाओं की हत्‍या कर दी गई। वहीं मध्‍यप्रदेश में 518, राजस्थान में 451 और दिल्‍ली में 131 महिलाओं की दहेज के लिए हत्‍या कर दी गई।

भारत में वर्कप्लेस पर महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों में बढ़ोतरी हुई है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, 2018 से 2022 के बीच ऐसे अपराध 402 से बढ़कर 422 हो गए। ये हालात तब हैं, तब वर्कप्लेस पर महिलाओं से यौन अपराध अधिनियम, 2013 कब का पारित हो चुका है। महिलाओं के लिए दिल्ली और राजस्थान सबसे असुरक्षित राज्य हैं, लेकिन दहेज के लिए जान लेने वालों में पहले नंबर पर उत्तर प्रदेश और दूसरे नंबर पर बिहार है। दहेज के लिए उत्तर प्रदेश में 2138 और बिहार में 1057 महिलाओं की हत्‍या कर दी गई। वहीं मध्‍यप्रदेश में 518, राजस्थान में 451 और दिल्‍ली में 131 महिलाओं की दहेज के लिए हत्‍या कर दी गई।

बंगाल के लोगों को इस संवेदनशील घटना पर ममता सरकार का रवैया हैरान कर रहा है। पश्चिम बंगाल की पुलिस पर आरोप है कि उसने इतने वीभत्स कांड में भी टाल-मटोल वाला रवैया अपनाया जिसकी वजह से सीबीआई को जांच का जिम्मा सौंपना पड़ा। उस वक्त कोलकाता पुलिस ने इस मामले में सुसाइड की आशंका जताई थी। सीबीआई जांच की पहली ही रात को अचानक हजारों की भीड़ ने हमला कर दिया। इस पर यह सवाल उठा कि रात को अचानक इतनी भीड़ कहां से आई, क्या यह साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश थी? जब यह मामला गरमाया तो ममता ने कहा कि ये हमला राम और वाम ने बाहरी लोगों से कराया है।